बड़ी खबर: किसानों को मिलेगा 75 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर मुआवजा
प्रकाशित - 18 Jul 2026 by Vivek Tailang
100% फसल नुकसान पर पात्र किसानों को डीबीटी के जरिए मिलेगा भुगतान
दिल्ली सरकार ने फसल नुकसान झेलने वाले किसानों को बड़ी राहत देने का फैसला किया है। सरकार ने अगस्त-सितंबर 2025 में हुई भारी बारिश और जलभराव से प्रभावित किसानों को मुआवजा देने के लिए 33.31 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इस फैसले के तहत 100 प्रतिशत फसल नुकसान झेलने वाले पात्र किसानों को 75,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से आर्थिक सहायता दी जाएगी। यह राशि किसानों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से भेजी जाएगी।
दिल्ली के मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के अनुसार, मुख्यमंत्री ने राजस्व विभाग और सभी जिला मजिस्ट्रेटों को मुआवजा वितरण की प्रक्रिया में तेजी लाने और बिना किसी अनावश्यक देरी के पात्र किसानों तक सहायता राशि पहुंचाने के निर्देश दिए हैं। सरकार का उद्देश्य है कि प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों को जल्द से जल्द आर्थिक राहत मिल सके।
4,442.41 हेक्टेयर से अधिक फसल हुई प्रभावित
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त और सितंबर 2025 के दौरान हुई भारी बारिश और जलभराव के कारण दिल्ली के विभिन्न जिलों और सब-डिवीजनों में 4,442.41 हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि पर खड़ी फसलें पूरी तरह बर्बाद हो गई थीं। इसी नुकसान की भरपाई के लिए राज्य सरकार ने राहत पैकेज को मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है और यह आर्थिक सहायता उन्हें प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान से उबरने में सहायता करेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मुआवजा केवल उन किसानों को दिया जाएगा, जिनकी फसल का 100 प्रतिशत नुकसान हुआ है और जो सरकार द्वारा तय पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं।
Popular Tractors
इन इलाकों के किसानों को मिलेगा मुआवजा
सरकार द्वारा जारी विवरण के अनुसार, अलग-अलग क्षेत्रों के लिए अलग-अलग राशि स्वीकृत की गई है। इनमें अलीपुर (नरेला) क्षेत्र की 364.74 हेक्टेयर भूमि के लिए 2.74 करोड़ रुपये, बुराड़ी की 17.33 हेक्टेयर भूमि के लिए 13 लाख रुपये, पंजाबी बाग (मुंडका) की 51.50 हेक्टेयर भूमि के लिए 38.63 लाख रुपये तथा विकासपुरी की 26.55 हेक्टेयर भूमि के लिए 19.92 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं।
इन जिलों में सबसे ज्यादा हुआ नुकसान
दिल्ली के कांझावला, मुंडका, बवाना, रोहिणी, कापसहेड़ा, नजफगढ़ और मटियाला जैसे क्षेत्रों में फसल नुकसान सबसे अधिक दर्ज किया गया है। कांझावला क्षेत्र में प्रभावित भूमि के लिए 8.70 करोड़ रुपये, जबकि बवाना क्षेत्र के लिए 4.49 करोड़ रुपये की राहत राशि स्वीकृत की गई है। इसके अलावा रोहिणी (मुंडका) की 137.59 हेक्टेयर भूमि के लिए 1.03 करोड़ रुपये, कापसहेड़ा (मटियाला) की 625.93 हेक्टेयर भूमि के लिए 4.69 करोड़ रुपये, नजफगढ़ के प्रभावित क्षेत्रों के लिए 9.98 करोड़ रुपये और मटियाला क्षेत्र के लिए 96.74 लाख रुपये मंजूर किए गए हैं।
पात्र किसानों को ही मिलेगा लाभ
मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, सरकार ने मुआवजा वितरण के लिए स्पष्ट पात्रता नियम तय किए हैं ताकि सहायता राशि केवल वास्तविक प्रभावित किसानों तक ही पहुंचे। इसके तहत कॉर्पोरेट कंपनियों के स्वामित्व वाली कृषि भूमि, ग्राम सभा की भूमि पर की जाने वाली खेती तथा पक्की बाउंड्री वॉल वाले विकसित फार्महाउस इस योजना के दायरे में शामिल नहीं किए गए हैं। सरकार का कहना है कि पात्रता की जांच के बाद ही किसानों के बैंक खातों में डीबीटी (DBT) के माध्यम से राशि भेजी जाएगी। इससे पारदर्शिता बनी रहेगी और राहत राशि सीधे लाभार्थियों तक पहुंचेगी। दिल्ली सरकार का यह फैसला प्राकृतिक आपदा से प्रभावित किसानों के लिए महत्वपूर्ण राहत माना जा रहा है। समय पर मिलने वाला यह मुआवजा किसानों को आर्थिक नुकसान की भरपाई करने और अगली फसल की तैयारी में मदद करेगा।
“फसल नुकसान मुआवजा” के संबंध में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल और उनके जवाब (FAQs):
प्रश्न 1. दिल्ली सरकार किसानों को कितना फसल मुआवजा दे रही है?
उत्तर: दिल्ली सरकार 100% फसल नुकसान झेलने वाले पात्र किसानों को 75,000 रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से मुआवजा दे रही है।
प्रश्न 2. मुआवजे की राशि किसानों को कैसे मिलेगी?
उत्तर: मुआवजे की पूरी राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से सीधे किसानों के बैंक खातों में भेजी जाएगी।
प्रश्न 3. यह मुआवजा किस नुकसान के लिए दिया जा रहा है?
उत्तर: यह मुआवजा अगस्त और सितंबर 2025 में हुई भारी बारिश और जलभराव से फसलों को हुए नुकसान के लिए दिया जा रहा है।
प्रश्न 4. किन किसानों को इस योजना का लाभ मिलेगा?
उत्तर: केवल वे पात्र किसान, जिनकी 100% फसल खराब हुई है और जो सरकार की पात्रता शर्तों को पूरा करते हैं, इस मुआवजे के लिए पात्र होंगे।
प्रश्न 5. किन भूमि या किसानों को इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा?
उत्तर: कॉर्पोरेट कंपनियों की कृषि भूमि, ग्राम सभा की भूमि पर की जाने वाली खेती तथा पक्की बाउंड्री वॉल वाले विकसित फार्महाउस इस योजना के दायरे में शामिल नहीं हैं।
ट्रैक्टर जंक्शन हमेशा आपको अपडेट रखता है। इसके लिए ट्रैक्टरों के नये मॉडलों और उनके कृषि उपयोग के बारे में एग्रीकल्चर खबरें प्रकाशित की जाती हैं। प्रमुख ट्रैक्टर कंपनियों सॉलिस ट्रैक्टर, महिंद्रा ट्रैक्टर आदि की मासिक सेल्स रिपोर्ट भी हम प्रकाशित करते हैं जिसमें ट्रैक्टरों की थोक व खुदरा बिक्री की विस्तृत जानकारी दी जाती है। अगर आप मासिक सदस्यता प्राप्त करना चाहते हैं तो हमसे संपर्क करें।
अगर आप नए ट्रैक्टर, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण बेचने या खरीदने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार और विक्रेता आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु को ट्रैक्टर जंक्शन के साथ शेयर करें।
सर्टिफाइड पुराने ट्रैक्टर्स
ट्रैक्टर की प्राइस चेक करें