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ITOTY Awards के दूसरे संस्करण का इंतजार शुरू

ITOTY Awards  के दूसरे संस्करण का इंतजार शुरू

12 February, 2020 Total Views 2508

भारतीय ट्रैक्टर उद्योग को समर्पित ट्रैक्टर जंक्शन के पहले ITOTY Awards - 2019 (इंडियन ट्रैक्टर ऑफ द ईयर अवार्ड) की लोकप्रियता के बाद अब 2020 में दूसरे ITOTY Awards का इंतजार शुरू हो गया है। ट्रैक्टर जंक्शन ने पिछले साल 3 मई 2019 को दिल्ली में भारतीय ट्रैक्टर उद्योग के लिए ट्रैक्टर और कृषि उपकरणों को कवर करने के लिए इस अवार्ड समारोह का आयोजन किया था। आपको बता दें कि Escorts Powertrac Euro 50 को पहला ITOTY Awards  मिला था। पहले अवार्ड शो में देश सहित विश्व की प्रतिष्ठत ट्रैक्टर कंपनियों, सैकड़ों डीलरों व हजारों की संख्या में किसानों ने भाग लिया था।

ट्रैक्टर जंक्शन के फाउंडर रजत गुप्ता के अनुसार भारत दुनिया के सबसे बड़े ट्रैक्टर उत्पादकों और बाजार के लीडरों में से एक है। भारतीय कृषि और किसानों के उत्थान के लिए जी-जान से पर्दे के पीछे काम करने वाले रचनात्मक व्यक्तियों को प्रोत्साहित करना आवश्यक है। भारत में कृषि यंत्रीकरण हमेशा तेजी से बढ़ता रहा है। ऐसे में ट्रैक्टर जंक्शन इस बात को लेकर लगातार काम कर रहा है कि एक नए इको सिस्टम में तकनीक और फंक्शनलिटी को लेकर कई नई चीजों को शमिल किया जा सके। हमारा मकसद निर्माता, डीलर्स और ग्राहकों के बीच की दूरी को कम करना है।

देश में ITOTY का कॉन्सेप्ट मात्र एक साल  पुराना है जबकि इंडियन कार ऑफ द ईयर ((ICOTY)) और इंडियन मोटरसाइकिल ऑफ द ईयर ((ICOTY)) पिछले 10-15 सालों से हो रहा है। ITOTY में पिछली बार की तरह इस बार भी 25 से अधिक अवार्ड केटेगरीज को शामिल किया जाएगा। इनमें Tractor of the Year 2020, New Launch of the Year 2020, Best CSR Initiative for Farmers, Best Design Tractor जैसे अवार्ड शामिल होंगे। इसमें अनुभवी जजों का पैनल होगा। इसके अलावा ग्राहक अपनी पंसद के प्रतिभागी की जीत के लिए वोटिंग भी कर सकेंगे। इस पूरी प्रक्रिया में इस बात का सख्ती से पालन किया जाएगा कि वोटिंग प्रक्रिया पारदर्शी और निष्पक्ष हो। इस वोटिंग प्रक्रिया में कई अवार्ड कैटेगिरी में ग्राहक और जज अपना फैसला देंगे। इनमें फ्यूल की बचत, तकनीकी उन्नति, आराम, स्टाइल, सुरक्षा और परफॉर्मेंस, वैल्यू फॉरमनी, नयापन जैसे फैक्टर शामिल होंगे।

लगातार बढ़ेगा ट्रैक्टर और कृषि उपकरणों से जुड़ा बाजार :

रजत गुप्ता के अनुसार भारत में आबादी के एक बड़े हिस्से की आय का प्रमुख स्त्रोत खेती और उससे जुड़े अन्य क्षेत्र हैं। देश में कृषि उत्पादन बढ़ाने में ट्रैक्टरों और कृषि यंत्रों का बड़ा योगदान है। देश में हर साल औसतन 7 से 8 लाख ट्रैक्टरों की बिक्री होती है। कृषि यंत्रीकरण से जुड़ी लगभग सभी कंपनियां लगातार बढ़ रही हैं। देश में 5 मिलियन ट्रैक्टर किसानों के पास हैं जो 1.5 एचपी/एचए से कम रेंज के हैं जबकि विकसित देशों में 8 से 10 एचपी/एचए के ट्रैक्टर प्रयुक्त हो रहे हैं जिससे देश में ट्रैक्टर व कृषि यंत्रीकरण के क्षेत्र में विकास की बहुत गुंजाइश है। भारत में 159.2 मिलियन हैक्टेयर के कृषि योग्य क्षेत्र में से 13 मिलियन हैक्टयेर क्षेत्र में ट्रैक्टरों की आवश्यकता होती है। ऐसे में वित्त वर्ष 2027 तक ट्रैक्टरों के बाजार में निरंतर वृद्धि की अपार संभावना है।

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सोनालिका ट्रैक्टर ने COVID-19 महामारी के बीच अपने मौजूदा ग्राहकों को वारंटी पर अतिरिक्त समय प्रदान किया।

सोनालिका ट्रैक्टर ने COVID-19 महामारी के बीच अपने मौजूदा ग्राहकों को वारंटी पर अतिरिक्त समय प्रदान किया।

