धान की फसल में भूरा माहू का खतरा, पत्तियां पीली पड़ें तो तुरंत करें जांच

Share Product प्रकाशित - 19 Sep 2026 by Vivek Tailang

धान की फसल में भूरा माहू का खतरा, पत्तियां पीली पड़ें तो तुरंत करें जांच

बाली अवस्था में बढ़ रहा भूरा माहू का प्रकोप, कृषि विभाग ने खेत की निगरानी और 2-3 दिन पानी निकालकर रखने की दी सलाह

खरीफ सीजन में धान की फसल अब बाली की अवस्था में पहुंच रही है। इस समय बदलते मौसम, गर्म तापमान और अधिक आर्द्रता के कारण धान की फसल में भूरा माहू यानी ब्राउन प्लांट हॉपर (BPH) के प्रकोप का खतरा बढ़ जाता है। मध्य प्रदेश के कटनी जिले में धान की फसल में भूरा माहू का प्रकोप सामने आने के बाद कृषि विभाग ने किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है। किसानों से खेतों की नियमित निगरानी करने और शुरुआती लक्षण दिखाई देते ही नियंत्रण के उपाय अपनाने को कहा गया है।

भूरा माहू का प्रकोप आमतौर पर खेत के किनारे या मेड़ के आसपास से शुरू हो सकता है। समय पर इसकी पहचान नहीं होने पर प्रभावित पौधों की पत्तियां पहले पीली और बाद में भूरी होकर सूखने लगती हैं। ऐसे में किसान शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज न करें और पौधों के निचले हिस्से की भी जांच करें।

धान में भूरा माहू के ये लक्षण दिखें तो हो जाएं सतर्क

भूरा माहू के शुरुआती लक्षणों की पहचान समय पर करना इसके नियंत्रण के लिए जरूरी है। कृषि विभाग के अनुसार इस कीट के प्रकोप से धान के पौधों की पत्तियां पहले पीली पड़ने लगती हैं। इसके बाद पत्तियां भूरी होकर धीरे-धीरे सूख सकती हैं। कई बार खेत में इसका प्रभाव गोलाकार चकत्तों के रूप में भी दिखाई देता है। यदि खेत में किसी स्थान पर पौधे तेजी से पीले या सूखे दिखाई दे रहे हैं, तो किसान उस हिस्से की विशेष रूप से जांच करें। केवल पौधे की ऊपरी पत्तियों को देखकर निर्णय लेने के बजाय उसके तने के निचले हिस्से को भी ध्यान से देखना जरूरी है।

पौधे के निचले हिस्से में ऐसे पहचानें भूरा माहू

भूरा माहू कीट धान के पौधे के तने के निचले हिस्से में पाया जा सकता है। इसकी पहचान के लिए किसान पौधे के निचले हिस्से और पानी की सतह के आसपास ध्यान से जांच कर सकते हैं। तने को हल्का हिलाने या झटकने पर पानी की सतह पर भूरे या सफेद रंग के छोटे कीट दिखाई दें तो यह भूरा माहू के प्रकोप का संकेत हो सकता है। किसानों को विशेष रूप से खेत के किनारे, मेड़ के आसपास और पहले से पीले दिखाई दे रहे पौधों की जांच करने की सलाह दी गई है।

खेत से पानी निकालकर 2-3 दिन रखें सूखा

भूरा माहू के नियंत्रण में खेत का जल प्रबंधन महत्वपूर्ण माना गया है। कृषि विभाग ने किसानों को खेत में अनावश्यक रूप से पानी जमा नहीं रहने देने की सलाह दी है। प्रकोप की स्थिति में उचित जल निकासी करके खेत को आवश्यकता के अनुसार 2 से 3 दिन तक सूखा रखने का प्रयास करना चाहिए। इसके अलावा खेत की मेड़ों को घास और खरपतवार से मुक्त रखने की सलाह दी गई है। इससे खेत में कीट की निगरानी और नियंत्रण में मदद मिल सकती है।

धान में ज्यादा यूरिया डालने से बचें किसान

भूरा माहू की समस्या के दौरान किसानों को नाइट्रोजनयुक्त उर्वरकों, खासकर यूरिया का अत्यधिक इस्तेमाल नहीं करने की सलाह दी गई है। किसानों को संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाना चाहिए। प्रकोप दिखाई देने पर बिना आवश्यकता अधिक यूरिया का इस्तेमाल करने से बचना जरूरी है।

भूरा माहू के नियंत्रण के लिए इन दवाओं का करें इस्तेमाल

कीट के लक्षण दिखाई देने पर कृषि विभाग ने निम्नलिखित में से किसी एक अनुशंसित कीटनाशक के इस्तेमाल की सलाह दी है।

