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प्रवासी मजदूर योजना 2020 क्या है : अब सरकार गांव में ही देगी रोजगार

प्रवासी मजदूर योजना 2020 क्या है : अब सरकार गांव में ही देगी रोजगार

15 June, 2020

मनरेगा सहित अन्य योजनाओं में उपलब्ध कराया जाएगा काम ( pravasi majdur yojana )

कोरोना वायरस के कारण देश भर में लगे लॉकडाउन के बीच विभिन्न राज्यों में काम कर रहे प्रवासी मजदूरों का अपने गांव में पलायन जारी है। लॉकडाउन के कारण काफी संख्या में प्रवासी मजदूर अपने गांवों को लौट चुके है और इसके अपने गांव  लौटने सिलसिला अभी भी चल रहा है। राज्य सरकारें भी प्रवासी मजदूरों को अपने-अपने गांव भेजने में मदद कर रही है। कोरोना वायरस संक्रमण के कारण आज देश में विकट हालात बने हुए है। इस सब के बीच इतनी बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूरों को रोजगार प्रदान करना भी सरकार के सामने एक चुनौतीपूर्ण कार्य बन गया है। हाल ही में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रवासी मजदूरों के लिए 20 लाख करोड़ रुपए के पैकेज की दूसरी किश्त की घोषणा की थी। इस राहत पैकेज का इस्तेमाल प्रवासी मजदूरों की सहायता के लिए किया जाना है।

इसके  तहत बिना राशन कार्ड वालों को भी अनाज दिया जाने की बात भी कही गई। इसके अलावा एक और बड़ी घोषणा यह है कि प्रवासी मजदूर अपने गांव वापस जाने पर मनरेगा में काम पा सकेंगे। सरकार के इस कदम से देश के करीब 8 करोड़ प्रवासी मजदूरों को फायदा मिल सकेगा। प्रवासी मजदूरों को रोजगार देने के लिए राज्य सरकारें भी प्रयासरत हैं। आइए जानते हैं कैसे प्रवासी मजदूर सरकार की योजनाओं से जुडक़र इसका लाभ उठा सकते हैं।

 

सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1

 

उत्तरप्रदेश में प्रवासी मजदूरों के लिए योगी सरकार के प्रयास

उत्तरप्रदेश की योगी सरकार ने प्रदेश में मनरेगा के कामों को शुरू कर दिया है। सरकार का दावा है कि वह मनरेगा में रोजाना 25 लाख लोगों को रोजगार मुहैया करा रही है और आगे 50 लाख लोगों को रोजगार को इस योजना में जोड़ा जाएगा। उत्तर प्रदेश में लगभग 12 लाख प्रवासी मजदूर आ चुके हैं। सरकार का मानना है कि 10 लाख प्रवासी मजदूर अभी और आने वाले हैं। इस तरह 20-25 लाख तक प्रवासी मजदूर उत्तर प्रदेश में आएंगे। इसको ध्यान में रखते हुए योगी सरकार सभी मजदूरों का पूरा डाटा तैयार कर रही है। बाहर से आने वाले लोगों में ड्राइवर, प्लंबर, टेलर समेत अलग-अलग फील्ड में काम करने वाले बहुत अच्छे, कौशल के लोग हैं।

 

 

उन्हें उनकी योज्यता के अनुसार कार्य दिया जाएगा ताकि उनके कौशल का सही उपयोग हो सके। वहीं उत्तरप्रदेश सरकार ने प्रवासी मजदूरों का डाटा संग्रह करने के लिए प्रवासी राहत ऐप भी शुरू किया है। इस एप के जरिये सरकार उत्तप्रदेश में आने वाले प्रवासी मजदूरों का डाटा एकत्रित कर रही है जिसमें प्रवासी नागरिकों को सरकारी योजनाओं का लाभ, स्वास्थ्य की निगरानी और विशेषकर भविष्य में उनके कौशल के अनुसार नौकरी या आजिविका प्रदान किया जा सके। प्रवासी मजदूर इससे ऐप से जुडक़र राज्य सरकार की सभी योजनाओं की जानकारी प्राप्त करने के साथ ही अपने कौशल व योज्यता के अनुसार नौकरी प्राप्त करने में भी सफल हो सकेंगे।

 

उत्तर प्रदेश प्रवासी राहत मित्र ऐप का रोजगार में लाभ / प्रवासी मजदूर योजना

इस ऐप का लाभ दूसरे राज्य से वापस उत्तर प्रदेश में आने वाले प्रवासी मजदूरों को प्रदान किया जाएगा। इसके जरिये यूपी प्रवासी राहत मित्र एप पर पंजीकरण करने पर, अन्य राज्यों से उत्तर प्रदेश में आने वाले सभी प्रवासी मजदूरों  को सरकार की योजना का लाभ प्रदान किया जाएगा। इसके साथ ही राज्य सरकार मजदूरों को उनकी योग्यता और कौशल के अनुसार  भविष्य में नौकरी  प्रदान करने  के साथ-साथ उनकी सुरक्षा के लिए प्रवासी श्रमिकों के स्वास्थ्य को भी ट्रैक करेगा। इन सभी सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए सभी प्रवासी मजदूरों को इस ऐप को डाउनलोड करके अपना पंजीकरण करना होगा। Pravasi Rahat Mitra (rahatup.in) App की एक अन्य विशेषता यह भी है कि इसमें ऑनलाइन के साथ-साथ ऑफलाइन भी काम कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त प्रभावी निर्णय लेने के लिए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के लोगों के डेटा को भी ऐप में अलग - अलग किया जा सकता है। इस ऐप के डाउनलोड करने पर प्रवासी मजदूरों को सरकार द्वारा चलाई जा रही हर नई योजना की जानकारी मोबाइल पर घर बैठे मिल जाएगी जिससे उन्हें रोजगार प्राप्त करने में आसानी होगी।

