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कोरोना वायरस से दूध की खपत 25 फीसदी घटी अब सरकार से  राहत की उम्मीद ?

कोरोना वायरस से दूध की खपत 25 फीसदी घटी अब सरकार से राहत की उम्मीद ?

कोरोना वायरस का दूध उत्पादक किसानों पर असर ट्रैक्टर जंक्शन पर किसान भाइयों का एक बार फिर स्वागत है। देशभर में कोरोना का साइड इफेक्ट लगातार बढ़ता जा रहा है। कोरोना संक्रमण के कारण मृत्यु के मामले और कोरोना पॉजिटिव लोगों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। देशभर में लॉकडाउन के चलते हर तबका मुसीबत में है, किसान भी इससे अछूते नहीं है। देश का किसान रबी फसल की कटाई में जुटा हुआ है। देश के कई प्रांतों के किसानों ने रबी फसल की कटाई का काम पूरा कर लिया है लेकिन वह अपनी उपज को बेच नहीं पा रहा है। पशुपालन से जुड़े किसानों पर भी लॉकडाउन का असर पड़ा है। देश में दूध की खपत करीब 25 फीसदी तक घट गई और किसानों को गांव में दूध कम दामों पर बेचना पड़ रहा है। ऐसे में किसानों को सरकार से उम्मीद है कि उनके लिए भी कुछ राहत भरे कदम उठाए जाएं। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 कोरोना से देश में दूध की खपत 25 फीसदी तक कम कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए देश में लॉकडाउन के चलते होटल, रेस्तरां, हलवाई की दुकानें और चाय की थडिय़ां बंद है। जिससे दूध की खतप करीब 25 फीसदी तक कम हो गई है। इससे पशुपालक किसानों की कमाई में 5 से 7 रुपए प्रति लीटर तक की कमी आई है। देश में मांग की तुलना में दूध की आपूर्ति बढ़ गई है। देश के कुछ इलाकों में तो किसान आधी कीमत पर दूध बेचने को मजबूर है। देश के दूरदराज इलाकों में परिवहन सेवाएं बंद होने के कारण निजी और सरकारी कंपनियां दूध की खरीद नहीं कर पा रही हैं। देश के प्रमुख दुग्ध उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक औ तमिलनाडू में कोविड-19 के पैर परसारने के कारण यह स्थिति पैदा हुई है। किसानों को गाय के दूध के 31 और भैंस के दूध के 50 रुपए लीटर मिलता है दाम अमूल ब्रांड से दुग्ध उत्पादक बेचने वाली देश की सबसे बड़ी दुग्ध कंपनी गुजरात सहकारी दुग्ध विपणन संघ (जीसीएमएमएफ) के प्रबंध निदेशक आर.एस. सोढ़ी के हवाले छपी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक देश में होटल, रेस्टोरेंट और चाय की दुकानें बंद होने से पिछले एक महीने के दौरान दूध की खपत में 25 फीसदी की कमी आई है। आइसक्रीम और दूध से बने उत्पादों की खुदरा दुकानें बंद होने से दूध की खपट घटी है। लेकिन घरों में घी, मक्खन और दूध की खपत बढ़ी है। सोढ़ी के अनुसार बड़ी दूध की कंपनियों को तो ऊंची कीमत चुकानी पड़ेगी क्योंकि उनका किसानों के साथ पुराना नाता है। जीसीएमएमएफ किसानों को गाय के दूध के लिए 31 रुपए प्रति लीटर और भैंस के दूध के लिए 50 रुपए प्रति लीटर का भुगतान करती है। यह भी पढ़ें : 8.69 करोड़ किसानों को अप्रैल के पहले सप्ताह में मिलेंगे 2 