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गर्मी के मौसम में पशुओं को बीमारी से बचाएं, इन उपायों को अपनाएं

गर्मी के मौसम में पशुओं को बीमारी से बचाएं, इन उपायों को अपनाएं

21 May, 2020

गर्मियों के मौसम में पशुओं का स्वास्थ्य

ट्रैक्टर जंक्शन पर किसान भाइयों का स्वागत है। इस साल कोरोना लॉकडाउन के कारण पशुओं के दूध का भाव अन्य सालों की अपेक्षा कम है। कोरोना संक्रमण के कारण डेयरी उद्योग को नुकसान उठाना पड़ा है। लेकिन उम्मीद कायम है कि कोरोना संक्रमण काल खत्म होने पर पशुओं का दूध फिर महंगे दामों पर बिकेगा और पशुपालकों और किसानों की आमदनी में इजाफा होगा। इस मई माह के दूसरे पखवाड़े में भीषण गर्मी का दौर शुरू हो चुका है। अब पशुपालकों को दुधारू पशुओं का विशेष ध्यान रखना होगा। पशुपालकों को यह प्रयास करना चाहिए कि उनके पशु बीमार नहीं पड़े। आज हम ट्रैक्टर जंक्शन के माध्यम से कुछ विशेष बातों को जानते हैं जिनसे पशुओं का स्वास्थ्य गर्मी के मौसम में भी बेहतर रहेगा।

 

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गर्मी के मौसम में पशुओं में होने वाली प्रमुख बीमारियां

गर्मी के मौसम में पशुओं के बीमार होने की आशंका बढ़ जाती है। लेकिन यदि देखरेख व खान-पान संबंधी कुछ बुनियादी बातों का ध्यान रखा जाए तो गर्मी में पशु को बीमार होने से बचाया जा सकता है। साथ ही अच्छा उत्पादन लिया जा सकता है। गर्मी के मौसम में पशुओं में लू, अपच व थनैला जैसे रोग हो जाते हैं।

 

 

पशुओं में लू रोग लगने के कारण

  • गर्मियों में जब तापमान बहुत अधिक हो जाता है तथा वातावरण में नमी अधिक बढ़ जाती है जिससे पशु को लू लगने का खतरा बढ़ जाता है।
  • अधिक मोटे पशु व कमजोर पशु लू के लिए अधिक संवेदनशील होते हैं।
  • ज्यादा बालों वाले या गहरे रंग के पशु को लू लगने का खतरा ज्यादा होता है।
  • यदि बाड़े में बहुत सारे पशु रखे जाएं तो भी लू लगने की आशंका बढ़ जाती है।
  • यदि पशु के रहने के स्थान में हवा की निकासी की व्यवस्था ठीक न हो तो पशु लू का शिकार हो सकता है।

पशुओं में लू लगने के लक्षण

  • शरीर का तापमान बढ़ जाना।
  • पशु का बेचैन हो जाना।
  • पशु में पसीने व लार का स्त्रावण बढ़ जाता है।
  • पशु भोजन लेना कम कर देता है या बंद कर देते हैं।
  • पशु का अत्यधिक पानी पीना एवं ठंडे स्थान की तलाश।
  • पशु का दूध उत्पादन कम हो जाता है।

लू लगने पर उपचार

  • पशु को दाना कम एवं रसदार चारा अधिक देना चाहिए।
  • पशु को आराम करने देना चाहिए।
  • पशु चिकित्सक की सहायता से ग्लूकोज नसों में चढ़वाएं।
  • गर्मियों में पशु को हर्बल दवा (रेस्टोबल) की 50 मिली मात्रा दिन में दो बार उपलब्ध करवानी चाहिए।
  • पशु को बर्फ के टुकड़े चाटने के लिस उपलब्ध करवाएं।
  • पशु को हवा के सीधे संपर्क से बचाना चाहिए।
  • पशुओं को ठंडा पानी समय-समय पर पीने के लिए उपलब्ध कराना चाहिए।
  • पशुओं को दिन में नहलाना चाहिए। खासतौर पर भैंस को ठंडे पानी से नहलाना चाहिए।

 

यह भी पढ़ें : किसान उत्पादक संगठन : देश का किसान बनाएगा खुद की कंपनी, सरकार देगी 2 करोड़

 

