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E-NAM योजना - अब किसानों की आमदनी होगी दोगुनी!

E-NAM योजना - अब किसानों की आमदनी होगी दोगुनी!
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कि‍सान फसल का उत्‍पादन तो कर लेते हैं लेकि‍न कहां पर उचि‍त दाम पर बेचे यह बहुत बडा सवाल खडा हो जाता है, साथ ही फसल के लिए उचि‍त बाजार खोजने में कि‍सान असमंजस में रहता है। अत: किसानों के लिये कृषि वस्तु्ओं के उत्पादों को पूरे भारत में कही भी बि‍ना कि‍सी बि‍चौलि‍ए के बेचने हेतु भारत सरकार ने एकीकृत ऑनलाईन व्‍यापार हेतु- राष्ट्रीय कृषि बाज़ार e-National Agriculture Market पहल की शुरूआत की।

ई-नाम भारत के सभी राज्यों के मध्य अन्तर्राज्य व्यापार को बढ़ावा देने के लिए एक ऑनलाईन प्लेटफार्म है। ई-नाम 14 अप्रैल, 2016 को 8 राज्यों  की 21 मंडियों में 24 जिंसों के साथ शुरू किया गया था। लघु कृषक कृषि व्यापार संघ (SFAC) भारत सरकार के कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के अन्तर्गत ई-नाम लागू करने के लिए प्रमुख एजेन्सी है। 

सरकार द्वारा 75 लाख रुपए की वित्तीय सहायता प्रति मंडी दी जाती है साथ ही एक फ्री सॉफ्टवेयर व एक साल के लिए एक मंडी विशेषज्ञ  अपनी सेवाएं देगा।

eNam योजना का उद्देश्य क्या है ? 

  • किसानों की आय को दोगुना करना
  • लेन देन को पारदर्शी बनाना
  • फसल के मूल्य का र्नि‍धारण गुणवत्ता के आधार पर करवाना
  • व्यापारियों व किसानों के लिए लाईसेंसिग की व्यवस्था को सरल बनाना
  • उत्पाद का भाव सभी जगह समान बनाने हेतु सिंगल विंडो की सुविधा प्रदान करना
  • भौतिक मंडियाँ बनाना जिन्हें किसानों व व्यापरियों द्वारा ऑनलाइन एक्सस किया जा सके
  • बाजार कीमतों की सही जानकारी देना
  • ई-नाम के डेटा को केन्द्रीय किसान डेटाबेस से जोड़कर पंजीकरण एवं मंडी गेट पर आवक जावक के दौरान लंबी लाईन की समस्या से छूटकारा देना
  • कृषि उपज बाजार समिति (APMC)  मंडि‍यों को ऑनलाईन नेटवर्क से जोडना
  • मंडियो में व्याप्त कमियों को दूर करना
  • अच्छी गुणवत्ता, अच्छा मुनाफे पर जोर देना तथा एक स्वस्थ प्रतिस्पर्धा उत्पन्न करना।

eNam योजना के हितधारक ?

  • किसान 
  • व्यापारी 
  • कृषि उपज बाजार समिति (APMC)  
  • मंडी बोर्ड 
  • किसान उत्पादक संगठन (FPO)

वर्तमान में 585 एपीएमसी बाजार ऐसे हैं जो 16 राज्यों और 2 केन्द्र शासित प्रदेशों में ई.नाम नेटवर्क से जुड़े हैं। ई-नाम वेबसाइट अब आठ स्थानीय भाषाओं हिंदी, अंग्रेज़ी, गुजराती, मराठी, तमिल, तेलुगू, बांग्ला और उडिया में उपलब्ध है। वेबसाइट पर हिन्दी भाषा में ई-लर्निंग माड्यूल डिज़ाइन किया गया है जिससे ऑनलाईन सुविधाओं का प्रयोग किस तरह करना है, आसानी से समझा जा सके।

 

ई नाम मोबाइल एप की शेषताएँ

  • 6 अक्टुबर, 2016 को ई-नाम मोबाईल एप जारी किया गया था
  • गेट एंट्री करने की सुविधा 
  • फसल के क्रय-विक्रय तथा वास्तवि‍क बोली प्रक्रिया की प्रगति संबंधी जानकारी प्रदान करता हैं
  • किसानों को उनके बैंक खाते में भुगतान प्राप्त होने के संबंध में SMS अलर्ट भुगतान रसीद संबंधी सूचना मिलेगी
  • फसल की गुणवत्ता संबंधी जानकारी देता हैं 
  • खरीददार ई-नाम मोबाइल एप से डेबिट कार्ड और नेट बैंकिंग के द्वारा किसानों को ऑनलाइन भुगतान करना आसान हो जाएगा।
  • ई-नाम खरीददार को लॉजिस्टिक सुविधा प्रदान करने वाले की जानकारी भी प्रदान करता है
  • प्रक्रियाः-
  • किसान की ऑनलाईन एंट्री होती है।
  • किसान द्वारा लाई गई फसल का तौल किया जाता है।
  • फसल का सेम्पल का संग्रहण किया जाता है।
  • गुणवत्ता की जाँच की जाती है।
  • ग्रेडिंग की जाती है।
  • ऑनलाईन बोली लगाई जाती है।
  • ऑनलाईन भुगतान सीधे किसान के खाते में किया जाता है।

 

E-NAM Scheme - Now farmers' income will double!

 

ई-नाम वेबसाईट पर एक डैशबोर्ड बनाया गया है, जि‍समें फसलों की आवक, जावक और व्यापार के संबंध में प्रत्येक मंडी के कार्य निष्पादन की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराएगा।  देश में सर्वाधिक 100 ई-नाम मंडियाँ उत्तरप्रदेश में है। देश में 16 राज्य व 2 केन्द्रशासित प्रदशे की कुल 585 कृषि उपज बाजार समिति (APMC) ई-नाम नेटवर्क से जुड़ गई है।

सरकार का लक्ष्य 20,000 ग्रामीण हाटों को ग्रामीण कृषि मंडी में बदलकर ई-नाम तंत्र से जोड़ना, जिसके लिए 2 हजार करोड़ से कृषि विपणन अवसरंचना निधि का गठन किया गया है। 

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