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प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना : अब ड्रोन से होगा फसलों का आकलन

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना : अब ड्रोन से होगा फसलों का आकलन

इन 10 राज्यों को किया शामिल, कृषि मंत्रालय ने 100 जिलों में ड्रोन से फसल की तस्वीर लेने के लिए डीजीसीए से मांगी अनुमति

अब प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में फसलों का बीमा कराने वाले किसानों की फसलों का आकलन ड्रोन से किया जाएगा। इसके लिए हाल ही में कृषि मंत्रालय ने नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना ( पीएमएफबीवाई ) के तहत 100 जिलों में ग्राम पंचायत स्तर पर फसलों का आकलन करने के लिए ड्रोन से धान खेतों की तस्वीर लेने की अनुमति मांगी है। मीडिया में प्रकाशित खबरों के आधार पर यह जानकारी देते हुए एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि यह मंजूरी चयनित एजेंसियों के ड्रोन उड़ाने के लिए मांगी गई है।

यह दूसरा वर्ष है जब मंत्रालय ने पीएमएफबीवाई के तहत ग्राम पंचायत स्तर का फसल ऊपज का आकलन करने के लिए 100 जिलों के कृषि क्षेत्रों में मानव रहित हवाई वाहन (यूएवी) आधारित सुदूर संवेदी आंकड़ा संग्रह के एक प्रायोगिक अध्ययन के लिए निजी एजेंसियों को काम पर रखा है। अधिकारी ने बताया कि चूंकि चयनित 100 चावल उगाने वाले जिलों में कटाई का काम जोरों पर है और फसल के मौसम के अनुसार जल्द ही यह काम पूरा हो जाएगा, हमने नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (डीजीसीए) से अनुरोध किया है कि वे चयनित क्षेत्रों के लिए ड्रोन उड़ाने की मंजूरी दें। उन्होंने कहा कि इस संबंध में डीजीसीए को एक पत्र लिखा गया है, जिसमें एएमएनईएक्स, एग्रोटेक, आरएमएसआई प्राइवेट लिमिटेड और वेदर रिस्क मैनेजमेंट सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड जैसी एजेंसियों को दो महीने के लिए यानी 31 दिसंबर तक ड्रोन संचालित करने की अनुमति मांगी गई है। अधिकारी ने उल्लेख किया कि ड्रोन आधारित तस्वीरें फसल की उपज के आकलन और सत्यापन के महत्वपूर्ण आदानों में से एक हैं। चुनी गई एजेंसियों ने समय-सारणी के अनुसार अपने निर्धारित क्षेत्रों में अध्ययन शुरू कर दिया है।

 

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फसल बीमा योजना : इन 10 राज्यों के 100 जिलों में फसलों का होगा ड्रोन द्वारा आकलन

ड्रोन आधारित तस्वीर 10 राज्यों - आंध्र प्रदेश, बिहार, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश में ड्रोन के माध्यम से लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि चूंकि, ड्रोन के माध्यम से कैप्चर किए गए रिमोट सेंसिंग डेटा से किसानों को फसल की स्थिति और नुकसान के बारे में सटीक जानकारी प्राप्त करने में मदद मिलेगी, और इसलिए फसल बीमा दावों को प्रस्तुत करने में कम समय लगेगा। अधिकारी ने कहा, प्रायोगिक अध्ययन की सफलता के बाद, इसे आगे बढ़ाया जाएगा। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, खरीफ सत्र 2020 में लगभग 241.7 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि का बीमा किया गया है।

 


क्या है ड्रोन से फसलों के आकलन की तकनीक

आपदा आने पर फसल नुकसान का सर्वे ड्रोन के माध्यम से किया जाएगा। इससे किसानों को फसल मुआवजा और राहत राशि का भुगतान जल्द होगा। मौजूदा समय में नुकसानी का आकलन पटवारी के माध्यम से हो रहा है। योजना में किसानों को न्यूनतम आय सुनिश्चित करने के लिए सूखे के कारण बोवनी नहीं होने, बोवनी करने के बाद भी फसल न आने या बाजार मूल्य गिरने पर किसानों को बीमा का लाभ मिलेगा। अब चूंकी ड्रोन की मदद ली जाने लगी है जिससे फसल बीमा का मुआवजा किसानों को फसल के आकलन के आधार पर देय होगा। इसके लिए ड्रोन से फसलों का फोटो लिया जाएगा जिससे नुकसान का अनुमान लगाने में आसानी होगी।

कृषि फसल बीमा योजना में उत्पादन अनुमान, फसल कटाई प्रयोग के लिए रिमोट सेंसिंग का उपयोग किया जाएगा। ड्रोन इमेज भी ली जाएगी, ताकि किसानों को मुआवजा राशि का भुगतान जल्द मिल जाए। ऑटोमेटेड मौसम स्टेशन बनाए जाएंगे। नवीन फसल बीमा योजना में रिमोट सेंसिंग इमेजेस के लिए इसरो, मेपकास्ट से नक्शे प्राप्त कर मौसम के आंकड़ों तथा एन्ड्रॉयड फोन से भेजे डिजिटल फोटो का विश्लेषण किया जाएगा। फसल कटाई प्रयोग कम संख्या में वैज्ञानिक आधार पर कराकर की जाएगी। मैदानी सत्यता संयुक्त जांच दलों के माध्यम से सत्यापन उपरांत दावों का भुगतान किया जाएगा।