पशुओं में अपच रोग

गर्मियों में अधिकतर पशु चारा खाना कम कर देते हैं। खाने में अरूचि दिखाता है तो पशुओं को बदहजमी हो जाती है। इस समय पशु को पौष्टिक आहार नहीं देने पर अपच व कब्ज की संभावना होती है।

अपच रोग के कारण

अधिक गर्मी होने पर कई बार पशु मुंह खोलकर सांस लेता है जिससे उसकी लार  बाहर निकलती रहती है। साथ में जब पशु शरीर को ठंडा रखने हेतु शरीर को चाटता है जिससे शरीर की लार कम हो जाती है। एक स्वस्थ पशु में प्रतिदिन 100-150 लीटर लार का स्त्रवण होता है जो रूमेन में जाकर चारे को पचाने में मदद करती है। लार के बाहर निकल जाने पर चारे का पाचन प्रभावित होता है। जिससे गर्मियों में अधिकतर पशु अपच का शिकार हो जाता है।

अपच रोग के लक्षण

  • पशु का कम राशन लेना या बिल्कुल बंद कर देना।
  • पशु का सुस्त हो जाना। गोबर में दाने आना। उत्पादन का प्रभावित होना।

अपच रोग से बचाव के लक्षण

  • पशु को हर्बल दवा रूचामैक्स की 1.5 ग्राम मात्रा दिन में दो बार 2-3 दिनों तक देनी चाहिए।
  • पशु को उसकी इच्छानुसार स्वादिष्ट राशन उपलब्ध करवाएं।
  • यदि 1-2 दिन बाद भी पशु राशन लेना न शुरू करें तो पशु चिकित्सक की मदद लेकर उचित उपचार करवाना चाहिए।
  • आजकल पशुपालकों के पास भूसा अधिक होने से वह अपने पशुओं को भूसा बहुतायत में देते हैं। ऐसे में पशुओं का हाजमा दुरुस्त रखने एवं उत्पादन बनाए रखने के लिए पशु को रूचामैक्स की 15 ग्राम मात्रा दिन में दो बार 7 दिनों तक देनी चाहिए। इससे पशु का हाजमा दुरुस्त होगा और दुग्ध उत्पादन भी बढ़ता है।

पशुओं में थनैला रोग 

यह थनैला रोग की वह अवस्था होती है जो बिना ब्याहे पशु में हो जाती है। अक्सर बाड़े में सफाई का उचित प्रबंध न होने, ब्राह्य परजीवियों के संक्रमण, पशु के शरीर पर फोड़े-फुंसियां होने व गर्मी में होने वाले तनाव से भी थानैले की संभावना ज्यादा हो जाती है। ग्रीष्मकालीन थनैला रोग की जांच जितनी जल्दी हो जाए उतना ही अच्छा होता है। अत: पशु-पालकों को दूध की जांच नियमित रूप से हर दो सप्ताह में मैस्ट्रिप से करनी चाहिए।

 

 

थनैला रोग के लक्षण

  • पशुओं के शरीर का तापमान बढ़ जाता है।
  • अयन का सूज जाना या उसमें कड़ापन आ जाना।
  • थनों में गंदा बदबूदार पदार्थ निकलना।
  • कभी-कभी थनों से खून आता है।

थनैला से बचाव

ब्यांत के बाद जब पशु दूध देना बंद करता है उस समय पशु चिकित्सक की सहायता से थनों में एंटीबायोटिक दवाएं डाली जाती है जिसे ड्राई अंदर थैरेपी कहते हैं।

थनैला का उपचार

  • ग्रीष्मकालीन थनैला अपनी शुरुआती अवस्था में है तो थनों को दूध निकालने के बाद साफ पानी से धोकर दिन में दो बार मैस्ट्रिप क्रीम का लेप प्रभावित तथा अप्रभावित दोनों थनों पर जरूर करें तथा युनिसैलिट का 15 दिनों तक प्रयोग करें।
  • ग्रीष्मकालीन थनैला को अपने उग्रअवस्था में होने पर पशु चिकित्सक की परामर्श इस एंटीबायोटिक दवाओं के साथ मैस्तिलेप का उपयोग करें।
  • ग्रीष्मकालीन में पशु की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने हेतु युनिसेलिट की 15 ग्राम मात्रा ब्यांत के 15 दिन के पहले शुरू करके लगातार 15 दिनों तक देनी चाहिए। इस प्रकार ब्यांत के बाद पशुओं में होने वाले थनैला रोग की संभावना कम हो जाती है।

