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सांप के काटने से मौत पर पीडि़त परिवारों को मिलेगी मुआवजा की राशि

सांप के काटने से मौत पर पीडि़त परिवारों को मिलेगी मुआवजा की राशि

सांप के काटने से मौत  : जानें, कैसे मिलेगी सरकार से आर्थिक सहायता और क्या है नियम

अब सर्पदंश से होने वाली मौतों को लेकर सरकार की ओर से मुआवजा दिया जाएगा। हाल ही में यूपी सरकार ने सर्पदंश की घटनाओं को आपदा घोषित कर दिया है ताकि मृतक के परिवार को आर्थिक मदद पहुंचाई जा सके। कई बार खेत में काम करते समय किसान, मजदूरों व अन्य लोगों के साथ सांप के काटने (snake bites) की घटनाएं हो जाती है लेकिन मुआवजा मिलने की सरकारी प्रक्रिया काफी जटिल होने से पीडि़त परिवार को आर्थिक मदद मिलने में काफी देर हो जाती है और कई बार तो ऐसे मामलों में सरकारी मदद मिल ही नहीं पाती है। इस सब जटिलताओं को दूर करते हुए यूपी सरकार ने सर्पदंश से हुई मौत को आपदा की श्रेणी में रखते हुए पीडि़त परिवार को चार लाख की आर्थिक सहायता मुहैया कराने का प्रावधान किया है। यानि अब राज्य में यदि किसी की सर्पदंश से मौत होती है तो मृतक के परिवार वालों को चार लाख रुपए की आर्थिक सहायता सरकार की ओर से दी जाएगी।  

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सात दिन में देनी होगी सूचना

यूपी सरकार की ओर से किए गए प्रावधान के तहत सर्पदंश की घटना पर सात दिन के भीतर मृतक के परिजनों को आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी। इसके लिए योगी सरकार ने सभी जिलाधिकारियों को आदेश जारी कर दिए हैं। राज्य सरकार ने इसके लिए गाइडलाइन भी जारी की है। इसके तहत इस योजना का लाभ पाने के लिए कुछ शर्तें भी पूरी करनी होगी। सर्पदंश से मौत की पुष्टि के लिए शव का पोस्मार्टम कराना जरूरी होगा। साथ ही मौत के सात दिन के भीतर मुआवजा के लिए आवेदन भी करना होगा। 


कैसे मिलेगी आर्थिक सहायता

सर्पदंश से मौत के मामलों में जिलाधिकारियों को सुनिश्चित करना होगा कि संबंधित व्यक्ति की मौत सर्पदंश से ही हुई है। इसके लिए मृतक का पंचनामा और पोस्टमार्टम परिजनों को करवाना होगा। पोस्टमार्टम में विसरा की रिपोर्ट की अनिवार्यता नहीं होगी। लोगों को आर्थिक सहायता के लिए विभागों के चक्कर नहीं काटने पड़ें इसलिए विसरा की रिपोर्ट की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। इससे ऐसे मामलों में पीडि़त परिवार को शीघ्र आर्थिक सहायता मिल सकेगी। 

इस संबंध में प्रयागराज एडीएम वित्त एवं राजस्व एमपी सिंह ने मीडिया को बताया कि पिछले दिनों प्रदेश सरकार से इसका आदेश आया है। आदेश मिलते ही उसका पालन शुरू हो गया है। इसके लिए सभी लेखपालों को निर्देशित किया गया है। उन्होंने बताया कि सर्पदंश से मौत हो तो शव का पंचनामा या पोस्टमार्टम कराया जाना अनिवार्य है। पोस्टमार्टम के बाद मृतक की बिसरा रिपोर्ट प्रिजर्व करने की जरूरत नहीं है। एडीएम वित्त एवं राजस्व ने बताया कि मृतक के आश्रितों को आर्थिक सहायता के लिए सात दिन के भीतर जिला प्रशासन को जानकारी देनी होगी। वह क्षेत्रीय लेखपाल या एसडीएम कार्यालय में इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। फिर इसकी जांच करवाकर आर्थिक सहायता की धनराशि पीडि़त के खाते में भेज दी जाएगी। इस योजना के शुरू होने से किसानों को राहत मिलेगी।


