close Icon
TractorJunction | Mobile App

Tractorjunction.com

Download Android App
Free on Google Play

  • Home
  • Tractor News
  • Tractor Sales November 2019: TAFE Group Records 25 Per Cent Decline In Sales

Tractor Sales November 2019: TAFE Group Records 25 Per Cent Decline In Sales

Tractor Sales November 2019: TAFE Group Records 25 Per Cent Decline In Sales

22 December, 2019 Total Views 13774

Domestic tractor sales declined by 13.2% y-o-y in November 2019 on account of crop loss due to excess rain, lack of subsidy and lower commercial activity. Exports too declined by 8.5%.

The Indian Tractor industry saw a relatively good time during the Festive season with many Manufacturers reporting growth. However, post-Diwali season, the sales slump has started showing its effects with most Tractor Manufactures reporting declining sales for November 2019 as compared to the same period last year. Mahindra Group noted that its tractor sales for the last month dropped by 18.9 percent as compared to the same period last year, from 25,159 units to 20,414 units and lose 2.6 per cent market share.

Slow down in rural demand and uneven rain has led to a drop in tractor sales, both domestic and exports. In the April-November period of FY19-20, tractor sales decreased by nearly 11.2% year-on-year. Tractor marketers see this as course correction.

TAFE group reported a 25 percent decline in Tractor sales for November 2019 as compared to the same period last year, from 12,305 units to 9,229 units. Tafe group lost the highest 2.67 percent market share in Nov’19 to competitors.

Financial Year 2020 is not so well for Tafe group. Cumulatively, the company sold 91,231 units of tractors in the domestic market during April-November 2019 period against 1,09,451 last year, down by 16.6 percent and lost 1.25 percent market share. TAFE is losing most of its market share in  RJ, MP, UP, MH, AP and Bihar.

“The disparity in the two firms’ sales decline could also be partially attributed to different inventory holding strategies being followed by the original equipment manufacturers (OEMs)," says Rohan Gupta, assistant vice president (corporate ratings) at Icra Ltd.

Over a 4 year period, the industry CAGR is comfortingly positive. “We expect a good Rabi output in the coming months which will generate positive sentiment and drive growth. Even though the industry has seen a negative growth in FY20 , the industry CAGR (April to November) over last 4 years is a healthy 8.8%,” said Rajesh Jejurikar, president-farm equipment sector, M&M.

Escorts were at No. 3 on the list of best sellers in November 2019 despite a significant reduction in sales. Escorts maintained 13.55 percent market share in Nov month and 11.41 percent during April-November 2019. Escorts registered Growth in market share by 0.35 percent.

Escorts Ltd Agri  Machinery has registered 7,642 units of tractor sales in November 2019, down 4.5 percent compared to 8,005 units in the same month last year. Domestic Tractor Sales of the company tanked to 7,379 units last month, a drop of 3.4 percent compared with 7,641 units sold in November 2018. Cumulatively, the company sold 59,324 units of tractors in the Indian market during April-November 2019 period, down 8.7 percent compared with the same duration in FY19.

Sonalika Tractors sales of dipped as much as 16.20 percent in the past month. Sales which had stood at 8,029 units in November 2018 dipped to 6,729  in November 2019 . Sonalika managed to have 12.36 percent market share in Nov’19.

John Deere India performed extremely well, sales increased by 51.8 percent in comparison to Nov’18. As this is the first financial month for John Deere because they count financial year from Nov-Oct instead of Apr-Mar. JD sold 5,202 units of tractors in compare of 3,427 of last year Nov Month.

So far FY2020 (Apr-Mar) was so well spent for John Deere as they sold Cumulatively, 46,728 units of tractors in the domestic market during April-November 2019 period against 49,925 last year, down by 6.4 percent but gained 0.46 percent market share in domestic.

New Holland Tractors maintained market share in last month because sales dipped by 13.2 percent which matched industry dip of 13.2 percent in Nov’19. Sales which had stood at 2,808 units in November 2018 dipped to 2,436 last month.

Kubota Tractors sales surged to 1,056 units, up 1.00 percent as compared to 1,046 units sold in Nov 2018. Cumulatively Kubota registered 21.5 percent growth which is 2nd highest in growth during April-November 2019 after Same Deutz Fahr who tops the list with 25.4 percent growth in the same duration.

V.S.T. Tillers, Tractor sales also tumbled 9.55% to 504 units in Nov’19 against 598 units in November 2018.

Preet Tractors sales surged to 210 units, up 46.9 percent as compared to 143 units sold in Nov 2018.

Force Tractors sales decreased by 37% to 204 units in Nov’19 against 324 units in November 2018.

Ace Tractors sales decrease by 30% to 197 units in Nov’19 against 282 units in November 2018.

Indofarm sales decrease by 2.8% to 286 units in Nov’19 against186 units in November 2018.

Captain Tractors sales also decreased by 22.7% to 143 units in Nov’19 against 185 units in November 2018.

Tractor marketers say the current contraction has to be seen in the context of the fact that the tractor market saw three flat years of increase in sales before the current downturn hit.

