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किसान क्रेडिट कार्ड : अब खेती-किसानी के लिए लोन लेना काफी आसान

किसान क्रेडिट कार्ड : अब खेती-किसानी के लिए लोन लेना काफी आसान

बस इन तीन डॉक्यूमेंट से बनवाएं क्रेडिट कार्ड, सरकार से मिलेगा सस्ता लोन, समय पर ऋण चुकाने पर मिलेगी छूट

अब किसान भाइयों को खेती-किसानी के लिए बैंक से लोन लेना काफी आसान हो गया है। जैसा कि आप जानते हैं कि हमारे किसान भाइयों को सरकार की ओर से सस्ती दर पर लोन उपलब्ध कराया जाता है। सरकार की ओर से ये सुविधा उन किसानों को दी जाती है जिनके पास किसान के्रडिट कार्ड बना होता है। अब सरकारी की नीती के तहत बैंकों में क्रेडिट कार्ड बनवाने की प्रक्रिया भी आसान कर दी है। अब किसान सिर्फ तीन डाक्यूमेंट देकर आसानी से बैंक में जाकर अपना किसान क्रेडिट कार्ड बनवा सकते हैं। बता दें कि मोदी सरकार ने मार्च 2021 तक देश में 15 लाख करोड़ रुपए का कृषि लोन बांटने का लक्ष्य रखा है। जबकि, इस समय देश के 58 फीसदी किसान कर्जदार हैं। कर्ज लेकर खेती करने वाले किसानों की सहूलियत के लिए किसान क्रेडिट कार्ड योजना को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से लिंक कर दिया गया है। इससे अब खेती-किसानी के लिए लोन लेना काफी आसान हो गया है।

 

सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1


क्या है किसान क्रेडिट कार्ड? / पीएम किसान क्रेडिट कार्ड ( kisan credit card yojana )

केंद्र सरकार की ओर से किसानों के कल्याण हेतु 1998 में किसान क्रेडिट कार्ड को शुरू किया गया। किसान कार्ड के जरिए किसानों को एक डेबिट कार्ड दिया जाता है, जिसकी मदद से वो अपनी जरूरत के मुताबिक अपने खाते से पैसे निकाल सकते हैं। इस कार्ड के जरिये वे अपनी खेती से जुड़ी चीजों जैसे-खाद, बीज, कीटनाशक इत्यादि की खरीदने के लिए बैंक से सस्ती दर पर लोन ले सकते हैं। किसान क्रेडिट कार्ड के तहत लिया जाने वाला ऋण 2-4 प्रतिशत तक सस्ता होता है, लेकिन किसान को इसका लाभ तभी मिलता है जब वह समय पर ऋण की अदायगी करता है। बता दें कि वर्तमान में देश के 6.92 करोड़ किसानों के पास किसान क्रेडिट कार्ड है।

 


केसीसी से लोन लेने पर क्या है ब्याज दर? / किसान क्रेडिट कार्ड लोन ( KCC )

किसान के्रडिट कार्ड पर लिए गए तीन लाख रुपए तक के लोन की ब्याज दर वैसे तो 9 फीसदी होती है लेकिन सरकार इसमें 2 फीसदी की सब्सिडी देती है। इस तरह यह 7 फीसदी पड़ता है, लेकिन समय पर लौटा देने पर सरकार किसानों को 3 फीसदी की छूट देती है। इस तरह किसानों को 4 फीसदी ब्याज का ही भुगतान करना पड़ता है।


क्रेडिट कार्ड बनवाने के लिए ये डाक्यूमेट है जरूरी

  • आवेदक किसान की पहचान के लिए आधार कार्ड की कॉपी
  • आवेदक किसान के पैन कार्ड की फोटो कॉपी
  • आवेदन करने वाले किसान का एफीडेविड लिया जाएगा जिसमें यह स्पष्ट हो कि उसका किसी बैंक में कर्ज तो बकाया नहीं है।

इन तीन डाक्यूमेंट के बाद बैंक की ओर से किसान का राजस्व रिकार्ड देखा जाएगा कि वह किसान है भी या नहीं, क्योंकि कई लोग सस्ती दर पर लोन पाने के लिए अपने को किसान बताकर बैंक से कर्जा ले लेते हैं जिससे पात्र किसान इस लाभ से वंचित रह जाते हैं। इसलिए जब बैंक आपके द्वारा दिए गए डाक्यूमेंट से संतुष्ट हो जाता है तब आपको क्रेडिट कार्ड बनाकर दिया जाएगा। बता दें कि सरकार ने बैंकिंग एसोसिएशन से केसीसी बनाने के काम में तेजी लाने को कहा है। सरकार की सलाह पर ही बैंकों ने इसकी प्रोसेसिंग फीस खत्म कर दी है। जबकि पहले केसीसी बनवाने के लिए 2 से 5 हजार रुपये तक का खर्च आता था।


