प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना : अभी तक नहीं मिला है दावा तो यहां करें शिकायत

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना : अभी तक नहीं मिला है दावा तो यहां करें शिकायत

Posted On - 06 Feb 2021

फसल बीमा शिकायत निवारण अभियान शुरू, 15 फरवरी तक चलेगा

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत जिन किसानों के बीमा करवाया है और उनका फसल बीमा दावा अभी तक नहीं दिया गया है। वे किसान अब इसकी शिकायत कर बीमा राशि प्राप्त कर सकेंगे। इसके लिए मध्यप्रदेश में कृषि विभाग की ओर से फसल बीमा शिकायत निवारण अभियान चलाया जा रहा है। ये अभियान 15 फरवरी तक चलेगा। मीडिया से मिली जानकारी केे अनुसार मध्य प्रदेश में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ सभी किसानों को नहीं मिल पा रहा है जिसकी वजह तकनीकी खामी को माना जा रहा है। कई किसानों को खरीफ 2019 का अब तक फसल बीमा दावा ही नहीं मिला है। इस तरह के मामले सी.एम. हेल्पलाइन में शिकायत की तहकीकात करने पर उजागर हुए हैं। इसे देखते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने समाधान ऑनलाइन के तहत राज्य में तकनीकी कारणों से राशि नहीं मिलने वाले प्रकरणों पर विशेष अभियान चलाकर कार्यवाही करने के निर्देश दिए हैं। कृषि विभाग द्वारा अभियान एक फरवरी से शुरू कर दिया गया है और यह 15 फरवरी तक चलेगा।

 

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कहां हुई गड़बड़ी

सूत्रों के मुताबिक अभियान के पूर्व ही कई जिलों में कार्यवाही एवं जांच प्रारंभ कर दी गई है। रायसेन जिले में कई किसानों से फसल बीमा की प्रीमियम राशि काट ली गई किन्तु इसकी फसल बीमा पोर्टल पर एंट्री नहीं की गई है। एन्ट्री होने पर बीमा कंपनी से बीमा दावा राशि किसानों को प्राप्त नहीं हो पाई। इसकी शिकायत पर कलेक्टर की अध्यक्षता में बैठक हुई।

 


फिर अब क्या लिया गया है निर्णय?

रायसेन के उप संचालक एनपी सुमन ने मीडिया को बताया कि बैठक में निर्णय लिया गया कि ऐसे 27 किसानों की लगभग 10 लाख रुपए की फसल बीमा दावा राशि संबंधित बैंको से वसूल की जाए। बैंक एक सप्ताह के अंदर राशि किसानों के खाते में डाले, ऐसे सभी प्रकरणों में जिसमें बैंक द्वारा फसल बीमा के तहत पोर्टल पर एंट्री नहीं करने या त्रुटि पूर्ण एंट्री करने पर कृषक को बीमा दावा का लाभ नहीं मिल पाने पर संबंधित बैंक फसल बीमा के दावा राशि की भरपाई करेगी। इन 27 किसानों की शिकायतें सीएम हेल्पलाइन से प्राप्त हुई थी।

 

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966 किसानों का बीमा प्रीमियम काटने के बाद भी नहीं हुआ दावों का भुगतान

इसी प्रकार विदिशा जिले में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत खरीफ 2019 में किसानों के द्वारा संबंधित बैंकों में बीमा की राशि जमा कराई गई है किन्तु 28 बैंकों की शाखाओं द्वारा बीमित राशि कंपनी को नहीं भेजी गई है इस कारण जिले के चार हजार 966 कृषकों की बीमा प्रीमियम काटने के बाद डाटा राष्ट्रीय फसल बीमा पोर्टल पर समयावधि में अपलोड नहीं किया गया है। यह जानकारी देते हुए कृषि उप संचालक पीके चौकसे ने मीडिया को बताया कि पोर्टल पर डाटा समयावधि में अपलोड नहीं होने के कारण बीमा कंपनी द्वारा कृषकों को फसल बीमा दावा राशि का भुगतान नहीं किया गया है साथ ही बीमा कंपनी द्वारा कृषकों का फसल बीमा स्वीकार नहीं किया गया है।

 

तो अब कैसे मिलेगा बीमा दावा?

चौकसे ने मीडिया को बताया कि संबंधित बैंकर्स को योजना की संशोधित गाइड लाइन कंडिका 17, 24 एवं 35 में निहित निर्देशों के अनुसार बैंकों द्वारा कृषकों को फसल बीमा दावा राशि के नुकसान का भार उठाना होगा। जिन कृषकों की पोर्टल पर एंन्ट्री नहीं की गई है उन 4 हजार 966 कृषकों को नियमानुसार, पात्रतानुसार फसल बीमा दावा राशि का भुगतान करना होगा। एक ओर किसानों को फसल बीमा का दावा भुगतान नहीं हो पाया है, वहीं दूसरी तरफ कुछ किसानों ने एक ही जमीन पर दो बैंकों से ऋण लेकर फसल बीमा कराया तथा दावा भी ठोका है। जिसे विभाग ने जांच के बाद निरस्त कर दिया है। 

इस संबंध में कृषि विभाग के अपर संचालक श्री बी.एम. सहारे ने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के निर्देशों में प्रावधान है कि एक जमीन पर दो बार बीमा नहीं हो सकता। किसानों ने बैंक को पहले से बीमा कराने की जानकारी नहीं दी। जिस कारण यह स्थिति निर्मित हुई। विभाग द्वारा जांच में स्थिति स्पष्ट होने के बाद नियमों के मुताबिक दावा निरस्त करने की कार्यवाही की गई है। उन्होंने बताया कि इस योजना के तहत राज्य में 2019-20 के लिए लगभग 8 हजार करोड़ बीमा क्लेम दिया गया है।

 

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शिविर में होगा इन समस्याओं का समाधान

सहारे ने बताया कि फसल बीमा योजना में शिकायत की जांच के लिए 1 से 15 फरवरी तक शिकायत निवारण अभियान चलाया जाएगा। जिसमें तकनीकी कारणों जैसे ट्रांजेक्शन फेल, बाउंस होना, यूटीआर अटैच नहीं होना, बैंकों द्वारा बीमित किसानों की अपूर्ण इंट्री करना आदि शामिल है। अपर संचालक ने बताया कि इन समस्याओं के समाधान के लिए कलेक्टरों को कहा गया है कि अभियान के तहत अधिकृत बीमा कंपनी, लीड बैंक, जिला सहकारी बैंक एवं कृषि अधिकारियों को पाबंद करें।

 

 

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