जैविक खेती के बाद अब किसानों के लिए वरदान बनेगा आर्गेनिक मीट व अंडे का उत्पादन

जैविक खेती के बाद अब किसानों के लिए वरदान बनेगा आर्गेनिक मीट व अंडे का उत्पादन

Posted On - 26 Jun 2020

योजना के लिए सरकार ने दी 15,000 करोड़ रुपए की मंजूरी

किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से केंद्र सरकार की ओर से कई लाभकारी योजनाएं संचालित की जा रही है जिसका किसानों को फायदा भी हो रहा है। इसी क्रम में पशुपालकों के लाभार्थ केंद्र सरकार पशु नस्ल सुधार पर बड़े स्तर पर योजना शुरू करने जा रही है। इस योजना के तहत सरकार ऑर्गेनिक मीट और अंडा उत्पादन को बढ़ावा देगी जिससे पशुपालक किसानों को फायदा होगा। इसके लिए सरकार पशु नस्ल सुधार पर जोर देगी जिससे पशुओं की अच्छी नस्ल से मांस और अंडा का स्वस्थ और अच्छा उत्पादन प्राप्त किया जा सके। इस योजना के तहत ग्रामीण क्षेत्र के करीब 35 लाख लोगों को रोजगार मुहैया कराया जाएगा। इसके लिए कैबिनेट की बैठक में पशुपालन विभाग के विकास के लिए 15 हजार करोड़ रुपए की राशि को मंजूरी दे दी गई है। इस योजना के तहत पशुओं की नस्ल में सुधार कर उनसे स्वस्थ एवं अच्छा उत्पादन प्राप्त किया जा सकेगा जिससे निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। 

 

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मीडिया में प्रकाशित खबरों के अनुसार केंद्रीय पशुपालन, डेयरी और मत्स्यपालन मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा है कि सरकार देश में जैविक मीट और जैविक अंडा उत्पादन और उसके कारोबार को बढ़ावा देगी। उन्होंने बताया कि बुधवार को हुई कैबिनेट की बैठक में पशुपालन विभाग के विकास के लिए सरकार ने 15,000 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। पशुपालन विभाग के विकास से देश में 35 लाख लोगों को रोजगार के अवसर मुहैया होंगे। उन्होंने बताया कि जब मोदी सरकार ने आत्मनिर्भर भारत अभियान पैकेज की घोषणा की थी उस समय पशुपालन और मत्स्य विभाग को 53,000 करोड़ का पैकेज दिया था। यह 15,000 करोड़ का पैकेज आत्मनिर्भर भारत अभियान पैकेज से अलग है। पशुपालन मंत्री ने बताया कि पशुपालन सेक्टर के विकास के लिए मिल्क, फीड और मीट उत्पादन पर ध्यान दिया जाएगा। 

 

क्या है आर्गेनिक मीट व अंडा

भेड़ एवं बकरी पालन काश्तकारों की आजीविका का एक प्रमुख साधन रहा है। चूंकि ये बकरियां बुग्याल और जंगल का ही चारा खाती हैं। लिहाजा इनका मांस जैविक मांस के सभी मानकों को पूरा करता है। यहां तक कि चारे के अलावा इन भेड़-बकरियों को जैविक तरीके से ही डी.वार्मिंग करवाई जाती है। यानि इनके पेट के कीड़ों को मारने के लिए औषधीय पादपों का इस्तेमाल पशुपालक करते हैं। इस तरह  इससे प्राप्त मांस आर्गेनिक मांस की श्रेणी में आता है। 

वहीं आर्गेनिक अंडा की बात करें तो ज्यादातर लोगों की गलतफहमी है कि अंडे से बच्चा (चूजा) निकलता है। लेकिन, अगर आप इस कारण से अंडे को मांसाहारी मानते हैं, तो आपको बता दें कि बाजार में मिलने वाले ज्यादातर अंडे अनफर्टिलाइज्ड होते हैं। इसका मतलब, उनसे कभी चूजे बाहर नहीं आ सकते। वैज्ञानिकों के अनुसार दरअसल, अंडे में तीन लेयर (हिस्से) होती हैं- पहला छिलका, दूसरा सफेदी और तीसरा अंडे की जर्दी। अंडे पर की गई एक रिसर्च के मुताबिक, अंडे की सफेदी में सिर्फ प्रोटीन होता है। उसमें जानवर का कोई हिस्सा मौजूद नहीं होता। इसलिए तकनीकी रूप से एग वाइट (सफेदी) शाकाहारी होता है। वहीं एग वाइट की ही तरह एग योक(अंडे की जर्दी) में भी प्रोटीन के साथ सबसे ज्यादा कोलेस्ट्रोल और फैट मौजूद होता है। हालांकि, अंडे मुर्गी और मुर्गे के संपर्क में आने के बाद दिए जाते हैं, उनमें गैमीट सेल्स मौजूद होता है, जो उसे मांसाहारी बना देता है।