 

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मौसम विभाग की चेतावनी  :  इस बार पड़ेगी कंडाके की सर्दी, तापमान में गिरावट का दौर शुरू

मौसम विभाग की चेतावनी : इस बार पड़ेगी कंडाके की सर्दी, तापमान में गिरावट का दौर शुरू

जानें, क्या है इसकी वजह और क्या रखनी चाहिए इस मौसम में सावधानियां? इन दिनों मौसम में हो रहे बदलाव को लेकर मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के अनुसार इस साल पिछले साल की अपेक्षा अधिक सर्दी पडऩे का अनुमान है। मौसम विभाग की जारी चेतावनी के अनुसार इस साल सर्दी की शुरुआत भले ही देरी से हो रही हो लेकिन इस साल सर्दी कड़ाके की पडऩे वाली है। ऐसा इसलिए बताया जा रहा है कि इस समय आसमान से बादल गायब हो चुके हैं और चटक धूप पड़ रही है पर उमस कम हो गई हैं। हालांकि रात के तापमान में गिरावट का रूख देखा जा रहा है। सर्दी के मौसम के इस शुरुआती संकेतों से यह कहा जा रहा है कि आने वाले दिनों में सर्दी अपना असर दिखाना शुरू कर देगी। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि अक्टूबर माह से ही दिन के तापमान में भी कमी आने लगेगी, इसके बाद जाड़े की प्रारंभिक शुरुआत हो जाएगी। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार हवाओं का रुख बदलने लगा है। निम्न दवाब वाले उत्तरी क्षेत्रों में अब उच्च दबाव की वजह से हवाओं की रफ्तार बढ़ी है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 ला नीना की स्थिति कमजोर भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र के अनुसार इस वर्ष ला नीना की स्थिति के कारण कड़ाके की ठंड पड़ सकती। मीडिया को दी जानकारी में उन्होंने बताया कि यह नहीं समझना चाहिए कि जलवायु परिवर्तन से तापमान में बढ़ोतरी होती है, बल्कि इसके विपरीत इसके कारण मौसम अनियमित हो जाता है। महापात्र ने कहा, ‘चूंकि ला नीना की स्थिति कमजोर है, इसलिए हम इस वर्ष ज्यादा ठंड की उम्मीद कर सकते हैं। अगर शीत लहर की स्थिति के लिए बड़े कारक पर विचार करें तो अल नीनो और ला नीना बड़ी भूमिका निभाते हैं।’ ला नीना का यह हो रहा प्रभाव निजी मौसम ऐजेंसी स्काईमेट वेदर सर्विस से जुड़े वैज्ञानिक शर्मा द्वारा मीडिया को दी गई जानकारी के अनुसार इस समय ला नीना की स्थिति बन रही है। इसके चलते जहां सर्दी का मौसम लंबा हो सकता है। वहीं ठंड भी कड़ाके की पड़ सकती है। इसी वजह से मानसून की बारिश भी पूरे देश में सामान्य से ज्यादा हुई है। जबकि अल नीना की स्थिति में इसका उल्टा होता है। क्या है ला नीना और अल नीनो भारत में मौसम के