मोदी सरकार केंद्रीय बजट 2022 में कृषि ऋण के लिए 18 लाख करोड़ रुपये देगी

मोदी सरकार केंद्रीय बजट 2022 में कृषि ऋण के लिए 18 लाख करोड़ रुपये देगी

Posted On - 03 Jan 2022

किसानों को मिलेगा पहले से ज्यादा लोन, सरकार ने शुरू की तैयारी

नये साल 2022 का केंद्रीय बजट किसानों के लिए वरदान साबित हो सकता है। इस बजट में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी किसानों को अधिक ऋण की सुविधा के लिए कृषि ऋण लक्ष्य को बढ़ाकर 18 लाख करोड़ रुपये कर सकते हैं। बता दें कि अभी यह बजट राशि 16.5 लाख करोड़ है। पीएम मोदी सरकार कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए 1 फरवरी 2022-23 को पेश किए जाने वाले बजट को बढ़ाने का मानस बना चुकी है और इसकी तैयारी भी शुरू गई है। आइए, जानते हैं आने वाले बजट में पीएम मोदी सरकार किसानों के लिए क्या कुछ नया करने जा रही है। 

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मोदी सरकार में कृषि ऋण प्रवाह में लगातार वृद्धि हुई 

बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार ने किसानों के हित में लगातार कृषि ऋणों में वृद्धि की है। इस बार फिर किसानों को पीएम मोदी प्रस्तावित बजट में कृषि ऋणों में भारी वृद्धि कर नये साल का तोहफा देना चाहते हैं। चालू वित्त वर्ष के लिए सरकार का कृषि ऋण 16.5 लाख करोड़ है। सरकारी सूत्रों की मानें तो हर साल कृषि ऋण लक्ष्य बढ़ाए जाते रहे हैं। इस बार वर्ष 2022-23 में इस लक्ष्य को बढ़ा कर 18.5 लाख करोड़ करने की संभावना है। 

संभवतया इस महीने के अंतिम सप्ताह में बजट को अंतिम रूप प्रदान किया जा सकता है। सरकार बैंकिंग क्षेत्र के लिए फसल ऋण लक्ष्य सहित वार्षिक कृषि ऋण निर्धारित करती है। यदि पिछले बजटों में कृषि ऋणों के विस्तार की बात करें तो वर्ष 2017-18 में किसानों को 11.68 लाख करोड़ रुपये का ऋण दिया गया है जो उस वर्ष के लिए निर्धारित 10 लाख करोड़ के लक्ष्य से बहुत अधिक है। वहीं वित्तीय वर्ष 2016-17 में 10.66 लाख करोड़ रुपये के फसल ऋण वितरित किए गए  जो 9 लाख करोड़ रुपये के ऋण से अधिक है। 

वर्तमान में किसानों को कृषि ऋणों की यह है सीमा 

बता दें कि वर्तमान में सरकार किसानों को तीन लाख रुपये तक के अल्पकालीन कृषि ऋण को सात प्रतिशत प्रति वर्ष की दर से सुनिश्चित करने के लिए 2 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी प्रदान करती है। वहीं देय तिथि के भीतर ऋणों की शीघ्र अदायगी के लिए किसानों को तीन प्रतिशत का अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाता है। इससे प्रभावी ब्याज दर चार प्रतिशत हो जाती है। इस तरह से सरकार कृषि ऋण लक्ष्य को और बढ़ाती है तो इससे देश के लाखों किसानों को फायदा होगा। बजट में कृषि ऋण लक्ष्य में 2 लाख करोड़ से ज्यादा की वृद्धि से किसान ज्यादा संख्या में लोन ले पाएंगे। 

किसान संस्थागत लोन के लिए नहीं होंगे मजबूर 

केंद्र सरकार की ओर से बजट 2022-23 में कृषि ऋण विस्तार के तहत कृषि ऋण लक्ष्य को बढ़ा कर 18.5 लाख करोड़ किए जाने से देश के उन किसानों को सबसे ज्यादा फायदा होगा जो साहूकारों से संस्थागत लोन लेने के लिए मजबूर होते हैं। अब ये इस तरह के अधिक ब्याज दर वाले ऋण लेने के लिए मजबूर नहीं होंगे क्योंकि सरकार ने ऋण सीमा भी बढ़ जाएगी। आम तौर पर कृषि ऋण पर 9 प्रतिशत की ब्याज दर लगती है लेकिन सरकार सस्ती दर पर अल्पकालिक फसल ऋण उपलब्ध कराने और कृषि उत्पादन को बढ़ावा देने में मदद करने के लिए ब्याज सबवेंशन प्रदान करती है। 

