पशुपालकों को राहत : जल्द जारी होंगे 200 करोड़ रुपए

सीएम ने जारी की दुग्ध उत्पादक किसानों को 88.43 करोड़ रुपए की पहली किस्त, शेष 4 महीनों की राशि भी जल्द होगी जारी

किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। इसी बीच राजस्थान के लाखों किसानों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही “मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक संबल योजना” के तहत राज्य के दुग्ध उत्पादक किसानों को 88.43 करोड़ रुपए की पहली किस्त जारी कर दी गई है। यह राशि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से किसानों के खातों में भेजी गई है। इसके अलावा जनवरी से अप्रैल 2025 तक की शेष राशि 200 करोड़ रुपए भी जल्द ही जारी की जाएगी।

दूध उत्पादन को प्रोत्साहित करने से हो रही है किसानों की आय में बढ़ोतरी

राजस्थान सरकार का लक्ष्य पशुपालन को लाभकारी व्यवसाय बनाना और दुग्ध उत्पादक किसानों की आय को सशक्त करना है। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक संबल योजना चलाई जा रही है, जिसके तहत दूध पर प्रति लीटर 5 रुपए की सब्सिडी दी जाती है। यह योजना राज्य के लाखों पशुपालकों के लिए आर्थिक सहारा साबित हो रही है।

मुख्यमंत्री ने किसानों को दी पहली किस्त

राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक संबल योजना 2024-25 के तहत 88.43 करोड़ रुपए की पहली किस्त को मंजूरी दी और राशि को लाभार्थी किसानों के खातों में ट्रांसफर किया गया। यह राशि उन दुग्ध उत्पादकों को दी गई है जो सहकारी समितियों से जुड़ी डेयरियों को दूध सप्लाई करते हैं। बता दें कि सरकार ने वर्ष 2024-25 के बजट में इस योजना के लिए 500 करोड़ रुपए का प्रावधान किया था, जिसकी पहली किस्त जारी कर दी गई है। अब 2025-26 की बजट घोषणा के अंतर्गत जनवरी से अप्रैल 2025 तक की 200 करोड़ रुपए की बकाया राशि के लिए प्रस्ताव वित्त विभाग को भेजा जा चुका है।

करीब 4.5 लाख पशुपालकों को मिलेगा सीधा लाभ

राज्य के पशुपालन एवं डेयरी मंत्री जोराराम कुमावत ने बताया कि अब तक प्रदेश के करीब 4.5 लाख पशुपालक किसानों के खातों में यह सहायता राशि डीबीटी के माध्यम से ट्रांसफर की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि, “हमारी सरकार राजस्थान के हर पशुपालक की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने, पशुपालन क्षेत्र के विकास और किसानों की आय को दोगुना करने के लिए प्रतिबद्ध है।”

क्यों खास है मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक संबल योजना

यह योजना न केवल किसानों को सीधी आर्थिक सहायता प्रदान करती है, बल्कि उन्हें संगठित डेयरी व्यवस्था से जोड़ने में भी सहायता करती है। इससे किसान निश्चित दर पर दूध बेच सकते हैं, जिससे उन्हें बाजार की अस्थिरता से राहत मिलती है। साथ ही, 5 रुपए प्रति लीटर की सब्सिडी से दूध उत्पादन पर होने वाला खर्च काफी हद तक संतुलित हो जाता है।

पशुपालकों को कब किया जाएगा शेष राशि का भुगतान 

वित्त विभाग को भेजे गए 200 करोड़ रुपए के प्रस्ताव को जैसे ही मंजूरी मिलती है, उतनी ही शीघ्रता से शेष राशि भी किसानों के बैंक खातों में ट्रांसफर कर दी जाएगी। राज्य सरकार की मंशा केवल वर्तमान में राहत देने की नहीं, बल्कि पशुपालन को एक स्थायी और लाभदायक व्यवसाय के रूप में स्थापित करने की है। दुग्ध उत्पादक किसानों को सब्सिडी देने की यह नीति ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान करने के साथ-साथ युवाओं को भी पशुपालन से जोड़ने का कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक संबल योजना ने राजस्थान के लाखों किसानों के जीवन में बदलाव लाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। कमाई बढ़ाने, लागत घटाने और पशुपालन को सशक्त बनाने के इस प्रयास से ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक स्थिरता आएगी। आने वाले समय में जैसे ही शेष 200 करोड़ रुपए की अनुदान राशि किसानों के खातों में पहुंचेगी, इससे और अधिक पशुपालकों को लाभ मिलेगा और दूध उत्पादन में भी बढ़ोतरी होगी। 

क्या है मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक संबल योजना की खास बातें

  • मुख्यमंत्री दुग्ध उत्पादक संबल योजना के तहत पशुपालकों को प्रति लीटर दूध पर 5 रुपए की सब्सिडी दी जाएगी।
  • सब्सिडी की राशि DBT के माध्यम से सीधे पशुपालक किसान के बैंक खातों में भुगतान की जाएगी।
  • इस योजना का लाभ सहकारी डेयरियों को दूध आपूर्ति करने वाले किसान पशुपालकों को ही होगा। 
  • इस योजना के जरिये सरकार पशुपालन और दुग्ध व्यवसाय को बढ़ावा देने का प्रयास कर रही है।
  • यह योजना किसानों की आय बढ़ाने और खेती के साथ अतिरिक्त आमदनी का स्रोत बन सकती है।

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