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किसानों की समस्याओं का होगा समाधान, मिलेगी हर योजना की जानकारी

किसानों की समस्याओं का होगा समाधान, मिलेगी हर योजना की जानकारी

27 June, 2020

खेती-किसानी से संबंधित प्रशिक्षण कार्यक्रमों का भी होगा आयोजन

अब किसानों की समस्याओं का समाधान करने के लिए सरकार की ओर से हर गांव में ग्राम पंचायतों के माध्यम से ग्राम चौपाल का आयोजन किया जाएगा। इस योजना के तहत किसानों को सरकार द्वारा उनके हित में चलाई योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। इसके अलावा समय-समय पर योजनाओं के तहत दिए जाने वाले प्रशिक्षणों में किसानों की सहभागिता सुनिश्चित की जाएगी। ग्राम चौपाल आयोजित करने के पीछे सरकार का उद्देश्य किसानों तक सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाना है ताकि किसान उन योजनाओं का लाभ उठा कर अपनी आमदनी में बढ़ोतरी कर सके। वैसे तो सरकार ने किसानों के लिए कई योजनाएं चला रखी है पर उनका लाभ शिक्षित किसान तक ही सीमित होकर रह गया है। लेकिन ग्राम चौपाल आयोजित किए जाने के बाद कम पढ़े लिखे किसान भी इस योजनाओं से लाभान्वित हो सकेंगे। गौरतलब है कि बिहार में कई वर्षों से किसान चौपाल का आयोजन किया जाता रहा है। लेकिन कोविड-19 को देखते हुए इसका आयोजन नहीं हो पाया। अब फिर से सभी जगह ग्राम चौपालों का आयोजन किया जाएगा। 

 

सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1

 

क्या है ग्राम चौपाल ( village chaupal )

ग्राम पंचायत की ओर से केंद्र और प्रदेश सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को जरूरतमंदों तक पहुंचाने के लिए ग्राम चौपाल लगाई जाती है। इन ग्राम चौपालों का आयोजन अधिकांश: रात्रि में किया जाता है ताकि किसान व पशुपालक अपने कार्यों से फ्री होकर इसमें शामिल हो सके और सरकारी की लाभकारी योजनाओं को समझकर उसका लाभ उठा सके। ग्राम पंचायत लगाने से पहले पूरे गांव में मुनादी करा कर लोगों को सूचित किया जाता है कि इस दिन गांव में चौपाल लगाई जाएगी।

 

 

ग्राम चौपाल में किसानों के लिए किए जाएंगे ये काम

किसानों के लिए ग्राम पंचायत की ओर से नियमित तय तिथि पर किसान ग्राम चौपाल व किसान पाठशाला का आयोजन आदि कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसमें किसानों को खेती-किसानी, पशुपालन, मछली पालन आदि विषयों पर किए जा रहे नवाचार की जानकारी देने के साथ ही किसानों को नई योजनाओं एवं कृषि में किए जा रहे नवाचारों से अवगत करवाया जाएगा। इसके अलावा किसानों को खेती- किसानी आदि कार्यों में आ रही समस्याओं का समाधान करने के लिए भी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 

 

ग्राम चौपाल से किसानों को होंगे ये लाभ

चौपाल कार्यक्रम के माध्यम से राज्य के किसानों को कृषि विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं एवं कार्यक्रमों से अवगत कराया जाएगा।
इस चौपाल में कृषि क्षेत्र में किसानों की समस्याओं की जानकारी प्राप्त की जाएगी तथा इन समस्याओं के समाधान हेतु किसानों से सुझाव भी लिए जाएंगे। 
इस कार्यक्रम में कृषि वैज्ञानिकों / विशेषज्ञों के माध्यम से किसानों को कृषि से संबंधित नवीनतम तकनीक की जानकारियां किसानों तक पहुंचाई जाती है। 
इसके अलावा किसान हित समूह, खाद्य सुरक्षा समूह तथा किसान उत्पादन संगठन के गठन की जानकारी किसानों को उपलब्ध कराते हुए उत्पादन से लेकर विपणन तक में आने वाली समस्याओं का समाधान किया जाएगा।

 

बिहार में ग्राम चौपाल की तय की गई तिथि, राज्य की सभी 8405 ग्राम पंचायतों में होगा ग्राम चौपाल का आयोजन