Top Latest Agriculture News

जानें चंदन की खेती कैसे करें ( Indian Sandalwood Plantation )

जानें चंदन की खेती कैसे करें ( Indian Sandalwood Plantation )

चंदन की खेती : कम जमीन में ज्यादा कमाई देशभर के किसान भाइयों का ट्रैक्टर जंक्शन पर एक बार फिर स्वागत है। आज हम बात करते हैं करोड़पति बनने की। चंदन की खेती से जुडक़र किसान करोड़पति बन सकते हैं। बशर्तें उन्हें धैर्य के साथ चंदन की खेती करनी होगी। अगर किसान आज चंदन के पौधे लगाते हैं तो 15 साल बाद किसान अपने उत्पादन को बाजार में बेचकर करोड़ों रुपए कमा सकते हैं। देश में लद्दाख और राजस्थान के जैसलमेर को छोडक़र सभी भू-भाग में चंदन की खेती की जा सकती है। चंदन के बीज/ पौधे/मिट्टी चंदन की खेती के लिए किसानों को सबसे पहले चंदन के बीज या फिर छोटा सा पौधा या लाल चंदन के बीज लेने होंगे जो कि बाजार में उपलब्ध है। चंदन का पेड़ लाल मिट्टी में अच्छी तरह से उगता है। इसके अलावा चट्टानी मिट्टी, पथरीली मिट्टी और चूनेदार मिट्टी में भी ये पेड़ उगाया जाता है। हालांकि गीली मिट्टी और ज्यादा मिनरल्स वाली मिट्टी में ये पेड़ तेजी से नहीं उग पाता। यह भी पढ़ें : प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 2020 ( PMFBY ) में बड़े बदलाव - जानें लाभ चंदन खेती : बुवाई का समय/जलवायु अप्रैल और मई का महीना चंदन की बुवाई के लिए सबसे अच्छा होता है। पौधे बोने से पहले 2 से 3 बार अच्छी और गहरी जुताई करना जरूरी होता है। जुताई होने के बाद 2x2x2 फीट का गहरा गड्ढ़ा खोदकर उसे कुछ दिनों के लिए सूखने के लिए छोड़ देना चाहिए। अगर आपके पास काफी जगह है तो एक खेत में 30 से 40 सेमी की दूरी पर चंदन के बीजों को बो दें। मानसून के पेड़ में ये पौधे तेजी से बढ़ते हैं, लेकिन गर्मियों में इन्हें सिंचाई की जरूरत होती है। चंदन के पेड़ को 5 से 50 डिग्री सेल्सियस तापमान वाले इलाके में लगाना सही माना जाता है। इसके लिए 7 से 8.5 एचपी वाली मिट्टी उत्तम होती है। एक एकड़ भूमि में औसतन 400 पेड़ लगाए जाते हैं। इसकी खेती के लिए 500 से 625 मिमी वार्षिक औसम बारिश की आवश्यकता होती है। यह भी पढ़ें : गन्ने की खेती कैसे करें - गन्ना खेती की जानकारी, बसंतकालीन गन्ने की खेती चंदन की खेती में पौधरोपण चंदन का पौधा अद्र्धजीवी होता है। इस कारण चंदन का पेड़ आधा जीवन अपनी जरुरत खुद पूरी करता है और आधी जरूरत के लिए दूसरे पेड़ की जड़ों पर निर्भर रहता है। इसलिए चंदन का पेड़ अकेले नहीं पनपता है। अगर चंदन का पेड़ अकेला लगाया जाएगा तो यह सूख जाएगा। जब भी चंदन का पेड़ लगाएं तो उसके साथ दूसरे पेड़ भी लगाएं। इस बात का विशेष ध्यान रखना होगा कि चंदन के कुछ खास पौधे जैसे नीम, मीठी नीम, सहजन, लाल चंदा लगाने चाहिए जिससे उसका विकास हो सके। यह भी पढ़ें : राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) - मध्यप्रदेश उद्यानिकी विभाग की योजना चंदन की खेती में खाद प्रबंधन चंदन की खेती में जैविक खादकी अधिक आवश्यकता नहीं होती है। शुरू में फसल की वृद्धि के समय खाद की जरुरत पड़ती है। लाल मिट्टी के 2 भाग, खाद के 1 भाग और बालू के 1 भाग को खाद के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। गाद भी पौधों को बहुत अच्छा पोषण प्रदान करता है। चंदन की खेती में सिंचाई प्रबंधन बारिश के समय में चंदन के पेड़ों का तेजी से विकास होता है लेकिन गर्मी के मौसम में इसकी सिंचाई अधिक करनी होती है। सिंचाई मिट्टी में नमी और मौसम पर निर्भर करती है। शुरुआत में बरसात के बाद दिसंबरसे मई तक सिंचाई करना चाहिए। रोपण के बाद जब तक बीज का 6 से 7 सप्ताह में अंकुरण शुरू ना हो जाए तब तक सिंचाई को रोकना नहीं चाहिए। चंदन की खेती में पौधों के विकास के लिए मिट्टी का हमेशा नम और जल भराव होना चाहिए। अंकुरित होने के बाद एक दिन छोडक़र सिंचाई करें। यह भी पढ़ें : ITOTY Awards के दूसरे संस्करण का इंतजार शुरू चंदन की खेती में खरपतवार चंदन की खेती करते समय, चंदन के पौधे को पहले साल में सबसे अधिक देखभाल की आवश्यकता होती है। पहले साल में पौधों के इर्द-गिर्द की खरपतवारको हटाना चाहिए। यदि आवश्यक हो तो दूसरे साल भी साफ-सफाई करनी चाहिए। किसी भी तरह का पर्वतारोही या जंगली छोटा कोमला पौधा हो तो उसे भी