कम बारिश से गुजरात के चार जिलों में सूखे जैसे हालात, किसानों को मिलेगा मुआवजा
प्रकाशित - 27 Oct 2026 by Vivek Tailang
किसानों को फसल नुकसान पर मिलेगी 8,500 रुपये प्रति हेक्टेयर की मदद, पशुपालकों को भी मिलेगी आर्थिक सहायता
गुजरात में इस साल बारिश का वितरण सभी इलाकों में एक जैसा नहीं रहा। राज्य में औसतन 89 फीसदी वर्षा दर्ज होने के बावजूद कुछ जिलों में कम बारिश ने खेती और पशुपालन के सामने मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। हालात को देखते हुए राज्य सरकार ने देवभूमि द्वारका, पोरबंदर, कच्छ और जामनगर को सूखाग्रस्त घोषित करने का फैसला किया है। इस निर्णय के साथ ही प्रभावित किसानों को फसल नुकसान के लिए आर्थिक सहायता देने और पशुओं के चारे की व्यवस्था मजबूत करने के उपायों की घोषणा की गई है।
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के अनुसार, सूखा घोषित करने का फैसला भारत सरकार की वर्ष 2016 की सूखा निर्धारण गाइडलाइंस के तहत जरूरी प्रक्रिया पूरी करने और उच्चस्तरीय बैठक के बाद लिया गया है। इन चार जिलों में कम बारिश के कारण पैदा हुई परिस्थितियों का आकलन करने के बाद सरकार ने राहत संबंधी कदम उठाने का निर्णय किया।
फसल नुकसान पर मिलेगी 8,500 रुपये प्रति हेक्टेयर की मदद
सूखे की स्थिति में किसानों के सामने फसल उत्पादन प्रभावित होने और खेती की लागत निकालने की चुनौती रहती है। इसे देखते हुए गुजरात सरकार ने प्रभावित किसानों को राज्य आपदा मोचन निधि (SDRF) के निर्धारित मानदंडों के अनुसार सहायता देने की घोषणा की है। सरकार के मुताबिक, पात्र किसानों को फसल नुकसान के लिए अधिकतम दो हेक्टेयर क्षेत्र की सीमा में 8,500 रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता दी जाएगी। यह राहत उन किसानों के लिए महत्वपूर्ण है, जिनकी फसलों पर कम वर्षा का असर पड़ा है। हालांकि, सहायता प्राप्त करने के लिए पात्रता और नुकसान के आकलन से संबंधित लागू नियमों का पालन करना होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार संकट की घड़ी में किसानों और पशुपालकों के साथ खड़ी है। इसी प्रतिबद्धता के तहत सूखे से प्रभावित क्षेत्रों में राहत पहुंचाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
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पशुपालकों को चारे के लिए प्रतिदिन 80 रुपये
कम बारिश का असर केवल खेतों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता भी चुनौती बन जाती है। गुजरात सरकार ने इस जरूरत को ध्यान में रखते हुए सूखाग्रस्त घोषित तालुकों में प्रत्येक पात्र पशु के लिए दो महीने तक प्रतिदिन 80 रुपये की सहायता देने का प्रावधान किया है। इस सहायता का खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। इसके अलावा, मुख्यमंत्री ने सूखाग्रस्त घोषित तालुकों में 2,500 रुपये की सहायता दिए जाने की भी जानकारी दी। इस राशि के लिए पात्र लाभार्थियों और सहायता की प्रकृति से जुड़ी शर्तों की पुष्टि संबंधित सरकारी दिशा-निर्देशों से की जानी चाहिए। सरकार ने बारिश में देरी की आशंका को देखते हुए पहले ही चारे की उपलब्धता पर काम शुरू कर दिया था। जून-जुलाई 2026 से पूरे राज्य में रियायती दरों पर चारा वितरण की अनुमति दी गई थी। विशेष परिस्थितियों में जरूरत के अनुसार चारा वितरित करने के लिए जिला कलेक्टरों को भी अधिकार दिए गए।
1.21 करोड़ किलो चारा बांटा, अतिरिक्त खरीद की तैयारी