हजार रुपए अब कुछ किसान कम कीमत पर दे रहे हैं दूध एक मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दूध की खपत में कमी के कारण महाराष्ट्र, कर्नाटक, तमिलनाडू और गुजरात में किसानों को सस्ती कीमत पर दूध बेचना पड़ रहा है। गांवों में दूध की मौजूदा कीमत 30 से 31 रुपए प्रति लीटर है लेकिन कुछ किसान आधी कीमत पर ही दूध कंपनियों को दूध दे रहे हैं। इससे किसानों की कमाई 5 से 7 रुपए प्रति लीटर के हिसाब से कम हुई है। आपको बता दें कि निजी और छोटी सहकारी कंपनियां ज्यादा आपूर्ति की स्थिति में किसानों को कम कीमत देकर मौके का फायदा उठाती है। निर्यात प्रभावित होने से स्किम्ड मिल्क पाउडर की कीमतों में भी गिरावट वहीं दुनियाभर में लॉकडाउन के कारण निर्यात प्रभावित होने से स्किम्ड मिल्क पाउडर की कीमतों में भी गिरावट आई है। यह स्थिति अभी कुछ हफ्ते और रहेगी। करीब एक महीने बाद गर्मियां शुरू होने के साथ ही दूध की आपूर्ति में कमी आएगी और कीमतें फिर से अपनी पुरानी स्थिति में पहुंच जाएंगी। अमूमन जब दूध की आपूर्ति खपत से अधिक होती है तो दुग्ध कंपनियां स्किम्ड मिल्क पाउडर (एसएमपी) बनाती हैं ताकि मांग बढऩे और आपूर्ति घटने पर इसे बेचा जा सके। निर्यात रुकने के कारण एसएमपी की कीमतों में भारी गिरावट आई है। खेप रोक दी गई और कोई ऑर्डर नहीं आ रहा है। बाजार में पर्याप्त मात्रा में एसएमपी उपलब्ध नहीं है। इसके बावजूद अतिरिक्त दूध को एसएमपी में बदलने और ज्यादा मांग के समय आपूर्ति के लिए रखना व्यावहारिक नहीं है। कई दुग्ध कंपनियों के पास कार्यशील पूंजी नहीं है। क्योंकि उन्हें बैंक से फंड नहीं मिल रहा है। मांग कम होने से घरेलू बाजार में एसएमपी 230 रुपए प्रति किलो के भाव से मिल रहा है जबकि एक माह पहले इसकी कीमत 310 रुपए प्रतिकिलो के आसपास थी। सभी कंपनियों के ट्रैक्टरों के मॉडल, पुराने ट्रैक्टरों की री-सेल, ट्रैक्टर खरीदने के लिए लोन, कृषि के आधुनिक उपकरण एवं सरकारी योजनाओं के नवीनतम अपडेट के लिए ट्रैक्टर जंक्शन वेबसाइट से जुड़े और जागरूक किसान बने रहें।

कोविड-19 लॉकडाउन में सरकारी बैंकों से ले इमरजेंसी लोन और छह महीने तक किश्त की चिंता नहीं ?

कोविड-19 लॉकडाउन में सरकारी बैंकों से ले इमरजेंसी लोन और छह महीने तक किश्त की चिंता नहीं ?

15 सरकारी बैंकों ने किया राहत स्कीमों का ऐलान, उठाएं फायदा ट्रैक्टर जंक्शन पर देश के किसान भाइयों का एक बार फिर स्वागत है। आज हम बात करते हैं कोरोना लाकडाउन के समय मिलने वाले सस्ते लोनों के बारे में। कोरोना वायरस की इस मुश्किल घड़ी में किसान, मजदूर, व्यापारी, छात्र, छोटे दुकानदार, महिलाओं की मदद के लिए देश के सरकारी बैंकों ने खास पहल शुरू की है। देश के करीब 15 सरकारी बैंक इमरजेंसी लोन सहित अन्य तरीक के लोन उपलब्ध करा रहे हैं। