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गोधन न्याय योजना : वर्मी कम्पोस्ट खाद से किसानों को होगी अतिरिक्त आमदनी

गोधन न्याय योजना : वर्मी कम्पोस्ट खाद से किसानों को होगी अतिरिक्त आमदनी

29 June, 2020

 वर्मी कम्पोस्ट  ( Vermi compost ) खाद से जैविक खेती को मिलेगा बढ़ाव

किसानों की आमदनी बढ़ाने को लेकर केंद्र व राज्य सरकार अपने-अपने स्तर पर कई योजनाएं चला रही है जिसका किसानों को फायदा भी हो रहा है। कृषि की तरफ सरकार का ज्यादा फोकस होने से खेती-किसानी व पशुपालन को बढ़ावा मिल रहा है। इसके सकात्मक परिणाम भी देखने को मिल रहे हैं। इन योजनाओं का लाभ मिलने से किसानों की फसलों का उत्पादन तो बढ़ा ही है साथ ही किसानों की आमदनी में भी इजाफा हुआ है। इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ सरकार ने एक योजना चलाई है जो अन्य राज्य सरकारों की योजनाओं से कुछ हटकर है। इसमें छत्तीसगढ़ सरकार पशुपालक किसान से गाय-भैंस का गोबर खरीदेगी। इस अनूठी योजना की शुरुआत गोधन न्याय योजना के तहत 21 जुलाई को हरेली त्योहार के दिन से की जाएगी। गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य होगा जो पशुपालकों से गोबर की खरीद करेगा। इससे एक ओर सडक़ पर घूम रहे आवारा पशुओं को रोकने में मदद मिलेगी। वहीं गोबर से वर्मी कम्पोस्ट खाद बनाई जाएगी जिसका उपयोग जैविक खेती को बढ़ावा देने में किया जाएगा। 

 

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मीडिया व समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरों के हवाले से छत्तीसगढ़ राज्य के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में गोबर खरीद योजना की जानकारी देते हुए बताया कि गोबर प्रबंधन की दिशा में प्रयास करने वाली ये देश की पहली सरकार है जो पशुपालकों से गोबर की खरीद करेगी जिसका उपयोग वर्मी कम्पोस्ट बनाने में किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में सरकार गोमूत्र खरीदने पर भी विचार कर सकती है। इससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोण से बेहतर परिणाम होंगे। मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि सरकार चाहती है कि प्रदेश जैविक खेती की तरफ आगे बढ़े। फसलों की गुणवत्ता में सुधार हो जिससे किसान की आमदनी बढ़े।

 

 

कब और किस दर से खरीदा जाएगा गोबर 

राज्य के मुख्यमंत्री बघेल के अनुसार राज्य में हरेली पर्व पर यानि 21 जुलाई से पशुपालकों एवं किसानों से गोबर निर्धारित दर पर क्रय किए जाने की शुरुआत की जाएगी। गोधन न्याय योजना के तहत पशुपालकों से गोबर क्रय करने के लिए दर निर्धारित की जाएगी। दर के निर्धारण के लिए कृषि एवं जल संसाधन मंत्री श्री रविन्द्र चौबे की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय मंत्री मंडलीय उप समिति गठित की गई है। यह मंत्री मंडलीय समिति राज्य में किसानों, पशुपालकों, गौशाला संचालकों एवं बुद्धिजीवियों के सुझावों के अनुसार आठ दिन में गोबर क्रय का दर निर्धारित करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि गोबर खरीदी से लेकर उसके वित्तीय प्रबंधन एवं वर्मी कम्पोस्ट के उत्पादन से लेकर उसके विक्रय तक कि प्रक्रिया के निर्धारण के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में प्रमुख सचिवों एवं सचिवों की एक कमेटी गठित की गई है।

 

गौठानों में की जाएगी गोबर की खरीद

छत्तीसगढ़ में सरकार द्वारा गावों में पशुधन के संरक्षण ओर संवर्धन के लिए गौठानों का निर्माण किया गया है। इनमें से राज्य के 2200 गावों में गौठानों का निर्माण हो चुका है और 2800 गावों में गौठानों का निर्माण अभी और किया जा रहा है। आनेवाले दो-तीन महीने में लगभग 5 हजार गावों में गौठान बन जाएंगे। इन गठानों को आजीविका केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इन गौठानों में गोबर खरीद से लेकर वर्मी कम्पोस्ट का निर्माण कार्य किया जाएगा। इसके  अलावा इस योजना के तहत महिला स्व-सहायता समूहों को बढ़ावा दिया जाएगा।

