भारत के टायर निर्यात में आई तेजी, 14,097 करोड़ रुपए का हुआ कारोबार

Published - 13 Jul 2021

भारत के टायर निर्यात में आई तेजी, 14,097 करोड़ रुपए का हुआ कारोबार

वित्तीय वर्ष 2020-21 में भारत का टायर निर्यात 10 प्रतिशत बढ़ा

भारत के टायर निर्यात में तेजी दिखाई दे रही है। वित्तीय वर्ष 2020-21 में भारत का टायर निर्यात 10 प्रतिशत बढक़र 14,097 करोड़ रुपए पहुंच गया है। इससे टायर निर्माता कंपनियों में उत्साह है। उद्योग निकाय ऑटोमोटिव टायर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (एटीएमए) ने कहा कि भारत से टायर निर्यात 2020-21 में मूल्य के मामले में 10 प्रतिशत बढक़र 14,097 करोड़ रुपए हो गया। वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों का हवाला देते हुए एटीएमए ने कहा कि मात्रा के लिहाज से टायर निर्यात 8 फीसदी बढ़ा और पिछले वित्त वर्ष में 3.64 करोड़ यूनिट तक पहुंच गया।


कोरोना महामारी के बावजूद टायर उद्योग में फिर आया उछाल

कोरोनोवायरस महामारी के कारण अंतर्राष्ट्रीय व्यापार में व्यवधान उत्पन्न होने के कारण वित्त वर्ष 2021 की पहली तिमाही में भारत से टायर निर्यात में 23 प्रतिशत का तेज गिरावट आई थी। एटीएमए के अध्यक्ष अंशुमन सिंघानिया ने कहा, चुनौतीपूर्ण वर्ष के दौरान टायरों के निर्यात में फिर से शानदार वृद्धि हुई है, जो इस बात की गवाही देती है कि कठिन माहौल के बावजूद उद्योग में फिर से उछाल आया है।


आयात पर अंकुश लगने से भारत को टायर निर्यात बढ़ाने में मिली मदद

सरकार द्वारा उठाए गए कदमों जैसे टायरों के अंधाधुंध आयात पर अंकुश लगाने से उद्योग को अपनी निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने में मदद मिली है। आत्मा ने कहा, भारतीय निर्मित टायर अब दुनिया के 170 से अधिक देशों में निर्यात किए जाते हैं, इनमें उत्तर के कुछ सबसे समझदार बाजार भी शामिल हैं जिनमें अमेरिका और यूरोप प्रमुख रूप से आते हैं। एटीएमए ने कहा कि वित्त वर्ष 2021 में भारतीय निर्मित टायरों के लिए शीर्ष पांच निर्यात बाजार अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, इटली और यूके थे, जिनमें से प्रत्येक देश में शिपमेंट दोहरे अंकों में बढ़ रहा था। इसमें कहा गया है, अमेरिका भारतीय टायरों का सबसे बड़ा बाजार बना हुआ है, जो साल के दौरान देश से निर्यात किए गए कुल टायरों का 17 फीसदी हिस्सा है।


पिछले पांच वर्षों में भारत के टायर निर्यात हुई 60 प्रतिशत की बढ़ोतरी

पिछले पांच वर्षों में, भारत से टायर निर्यात वित्त वर्ष 2016 में 8,825 करोड़ रुपए से 60 प्रतिशत बढक़र वित्त वर्ष 2011 में 14,097 करोड़ रुपए हो गया है। यदि वित्त वर्ष 2010 में छोड़ दिया जाए तो ये काफी अच्छी प्रगति है। क्योंकि वर्ष 2010 में टायर निर्यात में मामूली गिरावट दर्ज की गई थी।  


अगले 3-4 वर्षों में टायर निर्यात में वृद्धि की व्यापक संभावनाएं

एटीएमए ने कहा कि भारतीय टायर उद्योग में अगले 3-4 वर्षों में निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि करने की क्षमता है यदि कुछ बाधाओं, विशेष रूप से प्राकृतिक रबर (एनआर) तक पहुंच के संबंध में आने वाली बाधाओं को हटा दिया जाता है तो टायर उद्योग के लिए काफी अच्छा होगा। उन्होंने कहा कि टायर उद्योग को (टायर) निर्यात दायित्व के खिलाफ एनआर आयात के लिए पूर्व-आयात शर्तों का पालन करने की आवश्यकता है। यह संचालन को बहुत सीमित बनाता है और निर्यात प्रदर्शन को प्रभावित करता है, आत्मा ने कहा कि सरकार ने प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए एनआर उपलब्धता और गुणवत्ता में सुधार करने के लिए कहा है। इसके लिए टायर सेक्टर प्रयत्नशील है।  

 

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