मखाना विकास योजना : मखाने की खेती पर मिलेगी 72,750 रुपए सब्सिडी

मखाना विकास योजना : मखाने की खेती पर मिलेगी 72,750 रुपए सब्सिडी

Posted On - 20 Dec 2021

जानें, किन किसानों को होगा फायदा और कैसे करना है आवेदन

किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार की ओर से प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए सरकार की ओर से कई योजनाएं चलाई जा रही है। इन योजनाओं के माध्यम से किसानों को लाभ प्रदान किया जा रहा है। कृषि विभाग और उद्यान विभाग की ओर से किसानों को विशेष फसल की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसके लिए किसानों को सब्सिडी का लाभ दिया जाता है। इसी क्रम में बिहार सरकार की ओर से किसानों को मखाना उत्पादन बढ़ाने के लिए प्रोत्साहन दिया जा रहा है। इसके लिए किसानों को 72,750 रुपए सब्सिडी दी जा रही है। 

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Makhana Development Scheme : इन जिलों के किसानों को मिलेगा प्रोत्साहन

बिहार सरकार की ओर से मखाने पर सब्सिडी की योजना का लाभ मखाना की खेती करने वाले राज्य के कुछ जिलों के किसानों को मिलेगा। अभी इन आठ जिलों में मखाना विकास योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है। जिन आठ जिलों के किसानों को सब्सिडी का लाभ प्रदान किया जाएगा उनमें कटिहार, दरभंगा, सुपौल, किशनगंज, पुर्णिया, सहरसा, अररिया, पश्चिम चम्पारण जिलों को शामिल किया गया है। 

मखाने की नई किस्म के उत्पादन पर मिलेगा अनुदान

राज्य में मखाना के उच्च प्रजाति का बीज उत्पादन, मखाना के उच्च प्रजाति के बीज का प्रत्यक्षण तथा क्षमता वर्धन के माध्यम से मखाना के उत्पादन को बढ़ाने के उद्देश्य से मखाना विकास योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है। राज्य सरकार के अनुसार राज्य में मखाना की उन्नत प्रजाति के बीज की खेती के लिए प्रति हेक्टेयर 97,000 रुपए की लागत आती है। इस पर किसानों को 75 प्रतिशत कि सब्सिडी दी जा रही है। यह अधिकतम 72,750 रुपए है। मखाना के उन्नत बीज के लिए राज्य के उपरोक्त बताएं गए 8 जिलों के किसान आवेदन कर सकते हैं। 

किसानों को दिए जाएंगे नई प्रजाति के बीज

जैसा कि बिहार राज्य सरकार की ओर से मखाने का उत्पादन बढ़ाने के लिए मखाने की उन्नत किस्म के बीज एवं खेती पर अनुदान दिया जा रहा है। इस नई प्रजाति के बीज से राज्य में मखाने के उत्पादन में काफी बढ़ोतरी की आशा है। राज्य सरकार के अनुसार अभी मखाना का उत्पादन प्रति हेक्टेयर 16 क्विंटल है लेकिन जो नई प्रजाति के बीज दिए सरकार की ओर से दिए जाएंगे उसका उत्पादन 28 क्विंटल प्रति हेक्टयर बताया जा रहा है। बता देें कि बिहार में स्वर्ण वैदेही और सबौर मखाना-वन जैसी अधिक उपज वाली किस्मों के कारण इसकी उत्पादकता 16 टन प्रति हेक्टेयर से बढक़र 28 टन प्रति हेक्टेयर हो गई है।

इन किसानों को मिलेगी प्राथमिकता

मखाना विकास योजना के तहत किसानों को सब्सिडी का लाभ प्रदान किया जा रहा है। इस योजना के तहत 16 प्रतिशत अनुसूचित जाति और 1 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। इसके अलावा सभी वर्गों के महिलाओं के लिए 30 प्रतिशत भागीदारी रहेगी। 

मखाने की खेती पर अनुदान के लिए कहां करें आवेदन (Makhana Cultivation)

मखाने की खेती पर अनुदान का लाभ प्राप्त करने के लिए संबंधित जिले के किसान उद्यानिकी विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन 14 दिसंबर से शुरू हो चुके हैं। योजना में आवेदन की अंतिम तिथि 24 दिसंबर 2021  है। मखाने की खेती पर सब्सिडी का लाभ प्राप्त करने के इच्छुक किसान horticulture.bihar.gov.in पर जाकर आवेदन कर सकते हैं। इसके अलावा सीएससी पर जाकर भी किसान इसके लिए आवेदन कर सकते हैं। 

आवेदन लिंक

http://horticulture.bihar.gov.in/HORTMIS/Makhana/OnlineAppMakhana.aspx

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योजना में अभी तक कितने किसानों ने किया आवेदन

मखाना विकास योजना के तहत सब्सिडी का लाभ प्राप्त करने के लिए अभी तक संबंधित जिलों के करीब 686 किसानों ने आवेदन किया है। आवेदन करने वाले किसानो को नियमानुसार सहायता अनुदान डीबीटी कार्यक्रम के तहत सीएफएमएस द्वारा भुगतान किया जाएगा।

मखाने की खेती पर सब्सिडी के लिए आवेदन हेतु आवश्यक दस्तावेज

मखाने की खेती पर सब्सिडी का लाभ प्राप्त करने के इच्छुक किसानों को इसके लिए ऑनलाइन आवेदन करना होगा। इसके किसानों को कुछ दस्तावेजों की आवश्यकता होगी जो इस प्रकार से हैं-

  • आवेदन करने वाले किसान का आधार कार्ड
  • आवेदन करने वाले किसान के खेती की जमीन के कागजात
  • बैंकपास बुक की प्रथम पृष्ठ की कॉपी
  • आवेदन करने वाले किसान का मोबाइल नंबर आदि।

मखाना विकास योजना के बारें में (Makhana Vikas Yojana)

मखाना विकास योजना बिहार सरकार की एक राज्य प्रायोजित योजना है जो राज्य में मखाना के समग्र विकास के लिए, विशेष रूप से उत्पादन बढ़ाने पर जोर देती है। इसके अलावा बिहार में राज्य बागवानी उत्पाद विकास योजना के माध्यम से मखाना उत्पादकों का समर्थन किया जाता है। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने बीते दिनों लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान विभिन्न खाद्य सामग्रियों में मखाना का उपयोग भी बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) ने फसल प्रणाली प्रारूप में मखाने की खेती के लिए प्रौद्योगिकी विकसित की है और उत्पादकता में सुधार के लिए जल अधिशेष पारिस्थितिकी के लिए मखाना आधारित एकीकृत कृषि प्रणाली विकसित की गई है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में, मखाना की व्यावसायिक खेती मुख्य रूप से बिहार तक ही सीमित है। मखाने का वर्ष 2020-21 के दौरान उत्पादन 56,194.59 टन रहा है।

 

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