वरदान से कम नहीं यह मशीन, बिना खेत की जुताई कर देगी फसलों की बुवाई

Share Product प्रकाशित - 15 Nov 2025 by Vivek Tailang

वरदान से कम नहीं यह मशीन, बिना खेत की जुताई कर देगी फसलों की बुवाई

जानें, इस मशीन की विशेषता, लाभ और कीमत

जलवायु अनुकूल खेती और नरवाई (पराली) प्रबंधन के क्षेत्र में मध्य प्रदेश एक मॉडल बनकर तेजी से उभर रहा है। करीब डेढ़ वर्ष पहले शुरू किए गए जलवायु-अनुकूल कृषि (Climate-Resilient Agriculture) कार्यक्रम के अब जमीन पर शानदार परिणाम देखने को मिल रहे हैं। जिले में किसान पारंपरिक तरीकों को छोड़कर आधुनिक शून्य जुताई (Zero Tillage) तकनीक अपना रहे हैं, जिससे न केवल पर्यावरण संरक्षण हो रहा है, बल्कि खेती की लागत भी तेजी से घट रही है। छिंदवाड़ा की यह सफल पहल बताती है कि सही मार्गदर्शन और तकनीक के उपयोग से किसान आर्थिक रूप से समृद्ध बन सकते हैं।

बीआईएसए (BISA) वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन बना सफलता की कुंजी

इस तकनीक के विस्तार में कृषि विभाग और अंतरराष्ट्रीय कृषि अनुसंधान केंद्र बोरलॉग इंस्टीट्यूट फॉर साउथ एशिया (BISA), जबलपुर के वैज्ञानिकों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। BISA के तकनीकी सहायक दीपेंद्र सिंह ने किसानों तक शून्य जुताई तकनीक को पहुंचाने में अहम योगदान दिया है। उन्होंने किसानों को न केवल मशीन के संचालन का प्रशिक्षण दिया, बल्कि यह भी समझाया कि यह तकनीक खेत की नमी बनाए रखती है, जुताई की लागत को खत्म करती है, डीजल की खपत कम करती है और पराली को मिट्टी में मिलाकर उसे खाद में बदल देती है। दीपेंद्र सिंह के निर्देशन में ग्राम कामठी में किसान किशोरी पवार के खेत पर सफल प्रदर्शन किया गया। इस प्रदर्शन के बाद ग्रामीणों में जागरूकता बढ़ी और कई किसानों ने इस मशीन को अपनाने का निर्णय लिया। 

क्या है शून्य जुताई का मॉडल 

परासिया विकासखंड के ग्राम जामनिया जेठू के किसान हेमंत यादव ने इस तकनीक से प्रेरित होकर जिले की पहली जीरो टिल मशीन खरीदी। हेमंत यादव ने इसे केवल अपनी खेती तक सीमित नहीं रखा, बल्कि मशीन को किराए पर उपलब्ध कराकर अन्य किसानों को भी आधुनिक तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित किया। इससे न केवल उनकी स्वयं की आय में वृद्धि हुई, बल्कि आसपास के किसानों तक भी यह तकनीक तेजी से फैलने लगी। 

किसानों के लिए वरदान साबित हो रही मशीन

इस मशीन ने विशेष रूप से उन किसानों की बड़ी समस्या हल की है, जो श्रम की कमी का सामना करते हैं। जामनिया जेठू की किसान राजकली ने प्रशिक्षण के दौरान बताया कि उनके पति के निधन के बाद खेती का पूरा भार उन पर आ गया था। श्रमिकों की कमी और भारी मेहनत के चलते समय पर बुवाई कर पाना मुश्किल हो रहा था। राजकली के अनुसार, “मेरे लिए जीरो टिल मशीन किसी वरदान से कम नहीं है। अब बिना जुताई के कम मेहनत में समय पर गेहूं की बुवाई हो जाती है। पराली भी नहीं जलानी पड़ती, जिससे जमीन की उर्वरता और मिट्टी का स्वास्थ्य बेहतर होता है। इससे मेरी उपज बढ़ने की पूरी संभावना है। यह तकनीक ग्रामीण महिला किसानों के लिए आत्मनिर्भरता का नया रास्ता खोल रही है। 