किसान क्रेडिट कार्ड योजना 2020 : कौन-कौन बनवा सकता है केसीसी 

अब केसीसी सिर्फ खेती-किसानी तक सीमित नहीं है। सरकार ने इस पशुपालन और मछलीपालन करने वाले किसानों को भी इससे जोड़ दिया है। अब इसके तहत पशुपालन और मछलीपालन करने वालों को भी इस योजना अंतर्गत 2 लाख रुपए तक का लोन मिल सकेगा। अब खेती-किसानी, मछलीपालन और पशुपालन से जुड़ा कोई भी व्यक्ति, भले ही वो किसी और की जमीन पर खेती करता हो, इसका लाभ ले सकता है। केकेसी के लिए आवेदन करने वाले किसान की न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम 75 साल होनी चाहिए। किसान की उम्र 60 साल से अधिक है तो एक को-अप्लीकेंट भी लगेगा, जिसकी उम्र 60 से कम हो। इसके बाद बैंक देखेगा कि आवेदक लोन प्राप्त करने योज्य है या नहीं।


केसीसी के लिए कैसे करें आवेदन / किसान क्रेडिट कार्ड फॉर्म ( pm kisan credit card )

जो किसान केसीसी के लिए आवेदन करना चाहते हैं उन्हें इस स्टेप्स को फोलो करना होगा।

  • सबसे पहले किसान को किसान क्रेडिट कार्ड का फॉर्म डाउनलोड करने के लिए आधिकारिक https://pmkisan.gov.in/. या फिर www.argicoop.gov.in पर जाना होगा।
  • वेबसाइट में फॉर्मर टैब की दाईं तरफ डाउनलोड किसान के्रडिट फार्म का विकल्प हुआ है। इस पर क्लिक करके फार्म को डाउनलोड करें।
  • अब डाउनलोड किए गए फार्म में सारी जानकारी सही-सही भरने के बाद जरूरी दस्तावेजों के साथ जमा करना होगा। इस फॉर्म में आपको अपनी जमीन के दस्तावेज, फसल की डिटेल समेत कई जानकारी भरनी होगी। इसके अलावा आपको ये भी सत्यापित करना होगा कि आपने कोई दूसरा कार्ड न बनवा रखा हो।
  • इसके साथ ही आप किसी भी को-ऑपरेटिव बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक में जाकर भी अप्लाई कर सकते हैं। उसके बाद नजदीकी बैंक में जाकर जमा कर सकते हैं।


केसीसी से लोन लेने के क्या है फायदें

  • किसान क्रेडिट कार्ड से किसान खेती से जुड़ी जरूरत की चीजें खरीद सकता है और बाद में फसल बेचकर अपना लोन चुका सकता है।
  • इसमें 1.60 लाख रुपए तक का लोन लेने के लिए जमीन को बंधक रखने की जरूरत नहीं होती है। बिना किसी सिक्योरिटी के लोन मिल जाता है।
  • एसबीआई के मुताबिक, सभी केसीसी अकाउंट होल्डर को एटीएम कम डेबिट कार्ड फ्री में जारी किए जाते हैं। वहीं 3 लाख रुपए तक के लोन पर सालाना आधार पर 2 प्रतिशत तक ब्याज में राहत का प्रावधान है।
  • जल्दी लोन चुकाने पर सालाना ब्याज में 3 प्रतिशत तक की राहत मिल सकती है। किसान क्रेडिट कार्ड पर ब्याज दरें अलग-अलग बैंकों पर निर्भर करता है। आमतौर पर यह 9-11.50 प्रतिशत तक होता है।
  • खेतों में फसल को कीड़ों के हमले या किसी प्राकृतिक आपदा के चलते नुकसान होने पर फसल का बीमा कवर भी मिलता है। फिलहाल फसल बीमा कराना स्वैच्छिक कर दिया गया है।
  • किसान क्रेडिट कार्ड के साथ डेयरी से जुड़ा लोन भी उपलब्ध कराया जाता है।
  • किसान क्रेडिट कार्ड में हर साल रिन्यूअल के आधार पर 10 प्रतिशत बढ़ोतरी के साथ पांच साल तक का किसान क्रेडिट कार्ड बनाया जाता है।