रुख को तय करने में ला नीना और अल नीनो प्रभाव का काफी अहम रोल है। ला नीना एक प्रक्रिया है, जिसके तहत समुद्र में पानी ठंडा होना शुरू हो जाता है। समुद्री पानी पहले से ही ठंडा होता है, लेकिन इसके कारण उसमें ठंडक बढ़ती है जिसका असर हवाओं पर पड़ता है। एल निनो में इसके विपरीत होता है, दोनों ही क्रियाओं का असर सीधे तौर पर भारत के मॉनसून और सर्दी के मौसम पर पड़ता है। शुरुआती सर्दी के दौर में क्या रखें सावधानियां सर्दी के शुरुआती दौर में मौसमी बीमारियों फैलने का खतरा अधिक रहता है। कहा भी जाता है कि आती सर्दी और जाती सर्दी दोनों स्वास्थ्य के लिहाज से परेशानी देने वाली होती है। वहीं वर्तमान में कोविड-19 का असर भी बरकरार है और डब्ल्यूएचओ ने इसका फैलाव सर्दियों में तेज होने को लेकर चेतावनी भी जारी की है तो इसे देखते हुए हमें इस सर्दी में अपना विशेष तौर पर ध्यान रखना जरूरी हो जाता है, तो आइए जानते हैं क्या सावधानी हमें इन सर्दियों में रखनी चाहिए ताकि बीमारी हमसे कोसो दूर रहे। कोविड-19 के इस दौर में जितनी बार संभव हो अपने हाथ साबुन से धोएं ताकि कीटाणु फैल नहीं सके। क्योंकि सबसे ज्यादा हाथों से ही कीटाणुओं का फैलाव होता है और यही कीटाणु बीमारियां फैलने का मुख्य कारण हैं। इसलिए हाथों की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। अधिक तनाव से बचें, क्योंकि यह आपके शरीर की बीमारियों और संक्रमण से लडऩे की क्षमता है उसमें बाधा उत्पन्न करता है। इसके लिए सुबह सैर पर जरूर जाएं। शरीर की रोगों से लडऩे की क्षमता को मजबूत करने के लिए प्रतिदिन करीब आधा घंटा व्यायाम अवश्य करना चाहिए। इससे शरीर चुस्त-दुरुस्त बनता है। जब कभी आप सर्दी, जुकाम या बुखार से पीडि़त हों, तो ज्यादा से ज्यादा आराम करने की कोशिश करें। साधारण भोजन को प्राथमिकता दें, चिकनाई युक्त भोजन से परहेज करें तो बहुत ही अच्छा है। सर्दी और फ्लू वायरस की वजह से होते हैं, इसलिए इनमें एंटीबायटिक मदद नहीं करतीं। इस दौरान जरूरत से ज्यादा कसरत न करें। साधारणत: सर्दी या फ्लू होने से पहले गला खराब हो जाता है। ऐसे में चाय, कॉफी या गुनगुना नींबू पानी व शहद का प्रतिदिन सेवन करें। हर आधा घंटे में नमक डालकर गुनगुने पानी से गरारे करें जिससे गले की खराश और सर्दी की अन्य समस्याओं में आराम मिलेगा। इसके अलावा जो बीमारियां आपको पहले से हैं उनका ध्यान अवश्य रखें। समय-समय पर डाक्टर को अपना चेकअप कराते रहे ताकि कोई परेशानी हो तो उसका समय रहते निदान हो सके। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