 

क्या है वर्मी कम्पोस्ट ( Vermicompost )

केंचुआ खाद या वर्मीकम्पोस्ट पोषण पदार्थों से भरपूर एक उत्तम जैव उर्वरक है। यह केंचुआ आदि कीड़ों के द्वारा वनस्पतियों एवं भोजन के कचरे, गोबर आदि को विघटित करके बनाई जाती है। वर्मी कम्पोस्ट में बदबू नहीं होती है और मक्खी एवं मच्छर नहीं बढ़ते है तथा वातावरण प्रदूषित नहीं होता है। तापमान नियंत्रित रहने से जीवाणु क्रियाशील तथा सक्रिय रहते हैं। वर्मी कम्पोस्ट डेढ़ से दो माह के अंदर तैयार हो जाता है। इसमें 2.5 से 3 प्रतिशत नाइट्रोजन, 1.5 से 2 प्रतिशत सल्फर तथा 1.5 से 2 प्रतिशत पोटाश पाया जाता है। इस खाद को तैयार करने में प्रक्रिया स्थापित हो जाने के बाद एक से डेढ़ माह का समय लगता है। प्रत्येक माह एक टन खाद प्राप्त करने हेतु 100 वर्गफुट आकार की नर्सरी बेड पर्याप्त होती है। केचुंआ खाद की केवल 2 टन मात्रा प्रति हैक्टेयर आवश्यक है।

 

तीन विधियों से बनाई जा सकती है वर्मी कम्पोस्ट / वर्मी कंपोस्ट कैसे बनाएं

वर्मी कम्पोस्ट खाद को तीन विधियों से बनाया जा सकती है। इसे बनाने में खर्चा बहुत ही कम आता है लेकिन इसकी उपयोगिता अधिक होती है। इसके उपयोग से फसलों व भूमि को पोषण मिलने के साथ ही उत्पादन में बढ़ोतरी होती है। 

पेड़ विधि : इस विधि के अंतर्गत पेड़ के चारों ओर गोबर गोलाई में डाला जाता है। हर रोज गोबर को डालकर धीरे-धीरे इस गोल चक्र को पूरा किया जाता है। पहली बार प्रक्रिया शुरू करते समय गोबर के ढेर में थोड़े से केंचुए डाल कर गोबर को जूट के बोरे से ढक दिया जाता है। नमी के लिए बोर के ऊपर समय-समय पर पानी का छिडक़ाव किया जाता है। केंचुए डाले गए गोबर को खाते हुए धीरे-धीरे आगे बढ़ते जाते हैं और अपने पीछे वर्मी कम्पोस्ट बना कर छोड़ते जाते हैं। इस तैयार वर्मी कम्पोस्ट को इकट्ठा करके बोरों में भरकर रख लिया जाता है। 

 

 

बेड विधि : बेड विधि से खाद तैयार करने के लिए छायादार जगह पर जमीन के ऊपर 2-3 फुट की चौड़ाई और अपनी आवश्यकता के अनुरूप लंबाई के बेड बनाए जाते हैं। इन बेड़ों का निर्माण गाय-भैंस के गोबर, जानवरों के नीचे बिछाए गए घासफूस-खरपतवार के अवशेष आदि से किया जाता है। ढेर की ऊंचाई लगभग लगभग 01 फुट तक रखी जाती है। बेड के ऊपर पुवाल और घास डालकर ढक दिया जाता है। एक बेड का निर्माण हो जाने पर उसके बगल में दूसरे उसके बाद तीसरे बेड बनाते हुए जरूरत के अनुसार कई बेड बनाए जा सकते हैं। शुरुआत में पहले बेड में केंचुए डालने होते हैं जोकि उस बेड में उपस्थित गोबर और जैव-भार को खाद में परिवर्तित कर देते हैं। एक बेड का खाद बन जाने के बाद केंचुए स्वत: ही दूसरे बेड में पहुंच जाते हैं। इसके बाद पहले बेड से वर्मी कम्पोस्ट अलग करके छानकर भंडारित कर लिया जाता है तथा पुन: इस पर गोबर आदि का ढेर लगाकर बेड बना लेते हैं। 

