मधु मक्खी पालन में AI तकनीक से मिलेगा ज्यादा शहद, पूरी जानकारी

Published Oct 31, 2024

क्या मिलेगा फायदा?

इस प्रक्रिया में ज्यादा शहद मिलता है। सामान्य प्रक्रिया में एक बक्से से 25 से 28 किलो तक शहद उत्पादन होता है, लेकिन अब कृत्रिम गर्भाधान तकनीक के उपयोग से प्रति बॉक्स 35 से 36 किलो तक शहद मिल रहा है।

कृत्रिम गर्भाधान के पहले दो चरण

सबसे पहले अधिक उत्पादन देने वाली मधुमक्खी कालोनियों से उच्च उत्पादकता वाले लार्वा का चयन किया जाता है। इसके बाद स्वस्थ कालोनियों में कृत्रिम गर्भाधान करके उच्च उत्पादकता वाली रानी मधुमक्खियां तैयार की जाती हैं।

तीसरा चरण

तीसरे चरण में स्वस्थ और दोषरहित लार्वा को रानी कोशिकाओं में स्थानांतरित किया जाता है ताकि नई हेल्दी रानी मधुमक्खियां उत्पन्न हों। इसके बाद पुरानी रानी को हटाकर कॉलोनी को नई रानी बनाने के लिए प्रेरित किया जाता है।

किसने विकसित की यह नई तकनीक

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस तकनीक को किसी वैज्ञानिक ने नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले के हरख ब्लॉक के दरावपुर गांव निवासी युवा किसान अजीत कुमार ने विकसित किया है।

इस तकनीक से भारत को फायदा

अगर भारत सरकार इस तकनीक को समर्थन देती है और इसे बड़े पैमाने पर लागू किया जा सकता है जिससे भारत जल्द ही विश्व के अग्रणी मधु उत्पादक देशों में शामिल हो सकता है।

सामान्य प्रजनन प्रक्रिया से है यह नुकसान

सामान्य प्रजनन प्रक्रिया में मधुमक्खियों की आनुवंशिक विविधता में कमी आ सकती है जिससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता घट जाती है. जिससे मधुमक्खियों मेंउत्पादन क्षमता कम हो जाती है।

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