हटा देना चाहिए। चंदन की खेती में कीट एवं रोग नियंत्रण चंदन की खेती में सैंडल स्पाइक नाम का रोग चंदन के पेड़ का सबसे बड़ा दुश्मन होता है। इस रोग के लगने से चंदन के पेड़ सभी पत्ते ऐंठाकर छोटे हो जाते हैं। साथ ही पेड़ टेड़े-मेढ़े हो जाते हैं। इस रोग से बचाव के लिए चंदन के पेड़ से 5 से 7 फीट की दूरी पर एक नीम का पौधा लगा सकते हैं जिससे कई तरह के कीट-पंतगों से चंदन के पेड़ की सुरक्षा हो सकेगी। चंदन के 3 पेड़ के बाद एक नीम का पौधा लगाना भी कीट प्रबंधन का बेहतर प्रयोग है चंदन की फसल की कटाई चंदन का पेड़ जब 15 साल का हो जाता है तब इसकी लकड़ी प्राप्त की जाती है। चंदन के पेड़ की जड़े बहुत खुशबूदार होती है। इसलिए इसके पेड़ को काटने की बजाय जड़ सहित उखाड़ लिया जाता है। पौधे को रोपने के पांच साल बाद से चंदन की रसदार लकड़ी बनना शुरू हो जाता है। चंदन के पेड़ को काटने पर उसे दो भाग निकलते हैं। एक रसदार लकड़ी होती है और दूसरी सूखी लकड़ी होती है। दोनों ही लकडिय़ों का मूल्य अलग-अलग होता है। चंदन का बाजार भाव देश में चंदन की मांग इतनी है कि इसकी पूर्ति नहीं की जा सकती है। देश में चंदन की मांग 300 प्रतिशत है जबकि आपूर्ति मात्र 30 प्रतिशत है। देश के अलावा चंदन की लकड़ी की मांग चाइना, अमेरिका, इंडोनेशिया आदि देशों में भी है। वर्तमान में मैसूर की चंदन लडक़ी के भाव 25 हजार रुपए प्रति किलो के आसपास है। इसके अलावा बाजार में कई कंपनियां चंदन की लडक़ी को 5 हजार से 15 हजार रुपए किलो के भाव से बेच रही है। एक चंदन के पेड़ का वजन 20 से 40 किलो तक हो सकता है। इस अनुमान से पेड़ की कटाई-छंटाई के बाद भी एक पेड़ से 2 लाख रुपए तक की कमाई हो सकती है। यह भी पढ़ें : डेयरी उद्यमिता विकास योजना 2019-20 (डीईडीएस) - जानें डेयरी लोन कैसे ले चंदन के पेड़ से करोड़पति बनने की राह आसान अगर कोई किसान चंदन के सौ पेड़ रोपता है और उसमें से अगर 70 पेड़ भी बड़े हो जाते हैं तो किसान 15 साल बाद पेड़ों को काटकर और बाजार में भेजकर एक करोड़ रुपए आसानी से प्राप्त कर सकता है। यह किसी भी बैंक में एफडी और प्रॉपर्टी में निवेश से भी कई गुना ज्यादा आपको लाभ दे सकता है। चंदन की खेती के लिए लोन देश में अब कई राष्ट्रीयकृत बैंक और को-ऑपरेटिव बैंक भी चंदन की खेती के लिए बैंक लोन उपलब्ध करा रही है। चंदन की खेती के नियम देश में साल 2000 से पहले आम लोगों को चंदन को उगाने और काटने की मनाही थी। सात 2000 के बाद सरकार ने अब चंदन की खेती को आसान बना दिया है। अगर कोई किसान चंदन की खेती करना चाहता है तो इसके लिए वह वन विभाग से संपर्क कर सकता है। चंदन की खेती के लिए किसी भी तरह के लाइसेंस की जरूरत नहीं होती है। केवल पेड़ की कटाई के समय वन विभाग से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट लेना होता है जो आसानी से मिल जाता है। जानकारी : चंदन / चंद की प्रजाति / रक्तचंदन औषधी वनस्पती पूरे विश्व में चंदन की 16 प्रजातियां है। जिसमें सेंलम एल्बम प्रजातियां सबसे सुगंधित और औषधीय मानी जाती है। इसके अलावा लाल चंदन, सफेद चंदन, सेंडल, अबेयाद, श्रीखंड, सुखद संडालो प्रजाति की चंदन पाई जाती है। यह भी पढ़ें : अनुबंध खेती जानकारी : जानिए क्या है कॉन्ट्रैक्ट खेती / संविदा खेती चंदन के बीज तथा पौधे कहां पर मिलते हैं? चंदन की खेती के लिए बीज तथा पौधे दोनों खरीदे जा सकते हैं। इसके लिए केंद्र सरकार की लकड़ी विज्ञान तथा तकनीक (Institute of wood science & technology) संस्थान बैंगलोर में है। यहां से आप चंदन की पौध प्राप्त कर सकते हैं। पता इस प्रकार है : Tree improvement and genetics division Institute of wood science and technology o.p. Malleshwaram Bangalore – 506003 (India) E-mail – [email protected] tel no. – 00 91-80 – 22-190155 fax number – 0091-80-23340529 किसान भाई अधिकारी जानकारी के लिए Institute of Wood Science and Technology – ICFRE की वेबसाइट iwst.icfre.gov.in पर संपर्क कर सकते हैं। सभी कंपनियों के ट्रैक्टरों के मॉडल, पुराने ट्रैक्टरों की री-सेल, ट्रैक्टर खरीदने के लिए लोन, कृषि के आधुनिक उपकरण एवं सरकारी योजनाओं के नवीनतम अपडेट के लिए ट्रैक्टर जंक्शन वेबसाइट से जुड़े और जागरूक किसान बने रहें।

