स्वदेशी गौवंश के लिए हाई-टेक पहल: यूपी में इंटीग्रेटेड जीनोमिक्स सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की शुरुआत
प्रकाशित - 04 Mar 2026 by Vivek Tailang
आनुवंशिकी सुधार पर जोर, पशुपालकों की आय बढ़ाने की दिशा में बड़ा कदम
उत्तर प्रदेश में पशुधन और डेयरी सेक्टर को नई दिशा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। बरेली स्थित बी.एल. कामधेनु परिसर में स्वदेशी गौवंश की आनुवंशिकी और जीनोमिक्स के लिए इंटीग्रेटेड सेंटर ऑफ एक्सीलेंस का विधिवत उद्घाटन किया गया। बरेली में स्थापित यह केंद्र प्रदेश के पशुधन विकास को वैज्ञानिक आधार देने की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है।
25 एकड़ क्षेत्र में फैला हुआ है यह सेंटर
करीब 25 एकड़ क्षेत्र में विकसित इस एकीकृत परिसर का उद्देश्य स्वदेशी नस्लों का संरक्षण, संवर्धन और वैज्ञानिक उन्नयन है। यहां अत्याधुनिक इन विट्रो फर्टिलाइजेशन–एम्ब्रियो ट्रांसफर (आईवीएफ–ईटी) प्रयोगशाला स्थापित की गई है, जो उच्च गुणवत्ता वाली नस्लों के नियंत्रित और तेज संवर्धन में मदद करेगी। इसके साथ ही आधुनिक पैथोलॉजी लैब पशुओं में रोगों की त्वरित और सटीक पहचान सुनिश्चित करेगी, जिससे जैव-सुरक्षा मजबूत होगी और उत्पादकता बढ़ेगी।
नस्ल सुधार कार्यक्रमों को डेट आधारित और वैज्ञानिक बनाया जाएगा
जीनोमिक विश्लेषण सुविधाएं नस्ल सुधार कार्यक्रमों को डेटा-आधारित और वैज्ञानिक बनाएंगी। श्रेष्ठ पशुओं की पहचान कर योजनाबद्ध प्रजनन प्रणाली को बढ़ावा दिया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि आईवीएफ–ईटी, जीनोमिक्स और पैथोलॉजी जैसी सभी आधुनिक व्यवस्थाओं का एक ही परिसर में होना पशुधन विकास के लिए समग्र और दीर्घकालिक समाधान प्रस्तुत करता है।
प्रयोगशालाओं और अनुसंधान अवसंरचना का निरीक्षण
कार्यक्रम के दौरान ब्राजीलियन एसोसिएशन ऑफ जेबू ब्रीड्स के अध्यक्ष सहित प्रतिनिधिमंडल ने प्रयोगशालाओं और अनुसंधान अवसंरचना का निरीक्षण किया। भारत और ब्राजील के बीच पशु आनुवंशिकी और डेयरी विकास के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर सकारात्मक चर्चा भी हुई। इसे दोनों देशों के बीच बढ़ते वैज्ञानिक साझेदारी के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है। केंद्र का उद्घाटन प्रदेश सरकार में मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अरुण कुमार सक्सेना द्वारा किया गया। इस अवसर पर राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, वैज्ञानिक, कृषि विशेषज्ञ, पशुपालक तथा ब्राजील से आए उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल की मौजूदगी रही।
पंजाब में दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा डेयरी फीड संयंत्र शुरू
इसी क्रम में डेयरी सेक्टर को मजबूती देने के लिए एक और बड़ी पहल सामने आई है। कारगिल (Cargill) एनिमल न्यूट्रिशन एंड हेल्थ ने पंजाब में दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा डेयरी फीड संयंत्र शुरू किया है। कंपनी ने पंजाब के वजीराबाद में लगभग 300 करोड़ रुपये के निवेश से अत्याधुनिक डेयरी फीड विनिर्माण प्लांट स्थापित किया है। करीब 15 एकड़ में फैले इस संयंत्र की वार्षिक उत्पादन क्षमता 4 लाख मीट्रिक टन है। यह दक्षिण एशिया में कंपनी का सबसे बड़ा डेयरी फीड प्लांट बन गया है। पंजाब में यह कंपनी की दूसरी इकाई है; इससे पहले बठिंडा में इसका संयंत्र संचालित हो रहा है। इस परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 1,000 से अधिक रोजगार सृजित होने की उम्मीद है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
डेयरी फीड उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
नई इकाई देश को डेयरी फीड उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। संयंत्र आधुनिक तकनीक और उच्च स्तर के ऑटोमेशन से लैस है, जिससे किसानों को संतुलित और वैज्ञानिक पशु पोषण समाधान बड़े पैमाने पर उपलब्ध कराए जा सकेंगे। यहां निर्मित उत्पाद कंपनी के वैश्विक ब्रांड प्रोविमी (Provimi) और प्यूरिना (Purina) के अंतर्गत बाजार में उपलब्ध होंगे। ये उत्पाद डेयरी किसानों, दुग्ध उत्पादकों और फीड मिलों सहित विभिन्न ग्राहक वर्गों की जरूरतों को पूरा करेंगे। युवा पशुओं और दुग्ध देने वाली गायों के लिए विशेष रूप से विकसित फीड भी इसी संयंत्र में तैयार किया जाएगा।
पशुधन क्षेत्र को मिलेगी नई ऊंचाइयां
विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश में जीनोमिक्स आधारित नस्ल सुधार और पंजाब में बड़े पैमाने पर आधुनिक डेयरी फीड उत्पादन जैसी पहलें मिलकर देश के पशुधन क्षेत्र को नई ऊंचाई देंगी। इससे न केवल उत्पादकता बढ़ेगी बल्कि पशुपालकों की आय में भी स्थायी बढ़ोतरी होगी।
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