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 कोरोना लॉकडाउन में सस्ते लोन कोरोना (कोविड 19) लॉकडाउन की संकटकालीन घड़ी में सस्ते लोन उपलब्ध कराने के लिए जहां सरकारी बैंकों ने तत्परता दिखाई है वहीं निजी सैक्टर के बैंक अभी इस मामले में पीछे हैं। कोरोना लॉकडाउन के बाद देश के कुल 18 सरकारी बैंकों में से कम से कम 15 बैंकों ने विभिन्न सेक्टरों के लिए राहत स्कीमों का एलान किया है। इसे लोगों को तात्कालिक स्थितियों से निपटने में थोड़ी राहत मिलेगी। भारतीय स्टेट बैंक इस तरह के लोन की पेशकश करने वाला पहला बैंक है। ऐसे कर्ज पर छह महीने तक कोई किश्त नहीं देनी होगी। उसके अगले छह महीनों से 7.25 फीसदी की रियायती दर से कर्ज चुकाना होगा। इन बैंकों में उपलब्ध है सस्ते लोन भारतीय स्टेट बैंक पंजाब नेशनल बैंक बैंक ऑफ बड़ौदा केरना बैंक यूनियन बैंक ऑफ इंडिया बैंक ऑफ इंडिया इंडियन बैंक बैंक ऑफ महाराष्ट्र सिंडिकेट बैंक इंडियन ओवरसीज बैंक यूको बैंक आंध्र बैंक सिडबी यह भी पढ़ें : 8.69 करोड़ किसानों को अप्रैल के पहले सप्ताह में मिलेंगे 2 हजार रुपए कोविड-19 और बैंकों के इमरजेंसी लोन की खास बातें इमरजेंसी लोन से कोरोना वायरस के कारण लॉकडाउन के समय लोगों को अपनी नकद जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी। इन लोन स्कीमों में छह महीने तक किश्तों का कोई भुगतान नहीं करना होगा। इसके बाद लोन की अदायगी शुरू होगी। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया : स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने कोविड 19 इमरजेंसी क्रेडिट लाइन नाम से यह सुविधा शुरू की है। कैपिटल लिमिट के 10 फीसदी के बराबर होगी। इसमें खात बात यह है कि 200 करोड़ रुपए तक का अधिकतम लोन दिया जा सकेगा। इस लोन योजना के तहत लिए गए ब्याज दर की लिमिट 7.25 फीसदी रखी गई है। इस सुविधा के तहत कोई प्रोसेसिंग फीस या प्री पेमेंट पेनल्टी नहीं वसूली जाएगी। यह सुविधा 30 जून 2020 तक उपलब्ध होगी। इंडियन बैंक : इंडियन बैंक के पांच स्पेशल कोविड इमरजेंसी लोन स्कीम है। इससे नौकरीपेशा वर्ग, पेंशनर, स्वयं सहायता स्मूह, एमएसएमई और बड़े कॉरपोरेट घराने लाभान्वित होंगे। बैंक के मौजूद ग्राहक भी इस स्कीम का फायदा ले पाएंगे। बैंक से बहुत बड़ा किसान वर्ग भी जुड़ा हुआ है। इंडियन बैंक के नौकरीपेशा ग्राहक अपनी सैलरी के 20 गुना तक कर्ज ले सकते हैं। इसकी ऊपरी सीमा 2 लाख रुपए है। इंडियन बैंक की वरिष्ठ नागरिक इमरजेंसी पेंशन लान के तहत अपनी मासिक पेंशन के 15 गुना तक कर्ज ले सकते हैं। इसमें भी 2 लाख रुपए की ऊपरी सीमा है, ऐसे लोन की अवधि 5 साल है। यह जीरो कंसेशनल इंटरेंस्ट या चार्ज पर मिलेगा। यूनियन बैंक ऑफ इंडिया : यूनियन बैंक ऑफ इंडिया उन व्यापारियों को भी कर्ज दे रहा है जिनके काम पर लॉकडाउन से असर पड़ा है। यह उनकी कार्यशील पूंजी के 10 फीसदी तक दिया जाएगा। बैंक ऑफ बड़ौदा : बैंक ऑफ बड़ौदा ने बड़ौदा कोविड इमरजेंसी क्रेडिट लाइन शुरू की है। यह स्वीकृत लोन सीमा के 10 फीसदी तक अतिरिक्त धन मुहैया कराएगा। कारर्पोरेट के लिए ब्याज दर स्टैंडर्ड प्रीमियम के बिना 8.15 फीसदी