ब्रिक्स के नई दिल्ली घोषणा-पत्र में क्या है खास? कृषि और किसानों से जुड़ी 4 बड़ी पहल

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन, कृषि, महिला सशक्तीकरण और तकनीक सहित कई मुद्दों पर बनी सहमति

ब्रिक्स के नई दिल्ली घोषणा-पत्र में क्या खास है? इसको लेकर चर्चा तेज है। नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के पहले सत्र में जलवायु परिवर्तन, महिला सशक्तीकरण, शिक्षा, कृषि और तकनीक से जुड़े कई अहम मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच सहमति बनी। सम्मेलन में जारी नई दिल्ली घोषणा-पत्र में पेरिस समझौते के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), बौद्धिक संपदा, दुर्लभ खनिज, अंतरिक्ष सहयोग और विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) में सुधार जैसे मुद्दों को भी जगह दी गई है।

खास बात यह है कि कृषि और किसानों से जुड़ी चार नई पहलों को भी शीर्ष स्तर पर आगे बढ़ाने पर सहमति बनी है। इन पहलों का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने, किसानों के सामने आने वाली चुनौतियों पर मिलकर काम करने और नई तकनीक व ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना है।

नई दिल्ली घोषणा-पत्र में कृषि को क्यों मिली जगह?

ब्रिक्स देशों की अर्थव्यवस्था में कृषि की महत्वपूर्ण भूमिका है। बड़ी आबादी की आजीविका खेती और इससे जुड़ी गतिविधियों पर निर्भर है। ऐसे में जलवायु परिवर्तन, खाद्य सुरक्षा, कृषि तकनीक और किसानों की आय जैसे मुद्दे केवल किसी एक देश तक सीमित नहीं हैं। घोषणा-पत्र में कृषि से जुड़े सहयोग को आगे बढ़ाने की सहमति ऐसे समय में महत्वपूर्ण मानी जा रही है, जब खेती पर बदलते मौसम, पानी की उपलब्धता, उत्पादन लागत और बाजार की अनिश्चितता जैसी चुनौतियों का असर दिखाई दे रहा है। सदस्य देशों के बीच अनुभव और तकनीक साझा होने से कृषि क्षेत्र में नए अवसर तैयार हो सकते हैं।

किसानों से जुड़ी चार नई पहलों पर जोर

नई दिल्ली घोषणा-पत्र में कृषि और किसानों से जुड़े चार नए सहयोग क्षेत्रों को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी है। इनका व्यापक उद्देश्य सदस्य देशों के बीच कृषि क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करना है। इन पहलों के माध्यम से कृषि से जुड़े अनुभवों, तकनीकी जानकारी और बेहतर तौर-तरीकों को साझा करने पर जोर दिया जा रहा है। इससे किसानों के लिए नई कृषि तकनीकों और टिकाऊ खेती से जुड़े उपायों को अपनाने की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। खासकर जलवायु परिवर्तन के दौर में ऐसी पहल महत्वपूर्ण हो सकती है, क्योंकि मौसम में बदलाव का सीधा असर फसलों की पैदावार और किसानों की आय पर पड़ता है।

जलवायु परिवर्तन से निपटने पर भी जोर

नई दिल्ली घोषणा-पत्र में जलवायु परिवर्तन का मुद्दा भी प्रमुखता से शामिल है। इसमें पेरिस समझौते के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता जताई गई है। कृषि के लिए जलवायु परिवर्तन बड़ी चुनौती है। तापमान में बदलाव, अनियमित बारिश, सूखा और बाढ़ जैसी परिस्थितियां खेती को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में जलवायु अनुकूल खेती, पानी के बेहतर प्रबंधन और संसाधनों के कुशल इस्तेमाल पर सहयोग किसानों के लिए उपयोगी हो सकता है।

एआई और तकनीक से कृषि को मिल सकता है फायदा

घोषणा-पत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और तकनीक से जुड़े विषयों को भी जगह दी गई है। कृषि क्षेत्र में एआई और डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल मौसम की जानकारी, फसल निगरानी, रोगों की पहचान और संसाधनों के बेहतर प्रबंधन में किया जा सकता है। अगर सदस्य देशों के बीच कृषि तकनीक और डिजिटल समाधान साझा करने की दिशा में काम आगे बढ़ता है, तो भविष्य में किसानों को खेती से जुड़े निर्णय लेने में बेहतर तकनीकी सहायता मिल सकती है।