पीपल-फर्स्ट दृष्टिकोण के प्रति अपने संकल्प के लिए वचनबद्ध है। नई दिल्ली, 31 मार्च 2020: भारत का सबसे युवा एवं तेजी से बढ़ते ट्रैक्टर ब्रांड, सोनालिका ट्रैक्टर मौजूदा कोरोनावायरस महामारी के बीच एक और पहल के साथ आए है । अपने पीपल-फर्स्ट दृष्टिकोण को आगे बढ़ाते हुए एवं अपने ग्राहकों को सेवा सुनिशित करते हुए, कंपनी ने अपने ट्रैक्टरर्स की वारंटी पर 3 महीने का अतिरिक्त समय प्रदान करने की घोषणा उन ग्राहकों के लिए की है जिनकी वारंटी मार्च, अप्रैल और मई 2020 की अवधि में पूरी होने के लिए निर्धारित है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 इस पहल पर चर्चा करते हुए, सोनालीका समूह के कार्यकारी निर्देशक, श्री रमन मित्तल ने कहा, “इस विकट समय में, हम किसान समुदाय का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध हैं और हमने इन कठिन परिस्थितियों के दौरान उत्तरदायी बने रहने के लिए इष्टतम उपाय किए हैं। हम इस महामारी की स्थिति को देखते हुए वारंटी पर अतिरिक्त समय प्रदान किए जाने की पहल का पालन करेंगे, जहां ग्राहक घरों में सीमित रहने की स्थिति में हैं, वहीं सीमित संसाधनों के साथ हमारा टोल-फ्री नंबर कार्यात्मक है।" उन्होंने कहा, "पहले यह सुनिश्चित करेगी कि मार्च, अप्रैल और मई 2020 में वारंटी समाप्त होने वाले ट्रैक्टर्स को वारंटी समाप्ति की तारीख से 3 महीने तक का अतिरिक्त समय दिया जाएगा। इसके अलावा, किसी भी छूटी हुई निर्धारित रखरखाव सेवा का भी ध्यान रखा जाएगा। हम इस कठिन समय के दौरान हमारी निरंतर सहायता से ग्राहकों को आश्वस्त करते हैं और आशा करते हैं कि यह पहल उनके ट्रैक्टर से संबंधित किसी भी चिंता को कम करने में मदद करेगी।” सभी कंपनियों के ट्रैक्टरों के मॉडल, पुराने ट्रैक्टरों की री-सेल, ट्रैक्टर खरीदने के लिए लोन, कृषि के आधुनिक उपकरण एवं सरकारी योजनाओं के नवीनतम अपडेट के लिए ट्रैक्टर जंक्शन वेबसाइट से जुड़े और जागरूक किसान बने रहें।

सोनालीका ट्रैक्टर्स ने लॉकडाउन में सबसे पहले दिया अपने संविदाकर्मियों, एडहॉक कर्मचारियों, प्रशिक्षुओं को मार्च का एडवांस वेतन

सोनालीका ट्रैक्टर्स ने लॉकडाउन में सबसे पहले दिया अपने संविदाकर्मियों, एडहॉक कर्मचारियों, प्रशिक्षुओं को मार्च का एडवांस वेतन

नई दिल्ली, 24 मार्च 20: भारत के सबसे आधुनिक एवं तेजी से बढ़ते ट्रैक्टर ब्रांड ने हाल ही में चल रहे COVID-19 के खतरे से निपटने के लिए अपने कर्मचारियों, सहयोगियों और समाज की भलाई के प्रति कई उपाय किए हैं। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 सोनालीका समूह के कार्यकारी निदेशक रमन मित्तल ने मौजूदा स्थिति पर ऑर्गेनाइजेशन को आश्वस्त किया, है कि, "हम सभी एक वैश्विक महामारी के बीच फंसे हैं। समय की जरूरत को देखते हुए, हम सभी की भलाई सुनिश्चित करने के लिए मजबूती से खड़े हुए हैं। एक एसी आर्गेनाईजेशन होने के नाते जहा उसके कर्मचारी कंपनी के मुल्ये हिस्सा है, सभी चुनोतियो का सामना करने की योग्यता है| हम अपने कर्मचारियों और उनके परिवारों का समर्थन करने के लिए आगे तक साथ में खड़े रहेंगे। इसके चलते कार्यकाल लॉकडाउन के दौरान हमारे सभी संविदाकर्मियों, एडहॉक कर्मचारियों, प्रशिक्षुओं और प्लांट में ट्रेनिज, बिजनेस और कार्यालयों में पूर्ण मजदूरी देने का सुनिश्चित निर्णय लिया है। इसके अलावा, हमने संभावित पलायन को प्रबंधित करने के लिए सभी सोनालीका कर्मचारियों को मार्च (2020) के महीने के लिए 20 दिनों का अग्रिम वेतन भी जारी कर दिया है। हम समाज और हमारे राष्ट्र की भलाई के लिए साथ में खड़े हैं और आवश्यक उपायों को सुनिश्चित करने के लिए राज्य स्तरीय प्रशासन के साथ मिलकर काम करना जारी रखेंगे।" सभी कंपनियों के ट्रैक्टरों के मॉडल, पुराने ट्रैक्टरों की री-सेल, ट्रैक्टर खरीदने के लिए लोन, कृषि के आधुनिक उपकरण एवं सरकारी योजनाओं के नवीनतम अपडेट के लिए ट्रैक्टर जंक्शन वेबसाइट से जुड़े और जागरूक किसान बने रहें।