बिहार सरकार ने राज्य के सभी जिलों में किसानों के लिए ग्राम चौपाल आयोजित करने की तिथि निश्चित कर दी है। कृषि मंत्री डॉ. प्रेम कुमार ने बताया कि एक अगस्त से 15 अगस्त तक किसान चौपाल के आयोजन किए जाने की संभावना है। किसान चौपाल का आयोजन राज्य के सभी पंचायत के गांवों में बारी-बारी से की जाती है। किसानों को तिथि की सूचना दी जाएगी ताकि वे ग्राम पंचायत में आकर अपनी समस्याओं को बता कर समाधान प्राप्त कर सकेंगे। राज्य सरकार ने इस वर्ष किसान चौपाल आयोजित करने के निर्देश दे दिए हैं। इसके लिए राज्य सरकार ने 924.55 लाख रुपए की स्वीकृति प्रदान की है। बिहार राज्य की सभी 8405 ग्राम पंचायतों में किसानों के लिए ग्राम चौपाल का आयोजन किया जाना है।

 

 

ग्राम चौपाल में कौन-कौन होंगे शामिल

कोरोना संक्रमण के कारण किसान के लिए ग्राम चौपाल का आयोजन में बिलंब हो रहा है। यदि कोरोना संक्रमण पर काबू पा लिया गया तो किसान ग्राम पंचायत में  किसान, वैज्ञानिक एवं पदाधिकारी एक साथ शामिल हो सकेंगे। नहीं तो इसका आयोजन डिजिटल के माध्यम से किया जाएगा। गौरतलब है कि किसान ग्राम पंचायत के माध्यम से लगने वाली चौपालों में किसानों को अपने गांव / पंचायत में खेती-बाड़ी की जानकारी के साथ ही कृषि से जुड़े अन्य क्षेत्रों के बारे में भी आवश्यक ज्ञान विशेषज्ञों द्वारा दिया जाता है।

 

सभी कंपनियों के ट्रैक्टरों के मॉडल, पुराने ट्रैक्टरों की री-सेल, ट्रैक्टर खरीदने के लिए लोन, कृषि के आधुनिक उपकरण एवं सरकारी योजनाओं के नवीनतम अपडेट के लिए ट्रैक्टर जंक्शन वेबसाइट से जुड़े और जागरूक किसान बने रहें।

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मत्स्य प्रशिक्षण और विस्तार योजना : मछलीपालन करने वाले किसानों की आय बढ़ाने में हैं मददगार

मत्स्य प्रशिक्षण और विस्तार योजना : मछलीपालन करने वाले किसानों की आय बढ़ाने में हैं मददगार