टटिया विधि :  इस विधि में प्लास्टिक की बोरी या तिरपाल से बांस के माध्यम से टटिया बनाकर वर्मी कम्पोस्ट का निर्माण किया जाता है। इस विधि में प्लास्टिक की बोरियों को खोलकर कई को मिलाकर सिलाई की जाती है। फिर बांस या लट्ठे के सहारे चारों ओर से सहारा देकर गोलाई में रख कर उसमें गोबर डाल दिया जाता है। गोबर में केंचुए डालकर टटिया विधि से वर्मी कम्पोस्ट का निर्माण किया जाता है। जिसमें लागत न के बराबर आती है।

 

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समग्र गव्य विकास योजना : डेयरी उद्योग के लिए 75 प्रतिशत तक सब्सिडी

समग्र गव्य विकास योजना : डेयरी उद्योग के लिए 75 प्रतिशत तक सब्सिडी

दूध के लिए गाय-भैंस पालो, 75 प्रतिशत पैसा सरकार देगी अगर आप लोगों को शुद्ध दूध उपलब्ध कराने के साथ-साथ अच्छी आमदनी कमाना चाहते हैं तो डेयरी उद्योग में आपके लिए अपार संभावनाएं हैं। डेयरी उद्योग से देश के किसानों, युवाओं व बेरोजगारों के जीवन को संवारने के लिए केंद्र व विभिन्न राज्य सरकारें अपने-अपने स्तर पर कई योजनाएं संचालित कर रहे हैं, जिनका फायदा आप उठा सकते हैं। ट्रैक्टर जंक्शन की इस पोस्ट में आपको समग्र गव्य विकास योजना के बादे में जानकारी दी जा रही है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 सरकार दस दुधारू पशुओं के लिए देगी 8.96 लाख रुपए, आवेदन की अंतिम तिथि 25 अक्टूबर इस योजना के तहत सरकार दस दुधारू पशुओं की डेयरी खोलने के लिए 8 लाख 96 हजार रुपए की सहायता उपलब्ध करा रही है। इस योजना में 75 फीसदी तक सब्सिडी भी मिल रही है। बिहार सरकार की समग्र गव्य विकास योजना इन दिनों बहुत लोकप्रिय हो रही है। समग्र गव्य विकास योजना बिहार 2020-21 में आवेदन कोरोना काल में कृषि सेक्टर को छोडक़र सभी सेक्टरों में मंदी का आलम रहा। देश के नीति विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि और उससे जुड़े क्षेत्र ही बहुत बड़े स्तर पर रोजगार के अवसर उत्पन्न कर सकते हैं। अगर आधुनिक तरीके से पशुपालन किया जाए तो अच्छी खासी आमदनी प्राप्त की जा सकती है। केंद्र व राज्य सरकार समय-समय पर विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सब्सिडी उपलब्ध कराती है। बिहार सरकार की ओर से युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से डेयरी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए समग्र ग्रव्य विकास योजना के तहत 50 से 75 फीसदी तक की सब्सिडी उपलब्ध कराई जा रही है। इसके लिए आवेदन 25 अक्टूबर तक स्वीकार किए जाएंगे। इस योजना में 2, 4, 6 और 10 दुधारू पशुओं के लिए अलग-अलग श्रेमियों में सब्सिडी उपलब्ध कराई जा रही है। बिहार में इस योजना का संचालन पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग की ओर से किया जा रहा है। समग्र गव्य विकास योजना की पात्रता इस योजना का लाभ सभी वर्गों के भूमिहीन, किसानों, लघु किसानों, सीमांत सिकानों, गरीबी रेखा से नीचे आने वाले किसानों, शिक्षित बेरोजगार युवक-युवतियों को मिलेगा। समग्र गव्य विकास योजना का क्रियान्वयन बिहार राज्य के सभी जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में ही किया जाएगा। जिल गव्य विकास पदाधिकारी / संबंद्ध जिला के जिला गव्य अधिकारी नोडल अधिकारी बनाए गए हैं। जो भी व्यक्ति इस योजना का लाभ उठाना