प्रधानमंत्री फसल बीमा : इधर इक्रिसेट को कृषि अनुसंधान के लिए ड्रोन उपयोग की अनुमति मिली

नागर विमानन मंत्रालय और नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने कृषि अनुसंधान गतिविधियों के लिए अंतर्राष्ट्रीय अर्ध-शुष्क उष्णकटिबंधीय फसल अनुसंधान संस्थान (इक्रिसेट) हैदराबाद, को ड्रोन की तैनाती करने के लिए सशर्त छूट दी है। नागर विमानन मंत्रालय के संयुक्त सचिवश्री अंबर दुबे ने बताया कि ड्रोन भारत के कृषि क्षेत्र में विशेष रूप से उचित कृषि, टिड्डी नियंत्रण और फसल उपज में सुधार लाने जैसे क्षेत्रों में बड़ी भूमिका निभाने के लिए तैयार हैं। सरकार युवा उद्यमियों और शोधकर्ताओं को देश के 6.6 लाख से अधिक गांवों में कम कीमत के ड्रोन समाधान प्रदान करने के लिए प्रोत्साहित कर रही है।

यह सशर्त छूट इस आशय का पत्र जारी होने की तिथि से छह माह की अवधि के लिए या डिजिटल स्काई प्लेटफॉर्म (चरण-1) के पूर्ण परिचालन तक, जो भी पहले हो, मान्य होगी। यह छूट तभी मान्य होगी, जब सभी शर्तों और सीमाओं का सख्ती से अनुपालन किया जाए। किसी भी शर्त के उल्लंघन के मामले में, यह छूट समाप्त हो जाएगी। इक्रिसेट (ए) स्थानीय प्रशासन (बी) रक्षा मंत्रालय (सी) गृह मंत्रालय (डी) भारतीय वायु सेना से वायु सुरक्षा मंजूरी और (ई) भारतीय विमान पत्तन प्राधिकरण (एएआई) से रिमोटली पायलेटिड एयर क्राफ्ट सिस्टम्स के परिचालन की पूर्व अनुमति प्राप्त करने के लिए आवश्यक मंजूरी प्राप्त करेगा।

 

 

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पंजाब में मेगा फूड पार्क में कामकाज शुरू, किसानों को होगा लाभ, मिलेंगे रोजगार के अवसर

पंजाब में मेगा फूड पार्क में कामकाज शुरू, किसानों को होगा लाभ, मिलेंगे रोजगार के अवसर