न्यू हॉलैंड ने बाजार में उतारा 5 लाख वां ट्रैक्टर

न्यू हॉलैंड ने बाजार में उतारा 5 लाख वां ट्रैक्टर

भुवनेश्वर. न्यू हॉलैंड एग्रीकल्चर इंडिया, यंत्रीकृत समाधानों की एक उन्नत श्रेणी पेश करने वाला देश का पहला ब्रांड है जिसने इस महीने अपना 5,00,000वें ट्रैक्टर को बाजार में उतारा है। भारत में संतुष्ट ग्राहकों के विस्तार के आधार और एक हजार से अधिक ग्राहक स्पर्श बिंदुओं के बढ़ते नेटवर्क के साथ, न्यू हॉलैंड ने बाजार की पहुंच और लोकप्रियता दोनों के मामले में अपनी नेतृत्व स्थिति को और अधिक मजबूत किया है। ब्रांड कृषि उपकरणों की एक उन्नत श्रेणी की पेशकश करके किसानों की मदद कर रहा है जो फसल जलने की आवश्यकता को समाप्त करता है और फसल उत्पादकता और लाभप्रदता बढ़ाता है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 इस अवसर पर बोलते हुए श्री कुमार बिमल (निदेशक, बिक्री) ने कहा कि हम इस बात से बेहद खुश हैं कि हम अपने ग्राहकों की बढ़ती संख्या के बावजूद ग्राहकों का भरोसा बनाए हुए हैं। देश में 5 लाख वें ट्रैक्टर को बिक्री के लिए निकालना कंपनी के लिए एक जबरदस्त उपलब्धि है, जो हमारी विकास क्षमता की पुन: पुष्टि करता है और हमें प्रोत्साहित करता है कि हम अपने किसानों को सबसे आधुनिक समाधान प्रदान करने के लिए अपनी आगामी उत्पादन रेंज में नई तकनीकों को जोडऩा जारी रखें। न्यू हॉलैंड ट्रैक्टरों की एक तकनीकी रूप से श्रेष्ठ श्रेणी के साथ-साथ भूमि की तैयारी से लेकर कटाई के बाद के कार्यों जैसे घास और चारा के उपकरण, प्लांटर्स, बेलर, स्प्रेयर और जुताई के उपकरणों की पूरी शृंखला प्रदान करता है। ब्रांड के ट्रैक्टरों की रेंज नवीनतम प्रौद्योगिकी, शक्तिशाली और ईंधन कुशल इंजनों के साथ आती है और किसानों के लिए पहली पसंद बनकर उभरी है। न्यू हॉलैंड कस्टमर केयर सेंटर देश के ग्राहकों को हिंदी और अंग्रेजी सहित दस भाषाओं में सहायता प्रदान करता है और इसका टोल फ्री नंबर 1800-419-0124 है। सभी कंपनियों के ट्रैक्टरों के मॉडल, पुराने ट्रैक्टरों की री-सेल, ट्रैक्टर खरीदने के लिए लोन, कृषि के आधुनिक उपकरण एवं सरकारी योजनाओं के नवीनतम अपडेट के लिए ट्रैक्टर जंक्शन वेबसाइट से जुड़े और जागरूक किसान बने रहें।

भविष्य में डीजल और पेट्रोल पर नहीं चलेंगे ट्रैक्टर, डीएमई इंजन होगा विकसित

भविष्य में डीजल और पेट्रोल पर नहीं चलेंगे ट्रैक्टर, डीएमई इंजन होगा विकसित

ट्रैफे और आईआईटी कानप़ुर विकसित करेंगे डीएमई इंजन, ट्रैक्टरों में डीजल और पेट्रोल की निर्भरता घटेगी भविष्य में ट्रैक्टर के इंजन बिना पेट्रोल और डीजल के चलेंगे, यह कहना कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी। देश में किसानों के खर्चों को कम करने के लिए ट्रैक्टर को बिना पेट्रोल और डीजल के लिए चलाने के लिए कई प्रयोग चल रहे हैं। इन्हीं प्रयोग की शृंखला में डीएमई इंजन का नाम भी शामिल होने जा रहा है। देश के सबसे प्रतिष्ठित ट्रैक्टर निर्माताओं में शामिल ‘ट्रैक्टर और फार्म इक्विपमेंट लिमिटेड’ (TAFE) और आईआईटी कानपुर मिलकर ट्रैक्टर इंजनों के लिए एक ऐसी प्रौद्योगिकी विकसित करेंगे जो डीजल और पेट्रोल जैसे ईंधन की बजाए डीआई मिथाइल ईथर (DME) पर चलेंगे। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 लंबे समय से डीआई मिथाइल ईथर को पारंपरिक ईंधन का विकल्प माना जाता है, क्योंकि यह एक हरा ईंधन है जिसे बायोमास से भी उत्पादित किया जा सकता है। डीएमई की एक बहुत अच्छी उच्च संख्या है जिसका अर्थ है कि यह दबाव के तहत आसानी से प्रज्वलित कर सकता है। इस कारण इसे डीजल के एक आसान विकल्प के रूप में देखा गया है। इसे डीजल से चलने वाले वाहनों और ऑटोमोबाइल में ईंधन के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। आईआईटी कानपुर के डा. अविनाश कुमार अग्रवाल और प्रोफेसर तरूण गुप्ता ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग की पहल पर Imprint-2 के तहत डीएमई संचालित डीजल इंजनों के लिए प्रौद्योगिकी विकसित की है, जिसे अब परियोजना के लिए 1.60 करोड़ रुपए की राशि से मान्यता दी गई है। टैफे इस परियोजना के साथ एक औद्योगिक भागीदार के रूप में जुड़ा हुआ है। एक औद्योगिक भागीदार के रूप में टैफे ने इस परियोजना के लिए वित्तीय प्रतिबद्धता दी है। शोधकर्ताओं ने बताया कि टैफे का उद्देश्य बेस डीजल इंजन में संशोधन करना है और इसे डीएमई अनुकूलन के लिए रेट्रोफिट कीट के लिए विकसित करना है। इस संशोधन के साथ मौजूद इंजनों को भी डीएमई पर चलाने के लिए बनाया जा सकता है। शोधकर्ताओं ने ट्रैक्टर इंजन के एक प्रोटो टाइप का निर्माण करने की भी योजना बनाई है जो डीएमई द्वारा पूरी तरह से संचालित किया जाएगा। यह भी पढ़ें : जापानी कंपनी कुबोटा ने एस्कॉर्ट्स की 10 प्रतिशत हिस्सेदारी 1,042 करोड़ रुपए में खरीदेगी डीएमई के उपयोग से लाभ डीएमई पर चलने वाले ट्रैक्टर इंजन का विकास दुनिया के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है क्योंकि पर्यावरण के संरक्षण के लिए दुनियाभर में शोध चल रहे हैं। डीएमई जैसा हरे रंग का ईंधन पर्यावरण संरक्षण में स्थायी विकास प्राप्त करने में मदद कर सकता है। डीएमई, एक गैर विषैला और पर्यावरण के अनुकूल ईंधन है। इसलिए यह मिट्टी को जहर नहीं देगा, भले ही यह गलती से फैल जाए। यह पानी में नहीं डूबता है और मिट्टी द्वारा अवशोषित नहीं होता है, जो इसे ट्रैक्टरों पर उपयोग करने वाले किसानों को सुरक्षित बनाता है। जबकि डीजल रिसाव से मिट्टी खराब हो सकती है और मिट्टी की गुणवत्ता बहुत प्रभावित होती है। जैसा कि टैफे अपने मौजूदा इंजनों को संशोधित करता है, किसान निकट भविष्य में ऐसे कई डीएमई चलने वाले वाहनों की उम्मीद कर सकते हैं। सभी कंपनियों के ट्रैक्टरों के मॉडल, पुराने ट्रैक्टरों की री-सेल, ट्रैक्टर खरीदने के लिए लोन, कृषि के आधुनिक उपकरण एवं सरकारी योजनाओं के नवीनतम अपडेट के लिए ट्रैक्टर जंक्शन वेबसाइट से जुड़े और जागरूक किसान बने रहें।