दिन का बढ़ा हुआ तापमान से बुवाई में हो रही है देरी, किसानों को बीज के जलने का डर

दिन का बढ़ा हुआ तापमान से बुवाई में हो रही है देरी, किसानों को बीज के जलने का डर

मौसम के मिजाज से रबी की बुवाई में हो रही है देरी राजस्थान में अधिकतर स्थानों पर खरीफ की फसल कट चुकी है और उनके विक्रय का कार्य चल रहा है। वहीं दूसरी ओर खेत खाली पड़े हैं। किसानों ने अभी तक अगली फसल रबी की बुवाई अभी तक नहीं की है। सामान्यत: रबी की बुवाई का कार्य एक अक्टूबर से शुरू हो जाता है लेकिन इस बार तापमान में तेजी के कारण किसान रबी की बुवाई नहीं कर पा रहे हैं। हालांकि सुबह और रात के तापमान में गिरावट आई है, पर दोपहर का तापमान रबी की बुवाई के लिहाज से काफी अधिक है। अभी भी दिन का तापमान 35-36 डिग्री चल रहा है जबकि रबी की बुवाई के लिए 23-30 डिग्री तापमान की जरूरत होती है। इस संबंध में कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को अभी कुछ दिन और इंतजार करने की सलाह दी है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार जब तक दिन का तापमान कम नहीं हो जाता तब तक बुवाई करना ठीक नहीं है। इधर किसान भी बीज जलने की आशंका से बुवाई करने से डर रहे हैं। बता दें कि रबी फसलों में सरसों की बुवाई जल्दी हो जाती है लेकिन तापमान की अधिकता से इस बार सरसों की बुवाई अभी तक नहीं हो पा रही है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 देश के सबसे अधिक तापमान वाले स्थानों में अधिकतर राजस्थान के निजी मौसम ऐजेंसी स्काईमेट के अनुसार शुक्रवार को मॉनसून की विदाई के बाद अधिकतम तापमान उत्तर भारत के कई राज्यों में 40 डिग्री के करीब दर्ज किया जा रहा है। पिछले 24 घंटों के दौरान देश के 10 गर्म शहरों की सूची में सबसे ऊपर रहा राजस्थान का चुरू, जहां अधिकतम तापमान 39.7 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। इसके अलावा हरियाणा, गुजरात के कई जिलों में भी तापमान की तल्खी अभी भी बरकरार है। राजस्थान में चूरू 39.7, श्रीगंगानगर 39.5, बाड़मेर 39, बीकानेर 38.2, मिलानी 38.2, जैसलमेर 37.9 व जोधपुर में 37.4 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकार्ड किया गया है। वहीं राजस्थान के अन्य जिलों में भी सूरज की तल्खी बनी हुई है। इधर गुजरात राज्य के दिसा में 39.4 और अहमदाबाद में 39.9 डिग्री सेल्सियस तापमान रहा। जबकि हरियाणा के नारनौल में 38.5 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया। राजस्थान में रबी फसलों का संभावित बुवाई का लक्ष्य राजस्थान राज्य में इस बार रबी सीजन में 98.30 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई का लक्ष्य रखा गया है। कृषि विभाग के अनुसार रबी सीजन में 32 लाख हैक्टेयर में गेहूं, 16 लाख हैक्टेयर में चना और 3 लाख हैक्टेयर में जौ की बुवाई का लक्ष्य तय किया गया है। रबी फसलों की बुवाई के लिए कृषि विभाग की तैयारियाँ पूरी है लेकिन बढ़ा हुआ तापमान आड़े आ रहा है। कृषि विशेषज्ञों की क्या है राय रबी की बुवाई के लिए मिट्टी में नमी का होना बहुत जरूरी है और ये जब संभव है की दिन के तापमान में गिरावट आए। मिट्टी में नमी नहीं होने से बीज की लागत बढ़ जाती है और उत्पादन पर भी इसका असर पड़ता है। इस तल्ख तापमान में यदि बुवाई की जाती है तो बीज जल सकता है और इसके अंकुरण में दिक्कत होगी वहीं उत्पादन प्रभावित होगा वो अलग। इसलिए किसानों को अभी कुछ दिन और इंतजार करना चाहिए। जब तापमान कम हो जाए और मिट्टी में पर्याप्त नमी होने लगे तब रबी फसल की बुवाई शुरू करनी चाहिए। मौसम की प्रतिकूलता से साल दर साल घटता सरसों का रकबा मौसमी कारणों के चलते सरसों की बुवाई का रकबा पिछले कुछ बरसों से लगातार घटता जा रहा है। मौसम की अनुकूलता होने पर आम तौर पर सितंबर अंत से सरसों की बुवाई शुरू हो जाती है। लेकिन इस बार सितंबर जा चुका और अक्टूबर का एक सप्ताह बीत चुका है पर मौसम प्रतिकूल बना हुआ है। अभी तक सरसों की बुवाई नहीं हो पा रही है। बता दें कि राजस्थान में सबसे अधिक सरसों का उत्पादन श्रीगंगानगर में होता है। इसके बाद दूसरे नंबर पर अलवर व तीसरा नंबर भरतपुर का आता है। इसमें सबसे अधिक गुणवत्ता वाले सरसों के तेल के लिए भरतपुर पहचाना जाता है। यहां के सरसों के तेल की गुणवत्ता के लिहाज से इसका देश में प्रथम स्थान है। लेकिन मौसम की प्रतिकूलता और आयातित विदेशी तेल के कारण भरतपुर का काफी सरसों उत्पादित क्षेत्र आलू उत्पादित क्षेत्र में परिवर्तित हो गया है। इससे यहां साल दर साल इसके रकबे में कमी आती जा रही है। यही हाल अन्य जिलों का हो है। यहां भी सरसों का रकबा साल दर साल कम होता जा रहा है। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