मत्स्य पालन विभाग छत्तीसगढ़ द्वारा मछलीपालन की उन्नत तकनीक का दिया जाता है प्रशिक्षण, मिलते हैं कई फायदें मत्स्य पालन विभाग की ओर से मछली पालन करने वाले किसानों के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही है। इनमें से मत्स्य पालन का प्रशिक्षण देने के साथ ही इसके विस्तार के प्रयास किए जा रहे हैं सरकार की ओर से किए जा रहे हैं। इन योजनाओं को चलाने के पीछे सरकार का उद्देश्य यह है कि किसानों को खेती के साथ-साथ मछलीपालन भी करें ताकि उनकी आय में बढ़ोतरी हो सके। इसके लिए किसानों को मछलीपालन का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। वहीं समुद्र किनारे रहने वाले मछुआरे भी मत्स्य पालन विभाग की योजनाओं से लाभान्वित हो रहे हैं। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से मत्स्य पालन विभाग के माध्यम से कई योजनाओं का संचालन किया जा रहा है जो मछलीपालन करने वाले किसानों के लिए बेहद लाभकारी है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 मत्स्य प्रशिक्षण और विस्तार योजना छत्तीसगढ़ : शिक्षण-प्रशिक्षण ( मछुआरों का 10 दिवसीय प्रशिक्षण ) योजना मत्स्य पालन विभाग छत्तीसगढ़ की ओर से मछुआरों का 10 दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया जाता है। इसके तहत सभी श्रेणी के मछुआरों को मछली पालन की तकनीक एवं मछली पकडऩे, जाल बुनने, सुधारने एवं नाव चलाने का प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। इस 10 दिवसीय सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक प्रशिक्षण कार्यक्रम अंतर्गत प्रति प्रशिक्षणार्थी प्रशिक्षण व्यय रू. 1250/- स्वीकृत है, जिसके अन्तर्गत रुपए 75/- प्रतिदन प्रति प्रशिक्षणार्थी के मान से शिष्यावृत्ति, रुपए 400/- की लागत मूल्य का नायलोन धागा तथा रुपए 100/- विविध व्यय शामिल है। शिक्षण-प्रशिक्षण ( मछुआरों का अध्ययन भ्रमण ) योजना प्रगतिशील मछुआरों को उन्नत मछली पालन का प्रत्यक्ष अनुभव कराने के उद्देश्य से मत्स्य पालन विभाग की ओर से इस प्रशिक्षण का आयोजन किया जाता है। इसके तहत प्रगतिशील मछुआरों राज्य के बाहर अध्ययन भ्रमण पर भेजा जाता है। इस योजना का उद्देश्य सामान्य/अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति वर्ग के प्रगतिशील मछुआरों को उन्नत मछली पालन का प्रत्यक्ष अनुभव कराने हेतु देश के अन्य राज्यों में अपनाई जा रही मछली पालन तकनीकी से परिचित कराना है। इस योजना के तहत प्रति मछुआरा रुपए 2500/- की लागत पर 10 दिवसीय अध्ययन भ्रमण प्रशिक्षण पर व्यय किया जाता है। स्वीकृत योजनानुसार प्रति प्रशिक्षणार्थी रुपए 1000/- शिष्यावृत्ति, रुपए 1250/- आवागमन व्यय तथा रुपए 250/- विविध व्यय का प्रावधान है। शिक्षण-प्रशिक्षण ( रीफ्रेशर कोर्स ) योजना मत्स्य विभाग छत्तीसगढ़ की ओर से संचालित शिक्षण प्रशिक्षण (रीफ्रेशर कार्स) योजना का उद्देश्य पूर्व से प्रिशिक्षित मछुआरो को पुन: अद्यतन करना है। इसके तहत सभी वर्ग के पूर्व से प्रिशिक्षित मछुआरों को पुन: उन्नत मछली पालन का प्रिशिक्षण देने हेतु एवं मछली पालन तकनीकी से परिचित कराने के उद्देश्य से प्रति मछुआरा रुपए 1000/- की लागत पर 03 दिवसीय रीफ्रेशर कोर्स प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके अलावा मत्स्य विभाग छत्तीसगढ़ की ओर मत्स्य पालन प्रसार