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कोरोना वायरस से दूध की खपत 25 फीसदी घटी अब सरकार से  राहत की उम्मीद ?

कोरोना वायरस से दूध की खपत 25 फीसदी घटी अब सरकार से राहत की उम्मीद ?

कोरोना वायरस का दूध उत्पादक किसानों पर असर ट्रैक्टर जंक्शन पर किसान भाइयों का एक बार फिर स्वागत है। देशभर में कोरोना का साइड इफेक्ट लगातार बढ़ता जा रहा है। कोरोना संक्रमण के कारण मृत्यु के मामले और कोरोना पॉजिटिव लोगों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। देशभर में लॉकडाउन के चलते हर तबका मुसीबत में है, किसान भी इससे अछूते नहीं है। देश का किसान रबी फसल की कटाई में जुटा हुआ है। देश के कई प्रांतों के किसानों ने रबी फसल की कटाई का काम पूरा कर लिया है लेकिन वह अपनी उपज को बेच नहीं पा रहा है। पशुपालन से जुड़े किसानों पर भी लॉकडाउन का असर पड़ा है। देश में दूध की खपत करीब 25 फीसदी तक घट गई और किसानों को गांव में दूध कम दामों पर बेचना पड़ रहा है। ऐसे में किसानों को सरकार से उम्मीद है कि उनके लिए भी कुछ राहत भरे कदम उठाए जाएं। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 कोरोना से देश में दूध की खपत 25 फीसदी तक कम कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए देश में लॉकडाउन के चलते होटल, रेस्तरां, हलवाई की दुकानें और चाय की थडिय़ां बंद है। जिससे दूध की खतप करीब 25 फीसदी तक कम हो गई है। इससे पशुपालक किसानों की कमाई में 5 से 7 रुपए प्रति लीटर तक की कमी आई है। देश में मांग की तुलना में दूध की आपूर्ति बढ़ गई है। देश के कुछ इलाकों में तो किसान आधी कीमत पर दूध बेचने को मजबूर है। देश के दूरदराज इलाकों में परिवहन सेवाएं बंद होने के कारण निजी और सरकारी कंपनियां दूध की खरीद नहीं कर पा रही हैं। देश के प्रमुख दुग्ध उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक औ तमिलनाडू में कोविड-19 के पैर परसारने के कारण यह स्थिति पैदा हुई है। किसानों को गाय के दूध के 31 और भैंस के दूध के 50 रुपए लीटर मिलता है दाम अमूल ब्रांड से दुग्ध उत्पादक बेचने वाली देश की सबसे बड़ी दुग्ध कंपनी गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन संघ (जीसीएमएमएफ) के प्रबंध निदेशक आर.एस. सोढ़ी के हवाले छपी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक देश में होटल, रेस्टोरेंट और चाय की दुकानें बंद होने से पिछले एक महीने के दौरान दूध की खपत में 25 फीसदी की कमी आई है। आइसक्रीम और दूध से बने उत्पादों की खुदरा दुकानें बंद होने से दूध की खपट घटी है। लेकिन घरों में घी, मक्खन और दूध की खपत बढ़ी है। सोढ़ी के अनुसार बड़ी दूध की कंपनियों को तो ऊंची कीमत चुकानी पड़ेगी क्योंकि उनका किसानों के साथ पुराना नाता है। जीसीएमएमएफ किसानों को गाय के दूध के लिए 31 रुपए प्रति लीटर और भैंस के दूध के लिए 50 रुपए प्रति लीटर का भुगतान करती है। यह भी पढ़ें : 8.69 करोड़ किसानों को अप्रैल के पहले सप्ताह में मिलेंगे 2 हजार रुपए अब कुछ किसान कम कीमत पर दे रहे हैं दूध एक मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दूध की खपत में कमी के कारण महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडू और गुजरात में किसानों को सस्ती कीमत पर दूध बेचना पड़ रहा है। गांवों में दूध की मौजूदा कीमत 30 से 31 रुपए प्रति लीटर है लेकिन कुछ किसान आधी कीमत पर ही दूध कंपनियों को दूध दे रहे हैं। इससे किसानों की कमाई 5 से 7 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से कम हुई है। आपको बता दें कि निजी और छोटी सहकारी कंपनियां ज्यादा आपूर्ति की स्थिति में किसानों को कम कीमत देकर मौके का फायदा उठाती है। निर्यात प्रभावित होने से स्किम्ड मिल्क पाउडर की कीमतों में भी गिरावट वहीं दुनियाभर में लॉकडाउन के कारण निर्यात प्रभावित होने से स्किम्ड मिल्क पाउडर की कीमतों में भी गिरावट आई है। यह स्थिति अभी कुछ हफ्ते और रहेगी। करीब एक महीने बाद गर्मियां शुरू होने के साथ ही दूध की आपूर्ति में कमी आएगी और कीमतें फिर से अपनी पुरानी स्थिति में पहुंच जाएंगी। अमूमन जब दूध की आपूर्ति खपत से अधिक होती है तो दुग्ध कंपनियां स्किम्ड मिल्क पाउडर (एसएमपी) बनाती हैं ताकि मांग बढऩे और आपूर्ति घटने पर इसे बेचा जा सके। निर्यात रुकने के कारण एसएमपी की कीमतों में भारी गिरावट आई है। खेप रोक दी गई और कोई ऑर्डर नहीं आ रहा है। बाजार में पर्याप्त मात्रा में एसएमपी उपलब्ध नहीं है। इसके बावजूद अतिरिक्त दूध को एसएमपी में बदलने और ज्यादा मांग के समय आपूर्ति के लिए रखना व्यावहारिक नहीं है। कई दुग्ध कंपनियों के पास कार्यशील पूंजी नहीं है। क्योंकि उन्हें बैंक से फंड नहीं मिल रहा है। मांग कम होने से घरेलू बाजार में एसएमपी 230 रुपए प्रति किलो के भाव से मिल रहा है जबकि एक माह पहले इसकी कीमत 310 रुपए प्रतिकिलो के आसपास थी। सभी कंपनियों के ट्रैक्टरों के मॉडल, पुराने ट्रैक्टरों की री-सेल, ट्रैक्टर खरीदने के लिए लोन, कृषि के आधुनिक उपकरण एवं सरकारी योजनाओं के नवीनतम अपडेट के लिए ट्रैक्टर जंक्शन वेबसाइट से जुड़े और जागरूक किसान बने रहें।