 

 

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केंद्र सरकार बीपीसीएल में बेचेगी अपनी हिस्सेदारी

केंद्र सरकार बीपीसीएल में बेचेगी अपनी हिस्सेदारी

रसोई गैस पर सब्सिडी : जानिएं आपको मिलेगी या नहीं? केंद्र सरकार के एक निर्णय के बाद करोड़ों घरेलू गैस (एलपीजी) उपभोक्ताओं के सामने सब्सिडी मिलने या नहीं मिलने का प्रश्न खड़ा हो गया है। केंद्र सरकार भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) में अपनी हिस्सेदारी बेचने जा रही है। बीपीसीएल की हिस्सेदारी बेचने की सूचना के बाद एलपीजी (LPG) गैस के करोड़ों ग्राहक के सामने ये सवाल खड़ा हो गया है कि उनको मिलने वाली सब्सिडी का अब क्या होगा। उपभोक्ताओं को राहत देते हुए सरकार ने साफ कर दिया है कि भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड के निजीकरण के बाद भी रसोई गैस सब्सिडी का लाभ उपभोक्ताओं को मिलता रहेगा। केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने स्पष्टीकरण दिया है कि एलपीजी गैस सिलेंडर पर सब्सिडी का लाभ सीधे तौर पर उपभोक्ताओं को दिया जाता है, किसी कंपनी को नहीं। ऐसे में एलपीजी गैस बेचने वाली कंपनी का सब्सिडी पर किसी तरह का प्रभाव नहीं पड़ेगा। घरेलू गैस उपभोक्ताओं के सवालों का जवाब देते हुए केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने बताया है कि बीपीसीएल के निजीकरण के बाद भी उपभोक्ताओं को रसोई गैस सब्सिडी मिलती रहेगी। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार द्वारा तेल विपणन कंपनियों इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC), बीपीसीएल (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) के उपभोक्ताओं को सब्सिडी प्रदान की जाती है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 बीपीसीएल की 53 फीसदी हिस्सेदारी बेचेगी सरकार भारत सरकार की भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) में 53 फीसदी भागीदारी है, जो सरकार बेच रही है। इसके बाद कंपनी के नए मालिक को भारत की तेल शोधन क्षमता का 15.33 प्रतिशत और ईंधन बाजार का 22 प्रतिशत हिस्सा मिल जाएगा। देशभर में कुल 28.5 करोड़ एलपीजी उपभोक्ता हैं, जिनमें से लगभग 7.3 करोड़ उपभोक्ता बीपीसीएल एलपीजी गैस का इस्तेमाल करते हैं। जानिएं घरेलू गैस सिलेंडर पर कितनी मिलती है सब्सिडी उपभोक्ता तेल विपणन कंपनियों की एजेंसियों से सीधे घरेलू गैस वाले सिलेंडर बाजार भाव पर लेता है। इस बाजार मूल्य पर सरकार की ओर से सब्सिडी उपलब्ध कराई जाती है। आपको बता दें कि सरकार की ओर से एक साल में अधिकतम 12 रसोई गैस सिलेंडर पर सब्सिडी दी जाती है, जो कि 14.2 किलो गैस वाले होते हैं। यह सब्सिडी सीधे उपभोक्ताओं के बैंक खातों में भेजी जाती है। ये तेल कंपनियां उपभोक्ताओं को देती है सब्सिडी देश की तीन प्रमुख सरकारी तेल विपणन कंपनियों इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC), बीपीसीएल (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL) घरेलू रसोई गैस के उपभोक्ताओं को एलपीजी पर सब्सिडी देती है। इससे उपभोक्ताओं को कम दाम में घरेलू एलपीजी गैस सिलेंडर मिलते हैं। सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी का पैसा लोगों के खातों में भेज दिया जाता है। इस योजना को कोरोना काल में प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना से भी जोड़ा गया, ताकि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को मुफ्त में सिलेंडर मिल सके। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना : किसानों के खाते में आएंगे 2 हजार रुपए

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना : किसानों के खाते में आएंगे 2 हजार रुपए