के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही है जिनका मछली पालक किसान लाभ लेकर अपनी आय बढ़ सकते हैं। झींगा पालन योजना मछली पालकों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से मस्य पालन विभाग छत्तीसगढ़ की ओर से झींगा पालन योजना चलाई जा रही है। इस योजना के तहत अनुसूचित जाति/जन जाति के मत्स्य पालकों को मीठे जल में पॉलीकल्चर झींगा पालन तथा आलंकारिक मत्स्योद्योग विकास की प्रसार योजनान्तर्गत नई योजना क्रियान्वित होगी जिसके तहत हितग्राहियों को वस्तु विषय के रूप में क्रमश: रुपए 15000/- एवं 12000/- का तीन वर्षो में आर्थिक सहायता (अनुदान) देना प्रावधानित है। मौसमी तालाबों में मत्स्य बीज संवर्धन योजना मत्स्य विभाग छत्तीसगढ़ की इस योजना का उद्देश्य छोटे मौसमी तालाबों, पोखरों को उपयोगी बनाकर मत्स्य बीज संवर्धन कर आय में वृद्धि करना है। इस योजना के तहत मत्स्य बीज संवर्धन कर मत्स्य बीज विक्रय से स्वरोजगार उपलब्ध कराने में सहायता की जाती है। इसके तहत 0.5 हेक्टर के तालाब में प्रति हितग्राहियों को मत्स्य बीज संवर्धन, तालाब सुधार एवं इनपुट्स मत्स्य बीज आदि हेतु रुपए 30000/- की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है । नाव जाल या जाल क्रय सुविधा मत्स्य प्रसार के अंतर्गत नाव जाल या जाल क्रय करने की सुविधा दी जाती है। इस योजना का उद्देश्य सभी श्रेणी के मछुआरों को मत्स्याखेट हेतु सहायता प्रदान करना है। इस योजना में तालाबों, जलाशयों अथवा नदियों में मत्स्याखेट करने वाले अनुसूचित जाति के सक्रिय मछुआरों को नाव, जाल उपकरण खरीदने करने हेतु प्रति मछुआरा रुपए 10000/- की सहायता उपलब्ध कराई जाती है। यह सहायता वस्तु विशेष के रूप में दी जाती है। फिंगरलिंग क्रय कर संचयन पर सहायता मत्स्य पालन प्रसार योजना के तह फिंगरलिंग क्रय कर संचयन पर सहायता दी जाती है। इसका उद्देश्य तालाबों में फिंगरलिंग क्रय कर संवर्धन कर मत्स्य उत्पादन में वृद्धि करना और अधिक मत्स्य उत्पादन से अधिक आय अर्जित करना है। इस योजना के तहत मछलीपालक किसानों द्वारा वर्तमान में संचित मत्स्य बीज अर्थात् 10000 फ्राई प्रति हेक्टर के स्पान पर क्रय कर 5000 फिंगरलिंग प्रति हैक्टर डालकर मत्स्य उत्पादन में वृद्धि होगी। साथ ही आहार आय अधिक होगी। ऐसी स्थिति में मत्स्य कृषक को पांच वर्षो तक रुपए 2000/- प्रति वर्ष कुल रुपए 1000/-की सहायता प्रदान की जाती है। पंजीकृत मत्स्य सहकारी समितियों को ऋण/अनुदान योजना इस योजना के तहत सभी वर्ग की पंजीकृत मछुआ सहकारी समितियों को मछली पालन हेतु उपकरण एवं अन्य प्रयोजनों यथा तालाब पट्टा, मत्स्य बीज, नाव-जाल आदि हेतु पात्रतानुसार अनुदान उपलब्ध करवाया जाता है। यह योजना मछुआरों की पंजीकृत समितियों को मछली पालन हेतु मध्य प्रदेश मछुआ सहकारी समितियों (ऋण/अनुदान) नियम-1972 के अंतर्गत प्रदेश में सभी वर्ग की पंजीकृत मछुआ सहकारी समितियों को मछली पालन हेतु उपकरण एवं अन्य प्रयोजनों तथा तालाब पट्टा, मत्स्य बीज, नाव जाल क्रय इत्यादि हेतु विद्यमान नियमों के तहत पात्रतानुसार ऋण/अनुदान के लिए आर्थिक सहायता / सहायक अनुदान मद से प्रावधानित राशि व्यय की जाती है। योजनान्तर्गत लगातार 3 वर्षो में अधिकतम रुपए 3 लाख की सहायता राशि प्रति सहकारी समिति आइटमवार सीमा के अधीन दिए जाने का प्रावधान है। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

