बासमती धान के भाव में क्या आएगा बदलाव? नई फसल से पहले निर्यात और ग्लोबल ट्रेड का असर
प्रकाशित - 18 Sep 2026 by Vivek Tailang
जानें, बासमती धान की प्रमुख किस्मों के मौजूदा भाव, भारत के बासमती निर्यात और ग्लोबल मार्केट में बढ़ती मांग का बाजार पर क्या असर पड़ सकता है
बासमती धान और चावल का बाजार इस समय नई फसल की आवक से पहले महत्वपूर्ण दौर से गुजर रहा है। एक ओर पुरानी फसल के स्टॉक की उपलब्धता और मंडियों में चल रहे भाव बाजार की दिशा तय कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर ग्लोबल ट्रेड में भारतीय बासमती की मांग कीमतों को प्रभावित कर रही है। उपलब्ध बाजार रिपोर्ट के अनुसार, 1121, 1718 और 1509 जैसी प्रमुख बासमती धान की किस्मों के भाव में फिलहाल मजबूती बनी हुई है।
मंडी बाजार के आंकड़ों के अनुसार, 1121 धान का भाव करीब 5,600 रुपए प्रति क्विंटल, 1718 धान का भाव करीब 4,800 से 5,600 रुपए प्रति क्विंटल और 1509 धान का भाव 4,200 रुपए प्रति क्विंटल से ऊपर बताया गया है। हालांकि, मंडी, क्वालिटी और नमी के अनुसार वास्तविक भाव में अंतर हो सकता है।
भारत से बासमती का रिकॉर्ड निर्यात, 65.21 लाख टन का आंकड़ा
भारत बासमती चावल के वैश्विक कारोबार में प्रमुख स्थान रखता है। एपीडा (APEDA) के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने 65.21 लाख मीट्रिक टन बासमती चावल का निर्यात किया, जिसकी कीमत करीब 50,138 करोड़ रुपए यानी 5.67 अरब डॉलर रही। भारत के बासमती निर्यात में पश्चिम एशिया के देशों की बड़ी हिस्सेदारी है। 2025-26 में सऊदी अरब 16.6 प्रतिशत, ईरान 13.9 प्रतिशत, इराक 11.2 प्रतिशत, संयुक्त अरब अमीरात 8.2 प्रतिशत और यमन 5.7 प्रतिशत हिस्सेदारी के साथ प्रमुख बाजार रहे। अमेरिका की हिस्सेदारी भी 5 प्रतिशत रही। इससे साफ है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में बासमती की मांग का असर भारतीय धान और चावल बाजार पर सीधे पड़ता है।
Popular Tractors
ग्लोबल ट्रेड में पश्चिम एशिया की स्थिति बनी महत्वपूर्ण
इस समय बासमती कारोबार के लिए पश्चिम एशिया का बाजार सबसे महत्वपूर्ण पहलुओं में से एक है। ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण भारतीय निर्यातकों को भुगतान, बीमा और माल ढुलाई से जुड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद रिपोर्टों के अनुसार ईरान में भारतीय बासमती की मांग बनी हुई है। अगस्त 2026 में रिपोर्टों में यह भी सामने आया कि ईरान के लिए भारतीय निर्यात में नए भुगतान और लॉजिस्टिक्स रास्तों की जरूरत बढ़ रही है। इससे कारोबार की लागत बढ़ सकती है, लेकिन मांग पूरी तरह खत्म होने के संकेत नहीं हैं। वहीं, वैश्विक बाजार में भारत को पाकिस्तान से भी प्रतिस्पर्धा मिलती है। हालिया अंतरराष्ट्रीय व्यापार आंकड़ों में पाकिस्तान और भारत दोनों बासमती के प्रमुख निर्यातक दिखाई देते हैं।
नई फसल से पहले बासमती धान के भाव पर क्या असर?