 

यह भी पढ़ें : सखी योजना क्या है : गांवों की 58 हजार महिलाओं को मिलेगी नियुक्ति

 

प्रवासी मजदूरों  ( pravasi majdur ) को ऐप में पंजीकरण कराते समय देनी होंगी ये जानकारी

इस ऐप में पंजीकरण के समय उपयोगकर्ता को अपना नाम, शैक्षिक योग्यता, अस्थायी और स्थायी पता, बैंक अकाउंट विवरण, कोविड 19 सम्बंधित स्क्रीनिंग की स्थिति, शैक्षिक योग्यता औरअनुभव आदि की जानकारी देनी होगी।

 

यूपी प्रवासी राहत मित्र ऐप ऐसे करें डाउनलोड / प्रवासी मजदूर सहायता

राज्य के जो इच्छुक लाभार्थी राज्य सरकार द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं को लाभ उठाने के लिए इस राहत एप को डाउनलोड करना चाहते है तो वह नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करें-

  • सर्वप्रथम आवेदक को उत्तर प्रदेश राहत की ऑफिसियल वेबसाइट प्रवासी राहत मित्र ऐप को की आधिकारिक वेबसाइट से rahatup.in पर जाना होगा। यहां से आसानी से इस ऐप को डाउनलोड किया जा सकता है। 
  • इसकी आधिकारिक ऑफिसियल वेबसाइट पर जाने के बाद आपके समाने होम पेज खुल जायेगा।
  • इस होम पेज पर आपको Download Rahat App का ऑप्शन दिखाई देगा। आपको इस ऑप्शन पर क्लिक करना होगा। विकल्प पर क्लिक करने के बाद
  • आपके सामने अगला पेज खुल जायेगा। 
  • इस पेज पर आपको ऐप का लिंक दिखाई देगा आपको वहां से ऐप को इंस्टॉल करना
  • होगा। इस तरह आप ऐप डाउनलोड हो जाएगा।
  • आप इस ऐप को अपने मोबाइल के गूगल प्ले स्टोर से भी डाउनलोड कर सकते है।

 

ऐसे करवाएं प्रवासी मजदूर रोजगार के लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन / प्रवासी यात्रा पंजीकरण

इसके लिए आपको श्रम विभाग की अधिकारिक वेबसाइट पर जाकर पंजीकरण करना होगा। इसके लिए निम्न स्टेप्स आपको फोलो करने होंगे- 

  • सर्वप्रथम एड्रेस बार पर "http://www.uplabour.gov.in/" टाइप करें और इंटर बटन के
  • को दबाएं। 
  • अब आपके सामने उत्तर प्रदेश लेबर डिपार्टमेंट की वेबसाइट खुल गयी है। यदि हिंदी
  • में वेबसाइट देखना चाहते हैं तो हिंदी बटन पर क्लिक करें। 
  • अब अधिनियम प्रबंधन प्रणाली (Online Registration and Renewal)  लिंक
  • पर क्लिक करें। 
  • अब आपके सामने "Labour Act Management System" वेबसाइट खुल जाएगी। अब यहां से आप अपनी भाषा का चयन कर सकते हैं। यदि हिंदी में देखना
  • चाहते हैं तो ‘हिंदी’भाषा का चुनाव करें। 
  • वेबसाइट पर दिए गए निर्देशों को पढ़े।  
  • पोर्टल के उपयोग हेतु पोर्टल की सदस्यता प्राप्त करनी होगी। अब यदि आप नए यूजर हैं तो "Register Now" बटन पर क्लिक करें। तत्पश्चात New Registration पर क्लिक करें। दिए गए फॉर्म में अपना विवरण भरें तथा यूजर-आईडी (User Name)  और पासवर्ड बनाएं। 
  • अब आप अपना यूजर-आईडी (User Name) और पासवर्ड डालकर लोग-इन करें।  सर्वप्रथम "Select Act"  में Uttar Pradesh Shops and Commercial Establishment Act, v~{w  का चयन करें और पंजीयन (Registration)  पर क्लिक करें। 
  • अब दिया गया निर्देश पढ़े और "I have read all instructions carefully" पर टिक कर के  I AGREE बटन पर क्लिक करें। 
  • अब दिए गए फॉर्म को सावधानीपूर्वक भर के ‘शुल्क की गणना (Calculate Fee) करें और फॉर्म को सबमिट करें। अब प्रोसीड फॉर पेमेंट पर क्लिक करके इन्टरनेट
  • बैंकिंग के माध्यम से शुल्क का ऑनलाइन भुगतान करें। 

सफलतापूर्वक भुगतान के उपरांत पंजीयन प्रमाण पत्र स्वत: ही निर्गत हो जाएगा। प्रिंट सर्टिफिकेट पर क्लिक कर पंजीयन प्रमाण पत्र प्राप्त करें। 

 

रजिस्ट्रेशन के लिए आवश्यक दस्तावेज

  • आवेदक का फोटो
  • डिन/पेन कार्ड
  • पहचान पत्र जैसे आधार कार्ड, वोटर आदि
  • ट्रेजरी चालान, बैंक का नाम

 

 

उत्तराखंड सरकार प्रवासी मजदूरों को स्वरोजगार उपलब्ध कराने में देगी सहायता, ऐसे जुड़ सकते हैं इस योजना से

