गन्ना किसानों के लिए खुशखबरी: पेराई सत्र की तारीख तय, मिलेगा गन्ने का लाभकारी मूल्य
प्रकाशित - 18 Sep 2025 by Tractor Junction
इथेनॉल और चीनी उत्पादन के लिए होगी गन्ने की खरीदी, सरकार अतिरिक्त चीनी का स्टॉक बनाएगी
गन्ना किसानों के लिए एक खुशखबरी सामने आई है। यूपी में गन्ना पेराई सत्र की तारीख तय कर दी गई है और 1 अक्टूबर 2025 से नया पेराई सत्र शुरू होने जा रहा है। इस सत्र में किसानों को न केवल गन्ने का लाभकारी मूल्य मिलेगा, बल्कि राज्य सरकार की ओर से गन्ने की खरीद को लेकर कई सकारात्मक फैसले भी लिए गए हैं। इस बार इथेनॉल और चीनी उत्पादन के लिए गन्ने की बड़ी मात्रा में खरीदी की जाएगी। साथ ही सरकार ने अतिरिक्त चीनी स्टॉक तैयार करने की भी योजना बनाई है, ताकि निर्यात और घरेलू आवश्यकताओं दोनों को संतुलित किया जा सके।
यूपी में कब से होगी मार्केटिंग ईयर 2025–26 की शुरुआत
यूपी में वर्ष 2025-26 के मार्केटिंग ईयर की शुरुआत इस बार 1 अक्टूबर से हो रही है। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने जानकारी दी है कि इस बार चीनी निर्यात के लिए भी पर्याप्त अतिरिक्त स्टॉक रखा जाएगा। इसके पीछे उद्देश्य घरेलू बाजार में चीनी की कीमत को संतुलित रखना और किसानों को उनके गन्ने का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) दिलवाना है।
किसानों को मिलेगा लाभकारी मूल्य, इथेनॉल उत्पादन में भी होगा रिकॉर्ड
नए पेराई सत्र में किसानों को लाभकारी मूल्य देने के लिए सरकार ने कमर कस ली है। अधिकारियों के अनुसार इस बार गन्ने से करीब 4.8 अरब लीटर इथेनॉल के उत्पादन की उम्मीद है, जो अब तक का एक रिकॉर्ड स्तर होगा। इथेनॉल उत्पादन को सरकार विशेष प्राथमिकता दे रही है, क्योंकि यह पेट्रोल में मिश्रण के लिए आवश्यक है और इससे देश की तेल आयात निर्भरता भी कम होती है। इसके साथ ही किसानों को इथेनॉल के लिए अलग से भुगतान मिलने से उनकी आय में भी बढ़ोतरी होगी।
34.9 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुंच सकता है चीनी उत्पादन
एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन ने अनुमान जताया है कि 2025-26 में भारत का चीनी उत्पादन बढ़कर 34.9 मिलियन मीट्रिक टन तक पहुंच सकता है। जबकि घरेलू खपत के आंकड़े इस बार 285 से 290 लाख मीट्रिक टन तक रहने की संभावना है। यूपी इस बार नए सत्र की शुरुआत 50 लाख मीट्रिक टन के शुरुआती स्टॉक के साथ होगी। जो पिछले साल के 80 लाख टन से थोड़ा कम है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्टॉक और आगामी उत्पादन मिलकर घरेलू जरूरतों के साथ-साथ निर्यात की मांग को भी पूरा कर सकता है।
निर्यात को लेकर सरकार की रणनीति तैयार
हालांकि भारत का चीनी निर्यात वैश्विक बाजार में कीमतों को प्रभावित कर सकता है, लेकिन सरकार इसकी योजना बना रही है ताकि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय चीनी की मजबूत उपस्थिति बनी रहे। पिछले सत्र में भारत ने 10 लाख मीट्रिक टन चीनी का निर्यात किया था। इस बार उत्पादन अच्छा रहने की संभावना है, इसलिए निर्यात के आंकड़े भी बढ़ सकते हैं। चीनी उद्योग से जुड़े लोगों का मानना है कि सरकार की स्पष्ट नीति, स्थिर एमएसपी, और निर्यात की अनुमति से किसानों को समय पर भुगतान मिलेगा और मिलों को भी संचालन में सहूलियत होगी।
गन्ना क्षेत्र में फिर से आई तेजी, बढ़ेगा किसानों का मुनाफा
पिछले साल कुछ राज्यों में बारिश की कमी और गन्ना रकबे में गिरावट के कारण पेराई सत्र छोटा रहा और उत्पादन भी कम हुआ। लेकिन इस साल हालात काफी बेहतर हैं। अधिकांश राज्यों में गन्ने की खेती का रकबा बढ़ा है और फसल भी अच्छी बताई जा रही है। ऐसे में इस बार न सिर्फ चीनी उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि गन्ना किसानों को भी अच्छा मुनाफा मिलने की पूरी उम्मीद है।
गन्ना किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार के साथ ही ऊर्जा नीति को होगी मजबूत
सरकार की गन्ना खरीद, इथेनॉल उत्पादन, और चीनी स्टॉक को लेकर बनाई गई रणनीति से साफ है कि इस बार गन्ना किसानों के लिए बेहतर सत्र रहने वाला है। उन्हें उनकी उपज का उचित मूल्य, समय पर भुगतान, और इथेनॉल के रूप में वैकल्पिक बाजार मिलेगा। साथ ही देश की ऊर्जा जरूरतों में योगदान और निर्यात से जुड़े अवसर भी बढ़ेंगे। यह पहल किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने के साथ-साथ देश की खाद्य और ऊर्जा नीति को भी मजबूत बनाएगी।
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