होगी। एमएसएमई को 8 फीसदी की दर से लोन मिलेगा। बैंक ऑफ इंडिया : बैंक ऑफ इंडिया ने कोविड इमरजेंसी सपोर्ट स्कीम शुरू की है। इसके तहत कॉर्पोरेट अपनी मौजूदा कार्यशील पूंजी सीमा पर 20 फीसदी अतिरिक्त क्रेडिट का लाभ उठा सकते हैं। स्कीम के तहत नौकरीपेशा को उनकी अंतिम सैलरी के तीन गुना तक लोन दिया जाएगा। सिडबी : सरकारी वित्तीय संस्थान सिडबी ने भी 5 फीसदी की रियायती दरों पर एमएसएमई को कर्ज उपलब्ध कराने का ऐलान किया है। सभी कंपनियों के ट्रैक्टरों के मॉडल, पुराने ट्रैक्टरों की री-सेल, ट्रैक्टर खरीदने के लिए लोन, कृषि के आधुनिक उपकरण एवं सरकारी योजनाओं के नवीनतम अपडेट के लिए ट्रैक्टर जंक्शन वेबसाइट से जुड़े और जागरूक किसान बने रहें।

कोविड-19 लॉक डाउन में किसानों को मिली बड़ी राहत, मंडिया खुलेंगी

कोविड-19 लॉक डाउन में किसानों को मिली बड़ी राहत, मंडिया खुलेंगी

मंडिया खुलेंगी, किसान बेच सकेंगे फसल ट्रैक्टर जंक्शन पर किसान भाइयों का एक बार फिर स्वागत है। आज बड़ी खुशी की बात है कि सरकार ने भी किसानों को भारत का भाग्य विधाता मान लिया है। कोरोना संकट के समय केंद्र की मोदी सरकार ने किसानों को बड़ी राहत दी है। अब लॉक डाउन के दौरान कृषि के कार्य प्रभावित नहीं होंगे। सरकार ने नई गाइडलाइन जारी कर किसानों को कई प्रकार की छूट दी है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप -http://bit.ly/TJN50K1 किसानों के लिए सरकार की गाइडलाइन कोरोना लॉकडाउन के दौरान कृषि की हालत खराब नहीं हो इसलिए गृह मंत्रालय ने किसानों को कई तरह की छूट दी है। केंद्र सरकार ने खेती से जुड़े कार्यों, मशीनरी, उर्वरक, खाद-बीज की दुकानों, कृषि उपज मंडियों व खरीद-फरोख्त से जुड़ी एजेंसियों को लॉकडाउन से बाहर कर दिया है। यानि अब किसान आराम से खेत पर जा सकेंगे। ट्रैक्टर से जुताई, कंबाइन मशीन से फसल काट सकेंगे। नजदीकी कस्बों से बीज, डीएपी व यूरिया खरीद सकेंगे। अपनी फसल को मंडी पहुंचा सकेंगे। दूसरे शहर या राज्यों से फसल कटाई में काम आने वाली मशीनों को मंगा सकेंगे। यानि अब लॉक डाउन से कृषि कार्य प्रभावित नहीं होंगे। हालांकि किसानों से अपील की गई है कि वो उचित सामाजिक दूरी बनाए रखें और कोरोना गाइडलाइन का ध्यान रखें। यह भी पढ़ें : 8.69 करोड़ किसानों को अप्रैल के पहले सप्ताह में मिलेंगे 2 हजार रुपए किसानों के लिए गृह मंत्रालय के नए आदेश कोरोना के कारण देश के किसानों को सबसे ज्यादा परेशानी हो रही थी। किसानों की फसल खेत में खड़ी है और उसे काटने के लिए न तो मजदूर मिल रहे हैं न ही मशीन उपलब्ध हो पा रही है। मंडियां नहीं खुलने व समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीद नहीं होने के कारण किसान अपनी उपज को नहीं बेच पा रहे हैं और आर्थिक परेशानी से गुजर रहे हैं। किसानों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए गृह मंत्रालय ने 27 मार्च 2020 को नए आदेश जारी किए हैं। ये आदेश पूरे देश में लागू होंगे। इसके