उत्तराखंड सरकार ने शुरू की स्वरोजगार उपलब्ध कराने के लिए बेवसाइट उत्तराखंड सरकार ने प्रवासियों को रोजगार उपलब्ध कराने के लिए मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत लोगों को रोजगार देगी जिसके लिए आप इसकी वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन भी आवेदन भर सकते हैं। इसके लिए यहां आईटी पार्क स्थित राज्य डेटा केंद्र में सर्वर उपलब्ध (होस्टिंग) कराया गया है। योजना के अंतर्गत रोजगार के लिए फॉर्म भरते समय आवेदक को वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन करते हुए लॉग इन आईडी बनानी होगी। इस आईडी से लॉग - इन कर अपना नाम, पता, योग्यता, मोबाइल नम्बर, पैन नम्बर आदि व्यक्तिगत विवरण के साथ ही प्रस्तावित इकाई, उत्पाद/सेवा, निवेश, बैंक आदि का विवरण देना होगा। बता दें कि इस योजना की शुरुआत मुख्यमंत्री रावत ने 28 मई को किया था।

इसका मकसद उत्तराखंड के उद्यमशील युवाओं और कोरोना की वजह से राज्य में लौटे प्रवासी कामगारों को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करना है। योजना के तहत कुशल और अकुशल दस्तकारों, हस्तशिल्पकारों और बेरोजगार युवाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। जिसमें सरकारी बैंकों, अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों और सहकारी बैंकों के माध्यम से लाभार्थियों को ऋण सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। योजना के अन्तर्गत सामान्य श्रेणी के लाभार्थियों द्वारा परियोजना लागत का 10 प्रतिशत जबकि विशेष श्रेणी के लाभार्थियों को कुल परियोजना लागत का पांच प्रतिशत स्वयं के अंशदान के रूप में जमा करना होगा।


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ब्याज पर ब्याज माफी योजना : फसल और ट्रैक्टर लोन पर नहीं मिलेगा ब्याज पर ब्याज माफी योजना का लाभ

ब्याज पर ब्याज माफी योजना : फसल और ट्रैक्टर लोन पर नहीं मिलेगा ब्याज पर ब्याज माफी योजना का लाभ

जानें, क्या है यह ब्याज पर ब्याज माफी योजना और इससे किसे मिलेगा फायदा और किसे नहीं? फसल और ट्रैक्टर लोन लेने वाले किसानों को ब्याज पर ब्याज माफी योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा। इसको लेकर हाल ही में वित्त मंत्रालय ने अतिरिक्त एफएक्यू जारी कर इसको स्पष्ट कर दिया है। बता दें कि ब्याज पर ब्याज माफी योजना को लेकर जो संशय बना हुआ था वो वित्त मंत्रालय की ओर से जारी एफएक्यू के बाद खतम हो गया है। वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि कृषि और संबद्ध गतिविधियों से संबधित लोन पर चक्रवृद्धि ब्याज यानी ब्याज-पर- ब्याज माफी योजना का लाभ नहीं मिलेगा। वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को चक्रवृद्धि और साधारण ब्याज के बीच के अंतर के भुगतान से संबंधित अनुग्रह राहत भुगतान योजना पर अतिरिक्त एफएक्यू (बार-बार पूछे जाने वाले सवाल) जारी किया है। मीडिया में प्रकाशित खबरों के आधार पर हम आपको ब्याज पर ब्याज माफी योजना के सभी पहलुओं को समझा रहे हैं ताकि आप इस योजना के सभी तत्थों को समझकर अपने द्वारा लिए गए लोन पर छूट का लाभ उठा सकें। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 क्या है ब्याज पर ब्याज माफी योजना भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सभी बैंकों और वित्तीय संस्थानों से बीते मंगलवार को कहा था कि वे दो करोड़ रुपए तक के कर्ज के लिए हाल ही में घोषित ब्याज पर ब्याज की माफी योजना को लागू करें। इस योजना के तहत दो करोड़ रुपए तक के कर्ज पर ब्याज के ऊपर लगने वाला ब्याज एक मार्च, 2020 से छह महीने के लिए माफ किया जाएगा। किसानों को फसल और ट्रैक्टर लोन पर इस योजना का लाभ नहीं मिलने का क्या है