समग्र गव्य विकास योजना : डेयरी उद्योग के लिए 75 प्रतिशत तक सब्सिडी

समग्र गव्य विकास योजना : डेयरी उद्योग के लिए 75 प्रतिशत तक सब्सिडी

दूध के लिए गाय-भैंस पालो, 75 प्रतिशत पैसा सरकार देगी अगर आप लोगों को शुद्ध दूध उपलब्ध कराने के साथ-साथ अच्छी आमदनी कमाना चाहते हैं तो डेयरी उद्योग में आपके लिए अपार संभावनाएं हैं। डेयरी उद्योग से देश के किसानों, युवाओं व बेरोजगारों के जीवन को संवारने के लिए केंद्र व विभिन्न राज्य सरकारें अपने-अपने स्तर पर कई योजनाएं संचालित कर रहे हैं, जिनका फायदा आप उठा सकते हैं। ट्रैक्टर जंक्शन की इस पोस्ट में आपको समग्र गव्य विकास योजना के बादे में जानकारी दी जा रही है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 सरकार दस दुधारू पशुओं के लिए देगी 8.96 लाख रुपए, आवेदन की अंतिम तिथि 25 अक्टूबर इस योजना के तहत सरकार दस दुधारू पशुओं की डेयरी खोलने के लिए 8 लाख 96 हजार रुपए की सहायता उपलब्ध करा रही है। इस योजना में 75 फीसदी तक सब्सिडी भी मिल रही है। बिहार सरकार की समग्र गव्य विकास योजना इन दिनों बहुत लोकप्रिय हो रही है। समग्र गव्य विकास योजना बिहार 2020-21 में आवेदन कोरोना काल में कृषि सेक्टर को छोडक़र सभी सेक्टरों में मंदी का आलम रहा। देश के नीति विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि और उससे जुड़े क्षेत्र ही बहुत बड़े स्तर पर रोजगार के अवसर उत्पन्न कर सकते हैं। अगर आधुनिक तरीके से पशुपालन किया जाए तो अच्छी खासी आमदनी प्राप्त की जा सकती है। केंद्र व राज्य सरकार समय-समय पर विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सब्सिडी उपलब्ध कराती है। बिहार सरकार की ओर से युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से डेयरी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए समग्र ग्रव्य विकास योजना के तहत 50 से 75 फीसदी तक की सब्सिडी उपलब्ध कराई जा रही है। इसके लिए आवेदन 25 अक्टूबर तक स्वीकार किए जाएंगे। इस योजना में 2, 4, 6 और 10 दुधारू पशुओं के लिए अलग-अलग श्रेमियों में सब्सिडी उपलब्ध कराई जा रही है। बिहार में इस योजना का संचालन पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग की ओर से किया जा रहा है। समग्र गव्य विकास योजना की पात्रता इस योजना का लाभ सभी वर्गों के भूमिहीन, किसानों, लघु किसानों, सीमांत सिकानों, गरीबी रेखा से नीचे आने वाले किसानों, शिक्षित बेरोजगार युवक-युवतियों को मिलेगा। समग्र गव्य विकास योजना का क्रियान्वयन बिहार राज्य के सभी जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में ही किया जाएगा। जिल गव्य विकास पदाधिकारी / संबंद्ध जिला के जिला गव्य अधिकारी नोडल अधिकारी बनाए गए हैं। जो भी व्यक्ति इस योजना का लाभ उठाना चाहते हैं वो अपना आवेदन जिला गव्य विकास कार्यालय/संबंधित जिला के जिला पशुपालन कार्यालय (गव्य प्रकोष्ठ) में जमा करा सकते हैं। समग्र गव्य विकास योजना में सब्सिडी इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में सभी वर्गो