अलावा राज्य सरकारों ने भी किसानों की सुविधा के अनुसार कुछ रियायतें उपलब्ध कराई हैं। गाइडलाइन की खास बातें किसान बिना किसी रुकावट के कृषि कार्य करें। मजदूरों को काम करने में परेशानी नहीं होनी चाहिए। फसल कटाई से जुड़ी मशीनें (कंबाइन-रीपर) आदि एक राज्य से दूसरे राज्य में जा सकेंगी। फसल कटाई और न्यूनतम समर्थन मूल्य पर फसल खरीद में जुटे लोग एक-दूसरे स्थान पर जा सकेंगे। सभी सरकारी मंडियां, कृषि उत्पादन मंडी समितियां या फिर वे मंडियां जिन्हें राज्य सरकारों ने मान्यता दी हैं, खुलेंगी। खाद-बीज और रासायनिक कीटनाशकों की दुकानें खुल सकेंगी। फार्म मशीनरी, कस्टम हायरिंग सेंटर खुलेंगे। जानिए, किस राज्य के किसान को क्या सुविधा मिली उत्तरप्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, बिहार, हरियाणा समेत कई राज्य सरकारों ने फसल कटाई, मंडी, खाद-बीज, कीटनाशक, राशन व मंडी तक सामान ले जाने के संबंध में आदेश जारी किए हैं। सरकारों ने कहा है कि किसानों को खेती-बाड़ी से जुड़े कार्यों में दिक्कत नहीं आनी चाहिए। उत्तर प्रदेश : यूपी के अपर मुख्य सचिव अवनीश अवस्थी ने निर्देश जारी किए हैं। इसमें पुलिस-प्रशासन से कहा गया है कि रबी फसल की कटाई में प्रयुक्त कंबाइन हार्वेस्टर काम करेंगे। खेतों व अन्य कृषि कार्यों में श्रमिक काम कर सकेंगे। उर्वरक व कीटनाशकों की दुकानों खुलेंगी। रेलवे रैक द्वारा उवर्रक की आपूर्ति जारी रहेगी। इन कामों में लगे श्रमिकों को आने-जाने में छूट रहेगी। बीज विधायन संयंत्र के संचालन और कार्य में लगे श्रमिकों को भी छूट रहेगी। साथ ही किसानों को सोशल डिस्टेसिंग बनाए रखने और खेत में ज्यादा मजदूरों को इकट्ठा नहीं होने की अपील की गई है। हरियाणा : कोरोना महामारी से जंग के बीच हरियाणा सरकार ने किसानों को राहत दी है। बंद के दौरान किसान अपने खेतों में बेरोकटोक आवाजाही कर सकेंगे। फसल कटाई में भी किसानों को कोई दिक्कत नहीं आएगी। फसलों की कटाई के लिए आवागमन करने वाली कंबाइन हार्वेस्टर और दूसरी मशीनों को सडक़ों पर रोका नहीं जाएगा। प्रदेश सरकार ने इस संबंध में पुलिस, प्रशासन को निर्देश जारी कर दिए हैं। राजस्थान : राजस्थान सरकार ने 23 मार्च को जारी आदेश में कोरोना संक्रमण को रोकने के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद बंद कर दी थी, लेकिन फसल की कटाई जारी रहेगी। गहलोत सरकार ने फसल कटाई के दौरान एहतियात बरतने के आदेश जारी किए हैं। इसमें कहा है कि.फसल कटाई के लिए कोशिश हो कि ज्यादा से ज्यादा मशीन (कंबाइन) से हो। इस दौरान खेत में काम करने वाले लोग एक दूसरे से 5 मीटर की दूरी पर रहें और समय-समय पर हाथ धुलते रहें। खेतों में काम करने वाले लोग किसान या मजदूर, अपना अपना पानी अलग-अलग रखें, खाने के बर्तन भी अलग हों। अगर किसी व्यक्ति को खांसी, जुखाम, बुआर आदि है तो उसे कृषि कार्य से दूर रखे। कोरोना से लड़ाई में किसानों की भी है महत्वपूर्ण जिम्मेदारी गांव हो या खेत.. सोशल