चाहते हैं वो अपना आवेदन जिला गव्य विकास कार्यालय/संबंधित जिला के जिला पशुपालन कार्यालय (गव्य प्रकोष्ठ) में जमा करा सकते हैं। समग्र गव्य विकास योजना में सब्सिडी इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में सभी वर्गो के भूमिहीन किसानों, दुग्ध उत्पादकों व शिक्षित बेरोजगारों को स्वरोजगार के अवसर सृजित कर उन्हें विकास की मुख्यधारा में शामिल करना है। ताकि वे इस ऋण की राशि से अपनी डेयरी इकाई खड़ी कर सके और दूध उत्पादन में बढ़ोत्तरी कर सके। समग्र गव्य विकास योजना के तहत गाय पालन पर सामान्य किसानों को 50 प्रतिशत तथा आरक्षित वर्ग के किसानों को 75 प्रतिशत तक सब्सिडी का प्रावधान है। दो दुधारू मवेशी की योजना की लागत 1 लाख 60 हजार, 4 दुधारू मवेशी के लिए 3 लाख 38 हजार 400, 6 दुधारू मवेशी के लिए 5 लाख 32 हजार 600 और 10 दुधारू मवेशी के लिए 8 लाख 96 हजार रुपये निर्धारित है। इसी राशि पर संबंधित जाति के श्रेणी के आधार पर 50 और 75 प्रतिशत तक सब्सिडी देने की योजना है। यह पिछले कई सालों से यह योजना चल रही है। बिहार में फिलहाल कोरोना संकट के कारण इस साल योजना देर से शुरू की गई है। आवेदनों पर ‘पहले आओ पहले पाओ’ के तर्ज पर विचार किया जाएगा। समग्र गव्य विकास योजना में आवेदन के लिए जरुरी दस्तावेज आवेदन पत्र की दो मूल प्रति आधार कार्ड / फोटो पहचान पत्र / आवासीय प्रमाण पत्र की स्वहस्ताक्षरित दो छाया प्रति। जमीन संबंधी रसीद की छाया प्रति। परियोजना प्रतिवेदन की प्रति। बैंक का डिफॉल्टर नहीं होने के संबंध में शपथ पत्र। स्वलागत योजना हेतु बैंक/ डाकघर में पूर्ण राशि उपलब्धता के संबंध में पासबुक की छाया प्रति । शराब बंदी से प्रभावित होने के संबंध में प्रमाण, डेयरी से संबंधित प्रशिक्षण प्राप्त करने, दुग्ध समिति की सदस्यता का प्रमाण पत्र की छाया प्रति। समग्र गव्य विकास योजना में चयन प्रकिया इस योजना में पात्र लोगों के चयन में बहुत सतर्कता बरती जाती है। जिला गव्य विकास पदाधिकारी के पास जमा हुए आवेदन पत्रों की स्क्रीनिंग होती है। स्क्रीनिंग जिला अग्रणी बैंक पदाधिकारी के अध्यक्षता में गठित स्क्रीनिंग समिति द्वारा किया जाता है। इस समिति में जिला गव्य विकास पदाधिकारी, सदस्य सचिव शामिल होते हैं। इसके अलावा जिला पशुपालन पदाधिकारी, उद्योग विभाग के जिला स्तरीय पदाधिकारी एवं संबंधितजिला परिषद् के प्रतिनिधि सदस्य के रूप में शामिल होते हैं। स्क्रीनिंग समिति की बैठक आवेदन पत्रों की प्राप्तियों की अंतिम तिथि के उपरांत आयोजित की जाएगी, जिसमें प्राप्त आवेदनों की समीक्षा/जांच आवेदक की उपस्थिति में किया जायेगा। आवेदक के साक्षात्कार के पश्चात ऋण स्वीकृति के संबंध में गठित समिति द्वारा निर्णय लिया जायेगा एवं योग्य ऋण आवेदन पत्रों को अनुशंसा के साथ संबंधित बैंक को ऋण स्वीकृति के लिए भेज दिया जाएगा। ऋण स्वीकृत करने वाले संबंधित बैंक का यह दायित्व है कि अनुशंसित आवेदनों पर एक माह के अंदर निर्णय लेते हुए आवेदक एवं संबंधित जिला के अग्रणी बैंक, जिला गव्य विकास कार्यालय एवं जिला परिषद् को सूची के साथ सूचना उपलब्ध कराएं। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और 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पीएम किसान सम्मान निधि योजना : अब फर्जी तरीके से लाभ लेना पड़ सकता है भारी