जानें, क्या है मेगा फूड पार्क स्कीम और इससे कैसे मिल सकता है लाभ? पंजाब में मेगा फूड पार्क (एमएफपी) में कामकाज शुरू हो गया है। इससे फूड पार्क से 5 हजार नौकरियों के अवसर बने हैं, इससे करीब 25 हजार किसानों को इसका लाभ होगा। यह पंजाब के कपूरथला जिले के फगवाड़ा में है। पिछले दिनों ही खाद्य प्रसंस्करण मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने इसका उद्घाटन किया था। इस एमएफपी की लागत 107.83 करोड़ रुपए है। 55 एकड़ में बनी इस परियोजना से 25 हजार किसानों को लाभ होगा। बता दें कि अब तक, 37 एमएफपी स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से 20 पहले ही चालू हो चुके हैं। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 मेगा फूड पार्क (mega food park) में क्या-क्या है सुविधाएं सुखजीत मेगा फूड पार्क गोदामों, कोल्ड स्टोरेज, डीप फ्रीजर और अन्य संबंधित खाद्य प्रसंस्करण सुविधाओं से लैस है। इससे किसानों को काफी फायदा होगा। मेगा फूड पार्क योजना (mega food park scheme) के लिए कितना है बजट खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के विकास के लिए आत्मनिर्भर भारत के तहत 10,000 करोड़ रुपए का फंड बनाया गया है। इससे किसानों को लाभ होगा और रोजगार के अवसर पैदा होंगे। नवीनतम प्रौद्योगिकी और प्रसंस्करण सुविधाओं से खाद्य उत्पादों की बर्बादी घटेगी और यह किसानों को उनकी फसलों का वाजिब भाव दिलाने में मदद करेगा। बता दें कि पंजाब चावल और गेहूं के उत्पादन में आगे है। लेकिन भूजल स्तर कम होने के कारण, फसलों के विविधीकरण की आवश्यकता है, जिसके लिए पंजाब के किसानों ने कई कदम उठाए हैं। सरकार का कहना है कि खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को बढ़ावा देने की जरूरत है ताकि किसानों को उचित मूल्य मिले और संबंधित क्षेत्र भी लाभान्वित हो सकें। क्या है मेगा फूड पार्क (एमएफपी) मेगा फूड पार्क परियोजना का कार्यान्वयन एक विशेष प्रयोजन उपाय (एसपीवी) द्वारा किया जाता है जो संस्थाएं अधिनियम के अंतर्गत एक पंजीकृत कॉरपोरेट निकाय होता है। राज्य सरकार, राज्य सरकार की संस्थाओं एवं सहकारिताओं को मेगा फूड पार्क परियोजना के कार्यान्वयन हेतु अलग से एसपीवी बनाने की जरूरत नहीं होती है। स्कीम दिशानिर्देशों की शर्तों को पूरा करने के अध्यधीन एसपीवी को निधियां जारी की जाती हैं। मेगा फूड पार्क के लिए सरकार से कितनी मिलती है वित्तीय सहायता मेगा फूड पार्क योजना के तहत भारत सरकार प्रत्येक मेगा फूड पार्क परियोजना के लिए 50 करोड़ तक की वित्तीय सहायता प्रदान करती है। मेगा फूड पार्क (एमएफपी) बनाने का क्या है उद्देश्य मेगा फूड पार्क स्कीम का उद्देश्य किसानों, प्रसंस्करणकर्ताओं तथा खुदरा विक्रेताओं को एक साथ लाते हुए कृषि उत्पादन को बाजार से जोडऩे के लिए एक तंत्र उपलब्ध कराना है ताकि मूल्यवर्धन को अधिकतम, बर्बादी को न्यूनतम, किसानों की आय में वृद्धि और विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्र में रोजगार के अवसर सृजित करना सुनिश्चित किया जा सके। मेगा फूड पार्क स्कीम क्लस्टर दृष्टिकोण पर आधारित है और इसमें, पार्कों में सुस्थापित आपूर्ति श्रृंखला के साथ उपलब्ध औद्योगिक भूखंडों में आधुनिक खाद्य प्रसंस्करण यूनिटों की स्थापना के लिए सुपरिभाषित कृषि/बागवानी जोन में अत्याधुनिक सहायक अवसंरचना के सृजन की परिकल्पना की गई है। मेगा फूड पार्क में संग्रहण केंद्रों, प्राथमिक प्रसंस्करण केंद्रों, केंद्रीय प्रसंस्करण केंद्रों, शीत श्रृंखला और उद्यमियों द्वारा खाद्य प्रसंस्करण यूनिटों की स्थापना हेतु 25-30 पूर्ण विकसित भूखंडों समेत आपूर्ति श्रृंखला अवसंरचना शामिल होती है। सीपीसी स्थापित करने के लिए लगभग 50 से 100 एकड़ की सीमा तक भूमि अपेक्षित है, यद्यपि भूमि की वास्तविक आवश्यकता बिजनेस प्लान पर निर्भर करेगी, जो क्षेत्रदर क्षेत्र बदलती रहती है। विभिन्न स्थलों पर पीपीसीज तथा सीसीज की स्थापना हेतु अपेक्षित भूमि सीपीसी की स्थापना हेतु अपेक्षित भूमि के अलावा होगी। यह उम्मीद की जाती है कि औसतन, 250 करोड़ रुपए के सकल निवेश सहित प्रतिपरियोजना लगभग 30 से 35 खाद्य प्रसंस्करण यूनिटें होंगी जिससे 450 से 500 करोड़रुपए का वार्षिक टर्न ओवर होगा तथा लगभग 30,000 लोगों के लिए प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार सृजित होगा। मेगा फूड पार्क योजना के लाभ मेगा फूड पार्क योजना का लाभ देश के स्थायी लोगों को प्राप्त होगा। योजना के जरिए 25,000 किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी। इस योजना से कृषि उत्पादन को बाजार से जोड़ा जाएगा। 