किसानों के लिए 7 बड़ी खबरें: कहीं खाद वितरण बदला, कहीं कर्जमाफी और एमएसपी खरीद से राहत, बासमती के भाव भी चढ़े
प्रकाशित - 30 Aug 2026 by Vivek Tailang
राजस्थान में फार्मर आईडी से खाद वितरण की नई व्यवस्था, मध्यप्रदेश में 5.33 लाख टन मूंग की एमएसपी पर खरीद सहित कई जरुरी खबर
देशभर में इस सप्ताह किसानों से जुड़ी कई महत्वपूर्ण खबरें सामने आईं। कहीं सरकार ने खाद वितरण व्यवस्था को डिजिटल किया तो कहीं किसानों को कर्जमाफी और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीद का लाभ मिला। हरियाणा में बासमती धान के भाव में तेजी ने किसानों की उम्मीद बढ़ाई है, जबकि उत्तर प्रदेश में कृषि और बागवानी उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने की दिशा में निर्यातकों और एफपीओ के बीच समझौता हुआ है। वहीं बिहार में नेपाल में आई बाढ़ के बाद गंडक क्षेत्र के किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। मध्य प्रदेश में किसानों की डिजिटल पहचान बनाने का अभियान भी तेज किया गया है।
राजस्थान में अब फार्मर आईडी से मिलेगा सब्सिडी वाला खाद
राजस्थान में किसानों के लिए उर्वरक वितरण व्यवस्था को डिजिटल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। 27 अगस्त से प्रदेश के 11 और जिलों में डीबीटी पीओएस एप्लीकेशन वर्जन 3.77 (DBT POS Application Version 3.77) लागू किया गया है। अब इन जिलों में सब्सिडी वाले उर्वरक की बिक्री फार्मर आईडी (Farmer ID) के माध्यम से दर्ज की जाएगी। इस चरण में बारां, दौसा, हनुमानगढ़, डूंगरपुर, जालोर, झालावाड़, करौली, कोटा, प्रतापगढ़, सवाई माधोपुर और टोंक शामिल हैं। कृषि विभाग के अनुसार राजस्थान में अब तक 88.85 लाख किसानों की फार्मर आईडी (Farmer ID) बनाई जा चुकी है। नई व्यवस्था से खाद की बिक्री का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होगा और कालाबाजारी, जमाखोरी तथा निर्धारित कीमत से अधिक वसूली पर निगरानी आसान होगी। किसानों को एक बैग यूरिया करीब ₹267 की निर्धारित दर पर मिलता है, जबकि सरकार इस पर करीब ₹1,600 की सब्सिडी वहन करती है।
MP में 5.33 लाख टन मूंग की MSP पर सरकारी खरीद पूरी
मध्य प्रदेश के मूंग उत्पादक किसानों के लिए भी इस सप्ताह बड़ी खबर सामने आई। ग्रीष्मकालीन 2026 में राज्य में कुल 5.33 लाख मीट्रिक टन मूंग की MSP पर सरकारी खरीद पूरी हुई है। केंद्र सरकार ने राज्य के अनुरोध पर पहले स्वीकृत 4,54,580 मीट्रिक टन की सीमा में 84,492 मीट्रिक टन की अतिरिक्त मंजूरी दी थी, जिससे कुल स्वीकृत मात्रा 5,39,072 मीट्रिक टन हो गई। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने समीक्षा बैठक में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, मौसम आधारित फसल बीमा योजना और विंड्स (WINDS) व्यवस्था की भी समीक्षा की। सरकार ने फसल बीमा व्यवस्था में तकनीक के साथ फसल कटाई प्रयोगों को शामिल कर बेहतर आकलन करने पर जोर दिया है।
MP में फार्मर आईडी बनेगी किसानों की डिजिटल पहचान
मध्य प्रदेश में किसानों की फार्मर आईडी (Farmer ID) बनाने का अभियान जारी है। इस डिजिटल पहचान में किसान की जमीन, बोई गई फसल, पशुधन और सरकार से मिले विभिन्न लाभों की जानकारी एक जगह जोड़ी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने किसानों से फार्मर आईडी बनवाने की अपील की है। सरकार के मुताबिक भविष्य में AI, डेटा एनालिटिक्स और रिमोट सेंसिंग जैसी तकनीकों के इस्तेमाल से किसानों को जरूरत के मुताबिक कृषि सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। फार्मर आईडी से किसानों की जानकारी डिजिटल रूप से एक जगह उपलब्ध होने से योजनाओं का लाभ पहुंचाने की प्रक्रिया आसान हो सकती है।
महाराष्ट्र में 51,330 किसानों का ₹381.94 करोड़ कर्ज माफ
महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले में किसान कर्जमाफी योजना के दूसरे चरण के तहत 51,330 किसानों के 381.94 करोड़ रुपये के कृषि कर्ज माफ किए जाएंगे। सरकार ने कर्जमाफी की राशि संबंधित बैंकों को भेज दी है और बैंक किसानों के लोन खातों में कर्जमाफी दर्ज करने की प्रक्रिया कर रहे हैं। इससे पात्र किसानों पर पुराने कृषि कर्ज का बोझ कम होगा और कर्जमाफी दर्ज होने के बाद उनके लिए नया कृषि ऋण लेने का रास्ता भी खुल सकता है। नांदेड़ में 27 अगस्त तक 73,666 किसानों का आधार प्रमाणीकरण पूरा हो चुका था, जबकि 23,106 किसानों का प्रमाणीकरण अभी बाकी था।
हरियाणा में बासमती के भाव ₹4,200 क्विंटल तक पहुंचे
हरियाणा के बासमती धान किसानों के लिए बाजार से अच्छी खबर आई है। मुख्य कटाई सीजन से पहले ही पूसा 1509 और पूसा 1692 जैसी किस्मों के भाव कुछ मंडियों में ₹4,000 से ₹4,200 प्रति क्विंटल तक पहुंच गए हैं। पिछले वर्षों की समान अवधि की तुलना में शुरुआती भाव करीब ₹1,000 प्रति क्विंटल तक ज्यादा बताए जा रहे हैं। बासमती की प्रीमियम किस्मों को लेकर भी किसानों को बेहतर भाव की उम्मीद है। हालांकि, कारोबारियों का मानना है कि कटाई के दौरान मंडियों में आवक बढ़ने पर कीमतों में कुछ नरमी आ सकती है। बासमती निर्यात में मजबूती और कुछ क्षेत्रों में कम उत्पादन की आशंका को मौजूदा तेजी की प्रमुख वजहों में माना जा रहा है।
यूपी के किसानों की उपज पहुंचेगी वैश्विक बाजारों तक
उत्तर प्रदेश में किसानों की कृषि और बागवानी उपज को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने के लिए राज्य औद्यानिकी निर्यात प्रोत्साहन बोर्ड की दूसरी बैठक और कार्यशाला आयोजित की गई। इस दौरान निर्यातकों और एफपीओ के बीच एमओयू हुआ तथा बोर्ड की वेबसाइट भी शुरू की गई। सरकार के अनुसार अब प्रदेश के सभी 75 जिलों में निर्यातक सक्रिय हैं और करीब 3,000 निर्यातक विकसित हो चुके हैं। किसान ऑनलाइन यह जानकारी प्राप्त कर सकेंगे कि उनके जिले की अतिरिक्त उपज किन देशों के बाजारों में भेजी जा सकती है और वहां किन गुणवत्ता मानकों की जरूरत होगी। वर्ष 2025-26 में उत्तर प्रदेश से कृषि एवं बागवानी आधारित प्रसंस्कृत उत्पादों का निर्यात बढ़कर ₹1,132 करोड़ हो गया।
नेपाल की बाढ़ के बाद बिहार में किसानों को अलर्ट
नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद बिहार के नेपाल सीमावर्ती जिलों और गंडक नदी के प्रवाह क्षेत्र में सतर्कता बढ़ाई गई है। कृषि विभाग को संवेदनशील इलाकों की निगरानी करने और किसानों को संभावित जलभराव व बाढ़ से बचाव के लिए समय रहते जानकारी देने के निर्देश दिए गए हैं। कृषि अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने, फसल क्षति का त्वरित आकलन करने तथा जिला प्रशासन, आपदा प्रबंधन और जल संसाधन विभाग के साथ समन्वय बनाए रखने को कहा गया है। कृषि यंत्र, बीज और उर्वरकों को भी सुरक्षित रखने की सलाह दी गई है।
किसानों के लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं इस सप्ताह की ये खबरें
इस सप्ताह की कृषि खबरों से साफ है कि खेती तेजी से डिजिटल व्यवस्था, सरकारी खरीद, किसान ऋण राहत और बेहतर बाजार कनेक्टिविटी की ओर बढ़ रही है। राजस्थान और मध्य प्रदेश में फार्मर आईडी (Farmer ID) आधारित व्यवस्था किसानों की सेवाओं को डिजिटल बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। वहीं मूंग की MSP खरीद और महाराष्ट्र की कर्जमाफी सीधे किसानों को आर्थिक राहत देने वाली खबरें हैं। दूसरी ओर, हरियाणा में बासमती के मजबूत शुरुआती भाव किसानों के लिए बाजार की सकारात्मक तस्वीर पेश कर रहे हैं, जबकि उत्तर प्रदेश का निर्यात मॉडल किसानों को स्थानीय मंडियों से आगे अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ने की कोशिश कर रहा है। बिहार में बाढ़ का खतरा यह भी याद दिलाता है कि मौसम और प्राकृतिक आपदा के बीच किसानों के लिए समय पर कृषि सलाह और फसल सुरक्षा व्यवस्था कितनी जरूरी है।
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