किसानों को सॉइल हेल्थ कार्ड वितरित करेगी सरकार, यहां करें आवेदन
प्रकाशित - 13 Feb 2025
by Tractor Junction
जानें, हेल्थ कार्ड के फायदे और इसके लिए कहां करना होगा आवेदन
Soil Health Card Yojana : सरकार की ओर से किसानों के लिए कई लाभकारी योजनाओं का संचालन किया जा रहा है। उसमें एक सॉइल हेल्थ कार्ड योजना (Soil Health Card Yojana) भी है। इस योजना के तहत किसानों को उनके खेत की मिट्टी की सेहत की जानकारी दी जाती है ताकि वे सही मात्रा में पोषक तत्वों की मात्रा डालकर मिट्टी की उर्वरकता को बनाए रख सके और फसल की पैदावार को भी बढ़ा सके। इसी कड़ी में राज्य सरकार की ओर से आने वाले सालों में सभी किसानों को सॉइल हेल्थ कार्ड दिया जाएगा। इस संबंध में हरियाणा के कृषि मंत्री ने कहा कि “हर खेत-स्वस्थ खेत” अभियान के तहत आगामी तीन से चार सालों में राज्य की प्रत्येक एकड़ भूमि से मिट्टी के नमूने इकट्ठे किए जाएंगे और सभी किसानों को सॉइल हेल्थ कार्ड प्रदान किए जाएंगे।
86 लाख सॉइल हेल्थ कार्ड वितरित
कृषि मंत्री ने बताया कि “हर खेत-स्वस्थ खेत” अभियान के तहत अब तक करीब 70 लाख मृदा (मिट्टी) के नमूने एकत्रित किए जा चुके हैं और 55 लाख नमूनों का विश्लेषण करने के बाद सॉइल हेल्थ कार्ड वितरित किए जा चुके हैं। शेष नमूनों का कार्य प्रगति पर चल रहा है। उन्होंने बताया कि साल 2022 में सॉइल हेल्थ कार्ड प्रोजेक्ट के लिए स्कॉच ग्रुप की ओर से विभाग को स्वर्ण पदक भी मिल चुका है। सॉइल हेल्थ कार्ड योजना के तहत 86.65 लाख सॉइल हेल्थ कार्ड वितरित किए गए हैं।
मिट्टी परीक्षण के लिए बन रही हैं नई प्रयोगशालाएं
कृषि मंत्री ने बताया कि राज्य में 17 नई स्थाई मृदा एवं जल परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की गई हैं। वहीं विभिन्न मंडियों में 54 नई लघु मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएं भी खोली जा चुकी हैं। इसके अलावा राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों और राजकीय महाविद्यालयों में 240 लघु मृदा परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित की जा चुकी हैं। इनमें विज्ञान संकाय के विद्यार्थियों द्वारा मिट्टी के नमूने इक्ट्ठे कर उनका परीक्षण किया जाता है। इस योजना के तहत मृदा (मिट्टी) की जांच के लिए विभाग की ओर से 26 मई 2022 को “हर खेत-स्वस्थ खेत” का पोर्टल लॉन्च किया गया है। उन्होंने बताया कि फलों, सब्जियों, मिट्टी और पानी में कीटनाशक अवशेषों की निगरानी के लिए सिरसा और करनाल में प्रयोगशालाएं स्थापित की गई है। साल 2023–24 में कुल 3640 नमूनों के विश्लेषण किए गए हैं। राज्य सरकार का प्रयास है कि किसानों को भूमि का परीक्षण करके उनको खेती के लिए सही मार्गदर्शन दिया जा सके।
क्या है सॉइल हेल्थ कार्ड