5000 से अधिक युवाओं को रोजगार उपलब्ध होगा। योजना से किसानों को उत्पादन करने में भी मदद मिलेगी। अब तक देश में कार्यशील मेगा फूड पार्क / देश में मेगा फूड पार्क अब तक निम्नलिखित 21 मेगा फूड कार्यशील हो चुके हैं। इससे किसानों को काफी लाभ पहुंचा है। ये इस प्रकार हैं- स्रीनी मेगा फूड पार्क, चित्तूर, आंध्र प्रदेश गोदवारी मेगा एक्वा पार्क, पश्चिम गोदावरी, आंध्र प्रदेश नार्थ इस्ट मेगा फूड पार्क, नलबाड़ी, असम गुजरात एग्रो मेगा फूड पार्क, सूरत, गुजरात क्रेमिका मेगा फूड पार्क, ऊना, हिमाचल प्रदेश इंटिग्रेटेड मेगा फूड पार्क, तुमकुर, कर्नाटक केरल औद्योगिक अवसंरचना विकास निगम (के आई एन एफ आर ए) मेगा फूड पार्क, पलक्कड़, केरल। इंडस मेगा फूड पार्क, खरगौन, मध्य प्रदेश अवंती मेगा फूड पार्क, देवास, मध्य प्रदेश पैथन मेगा फूड पार्क, औरंगाबाद, महाराट्र सतारा मेगा फूड पार्क, सतारा, महाराष्ट्र ज़ोरम मेगा फ़ूड पार्क, कोलासिब, मिज़ोरम एमआईटीएस मेगा फूड पार्क, रायगढ़, ओडिशा इंटरनेशनल मेगा फूड पार्क, फज्जिलका, पंजाब सुखजीत मेगा फूड पार्क, कपूरथला, पंजाब ग्रीनेटक मेगा फूड पार्क, अजमेर, राजस्थान स्मार्ट एग्रो मेगा फूड पार्क, निजामाबाद, तेलंगाना त्रिपुरा मेगा फूड पार्क, पश्चिम त्रिपुरा, त्रिपुरा पतंजली फूड एंड हर्बल पार्क, हरिद्वार, उत्तराखंड हिमालयन मेगा फूड पार्क, उधम सिंह नगर, उत्तराखंड जंगीपुर बंगाल मेगा फूड पार्क, मुर्शीदाबाद, पश्चिम बंगाल स्कीम में सहायता का क्या है पैटर्न स्कीम में, सामान्य क्षेत्रों में परियोजना लागत (भूमि लागत को छोडक़र) के 50 प्रतिशत परंतु अधिकतम 50 करोड़ रुपए और दुर्गम एवं पहाड़ी क्षेत्रों अर्थात सिक्किम, जम्मू एवं कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड एवं राज्यों के आईटीडीपी अधिसूचित क्षेत्रों समेत पूर्वोत्तर क्षेत्र में परियोजना लागत (भूमि की लागत को छोडक़र) के 75त्न परंतु अधिकतम 50 करोड़ रुपए के पूंजी अनुदान की परिकल्पना की गई है। प्रबंधन, क्षमता निर्माण, समन्वय तथा निगरानी सहायता प्रदान करने हेतु, मंत्रालय द्वारा एक कार्यक्रम प्रबंधन एजेंसी नियुक्त की गई है । उपर्युक्त तथा अन्य प्रोत्साहनात्मक कार्यकलापों पर होने वाले खर्च को पूरा करने के लिए मंत्रालय ने उपलब्ध समग्र अनुदान की 5 प्रतिशत राशि अलग से निर्धारित की है स्कीम के तहत कैसे मिलता है अनुदान/अनुदान जारी करने की प्रक्रिया स्कीम के अंतर्गत अनुदान-सहायता, अन्य स्कीमों के मापदंडों के अध्यधीन निम्नलिखित अनुसूची के अनुसार 30 प्रतिशत, 30 प्रतिशत, 20 प्रतिशत और 20 प्रतिशत की चार किस्तों में जारी की जाती है। परियोजना घटकों पर पात्र परियोजना लागत के कम से कम 10 प्रतिशत का व्यय सुनिश्चित करने के उपरांत, स्कीम के अंतर्गत कुल अनुदान के 30 प्रतिशत की पहली किस्त जारी की जाती है। पहली किस्त के रूप में जारी अनुदान के बराबर की इक्विटी और सावधि ऋण से एसपीवी द्वारा आनुपातिक व्यय के उपरांत अनुमोदित अनुदान-सहायता के 30 प्रतिशत के बराबर की दूसरी किस्त जारी की जाती है । दूसरी- किस्त के रूप में जारी अनुदान के बराबर की इक्विटी और सावधि ऋण से एसपीवी द्वारा आनुपातिक व्यय के उपरांत अनुमोदित अनुदान-सहायता के 20 प्रतिशत के बराबर की तीसरी किस्त जारी की जाती है। अनुमोदित परियोजना घटकों पर सावधि ऋण एवं इक्विटी समेत एसपीवी के उल्लेखित योगदान का 100 प्रतिशत व्यय सुनिश्चित करने के बाद परियोजना की सफल पूर्णता और शुरू होने के अध्यधीन अनुमोदित अनुदान-सहायता के 20 प्रतिशत के बराबर की चौथी एवं अंतिम किस्त जारी की जाती है। मेगा फूड पार्क स्थापना के लिए आवेदन कैसे करें स्कीम के अंतर्गत सहायता की तलाश करने वाले प्रस्तावों को समय-समय पर जारी अभिरुचि की अभिव्यक्ति के माध्यम से आमंत्रित किया जाता है। खाद्य प्रसंस्करण यूनिटों की स्थापना करने के लिए पूर्ण विकसित औद्योगिक भूखंडों तथा अन्य संबंधित सेवाओं का लाभ उठाने के इच्छुक उद्यमी, मेगा फूड पार्कों के प्रमोटरों से संपर्क कर सकते हैं। इसकी लिस्ट खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की वेबसाइट https://mofpi.nic.in/ पर दी गई है। नोट- हालांकि हमने मेगा फूड पार्क के संबंध में पूर्ण जानकारी देने का प्रयास किया है फिर भी आप यदि इसके बारे में और अधिक जानना चाहते हैं तो इसके लिए खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की वेबसाइट https://mofpi.nic.in/ पर जाकर प्राप्त कर सकते हैं। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

