धान, मक्का सहित 184 फसलों की नई किस्में जारी, जानें खासियत
प्रकाशित - 07 Jan 2026
by Vivek Tailang
सरसों, तिल, मूंगफली, कुसुम, गोभी सरसों और अरंडी समेत तिलहनों की 13 नई किस्में भी शामिल
किसानों की आमदनी बढ़ाने और कृषि उत्पादन को जलवायु के अनुरूप मजबूत बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) ने 25 प्रमुख फील्ड फसलों की 184 नई और उन्नत किस्में जारी की हैं। इन किस्मों का अनावरण हाल ही में नई दिल्ली में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा किया गया। यह कार्यक्रम ICAR के तत्वावधान में आयोजित हुआ, जिसमें वैज्ञानिकों, वरिष्ठ अधिकारियों, कृषि विश्वविद्यालयों के प्रतिनिधियों और बीज क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों ने भाग लिया।
विपरित मौसम में भी बेहतर उत्पादन देने में सक्षम हैं ये किस्में
केंद्रीय कृषि मंत्री ने कहा कि उच्च उत्पादक, जलवायु सहनशील और रोग-कीट प्रतिरोधी बीजों का विकास किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ देश की खाद्य सुरक्षा को भी मजबूत करेगा। नई किस्में बदलते मौसम, सूखा, बाढ़ और मिट्टी की विविध परिस्थितियों में भी बेहतर उत्पादन देने में सक्षम हैं।
अब तक 7,205 फसल किस्में हो चुकी हैं अधिसूचित
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कृषि मंत्री ने बताया कि भारत ने बीज अनुसंधान और विकास के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 1969 में गजट अधिसूचना की प्रक्रिया शुरू होने के बाद से अब तक देश में 7,205 फसल किस्में अधिसूचित की जा चुकी हैं। इनमें धान, गेहूं, मक्का, ज्वार, बाजरा, दलहन, तिलहन, रेशेदार और अन्य फसलें शामिल हैं। उन्होंने बताया कि पिछले 11–12 वर्षों में नई किस्मों के विकास की रफ्तार और तेज हुई है। इस अवधि में 3,236 उच्च उत्पादक किस्मों को मंजूरी दी गई, जबकि 1969 से 2014 के बीच 3,969 किस्में अधिसूचित की गई थीं। अब जारी की गई 184 उन्नत किस्में किसानों को अधिक उपज, बेहतर गुणवत्ता और जलवायु सहनशीलता जैसे प्रत्यक्ष लाभ देंगी।
कृषि विश्वविद्यालयों और निजी कंपनियों की अहम भूमिका
कृषि मंत्री ने कहा कि इन किस्मों के विकास में ICAR की संस्थाओं के साथ-साथ राज्य एवं केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालयों और निजी बीज कंपनियों का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। फसल आधारित अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजनाओं के तहत वैज्ञानिकों ने वर्षों के शोध, परीक्षण और मूल्यांकन के बाद इन किस्मों को विकसित किया है। इनमें कई किस्में ऐसी हैं जो सूखा सहनशील, लवणीय-क्षारीय मिट्टी में उगने योग्य और रोग-कीट प्रतिरोधी हैं। यह विशेषताएं किसानों को जलवायु परिवर्तन के जोखिम से बचाने में सहायता करेंगी।
क्या है इन नई किस्मों की प्रमुख विशेषताएं
जारी की गई नई किस्मों में उच्च पैदावार के साथ-साथ बेहतर गुणवत्ता, पोषण-समृद्धि और प्रसंस्करण के अनुकूल गुण मौजूद हैं। इससे किसानों को बाजार में बेहतर कीमत मिलने की संभावना बढ़ेगी, वहीं उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न उपलब्ध होगा। कृषि मंत्री ने इसे “लैब से लैंड” की सफल यात्रा बताया और कहा कि लक्ष्य है कि तीन वर्षों के भीतर ये किस्में किसानों तक पहुंचें।
किस फसल की कितनी नई किस्में की गईं हैं जारी
कार्यक्रम में विभिन्न फसल समूहों की किस्में जारी की गईं, जिनका विवरण इस प्रकार है:
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फसल समूह |
जारी की गई किस्में |
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अनाज फसलें |
122 (धान 60, मक्का 50 सहित) |
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दलहन |
6 (अरहर, मूंग, उड़द) |
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तिलहन |
13 (सरसों, तिल, मूंगफली, कुसुम, गोभी सरसों, अरंडी) |
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चारा फसलें |
11 |
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गन्ना |
6 |
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कपास |
24 (22 बीटी कपास) |
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जूट |
1 |
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तंबाकू |
1 |
इनमें ज्वार, बाजरा, रागी, लघु मिलेट्स और प्रोसो मिलेट जैसी मोटे अनाज की किस्में भी शामिल हैं, जो पोषण सुरक्षा को मजबूत करेंगी।
घरेलू बीज विकास को मिलेगा बढ़ावा
कृषि मंत्री ने कहा कि इन नई किस्मों से न केवल किसानों की उत्पादकता बढ़ेगी, बल्कि देश की कृषि को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी मजबूती मिलेगी। कार्यक्रम के दौरान कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव डॉ. देवेश चतुर्वेदी, ICAR के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट और राष्ट्रीय बीज निगम (NSC) की अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. मनिंदर कौर द्विवेदी भी उपस्थित रहीं। इस अवसर पर NSC की ओर से ₹33.26 करोड़ के लाभांश का चेक केंद्रीय कृषि मंत्री को सौंपा गया। कुल मिलाकर ICAR द्वारा जारी की गई ये 184 नई किस्में किसानों के लिए बेहतर उपज, स्थिर उत्पादन और बढ़ी हुई आय का मजबूत आधार बनेंगी।
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