ग्लोबल तनाव का असर मंडियों पर: बासमती में दबाव, मूंगफली-तेल सुस्त, दिल्ली बाजार में नरमी
प्रकाशित - 21 Apr 2026
by Vivek Tailang
मिडिल ईस्ट संकट से निर्यात प्रभावित, घरेलू बाजारों में गिरावट का दबाव; किसानों और व्यापारियों की चिंता बढ़ी
देश और दुनिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर अब सीधे तौर पर कृषि कमोडिटी बाजारों पर दिखने लगा है। खासकर बासमती चावल, मूंगफली और खाद्य तेल जैसी प्रमुख फसलों में दबाव देखने को मिल रहा है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष और समुद्री मार्गों में बाधा के कारण निर्यात प्रभावित हो रहा है, जिसका असर घरेलू मंडियों में भी दिखाई दे रहा है।
बासमती बाजार पर ग्लोबल संकट की मार
बासमती चावल के बाजार में इस समय सबसे ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा बासमती निर्यातक है और इसकी बड़ी मात्रा मिडिल ईस्ट देशों में जाती है। लेकिन हालिया तनाव के चलते समुद्री रास्तों में बाधा आई है, जिससे हजारों टन बासमती चावल बंदरगाहों पर फंसा हुआ है और नए सौदे रुक गए हैं। स्थिति यह है कि बढ़ते फ्रेट चार्ज और बीमा लागत के कारण निर्यात महंगा हो गया है।
कई आयातक देश फिलहाल नए ऑर्डर देने से बच रहे हैं और पुराने स्टॉक पर निर्भर हैं। इसके चलते घरेलू बाजार में मांग कमजोर पड़ी है, जिससे कीमतों पर दबाव बना हुआ है। कुछ जगहों पर बासमती के भाव में 400–500 रुपए प्रति क्विंटल तक गिरावट की भी आशंका जताई जा रही है।
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मूंगफली और तेल बाजार में भी दबाव
मूंगफली और खाद्य तेल बाजार भी इस समय कमजोर रुख में दिखाई दे रहे हैं। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल (क्रूड ऑयल) की कीमतों में अस्थिरता और सप्लाई चेन में बाधा का असर खाद्य तेलों पर पड़ रहा है। मिडिल ईस्ट में जारी संकट के कारण तेल आपूर्ति पर दबाव बना है, जिससे बाजार में अनिश्चितता बढ़ गई है। हालांकि आमतौर पर कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से खाद्य तेल महंगे होते हैं, लेकिन इस समय मांग कमजोर होने और स्टॉक पर्याप्त होने के कारण कीमतों में तेजी नहीं आ रही। मूंगफली के बाजार में भी खरीदारी सुस्त है, जिससे किसानों को बेहतर भाव मिलने में दिक्कत हो रही है।
दिल्ली लॉरेंस रोड मंडी में नरमी
दिल्ली की प्रमुख लॉरेंस रोड मंडी में भी बाजार का रुख फिलहाल कमजोर बना हुआ है। यहां गेहूं, चावल और अन्य कृषि जिंसों में सीमित मांग के चलते भाव स्थिर से नरम बने हुए हैं। व्यापारियों के अनुसार निर्यात में कमी और घरेलू खरीदारी में सुस्ती इसका मुख्य कारण है। मंडी में आवक सामान्य बनी हुई है, लेकिन खरीदारों की सक्रियता कम होने के कारण कीमतों में तेजी नहीं दिख रही। ऐसे में व्यापारियों और किसानों दोनों को बाजार में स्पष्ट दिशा का इंतजार है।
ग्लोबल ट्रेंड: क्यों बढ़ रहा है दबाव
विशेषज्ञों के अनुसार मौजूदा हालात पूरी तरह ग्लोबल फैक्टर से प्रभावित हैं। मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे अहम समुद्री मार्ग प्रभावित हुए हैं, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन बाधित हुई है। इसका असर न केवल चावल बल्कि उर्वरक, तेल और अन्य कृषि उत्पादों पर भी पड़ रहा है। इसके अलावा बढ़ती परिवहन लागत और बीमा शुल्क ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार को महंगा बना दिया है। ऐसे में आयातक देश फिलहाल खरीदारी टाल रहे हैं, जिससे निर्यात आधारित कमोडिटी पर दबाव बढ़ गया है।
प्रमुख मंडियों में जिंसों के भाव
| जिंस | मंडी/स्थान | न्यूनतम भाव (₹/क्विंटल) | अधिकतम भाव (₹/क्विंटल) | रुझान |
|---|---|---|---|---|
| बासमती 1121 | हरियाणा/पंजाब मंडी | 4,800 | 5,300 | हल्की गिरावट |
| बासमती 1509 | उत्तर भारत मंडी | 3,800 | 4,200 | दबाव |
| सेला राइस | निर्यात बाजार | 6,500 | 7,200 | सुस्त |
| मूंगफली | गुजरात/राजस्थान | 5,200 | 6,000 | कमजोर |
| सरसों | राजस्थान | 5,400 | 5,900 | स्थिर से नरम |
| सरसों तेल | दिल्ली | 1,150 (₹/10 किलो) | 1,250 | दबाव |
| सोया तेल | इंदौर/मुंबई | 950 (₹/10 किलो) | 1,050 | सुस्त |
| गेहूं | दिल्ली लॉरेंस रोड | 2,450 | 2,650 | स्थिर |
बाजार संकेत
- बासमती: निर्यात रुकने से दबाव जारी है।
- मूंगफली: मांग कमजोर, भाव में नरमी बनी हुई है।
- खाद्य तेल: ग्लोबल अनिश्चितता, लेकिन घरेलू मांग सुस्त है।
- दिल्ली मंडी: सीमित खरीदी, भाव स्थिर से नरम बना हुआ है।
आगे क्या रहेगा बाजार का रुख
आने वाले समय में बाजार की दिशा काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय हालात पर निर्भर करेगी। यदि मिडिल ईस्ट में तनाव कम होता है और समुद्री मार्ग सामान्य होते हैं, तो बासमती समेत अन्य कमोडिटी में तेजी लौट सकती है। वहीं यदि संकट लंबा खिंचता है, तो निर्यात में और गिरावट आ सकती है, जिससे घरेलू बाजार में कीमतों पर दबाव बना रहेगा। कुल मिलाकर इस समय कमोडिटी बाजार “वेट एंड वॉच” मोड में है, जहां किसान और व्यापारी दोनों ही वैश्विक संकेतों पर नजर बनाए हुए हैं।
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