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) - मध्यप्रदेश उद्यानिकी विभाग की योजना

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) - मध्यप्रदेश उद्यानिकी विभाग की योजना

क्लस्टर आधारित संरक्षित खेती : मध्यप्रदेश के 15 जिलों के लिए सरकार की सौगात ट्रैक्टर जंक्शन पर किसान भाइयों का एक बार फिर स्वागत है। आज हम बात करते हैं राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के अंतर्गत क्लस्टर आधारित संरक्षित खेती की। इन दिनों उद्यानिकी विभाग का फोकस क्लस्टर आधारित संरक्षित खेती पर है। इसका लाभ देने के लिए किसानों से समय-समय पर आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं। मध्यप्रदेश में क्लस्टर आधारित संरक्षित खेती की आवेदन प्रक्रिया शुरू की गई है जो लक्ष्य पूर्ति तक जारी रहेगी। मध्यप्रदेश उद्यानिकी योजना/क्लस्टर आधारित संरक्षित खेती के आवेदन केंद्र की मोदी सरकार उद्यानिकी फसलों को बढ़ावा देने के लिए बहुत सी योजनाएं संचालित कर रही है। किसानों को इसका लाभ देने के लिए समय-समय पर आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं। फरवरी 2020 में एक बार फिर मध्यप्रदेश उद्यानकी विभाग ने विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत आवेदन मांगे है। इस बार आवेदन ऑनलाइन न होकर ऑफलाइन है। राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (RKVY) के तहत क्लस्टर आधारित संरक्षित खेती के विभिन्न घटकों के लिए मध्यप्रदेश के किसानों से आवेदन मांगे गए हैं। यह भी पढ़ें : प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 2020 ( PMFBY ) में बड़े बदलाव - जानें लाभ ग्रीन हाउस ढांचा और शेड नेट हाउस योजना/सब्सिडी मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत क्लस्टर आधरित संरक्षित खेती के घटक ग्रीन हाउस ढांचा (ट्यूबलर स्ट्रक्चर) व शेड नेट हाउस (टयूब्लर स्ट्रक्चर) के लिए आवेदन मांगे गए हैं। इस योजना में किसान जरबेरा, उच्च कोटि की सब्जियों की खेती पाली हाउस/शेड नेट हाउस में करने के लिए आवेदन कर सकते हैं। साथ ही किसान ग्रीन हाउस ढांचा (ट्यूबलर स्ट्रक्चर) 2080 से 4000 वर्ग मीटर तक में संरक्षित खेती करने के लिए आवेदन कर सकते हैं। सरकार की ओर से 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी का प्रावधान है। यह भी पढ़ें : मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना - जानें क्या है सॉइल हेल्थ कार्ड स्कीम पुष्प क्षेत्र विस्तार व काजू क्षेत्र विस्तार योजना मध्यप्रदेश सरकार ने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के अंतर्गत पुष्प क्षेत्र विस्तार के अंतर्गत खुले फूल तथा काजू क्षेत्र विस्तार के अंतर्गत काजू सामान्य दूरी (7 मीटर x 7 मीटर) के लिए आवेदन मांगा है। क्लस्टर आधारित संरक्षित खेती में आवेदन क्लस्टर आधारित संरक्षित खेती योजना की विभिन्न घटक योजनाओं के लिए अलग-अलग जिलों के किसान आवेदन कर सकते हैं। इसके लिए अलग-अलग घटक योजना के लिए अलग-अलग वर्ग के िकसान आवेदन कर सकते हैं। यह भी पढ़ें : जानें क्या है, किसान कर्ज माफी योजना शेड नेट हाउस (ट्यूबलर स्ट्रक्चर) इस योजना में भोपाल, सीहोर, खंडवा, शाजापुर, इंदौर व बैतूल जिले के सामान्य वर्ग के किसानों से आवेदन मांगे गए हैं। वहीं देवास जिले में सभी वर्ग के किसानों से आवेदन मांगे गए हैं। ग्रीन हाउस ढांचा (ट्यूबलर स्ट्रक्चर)-2080 से 4000 वर्ग मीटर तक इस योजना के लिए छिंदवाड़ा जिले के सभी वर्ग के किसान आवेदन कर सकते हैं। ग्रीन हाउस ढांचा (जरबेरा) इस योजना के लिए छिंदवाड़ा जिले के सामान्य वर्ग के किसान आवेदन कर सकते हैं। पाली हाउस/शेड नेट हाउस (उच्च कोटि की सब्जियों की खेती) इस योजना के लिए छिंदवाड़ा जिले के सामान्य वर्ग के किसान आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा अलीराजपुर जिले के अनुसूचित जनजाति के किसान आवेदन कर सकते हैं। यह भी पढ़ें : गन्ने की खेती कैसे करें पुष्प क्षेत्र विस्तार योजना इस योजना में मध्यप्रदेश में फूलों की खेती करने के लिए छोटे तथा मझोले किसान आवेदन कर सकते हैं। छतरपुर और टीकमगढ़ जिले के सभी वर्ग के किसान आवेदन कर सकते हैं। काजू क्षेत्र विस्तार योजना/सब्सिडी काजू क्षेत्र विस्तार योजना के तहत काजू सामान्य दूरी (7 मीटर x 7 मीटर) ड्रिप रहित योजना के लिए मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों के किसान आवेदन कर सकते हैं। इस योजना में बैतूल, छिंदवाड़ा, बालाघाट तथा सिवनी जिलों के सभी वर्ग के किसान आवेदन कर सकते हैं। वहीं मंडला तथा डिंडोरी जिलों के सामान्य एवं अनुसूचित जनजाति के किसान आवेदन कर सकते हैं। इसके तहत किसानों को प्रथम वर्ष 40 प्रतिशत 20,000 प्रति हेक्टेयर एवं द्वितीय वर्ष 75 प्रतिशत एवं तृतीय वर्ष 90 प्रतिशत तक का अनुदान दिया जाता है यदि फसल बची रहे तो। यह भी पढ़ें : जानें डेयरी लोन कैसे ले आवेदन शुरू मध्यप्रदेश में राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के तहत क्लस्टर आधारित संरक्षित खेती के लिए आवेदन शुरू हो चुका है। जो लक्ष्य की पूर्ति तक चलेगा। आवेदन 19 फरवरी से शुरू हो गया है। किसानों से आवेदन लक्ष्य से दस प्रतिशत अधिक लिया जाएगा। आवेदन की प्रक्रिया इस योजना में अब तक आवेदन ऑनलाइन होता था। इस बार कलस्टर आधारित संरक्षित खेती के लिए आवेदन ऑफलाइन मांगे गए हैं। वर्तमान में संचालनालय के निर्देश के अनुसार राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के घटकों में आवेदन जिला उप/सहायक स्तर पर लिए जाएंगे न की कृषक स्तर से। इसलिए आवेदक आवेदन के लिए संबंधित जिला कार्यालय उद्यानिकी पर संपर्क करें। किसान अधिक जानकार के लिए https://mpfsts.mp.gov.in/mphd/#/ पर संपर्क कर सकता है। सभी कंपनियों के ट्रैक्टरों के मॉडल, पुराने ट्रैक्टरों की री-सेल, ट्रैक्टर खरीदने के लिए लोन, कृषि के आधुनिक उपकरण एवं सरकारी योजनाओं के नवीनतम अपडेट के लिए ट्रैक्टर जंक्शन वेबसाइट से जुड़े और जागरूक किसान बने रहें।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 2020 ( PMFBY ) में बड़े बदलाव - जानें लाभ