के भूमिहीन किसानों, दुग्ध उत्पादकों व शिक्षित बेरोजगारों को स्वरोजगार के अवसर सृजित कर उन्हें विकास की मुख्यधारा में शामिल करना है। ताकि वे इस ऋण की राशि से अपनी डेयरी इकाई खड़ी कर सके और दूध उत्पादन में बढ़ोत्तरी कर सके। समग्र गव्य विकास योजना के तहत गाय पालन पर सामान्य किसानों को 50 प्रतिशत तथा आरक्षित वर्ग के किसानों को 75 प्रतिशत तक सब्सिडी का प्रावधान है। दो दुधारू मवेशी की योजना की लागत 1 लाख 60 हजार, 4 दुधारू मवेशी के लिए 3 लाख 38 हजार 400, 6 दुधारू मवेशी के लिए 5 लाख 32 हजार 600 और 10 दुधारू मवेशी के लिए 8 लाख 96 हजार रुपये निर्धारित है। इसी राशि पर संबंधित जाति के श्रेणी के आधार पर 50 और 75 प्रतिशत तक सब्सिडी देने की योजना है। यह पिछले कई सालों से यह योजना चल रही है। बिहार में फिलहाल कोरोना संकट के कारण इस साल योजना देर से शुरू की गई है। आवेदनों पर ‘पहले आओ पहले पाओ’ के तर्ज पर विचार किया जाएगा। समग्र गव्य विकास योजना में आवेदन के लिए जरुरी दस्तावेज आवेदन पत्र की दो मूल प्रति आधार कार्ड / फोटो पहचान पत्र / आवासीय प्रमाण पत्र की स्वहस्ताक्षरित दो छाया प्रति। जमीन संबंधी रसीद की छाया प्रति। परियोजना प्रतिवेदन की प्रति। बैंक का डिफॉल्टर नहीं होने के संबंध में शपथ पत्र। स्वलागत योजना हेतु बैंक/ डाकघर में पूर्ण राशि उपलब्धता के संबंध में पासबुक की छाया प्रति । शराब बंदी से प्रभावित होने के संबंध में प्रमाण, डेयरी से संबंधित प्रशिक्षण प्राप्त करने, दुग्ध समिति की सदस्यता का प्रमाण पत्र की छाया प्रति। समग्र गव्य विकास योजना में चयन प्रकिया इस योजना में पात्र लोगों के चयन में बहुत सतर्कता बरती जाती है। जिला गव्य विकास पदाधिकारी के पास जमा हुए आवेदन पत्रों की स्क्रीनिंग होती है। स्क्रीनिंग जिला अग्रणी बैंक पदाधिकारी के अध्यक्षता में गठित स्क्रीनिंग समिति द्वारा किया जाता है। इस समिति में जिला गव्य विकास पदाधिकारी, सदस्य सचिव शामिल होते हैं। इसके अलावा जिला पशुपालन पदाधिकारी, उद्योग विभाग के जिला स्तरीय पदाधिकारी एवं संबंधितजिला परिषद् के प्रतिनिधि सदस्य के रूप में शामिल होते हैं। स्क्रीनिंग समिति की बैठक आवेदन पत्रों की प्राप्तियों की अंतिम तिथि के उपरांत आयोजित की जाएगी, जिसमें प्राप्त आवेदनों की समीक्षा/जांच आवेदक की उपस्थिति में किया जायेगा। आवेदक के साक्षात्कार के पश्चात ऋण स्वीकृति के संबंध में गठित समिति द्वारा निर्णय लिया जायेगा एवं योग्य ऋण आवेदन पत्रों को अनुशंसा के साथ संबंधित बैंक को ऋण स्वीकृति के लिए भेज दिया जाएगा। ऋण स्वीकृत करने वाले संबंधित बैंक का यह दायित्व है कि अनुशंसित आवेदनों पर एक माह के अंदर निर्णय लेते हुए आवेदक एवं संबंधित जिला के अग्रणी बैंक, जिला गव्य विकास कार्यालय एवं जिला परिषद् को सूची के साथ सूचना उपलब्ध कराएं। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और 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पीएम किसान सम्मान निधि योजना : अब फर्जी तरीके से लाभ लेना पड़ सकता है भारी