पीएम किसान सम्मान निधि योजना : अब फर्जी तरीके से लाभ लेना पड़ सकता है भारी

पात्रता सूची से नाम हटाने के साथ ही होगी पाई-पाई की वसूली पीएम सम्मान निधि योजना को लेकर तमिलनाडू, यूपी और राजस्थान में उजागर हुए फर्जीवाड़े के बाद केंद्र सरकार ने सख्त रूख अपना लिया है ताकि वास्तविक पात्र छोटे व सीमांत किसानों को इस योजना का लाभ मिल सके। अब सरकार अवैध तरीके से पीएम सम्मान निधि का पैसा लेने वालों त्वरित कार्रवाई करेगी। इसके तहत लाभार्थी सूची में शामिल ऐसे लोगों का वेरिफिकेशन किया जाएगा जो पीएम सम्मान निधि का लाभ ले रहे हैं और जिनके दस्तावेजों और उपलब्ध कराई गई जानकारियां मेल नहीं खा रही है। यानि अब इस योजना के तहत आपके दस्तावेजों का आपके द्वारा दी गई जानकारी से मिलान कराया जाएगा। यदि जरा सी भी गड़बड़ी मिली तो आपको इस योजना के लाभ से वंचित किया जा सकता है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है कि यदि कोई गलत तरीके से इस योजना का लाभ ले रहा है तो उसे इस योजना से बाहर कर पात्र व्यक्ति तक ये सहायता पहुंचाई जा सके। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 पीएम किसान सम्मान निधि योजना लाभार्थियों की पात्रता का पता लगाने के लिए भौतिक सत्यापन है जरूरी केंद्र सरकार ने पीएम सम्मान निधि योजना में लाभार्थियों की पात्रता का पता लगाने के लिए 5 फीसदी किसानों का भौतिक सत्यापन कराने का फैसला लिया है और यह भौतिक सत्यापन जिला कलेक्टर के नेतृत्व में किया जाना है। बताया जा रहा है कि वेरिफिकेशन प्रक्रिया में सख्ती होगी। भौतिक सत्यापन में गलत जानकारी सामने आने पर आप पर कार्रवाई होगी और आपके अकाउंट से पैसा वापस ले लिया जाएगा। वहीं पात्रता सूची से नाम हटाया दिया जाएगा। आवश्यकता पडऩे पर इस काम में बाहरी एजेंसी भी मदद ली जाएगी। बता दें कि इसमें केवल उन्हीं लोगों का सत्यापन किया जाएगा जो इस योजना का लाभ प्राप्त कर चुके हैं। इसलिए योजना में आवेदन करने से पहले इस योजना के नियम व शर्तों को ध्यान जरूरी पढ़े और उसी के अनुसार पात्र होने पर ही योजना के लिए आवेदन करें। यह आपके हित में होगा। फर्जी किसानों से कैसे वापस लिया जाएगा पैसा अगर अपात्र लोगों को लाभ मिलने की सूचना मिलती है तो उनका पैसा बैंक द्वारा डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) से वापस लिया जाएगा। बैंक इस पैसे को अलग अकाउंट में डालेंगे और राज्य सरकार को वापस करेंगे। राज्य सरकारें अपात्रों से पैसे