मानसून की विदाई के साथ ही शुरू होने लगा सर्दी का अहसास

मानसून की विदाई के साथ ही शुरू होने लगा सर्दी का अहसास

निम्न दबाव का क्षेत्र बनने से कई जगह बारिश की संभावना देश में मानसून विदा होने को हैं और सर्दी ने दस्तक देनी शुरू कर दी है। प्राय: सभी जगह मौसम में परिवर्तन होने लगा है। सुबह और शाम को हल्की सर्दी का अहसास होना शुरू हो गया है। इसी के साथ तापमान में भी गिरावट आनी शुरू हो गई है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार इस बार सर्दी जल्द ही दस्तक देगी। इस दौरान वायुमंडल में घटती आर्द्रता, सूखी हवाएं और साफ हो रहा आसमान सर्दी के आने की आहट दे रहा है। पूर्वानुमान के मुताबिक अक्टूबर की समाप्ति तक दिन का पारा 30 डिग्री सेल्सियस और रात का तापमान 22 डिग्री के नीचे चले जाने का अनुमान लगाया जा रहा है। मौसम के पूर्वानुमान को लेकर निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट के अनुसार दक्षिण-पश्चिमी मॉनसून उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कुछ और भागों के साथ समूचे राजस्थान तथा गुजरात के कुछ हिस्सों से आज दोपहर या शाम तक अलविदा कह जाएगा। इस दौरान देश में कई मौसमी सिस्टम बन रहे हैं जिससे देश के कुछ हिस्सों में मध्यम व हल्की बारिश हो सकती है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 इस समय देश में बन रहे मौसमी सिस्टम ओडिशा और इससे सटे भागों पर एक निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। इस सिस्टम के साथ ही एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र भी बना हुआ है। इस सिस्टम से छत्तीसगढ़ होते हुए महाराष्ट्र के उत्तरी भागों तक एक ट्रफ बनी है। साथ ही एक ट्रफ दक्षिणी तटीय तमिलनाडु तक भी बनी हुई है। उत्तरी अंडमान सागर पर जल्द ही एक नया मौसमी सिस्टम विकसित हो सकता है। 9 अक्टूबर के आसपास इसके निम्न दबाव में और 11-12 अक्टूबर तक डिप्रेशन बनने की संभावना है। पिछले 24 घंटों के दौरान कैसा रहा देश के विभिन्न राज्यों में मौसम- बीते 24 घंटों की अवधि के दौरान बिहार, असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश में हल्की से मध्यम बारिश के साथ कुछ स्थानों पर भारी बारिश दर्ज की गई। ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड, पश्चिम बंगाल, पूर्वोत्तर भारत, विदर्भ, पूर्वी मध्य प्रदेश, तटीय आंध्र प्रदेश, अंडमान व निकोबार द्वीपसमूह तथा उत्तरी कर्नाटक में कुछ जगहों पर हल्की से मध्यम बारिश हुई। कोंकण गोवा, दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और लक्षद्वीप में एक-दो स्थानों पर हल्की बारिश देखने को मिली। अगले 24 घंटों के दौरान मौसम का पूर्वानुमान अगले 24 घंटों के दौरान पश्चिम बंगाल, तटीय ओडिशा, उत्तरी तटीय आंध्र प्रदेश, बिहार के कुछ हिस्सों, असम और अरुणाचल प्रदेश में हल्की से मध्यम वर्षा जारी रहेगी। एक-दो स्थानों पर भारी बारिश का भी अनुमान है। पूर्वोत्तर भारत, झारखंड, छत्तीसगढ़, पूर्वी मध्य प्रदेश, आंतरिक ओडिशा, तेलंगाना, विदर्भ, अंडमान व निकोबार द्वीपसमूह, दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक, दक्षिणी तटीय कर्नाटक और केरल में हल्की से मध्यम बारिश कुछ स्थानों पर हो सकती है। दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश, कोंकण गोवा और तमिलनाडु में एक-दो स्थानों पर हल्की बारिश होने की संभावना है। उत्तर भारत के पहाड़ी और मैदानी इलाकों समेत मध्य भारत के अधिकांश हिस्सों में मौसम साफ और शुष्क बना रहेगा। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