पीएम किसान सम्मान निधि योजना : अब फर्जी तरीके से लाभ लेना पड़ सकता है भारी

पात्रता सूची से नाम हटाने के साथ ही होगी पाई-पाई की वसूली पीएम सम्मान निधि योजना को लेकर तमिलनाडू, यूपी और राजस्थान में उजागर हुए फर्जीवाड़े के बाद केंद्र सरकार ने सख्त रूख अपना लिया है ताकि वास्तविक पात्र छोटे व सीमांत किसानों को इस योजना का लाभ मिल सके। अब सरकार अवैध तरीके से पीएम सम्मान निधि का पैसा लेने वालों त्वरित कार्रवाई करेगी। इसके तहत लाभार्थी सूची में शामिल ऐसे लोगों का वेरिफिकेशन किया जाएगा जो पीएम सम्मान निधि का लाभ ले रहे हैं और जिनके दस्तावेजों और उपलब्ध कराई गई जानकारियां मेल नहीं खा रही है। यानि अब इस योजना के तहत आपके दस्तावेजों का आपके द्वारा दी गई जानकारी से मिलान कराया जाएगा। यदि जरा सी भी गड़बड़ी मिली तो आपको इस योजना के लाभ से वंचित किया जा सकता है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है कि यदि कोई गलत तरीके से इस योजना का लाभ ले रहा है तो उसे इस योजना से बाहर कर पात्र व्यक्ति तक ये सहायता पहुंचाई जा सके। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 पीएम किसान सम्मान निधि योजना लाभार्थियों की पात्रता का पता लगाने के लिए भौतिक सत्यापन है जरूरी केंद्र सरकार ने पीएम सम्मान निधि योजना में लाभार्थियों की पात्रता का पता लगाने के लिए 5 फीसदी किसानों का भौतिक सत्यापन कराने का फैसला लिया है और यह भौतिक सत्यापन जिला कलेक्टर के नेतृत्व में किया जाना है। बताया जा रहा है कि वेरिफिकेशन प्रक्रिया में सख्ती होगी। भौतिक सत्यापन में गलत जानकारी सामने आने पर आप पर कार्रवाई होगी और आपके अकाउंट से पैसा वापस ले लिया जाएगा। वहीं पात्रता सूची से नाम हटाया दिया जाएगा। आवश्यकता पडऩे पर इस काम में बाहरी एजेंसी भी मदद ली जाएगी। बता दें कि इसमें केवल उन्हीं लोगों का सत्यापन किया जाएगा जो इस योजना का लाभ प्राप्त कर चुके हैं। इसलिए योजना में आवेदन करने से पहले इस योजना के नियम व शर्तों को ध्यान जरूरी पढ़े और उसी के अनुसार पात्र होने पर ही योजना के लिए आवेदन करें। यह आपके हित में होगा। फर्जी किसानों से कैसे वापस लिया जाएगा पैसा अगर अपात्र लोगों को लाभ मिलने की सूचना मिलती है तो उनका पैसा बैंक द्वारा डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) से वापस लिया जाएगा। बैंक इस पैसे को अलग अकाउंट में डालेंगे और राज्य सरकार को वापस करेंगे। राज्य सरकारें अपात्रों से पैसे वापस लेकर https://bharatkosh.gov.in/ में जमा कराएंगी। अगली किश्त जारी होने से पहले ऐसे लोगों का नाम लाभार्थियों की सूची से हटा दिया जाएगा। बता दें कि 2019 में दिसंबर तक सरकार आठ राज्यों के 1,19,743 लाभार्थियों के खातों से इस स्कीम का पैसा वापस ले चुकी है। क्योंकि लाभ लेने वालों के नाम एवं उनके दिए गए कागजात मेल नहीं खा रहे थे। इसलिए स्कीम के तहत पैसा लेन-देन (ट्रांजेक्शन) की प्रक्रिया को संशोधित करके अब और कठिन बनाया दिया गया है। कैसे होगा किसानों का वैरिफिकेशन पीएम सम्मान निधि योजना में और पादर्शिता लाने के लिए केंद्र सरकार ने इसके लाभार्थियों का वैरिफिकेशन अनिवार्य कर दिया है। इसके तहत लाभार्थियों के उपलब्ध कराए गए डेटा के आधार वेरिफिकेशन किया जाएगा। अगर संबंधित एजेंसी को प्राप्त डिटेल्स में आधार से समानता नहीं मिलती है तो संबंधित राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों को उन लाभार्थियों की जानकारी में सुधार या बदलाव करना होगा। इसमें फर्जी पाए जाने पर सूची से नाम हटाने और बैंकों द्वारा लाभार्थियों से पैसों की वसूली की कार्रवाई की जाएगी। पीएम सम्मान निधि योजना में इन लोगों को नहीं मिलेगा लाभ अगर कोई किसान खेती करता है लेकिन वह खेत उसके नाम न होकर उसके पिता या दादा के नाम हो तो उसे 6000 रुपए सालाना का लाभ नहीं मिलेगा। वह जमीन किसान के नाम होनी चाहिए। अगर कोई किसान किसी दूसरे किसान से जमीन लेकर किराए पर खेती करता है, तो भी उसे योजना का लाभ नहीं मिलेगा। पीएम किसान में लैंड की ओनरशिप जरूरी है। सभी संस्थागत भूमि धारक भी इस योजना के दायरे में नहीं आएंगे। अगर कोई किसान या परिवार में कोई संवैधानिक पद पर है तो उसे लाभ नहीं मिलेगा। राज्य/केंद्र सरकार के साथ-साथ पीएसयू और सरकारी स्वायत्त निकायों के सेवारत या सेवानिवृत्त अधिकारी और कर्मचारी होने पर भी योजना के लाभ के दायरे में नहीं आएंगे। डॉक्टर, इंजीनियर, सीए, आर्किटेक्ट्स और वकील जैसे प्रोफेशनल्स को भी योजना का लाभ नहीं मिलेगा, भले ही वह किसानी भी करते हों। 10,000 रुपये से अधिक की मासिक पेंशन पाने वाले सेवानिवृत्त पेंशनभोगियों को इसका लाभ नहीं मिलेगा। अंतिम मूल्यांकन वर्ष में इनकम टैक्स का भुगतान करने वाले पेशेवरों को भी योजना के दायरे से बाहर रखा गया है। किसान परिवार में कोई म्यूनिसिपल कॉरपोरेशंस, जिला पंचायत में हो तो भी इसके दायरे से बाहर होगा। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