कोविड-19 लॉकडाउन में सरकारी बैंकों से ले इमरजेंसी लोन और छह महीने तक किश्त की चिंता नहीं ?

कोविड-19 लॉकडाउन में सरकारी बैंकों से ले इमरजेंसी लोन और छह महीने तक किश्त की चिंता नहीं ?

15 सरकारी बैंकों ने किया राहत स्कीमों का ऐलान, उठाएं फायदा ट्रैक्टर जंक्शन पर देश के किसान भाइयों का एक बार फिर स्वागत है। आज हम बात करते हैं कोरोना लाकडाउन के समय मिलने वाले सस्ते लोनों के बारे में। कोरोना वायरस की इस मुश्किल घड़ी में किसान, मजदूर, व्यापारी, छात्र, छोटे दुकानदार, महिलाओं की मदद के लिए देश के सरकारी बैंकों ने खास पहल शुरू की है। देश के करीब 15 सरकारी बैंक इमरजेंसी लोन सहित अन्य तरीक के लोन उपलब्ध करा रहे हैं। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 कोरोना लॉकडाउन में सस्ते लोन कोरोना (कोविड 19) लॉकडाउन की संकटकालीन घड़ी में सस्ते लोन उपलब्ध कराने के लिए जहां सरकारी बैंकों ने तत्परता दिखाई है वहीं निजी सैक्टर के बैंक अभी इस मामले में पीछे हैं। कोरोना लॉकडाउन के बाद देश के कुल 18 सरकारी बैंकों में से कम से कम 15 बैंकों ने विभिन्न सेक्टरों के लिए राहत स्कीमों का एलान किया है। इसे लोगों को तात्कालिक स्थितियों से निपटने में थोड़ी राहत मिलेगी। भारतीय स्टेट बैंक इस तरह के लोन की पेशकश करने वाला पहला बैंक है। ऐसे कर्ज पर छह महीने तक कोई किश्त नहीं देनी होगी। उसके अगले छह महीनों से 7.25 फीसदी की रियायती दर से कर्ज चुकाना होगा। इन बैंकों में उपलब्ध है सस्ते लोन भारतीय स्टेट बैंक पंजाब नेशनल बैंक बैंक ऑफ बड़ौदा केरना बैंक यूनियन बैंक ऑफ इंडिया बैंक ऑफ इंडिया इंडियन बैंक बैंक ऑफ महाराष्ट्र सिंडिकेट बैंक इंडियन ओवरसीज बैंक यूको बैंक आंध्र बैंक सिडबी यह भी पढ़ें : 8.69 करोड़ किसानों को अप्रैल के पहले सप्ताह में मिलेंगे 2 हजार रुपए कोविड-19 और बैंकों के इमरजेंसी लोन की खास बातें इमरजेंसी लोन से कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन के समय लोगों को अपनी नकद जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी। इन लोन स्कीमों में छह महीने तक किश्तों का कोई भुगतान नहीं करना होगा। इसके बाद लोन की अदायगी शुरू होगी। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया : स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने कोविड 19 इमरजेंसी क्रेडिट लाइन नाम से यह सुविधा शुरू की है। कैपिटल लिमिट के 10 फीसदी के बराबर होगी। इसमें खात बात यह है कि 200 करोड़ रुपए तक का अधिकतम लोन दिया जा सकेगा। इस लोन योजना के तहत लिए गए ब्याज दर की लिमिट 7.25 फीसदी रखी गई है। इस सुविधा के तहत कोई प्रोसेसिंग फीस या प्री पेमेंट पेनल्टी नहीं वसूली जाएगी। यह सुविधा 30 जून 2020 तक उपलब्ध होगी। इंडियन बैंक : इंडियन बैंक के पांच स्पेशल कोविड इमरजेंसी लोन स्कीम है। इससे नौकरीपेशा वर्ग, पेंशनर, स्वयं सहायता स्मूह, एमएसएमई और बड़े कॉरपोरेट घराने लाभान्वित होंगे। बैंक के मौजूद ग्राहक भी इस स्कीम का फायदा ले पाएंगे। बैंक से बहुत बड़ा किसान वर्ग भी जुड़ा हुआ है। इंडियन बैंक के नौकरीपेशा ग्राहक अपनी सैलरी के 20 गुना तक कर्ज ले सकते हैं। इसकी ऊपरी सीमा 2 लाख रुपए है। इंडियन बैंक की वरिष्ठ नागरिक इमरजेंसी पेंशन लान के तहत अपनी मासिक पेंशन के 15 गुना तक कर्ज ले सकते हैं। इसमें भी 2 लाख रुपए की ऊपरी सीमा है, ऐसे लोन की अवधि 5 साल है। यह जीरो कंसेशनल इंटरेंस्ट या चार्ज पर मिलेगा। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया : यूनियन बैंक ऑफ इंडिया उन व्यापारियों को भी कर्ज दे रहा है जिनके काम पर लॉकडाउन से असर पड़ा है। यह उनकी कार्यशील पूंजी के 10 फीसदी तक दिया जाएगा। बैंक ऑफ बड़ौदा : बैंक ऑफ बड़ौदा ने बड़ौदा कोविड इमरजेंसी क्रेडिट लाइन शुरू की है। यह स्वीकृत लोन सीमा के 10 फीसदी तक अतिरिक्त धन मुहैया कराएगा। कारर्पोरेट के लिए ब्याज दर स्टैंडर्ड प्रीमियम के बिना 8.15 फीसदी होगी। एमएसएमई को 8 फीसदी की दर से लोन मिलेगा। बैंक ऑफ इंडिया : बैंक ऑफ इंडिया ने कोविड इमरजेंसी सपोर्ट स्कीम शुरू की है। इसके तहत कॉर्पोरेट अपनी मौजूदा कार्यशील पूंजी सीमा पर 20 फीसदी अतिरिक्त क्रेडिट का लाभ उठा सकते हैं। स्कीम के तहत नौकरीपेशा को उनकी अंतिम सैलरी के तीन गुना तक लोन दिया जाएगा। सिडबी : सरकारी वित्तीय संस्थान सिडबी ने भी 5 फीसदी की रियायती दरों पर एमएसएमई को कर्ज उपलब्ध कराने का ऐलान किया है। सभी कंपनियों के ट्रैक्टरों के मॉडल, पुराने ट्रैक्टरों की री-सेल, ट्रैक्टर खरीदने के लिए लोन, कृषि के आधुनिक उपकरण एवं सरकारी योजनाओं के नवीनतम अपडेट के लिए ट्रैक्टर जंक्शन वेबसाइट से जुड़े और जागरूक किसान बने रहें।