वापस लेकर https://bharatkosh.gov.in/ में जमा कराएंगी। अगली किश्त जारी होने से पहले ऐसे लोगों का नाम लाभार्थियों की सूची से हटा दिया जाएगा। बता दें कि 2019 में दिसंबर तक सरकार आठ राज्यों के 1,19,743 लाभार्थियों के खातों से इस स्कीम का पैसा वापस ले चुकी है। क्योंकि लाभ लेने वालों के नाम एवं उनके दिए गए कागजात मेल नहीं खा रहे थे। इसलिए स्कीम के तहत पैसा लेन-देन (ट्रांजेक्शन) की प्रक्रिया को संशोधित करके अब और कठिन बनाया दिया गया है। कैसे होगा किसानों का वैरिफिकेशन पीएम सम्मान निधि योजना में और पादर्शिता लाने के लिए केंद्र सरकार ने इसके लाभार्थियों का वैरिफिकेशन अनिवार्य कर दिया है। इसके तहत लाभार्थियों के उपलब्ध कराए गए डेटा के आधार वेरिफिकेशन किया जाएगा। अगर संबंधित एजेंसी को प्राप्त डिटेल्स में आधार से समानता नहीं मिलती है तो संबंधित राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों को उन लाभार्थियों की जानकारी में सुधार या बदलाव करना होगा। इसमें फर्जी पाए जाने पर सूची से नाम हटाने और बैंकों द्वारा लाभार्थियों से पैसों की वसूली की कार्रवाई की जाएगी। पीएम सम्मान निधि योजना में इन लोगों को नहीं मिलेगा लाभ अगर कोई किसान खेती करता है लेकिन वह खेत उसके नाम न होकर उसके पिता या दादा के नाम हो तो उसे 6000 रुपए सालाना का लाभ नहीं मिलेगा। वह जमीन किसान के नाम होनी चाहिए। अगर कोई किसान किसी दूसरे किसान से जमीन लेकर किराए पर खेती करता है, तो भी उसे योजना का लाभ नहीं मिलेगा। पीएम किसान में लैंड की ओनरशिप जरूरी है। सभी संस्थागत भूमि धारक भी इस योजना के दायरे में नहीं आएंगे। अगर कोई किसान या परिवार में कोई संवैधानिक पद पर है तो उसे लाभ नहीं मिलेगा। राज्य/केंद्र सरकार के साथ-साथ पीएसयू और सरकारी स्वायत्त निकायों के सेवारत या सेवानिवृत्त अधिकारी और कर्मचारी होने पर भी योजना के लाभ के दायरे में नहीं आएंगे। डॉक्टर, इंजीनियर, सीए, आर्किटेक्ट्स और वकील जैसे प्रोफेशनल्स को भी योजना का लाभ नहीं मिलेगा, भले ही वह किसानी भी करते हों। 10,000 रुपये से अधिक की मासिक पेंशन पाने वाले सेवानिवृत्त पेंशनभोगियों को इसका लाभ नहीं मिलेगा। अंतिम मूल्यांकन वर्ष में इनकम टैक्स का भुगतान करने वाले पेशेवरों को भी योजना के दायरे से बाहर रखा गया है। किसान परिवार में कोई म्यूनिसिपल कॉरपोरेशंस, जिला पंचायत में हो तो भी इसके दायरे से बाहर होगा। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

