फसल खराब होने पर किसानों को बड़ी राहत: अब ₹50,000 तक मिलेगा मुआवजा
प्रकाशित - 05 Apr 2026 by Vivek Tailang
बीमा योजना में बड़ा बदलाव, सरकार का फोकस, किसानों के खाते में सीधा लाभ
हरियाणा सरकार ने किसानों के हित में एक अहम कदम उठाते हुए फसल नुकसान पर मिलने वाली राहत राशि में बढ़ोतरी कर दी है। राज्य के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने बजट 2026-27 की घोषणाओं को तेजी से जमीन पर उतारने के निर्देश दिए हैं। खास बात यह है कि बजट पेश होने के कुछ ही समय बाद सरकार ने योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए स्पष्ट रोडमैप तैयार करना शुरू कर दिया है।
मुख्यमंत्री ने विभिन्न विभागों जैसे कृषि, बागवानी, पशुपालन, ऊर्जा और स्वास्थ्य के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक कर यह सुनिश्चित करने को कहा कि योजनाओं का लाभ सीधे गांव स्तर तक पहुंचे। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ग्राम सभाओं के माध्यम से योजनाओं की जानकारी और प्रस्ताव तैयार कर मुख्यमंत्री कार्यालय तक भेजे जाएं, ताकि क्रियान्वयन में पारदर्शिता बनी रहे।
बागवानी किसानों को मिली बड़ी राहत
इस बैठक में बागवानी से जुड़े किसानों के लिए सबसे बड़ी घोषणा की गई। सरकार ने मुख्यमंत्री बागवानी बीमा योजना के तहत मुआवजा राशि बढ़ाने का फैसला लिया है। अब प्राकृतिक आपदाओं से फसलों को नुकसान होने पर किसानों को पहले से अधिक आर्थिक सहायता मिलेगी। नई व्यवस्था के तहत फलों की फसलों को नुकसान होने पर अब किसानों को 50,000 रुपए प्रति एकड़ तक मुआवजा दिया जाएगा, जो पहले 40,000 रुपए था। वहीं सब्जी और मसाला फसलों के लिए मुआवजा राशि बढ़ाकर 40,000 रुपए प्रति एकड़ कर दी गई है, जो पहले 30,000 रुपए थी। इस फैसले से बागवानी क्षेत्र से जुड़े किसानों को सीधे तौर पर राहत मिलने की उम्मीद है।
46 प्रकार की फसलें योजना में शामिल
सरकार की यह योजना केवल सीमित फसलों तक ही नहीं, बल्कि व्यापक दायरे में लागू की गई है। बागवानी बीमा योजना और भावांतर भरपाई योजना के तहत कुल 46 प्रकार की फल, सब्जी और मसाला फसलें शामिल की गई हैं। इस योजना की खास बात यह है कि किसानों को इसमें बहुत कम प्रीमियम देना होता है। उन्हें कुल बीमा राशि का केवल 2.5 प्रतिशत ही जमा करना होता है, जबकि बाकी राशि राज्य सरकार वहन करती है। इससे छोटे और सीमांत किसानों के लिए भी इस योजना का लाभ लेना आसान हो जाता है।
योजनाओं के क्रियान्वयन पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी स्पष्ट निर्देश दिए कि बजट में घोषित सभी योजनाओं को तय समय सीमा में लागू किया जाए। उन्होंने कहा कि योजनाओं का असली लाभ तभी मिलेगा, जब वह कागजों से निकलकर खेतों और गांवों तक पहुंचे। सरकार की कोशिश है कि तकनीक और प्रशासनिक समन्वय के जरिए लाभ सीधे किसानों के बैंक खातों में पहुंचे, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हो और पारदर्शिता बनी रहे। इससे किसानों का भरोसा भी बढ़ेगा और योजनाओं का असर भी अधिक दिखाई देगा।
किसान उत्पादक संगठनों पर फोकस
बैठक में किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को लेकर भी अहम फैसला लिया गया। राज्य में मौजूद सभी 775 एफपीओ की बैठक आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं। इन बैठकों में किसानों को संगठित करने, उनकी आय बढ़ाने और बाजार तक बेहतर पहुंच दिलाने पर जोर दिया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित 10,000 एफपीओ गठन के लक्ष्य के तहत हरियाणा को 172 एफपीओ बनाने का लक्ष्य मिला था, जिसमें से कई पहले ही स्थापित किए जा चुके हैं। सरकार का मानना है कि संगठित किसान समूह बाजार में बेहतर सौदे कर सकते हैं और अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं।
किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में कदम
कुल मिलाकर, हरियाणा सरकार का यह कदम किसानों को आर्थिक रूप से मजबूत बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है। फसल नुकसान पर बढ़ा हुआ मुआवजा किसानों को जोखिम से बचाने में सहायता करेगा, वहीं योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन से उन्हें समय पर सहायता मिल सकेगी। अगर सरकार अपने तय लक्ष्यों के अनुसार इन योजनाओं को लागू करती है, तो इसका सीधा फायदा राज्य के लाखों किसानों को मिलेगा और कृषि क्षेत्र में स्थिरता व विकास को नई गति मिल सकती है।
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