अब तक क्या था नियम

अब तक सर्पदंश से हुई मौत की पुष्टि के लिए प्रक्रिया काफी लंबी थी। मृतक के विसरा की जांच फॉरेंसिक लैब में होती थी, जिसके चलते मुआवजा मिलने में देर हाती थी। फॉरेंसिक स्टेट लीगल सेल के अनुसार सांप काटने से मौत होने पर विसरा रिपोर्ट कोई औचित्य नहीं। विसरा जांच रिपोर्ट से यह पुष्टि भी नहीं होती कि मौत सांप काटने से हुई है। ऐसे में अब विसरा जांच की कोई जरूरत नहीं। सरकारी मुआवजा देने के लिए विसरा रिपोर्ट का इंतजार नहीं करना होगा। 

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बिहार में सर्पदंश से मौत पर 5 लाख रुपए के मुआवजे का प्रावधान, लेकिन अभी तक कोई दावा नहीं

सांप काटने से मौत होने पर पांच लाख का मुआवजा का प्रावधान है। साल 2015 से यह प्रावधान लागू है पर अब तक बिहार में एक भी व्यक्ति ने इस मद में मुआवजा का दावा वन विभाग के समक्ष नहीं किया है। यह जानकारी पिछले साल संजय सरावगी के अल्पसूचित प्रश्न के जवाब में उपमुख्यमंत्री सह पर्यावरण एवं वन मंत्री सुशील कुमार मोदी ने विधानसभा में यह जानकारी दी थी।

उपमुख्यमंत्री ने बताया था कि वन्यप्राणियों की श्रेणी केंद्र सरकार तय करती है। 5 सितंबर, 2015 को सांप को वन्य प्राणियों की श्रेणी में शामिल किया गया है। इस कारण शेर, बाघ, चीता, हाथी की तरह ही अगर किसी की सांप काटने से मौत हो जाए तो वन विभाग की ओर से मृतक के निकटतम परिजनों को पांच लाख का मुआवजा मिल सकता है। अगर बाढ़ के समय सांप काटने से किसी की मौत होती है तो उसे आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से अनुग्रह अनुदान मिलेगा। इसके अलावा बिहार शताब्दी असंगठित कार्यक्षेत्र कामगार एवं शिल्पकार सामाजिक सुरक्षा योजना 2011 के तहत सर्पदंश से मौत होने पर दुर्घटना माना जाता है और उसमें भी अनुदान का प्रावधान है। 


अलग-अलग राज्यों में मुआवजा राशि अलग-अलग, आखिर क्यूं?

सर्पदंश से मौतों को लेकर अलग-अलग राज्यों में मुआवजा की राशि अलग-अलग है। गौर करने वाली बात ये हैं कि सभी जगह सर्पदंश से मौत की घटनाएं समान हैं लेकिन मुआवजा की राशि में अंतर क्यूं और वो भी काफी ज्यादा। राजस्थान में अगर कृषि कार्य करते समय किसी किसान की सांप के काटने से मौत होती है तो उसके आश्रितों को कृषक साथी योजना के तहत 2 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाता है, जबकि सामान्य व्यक्ति की सांप के काटने से मौत होने पर मुख्यमंत्री सहायता कोष से 50 हजार रुपए की राशि देने का प्रावधान है। वहीं राज्यवार मुआवजा राशि देखें तो आपको काफी अंतर देखने को मिलेगा।

राजस्थान में 2 लाख रुपए, पंजाब में 3 लाख रुपए, बिहार में 3 लाख रुपए, वहीं बिहार में बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में सर्पदंश से मौत पर 5 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाता है। उत्तरप्रदेश में 4 लाख रुपए, गोवा में 2 लाख रुपए के मुआवजे का प्रावधान रखा गया है। इसी तरह अन्य राज्यों में भी मुआवजा राशि में अंतर है। सर्पदंश से मौत में भी सरकारों की ओर से अंतर किया जा रहा है। जबकि देशभर में सर्पदंश से मौतों की स्थिति में समान मुआवजे का प्रावधान होना चाहिए। 

 

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