किसान रेल योजना : किसानों को माल पहुंचाने के लिए मिली 50 प्रतिशत सब्सिडी

किसान रेल योजना : किसानों को माल पहुंचाने के लिए मिली 50 प्रतिशत सब्सिडी

Posted On - 26 Nov 2021

केरल के किसानों का अनानास आधे किराए में पहुंचा दिल्ली, मिलेगा ज्यादा फायदा

किसान रेल योजना किसानों के लिए वरदान सिद्ध हो रही है। जागरूक किसान किसान रेल योजना का फायदा उठाकर अपने कृषि उत्पाद को देश के बड़े बाजारों में कम समय में पहुंचा रहे हैं। इससे जहां उपभोक्ताओं को ताजा उत्पाद मिल रहा है वहीं किसानों को ज्यादा दाम मिल रहे हैं। हाल ही में केरल के किसानों ने 2.5 टन अनानास रेल से दिल्ली भेजा है। मात्र 50 घंटे के सफर में 'वजहाकुलम' अनानास दिल्ली पहुंच गया। इससे पहले ट्रक द्वारा अनानास पहुंचाने में 5 दिन का समय लगता था। इसमें श्रम व पैसा भी ज्यादा खर्च होता था। ट्रैक्टर जंक्शन की इस पोस्ट में किसान रेल योजना के बारे में और केरल से दिल्ली अनानास भेजने संबंधी जानकारी दी गई है।

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एसोसिएशन अब ट्रेन से करेगा फलों की आपूर्ति

आल इंडिया केरल पाइनएप्पल फार्मस एसोसिएशन देश के सबसे बड़े किसान संगठनों में से एक है। एसोसिएशन ने पहली बार अनानास की एक खेप रेल से दिल्ली भेजी है। 24 नवंबर को एर्नाकुलम दक्षिण रेलवे स्टेशन से दिल्ली जाने वाली निजामुद्दीन एक्सप्रेस से 2.5 टन 'वजहाकुलम' अनानास पार्सल की खेज भेजी गई। अनानास की इस खेप का दिल्ली पहुंचने का समय 50 घंटे निर्धारित है। एसोसिएशन का कहना है कि यदि प्रयोग सफल रहा तो नियमित रूप से ट्रेन के माध्यम से अनानास की आपूर्ति की जाएगी।

Kisan Rail Yojana 2021 : 5 दिन का सफर 50 घंटे में सिमटा

आपको बता दें कि दिल्ली फल, सब्जियों और कृषि उपजों के सबसे बड़े बाजारों में से एक है और यहां देश के हर कोने से ट्रेनें आती है। केरल से भेजा गया अनानास मात्र 50 घंटे में दिल्ली पहुंच गया। आमतौर पर अनानास को ट्रकों से भेजा जाता है जिसे दिल्ली पहुंचने में पांच दिन लगते हैं। एसोसिएशन ने एक विज्ञप्ति में जारी कर कहा कि रेल द्वारा माल 50 घंटे में अनानास पहुंच जाएगा और उपभोक्ताओं को ताजे फल मिलना सुनिश्चित होगा। एसोसिएशन के अध्यक्ष जेम्स जॉर्ज थोट्टूमरियाल ने कहा कि पहली बार ट्रेन से अनानास को दिल्ली भेजा गया है, यदि प्रयोग सफल रहता है तो हमारे पास नियमित रूप से बड़ी खेप भेजने की योजना है। 

राज्य बागवानी मिशन और रेलवे से मिला भरपूर समर्थन

एसोसिएशन के अध्यक्ष थोट्टूमरियाल के अनुसार ऐसा करने के लिए एसोसिएशन को राज्य बागवानी मिशन और रेल विभाग से जबरदस्त समर्थन मिला है। उन्होंने बताया कि खेप डायम एग्रो एलएलपी को भेजी जाती है, जो हिसार में हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय में एक कृषि व्यवसाय स्टार्ट-अप है और केंद्रीय कृषि मंत्रालय के तहत वित्त पोषित है। पहली खेप को वजहाकुलम में अखिल केरल अनानस किसान मुख्यालय से कोच्चि के लिए हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। 

जीआई टैग वाले वजहाकुलम पाइनएप्पल की उत्तर भारत में बेहतर मांग

जीआई टैग वाले वजहाकुलम पाइनएप्पल को उत्तर भारत से हमेशा आकर्षक व्यापारिक रूझान मिलता है। साथ ही राज्य बागवानी मिशन - केरल और रेलवे ने बड़ी खेप भेजने के लिए आकर्षक प्रोत्साहन की पेशकश की है। आपको बता दें कि वर्तमान में केरल में लगभग 18 हजार हेक्टेयर भूमि में अनानास की खेती होती है और सालाना 5.5 लाख टन अनानास का उत्पादन होता है।

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ऑन लाइन बाजार विकसित करने में जुटा डायम एग्रो एलएलपी

डायम एग्रो एलएलपी एक एग्री बिजनेस स्टार्टअप है जिसे रेल के माध्यम से पहली खेप भेजी गई है। यह स्टार्टअप किसानों के फलों और सब्जियों के लिए अंतरराज्यीय खरीदारों, विशेष रूप से केरल में अनानास किसानों के लिए अपनी उपज का विपणन करने के लिए ऑनलाइन बाज़ार विकसित कर रहा है।

किसान रेल योजना सब्सिडी : माल परिवहन पर मिलती है 50 फीसदी छूट

किसानों की आय 2022 तक दोगुनी करना केंद्र सरकार का सबसे खास मिशन है। 2020 के बजट में केंद्र सरकार ने पूरे देश में किसान रेल चलाने का ऐलान किया था। कोरोना महामारी के बाद 2021 के केंद्रीय बजट में किसान रेल योजना के लिए लंबा-चौड़ा बजट जारी किया गया है। केंद्र सरकार की किसान रेल योजना को किसानों का भारी समर्थन मिला। किसान रेल की लोकप्रियता का अंदाजा इस तथ्य से लगाया जा सकता है कि सरकार को पहली किसान रेल शुरू करने के चार महीनों के भीतर ही 100वीं किसान रेल को हरी झंडी देनी पड़ी। किसान रेल के जरिए फलों और सब्जियों के ट्रांसपोर्टेशन पर 50 फीसदी की सब्सिडी दी जाती है। 

किसान रेल योजना 2021 : अब तक 1455 किसान रेल संचालित

रेलवे के एक अधिकारी के मीडिया में प्रकाशित बयानों के अनुसार किसान रेल योजना अक्टूबर 2020 से शुरू हुई है। तबसे भारतीय रेलवे ने 1,455 किसान रेल चलाई हैं। 129 रूट्स पर चलाई गईं इन ट्रेनों के जरिए से 4.78 लाख टन माल की ढुलाई की गई, जिसके माल भाड़ की कीमत तकरीबन 182 करोड़ रुपये आंकी गई है। इसमें से 94.92 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी गई। लेकिन रेलवे को सिर्फ 55 करोड़ रुपये ही मिल सके हैं।

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