किसान रेल : अब फल-सब्जियों की ढुलाई में मिलेगी 50 प्रतिशत की छूट

किसान रेल : अब फल-सब्जियों की ढुलाई में मिलेगी 50 प्रतिशत की छूट

कम खर्च में पहुंचेगा बाजार में उत्पाद, किसानों को होगा फायदा अब किसान अपने उत्पाद जैसे- फल एवं सब्जियां को कम खर्च पर बाजार में भेज सकेगा। इसके लिए हाल ही में रेल मंत्री पीयूष गोयल ने किसान रेल के माध्यम से फलों एवं सब्जियों की ढुलाई में 50 प्रतिशत सब्सिडी देने का आदेश जारी किए हैं। यह सब्सिडी ऑपरेशन ग्रीन-टॉप टू टोटल योजना के तहत दी जाएगी। इससे किसानों को फायदा होगा। किसान अब और कम लागत पर अपने उत्पाद नए मार्केट तक भेज सकेंगे। इससे उनकी आमदनी में बढ़ोतरी होगी। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक केंद्र के आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने पायलट आधार पर छह महीने के लिए ऑपरेशन ग्रीन योजना का विस्तार कर टमाटर, प्याज और आलू से लेकर सभी फल एवं सब्जियों को इसके दायरे में लाने की घोषणा की थी। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मई में घोषणा की थी कि 500 करोड़ रुपए के अतिरिक्त कोष के साथ ‘ऑपरेशन ग्रीन’ का विस्तार किया जाएगा और इसमें टमाटर, प्याज और आलू के अलावा सभी फलों एवं सब्जियों को शामिल किया जाएगा। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 क्या है रेल मंत्रालय के आदेश में मीडिया में प्रसारित खबरों के अनुसार रेल मंत्रालय ने अपने आदेश में कहा कि इस कोष के उपयोग के बाद भारतीय रेलवे खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय को उपयोग प्रमाणपत्र उपलब्ध कराएगा। उसके बाद मंत्रालय रेलवे को अतिरिक्त कोष उपलब्ध कराया जाएगा। इसलिए जोनल रेलवे से किसान रेल के जरिए ढुलाई की जाने वाली फलों एवं सब्जियों पर तत्काल प्रभाव से 50 प्रतिशत तक सब्सिडी देने को कहा गया है। बता दें कि केंद्रीय बजट 2020-21 में वित्त मंत्री ने किसान रेल योजना की घोषणा की थी। इसकी शुरुआत 7 अगस्त 2020 से कर दी गई है। सब्सिडी के लिए क्या है योजना खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की ऑपरेशन ग्रीन्स-टॉप टू टोटल योजना के तहत अधिसूचित फलों और सब्जियों की ढुलाई में 50 प्रतिशत सब्सिडी देने का निर्णय लिया है। यह सब्सिडी सीधे किसान रेल को प्रदान की जाएगी। इसके लिए खाद्य एवं प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, रेल मंत्रालय को आवश्यक धन उपलब्ध कराएगा। यह सब्सिडी किसान रेल गाडिय़ों में 14.10.2020 से लागू हो गई है। अब जो भी किसान रेल के माध्यम से अधिसूचित फलों एवं सब्जियों की ढुलाई करेगा उसे इस योजना का लाभ दिया जाएगा। भविष्य में कृषि मंत्रालय या राज्य सरकार की सिफारिशों के आधार पर किसी अन्य फल / सब्जी को इस सूची में शामिल किया जा सकता है। कौन-कौन से फल व सब्जियों की ढुलाई में मिलेगी छूट अभी फिलहाल खाद्य खाद्य एवं प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की ओर से आम, केला, अमरूद, कीवी, लीची, पपीता, मौसम्बी, संतरा, किन्नू, लाइम, नींबू, अनानास, अनार, कटहल, सेब, बादाम, आंवला और नाशपाती आदि फलों की ढुलाई में छूट दी है। वहीं सब्जियां में फ्रेंच बीन्स, करेला, बैंगन, शिमला मिर्च, गाजर, फूलगोभी, हरी मिर्च, ओकरा, ककड़ी, मटर, लहसुन, प्याज, आलू और टमाटर की ढुलाई में यह छूट प्रदान की जाएगी। अभी किन-किन रूटों पर चल रही है किसान रेल अभी रेल मंत्रालय द्वारा 4 रूटों पर किसान रेल की शुरुआत की गई है जिनकी जानकारी हम नीचे क्रमानुसार दें रहे हैं- पहली किसान रेल का रूट - देवलाली (नासिक, महाराष्ट्र) से दानापुर (पटना, बिहार) के बीच चल रही है। इस रेल का उद्घाटन 7 अगस्त 2020 किया गया था। यह एक साप्ताहिक ट्रेन है। इसके बाद लोकप्रिय मांग के आधार पर इस ट्रेन को मुजफ्फरपुर (बिहार) तक बढ़ा दिया गया और इसका संचालन सप्ताह में दो बार कर दिया गया। इसके अलावा, सांगला और पुणे से इसमें लिंक कोच भी शुरू कर किए गए हैं जो किसान रेल में मनमाड से जुड़ते हैं। दूसरी किसान रेल का रूट - अनंतपुर (आंध्र प्रदेश) से आदर्श नगर दिल्ली तक चलती है। इसका उद्घाटन 9 सितंबर 2020 को किया गया था। यह एक साप्ताहिक ट्रेन है। तीसरी किसान रेल का रूट - बेंगलुरु (कर्नाटक) से हजरत निजामुद्दीन (दिल्ली) के बीच चलती है। इसका उद्घाटन 9 सितंबर 2020 को साप्ताहिक ट्रेन के रूप में किया गया। चौथी किसान रेल का रूट - नागपुर और वारुद ऑरेंज सिटी (महाराष्ट्र) से आदर्श नगर दिल्ली तक चलेगी। इसका उद्घाटन 14 अक्टूबर 2020 को किया गया है। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

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