कारण? वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इस योजना के तहत कुल आठ क्षेत्र आते हैं। फसल और ट्रैक्टर ऋण कृषि और संबद्ध गतिविधियों के तहत आता है जो इस योजना में शामिल नहीं है। इसलिए फसल और ट्रैक्टर लोन पर इस ब्याज पर ब्याज माफी योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा। सिर्फ इन आठ प्रकार के लोन पर ही मिलेगा इस योजना का लाभ वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ब्याज पर ब्याज माफी योजना के तहत ऑटो, पर्सनल, क्रेडिट कार्ड, एजुकेशन, होम, कंज्यूमर ड्यूरेबल और एमएसएमई का लोन लेने वाले ग्राहकों को इसका लाभ दिया जाएगा। इन्हीं लोन पर ब्याज पर ब्याज माफी की छूट मिलेगी। 29 फरवरी तक के्रडिट कार्ड पर बकाए के लिए भी मिलेगा लाभ वित्त मंत्रालय ने कहा कि कर्जदारों को 29 फरवरी तक क्रेडिट कार्ड पर बकाये के लिए भी इस योजना का लाभ मिलेगा। एफएक्यू में कहा गया है कि इस राहत के लिए बेंचमार्क दर अनुबंध की दर होगी, जिसका इस्तेमाल क्रेडिट कार्ड जारीकर्ता द्वारा ईएमआई ऋणों के लिए किया जाता है। बैंक तैयार करेंगे ग्राहकों के नाम की लिस्ट ग्राहकों को इस योजना का लाभ देने के लिए सबसे पहले बैंक और वित्तीय संस्थान अपने उन ग्राहकों की लिस्ट तैयार करेंगे, जिन्होंने मोरेटोरियम सुविधा का फायदा नहीं लिया। यानी जिन्हें सरकार के नियमों के अनुसार राहत दी जानी है। इसके बाद में बैंक 1 मार्च से 31 अगस्त के बीच में चुकाए गए कंपाउंट ब्याज और साधारण ब्याज के अंतर को ग्राहक के खाते में डालेंगे। किन लोगों को मिलेगा योजना का लाभ? सरकार की इस स्कीम का फायदा उन ग्राहकों को मिलेगा, जिन्होंने मोरेटोरियम का विकल्प नहीं चुना था। इसके अलावा उन लोगों के पास 2 करोड़ रुपए तक का कर्ज है। यह रकम 5 नवंबर तक ग्राहकों के लोन अकाउंट में डाल देने के लिए कहा गया है। बाद में बैंक और वित्तीय संस्थान इस रकम को सरकार से क्लेम कर सकते हैं। इसी के साथ अगर आपने समय पर ईएमआई चुकाई है तो आपको इस योजना का लाभ मिलेगा। इस योजना के तहत आपको ब्याज पर ब्याज और साधारण ब्याज के बीच का जो अंतर है, वह कैशबैक के तौर पर मिलेगा। एक्स-ग्रेशिया का मतलब यह है कि सरकार अपनी मर्जी से आपको यह रकम दे रही है। इसे आपको लौटाना नहीं है, यह एक तरह से सरकार का गिफ्ट है। ब्याज पर ब्याज के तौर पर जो कैशबैक मिल रहा है, वह आपके लोन पर बैंकों की ओर से वसूली जाने वाली ब्याज दर पर निर्भर करेगा। बता दें कि जिन लोगों ने फरवरी 2020 तक लोन की ईएमआई का भुगतान किया है सिर्फ उन्हीं लोगों को इसका फायदा दिया जाएगा। किन लोगों को नहीं मिलेगा इस योजना लाभ? जिन ग्राहकों के खाते फरवरी अंत तक नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (एनपीए) के तौर पर क्लासिफाई किया जा चुके हैं उन लोगों को इसका लाभ नहीं मिलेगा। इसके अलावा फिक्स्ड डिपॉजिट, शेयर और बॉन्ड पर लिए गए लोन पर भी यह राहत नहीं मिलेगी। ग्राहकों को कितना और कैसे मिलेगा कैश बैक मान लीजिए आपने एक करोड़ रुपए का होम लोन लिया है और आप इस पर 8 प्रतिशत सालाना की दर से ब्याज चुका रहे हैं तो छह महीने में कुल ब्याज बनता है 4 लाख रुपए। ब्याज पर ब्याज बनता है- 16,269 रुपए। इस स्कीम के तहत यह 16,269 रुपए की राशि ही आपको कैशबैक के तौर पर मिलेगी। यह पैसा आपके अकाउंट में 5 नवंबर 2020 तक आ जाएगा। इस छूट के लिए आपको कुछ नहीं करना है। आपने जिससे लोन लिया है, वही आपके अकाउंट में इस राशि को एडजस्ट कर देगा। बैंकों में कॉर्पोरेट सेंटर से सेंट्रलाइज्ड कैल्कुलेशन के बाद सभी खातों में पैसा जमा कर दिया जाएगा। (ये मात्र एक उदाहरण है जिसके द्वारा आपको योजना गणित समझाया गया है, इसे उसी रूप से देखा जाए। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