छोटे किसानों को आरबीआई ने बढ़ाई ऋण सीमा 

यहां बता दें कि औपचारिक ऋण प्रणाली में छोटे और सीमांत किसानों के कवरेज को बढ़ाने के लिए आरबीआई ने बिना किसी चीज को गिरवी रखने वाले कृषि ऋण की सीमा 1 लाख रुपये से बढ़ा कर 1.6 लाख रुपये करने का निर्णय लिया गया है। सरकार किसानों को तीन लाख रुपये तक के अल्पकालीन कृषि ऋण को सात प्रतिशत प्रति वर्ष की प्रभावी दर से सुनिश्चित करने के लिए दो प्रतिशत ब्याज सब्सिडी प्रदान करती है। देय तिथि के भीतर ऋणों की शीघ्र अदायगी के लिए किसानों को तीन प्रतिशत का अतिरिक्त प्रोत्साहन दिया जाता है। इससे प्रभावी ब्याज दर 4 प्रतिशत हो जाती है। आगामी बजट में सरकार यदि कृषि ऋण लक्ष्य को बढ़ाती है तो निश्चित तौर पर इससे किसान लाभांवित होंगे। 

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किसान बनवा सकते हैं क्रेडिट कार्ड 

यहां बता दें कि किसानों को केंद्र और राज्य सरकारों की ओर से कई प्रकार के ऋण प्रदान करने की योजनाएं पहले से ही चल रही हैं। इसी के तहत किसान क्रेडिट कार्ड योजना में भारत सरकार की योजना के तहत किसानों  को समय पर ऋण उपलब्ध कराने की सुविधा प्रदान की जाती है। इस योजना को 1998 में शुरू किया गया था।  इसका संचालन नाबार्ड द्वारा किया जाता है। किसान क्रेडिट कार्ड के जरिए  किसान 4 प्रतिशत ब्याज दर पर 3 लाख रुपये तक का लोन ले सकते हैं। अब इसके लिए आवेदन करना भी आसान हो गया है। 

कोरोना काल में देशभर में 2 करोड़ केसीसी जारी हुए 

बता दें कि किसान क्रेडिट कार्ड पर कम ब्याज दर पर अधिक ऋण की सुविधा के चलते किसान यह कार्ड बनवाने के लिए खासे उत्सुक रहते हैं। मीडिया रिपोर्टस् के अनुसार कोरोना काल में 2 करोड़ से ज्यादा किसान क्रेडिट कार्ड जारी किए गए थे। इनमें से अधिकांश कार्ड छोटे किसानों को दिए गए थे। आरंभ में केसीसी योजना में मत्स्य, पशुपालन आदि जरूरतों को पूरा करने के लिए सरकार ने क्रेडिट कार्ड जारी किए थे। इसके बाद सरकार ने इसकी सीमा बढ़ा दी। अब फसल के बाद जैसे ही किसान क्रेडिट कार्ड का ऋण चुकाते हैं तो उन्हे तुरंत दूसरा ऋण भी मिल जाता है। 

किसान क्रेडिट कार्ड के लिए पात्रता (Kisan Credit Card)

बता दें कि ज्यादातर किसानों कोअधिक ऋण के लिए  केसीसी की जरूरत पड़ती है। इसके लिए सरकार ने पात्रता की शर्तें तय की हैं जो इस प्रकार हैं- 

  • ऐसे किसान जो व्यक्तिगत खेती योग्य भूमि के संयुक्त उधारकर्ता और खेती या संबंधित गतिविधियों में लगे हुए हैं। वे इस योजना में आवेदन कर सकते हैं। 
  • वे किसान जो व्यक्तिगत या मालिकों के साथ खेती करते हैं। 
  • वे काश्तकार किसान जो मौखिक पट्टे और खेती योग्य भूमि के फसली साझेदार हैं। 
  • साझा फसल या काश्तकार किसानों द्वारा गठित स्वयं सहायता समूह  या संयुक्त दायित्व समूह भी केसीसी के लिए आवेदन के पात्र माने गए हैं। 

ऐसे करें केसीसी के लिए आवेदन 

किसान क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन प्रक्रिया ऑनलाइन है। इसके लिए किसान  संबंधित बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर किसान क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं। 

किसान क्रेडिट कार्ड बैलेंस चेक 

किसान क्रेडिट कार्ड की शेष राशि की जांच करने के लिए किसानों को चाहिए कि वे सार्वजनिक क्षेत्र यानि सरकारी बैंक के ग्राहक सेवा केंद्र से संपर्क करें जिसने आपको किसान क्रेडिट कार्ड प्रदान किया है। 

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