केंद्र सरकार बीपीसीएल में बेचेगी अपनी हिस्सेदारी

केंद्र सरकार बीपीसीएल में बेचेगी अपनी हिस्सेदारी

रसोई गैस पर सब्सिडी : जानिएं आपको मिलेगी या नहीं? केंद्र सरकार के एक निर्णय के बाद करोड़ों घरेलू गैस (एलपीजी) उपभोक्ताओं के सामने सब्सिडी मिलने या नहीं मिलने का प्रश्न खड़ा हो गया है। केंद्र सरकार भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) में अपनी हिस्सेदारी बेचने जा रही है। बीपीसीएल की हिस्सेदारी बेचने की सूचना के बाद एलपीजी (LPG) गैस के करोड़ों ग्राहक के सामने ये सवाल खड़ा हो गया है कि उनको मिलने वाली सब्सिडी का अब क्या होगा। उपभोक्ताओं को राहत देते हुए सरकार ने साफ कर दिया है कि भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड के निजीकरण के बाद भी रसोई गैस सब्सिडी का लाभ उपभोक्ताओं को मिलता रहेगा। केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्टीकरण दिया है कि एलपीजी गैस सिलेंडर पर सब्सिडी का लाभ सीधे तौर पर उपभोक्ताओं को दिया जाता है, किसी कंपनी को नहीं। ऐसे में एलपीजी गैस बेचने वाली कंपनी का सब्सिडी पर किसी तरह का प्रभाव नहीं पड़ेगा। घरेलू गैस उपभोक्ताओं के सवालों का जवाब देते हुए केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बताया है कि बीपीसीएल के निजीकरण के बाद भी उपभोक्ताओं को रसोई गैस सब्सिडी मिलती रहेगी। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार द्वारा तेल विपणन कंपनियों इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC), बीपीसीएल (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) के उपभोक्ताओं को सब्सिडी प्रदान की जाती है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 बीपीसीएल की 53 फीसदी हिस्सेदारी बेचेगी सरकार भारत सरकार की भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) में 53 फीसदी भागीदारी है, जो सरकार बेच रही है। इसके बाद कंपनी के नए मालिक को भारत की तेल शोधन क्षमता का 15.33 प्रतिशत और ईंधन बाजार का 22 प्रतिशत हिस्सा मिल जाएगा। देशभर में कुल 28.5 करोड़ एलपीजी उपभोक्ता हैं, जिनमें से लगभग 7.3 करोड़ उपभोक्ता बीपीसीएल एलपीजी गैस का इस्तेमाल करते हैं। जानिएं घरेलू गैस सिलेंडर पर कितनी मिलती है सब्सिडी उपभोक्ता तेल विपणन कंपनियों की एजेंसियों से सीधे घरेलू गैस वाले सिलेंडर बाजार भाव पर लेता है। इस बाजार मूल्य पर सरकार की ओर से सब्सिडी उपलब्ध कराई जाती है। आपको बता दें कि सरकार की ओर से एक साल में अधिकतम 12 रसोई गैस सिलेंडर पर सब्सिडी दी जाती है, जो कि 14.2 किलो गैस वाले होते हैं। यह सब्सिडी सीधे उपभोक्ताओं के बैंक खातों में भेजी जाती है। ये तेल कंपनियां उपभोक्ताओं को देती है सब्सिडी देश की तीन प्रमुख सरकारी तेल विपणन कंपनियों इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC), बीपीसीएल (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) घरेलू रसोई गैस के उपभोक्ताओं को एलपीजी पर सब्सिडी देती है। इससे उपभोक्ताओं को कम दाम में घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर मिलते हैं। सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी का पैसा लोगों के खातों में भेज दिया जाता है। इस योजना को कोरोना काल में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना से भी जोड़ा गया, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को मुफ्त में सिलेंडर मिल सके। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना : किसानों के खाते में आएंगे 2 हजार रुपए

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना : किसानों के खाते में आएंगे 2 हजार रुपए