कोविड-19 लॉक डाउन में किसानों को मिली बड़ी राहत, मंडिया खुलेंगी

कोविड-19 लॉक डाउन में किसानों को मिली बड़ी राहत, मंडिया खुलेंगी

मंडिया खुलेंगी, किसान बेच सकेंगे फसल ट्रैक्टर जंक्शन पर किसान भाइयों का एक बार फिर स्वागत है। आज बड़ी खुशी की बात है कि सरकार ने भी किसानों को भारत का भाग्य विधाता मान लिया है। कोरोना संकट के समय केंद्र की मोदी सरकार ने किसानों को बड़ी राहत दी है। अब लॉक डाउन के दौरान कृषि के कार्य प्रभावित नहीं होंगे। सरकार ने नई गाइडलाइन जारी कर किसानों को कई प्रकार की छूट दी है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप -http://bit.ly/TJN50K1 किसानों के लिए सरकार की गाइडलाइन कोरोना लॉकडाउन के दौरान कृषि की हालत खराब नहीं हो इसलिए गृह मंत्रालय ने किसानों को कई तरह की छूट दी है। केंद्र सरकार ने खेती से जुड़े कार्यों, मशीनरी, उर्वरक, खाद-बीज की दुकानों, कृषि उपज मंडियों व खरीद-फरोख्त से जुड़ी एजेंसियों को लॉकडाउन से बाहर कर दिया है। यानि अब किसान आराम से खेत पर जा सकेंगे। ट्रैक्टर से जुताई, कंबाइन मशीन से फसल काट सकेंगे। नजदीकी कस्बों से बीज, डीएपी व यूरिया खरीद सकेंगे। अपनी फसल को मंडी पहुंचा सकेंगे। दूसरे शहर या राज्यों से फसल कटाई में काम आने वाली मशीनों को मंगा सकेंगे। यानि अब लॉक डाउन से कृषि कार्य प्रभावित नहीं होंगे। हालांकि किसानों से अपील की गई है कि वो उचित सामाजिक दूरी बनाए रखें और कोरोना गाइडलाइन का ध्यान रखें। यह भी पढ़ें : 8.69 करोड़ किसानों को अप्रैल के पहले सप्ताह में मिलेंगे 2 हजार रुपए किसानों के लिए गृह मंत्रालय के नए आदेश कोरोना के कारण देश के किसानों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही थी। किसानों की फसल खेत में खड़ी है और उसे काटने के लिए न तो मजदूर मिल रहे हैं न ही मशीन उपलब्ध हो पा रही है। मंडियां नहीं खुलने व समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीद नहीं होने के कारण किसान अपनी उपज को नहीं बेच पा रहे हैं और आर्थिक परेशानी से गुजर रहे हैं। किसानों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए गृह मंत्रालय ने 27 मार्च 2020 को नए आदेश जारी किए हैं। ये आदेश पूरे देश में लागू होंगे। इसके अलावा राज्य सरकारों ने भी किसानों की सुविधा के अनुसार कुछ रियायतें उपलब्ध कराई हैं। गाइडलाइन की खास बातें किसान बिना किसी रुकावट के कृषि कार्य करें। मजदूरों को काम करने में परेशानी नहीं होनी चाहिए। फसल कटाई से जुड़ी मशीनें (कंबाइन-रीपर) आदि एक राज्य से दूसरे राज्य में जा सकेंगी। फसल कटाई और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल खरीद में जुटे लोग एक-दूसरे स्थान पर जा सकेंगे। सभी सरकारी मंडियां, कृषि उत्पादन मंडी समितियां या फिर वे मंडियां जिन्हें राज्य सरकारों ने मान्यता दी हैं, खुलेंगी। खाद-बीज और रासायनिक कीटनाशकों की दुकानें खुल सकेंगी। फार्म मशीनरी, कस्टम हायरिंग सेंटर खुलेंगे। जानिए, किस राज्य के किसान को क्या सुविधा मिली उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, बिहार, हरियाणा समेत कई राज्य सरकारों ने फसल कटाई, मंडी, खाद-बीज, कीटनाशक, राशन व मंडी तक सामान ले जाने के संबंध में आदेश जारी किए हैं। सरकारों ने कहा है कि किसानों को खेती-बाड़ी से जुड़े कार्यों में दिक्कत नहीं आनी चाहिए। उत्तर प्रदेश : यूपी के अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी ने निर्देश जारी किए हैं। इसमें पुलिस-प्रशासन से कहा गया है कि रबी फसल की कटाई में प्रयुक्त कंबाइन हार्वेस्टर काम करेंगे। खेतों व अन्य कृषि कार्यों में श्रमिक काम कर सकेंगे। उर्वरक व कीटनाशकों की दुकानों खुलेंगी। रेलवे रैक द्वारा उवर्रक की आपूर्ति जारी रहेगी। इन कामों में लगे श्रमिकों को आने-जाने में छूट रहेगी। बीज विधायन संयंत्र के संचालन और कार्य में लगे श्रमिकों को भी छूट रहेगी। साथ ही किसानों को सोशल डिस्टेसिंग बनाए रखने और खेत में ज्यादा मजदूरों को इकट्ठा नहीं होने की अपील की गई है। हरियाणा : कोरोना महामारी से जंग के बीच हरियाणा सरकार ने किसानों को राहत दी है। बंद के दौरान किसान अपने खेतों में बेरोकटोक आवाजाही कर सकेंगे। फसल कटाई में भी किसानों को कोई दिक्कत नहीं आएगी। फसलों की कटाई के लिए आवागमन करने वाली कंबाइन हार्वेस्टर और दूसरी मशीनों को सडक़ों पर रोका नहीं जाएगा। प्रदेश सरकार ने इस संबंध में पुलिस, प्रशासन को निर्देश जारी कर दिए हैं। राजस्थान : राजस्थान सरकार ने 23 मार्च को जारी आदेश में कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद बंद कर दी थी, लेकिन फसल की कटाई जारी रहेगी। गहलोत सरकार ने फसल कटाई के दौरान एहतियात बरतने के आदेश जारी किए हैं। इसमें कहा है कि.फसल कटाई के लिए कोशिश हो कि ज्यादा से ज्यादा मशीन (कंबाइन) से हो। इस दौरान खेत में काम करने वाले लोग एक दूसरे से 5 मीटर की दूरी पर रहें और समय-समय पर हाथ धुलते रहें। खेतों में काम करने वाले लोग किसान या मजदूर, अपना अपना पानी अलग-अलग रखें, खाने के बर्तन भी अलग हों। अगर किसी व्यक्ति को खांसी, जुखाम, बुआर आदि है तो उसे कृषि कार्य से दूर रखे। कोरोना से लड़ाई में किसानों की भी है महत्वपूर्ण जिम्मेदारी गांव हो या खेत.. सोशल डिस्टेसिंग (उचित दूरी- यानि एक दूसरे के बीच न्यूनतम 1 मीटर की दूरी) बनाए रखिए। खेत में एक साथ ज्यादा मजूदरों को काम नहीं करना चाहिए। मजदूर, या आप खुद एक ही बोतल से पानी नहीं पिएं। खेत में बाल्टी और साबुन रखिए और हाथ धुलते रहिए। फसल काटें तो सुखाकर रखें, जल्द बेचने की कोशिश न करें औने-पौने दाम मिलेंगे। अपने जिले के इमरजेंसी नंबर अपने पास रखें। सबसे जरूरी चीज अपनी सेहत का पूरा ख्याल रखें। सभी कंपनियों के ट्रैक्टरों के मॉडल, पुराने ट्रैक्टरों की री-सेल, ट्रैक्टर खरीदने के लिए लोन, कृषि के आधुनिक उपकरण एवं सरकारी योजनाओं के नवीनतम अपडेट के लिए ट्रैक्टर जंक्शन वेबसाइट से जुड़े और जागरूक किसान बने रहें।

कोरोना लॉकडाउन से देशभर में रुकी फसलों की सरकारी खरीद ?

कोरोना लॉकडाउन से देशभर में रुकी फसलों की सरकारी खरीद ?