दुर्लभ खनिज और अंतरिक्ष सहयोग भी अहम

नई दिल्ली घोषणा-पत्र में दुर्लभ खनिज और अंतरिक्ष सहयोग जैसे विषयों को भी शामिल किया गया है। दुर्लभ खनिज आधुनिक तकनीक और कई महत्वपूर्ण उद्योगों के लिए जरूरी हैं। वहीं अंतरिक्ष तकनीक का इस्तेमाल मौसम पूर्वानुमान, आपदा प्रबंधन और पृथ्वी की निगरानी जैसे क्षेत्रों में किया जाता है। कृषि के नजरिए से देखें तो उपग्रह आधारित जानकारी किसानों और कृषि संस्थानों के लिए उपयोगी साबित हो सकती है। इससे मौसम, भूमि और फसल की स्थिति से जुड़ी जानकारी जुटाने में मदद मिलती है।

डब्ल्यूटीओ में सुधार और बौद्धिक संपदा पर भी चर्चा

घोषणा-पत्र में विश्व व्यापार संगठन (WTO) में सुधार और बौद्धिक संपदा से जुड़े मुद्दों को भी स्थान दिया गया है। वैश्विक व्यापार व्यवस्था में बदलाव का असर कृषि उत्पादों के अंतरराष्ट्रीय कारोबार पर भी पड़ सकता है। कृषि उत्पादों का निर्यात बढ़ाने के लिए बाजार तक पहुंच, व्यापार नियम और वैश्विक स्तर पर सहयोग महत्वपूर्ण हैं। ऐसे में ब्रिक्स देशों के बीच बेहतर समन्वय से कृषि व्यापार के लिए नए अवसर बनने की संभावना देखी जा सकती है।

किसानों के लिए क्या मायने रखता है

नई दिल्ली घोषणा-पत्र में कृषि को लेकर बनी सहमति को किसानों के लिए सीधे मिलने वाली किसी योजना या आर्थिक सहायता के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। इसका महत्व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कृषि सहयोग और साझा प्रयासों के रूप में है। यदि घोषणापत्र में तय सहयोग को आगे लागू किया जाता है, तो कृषि तकनीक, जलवायु अनुकूल खेती, डिजिटल समाधान, खाद्य सुरक्षा और कृषि व्यापार जैसे क्षेत्रों में सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ सकता है। इसका दीर्घकालिक फायदा किसानों और कृषि क्षेत्र को मिल सकता है। कुल मिलाकर, नई दिल्ली घोषणापत्र में कृषि और किसानों से जुड़े मुद्दों को जगह मिलना इस बात का संकेत है कि बदलते वैश्विक दौर में खाद्य सुरक्षा, टिकाऊ खेती और कृषि तकनीक को अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्वपूर्ण हिस्से के रूप में देखा जा रहा है। 

“ब्रिक्स के नई दिल्ली घोषणापत्र” के संबंध में पूछे जाने वाले सवाल और उनके जवाब (FAQ):

प्रश्न 1. नई दिल्ली घोषणा-पत्र क्या है?

उत्तर: नई दिल्ली घोषणा-पत्र ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों की ओर से विभिन्न वैश्विक और साझा मुद्दों पर बनी सहमति और प्राथमिकताओं को सामने रखने वाला दस्तावेज है।

प्रश्न 2. नई दिल्ली घोषणा-पत्र में कृषि को लेकर क्या खास है?

उत्तर: घोषणा-पत्र में कृषि और किसानों से जुड़े चार नई पहलों को आगे बढ़ाने पर सहमति बनी है। इनमें कृषि सहयोग, तकनीक और जलवायु से जुड़ी चुनौतियों पर मिलकर काम करने पर जोर है।

प्रश्न 3. ब्रिक्स की कृषि पहल से किसानों को क्या फायदा हो सकता है?

उत्तर: ब्रिक्स देशों के बीच कृषि तकनीक, अनुभव और बेहतर खेती के तरीकों का आदान-प्रदान बढ़ने से किसानों को भविष्य में जलवायु अनुकूल खेती, डिजिटल तकनीक और कृषि क्षेत्र से जुड़ी नई जानकारी का लाभ मिल सकता है।

प्रश्न 4. नई दिल्ली घोषणापत्र में जलवायु परिवर्तन का क्या मुद्दा है?

उत्तर: घोषणा-पत्र में पेरिस समझौते के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया है। इसका कृषि क्षेत्र से भी संबंध है, क्योंकि बदलता मौसम, सूखा, बाढ़ और अनियमित बारिश खेती को प्रभावित करते हैं।

प्रश्न 5. क्या नई दिल्ली घोषणापत्र के तहत किसानों को सीधे आर्थिक सहायता मिलेगी?

उत्तर: नहीं, घोषणा-पत्र में कृषि से जुड़ी सहमति को सीधे किसानों को मिलने वाली किसी सब्सिडी या आर्थिक सहायता की योजना नहीं माना जाना चाहिए। इसका मुख्य उद्देश्य ब्रिक्स देशों के बीच कृषि और अन्य क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करना है।

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