किसान रेल : अब फल-सब्जियों की ढुलाई में मिलेगी 50 प्रतिशत की छूट

किसान रेल : अब फल-सब्जियों की ढुलाई में मिलेगी 50 प्रतिशत की छूट

कम खर्च में पहुंचेगा बाजार में उत्पाद, किसानों को होगा फायदा अब किसान अपने उत्पाद जैसे- फल एवं सब्जियां को कम खर्च पर बाजार में भेज सकेगा। इसके लिए हाल ही में रेल मंत्री पीयूष गोयल ने किसान रेल के माध्यम से फलों एवं सब्जियों की ढुलाई में 50 प्रतिशत सब्सिडी देने का आदेश जारी किए हैं। यह सब्सिडी ऑपरेशन ग्रीन-टॉप टू टोटल योजना के तहत दी जाएगी। इससे किसानों को फायदा होगा। किसान अब और कम लागत पर अपने उत्पाद नए मार्केट तक भेज सकेंगे। इससे उनकी आमदनी में बढ़ोतरी होगी। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक केंद्र के आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय ने पायलट आधार पर छह महीने के लिए ऑपरेशन ग्रीन योजना का विस्तार कर टमाटर, प्याज और आलू से लेकर सभी फल एवं सब्जियों को इसके दायरे में लाने की घोषणा की थी। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मई में घोषणा की थी कि 500 करोड़ रुपए के अतिरिक्त कोष के साथ ‘ऑपरेशन ग्रीन’ का विस्तार किया जाएगा और इसमें टमाटर, प्याज और आलू के अलावा सभी फलों एवं सब्जियों को शामिल किया जाएगा। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 क्या है रेल मंत्रालय के आदेश में मीडिया में प्रसारित खबरों के अनुसार रेल मंत्रालय ने अपने आदेश में कहा कि इस कोष के उपयोग के बाद भारतीय रेलवे खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय को उपयोग प्रमाणपत्र उपलब्ध कराएगा। उसके बाद मंत्रालय रेलवे को अतिरिक्त कोष उपलब्ध कराया जाएगा। इसलिए जोनल रेलवे से किसान रेल के जरिए ढुलाई की जाने वाली फलों एवं सब्जियों पर तत्काल प्रभाव से 50 प्रतिशत तक सब्सिडी देने को कहा गया है। बता दें कि केंद्रीय बजट 2020-21 में वित्त मंत्री ने किसान रेल योजना की घोषणा की थी। इसकी शुरुआत 7 अगस्त 2020 से कर दी गई है। सब्सिडी के लिए क्या है योजना खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की ऑपरेशन ग्रीन्स-टॉप टू टोटल योजना के तहत अधिसूचित फलों और सब्जियों की ढुलाई में 50 प्रतिशत सब्सिडी देने का निर्णय लिया है। यह सब्सिडी सीधे किसान रेल को प्रदान की जाएगी। इसके लिए खाद्य एवं प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, रेल मंत्रालय को आवश्यक धन उपलब्ध कराएगा। यह सब्सिडी किसान रेल गाडिय़ों में 14.10.2020 से लागू हो गई है। अब जो भी किसान रेल के माध्यम से अधिसूचित फलों एवं सब्जियों की ढुलाई करेगा उसे इस योजना का लाभ दिया जाएगा। भविष्य में कृषि मंत्रालय या राज्य सरकार की सिफारिशों के आधार पर किसी अन्य फल / सब्जी को इस सूची में शामिल किया जा सकता है। कौन-कौन से फल व सब्जियों की ढुलाई में मिलेगी छूट अभी फिलहाल खाद्य खाद्य एवं प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की ओर से आम, केला, अमरूद, कीवी, लीची, पपीता, मौसम्बी, संतरा, किन्नू, लाइम, नींबू, अनानास, अनार, कटहल, सेब, बादाम, आंवला और नाशपाती आदि फलों की ढुलाई में छूट दी है। वहीं सब्जियां में फ्रेंच बीन्स, करेला, बैंगन, शिमला मिर्च, गाजर, फूलगोभी, हरी मिर्च, ओकरा, ककड़ी, मटर, लहसुन, प्याज, आलू और टमाटर की ढुलाई में यह छूट प्रदान की जाएगी। अभी किन-किन रूटों पर चल रही है किसान रेल अभी रेल मंत्रालय द्वारा 4 रूटों पर किसान रेल की शुरुआत की गई है जिनकी जानकारी हम नीचे क्रमानुसार दें रहे हैं- पहली किसान रेल का रूट - देवलाली (नासिक, महाराष्ट्र) से दानापुर (पटना, बिहार) के बीच चल रही है। इस रेल का उद्घाटन 7 अगस्त 2020 किया गया था। यह एक साप्ताहिक ट्रेन है। इसके बाद लोकप्रिय मांग के आधार पर इस ट्रेन को मुजफ्फरपुर (बिहार) तक बढ़ा दिया गया और इसका संचालन सप्ताह में दो बार कर दिया गया। इसके अलावा, सांगला और पुणे से इसमें लिंक कोच भी शुरू कर किए गए हैं जो किसान रेल में मनमाड से जुड़ते हैं। दूसरी किसान रेल का रूट - अनंतपुर (आंध्र प्रदेश) से आदर्श नगर दिल्ली तक चलती है। इसका उद्घाटन 9 सितंबर 2020 को किया गया था। यह एक साप्ताहिक ट्रेन है। तीसरी किसान रेल का रूट - बेंगलुरु (कर्नाटक) से हजरत निजामुद्दीन (दिल्ली) के बीच चलती है। इसका उद्घाटन 9 सितंबर 2020 को साप्ताहिक ट्रेन के रूप में किया गया। चौथी किसान रेल का रूट - नागपुर और वारुद ऑरेंज सिटी (महाराष्ट्र) से आदर्श नगर दिल्ली तक चलेगी। इसका उद्घाटन 14 अक्टूबर 2020 को किया गया है। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