पीएम कुसुम योजना : किसान धोखाधड़ी से बचने के लिए इस नंबर पर करें कॉल

पीएम कुसुम योजना : किसान धोखाधड़ी से बचने के लिए इस नंबर पर करें कॉल

जानें, फर्जी वेबसाइट्स किस तरह दे रही हैं किसानों को धोखा, क्या रखें सावधानी? पीएम कुसुम योजना के नाम पर किसानों से रुपए ठगने के मामले सामने आने के बाद सरकार ने फिर से एडवाइजरी जारी कर किसानों को ऐसी बेवसाइटों से सावधान रहने को कहा है जो पीएम कुसुम योजना में पंजीकरण कराने के नाम पर किसान से पैसा लेती हैं। इसके लिए सरकार ने किसानों को पुरानी एडवाइजरी एक बार फिर से जारी कर ऐसे लोगों व ऐसी ऑनलाइन चल रही बेवसाइटों से सचेत रहने को कहा है। आजकल देखने में आ रहा है कि सोशल मीडिया पर कई फर्जी बेवसाइट पीएम कुसुम योजना के नाम पर चल रही हैं। इसमें खास बात ये हैं कि ये बेवसाइट अपने को सरकारी होने का दावा करती हैं जिससे हमारे भोले-भाले गांव के किसान इनके झांसे में आ जाते हैं और फिर शुरू होता है इन बेवसाइटों के माध्यम से किसान को ठगने का खेल। ऐसी कई शिकायतें पहुंचने के बाद सरकार ने किसानों को ऐसी बेवसाइटों से सावधान रखने की सलाह देने के साथ ही कुछ एडवाइजरी भी जारी की है जिसे हर किसान को जानना बेहद जरूरी है ताकि संभावित हानि से बचा जा सके। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 फर्जी कंपनियां किसानों को दे रही है धोखा एमएनआरई ने पीएम कुसुम योजना के नाम पर किसानों को धोखा देने वाली इन अवैध वेबसाइटों के झांसों से बचाने के लिए 18 मार्च 2019, 3 जून 2020 और 10 जुलाई 2020 को लाभार्थियों के लिए एडवाइजरी जारी कर सतर्क रहने की सलाह दी। मंत्रालय ने कहा था कि किसान ऐसी किसी भी वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन फीस जमा नहीं करें और ना ही कोई जानकारी साझा करें। एमएनआरई की आधिकारिक वेबसाइट www.mnre.gov.in पर पीएम कुसुम योजना के बारे में पूरी जानकारी दी गई है। इन फर्जी वेबसाइटों से किसान रहें सावधान अक्षय ऊर्जा मंत्रालय ने पीएम कुसुम योजना का लाभ लेने वाले किसानों को ठगी से बचाने के लिए फर्जी वेबसाइटों के बारे में एक बार फिर सतर्क किया है। जांच के दौरान मंत्रालय ने पाया कि फर्जी वेबसाइट www.pmkusumyojana.co.in और www.punjabsolarpumps.com किसानों को ठग रही हैं। इस पोर्टल ने पीएम कुसुम योजना के लिए रजिस्ट्रेशन पोर्टल होने का दावा किया है। केंद्र सरकार ने फिर लोगों को सलाह दी है कि वे इन फर्जी वेबसाइटों को रुपए या जानकारी नहीं दें। कुसुम योजना 2020 : ऐसे शुरू होता है इन फर्जी बेवसाइटों से ठगी का खेल किसान को इन फर्जी वेबसाइटों से बचने के लिए सबसे पहले इन वेबसाइटों की हकीकत जानना जरूरी है। इसके लिए आप सबसे पहले इन वेबसाइटों पर अपनी कोई भी निजी जानकारी नहीं दें। जानकारी साझा करने से पहले अपने सपीप के कृषि विभाग से अवश्य संपर्क करें और इस वेबसाइट के बारे में जानकारी दें ताकि वे आपकों सही सलाह दे सके। ध्यान रहे कई फर्जी वेबसाइट सरकारी होने का दावा करने के साथ ही किसानों को मोटी सब्सिडी का लालच देकर उनसे निजी जाकारियां हासिल कर लेती है और बाद में पंजीकरण के नाम पर और इसके बाद पम्प या सौलर प्लांट लागाने को लेकर मोटी रकम वसूल लेती है। पर इसके बाद भी किसान को सौलर प्लांट स्कीम का लाभ नहीं मिल पाता। इसके अलावा ये वेबसाइटस् किसान व आम जनता से जुड़ी निजी जानकारियों को अन्य कंपनियों को भी उपलब्ध करती है जिनकी ऐवज में इन्हें काफी रकम अन्य कंपनियों से मिलती है। इस तरह ये वेबसाइट खुद तो ठगी करती ही साथ अन्य कंपनियों को आपकी निजी जानकारियों को शेयर कर देती है जिससे आगे अन्य कंपनियां भी इन आपकी निजी जानकारियों से लाभ लेना शुरू कर देती है। इस तरह इन फर्जी वेबसाइट्स का खेल एक नेटवर्क की तरह कार्य करता है। इसलिए किसान व आम जनता इन वेबसाइटों के झांसे में न आएं और सही जानकारी प्राप्त करके ही योजना के लिए आवेदन करें। तो फिर पीएम कुसुम योजना की सही जानकारी के लिए क्या करें / पीएम कुसुम योजना हेल्पलाइन नंबर कई वेबसाइट फर्जी पंजीकरण पोर्टल के माध्यम से किसानों से रुपए तथा निजी जानकारी एकत्रित कर रही है। आम जनता को किसी भी नुकसान से बचाने के लिए, अक्षय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) ने पहले लाभार्थियों और आम जनता को ऐसी किसी भी वेबसाइटों पर पंजीकरण शुल्क नहीं जमा करने और अपनी जानकारी साझा करने से सतर्क रहने की सलाह दी थी। इस संबंध में एमएनआरई मंत्रालय का कहना है कि सरकार किसी भी वेबसाइट के जरिये पीएम कुसुम योजना के लाभार्थियों का पंजीकरण नहीं कर रही है। लिहाजा, पंजीकरण करने का दावा करने वाली तमाम वेबसाइट्स संदिग्ध और धोखाधड़ी करने वाली हैं। मंत्रालय ने अपील की है कि ऐसे किसी फर्जी वेबसाइट के बारे में जानकारी मिलने पर तुरंत जानकारी सूचना दें। योजना के लाभार्थियों की पात्रता और योजना को लागू करने संबंधी पूरी जानकारी मंत्रालय के वेबसाइट पर दी गई है। इसके अलावा मंत्रालय ने एक टोल फ्री हेल्प लाइन नंबर 1800-180-3333 भी जारी किया है। क्या है पीएम कुसुम योजना और इससे कैसे मिलती है सब्सिडी / कुसुम योजना ऑनलाइन आवेदन देश में किसानों को उर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर करने के लिए तथा अक्षय (सौर) ऊर्जा को बढ़ाने के लिए वर्ष 2018-19 में केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाअभियान (कुसुम) योजना की शुरुआत की थी। इसके तहत किसानों को कृषि पंपों के सौरीकरण के लिए 60 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है। किसानों को सब्सिडी पर सोलर पंप देने के लिए राज्य सरकारों के द्वारा पंजीकरण करवाए जाते हैं जिसमें कुछ राज्य सरकारें अपनी तरफ से भी किसानों को सब्सिडी देती है जिससे कुछ राज्यों में किसानों को 60 प्रतिशत से अधिक सब्सिडी भी मिलती है। पीएम-कुसुम योजना के तहत केंद्र सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) द्वारा प्रधान मंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (प्रधानमंत्री-कुसुम) योजना के तहत कृषि पंपों के सौरीकरण के लिए 60 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है। इस योजना को राज्य सरकार के विभागों द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है जिसमें किसानों को केवल बाकी का 40 प्रतिशत ही विभाग को जमा करवाना होता है। इस योजना की विस्तार से जानकारी के लिए अपने निकटतम कृषि विभाग से संपर्क करें या एमएनआरई की आधिकारिक वेबसाइट www.mnre.gov.in पर जाकर पीएम कुसुम योजना के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