राज्य सरकार के आंकड़ों के अनुसार, गुजरात में अब तक दो रुपये प्रति किलोग्राम की दर से 1.21 करोड़ किलोग्राम घास यानी चारा वितरित किया जा चुका है। इसके अलावा सरकार के पास तीन करोड़ किलोग्राम चारा उपलब्ध है। आने वाले समय में जरूरत बढ़ने की आशंका को देखते हुए अतिरिक्त चारा खरीदने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। इन उपायों का उद्देश्य प्रभावित क्षेत्रों में पशुपालकों को चारे की कमी से राहत देना है, ताकि पशुओं के रखरखाव पर पड़ने वाला आर्थिक दबाव कम किया जा सके।
ग्रामीणों को मिलेगा 150 दिन का रोजगार
सूखाग्रस्त क्षेत्रों में खेती से होने वाली आय प्रभावित होने पर ग्रामीण परिवारों के सामने रोजगार का संकट भी पैदा हो सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए सरकार ने सूखाग्रस्त घोषित तालुकों में VBG RamG Yojana के तहत 150 दिन का रोजगार उपलब्ध कराने का फैसला किया है। यह घोषणा एक नवंबर 2026 से लागू होने की जानकारी दी गई है। इस व्यवस्था से प्रभावित ग्रामीण परिवारों को अतिरिक्त रोजगार के अवसर मिल सकते हैं। हालांकि, रोजगार पाने के लिए संबंधित योजना के पात्रता नियमों और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना होगा।
रबी सीजन के लिए सिंचाई के पानी की योजना
बारिश की कमी के बीच जल संसाधनों का प्रबंधन भी राज्य सरकार के सामने एक अहम चुनौती है। मुख्यमंत्री ने बताया कि खरीफ सीजन में मांग के अनुसार 44 बांधों के कमांड एरिया में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया गया। इस साल गुजरात के 206 प्रमुख बांधों में उनकी कुल क्षमता का 66 फीसदी पानी जमा होने की जानकारी दी गई है। आगामी रबी सीजन के लिए सरकार ने 76 बांधों के कमांड एरिया में सिंचाई का पानी उपलब्ध कराने की योजना बनाई है। इसके साथ ही पेयजल की जरूरत को प्राथमिकता देते हुए 30 जून 2027 तक के लिए पानी आरक्षित किया गया है। सरकार की योजना खेती, पशुपालन और ग्रामीण रोजगार पर सूखे के असर को कम करने के साथ जल संसाधनों का संतुलित उपयोग सुनिश्चित करने की है। अब प्रभावित किसानों और पशुपालकों को घोषित सहायता का वास्तविक लाभ पात्रता, नुकसान के आकलन और संबंधित सरकारी प्रक्रियाओं के पूरा होने पर निर्भर करेगा।
“कम बारिश से गुजरात के चार जिलों में सूखे जैसे हालात, किसानों को मिलेगा मुआवजा” के संबंध में पूछे जाने वाले सवाल और उनके जवाब (FAQ):
प्रश्न 1. गुजरात के किन जिलों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया है?
उत्तर: गुजरात के देवभूमि द्वारका, पोरबंदर, कच्छ और जामनगर जिलों को कम बारिश के कारण सूखाग्रस्त घोषित किया गया है।
प्रश्न 2. गुजरात में प्रभावित किसानों को कितनी सहायता मिलेगी?
उत्तर: सरकार की घोषणा के अनुसार, पात्र किसानों को फसल नुकसान के लिए अधिकतम दो हेक्टेयर की सीमा में 8,500 रुपये प्रति हेक्टेयर की सहायता मिलेगी। सहायता SDRF के निर्धारित मानदंडों के अनुसार दी जाएगी।
प्रश्न 3. पशुओं के चारे के लिए कितनी आर्थिक मदद मिलेगी?
उत्तर: सूखाग्रस्त घोषित तालुकों में प्रत्येक पात्र पशु के लिए दो महीने तक प्रतिदिन 80 रुपये की सहायता देने का प्रावधान किया गया है। इसका खर्च राज्य सरकार उठाएगी।
प्रश्न 4. गुजरात में किसानों और पशुपालकों के लिए चारे की क्या व्यवस्था की गई है?
उत्तर: राज्य सरकार के अनुसार, अब तक दो रुपये प्रति किलोग्राम की दर से 1.21 करोड़ किलोग्राम चारा वितरित किया जा चुका है। सरकार के पास तीन करोड़ किलोग्राम चारा उपलब्ध है और अतिरिक्त खरीद की प्रक्रिया भी शुरू की गई है।
प्रश्न 5. गुजरात के सूखाग्रस्त तालुकों में 150 दिन का रोजगार कब से मिलेगा?
उत्तर: सरकार की घोषणा के अनुसार, सूखाग्रस्त तालुकों में VBG RamG Yojana के तहत 150 दिन का रोजगार उपलब्ध कराने का प्रावधान 1 नवंबर 2026 से लागू होगा। रोजगार के लिए योजना की पात्रता और लागू नियमों का पालन करना होगा।
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