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में सातवीं किश्त देने की प्रक्रिया शुरू, ऐसे चेक करें अपना नाम प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से जुड़े किसानों के लिए खुशखबरी है। दिसंबर से किसानों के खाते में 2 हजार रुपए की किश्त डालने की प्रक्रिया शुरू होगी जो मार्च तक चलेगी। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों को हर साल मोदी सरकार 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता देती है। ये पैसे किसानों को तीन किश्तों में दिए जाते हैं। हर किश्त में किसानों को 2000 रुपये मिलते हैं। अब तक मोदी सरकार किसानों को 6 किश्तों में पैसे दे चुकी है। इसकी अगली किस्त यानी सातवीं किस्त दिसंबर महीने से सरकार भेज सकती है। आपको बता दें कि इस योजना के माध्यम से केंद्र की मोदी सरकार ने पिछले 23 माह के दौरान करीब 10 करोड़ किसानों के खाते में राशि ट्रांसफर कर चुकी है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM Kisan Samman Nidhi Yojana) रजिस्ट्रेशन का लाभ क्यों नहीं मिलता कई बार किसानों के खाते में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की सहायता राशि नहीं आती है। सामान्यत: कई बार नाम रजिस्टर्ड कराने पर राशि नहीं आती हैं। नाम रजिस्ट्रेशन कराते समय कोई स्पेलिंग की गलती या आधार नंबर व बैंक अकाउंट नंबर में कोई गलती होने पर पैसे अटक जाते हैं। ऐसे में पीएमस सम्मान निधि के पैसे आप घर बैठे चेक कर सकते हैं। कृषि मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि 1.3 करोड़ किसानों को आवेदन करने के बाद भी इसलिए पैसा नहीं मिल सका है क्योंकि या तो उनके रिकॉर्ड में गड़बड़ी है या फिर आधार कार्ड नहीं है। स्पेलिंग में गड़बड़ी से भी पैसा रुक सकता है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM Kisan Samman Nidhi) की लिस्ट में ऐसे जांचें अपना नाम अगर आप प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लाभार्थियों की सूची में अपना नाम देखना चाहते हैं तो आप ऑनलाइन सरकारी वेबसाइट pmkisan.gov.in पर आप अपना नाम चेक कर सकते हैं। वेबसाइट खुलने के बाद मेन्यू बार देखें और यहां ‘फार्मर कार्नर’ पर जाएं। ‘लाभार्थी सूची’ के लिंक पर क्लिक करें। अब आपको आधार नंबर, एकाउंट नंबर और मोबाइल नंबर दर्ज करना होगा। अपना राज्य, जिला, उप-जिला, ब्लॉक और गांव विवरण दर्ज करें। इसके बाद आपको Get Report पर क्लिक करना होगा, जिसके बाद आपको जानकारी मिल जाएगी। अगर किसी लाभार्थी का नाम स्टेट/ केंद्र शासित गवर्नमेंट द्वारा पीएम किसान के पोर्टल पर अपलोड किया गया है। लेकिन किसी वजह से उसे 2000 रुपये की किश्त नहीं मिलती है तो उस कारण के समाधान के बाद उसकी बकाया राशि उसके खाते में भेजी जाएगी। लेकिन अगर किसी वजह से किसान का नाम सरकार द्वारा अस्वीकृत किया जाता है तो वह इसका पात्र नहीं होगा। किस्त आने में देरी की वजह कई हो सकती हैं, जैसे कि रजिस्ट्रेशन में गलत नाम, पता या बैंक अकाउंट की जानकारी देना। इसे सुधारने के बाद जो किस्त उसे नहीं मिली है, वह भी अगली किस्त के साथ खाते में भेज दी जाएगी। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में किश्त प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत एक जनवरी 2018 को हुई थी। किसान सम्मान योजना में केंद्र सरकार तीन किश्तों में यह पैसा ट्रांसफर करती है। पहली किश्त 1 दिसंबर से 31 मार्च के बीच आती है, जबकि दूसरी किश्त 1 अप्रैल से 31 जुलाई और तीसरी किश्त 1 अगस्त से 30 नवंबर के बीच में किसानों के खाते में ट्रांसफर कर दी जाती है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना हेल्पलाइन नंबर (PM Kisan Samman Nidhi scheme) प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना मोदी सरकार की किसानों के लिए सबसे बड़ी किसान स्कीम है इसलिए किसानों को कई तरह की सहूलियतें भी दी गईं हैं। इसी में एक है हेल्पलाइन नंबर। जिसके जरिए देश के किसी भी हिस्से का किसान सीधे कृषि मंत्रालय से संपर्क कर सकता है। पीएम किसान टोल फ्री नंबर: 18001155266 पीएम किसान हेल्पलाइन नंबर:155261 पीएम किसान लैंडलाइन नंबर्स: 011—23381092, 23382401 पीएम किसान की नई हेल्पलाइन: 011-24300606 पीएम किसान की एक और हेल्पलाइन है: 0120-6025109 ई-मेल आईडी: [email protected] किसान सम्मान निधि योजना रजिस्ट्रेशन / किसान सम्मान निधि योजना पंजीकरण अगर आपने अभी तक पीएम किसान सम्मान निधि पाने के लिए रजिस्ट्रेशन नहीं किया तो ऐसे आप रजिस्ट्रेशन कराकर फायदा उठा सकते हैं। सबसे पहले आपको इस स्कीम से जुड़ी आधिकारिक साइट pmkisan.gov.in पर जाना होगा. जिसमें Farmer Corners का ऑप्शन दिखाई देगा। उस पर New Farmer Registration कॉलम में क्लिक करें। उसके बाद आपके सामने एक नई विंडो खुलेगी, जिसमें आपको आधार कार्ड का विवरण भरना है। फिर क्लिक हियर टू कॉनिटन्यू पर क्लिक करना पड़ेगा। इसके बाद आपके सामने एक अन्य पेज खुलेगा जिसमें अगर आप पहले रजिस्ट्रेशन करा चुके हो तो आपकी डिटेल्स आ जाएगी और अगर रजिस्ट्रेशन पहली बार कर रहे हैं तो लिखा आएगा कि RECORD NOT FOUND WITH GIVEN DETAILS, DO YOU WANT TO REGISTER ON PM-KISAN PORTAL इस पर आपको YES करना होगा। इसके बाद फॉर्म दिखेगा जिसे भरना होगा। इसमें सही-सही जानकारी भरने के बाद सेव कर दें। इसके बाद आपके सामने एक नया पेज खुलेगा जिसमे आपसे आपकी जमीन की डिटेल मांगी जाएगीञ खासतौर पर खसरा नंबर और खाता नंबर। इसे भरकर सेव कर दें। सेव करते ही रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। आपको एक रजिस्ट्रेशन नंबर और रिफरेंस नंबर मिलेगा जिसे अपने पास संभाल लें। इसके बाद पैसा आना शुरू हो जाएगा। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर 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राजीव गांधी किसान न्याय योजना : सीधे बैंक खातें में मिलेगी सहायता राशि