प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में सातवीं किश्त देने की प्रक्रिया शुरू, ऐसे चेक करें अपना नाम प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से जुड़े किसानों के लिए खुशखबरी है। दिसंबर से किसानों के खाते में 2 हजार रुपए की किश्त डालने की प्रक्रिया शुरू होगी जो मार्च तक चलेगी। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों को हर साल मोदी सरकार 6,000 रुपये की आर्थिक सहायता देती है। ये पैसे किसानों को तीन किश्तों में दिए जाते हैं। हर किश्त में किसानों को 2000 रुपये मिलते हैं। अब तक मोदी सरकार किसानों को 6 किश्तों में पैसे दे चुकी है। इसकी अगली किस्त यानी सातवीं किस्त दिसंबर महीने से सरकार भेज सकती है। आपको बता दें कि इस योजना के माध्यम से केंद्र की मोदी सरकार ने पिछले 23 माह के दौरान करीब 10 करोड़ किसानों के खाते में राशि ट्रांसफर कर चुकी है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (PM Kisan Samman Nidhi Yojana) रजिस्ट्रेशन का लाभ क्यों नहीं मिलता कई बार किसानों के खाते में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की सहायता राशि नहीं आती है। सामान्यत: कई बार नाम रजिस्टर्ड कराने पर राशि नहीं आती हैं। नाम रजिस्ट्रेशन कराते समय कोई स्पेलिंग की गलती या आधार नंबर व बैंक अकाउंट नंबर में कोई गलती होने पर पैसे अटक जाते हैं। ऐसे में पीएमस सम्मान निधि के पैसे आप घर बैठे चेक कर सकते हैं। कृषि मंत्रालय के सूत्रों का कहना है कि 1.3 करोड़ किसानों को आवेदन करने के बाद भी इसलिए पैसा नहीं मिल सका है क्योंकि या तो उनके रिकॉर्ड में गड़बड़ी है या फिर आधार कार्ड नहीं है। स्पेलिंग में गड़बड़ी से भी पैसा रुक सकता है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM Kisan Samman Nidhi) की लिस्ट में ऐसे जांचें अपना नाम अगर आप प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लाभार्थियों की सूची में अपना नाम देखना चाहते हैं तो आप ऑनलाइन सरकारी वेबसाइट pmkisan.gov.in पर आप अपना नाम चेक कर सकते हैं। वेबसाइट खुलने के बाद मेन्यू बार देखें और यहां ‘फार्मर कार्नर’ पर जाएं। ‘लाभार्थी सूची’ के लिंक पर क्लिक करें। अब आपको आधार नंबर, एकाउंट नंबर और मोबाइल नंबर दर्ज करना होगा। अपना राज्य, जिला, उप-जिला, ब्लॉक और गांव विवरण दर्ज करें। इसके बाद आपको Get Report पर क्लिक करना होगा, जिसके बाद आपको जानकारी मिल जाएगी। अगर किसी लाभार्थी का नाम स्टेट/ केंद्र शासित गवर्नमेंट द्वारा पीएम किसान के पोर्टल पर अपलोड किया गया है। लेकिन किसी वजह से उसे 2000 रुपये की किश्त नहीं मिलती है तो उस कारण के समाधान के बाद उसकी बकाया राशि उसके खाते में भेजी जाएगी। लेकिन अगर किसी वजह से किसान का नाम सरकार द्वारा अस्वीकृत किया जाता है तो वह इसका पात्र नहीं होगा। किस्त आने में देरी की वजह कई हो सकती हैं, जैसे कि रजिस्ट्रेशन में गलत नाम, पता या बैंक अकाउंट की जानकारी देना। इसे सुधारने के बाद जो किस्त उसे नहीं मिली है, वह भी अगली किस्त के साथ खाते में भेज दी जाएगी। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना में किश्त प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की शुरुआत एक जनवरी 2018 को हुई थी। किसान सम्मान योजना में केंद्र सरकार तीन किश्तों में यह पैसा ट्रांसफर करती है। पहली किश्त 1 दिसंबर से 31 मार्च के बीच आती है, जबकि दूसरी किश्त 1 अप्रैल से 31 जुलाई और तीसरी किश्त 1 अगस्त से 30 नवंबर के बीच में किसानों के खाते में ट्रांसफर कर दी जाती है। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना हेल्पलाइन नंबर (PM Kisan Samman Nidhi scheme) प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना मोदी सरकार की किसानों के लिए सबसे बड़ी किसान स्कीम है इसलिए किसानों को कई तरह की सहूलियतें भी दी गईं हैं। इसी में एक है हेल्पलाइन नंबर। जिसके जरिए देश के किसी भी हिस्से का किसान सीधे कृषि मंत्रालय से संपर्क कर सकता है। पीएम किसान टोल फ्री नंबर: 18001155266 पीएम किसान हेल्पलाइन नंबर:155261 पीएम किसान लैंडलाइन नंबर्स: 011—23381092, 23382401 पीएम किसान की नई हेल्पलाइन: 011-24300606 पीएम किसान की एक और हेल्पलाइन है: 0120-6025109 ई-मेल आईडी: [email protected] किसान सम्मान निधि योजना रजिस्ट्रेशन / किसान सम्मान निधि योजना पंजीकरण अगर आपने अभी तक पीएम किसान सम्मान निधि पाने के लिए रजिस्ट्रेशन नहीं किया तो ऐसे आप रजिस्ट्रेशन कराकर फायदा उठा सकते हैं। सबसे पहले आपको इस स्कीम से जुड़ी आधिकारिक साइट pmkisan.gov.in पर जाना होगा. जिसमें Farmer Corners का ऑप्शन दिखाई देगा। उस पर New Farmer Registration कॉलम में क्लिक करें। उसके बाद आपके सामने एक नई विंडो खुलेगी, जिसमें आपको आधार कार्ड का विवरण भरना है। फिर क्लिक हियर टू कॉनिटन्यू पर क्लिक करना पड़ेगा। इसके बाद आपके सामने एक अन्य पेज खुलेगा जिसमें अगर आप पहले रजिस्ट्रेशन करा चुके हो तो आपकी डिटेल्स आ जाएगी और अगर रजिस्ट्रेशन पहली बार कर रहे हैं तो लिखा आएगा कि RECORD NOT FOUND WITH GIVEN DETAILS, DO YOU WANT TO REGISTER ON PM-KISAN PORTAL इस पर आपको YES करना होगा। इसके बाद फॉर्म दिखेगा जिसे भरना होगा। इसमें सही-सही जानकारी भरने के बाद सेव कर दें। इसके बाद आपके सामने एक नया पेज खुलेगा जिसमे आपसे आपकी जमीन की डिटेल मांगी जाएगीञ खासतौर पर खसरा नंबर और खाता नंबर। इसे भरकर सेव कर दें। सेव करते ही रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया पूरी हो जाएगी। आपको एक रजिस्ट्रेशन नंबर और रिफरेंस नंबर मिलेगा जिसे अपने पास संभाल लें। इसके बाद पैसा आना शुरू हो जाएगा। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर 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राजीव गांधी किसान न्याय योजना : सीधे बैंक खातें में मिलेगी सहायता राशि