कृषि अभियांत्रिकी विभाग का समर्थन

तकनीक को अधिक किसानों तक पहुंचाने के लिए कृषि अभियांत्रिकी विभाग सक्रिय भूमिका निभा रहा है। विभाग के अधिकारी श्री समीर पटेल ने बताया कि जीरो टिल मशीन खरीदने के इच्छुक किसान 10 नवंबर से MP DAGE (ई-कृषि यंत्र अनुदान पोर्टल) पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए किसान को बैंक से डिमांड ड्राफ्ट (DD) बनवाकर पोर्टल पर अपलोड करना होगा। यह सब्सिडी किसानों को कम कीमत पर मशीन उपलब्ध कराएगी, जिससे यह तकनीक जिले के हर गांव तक पहुंच सके। 

सभी किसान उठा सकते हैं इसका लाभ

उपसंचालक कृषि जितेंद्र कुमार सिंह ने जिले के सभी किसानों से इस मशीन का लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने बताया कि 35 से 40 HP तक के छोटे ट्रैक्टर वाले किसान भी यह मशीन आसानी से चला सकते हैं। इससे पराली प्रबंधन के साथ-साथ समय पर बुवाई भी संभव होगी, जिससे खेती की लागत घटेगी और उत्पादन बढ़ेगा। 

तकनीक से कृषि में बढ़ता विश्वास

छिंदवाड़ा की यह पहल साबित करती है कि आधुनिक तकनीक अपनाने से खेती अधिक लाभदायक और कम मेहनत वाली बन सकती है। जीरो टिल मशीन न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देती है, बल्कि मिट्टी का स्वास्थ्य सुधारकर लंबे समय तक फसल उत्पादन बढ़ाने में सहायता करती है। 

क्या है जीरो टिलेज मशीन

जीरो टिलेज मशीन (Zero Tillage Machine) एक ऐसी आधुनिक कृषि मशीन है, जो बिना खेत की जुताई किए सीधे बीज की बुवाई कर देती है। इसे जीरो टिल ड्रिल या नो-टिल सीड ड्रिल भी कहा जाता है। यह विशेष रूप से उन किसानों के लिए बनाई गई है जो पराली जलाए बिना, कम समय और कम लागत में गेहूं या अन्य फसलों की बुवाई करना चाहते हैं। इस मशीन में लगे विशेष फरो-ओपनर (नालियां बनाने वाले उपकरण) मिट्टी को बहुत कम डिस्टर्ब करते हैं और पाइप के माध्यम से बीज निर्धारित गहराई पर गिर जाते हैं। इसके बाद पीछे लगे कवरिंग ब्लेड मिट्टी को हल्के से ढक देते हैं, जिससे नमी बनी रहती है और अंकुरण तेज व समान होता है। 

जीरो टिलेज मशीन की विशेषता/लाभ

  • खेत को जोतने की जरूरत नहीं होती है। इस मशीन से बिना जुताई के अगली फसल की बुवाई की जा सकती है। 
  • पराली जलाने की आवश्यकता खत्म हो जाती है, क्योंकि पराली का उपयोग खेत की नमी के लिए हो जाता है। 
  • इस मशीन से फसल की बुवाई करने पर समय, डीजल और मेहनत की बड़ी बचत होती है। 
  • इस मशीन से बुवाई करने पर मिट्टी की नमी और उर्वरता सुरक्षित रहती है।
  • यह मशीन विशेष रूप से गेहूं की बुवाई के लिए सबसे अधिक उपयोगी मानी गई है। 

क्या है जीरो टिलेज मशीन की कीमत

जीरो टिलेज मशीन की कीमत आमतौर पर 45,000 से 80,000 रुपए के बीच होती है। मशीन की कीमत कंपनी, मॉडल और यूनिट की साइज पर निर्भर करती है। सरकारी योजनाओं में कई राज्यों में इस मशीन पर 40%–50% सब्सिडी भी मिलती है। मध्यप्रदेश सरकार की ओर से इस मशीन पर किसानों को सब्सिडी दी जा रही है। ऐसे में सब्सिडी पर कृषि मशीन लेने वाले किसानों को कृषि विभाग की सूची में शामिल कंपनी की टिलेज मशीन के लिए आवेदन करके सब्सिडी का लाभ उठा सकते हैं। सब्सिडी से संबंधित अधिक जानकारी के लिए अपने जिले के कृषि विभाग से संपर्क करें।

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