मत्स्य प्रशिक्षण और विस्तार योजना : मछलीपालन करने वाले किसानों की आय बढ़ाने में हैं मददगार

मत्स्य प्रशिक्षण और विस्तार योजना : मछलीपालन करने वाले किसानों की आय बढ़ाने में हैं मददगार

मत्स्य पालन विभाग छत्तीसगढ़ द्वारा मछलीपालन की उन्नत तकनीक का दिया जाता है प्रशिक्षण, मिलते हैं कई फायदें मत्स्य पालन विभाग की ओर से मछली पालन करने वाले किसानों के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही है। इनमें से मत्स्य पालन का प्रशिक्षण देने के साथ ही इसके विस्तार के प्रयास किए जा रहे हैं सरकार की ओर से किए जा रहे हैं। इन योजनाओं को चलाने के पीछे सरकार का उद्देश्य यह है कि किसानों को खेती के साथ-साथ मछलीपालन भी करें ताकि उनकी आय में बढ़ोतरी हो सके। इसके लिए किसानों को मछलीपालन का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। वहीं समुद्र किनारे रहने वाले मछुआरे भी मत्स्य पालन विभाग की योजनाओं से लाभान्वित हो रहे हैं। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से मत्स्य पालन विभाग के माध्यम से कई योजनाओं का संचालन किया जा रहा है जो मछलीपालन करने वाले किसानों के लिए बेहद लाभकारी है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 मत्स्य प्रशिक्षण और विस्तार योजना छत्तीसगढ़ : शिक्षण-प्रशिक्षण ( मछुआरों का 10 दिवसीय प्रशिक्षण ) योजना मत्स्य पालन विभाग छत्तीसगढ़ की ओर से मछुआरों का 10 दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया जाता है। इसके तहत सभी श्रेणी के मछुआरों को मछली पालन की तकनीक एवं मछली पकडऩे, जाल बुनने, सुधारने एवं नाव चलाने का प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। इस 10 दिवसीय सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक प्रशिक्षण कार्यक्रम अंतर्गत प्रति प्रशिक्षणार्थी प्रशिक्षण व्यय रू. 1250/- स्वीकृत है, जिसके अन्तर्गत रुपए 75/- प्रतिदन प्रति प्रशिक्षणार्थी के मान से शिष्यावृत्ति, रुपए 400/- की लागत मूल्य का नायलोन धागा तथा रुपए 100/- विविध व्यय शामिल है। शिक्षण-प्रशिक्षण ( मछुआरों का अध्ययन भ्रमण ) योजना प्रगतिशील मछुआरों को उन्नत मछली पालन का प्रत्यक्ष अनुभव कराने के उद्देश्य से मत्स्य पालन विभाग की ओर से इस प्रशिक्षण का आयोजन किया जाता है। इसके तहत प्रगतिशील मछुआरों राज्य के बाहर अध्ययन भ्रमण पर भेजा जाता है। इस योजना का उद्देश्य सामान्य/अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति वर्ग के प्रगतिशील मछुआरों को उन्नत मछली पालन का प्रत्यक्ष अनुभव कराने हेतु देश के अन्य राज्यों में अपनाई जा रही मछली पालन तकनीकी से परिचित कराना है। इस योजना के तहत प्रति मछुआरा रुपए 2500/- की लागत पर 10 दिवसीय अध्ययन भ्रमण प्रशिक्षण पर व्यय किया जाता है। स्वीकृत योजनानुसार प्रति प्रशिक्षणार्थी रुपए 1000/- शिष्यावृत्ति, रुपए 1250/- आवागमन व्यय तथा रुपए 250/- विविध व्यय का प्रावधान है। शिक्षण-प्रशिक्षण ( रीफ्रेशर कोर्स ) योजना मत्स्य विभाग छत्तीसगढ़ की ओर से संचालित शिक्षण प्रशिक्षण (रीफ्रेशर कार्स) योजना का उद्देश्य पूर्व से प्रिशिक्षित मछुआरो को पुन: अद्यतन करना है। इसके तहत सभी वर्ग के पूर्व से प्रिशिक्षित मछुआरों को पुन: उन्नत मछली पालन का प्रिशिक्षण देने हेतु एवं मछली पालन तकनीकी से परिचित कराने के उद्देश्य से प्रति मछुआरा रुपए 1000/- की लागत पर 03 दिवसीय रीफ्रेशर कोर्स प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके अलावा मत्स्य विभाग छत्तीसगढ़ की ओर मत्स्य पालन प्रसार के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही है जिनका मछली पालक किसान लाभ लेकर अपनी आय बढ़ सकते हैं। झींगा पालन योजना मछली पालकों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से मस्य पालन विभाग छत्तीसगढ़ की ओर से झींगा पालन योजना चलाई जा रही है। इस योजना के तहत अनुसूचित जाति/जन जाति के मत्स्य पालकों को मीठे जल में पॉलीकल्चर झींगा पालन तथा आलंकारिक मत्स्योद्योग विकास की प्रसार योजनान्तर्गत नई योजना क्रियान्वित होगी जिसके तहत हितग्राहियों को वस्तु विषय के रूप में क्रमश: रुपए 15000/- एवं 12000/- का तीन वर्षो में आर्थिक सहायता (अनुदान) देना प्रावधानित है। मौसमी तालाबों में मत्स्य बीज संवर्धन योजना मत्स्य विभाग छत्तीसगढ़ की इस योजना का उद्देश्य छोटे मौसमी तालाबों, पोखरों को उपयोगी बनाकर मत्स्य बीज संवर्धन कर आय में वृद्धि करना है। इस योजना के तहत मत्स्य बीज संवर्धन कर मत्स्य बीज विक्रय से स्वरोजगार उपलब्ध कराने में सहायता की जाती है। इसके तहत 0.5 हेक्टर के तालाब में प्रति हितग्राहियों को मत्स्य बीज संवर्धन, तालाब सुधार एवं इनपुट्स मत्स्य बीज आदि हेतु रुपए 30000/- की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है । नाव जाल या जाल क्रय सुविधा मत्स्य प्रसार के अंतर्गत नाव जाल या जाल क्रय करने की सुविधा दी जाती है। इस योजना का उद्देश्य सभी श्रेणी के मछुआरों को मत्स्याखेट हेतु सहायता प्रदान करना है। इस योजना में तालाबों, जलाशयों अथवा नदियों में मत्स्याखेट करने वाले अनुसूचित जाति के सक्रिय मछुआरों को नाव, जाल उपकरण खरीदने करने हेतु प्रति मछुआरा रुपए 10000/- की सहायता उपलब्ध कराई जाती है। यह सहायता वस्तु विशेष के रूप में दी जाती है। फिंगरलिंग क्रय कर संचयन पर सहायता मत्स्य पालन प्रसार योजना के तह फिंगरलिंग क्रय कर संचयन पर सहायता दी जाती है। इसका उद्देश्य तालाबों में फिंगरलिंग क्रय कर संवर्धन कर मत्स्य उत्पादन में वृद्धि करना और अधिक मत्स्य उत्पादन से अधिक आय अर्जित करना है। इस योजना के तहत मछलीपालक किसानों द्वारा वर्तमान में संचित मत्स्य बीज अर्थात् 10000 फ्राई प्रति हेक्टर के स्पान पर क्रय कर 5000 फिंगरलिंग प्रति हैक्टर डालकर मत्स्य उत्पादन में वृद्धि होगी। साथ ही आहार आय अधिक होगी। ऐसी स्थिति में मत्स्य कृषक को पांच वर्षो तक रुपए 2000/- प्रति वर्ष कुल रुपए 1000/-की सहायता प्रदान की जाती है। पंजीकृत मत्स्य सहकारी समितियों को ऋण/अनुदान योजना इस योजना के तहत सभी वर्ग की पंजीकृत मछुआ सहकारी समितियों को मछली पालन हेतु उपकरण एवं अन्य प्रयोजनों यथा तालाब पट्टा, मत्स्य बीज, नाव-जाल आदि हेतु पात्रतानुसार अनुदान उपलब्ध करवाया जाता है। यह योजना मछुआरों की पंजीकृत समितियों को मछली पालन हेतु मध्य प्रदेश मछुआ सहकारी समितियों (ऋण/अनुदान) नियम-1972 के अंतर्गत प्रदेश में सभी वर्ग की पंजीकृत मछुआ सहकारी समितियों को मछली पालन हेतु उपकरण एवं अन्य प्रयोजनों तथा तालाब पट्टा, मत्स्य बीज, नाव जाल क्रय इत्यादि हेतु विद्यमान नियमों के तहत पात्रतानुसार ऋण/अनुदान के लिए आर्थिक सहायता / सहायक अनुदान मद से प्रावधानित राशि व्यय की जाती है। योजनान्तर्गत लगातार 3 वर्षो में अधिकतम रुपए 3 लाख की सहायता राशि प्रति सहकारी समिति आइटमवार सीमा के अधीन दिए जाने का प्रावधान है। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

