अब किसान करेंगे खाद की खेती, 50 दिन में होगी तैयार

यूरिया से भी अधिक पोषक है यह खाद, मिट्‌टी को बनाएंगी उपजाऊ, जानें खेती का तरीका

देश में लगातार गेहूं और धान जैसी पारंपरिक फसलों की खेती के कारण खेतों की उपजाऊ शक्ति कम होती जा रही है। किसान हर साल ज्यादा उत्पादन लेने के लिए यूरिया और डीएपी जैसे रासायनिक खादों का अधिक उपयोग कर रहे हैं, जिससे मिट्टी की सेहत बिगड़ रही है और खेती की लागत भी तेजी से बढ़ रही है। ऐसे समय में किसानों के लिए ढैंचा की खेती एक बेहतरीन विकल्प बनकर सामने आई है, जो खेत के लिए प्राकृतिक खाद का काम करती है।

विशेषज्ञों के अनुसार ढैंचा हरी खाद के रूप में उपयोग की जाने वाली सबसे अच्छी फसलों में से एक है। यह कम समय में तैयार हो जाती है और मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है। यही वजह है कि अब किसान इसे खेत में उगाकर महंगे रासायनिक खादों पर निर्भरता कम कर सकते हैं। 

हरी खाद के लिए क्यों खास है ढैंचा

हरी खाद का मतलब ऐसी फसल से है, जिसे उगाकर फूल आने से पहले खेत में जोत दिया जाता है। बाद में यह मिट्टी में गलकर प्राकृतिक खाद का काम करती है। ढैंचा इसी श्रेणी की प्रमुख फसल है। ढैंचा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे बहुत कम पानी की जरूरत होती है और यह कमजोर या कम उपजाऊ जमीन में भी आसानी से उग जाती है। जहां दूसरी फसलें संघर्ष करती हैं, वहां भी ढैंचा अच्छी बढ़वार लेती है। यह मिट्टी को नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश जैसे जरूरी पोषक तत्व उपलब्ध कराती है। इसके अलावा इसकी जड़ें जमीन को भुरभुरी बनाती हैं, जिससे मिट्टी में हवा का संचार बेहतर होता है। ढैंचा मिट्टी में जैविक पदार्थ यानी ह्यूमस की मात्रा भी बढ़ाती है, जिससे खेत लंबे समय तक उपजाऊ बने रहते हैं। 

अब खाद खरीदने की जरूरत नहीं

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार ढैंचा की बुवाई का सबसे सही समय अप्रैल से जुलाई तक माना जाता है। एक एकड़ खेत में इसकी खेती के लिए करीब 20 से 25 किलो बीज पर्याप्त होता है। बुवाई से पहले खेत की हल्की जुताई कर लें और मिट्टी में थोड़ी नमी बनाए रखें। अच्छे अंकुरण के लिए बीज को एक रात पहले पानी में भिगोया जा सकता है। किसान इसे छिड़काव विधि से भी बो सकते हैं। सबसे खास बात यह है कि ढैंचा उगाने के लिए यूरिया या ज्यादा रासायनिक खाद की जरूरत नहीं पड़ती। केवल थोड़ी मात्रा में फास्फोरस देने से इसकी बढ़वार अच्छी होती है और फसल घनी तैयार होती है। 

बस 50 दिन में तैयार होगी खाद

ढैंचा बहुत तेजी से बढ़ने वाली फसल है। बुवाई के लगभग 45 से 50 दिनों में यह करीब 3 फीट तक ऊंची हो जाती है। जब इसमें फूल आने लगें, उसी समय इसे खेत में जोत देना चाहिए। खड़ी फसल पर हैरो या कल्टीवेटर चलाकर इसे मिट्टी में मिला दें और हल्की सिंचाई कर दें। पानी मिलने पर पौधे जल्दी सड़ जाते हैं और मिट्टी में मिलकर खाद बन जाते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार इस पूरी प्रक्रिया में बीज और जुताई सहित लगभग 1500 रुपये प्रति एकड़ खर्च आता है, जबकि इससे मिलने वाली खाद की कीमत बाजार में हजारों रुपये के बराबर मानी जाती है। ढैंचा की एक फसल से खेत को 35 से 40 किलो तक नाइट्रोजन प्राकृतिक रूप से मिल सकती है, जिससे अगली फसल के लिए खाद की जरूरत कम हो जाती है। 