जानिए कोविड-19 से फसलों के नुकसान का मुआवजा मिलेगा या नहीं कोरोना वायरस (कोविड-19) की दहशत कम होती नहीं दिख रही है। 27 मार्च 2020 गुरुवार दोपहर तक भारत में 17 लोगों की मौत हो चुकी थी। वहीं 724 लोग संक्रमित है। इसके अलावा विश्व के अन्य देशों में हालात और भी भयावह है। विश्व के अन्य देशों में 24 हजार 57 लोगों की मौत हो चुकी है और सक्रमण के 5 लाख 31 हजार 860 मामले हैं। देश में कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए 14 अप्रैल तक 21 दिन का लॉकडाउन पीरियर चल रहा है। ऐसे में समर्थन मूल्य पर फसलों की खरीद बंद कर दी गई। किसानों की फसल खेत में खड़ी है और किसान उसे काटने की तैयारी कर रहा है। ट्रैक्टर जंक्शन इस पोस्ट के माध्यम से किसानों के हर सवाल का जवाब दे रहा है जो उनके मन में है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप -http://bit.ly/TJN50K1 समर्थन मूल्य पर खरीद प्रक्रिया बंद केंद्र सरकार ने इस वर्ष गेहूं का उत्पादन 105 मिलियन टन होने की संभावना व्यक्त की है। कोरोना लॉकडाउन की वजह से फसलों को काटने के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं। मजदूर खेत में जाने से डर रहे हैं। दूसरी तरफ बेमौसम बरसात का सिलसिला भी देश के उत्तरी राज्यों में जारी है जिससे किसानों को फसलों में नुकसान होने की संभावना है। देशभर में लॉक डाउन के कारण कृषि मशीनें भी एक राज्य से दूसरे राज्य नहीं जा पा रही है। कोरोना (कोविड-19) से फसल नुकसान का मुआवजा : मिलेगा या नहीं देशभर में लॉकडाउन के कारण ट्रांसपोर्टेशन के वाहन भी बंद है। देशवासियों से अपने-अपने घरों में रहने की अपील की गई है। जनजीवन थम गया है। लॉकडाउन का कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब देशभर के खेतों में फसलों की कटाई अंतिम चरण में चल रही है और किसानों को इसे जल्दी से जल्दी बेचना चाहते हैं। केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत मानव निर्मित जोखिम को शामिल नहीं किया गया है, जिससे देश का कोई भी किसान यह दावा नहीं कर सकता है कि कोरोना वायरस (कोविड-19) के कारण हुए नुकसान का बीमा किया जाएगा। यदि खेत में पड़ी फसल का नुकसान बारिश या ओले से होता है तो यह प्राकृतिक आपदा है। फसल कटाई के बाद खेत में सूखने के लिए छोड़ी गई फसल की क्षति होने पर भी किसानों को बीमा का लाभ दिया जाता है। किसानों को कोविड-19 जैसी महामारी से नुकसान की भरपाई के देश में फिलहाल कोई योजना नहीं है। सरकार अन्य योजनाओं के माध्यम से किसानों को फायदा पहुंचा रही है। अब किसानों की भरपाई बस सरकार के राहत पैकेज से ही हो सकती है। यह भी पढ़ें : 8.69 करोड़ किसानों को अप्रैल के पहले सप्ताह में मिलेंगे 2 हजार रुपए समर्थन मूल्य पर कब शुरू होगी सरकारी खरीद देश में लॉकडाउन की घोषणा से पहले देश के कई राज्यों में एक अप्रैल व 15 अप्रैल से रबी फसलों की समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीद शुरू होनी थी। लेकिन लॉकडाउन के बाद हालत उलट हो गए हैं। अब फसलों की समर्थन मूल्य पर खरीद कब शुरू होगी यह देश में लॉकडाउन हटने की तिथि 15 अप्रैल के बाद ही पता चलेगा। फसलों की संभावित खरीद से पहले ही पंजाब, हरियाणा तथा राजस्थान ने अपने राज्यों में गेहूं की खरीद अनिश्चित समय के लिए स्थगित कर दी है। लॉक डाउन के कारण मंडियां भी बंद है। ऐसे में किसानों के पास बाजार में भी बेचने का विकल्प उपलब्ध नहीं है। ट्रैक्टर जंक्शन सभी किसान भाइयों को सलाह देना चाहता है कि किसान भाई परिवार के सहयोग से खेत में खड़ी फसलों को काटकर अपने घर व गोदामों में रखे। लॉक डाउन हटने के बाद फिर से सरकारी खरीद शुरू होगी और मंडियां भी खुल जाएंगी। इसके अलावा कई राज्यों में अभी तक समर्थन मूल्य पर पंजीकरण की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हुई है। पंजीकरण के बाद ही किसान अपनी फसल समर्थन मूल्य पर बेच सकते हैं। किसान कैसे करें फसलों का सुरक्षित भंडारण देशभर के किसान फसलों की कटाई में जुटे हैं। अब उनके सामने फसलों को बेचने की समस्या है। लेकिन लॉकडाउन के कारण 15 अप्रैल से पहले फसलों को बेचना लगभग असंभव है। अत: जिन किसानों ने अपनी फसल काट ली है वह भंडारण की व्यवस्था सुनिश्चित कर लें। भंडार में अन्न रखने से पहले मालाथियान 50 ई.सी. एक भाग एवं 300 भाग पानी में घोलकर अच्छी तरह से भंडार में छिडक़ाव करें। बीज से लिए रखी अन्न की बोरियों पर भी मालाथियान धूल का भुरकाव कर दें। अगर अन्न में कीड़ लगने शुरू हो जाए तो उसे शीघ्र बेच दें। कीड़े लगने की दशा में प्रधुमन भी कर सकते हैं। इसके लिए वायुरोधी बर्तन में ई.डी.बी. 3 मिली प्रति क्विंटलन की दर से काम में लाएं। देशी तरीके से भंडारण करने के लिए एक सौ किलोग्राम अनाज में 5 किलोग्राम सूखी नीम या सदाबहार या कनेर की पत्तियां अच्छी तरह से मिलाकर रखने से कीटों का बचाव होता है। सभी कंपनियों के ट्रैक्टरों के मॉडल, पुराने ट्रैक्टरों की री-सेल, ट्रैक्टर खरीदने के लिए लोन, कृषि के आधुनिक उपकरण एवं सरकारी योजनाओं के नवीनतम अपडेट के लिए ट्रैक्टर जंक्शन वेबसाइट से जुड़े और जागरूक किसान बने रहें।

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