समग्र गव्य विकास योजना : डेयरी उद्योग के लिए 75 प्रतिशत तक सब्सिडी

समग्र गव्य विकास योजना : डेयरी उद्योग के लिए 75 प्रतिशत तक सब्सिडी

दूध के लिए गाय-भैंस पालो, 75 प्रतिशत पैसा सरकार देगी अगर आप लोगों को शुद्ध दूध उपलब्ध कराने के साथ-साथ अच्छी आमदनी कमाना चाहते हैं तो डेयरी उद्योग में आपके लिए अपार संभावनाएं हैं। डेयरी उद्योग से देश के किसानों, युवाओं व बेरोजगारों के जीवन को संवारने के लिए केंद्र व विभिन्न राज्य सरकारें अपने-अपने स्तर पर कई योजनाएं संचालित कर रहे हैं, जिनका फायदा आप उठा सकते हैं। ट्रैक्टर जंक्शन की इस पोस्ट में आपको समग्र गव्य विकास योजना के बादे में जानकारी दी जा रही है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 सरकार दस दुधारू पशुओं के लिए देगी 8.96 लाख रुपए, आवेदन की अंतिम तिथि 25 अक्टूबर इस योजना के तहत सरकार दस दुधारू पशुओं की डेयरी खोलने के लिए 8 लाख 96 हजार रुपए की सहायता उपलब्ध करा रही है। इस योजना में 75 फीसदी तक सब्सिडी भी मिल रही है। बिहार सरकार की समग्र गव्य विकास योजना इन दिनों बहुत लोकप्रिय हो रही है। समग्र गव्य विकास योजना बिहार 2020-21 में आवेदन कोरोना काल में कृषि सेक्टर को छोडक़र सभी सेक्टरों में मंदी का आलम रहा। देश के नीति विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि और उससे जुड़े क्षेत्र ही बहुत बड़े स्तर पर रोजगार के अवसर उत्पन्न कर सकते हैं। अगर आधुनिक तरीके से पशुपालन किया जाए तो अच्छी खासी आमदनी प्राप्त की जा सकती है। केंद्र व राज्य सरकार समय-समय पर विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सब्सिडी उपलब्ध कराती है। बिहार सरकार की ओर से युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से डेयरी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए समग्र ग्रव्य विकास योजना के तहत 50 से 75 फीसदी तक की सब्सिडी उपलब्ध कराई जा रही है। इसके लिए आवेदन 25 अक्टूबर तक स्वीकार किए जाएंगे। इस योजना में 2, 4, 6 और 10 दुधारू पशुओं के लिए अलग-अलग श्रेमियों में सब्सिडी उपलब्ध कराई जा रही है। बिहार में इस योजना का संचालन पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग की ओर से किया जा रहा है। समग्र गव्य विकास योजना की पात्रता इस योजना का लाभ सभी वर्गों के भूमिहीन, किसानों, लघु किसानों, सीमांत सिकानों, गरीबी रेखा से नीचे आने वाले किसानों, शिक्षित बेरोजगार युवक-युवतियों को मिलेगा। समग्र गव्य विकास योजना का क्रियान्वयन बिहार राज्य के सभी जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में ही किया जाएगा। जिल गव्य विकास पदाधिकारी / संबंद्ध जिला के जिला गव्य अधिकारी नोडल अधिकारी बनाए गए हैं। जो भी व्यक्ति इस योजना का लाभ उठाना चाहते हैं वो अपना आवेदन जिला गव्य विकास कार्यालय/संबंधित जिला के जिला पशुपालन कार्यालय (गव्य प्रकोष्ठ) में जमा करा सकते हैं। समग्र गव्य विकास योजना में सब्सिडी इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में सभी वर्गो के भूमिहीन किसानों, दुग्ध उत्पादकों व शिक्षित बेरोजगारों को स्वरोजगार के अवसर सृजित कर उन्हें विकास की मुख्यधारा में शामिल करना है। ताकि वे इस ऋण की राशि से अपनी डेयरी इकाई खड़ी कर सके और दूध उत्पादन में बढ़ोत्तरी कर सके। समग्र गव्य विकास योजना के तहत गाय पालन पर सामान्य किसानों को 50 प्रतिशत तथा आरक्षित वर्ग के किसानों को 75 प्रतिशत तक सब्सिडी का प्रावधान है। दो दुधारू मवेशी की योजना की लागत 1 लाख 60 हजार, 4 दुधारू मवेशी के लिए 3 लाख 38 हजार 400, 6 दुधारू मवेशी के लिए 5 लाख 32 हजार 600 और 10 दुधारू मवेशी के लिए 8 लाख 96 हजार रुपये निर्धारित है। इसी राशि पर संबंधित जाति के श्रेणी के आधार पर 50 और 75 प्रतिशत तक सब्सिडी देने की योजना है। यह पिछले कई सालों से यह योजना चल रही है। बिहार में फिलहाल कोरोना संकट के कारण इस साल योजना देर से शुरू की गई है। आवेदनों पर ‘पहले आओ पहले पाओ’ के तर्ज पर विचार किया जाएगा। समग्र गव्य विकास योजना में आवेदन के लिए जरुरी दस्तावेज आवेदन पत्र की दो मूल प्रति आधार कार्ड / फोटो पहचान पत्र / आवासीय प्रमाण पत्र की स्वहस्ताक्षरित दो छाया प्रति। जमीन संबंधी रसीद की छाया प्रति। परियोजना प्रतिवेदन की प्रति। बैंक का डिफॉल्टर नहीं होने के संबंध में शपथ पत्र। स्वलागत योजना हेतु बैंक/ डाकघर में पूर्ण राशि उपलब्धता के संबंध में पासबुक की छाया प्रति । शराब बंदी से प्रभावित होने के संबंध में प्रमाण, डेयरी से संबंधित प्रशिक्षण प्राप्त करने, दुग्ध समिति की सदस्यता का प्रमाण पत्र की छाया प्रति। समग्र गव्य विकास योजना में चयन प्रकिया इस योजना में पात्र लोगों के चयन में बहुत सतर्कता बरती जाती है। जिला गव्य विकास पदाधिकारी के पास जमा हुए आवेदन पत्रों की स्क्रीनिंग होती है। स्क्रीनिंग जिला अग्रणी बैंक पदाधिकारी के अध्यक्षता में गठित स्क्रीनिंग समिति द्वारा किया जाता है। इस समिति में जिला गव्य विकास पदाधिकारी, सदस्य सचिव शामिल होते हैं। इसके अलावा जिला पशुपालन पदाधिकारी, उद्योग विभाग के जिला स्तरीय पदाधिकारी एवं संबंधितजिला परिषद् के प्रतिनिधि सदस्य के रूप में शामिल होते हैं। स्क्रीनिंग समिति की बैठक आवेदन पत्रों की प्राप्तियों की अंतिम तिथि के उपरांत आयोजित की जाएगी, जिसमें प्राप्त आवेदनों की समीक्षा/जांच आवेदक की उपस्थिति में किया जायेगा। आवेदक के साक्षात्कार के पश्चात ऋण स्वीकृति के संबंध में गठित समिति द्वारा निर्णय लिया जायेगा एवं योग्य ऋण आवेदन पत्रों को अनुशंसा के साथ संबंधित बैंक को ऋण स्वीकृति के लिए भेज दिया जाएगा। ऋण स्वीकृत करने वाले संबंधित बैंक का यह दायित्व है कि अनुशंसित आवेदनों पर एक माह के अंदर निर्णय लेते हुए आवेदक एवं संबंधित जिला के अग्रणी बैंक, जिला गव्य विकास कार्यालय एवं जिला परिषद् को सूची के साथ सूचना उपलब्ध कराएं। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और 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