मौसम का पूर्वानुमान : 15 अक्टूबर तक देश से विदा हो जाएगा मानसून

मौसम का पूर्वानुमान : 15 अक्टूबर तक देश से विदा हो जाएगा मानसून

विदाई की ओर से बढ़ता मानसून 2020 देश से मानसून विदा होने की ओर अग्रसर हो रहा है। हर बार की तरह इस बार भी देश से मानसून की विदाई 15 अक्टूबर तक हो सकती है। उत्तराखंड में इस साल सामान्य से 19 प्रतिशत बारिश के साथ मानसून ने विदाई कर ली है। अब यहां का मौसम शुष्क है। मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिन तक उत्तराखंड में मौसम शुष्क रहेगा। आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं। वहीं उत्तर बिहार के जिलों में अगले चार दिनों तक हल्के बादल रह सकते हैं। हालांकि आमतौर पर मौसम शुष्क रहेगा। इस अवधि में 8-10 किमी़ प्रति घंटा की गति से पछुआ हवा चलने की संभावना मौसम विभाग ने जताई है। डॉ. राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विवि के मौसम विभाग ने तीन अक्टूबर तक का मौसम पूर्वानुमान जारी किया है। इसके अनुसार इस अवधि में सापेक्ष आर्द्रता सुबह में 70 से 80 प्रतिशत एवं दोपहर में 55 से 65 प्रतिशत रह सकता है। इस अवधि में अधिकतम तापमान 31 से 33 व न्यूनतम 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने का अनुमान है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 देश के विभिन्न हिस्सों में बने मौसमी सिस्टम निजी मौसम एजेंसी स्काईमेट के अनुसार बंगाल की खाड़ी के उत्तरी मध्य भागों पर बना चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र अब निम्न दबाव बन गया है और ओडिशा के तटों के करीब आ गया है। वहीं बंगाल की खाड़ी के उत्तर और पश्चिम-मध्य भागों पर बने इस सिस्टम से तमिलनाडु के तट तक एक ट्रफ रेखा बनी हुई है। इधर दक्षिणी गुजरात के पास हवाओं में एक चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र दिखाई दे रहा है। इसी प्रकार उत्तर-पश्चिम भारत में उत्तर पश्चिमी दिशा में मध्यम हवाएं चलनी शुरू हो गई हैं। इससे दिन के तापमान में हल्की वृद्धि जबकि रात के तापमान में कुछ गिरावट शुरू हो गई है। पिछले 24 घंटों के दौरान देश भर में कैसा रहा मौसम पिछले 24 घंटों के दौरान देश के गंगीय पश्चिम, ओडिशा, रायलसीमा के कुछ हिस्सों, उत्तरी तमिलनाडु और अंडमान व निकोबार द्वीपसमूह के कुछ भागों में हल्की से मध्यम बारिश के साथ एक-दो स्थानों पर भारी बारिश हुई। वहीं गुजरात क्षेत्र, दक्षिण-पूर्वी मध्य प्रदेश, दक्षिण राजस्थान, दक्षिण-मध्य महाराष्ट्र, तेलंगाना के कुछ हिस्सों, तटीय आंध्र प्रदेश, आंतरिक तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल में हल्की से मध्यम बारिश हुई। इसके अलावा पूर्वोत्तर भारत, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में कहीं-कहीं हल्की वर्षा रिकॉर्ड की गई। वहीं उत्तर-पश्चिम भारत और पश्चिमी-हिमालयी राज्यों में सभी स्थानों पर मौसम शुष्क बना रहा। अगले 24 घंटों के दौरान मौसम का पूर्वानुमान बात करें अगले 24 घंटों के मौसम की तो देश के ओडिशा, तटीय आंध्र प्रदेश, गंगीय पश्चिम बंगाल, झारखंड के कुछ हिस्सों और नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम व त्रिपुरा में कुछ स्थानों पर गरज के साथ भारी बारिश बौछारें पडऩे का अनुमान है। वहीं असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, उप हिमालयन पश्चिम बंगाल और अंडमान व निकोबार द्वीपसमूह में हल्की से मध्यम बारिश के साथ एक-दो स्थानों पर भारी बारिश भी हो सकती है। इधर तमिलनाडु, रायलसीमा, कर्नाटक, तेलंगाना, कोंकण और गोवा, मध्य महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ के कुछ हिस्सों, पूर्वी मध्य प्रदेश और दक्षिणी गुजरात में कुछ स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। इसके अलावा बिहार और दक्षिणी राजस्थान में भी एक-दो स्थानों पर हल्की बारिश होने की संभावना है। इधर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली समेत उत्तर के पहाड़ी और मैदानी इलाकों में मौसम शुष्क रहेगा। उत्तर-पश्चिमी हवाएं मध्यम गति से चलती रहेंगी। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

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