राजीव गांधी किसान न्याय योजना : सीधे बैंक खातें में मिलेगी सहायता राशि

जानें, कैसे कराएं राजीव गांधी किसान न्याय योजना में पंजीकरण और क्या देने होंगे दस्तावेज प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत किसानों के खातों में सीधे सहायता प्रदान की जाती है। इसी योजना की तर्ज पर अब कई राज्यों ने किसानों को आवश्यक आदान खरीदने के लिए सहायता उपलब्ध कराने के उद्देश्य से योजना की शुरुआत कर दी है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से किसानों के लिए राजीव गांधी किसान न्याय योजना शुरू की गई है। इसके तहत धान, मक्का, सोयाबीन, मूंगफली, तिल, अरहर, मूंग, उड़द, रामतिल, कोदो, कुटकी तथा रबी में गन्ना के तहत किसानों को सीधे सहायता राशि दी जाती है। कृषि विभाग छत्तीसगढ़ शासन द्वारा राजीव गांधी किसान न्याय योजना के क्रियान्वयन हेतु खरीफ-2020 में योजना अंतर्गत सम्मिलित फसल एवं पेराई वर्ष 2020-21 के गन्ना फसल हेतु कृषकों के पंजीयन एवं पात्रता निर्धारण के संबंध में दिशा निर्देश जारी किए गए हैं। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 क्या है राजीव गांधी किसान न्याय योजना (Rajiv Gandhi Kisan Nyay Yojana) छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में फसल उत्पादन को प्रोत्साहित करने और किसानों को उनकी उपज का सही दाम दिलाने के लिए ‘राजीव गांधी किसान न्याय योजना’ शुरू की है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रायपुर में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि यानि 21 मई 2020 को पर इस योजना को लॉन्च किया। राजीव गांधी किसान न्याय योजना के तहत राज्य के 19 लाख किसानों को 5700 करोड़ रुपए की राशि चार किस्तों में सीधे उनके खातों में ट्रांसफर की जानी है। राज्य सरकार इस योजना के तहत खरीफ 2019 से धान व मक्का लगाने वाले किसानों को सहकारी समिति के माध्यम से उपार्जित मात्रा के आधार पर अधिकतम 10 हजार रुपये प्रति एकड़ की दर से सहायता राशि देगी। अब तक 18.34 लाख से ज्यादा किसानों को किया 4500 करोड़ का भुगतान राजीव गांधी किसान न्याय योजना Online Payment : अब तक इस योजना में किसानों को तीन किस्तों का भुगतान किया जा चुका है। चौथी किस्त आना अभी बाकी है। पहली किस्त का भुगतान 21 मई 2020 को पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर किया गया जिसके तहत 18.34 लाख से ज्यादा धान किसानों को 1500 करोड़ की पहली किस्त उनके खाते में हस्तांतरित की गई। दूसरी किस्त का भुगतान पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के जन्मदिन 20 अगस्त 2020 को किया गया जिसमें किसानों को 1500 करोड़ की सहायता राशि दी गई। इसी तरह तीसरी किस्त का भुगतान छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस 1 नवंबर को किया गया जिसमें 1500 करोड़ रुपए की सहायता राशि किसानो को प्रदान की गई। चौथी किस्त आना अभी है बाकी जिसके लिए किसानों के पंजीकरण का कार्य किया जा रहा है। राजीव गांधी योजना के तहत धान व मक्का फसल के लिए पंजीकरण की ये हैं व्यवस्था खरीफ वर्ष 2020-21 में धान एवं मक्का फसल का समर्थन मूल्य पर उपार्जन के लिए खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण विभाग द्वारा किसानों का पंजीयन किया गया है। खाद्य विभाग द्वारा पंजीकृत किसानों के डाटा को राजीव गांधी किसान न्याय योजना हेतु मान्य किया जाएगा तथा उपार्जित मात्रा के आधार पर अनुपातिक रकबा ज्ञात कर आदान सहायता राशि की गणना की जाएगी। राजीव गांधी किसान न्याय योजना Registration / गन्ना किसान कैसे कराएं इस योजना में पंजीकरण वह किसान जो गन्ना पेराई वर्ष 2020-21 हेतु सहकारी शक्कर