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 2020 ( PMFBY ) में बड़े बदलाव - जानें लाभ

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 2020 में नए प्रावधान केंद्रीय मंत्रीमंडल ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (पीएमएफबीवाई) में बड़े बदलावों को मंजूरी दी है। इसके तहत अब किसान खुद तय कर पाएंगे कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ लें या नहीं। अब सीधे किसानों के केसीसी से पैसा नहीं कटेगा। सरकार ने इस योजना को अब स्वैच्छिक बना दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनवरी 2016 में इस योजना की शुरुआत की थी तथा इस बारे में कुछ शिकायतों के बाद केबिनेट की बैठक में यह निर्णय लिया गया। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में संशोधन से किसानों को होगा फायदा इस फसल बीमा योजना के तहत ऋण लेने वाले किसानों के लिए यह बीमा कवर लेना अनिवार्य था। मौजूदा समय में कुल किसानों में से 58 फीसदी किसान ऋण लेते हैं। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की उपलब्धियों के बारे में कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि बीमा में 30 फीसदी खेती योग्य क्षेत्र को शामिल किया गया है। तोमर ने बताया कि फसल बीमा योजना को लेकर मिल रही लगातार शिकायतों के बाद सरकार ने ये कदम उठाए हैं। केंद्रीय केबिनेट ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और मौसम आधारित फसल बीमा योजना में कई संशोधन करके इसे किसानों के लिए फायदेमंद बनाने की कोशिश की है। तोमर ने बताया कि 60 हजार करोड़ रुपए के बीमा दावे को स्वीकृति दे दी गई है जबकि 13 हजार करोड़ रुपए का प्रीमियम एकत्रित किया गया है। यह भी पढ़ें : मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना - जानें क्या है सॉइल हेल्थ कार्ड स्कीम प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना 2020 में नए प्रावधान प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में ये बदलाव खरीफ-2020 से लागू होंगे। किसान खुद तय कर पाएंगे कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का हिस्सा बनना है या नहीं। अभी तक बीमा कंपनियां उन किसानों के खाते से प्रीमियम का पैसा पहले ही काट लेती थीं, जिन्होंने या तो फसल ऋण लिया होता था या किसान क्रेडिट कार्ड से कर्ज लेते थे। ऐसे में किसानों को पता ही नहीं चल पाता था कि उनकी फसल का बीमा हो चुका है और उसका प्रीमियम बैंक से पहले ही बीमा कंपनी के पास जमा हो चुका है। नए संशोधनों के बाद बीमा कंपनियों को व्यवसाय का आवंटन तीन साल तक के लिए किया जाएगा। जिन जिलों में 50 प्रतिशत से अधिक सिंचित क्षेत्र होगा उस पूरे जिले को सिंचित माना जाएगा। राज्यों और केंद्र की हिस्सेदारी में बदलाव किए गए हैं। इसके तहत पूर्वाेत्तर राज्यों में योजना में आने वाले खर्च का 90 फीसदी हिस्सा केंद्र सरकार वहन करेगी। जबकि राज्यों को केवल 10 फीसदी भार वहन करना होगा। देश के बाकि राज्यों में यह योजना 50:50 फीसदी के आधार पर लागू की जाएगी। योजना में पहले प्रशासनिक खर्चे का प्रावधान नहीं था, जिसे अब जोड़ दिया गया है। इसके तहत प्रशासनिक खर्च के लिए तीन फीसदी का प्रावधान किया गया है। किसानों को उनकी फसल के नुकसान का आकलन करने वाली प्रणाली को स्मार्ट किया जाएगा। इसमें आधुनिक टेक्नोलॉजी का प्रयोग होगा। अब योजना में राज्यों को सीजन के अनुसार 31 मार्च और 30 सितंबर तक अपना हिस्सा जमा कराना होगा। ऐसा नहीं करने वाले राज्य इसका फायदा नहीं ले सकेंगे। इसके साथ ही अन्य फसलों के लिए जिनका एमएसपी (समर्थन मूल्य) घोषित नहीं किया गया है। उनके गेट (फसल की लागत) पर विचार किया जाएगा। राज्यों को अतिरिक्त जोखिम कवर जैसे बुवाई, स्थानीय आपदा, मध्य मौसम प्रतिकूलता और फसल के बाद नुकसान होने पर किसी भी विकल्प का चयन करने की ढील दी जाएगी। इसके अलावा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत विशिष्ट जोखिम जैसे ओला से फसल को नुकसान होने की भी भरपाई कर सकते हैं। यह भी पढ़ें : जानें क्या है, किसान कर्ज माफी योजना प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में प्रीमियम दर प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को खरीफ की फसल के लिए 2 फीसदी प्रीमियम और रबी की फसल के लिए 1.5 फीसदी प्रीमियम का भुगतान करना पड़ता है। इसके अलावा यह योजना वाणिज्यिक और बागवानी फसलों के लिए भी बीमा सुरक्षा प्रदान करती है। बागवानी फसलों के लिए किसानों को पांच फीसदी प्रीमियम का भुगतान करना पड़ता है। फसल की बुवाई के 10 दिनों के अंदर किसान को पीएमएफबीआई का फार्म भरना जरूरी है। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का उद्देश्य/प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना पात्रता प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का उद्देश्य किसी प्राकृतिक आपदा की स्थिति में किसानों को फसल के नुकसान की भरपाई करना है। यह स्कीम जलवायु परिवर्तन और अन्य जोखिम से खेती को नुकसान से बचाने का एक बड़ा माध्यम है। योजना के तहत कर्ज लेकर खेती करने वाले किसान को कम दर पर बीमा कवर दिया जाता है, जिन किसानों ने खेती के लिए ऋण नहीं लिया है वे भी इसका लाभ ले सकते हैं। यह भी पढ़ें : गन्ने की खेती कैसे करें प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के ऑनलाइन और ऑफलाइन फार्म प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के लिए ऑफलाइन (बैंक जाकर) और दूसरा ऑनलाइन, दोनों तरीके से फॉर्म लिए जा सकते हैं। फॉर्म ऑनलाइन भरने के लिए आप इस लिंक पर जा सकते हैं - http://pmfby.gov.in/ अगर आप फॉर्म ऑफलाइन लेना चाहते हैं तो नजदीकी बैंक की शाखा में जाकर फसल बीमा योजना (PMFBY) का फॉर्म भर सकते हैं। इसके अलावा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लिस्ट/प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना क्लेम/प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ/प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना ऑनलाइन फॉर्म/प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना फॉर्म पीडीएफ/प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना ऑनलाइन फॉर्म की जानकारी http://pmfby.gov.in/ से ले सकते हैं केंद्रीय केबिनेट बैठक 2020 के प्रमुख निर्णय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में 19 फरवरी 2020 को आयोजित केंद्रीय केबिनेट की बैठक में कई महत्वपूर्ण निणर्य लिए गए। इसमें प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को स्वैच्छिक बनाने के साथ ही देश में 10 हजार कृषि उत्पाद संगठन (एफपीओ) बनाने का निर्णय लिया गया। इसके अलावा डेयरी क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए 4558 करोड़ रुपए की योजना को मंजूरी दी। देश में 10 हजार एफपीओ का गठन करेगी सरकार केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बताया कि किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) का प्रयोग देश में बहुत सफल रहा है। एफपीओ के विनिर्माण और संवर्धन स्कीम के तहत 6865 करोड़ रुपए के कुल बजटीय प्रावधान के साथ 10 हजार नए एफपीओ बनाए जाएंगे। यह भी पढ़ें : जानें डेयरी लोन कैसे ले डेयरी क्षेत्र के लिए 4558 करोड़ रुपए की योजना मंजूर केंद्रीय केबिनेट की बैठक में सरकार ने डेयरी क्षेत्र को प्रोत्साहित करने के लिए 4 हजार 558 करोड़ रुपए की योजना को मंजूरी दी। इससे करीब 95 लाख किसानों को फायदा होगा। बैठक के बाद सूचना और प्रसारण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने बताया कि इससे देश में दुग्ध क्रांति में नए आयाम जुड़ेंगे। उन्होंने यह भी बताया कि मंत्रिमंडल ने ब्याज सहायता योजना में लाभ को दो फीसदी से बढ़ाकर ढाई फीसदी करने के प्रस्ताव को भी मंजूरी दी है। जावड़ेकर ने कहा कि सरकार ने यह फैसला किसान समुदाय के हित के लिए किए हैं। सभी कंपनियों के ट्रैक्टरों के मॉडल, पुराने ट्रैक्टरों की री-सेल, ट्रैक्टर खरीदने के लिए लोन, कृषि के आधुनिक उपकरण एवं सरकारी योजनाओं के नवीनतम अपडेट के लिए ट्रैक्टर जंक्शन वेबसाइट से जुड़े और जागरूक किसान बने रहें।

मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना - जानें क्या है सॉइल हेल्थ कार्ड स्कीम

मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना - जानें क्या है सॉइल हेल्थ कार्ड स्कीम

मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना में जुडऩे की प्रक्रिया ट्रैक्टर जंक्शन पर किसान भाइयों का एक बार फिर स्वागत है। आज हम बात करते हैं मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना की। मृदा स्वास्थ्य कार्ड किसानों को उनकी मिट्टी की पोषक स्थिति के बारे में जानकारी प्रदान करता है और साथ ही मृदा स्वास्थ्य और इसकी उर्वरता में सुधार के लिए पोषक तत्वों की उचित खुराक पर सिफारिश की जाती है। केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना ने 19 फरवरी 2020 को पांच साल पूरे कर लिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 19 फरवरी 2015 को राजस्थान के सूरतगढ़ से मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना का शुभारंभ किया था। देश में 2017-2019 तक 11.69 करोड़ मृदा स्वास्थ्य कार्ड बांटे जा चुके हैं। सरकार ने योजना के क्रियान्वयन परिणामों की रिपोर्ट जारी की है। जिसमें दावा किया गया है कि इस योजना से देश के किसानों की आमदनी में लगभग 30 हजार रुपए प्रति एकड़ तक इजाफा हुआ है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के तहत ग्राम स्तर पर मिनी मृदा परीक्षण प्रयोगशाला खोली जाती है जिसमें मिट्टे के नमूने एकत्रित किए जाते हैं। ग्रामीण युवा प्रयोगशाला खोलकर सरकार से 3.75 लाख रुपए की आर्थिक सहायता प्राप्त कर सकता है। यह भी पढ़ें : गन्ने की खेती कैसे करें - गन्ना खेती की जानकारी, बसंतकालीन गन्ने की खेती राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद की रिपोर्ट : उर्वरकों के उपयोग में 10 फीसदी की कमी राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद (नेशनल प्रोडक्टिविटी काउंसिल) ने फरवरी 2017 में सरकार के समक्ष रिपोर्ट पेश की थी, जिसके बाद अब कृषि मंत्रालय की ओर से 2020 में इसे जारी किया गया है। रिपोर्ट को देश के लगभग 19 राज्यों के 76 जिलों के 170 मृदा हेल्थ टेस्टिंग लैब द्वारा तैयार किया गया है। साथ ही करीब 1700 किसानों से सवाल-जवाब भी किए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार मृदा स्वास्थ्य कार्ड से उर्वरकों के उपयोग में 10 फीसदी तक की कमी आई है। साथ ही उत्पादकता में 5-6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना में मिट्टी में कम हो रहे पोषक तत्वों की समस्या पर फोकस किया जाता है। यह भी पढ़ें : डेयरी उद्यमिता विकास योजना 2019-20 (डीईडीएस) - जानें डेयरी लोन कैसे ले खाद की बचत और अच्छे उत्पादन से बढ़़ी आमदनी राष्ट्रीय उत्पादकता परिषद की रिपोर्ट के अनुसार किसानों की आमदनी खाद की बचत और अच्छे उत्पादन से बढ़ी है। दलहनी फसलों में अरहर की खेती से प्रति एकड़ 25-30 हजार रुपए की आमदनी हुई है। जबकि सूरजमुखी की खेती में लगभग 25 हजार रुपए, मूंगफली की खेती में 10 हजार रुपए, कपास से 12 हजार रुपए की आमदननी होने के आंकड़े बताए गए हैं। इसके अलावा धान की खेती में 4500 रुपए और आलू की खेती में 3 हजार रुपए प्रति एकड़ की वृद्धि दिखाई गई है। यह भी पढ़ें : मृदा स्वास्थ्य कार्ड : जानिए कैसे किसानों की मदद करता है नाइट्रोजन वाली खाद यूरिया की खपत में कमी मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना के बाद किसानों की खेती में नाइट्रोजन वाली खाद यूरिया की खपत में काफी कमी देखने को मिली है। अनुमान है कि धान की खेती की लागत में नाइट्रोजन की बचत से किसानों को लगभग 16-25 प्रतिशत का फायदा हुआ है। इससे प्रति एकड़ लगभग 20 किलो यूरिया की बचत हुई है। वहीं दलहनी फसलों की खेती में करीब 15 प्रतिशत कम खाद लगी है जिससे लगभग 10 किलो यूरिया की बचत हुई है। इसके अलावा तिलहनी फसलों में लगभग 10-15 प्रतिशत और मूंगफली की खेती में लगभग 23 किलो यूरिया कम लगा है। यह भी पढ़ें : ITOTY Awards के दूसरे संस्करण का इंतजार शुरू खाद के उचित उपयोग से बढ़ा उत्पादन मृदा स्वास्थ्य कार्ड के तहत गेहूं, धान और ज्वार की खेती में खाद का उचित उपयोग हुआ है। जिससे फसलों का उत्पादन 10-15 प्रतिशत तक बढ़ा है। यही वजह है कि दलहनी फसलों में 30 फीसदी और तिलहनी फसलों में 40 फीसदी की वृद्धि का आकलन किया गया है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना की वित्तीय प्रगति (करोड़ रुपए में) साल स्वीकृत राशि 2014-15 23.89 2015-16 96.47 2016-17 133.66 2017-18 152.76 2018-19 237.40 2019-20 107.24 कुल 751.42 मुदा स्वास्थ्य कार्ड योजना में जुडऩे की प्रक्रिया राज्य सरकार कृषि विभाग या आउटसोर्स एजेंसी के स्टॉफ के माध्यम से मिट्टी के नमूने एकत्रित करती है। सामान्यत: वर्ष में दो बार क्रमश: रबी और खरीफ फसलों की कटाई के बाद मिट्टी के नमूने लिए जाते हैं या जब खेत में फसल नहीं हो। मिट्टी का नमूना ‘वी’ आकार में मिट्टी की कटाई के उपरांत 15-20 से.