पैदावार बढ़ेगी, खर्च घटेगा

अगर किसान ढैंचा को मिट्टी में दबाने के बाद धान, गेहूं या दूसरी फसल बोते हैं, तो उन्हें स्पष्ट फर्क देखने को मिलता है। फसल का रंग बेहतर होता है, पौधे मजबूत बनते हैं, रोग कम लगते हैं और उत्पादन बढ़ता है। गर्मी के मौसम में भी ढैंचा मिट्टी की ताकत बनाए रखने में सहायता करती है। यह सिर्फ एक सीजन के लिए नहीं, बल्कि आने वाले कई वर्षों तक खेत की उर्वरता बनाए रखने का आसान तरीका है। ऐसे में किसान कम लागत में ज्यादा मुनाफा पाने के लिए ढैंचा की खेती अपना सकते हैं। 

“ढैंचा खाद की खेती” के संंबंध में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल और उनके जवाब (FAQ): 

प्रश्न 1. ढैंचा की खेती क्या है?

उत्तर: ढैंचा एक हरी खाद वाली फसल है, जिसे उगाकर खेत में जोत दिया जाता है। यह मिट्टी में गलकर प्राकृतिक खाद का काम करती है और जमीन की उर्वरता बढ़ाती है।

प्रश्न 2. ढैंचा की फसल कितने दिन में तैयार होती है?

उत्तर: ढैंचा की फसल लगभग 45 से 50 दिनों में तैयार हो जाती है। इसी समय इसे खेत में जोतकर खाद के रूप में उपयोग किया जाता है।

प्रश्न 3. ढैंचा की खेती कब करनी चाहिए?

उत्तर: ढैंचा की बुवाई के लिए अप्रैल से जुलाई तक का समय सबसे अच्छा माना जाता है। इस दौरान नमी और तापमान इसके लिए अनुकूल रहता है।

प्रश्न 4. एक एकड़ में ढैंचा के लिए कितना बीज लगता है?

उत्तर: एक एकड़ खेत में ढैंचा की खेती के लिए लगभग 20 से 25 किलो बीज की जरूरत पड़ती है।

प्रश्न 5. ढैंचा मिट्टी के लिए कैसे फायदेमंद है?

उत्तर: ढैंचा मिट्टी में नाइट्रोजन, जैविक पदार्थ और पोषक तत्व बढ़ाती है। इससे जमीन भुरभुरी होती है और उपजाऊ शक्ति बढ़ती है।

प्रश्न 6. क्या ढैंचा यूरिया का विकल्प बन सकता है?

उत्तर: ढैंचा प्राकृतिक हरी खाद है, जो खेत को पोषण देती है और यूरिया पर निर्भरता कम करने में मदद करती है।

प्रश्न 7. ढैंचा की खेती में कितना खर्च आता है?

उत्तर: बीज और जुताई सहित ढैंचा की खेती में लगभग 1500 रुपये प्रति एकड़ तक खर्च आ सकता है।

प्रश्न 8. ढैंचा से खेत को कितना नाइट्रोजन मिलता है?

उत्तर: एक फसल से खेत को लगभग 35 से 40 किलो तक प्राकृतिक नाइट्रोजन मिल सकती है।

प्रश्न 9. ढैंचा के बाद कौन-सी फसल बो सकते हैं?

उत्तर: ढैंचा के बाद धान, गेहूं, मक्का, दलहन और दूसरी प्रमुख फसलें बोई जा सकती हैं।

प्रश्न 10. ढैंचा की खेती से किसानों को क्या फायदा होगा?

उत्तर: इससे खाद पर खर्च कम होगा, मिट्टी की उर्वरता बढ़ेगी, अगली फसल की पैदावार बेहतर होगी और किसानों का मुनाफा बढ़ सकता है।

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