कीटनाशक मात्रा प्रति हेक्टेयर
पायमेट्रोजिन 50% WG 300 ग्राम
डायनोटेफ्यूरोन 70% WG 85 ग्राम
डायनोटेफ्यूरोन 20% SG 250 ग्राम
डायनोटेफ्यूरोन 15% + पायमेट्रोजिन 45% WG 330 ग्राम
थायोमेथेक्जाम 25% WG 100-120 ग्राम
इमीडाक्लोप्रिड 17.8% SL 200-250 मिलीलीटर
फिप्रोनिल 3% + ब्यूप्रोफेजिन 22% 500 मिलीलीटर
ब्यूप्रोफेजिन 15% + एसीफेट 35% 50 ग्राम

किसान दवा का इस्तेमाल अनुशंसित मात्रा और स्थानीय कृषि विभाग की सलाह के अनुसार करें। एक साथ कई कीटनाशकों को मिलाकर इस्तेमाल करने के बजाय सूची में दी गई अनुशंसित दवाओं में से किसी एक का प्रयोग करना चाहिए।

छिड़काव करते समय इन बातों का रखें ध्यान

कीटनाशक के छिड़काव के लिए 500 लीटर पानी प्रति हेक्टेयर का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है। स्प्रे करते समय इसका रुख पौधे के निचले हिस्से यानी तने की ओर रखें, ताकि दवा वहां तक पहुंच सके जहां भूरा माहू मौजूद हो सकता है। दवा के फैलाव और प्रभाव को बेहतर करने के लिए घोल में सिलिकॉन या चिपको स्प्रेडर मिलाने की भी सलाह दी गई है। छिड़काव करते समय दवा के लेबल पर दिए निर्देशों और सुरक्षा सावधानियों का पालन करना चाहिए।

बाली अवस्था में नियमित निगरानी जरूरी

धान की मौजूदा बाली अवस्था को देखते हुए किसानों को खेत की नियमित निगरानी करनी चाहिए। खास तौर पर खेत के किनारे और मेड़, पौधों के निचले हिस्से और पीली या भूरी पड़ रही पत्तियों वाले स्थानों की जांच करें। यदि खेत में गोलाकार हिस्से में पौधे सूखते दिखाई दें या तने के नीचे भूरे-सफेद छोटे कीट मिलें, तो प्रभावित हिस्से की तत्काल जांच कर अनुशंसित नियंत्रण उपाय अपनाएं। समय पर पहचान, अतिरिक्त पानी की निकासी, संतुलित उर्वरक प्रबंधन और आवश्यकता पड़ने पर अनुशंसित कीटनाशक के सही इस्तेमाल से भूरा माहू के कारण धान की फसल को होने वाले नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है।

“धान की फसल में भूरा माहू कीट” के संबंध में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल और उनके जवाब (FAQ):

प्रश्न 1. धान में भूरा माहू का प्रकोप कैसे पहचानें?
उत्तर:भूरा माहू के प्रकोप में धान की पत्तियां पहले पीली और बाद में भूरी होकर सूखने लगती हैं। खेत में कई बार पौधे गोलाकार चकत्तों में सूखते हुए दिखाई दे सकते हैं। पौधे के निचले हिस्से में छोटे भूरे कीट भी दिखाई दे सकते हैं।

प्रश्न 2. भूरा माहू की जांच कैसे करें?
उत्तर: किसान धान के पौधे के तने के निचले हिस्से की जांच करें। पौधे को हल्का हिलाने या झटकने पर पानी की सतह पर भूरे या सफेद रंग के छोटे कीट दिखाई दें तो भूरा माहू के प्रकोप की आशंका हो सकती है।

प्रश्न 3. भूरा माहू से बचाव के लिए खेत में क्या करें?
उत्तर: प्रकोप की स्थिति में खेत से अतिरिक्त पानी निकालकर आवश्यकता के अनुसार 2 से 3 दिन तक खेत को सूखा रखने की सलाह दी गई है। साथ ही खेत की मेड़ों को घास और खरपतवार से मुक्त रखने तथा नियमित निगरानी करने को कहा गया है।

प्रश्न 4. भूरा माहू के नियंत्रण के लिए कौनसी दवा का इस्तेमाल करें?
उत्तर: कृषि विभाग ने पायमेट्रोजिन 50% WG, डायनोटेफ्यूरोन, थायोमेथेक्जाम 25% WG, इमीडाक्लोप्रिड 17.8% SL सहित कुछ अनुशंसित कीटनाशकों के इस्तेमाल की सलाह दी है। दवा का इस्तेमाल अनुशंसित मात्रा और स्थानीय कृषि विभाग की सलाह के अनुसार करना चाहिए।

प्रश्न 5. क्या भूरा माहू के प्रकोप में धान में ज्यादा यूरिया डालना चाहिए?
उत्तर: नहीं। भूरा माहू की समस्या के दौरान नाइट्रोजनयुक्त उर्वरकों, खासकर यूरिया का अत्यधिक इस्तेमाल नहीं करने की सलाह दी गई है। किसानों को संतुलित उर्वरक प्रबंधन अपनाना चाहिए।

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