मी. की गहराई से एक प्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा एकत्रित किए जाते हैं। यह खेत के चार कोनों और खेत के मध्य से एकत्रित करने के बाद पूरी तरह से मिलाए जाते हैं। इनमें से एक भाग नमूने के रूप में लिया जाएगा। छाया वाले क्षेत्र को छोड़ दिया जाएगा। चयनित नमूने को बैग में बंदकर एक कोड नंबर दिया जाता है। इसके बाद इसे विश्लेषण के लिए प्रयोगशाला भेज दिया जाता है। मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन मृदा स्वास्थ्य कार्ड जैविक खादों की सिफारिशों सहित छह फसलों के लिए उर्वरक सिफारिशों के दो सेट प्रदान करता है। किसान मांग पर अतिरिक्त फसलों के लिए सिफारिशें भी प्राप्त कर सकते हैं। किसान कार्ड को स्वयं के रूप में SHC पोर्टल से भी प्रिंट कर सकते हैं। SHC पोर्टल के पास दोनों चक्रों का किसान डेटाबेस है और किसानों के लाभ के लिए 21 भाषाओं में उपलब्ध है। यह भी पढ़ें : अनुबंध खेती जानकारी : जानिए क्या है कॉन्ट्रैक्ट खेती / संविदा खेती मृदा स्वास्थ्य प्रयोगशाला पर 3.75 लाख रुपए की सरकारी सहायता केंद्र सरकार ने 2014-15 में मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना शुरू की थी। 2015-17 के दौरान 10.74 करोड़ मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किए गए। जबकि 2017-19 के दौरान 11.69 करोड़ मृदा स्वास्थ्य कार्ड जारी किए गए। 2019-20 में अब तक 13.53 लाख कार्ड जारी किए गए हैं। योजना के तहत मृदा स्वास्थ्य प्रयोगशाला बनाई गई है। इस योजना में अब तक 102 मोबाइल लैब, 429 स्थैतिक प्रयोगशालाओं, 1562 ग्रामीण स्तरीय प्रयोग शालाओं तथा 8752 छोटी प्रयोगशालाओं को मंजूरी दी जा चुकी है। कृषि मंत्रालय की ओर से इस योजना में प्रयोगशाला खोलने के लिए 18 से 40 साल के ग्रामीण युवाओं सहायता दी जा रही है। इसके तहत ग्राम स्तर पर मिनी मृदा परीक्षण प्रयोगशाला खोली जा सकती है। इसके लिए सरकार द्वारा मिट्टी नमूना लेने, परीक्षण करने और मृदा स्वास्थ्य कार्ड उपलब्ध कराने के लिए 300 रुपए प्रति नमूना प्रदान किया जाता है। एक प्रयोगशाला खोलने पर करीब 5 लाख रुपए का खर्च आता है जिसका 75 प्रतिशत यानि लगभग 3.75 लाख रुपए सरकार द्वारा दिया जाता है। यही प्रावधान स्वयं सहायता समूह, कृषक सहकारी समितियां, कृषक समूह या कृषक उत्पादक के लिए है। यह भी पढ़ें : हरियाणा पशु किसान क्रेडिट कार्ड योजना 2020 मृदा जांच प्रयोगशाला के लिए आवेदन मिट्टी जांच प्रयोगशाला दो तरीके से शुरू की जा सकती है। पहले तरीके के अनुसार प्रयोगशाला किराए की दुकान में खोल सकते हैं। दूसरे तरीके में प्रयोगशाला को कहीं भी ले जा सकते हैं। जिसे मोबाइल स्वायल टेस्टिंग वैन कहा जाता है। इस प्रयोगशाला को खोलने के लिए आप अपने जिले के उपनिदेशक (कृषि) या संयुक्त निदेशक कृषि या उनके कार्यालय से संपर्क कर सकते हैं। मृदा स्वास्थ्य कार्ड एप इस एप से क्षेत्र स्तर के कार्यकर्ताओं को लाभ होगा। नमूना संग्रह के समय फील्ड से नमूना पंजीकरण विवरण कैप्चर करने में यह मोबाइल एप स्वचालित रूप से जीआईएस समन्वय को कैप्चर करता है और उस स्थान को इंगित करता है जहां से क्षेत्र के कार्यकर्ताओं द्वारा मिट्टी का नमूना लिया जाता है। यह एप राष्ट्रीय कृषि विकास योजना के लिए विकसित अन्य जियो टैगिंग ऐप की तरह काम करता है। एप में किसानों के नाम, आधार कार्ड संख्या, मोबाइल नंबर, लिंग, पता, फसल विवरण आदि दर्ज होता है। मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना और wikipedia मृदा स्वास्थ्य कार्ड के बारे में विस्तृत जानकारी Wikipedia से भी ले सकते हैं। मुदा स्वास्थ्य कार्ड योजना की अधिक जानकारी के लिए यहां करें संपर्क केंद्र सरकार : अपर आयुक्त (आईएनएम) भारत सरकार, कृषि मंत्रालय कृषि एवं सहकारिता विभाग कृषि भवन, नई दिल्ली फैक्स : 011-23384280, ईमेल : [email protected] राज्य सरकार : राज्य कृषि निदेशक/जिला कृषि अधिकारी आप बेवसाइट agricoop.nic.in या soilhealth.dac.gov.in और किसान कॉल सेंटर (1800-180-1551) पर संपर्क कर सकते हैं। सभी कंपनियों के ट्रैक्टरों के मॉडल, पुराने ट्रैक्टरों की री-सेल, ट्रैक्टर खरीदने के लिए लोन, कृषि के आधुनिक उपकरण एवं सरकारी योजनाओं के नवीनतम अपडेट के लिए ट्रैक्टर जंक्शन वेबसाइट से जुड़े और जागरूक किसान बने रहें।

close Icon

Find Your Right Tractor and Implements

New Tractors

Used Tractors

Implements

Certified Dealer Buy Used Tractor