राजीव गांधी किसान न्याय योजना : सीधे बैंक खातें में मिलेगी सहायता राशि

जानें, कैसे कराएं राजीव गांधी किसान न्याय योजना में पंजीकरण और क्या देने होंगे दस्तावेज प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों के खातों में सीधे सहायता प्रदान की जाती है। इसी योजना की तर्ज पर अब कई राज्यों ने किसानों को आवश्यक आदान खरीदने के लिए सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से योजना की शुरुआत कर दी है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से किसानों के लिए राजीव गांधी किसान न्याय योजना शुरू की गई है। इसके तहत धान, मक्का, सोयाबीन, मूंगफली, तिल, अरहर, मूंग, उड़द, रामतिल, कोदो, कुटकी तथा रबी में गन्ना के तहत किसानों को सीधे सहायता राशि दी जाती है। कृषि विभाग छत्तीसगढ़ शासन द्वारा राजीव गांधी किसान न्याय योजना के क्रियान्वयन हेतु खरीफ-2020 में योजना अंतर्गत सम्मिलित फसल एवं पेराई वर्ष 2020-21 के गन्ना फसल हेतु कृषकों के पंजीयन एवं पात्रता निर्धारण के संबंध में दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 क्या है राजीव गांधी किसान न्याय योजना (Rajiv Gandhi Kisan Nyay Yojana) छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में फसल उत्पादन को प्रोत्साहित करने और किसानों को उनकी उपज का सही दाम दिलाने के लिए ‘राजीव गांधी किसान न्याय योजना’ शुरू की है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रायपुर में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि यानि 21 मई 2020 को पर इस योजना को लॉन्च किया। राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत राज्य के 19 लाख किसानों को 5700 करोड़ रुपए की राशि चार किस्तों में सीधे उनके खातों में ट्रांसफर की जानी है। राज्य सरकार इस योजना के तहत खरीफ 2019 से धान व मक्का लगाने वाले किसानों को सहकारी समिति के माध्यम से उपार्जित मात्रा के आधार पर अधिकतम 10 हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से सहायता राशि देगी। अब तक 18.34 लाख से ज्यादा किसानों को किया 4500 करोड़ का भुगतान राजीव गांधी किसान न्याय योजना Online Payment : अब तक इस योजना में किसानों को तीन किस्तों का भुगतान किया जा चुका है। चौथी किस्त आना अभी बाकी है। पहली किस्त का भुगतान 21 मई 2020 को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर किया गया जिसके तहत 18.34 लाख से ज्यादा धान किसानों को 1500 करोड़ की पहली किस्त उनके खाते में हस्तांतरित की गई। दूसरी किस्त का भुगतान पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के जन्मदिन 20 अगस्त 2020 को किया गया जिसमें किसानों को 1500 करोड़ की सहायता राशि दी गई। इसी तरह तीसरी किस्त का भुगतान छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस 1 नवंबर को किया गया जिसमें 1500 करोड़ रुपए की सहायता राशि किसानो को प्रदान की गई। चौथी किस्त आना अभी है बाकी जिसके लिए किसानों के पंजीकरण का कार्य किया जा रहा है। राजीव गांधी योजना के तहत धान व मक्का फसल के लिए पंजीकरण की ये हैं व्यवस्था खरीफ वर्ष 2020-21 में धान एवं मक्का फसल का समर्थन मूल्य पर उपार्जन के लिए खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा किसानों का पंजीयन किया गया है। खाद्य विभाग द्वारा पंजीकृत किसानों के डाटा को राजीव गांधी किसान न्याय योजना हेतु मान्य किया जाएगा तथा उपार्जित मात्रा के आधार पर अनुपातिक रकबा ज्ञात कर आदान सहायता राशि की गणना की जाएगी। राजीव गांधी किसान न्याय योजना Registration / गन्ना किसान कैसे कराएं इस योजना में पंजीकरण वह