अल नीनो की दस्तक: भारत में कमजोर मानसून से फसलों को हो सकता है भारी नुकसान

प्रशांत महासागर के गर्म होने से कम बारिश की आशंका, खरीफ फसलों और किसानों की बढ़ी चिंता 

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 13 जून 2026 को आधिकारिक तौर पर अल नीनो की शुरुआत की घोषणा कर दी है। विभाग ने चेतावनी दी है कि यह स्थिति आने वाले मॉनसून सीजन में और मजबूत हो सकती है, जिससे देश में सामान्य से कम बारिश की संभावना बढ़ गई है। यह खबर खासतौर पर भारतीय कृषि क्षेत्र के लिए चिंता का विषय मानी जा रही है, क्योंकि देश की बड़ी खेती आज भी मानसून पर ही निर्भर है।

मौसम विभाग (IMD) ने अपने जून बुलेटिन में बताया कि मध्य प्रशांत महासागर के समुद्री तापमान ने वह सीमा पार कर ली है, जिसे अल नीनो की स्थिति माना जाता है। इसके साथ ही 2026 के मानसून के लिए वर्षा अनुमान को घटाकर लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) के करीब 90% कर दिया गया है। विभाग ने यह भी कहा है कि कम बारिश वाले मानसून की संभावना लगभग 60% तक पहुंच चुकी है, जो कृषि अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा संकेत है। 

क्या है अल नीनो और कैसे बदलता है मौसम

अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से का पानी सामान्य से अधिक गर्म हो जाता है। सामान्य परिस्थितियों में व्यापारिक हवाएं (Trade Winds) गर्म पानी को एशिया की ओर धकेलती हैं, जिससे भारत में मानसून को नमी मिलती है। लेकिन अल नीनो के दौरान ये हवाएं कमजोर पड़ जाती हैं और गर्म पानी वापस पूर्व की ओर खिसकने लगता है। इससे भारत की ओर नमी लाने वाली प्रणाली कमजोर हो जाती है और बारिश कम होने लगती है। मौसम वैज्ञानिक इस स्थिति को वायुमंडलीय सबसिडेंस (Subsidence) कहते हैं, जिसमें हवा नीचे बैठ जाती है और बादल बनने की प्रक्रिया बाधित होती है। 

भारतीय कृषि पर संभावित असर

भारत की कृषि प्रणाली का बड़ा हिस्सा अभी भी वर्षा पर निर्भर है, ऐसे में अल नीनो का सीधा असर खरीफ फसलों पर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बारिश कम होती है तो फसल उत्पादन में गिरावट के साथ-साथ खाद्य वस्तुओं की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा।

  • धान (Rice): सिंचाई सुविधा वाले क्षेत्रों में असर कम, लेकिन कुल उत्पादन घटने का खतरा।
  • दालें और तिलहन: बारिश पर निर्भर होने के कारण सबसे ज्यादा जोखिम।
  • मक्का, ज्वार और बाजरा: नमी की कमी से पैदावार प्रभावित हो सकती है।
  • सिंचाई लागत: ट्यूबवेल और भूजल पर निर्भरता बढ़ने से खर्च बढ़ेगा। 

अल नीनो का किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर

अल नीनो के प्रभाव से भारत में कम बारिश होने की संभावना है। कम बारिश की स्थिति में खेतों में सूखे जैसे हालात बन सकते हैं, जिससे किसानों की आय प्रभावित होगी। कई इलाकों में दोबारा बुवाई की नौबत भी आ सकती है। इसका असर केवल खेती तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पशुपालन, चारा उपलब्धता और ग्रामीण रोजगार पर भी दबाव बढ़ेगा। 

क्या अल नीनो हर बार आपदा बनता है

हालांकि इतिहास बताता है कि हर अल नीनो वर्ष में भारत में गंभीर सूखा नहीं पड़ता। सिंचाई सुविधाओं के विस्तार, फसल बीमा योजनाओं और सरकार की कृषि नीतियों ने हालात को काफी हद तक बेहतर बनाया है। सरकार ने भी संकेत दिए हैं कि अगर बारिश कम रहती है तो दोबारा बुवाई के लिए बीजों का पर्याप्त भंडार तैयार रखा गया है। साथ ही, मिलेट्स (मोटे अनाज) और सूखा सहन करने वाली फसलों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसके अलावा, पॉजिटिव इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) जैसी समुद्री स्थितियां कुछ हद तक अल नीनो के नकारात्मक प्रभाव को कम भी कर सकती हैं। 

अल नीनो के संबंध में किसानों को सलाह

अल नीनो की आधिकारिक शुरुआत ने भारत में मौसम और कृषि को लेकर नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। अगर मानसून कमजोर रहता है तो इसका असर केवल खेतों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खाद्य महंगाई और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर भी गहरा प्रभाव पड़ेगा। फिलहाल देश मौसम के इस बड़े बदलाव पर नजर बनाए हुए है और किसान वर्ग को सलाह दी जा रही है कि वे मौसम विभाग की चेतावनियों के अनुसार खेती की रणनीति अपनाएं और जोखिम को कम करने के उपाय करें। 

“अल नीनो की दस्तक: भारत में कमजोर मानसून से फसलों को हो सकता है भारी नुकसान” के संबंध में अक्सर पूछे जाने वाले सवाल और उनके जवाब (FAQ):

प्रश्न 1. अल नीनो क्या है? 

उत्तर: अल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है जिसमें प्रशांत महासागर का तापमान बढ़ जाता है, जिससे भारत में मानसून कमजोर हो सकता है।

प्रश्न 2. भारत में अल नीनो का क्या असर पड़ता है? 

उत्तर: इसके कारण कम बारिश, कमजोर मानसून और खरीफ फसलों के उत्पादन में गिरावट की संभावना बढ़ जाती है।

प्रश्न 3. किन फसलों पर सबसे ज्यादा असर होता है? 

दालें, तिलहन, मक्का, ज्वार और बाजरा जैसी वर्षा आधारित फसलें सबसे ज्यादा प्रभावित होती हैं।

प्रश्न 4. क्या अल नीनो से खाद्य वस्तुओं की कीमत बढ़ सकती है? 

उत्तर: हाँ, उत्पादन कम होने पर बाजार में अनाज और खाद्य वस्तुओं की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है।

प्रश्न 5. किसान इस स्थिति में क्या करें? 

उत्तर: किसानों को सूखा सहन करने वाली फसलें, आधुनिक सिंचाई तकनीक और मौसम विभाग की एडवाइजरी का पालन करना चाहिए।

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