डिस्टेसिंग (उचित दूरी- यानि एक दूसरे के बीच न्यूनतम 1 मीटर की दूरी) बनाए रखिए। खेत में एक साथ ज्यादा मजूदरों को काम नहीं करना चाहिए। मजदूर, या आप खुद एक ही बोतल से पानी नहीं पिएं। खेत में बाल्टी और साबुन रखिए और हाथ धुलते रहिए। फसल काटें तो सुखाकर रखें, जल्द बेचने की कोशिश न करें औने-पौने दाम मिलेंगे। अपने जिले के इमरजेंसी नंबर अपने पास रखें। सबसे जरूरी चीज अपनी सेहत का पूरा ख्याल रखें। सभी कंपनियों के ट्रैक्टरों के मॉडल, पुराने ट्रैक्टरों की री-सेल, ट्रैक्टर खरीदने के लिए लोन, कृषि के आधुनिक उपकरण एवं सरकारी योजनाओं के नवीनतम अपडेट के लिए ट्रैक्टर जंक्शन वेबसाइट से जुड़े और जागरूक किसान बने रहें।

कोरोना लॉकडाउन से देशभर में रुकी फसलों की सरकारी खरीद ?

कोरोना लॉकडाउन से देशभर में रुकी फसलों की सरकारी खरीद ?

जानिए कोविड-19 से फसलों के नुकसान का मुआवजा मिलेगा या नहीं कोरोना वायरस (कोविड-19) की दहशत कम होती नहीं दिख रही है। 27 मार्च 2020 गुरुवार दोपहर तक भारत में 17 लोगों की मौत हो चुकी थी। वहीं 724 लोग संक्रमित है। इसके अलावा विश्व के अन्य देशों में हालात और भी भयावह है। विश्व के अन्य देशों में 24 हजार 57 लोगों की मौत हो चुकी है और सक्रमण के 5 लाख 31 हजार 860 मामले हैं। देश में कोरोना वायरस के संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए 14 अप्रैल तक 21 दिन का लॉकडाउन पीरियर चल रहा है। ऐसे में समर्थन मूल्य पर फसलों की खरीद बंद कर दी गई। किसानों की फसल खेत में खड़ी है और किसान उसे काटने की तैयारी कर रहा है। ट्रैक्टर जंक्शन इस पोस्ट के माध्यम से किसानों के हर सवाल का जवाब दे रहा है जो उनके मन में है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप -http://bit.ly/TJN50K1 समर्थन मूल्य पर खरीद प्रक्रिया बंद केंद्र सरकार ने इस वर्ष गेहूं का उत्पादन 105 मिलियन टन होने की संभावना व्यक्त की है। कोरोना लॉकडाउन की वजह से फसलों को काटने के लिए मजदूर नहीं मिल रहे हैं। मजदूर खेत में जाने से डर रहे हैं। दूसरी तरफ बेमौसम बरसात का सिलसिला भी देश के उत्तरी राज्यों में जारी है जिससे किसानों को फसलों में नुकसान होने की संभावना है। देशभर में लॉक डाउन के कारण कृषि मशीनें भी एक राज्य से दूसरे राज्य नहीं जा पा रही है। कोरोना (कोविड-19) से फसल नुकसान का मुआवजा : मिलेगा या नहीं देशभर में लॉकडाउन के कारण ट्रांसपोर्टेशन के वाहन भी बंद है। देशवासियों से अपने-अपने घरों में रहने की अपील की गई है। जनजीवन थम गया है। लॉकडाउन का कदम ऐसे समय में उठाया गया है जब देशभर के खेतों में फसलों की कटाई अंतिम चरण में चल रही है और किसानों को इसे जल्दी से जल्दी बेचना चाहते हैं। केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत मानव निर्मित जोखिम को शामिल नहीं किया गया है, जिससे देश का कोई भी किसान यह दावा नहीं कर सकता है कि कोरोना वायरस (कोविड-19) के कारण हुए नुकसान का बीमा किया