किसान जो गन्ना पेराई वर्ष 2020-21 हेतु सहकारी शक्कर कारखाना में पंजीकृत रकबा को योजना अंतर्गत सहायता अनुदान राशि की गणना हेतु मान्य किया जाएगा। अन्य फसल लगाने वाले किसानों को कृषि साख सहकारी समिति में कराना होगा पंजीयन धान, मक्का एवं गन्ना के अलावा अन्य फसल लगाने वाले किसानों को संबंधित प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति में अनिवार्य रूप से पंजीयन कराना होगा। क्षेत्र ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी द्वारा किसानों के आवेदन पत्र का सत्यापन भुईया पोर्टल में प्रदर्शित संबंधित मौसम की गिरदावरी के आंकड़ों के आधार पर किया जाएगा। सत्यापन उपरांत किसान को संबंधित सहकारी समिति में पंजीयन कराना होगा। छत्तीसगढ़ राजीव गांधी किसान न्याय योजना : पंजीकरण के लिए आवश्यक दस्तावेज किसान को पूर्ण रूप से भरे हुए प्रपत्र के साथ आवश्यक अभिलेख जैसे ऋण पुस्तिका, आधार नंबर, बैंक पासबुक की छायाप्रति, संबंधित प्राथमिक सहकारी समिति में जमा कर निर्धारित समय-सीमा 30 नवंबर 2020 तक पंजीयन कराना होगा। योजना अंतर्गत सम्मिलित अन्य फसलों के लिए राजस्व विभाग द्वारा किसानवार फसलवार शत-प्रतिशत (क्षेत्रच्छादन) का गिरदावरी करते हुए भुईया पोर्टल में इंद्राज किया जा रहा है। योजना अंतर्गत धान, मक्का एवं गन्ना उत्पादक किसानों को छोडक़र शेष फसलों यथा सोयाबीन, मूंगफली, तिल, अरहर, मूंग उड़द, कुलथी, रामतिल, कोदो, कुटकी एवं रागी फसल हेतु आदान सहायता राशि की गणना संबंधित फसलों की गिरदावरी के अनुसार भुइयां पोर्टल में संधारित रकबा के आधार पर आनुपातिक रूप से की जाएगी। राजीव गांधी न्याय योजना के उद्देश्य फसल क्षेत्राच्छादन उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि कराना। फसल के काश्त लागत की क्षतिपूर्ति कर किसानों के शुद्ध आय में वृद्धि करना। किसानों को कृषि में अधिक निवेश हेतु प्रोत्साहन देना। कृषि को लाभ के व्यवसाय के रूप में पुर्नस्थापित करन के लिए जीडीपी में कृषि क्षेत्र की सहभागिता में वृद्धि करना। योजनांतर्गत सम्मिलित फसल एवं पात्रता व नियम योजनांतर्गत खरीफ सीजन के धान, मक्का, सोयाबीन, मूंगफली, तिल, अरहर, मंूग, उड़द, कुल्थी, रामतिल, कोदो, कुटकी एवं रागी तथा रबी में गन्ना फसल को सम्मिलित किया गया है। किसान द्वारा पंजीकृत/ वास्तविक बोए गए रकबा के आधार पर निर्धारित राशि प्रति एकड़ की दर से आनुपातिक रूप से उनके बैंक खातें में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण डीबीटी के माध्यम से सहायता राशि अंतरित किया जाएगा। अनुदानग्रहिता किसान यदि पिछले वर्ष धान की फसल लगाया था एवं इस वर्ष धान के स्थान पर योजनांतर्गत शामिल अन्य फसल लगाता है, तो उस स्थिति में किसान को अतिरिक्त सहायता अनुदान प्रदान किया जाएगा। किसानों द्वारा उपभोक्ता फसलों के बोए गए रकबा के आधार पर लाभ प्राप्त करने हेतु घोषणा पत्र के साथ विभागीय पोर्टल पर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। योजनांतर्गत निर्दिष्ट फसल लगाने वाले संस्थागत भू-स्वामी किसान इस योजना हेतु पात्र नहीं होंगे। फसल अवशेष को जलाने वाले किसान योजनांतर्गत संबंधित मौसम में लाभ प्राप्त करने हेतु पात्र नहीं होंगे। घोषणा पत्र में गलत जानकारी देने वाले किसानों के विरूद्ध वैधानिक कार्यवाही अथवा प्रदत्त अनुदान राशि की वसूली भू-राजस्व संहिता के प्रचलित प्रावधान अनुसार की जाएगी। आदान सहायता राशि का निर्धारण मंत्री-मंडलीय समिति द्वारा प्रतिवर्ष प्रत्येक फसल हेतु किया जाएगा। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर 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