कारखाना में पंजीकृत रकबा को योजना अंतर्गत सहायता अनुदान राशि की गणना हेतु मान्य किया जाएगा। अन्य फसल लगाने वाले किसानों को कृषि साख सहकारी समिति में कराना होगा पंजीयन धान, मक्का एवं गन्ना के अलावा अन्य फसल लगाने वाले किसानों को संबंधित प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति में अनिवार्य रूप से पंजीयन कराना होगा। क्षेत्र ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी द्वारा किसानों के आवेदन पत्र का सत्यापन भुईया पोर्टल में प्रदर्शित संबंधित मौसम की गिरदावरी के आंकड़ों के आधार पर किया जाएगा। सत्यापन उपरांत किसान को संबंधित सहकारी समिति में पंजीयन कराना होगा। छत्तीसगढ़ राजीव गांधी किसान न्याय योजना : पंजीकरण के लिए आवश्यक दस्तावेज किसान को पूर्ण रूप से भरे हुए प्रपत्र के साथ आवश्यक अभिलेख जैसे ऋण पुस्तिका, आधार नंबर, बैंक पासबुक की छायाप्रति, संबंधित प्राथमिक सहकारी समिति में जमा कर निर्धारित समय-सीमा 30 नवंबर 2020 तक पंजीयन कराना होगा। योजना अंतर्गत सम्मिलित अन्य फसलों के लिए राजस्व विभाग द्वारा किसानवार फसलवार शत-प्रतिशत (क्षेत्रच्छादन) का गिरदावरी करते हुए भुईया पोर्टल में इंद्राज किया जा रहा है। योजना अंतर्गत धान, मक्का एवं गन्ना उत्पादक किसानों को छोडक़र शेष फसलों यथा सोयाबीन, मूंगफली, तिल, अरहर, मूंग उड़द, कुलथी, रामतिल, कोदो, कुटकी एवं रागी फसल हेतु आदान सहायता राशि की गणना संबंधित फसलों की गिरदावरी के अनुसार भुइयां पोर्टल में संधारित रकबा के आधार पर आनुपातिक रूप से की जाएगी। राजीव गांधी न्याय योजना के उद्देश्य फसल क्षेत्राच्छादन उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि कराना। फसल के काश्त लागत की क्षतिपूर्ति कर किसानों के शुद्ध आय में वृद्धि करना। किसानों को कृषि में अधिक निवेश हेतु प्रोत्साहन देना। कृषि को लाभ के व्यवसाय के रूप में पुर्नस्थापित करन के लिए जीडीपी में कृषि क्षेत्र की सहभागिता में वृद्धि करना। योजनांतर्गत सम्मिलित फसल एवं पात्रता व नियम योजनांतर्गत खरीफ सीजन के धान, मक्का, सोयाबीन, मूंगफली, तिल, अरहर, मंूग, उड़द, कुल्थी, रामतिल, कोदो, कुटकी एवं रागी तथा रबी में गन्ना फसल को सम्मिलित किया गया है। किसान द्वारा पंजीकृत/ वास्तविक बोए गए रकबा के आधार पर निर्धारित राशि प्रति एकड़ की दर से आनुपातिक रूप से उनके बैंक खातें में प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण डीबीटी के माध्यम से सहायता राशि अंतरित किया जाएगा। अनुदानग्रहिता किसान यदि पिछले वर्ष धान की फसल लगाया था एवं इस वर्ष धान के स्थान पर योजनांतर्गत शामिल अन्य फसल लगाता है, तो उस स्थिति में किसान को अतिरिक्त सहायता अनुदान प्रदान किया जाएगा। किसानों द्वारा उपभोक्ता फसलों के बोए गए रकबा के आधार पर लाभ प्राप्त करने हेतु घोषणा पत्र के साथ विभागीय पोर्टल पर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। योजनांतर्गत निर्दिष्ट फसल लगाने वाले संस्थागत भू-स्वामी किसान इस योजना हेतु पात्र नहीं होंगे। फसल अवशेष को जलाने वाले किसान योजनांतर्गत संबंधित मौसम में लाभ प्राप्त करने हेतु पात्र नहीं होंगे। घोषणा पत्र में गलत जानकारी देने वाले किसानों के विरूद्ध वैधानिक कार्यवाही अथवा प्रदत्त अनुदान राशि की वसूली भू-राजस्व संहिता के प्रचलित प्रावधान अनुसार की जाएगी। आदान सहायता राशि का निर्धारण मंत्री-मंडलीय समिति द्वारा प्रतिवर्ष प्रत्येक फसल हेतु किया जाएगा। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर 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सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाओं से किसानों को तोहफा

सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाओं से किसानों को तोहफा

सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाओं के लिए 3,971 करोड़ के सस्ते लोन मंजूर केंद्र सरकार की ओर से कृषि क्षेत्र में काफी योजनाओं को मंजूरी दी जा रही है। उनमें से हाल ही में केंद्रीय कृषि मंत्रालय की ओर से सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाओं को लागू करने के लिए 3,971.31 करोड़ रुपए के ऋण को मंजूरी दी गई है। इससे तमिलनाडु, हरियाणा, गुजरात, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल, पंजाब व उत्तराखंड राज्य के किसानों को फायदा होगा। मीडिया को दी जानकारी में केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने कहा कि उसने सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाओं को लागू करने के लिए 3,971.31 करोड़ रुपए के ऋण को मंजूरी दी है, जिसके लिए सब्सिडी दी जाएगी। सबसे अधिक ऋण तमिलनाडु के लिए मंजूर किया गया है। सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाओं को लागू करने के लिए राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के तहत बनाए गए सूक्ष्म सिंचाई कोष (एमआईएफ) के तहत ब्याज छूट के साथ कर्ज दिया जा रहा है। वर्ष 2019-20 में चालू किए गए इस फंड की कुल राशि 5,000 करोड़ रुपए है। मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि एमआईएफ की संचालन समिति ने 3,971.31 करोड़ रुपए के ऋण के लिए परियोजनाओं को मंजूरी दी है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 सूक्ष्म सिंचाई परियोजना : किस राज्य के लिए कितनी राशि मंजूर इसमें तमिलनाडु के लिए सबसे अधिक 1,357.93 करोड़ रुपए का ऋण मंजूर किया गया है, जिसके बाद हरियाणा के लिए 790.94 करोड़ रुपए, गुजरात के लिए 764.13 करोड़ रुपए, आंध्र प्रदेश के लिए 616.13 करोड़ रुपए, पश्चिम बंगाल के लिए 276.55 करोड़ रुपए, पंजाब के लिए 150 करोड़ रुपए और उत्तराखंड के लिए 15.63 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं। हालांकि, नाबार्ड ने अभी तक राज्यों को कुल 1,754.60 करोड़ रुपए की ऋण राशि जारी की है। इसमें से लगभग 659.70 करोड़ रुपए हरियाणा, तमिलनाडु और गुजरात को दिए गए हैं। राजस्थान में परियोजना सुरक्षा राशि जमा कराने की अंतिम तिथि अब 7 दिसंबर तक बढ़ाई प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (कुसुम योजना (कंपोनेंट-ए) में किसानों की बंजर/अनुपयोगी भूमि पर राजस्थान विद्युत वितरण निगमों के 33 तथा 11 के.वी. के सब स्टेशन सेे 5 किलो मीटर के अंदर 500 किलोवॉट से 2 मेगावॉट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्रों की स्थापना के लिए परियोजना सुरक्षा राशि जमा करा कर विद्युत क्रय अनुबन्ध करने की अंतिम तिथि 7 दिसंबर 2020 कर दी गई है। पहले इसकी अंतिम तिथि 10 नवंबर थी। राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक डॉ. सुबोध अग्रवाल ने बताया कि कुसुम योजना -कंपोनेंट-ए के अंतर्गत प्रदेश में सौर ऊर्जा से विद्युत उत्पादन के लिए कुल 722 मेगावॉट क्षमता के लिए 623 सौर ऊर्जा उत्पादकों को आंवटन पत्र जारी किए गए थे, जिनमें से अब तक 168 मेगावॉट क्षमता के लिए 162 सौर ऊर्जा उत्पादकों द्वारा विद्युत क्रय अनुबन्ध हेतु अपने आवेदन प्रस्तुत किए जा चुके हैं। सूक्ष्म सिंचाई योजना : मध्यप्रदेश में घरेलू संयोजनों पर सोलर रूफटाप लगाने के लिए रेट तय किए इधर मध्यप्रदेश राज्य की मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने घरेलू संयोजनों पर सोलर रूफटाप लगाने के लिये निविदा के माध्यम से रेट तय कर ठेकेदारों (एजेंसियों) को कार्य आवंटित कर दिया है। तय रेट विगत वर्षों से काफी कम हैं जो कि तीन कि.वा. तक रेट 37000/- प्रति कि.वा. तथा 3 से 10 कि.वा. तक रेट 39,800/- प्रति कि.वा. है। इसमें 3 कि.वा. तक 40 प्रतिशत तथा 3 कि.वा. से अधिक शेष भार पर 20 प्रतिशत सब्सिडी शामिल है। रेट, सब्सिडी, अधिकृत एजेंसी व तकनीकी विवरण की विस्तृत जानकारी मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी की वेबसाइट portal.mpcz.in या निकटतम बिजली कार्यालय से प्राप्त की जा सकती है। घर पर सोलर प्लांट लगाने पर कितना आएगा खर्चा / सोलर प्लांट • एक कि.वा. से ऊपर – 3 कि.वा. तक – रुपए 37000/- प्रति कि.वा. • 3 कि.वा. से ऊपर -10 कि.वा. तक- रुपए 39800/- प्रति कि.वा. • 10 कि.वा. से ऊपर -100 कि.वा. तक – रुपए 36500/- प्रति कि.वा. • 100 कि.वा. से ऊपर -500 कि.वा. तक – रुपए 34900/- प्रति किवा. वेबसाईट / टोल फ्री नंबर मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी ने कहा है कि उक्त राशि में सब्सिडी शामिल है, सब्सिडी घटाकर एजेन्सी को भुगतान की जाने वाली राशि 3 कि.वा. हेतु 66600 रुपए और 5 कि.वा. पर 135320 रुपए है। कंपनी ने स्पष्ट किया है कि कंपनी द्वारा दिए तकनीकी विवरण के कार्य के लिए उक्त राशि से अधिक भुगतान नहीं करें। गु्रप हाउसिंग सोसायटी को कॉमन सुविधा वाले संयोजन पर 500 कि.वा. तक (10 कि.वा. प्रति घर) 20 प्रतिशत की सब्सिडी मिलेगी। कंपनी द्वारा अधिकृत एजेंसी, तकनीकी विवरण, सब्सिडी व भुगतान की जाने वाली राशि की जानकारी के लिए विद्युत वितरण कंपनी के निकटतम कार्यालय, कंपनी की वेबसाईट portal.mpcz.in पर देखें या टोल फ्री नंबर 1912 पर संपर्क किया जा सकता है। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

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