जाएगा। यदि खेत में पड़ी फसल का नुकसान बारिश या ओले से होता है तो यह प्राकृतिक आपदा है। फसल कटाई के बाद खेत में सूखने के लिए छोड़ी गई फसल की क्षति होने पर भी किसानों को बीमा का लाभ दिया जाता है। किसानों को कोविड-19 जैसी महामारी से नुकसान की भरपाई के देश में फिलहाल कोई योजना नहीं है। सरकार अन्य योजनाओं के माध्यम से किसानों को फायदा पहुंचा रही है। अब किसानों की भरपाई बस सरकार के राहत पैकेज से ही हो सकती है। यह भी पढ़ें : 8.69 करोड़ किसानों को अप्रैल के पहले सप्ताह में मिलेंगे 2 हजार रुपए समर्थन मूल्य पर कब शुरू होगी सरकारी खरीद देश में लॉकडाउन की घोषणा से पहले देश के कई राज्यों में एक अप्रैल व 15 अप्रैल से रबी फसलों की समर्थन मूल्य पर सरकारी खरीद शुरू होनी थी। लेकिन लॉकडाउन के बाद हालत उलट हो गए हैं। अब फसलों की समर्थन मूल्य पर खरीद कब शुरू होगी यह देश में लॉकडाउन हटने की तिथि 15 अप्रैल के बाद ही पता चलेगा। फसलों की संभावित खरीद से पहले ही पंजाब, हरियाणा तथा राजस्थान ने अपने राज्यों में गेहूं की खरीद अनिश्चित समय के लिए स्थगित कर दी है। लॉक डाउन के कारण मंडियां भी बंद है। ऐसे में किसानों के पास बाजार में भी बेचने का विकल्प उपलब्ध नहीं है। ट्रैक्टर जंक्शन सभी किसान भाइयों को सलाह देना चाहता है कि किसान भाई परिवार के सहयोग से खेत में खड़ी फसलों को काटकर अपने घर व गोदामों में रखे। लॉक डाउन हटने के बाद फिर से सरकारी खरीद शुरू होगी और मंडियां भी खुल जाएंगी। इसके अलावा कई राज्यों में अभी तक समर्थन मूल्य पर पंजीकरण की प्रक्रिया भी पूरी नहीं हुई है। पंजीकरण के बाद ही किसान अपनी फसल समर्थन मूल्य पर बेच सकते हैं। किसान कैसे करें फसलों का सुरक्षित भंडारण देशभर के किसान फसलों की कटाई में जुटे हैं। अब उनके सामने फसलों को बेचने की समस्या है। लेकिन लॉकडाउन के कारण 15 अप्रैल से पहले फसलों को बेचना लगभग असंभव है। अत: जिन किसानों ने अपनी फसल काट ली है वह भंडारण की व्यवस्था सुनिश्चित कर लें। भंडार में अन्न रखने से पहले मालाथियान 50 ई.सी. एक भाग एवं 300 भाग पानी में घोलकर अच्छी तरह से भंडार में छिडक़ाव करें। बीज से लिए रखी अन्न की बोरियों पर भी मालाथियान धूल का भुरकाव कर दें। अगर अन्न में कीड़ लगने शुरू हो जाए तो उसे शीघ्र बेच दें। कीड़े लगने की दशा में प्रधुमन भी कर सकते हैं। इसके लिए वायुरोधी बर्तन में ई.डी.बी. 3 मिली प्रति क्विंटलन की दर से काम में लाएं। देशी तरीके से भंडारण करने के लिए एक सौ किलोग्राम अनाज में 5 किलोग्राम सूखी नीम या सदाबहार या कनेर की पत्तियां अच्छी तरह से मिलाकर रखने से कीटों का बचाव होता है। सभी कंपनियों के ट्रैक्टरों के मॉडल, पुराने ट्रैक्टरों की री-सेल, ट्रैक्टर खरीदने के लिए लोन, कृषि के आधुनिक उपकरण एवं सरकारी योजनाओं के नवीनतम अपडेट के लिए ट्रैक्टर जंक्शन वेबसाइट से जुड़े और जागरूक किसान बने रहें।

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