बासमती धान की नई फसल की आवक अक्टूबर-नवंबर के आसपास बढ़ने की उम्मीद रहती है। ऐसे में मंडियों में आवक बढ़ने पर शुरुआती दौर में भाव पर दबाव बन सकता है। लेकिन इस बार बाजार की दिशा केवल घरेलू आवक से तय नहीं होगी। अगर निर्यातकों की ओर से खरीद बनी रहती है और विदेशों से मांग मजबूत रहती है, तो नई फसल की बढ़ती आवक के बावजूद अच्छी क्वालिटी के धान को समर्थन मिल सकता है। खासकर 1121 और 1718 जैसी प्रीमियम किस्मों में क्वालिटी, दाने की लंबाई, नमी और निर्यात मांग महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। दूसरी ओर, अगर पश्चिम एशिया में शिपिंग, भुगतान या माल ढुलाई से जुड़ी परेशानी बढ़ती है, तो निर्यात कारोबार की रफ्तार प्रभावित हो सकती है। इसका असर मंडी में धान की खरीद और भाव पर भी देखने को मिल सकता है।
बासमती चावल की वैश्विक कीमतों में भी आया बदलाव
एपीडा के फरवरी 2026 के डैशबोर्ड के अनुसार, भारत के पूसा बासमती चावल का निर्यात भाव 1,150 डॉलर प्रति टन पहुंच गया था, जो फरवरी 2025 के 884 डॉलर प्रति टन से करीब 30 प्रतिशत अधिक था। हालांकि, इसके बाद वैश्विक बाजार में कीमतों में कुछ सुधार भी दर्ज किया गया। अब सितंबर 2026 में वैश्विक खाद्य मांग और भू-राजनीतिक परिस्थितियां एक बार फिर बासमती के कारोबार को प्रभावित कर रही हैं। हालिया रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत में बासमती के भाव पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 15-20 प्रतिशत तक बढ़े हैं। रिपोर्ट में इस तेजी के पीछे विदेशी मांग और कुछ क्षेत्रों में कम बारिश को प्रमुख कारण बताया गया है।
किसानों के लिए क्या संकेत
बासमती धान की नई फसल आने से पहले मौजूदा बाजार में निर्यात मांग, पुराना स्टॉक और नई फसल की आवक तीनों प्रमुख कारक रहेंगे। अच्छी क्वालिटी के 1121, 1718 और 1509 धान में निर्यात कारोबार की स्थिति महत्वपूर्ण रहेगी। फिलहाल तस्वीर यह है कि भारत का बासमती निर्यात बाजार मजबूत आधार पर खड़ा है, लेकिन पश्चिम एशिया में व्यापार और परिवहन से जुड़ी परिस्थितियां जोखिम भी पैदा कर रही हैं। ऐसे में नई फसल की आवक के दौरान मंडी भाव पर घरेलू सप्लाई के साथ-साथ सऊदी अरब, ईरान, इराक और यूएई जैसे प्रमुख विदेशी बाजारों की मांग का भी असर देखने को मिल सकता है।
नोट: ऊपर खबर में दिए गए मंडी भाव संकेतात्मक हैं। वास्तविक भाव संबंधित मंडी में आवक, नमी, क्वालिटी और स्थानीय मांग के अनुसार अलग हो सकते हैं।
“बासमती धान के भाव में क्या आएगा बदलाव” के संबंध में पूछे जाने वाले सवाल और उनके जवाब (FAQ):
प्रश्न 1. बासमती धान की प्रमुख किस्मों के भाव क्या चल रहे हैं?
उत्तर: बाजार रिपोर्ट के अनुसार 1121 धान करीब 5,600 रुपए प्रति क्विंटल, 1718 धान करीब 4,800 से 5,600 रुपए और 1509 धान 4,200 रुपए प्रति क्विंटल से ऊपर बताया जा रहा है। वास्तविक भाव मंडी, क्वालिटी और नमी के अनुसार अलग हो सकते हैं।
प्रश्न 2. भारत ने 2025-26 में कितना बासमती चावल निर्यात किया?
उत्तर: एपीडा (APEDA) के अनुसार भारत ने 2025-26 में 65.21 लाख मीट्रिक टन बासमती चावल का निर्यात किया, जिसकी कीमत करीब ₹50,138.28 करोड़ रही।
प्रश्न 3. भारत के बासमती चावल के प्रमुख निर्यात बाजार कौनसे हैं?
उत्तर: 2025-26 में सऊदी अरब, ईरान, इराक, संयुक्त अरब अमीरात, यमन और अमेरिका भारत के प्रमुख बासमती निर्यात बाजार रहे।
प्रश्न 4. नई फसल आने पर बासमती धान के भाव पर क्या असर पड़ सकता है?
उत्तर: नई फसल की आवक बढ़ने से शुरुआती समय में मंडी भाव पर दबाव बन सकता है। हालांकि, निर्यातकों की खरीद और विदेशी मांग मजबूत रहने पर अच्छी क्वालिटी के धान को बाजार में समर्थन मिल सकता है।
प्रश्न 5. ग्लोबल ट्रेड बासमती धान के भाव को कैसे प्रभावित करता है?
उत्तर: भारत के बासमती चावल की बड़ी मात्रा निर्यात होती है, इसलिए विदेशी मांग, निर्यात ऑर्डर, भुगतान व्यवस्था, माल ढुलाई और पश्चिम एशिया के बाजारों की स्थिति घरेलू धान की खरीद और भाव को प्रभावित कर सकती है। एपीडा (APEDA) के आंकड़ों में भी पश्चिम एशिया के देशों की बासमती आयात में बड़ी हिस्सेदारी दिखाई देती है।
ट्रैक्टर जंक्शन हमेशा आपको अपडेट रखता है। इसके लिए ट्रैक्टरों के नये मॉडलों और उनके कृषि उपयोग के बारे में एग्रीकल्चर खबरें प्रकाशित की जाती हैं। प्रमुख ट्रैक्टर कंपनियों महिंद्रा ट्रैक्टर, सोनालिका ट्रैक्टर आदि की मासिक सेल्स रिपोर्ट भी हम प्रकाशित करते हैं जिसमें ट्रैक्टरों की थोक व खुदरा बिक्री की विस्तृत जानकारी दी जाती है। अगर आप मासिक सदस्यता प्राप्त करना चाहते हैं तो हमसे संपर्क करें।
अगर आप नए ट्रैक्टर, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण बेचने या खरीदने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार और विक्रेता आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु को ट्रैक्टर जंक्शन के साथ शेयर करें।
सर्टिफाइड पुराने ट्रैक्टर्स
ट्रैक्टर की प्राइस चेक करें