सबके काम की खबर : अब आसानी से कर सकते हैं आधार कार्ड में मोबाइल नंबर अपडेट

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जानें आधार कार्ड में मोबाइल नंबर अपडेट करने का तरीक आधार कार्ड या यूनिक आईडी एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। यह व्यक्ति की पहचान करने में बहुत काम आता है। तभी तो आजकल हर योजना में आधार कार्ड नंबर मांगा जाता है। आधार कार्ड से ये प्रमाणित होता है कि जो भी सेवाएं या सहायता दी जा रही है वे सही व्यक्ति तक पहुंच रही है, या नहीं? यही कारण है कि सभी सरकारी योजनाओं और निजी कार्यों में आधार कार्ड की जरूरत पड़ती है। इसके अलावा कई प्रमुख दस्तावेजों के साथ आधार कार्ड को लिंक करवाने की आवश्यकता होती है। ऐसे में आधार की ऑनलाइन सेवाएं काफी महत्वपूर्ण हो जाती है। आधार की ऑनलाइन सेवाएं पाने के लिए आधार कार्ड धारक को अपना मोबाइल नंबर आधार नंबर जारी करने वाले संगठन भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (आईडीएआई) के साथ रजिस्टर करवाना होता है। अगर ऐसा नहीं कर पाएं हैं तो आप बाद में भी मोबाइल नंबर को आईडीएआई के साथ रजिस्टर करा सकते हैं। इसके अलावा मोबाइल नंबर को अपडेट भी किया जा सकता है। इसके लिए आवेदक को अपने आधार में मोबाइल नंबर अपडेट या रजिस्टर्ड कराने के लिए कोई भी दस्तावेज जमा कराने की आवश्यकता नहीं होती है। आप आधार कार्ड के साथ रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर के अलावा ईमेल आईडी, फोटो, बॉयोमैट्रिक्स, लिंग से जुड़े विवरण भी अपडेट करा सकते हैं। सरकार की सभी योजनाओं का लाभ किसानों को आधार कार्ड के आधार पर मिलता है। आधार कार्ड में दिए गए मोबाइल पर ही योजनाओं से संबंधित मैसेज समय-समय पर भेजे जाते हैं। आधार कार्ड में सही मोबाइल नंबर होने पर किसान को सरकारी योजनाओं के फायदे के लिए परेशान नहीं होना पड़ता है। सरकार ने किसानों व आमजन की समस्या को समझते हुए आधार में अपडेट करने का विकल्प दिया है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रैक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 आधार कार्ड में सुधार : ऐसे कराएं आधार कार्ड के साथ मोबाइल नंबर अपडेट / आधार कार्ड मोबाइल नंबर चेंज online सबसे पहले आपको भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण यूआईडीएआई की वेबसाइट https://www.uidai.gov.in/ पर जाना होगा और माय आधार टैब पर जाकर लोकेट एन एनरोलमेंट सेंटर पर क्लिक करना होगा। अब स्क्रीन पर एक पेज खुलेगा, जहां से राज्य, पिन कोड और अपना पता दर्ज कर कार्डधारक अपने निकटतम नामांकन केंद्र का पता जान सकते हैं। इसके बाद आपको अपने निकटतम नामांकन केंद्र पर जाना होगा और आधार सुधार फॉर्म भरना होगा। इस आधार सुधार फॉर्म में आपको अपना मोबाइल नंबर दर्ज करना होगा। यह वह एक्टिव मोबाइल नंबर होना चाहिए, जिसे कार्डधारक आधार के साथ अपडेट करवाना चाहता है। अब आपको यह आधार सुधार फॉर्म सबमिट करना होगा और प्रमाणिकरण के लिए अपने बॉयोमेट्रिक्स देने होंगे। इसके बाद आपको एक स्लिप मिलेगी। इस स्लिप में एक अपडेट रिक्वेस्ट नंबर यूआरएन दर्ज होगा। आप इस अपडेट रिक्वेस्ट नंबर से आधार अपडेशन के स्टेटस को ट्रैक कर सकते हैं। कोई भी व्यक्ति कर सकता है आधार कार्ड के लिए नामांकन कोई भी व्यक्ति आधार के लिए बनवाने के लिए नामांकन करवा सकता है बशर्ते वह भारत का निवासी हो और यू.आई.डी.ए.आई. द्वारा निर्धारित सत्यापन प्रक्रिया को पूरा करता हो, चाहे उसकी उम्र और लिंग (जेंडर) कुछ भी हो। प्रत्येक व्यक्ति केवल एक बार नामांकन करवा सकता है। नामांकन नि:शुल्क है। आधार कार्ड व्यक्ति की पहचान और पते का सबूत, नागरिकता का प्रमाण नहीं आधार कार्ड भारत सरकार द्वारा भारत के नागरिकों को जारी किया जाने वाला पहचान पत्र होता है। इसमें 12 अंकों की एक विशिष्ट संख्या छपी होती है जिसे भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (भा.वि.प.प्रा.) जारी करता है। यह संख्या, भारत में कहीं भी, व्यक्ति की पहचान और पते का प्रमाण होता है। भारतीय डाक द्वारा प्राप्त और यू.आई.डी.ए.आई. की वेबसाइट से डाउनलोड किया गया ई-आधार दोनों ही समान रूप से मान्य हैं। आधार कार्ड एक पहचान पत्र मात्र है तथा यह नागरिकता का प्रमाणपत्र नहीं है। नागरिकता पाने की प्रक्रिया विभिन्न है जो अलग-अलग देशों में उनके नियमों के अनुसार होती है। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

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