केंद्र सरकार की ओर से सॉइल हेल्थ कार्ड योजना (Soil Health Card Yojana) को वर्ष 2015 में शुरू किया गया था। इसके तहत मिट्टी की गुणवत्ता की जांच की जाती है और मिट्टी में किस पोषक तत्व की कमी है उसका पता लगाया जाता है। एसएचसी की रिपोर्ट में 12 मापदंडों के संबंध में मिट्टी की स्थिति को शामिल किया जाता है। इसमें एन, पी, के (मैक्रो–पोषक तत्व), एस (द्वितीयक–पोषक तत्व), Zn, Fe, Cu, Mn, Bo (सूक्ष्म–पोषक तत्व) और pH, EC, OC (भौतिक पैरामीटर) होते हैं। इसके आधार पर एसएचसी खेत के लिए आवश्यक उर्वरक की मात्रा और मिट्टी की सेहत के सुधार के बारे में आवश्यक उपायों के बारे में जानकारी दी जाती है जो किसानों को फसल की लागत कम करने और फसल की पैदावार बढ़ाने में मददगार होती है।
सॉइल हेत्थ कार्ड बनवाने के क्या हैं फायदे
सॉइल हेल्थ कार्ड (Soil Health Card) बनवाने के कई फायदे होते हैं। सॉइल हेल्थ कार्ड बनवाने के जो फायदे मिलते हैं, वे इस प्रकार से हैं–
- इस कार्ड में मिट्टी की पोषक स्थिति और पीएच स्तर की जानकारी होती है।
- इस कार्ड में फसल के अनुसार पोषक तत्वों और उर्वरकों की कितनी मात्रा देनी है उसका विवरण होता है जिससे किसान निर्धारित मात्रा में फसलों में उर्वरक की सही मात्रा दे सकते हैं।
- सही मात्रा में फसल में उर्वरकों के इस्तेमाल से पैदावार में बढ़ोतरी होती है खेती की लागत कम होती है।
- इस कार्ड के जरिये मिट्टी की गुणवत्ता में सुधार करने के उपायों के बारे में जानकारी मिलती है जिससे मिट्टी की कमियों को दूर करके उत्पादन को बढ़ाने में सहायता मिलती है।
- सॉइल कार्ड के जरिये आप मिट्टी में जिन पोषक तत्वों की कमी है उनकी सही मात्रा का प्रयोग करके इसे बंजर होने से बचा सकते हैं और सालों साल फसल उत्पादन का लाभ ले सकते हैं।
किसान कैसे बनवाएं सॉइल हेल्थ कार्ड
जो किसान सॉइल हेल्थ कार्ड (Soil Health Card) बनवाना चाहते हैं, वे इसके लिए जिला कृषि कार्यालय के जरिये अपनी खेत की भूमि के लिए सॉइल हेल्थ कार्ड के लिए आवदेन कर सकते है। सॉइल कार्ड बनवाने के लिए यदि कोई किसान मिट्टी की जांच करवाना चाहते हैं, तो उन्हें जिला या राज्य नोडल अधिकारी से संपर्क करना होगा। आवेदन के बाद विभाग का एजेंट किसान के पास जाता है और किसान विवरण, भूमि का विवरण एकत्रित करता है और मोबाइल ऐप के जरिये भूमि को जियो-टैग करता है तथा एक क्यूआर कोड बनाता है। जिसमें किसान और भूमि की जानकारी होती है। मिट्टी के सैंपल यानी नमूने को एसटीएल में ले जाया जाता है। जहां 12 मापदंडों पर इसका परीक्षण किया जाता हे। पार्टल पर मिट्टी की जांच के बाद एसएचसी तैयार किया जाता है। एसएचसी फसल और उर्वरक की सिफारिशें देता है जिसके अनुसार किसान को खेत की मिट्टी की प्रकृति के अनुसार फसल का चुनाव कर सकते हैं और कितनी मात्रा में उर्वरक डालना सही रहेगा इसकी भी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं और अपने खेत को स्वस्थ रखकर फसल का बेहतर उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। किसान सॉइल हेल्थ कार्ड के लिए इस योजना की आधिकारिक वेबसाइट soilhealth.dac.gov.in पर जाकर भी ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
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