 

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दुनिया से सबसे ज्यादा 53 करोड़ पशुधन है भारत में

दुनिया में सबसे ज्यादा पशुधन भारत में है। वर्तमान में दर्ज आकड़ों के अनुसार इसकी संख्या 53 करोड़ (गाय-भैंस, भेड़-बकरी आदि) है। यह लाइव स्टाक है। इसके अलावा जो है उनकी गिनती की जानी अभी शेष है। उन्हें भी इस में जोडक़र देखा जाए तो पशुधन का आंकड़ा इससे भी ज्यादा बैठेगा। देश में पशु विकास दर 8.5 फीसदी सालाना है। देश का लाइव स्टॉक 1.56 लाख करोड़ रुपए का है। 

 

अभी भारत से केवल 5 फीसदी ही होता है मीट का निर्यात

अभी भारत अपने कुल मीट उत्पादन का महज 5 फीसदी ही निर्यात कर पाता है जो पशुधन की संख्या को देखते हुए बहुत ही कम है। इसके अलावा पशुओं से संबंधित पदार्थ दूध, अंडा आदि का निर्यात भी कम ही हो पा रहा है। सरकार द्वारा ऑर्गेनिक मीट और अंडा के उत्पादन और कारोबार को बढ़ावा देने के बाद इसके निर्यात में वृद्धि होगी जिससे विदेशी मुद्रा प्राप्त हो सकेगी। इसके लिए सरकार द्वारा एपीडा के साथ मिलकर योजना बनाई जा रही है।

 

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योजना से कैसे बढ़ेगी किसानों की आमदनी 

भारत के अधिकांश ग्रामीण इलाकों किसान खेती के साथ पशुपालन भी करते हैं जिससे उन्हें आदमनी होती है। लेकिन अच्छी नस्ल का पशु नहीं होने से उन्हें उस पशु से अधिक उत्पादन नहीं मिल पाता। सबसे पहले पशु की अच्छी नस्ल का चुनाव करना बेहद जरूरी है तभी उससे प्राप्त उत्पाद- दूध, अंडा, मांस अधिक मात्रा में प्राप्त हो सकेगा। इस योजना के तहत इसी बात का ध्यान दिया जाएगा कि किस प्रकार अच्छी नस्ल का चयन कर उत्पादन बढ़ाया जाए ताकि उसका लाभ किसानों को मिल सके। इसके लिए पशुपालन विभाग द्वारा समय-समय पर पशुपालकों के लिए कार्यशालाएं भी आयोजित की जाती है जिसमें किसान पशुपालकों को पशुपालन के बारें में जानकारी दी जाती है। वहीं सरकार की ओर से गांवों पर किसानों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। इस योजना में पशुपालन विभाग का फोकस पशुओं की अच्छी नस्ल का चयन कर उससे स्वस्थ व गुणवत्तापूर्ण उत्पाद प्राप्त करने पर होगा जिससे इसके निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। यदि सरकार इस योजना को पूरी तरह धरातल पर उतार पाई तो इससे निश्चित ही किसानों को लाभ होगा। वहीं इस योजना से जुडऩे वाले किसानों को रोजगार के नए अवसर मिलेंगे।

 

 

 

ऐसी ही योजना दो साल पहले उत्तराखंड में हुई थी शुरू

देश में ऑर्गेनिक मीट की चर्चा लंबे समय से चल रही है। आर्गेनिक मीट के व्यापार की योजना पर दो साल पहले उत्तराखंड की हरीश सरकार के कार्यकाल में भी विचार किया गया था। उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इस योजना को तैयार करने के लिए जैविक मीट मार्केटिंग बोर्ड के गठन के निर्देश दिए थे। इसके अलावा उत्तराखण्ड शीप एंड वूल डेवलपमेंट बोर्ड ने इस योजना की मंजूरी के लिए उसे नेशनल को-ऑपरेटिव डेवलपमेंट कारपोरेशन (एनसीडीसी) को भी भेजा था। लेकिन योजना को धरातल पर नहीं उतारा जा सका। अब भाजपा सरकार इसे कार्यरूप देने जा रही है।

 

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