मछलीपालकों को मिलेगा बिना ब्याज के लोन, मत्स्य पालन को मिला कृषि का दर्जा

Published - 26 Jul 2021

मछलीपालकों को मिलेगा बिना ब्याज के लोन, मत्स्य पालन को मिला कृषि का दर्जा

जानें, मछली पालकों को सरकार की ओर से दी जाने वाली सुविधाएं और लाभ

किसानों की तरह ही मछली पालकों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से सरकार ने मत्स्य पालन को भी कृषि का दर्जा दे दिया है। अब मछलीपालकों को बिना ब्याज के लोन उपलब्ध हो सकेगा। इससे मछली पालकों को मछली व्यवसाय में आ रही आर्थिक परेशानी कम होगी और उनकी आय बढ़ेगी। इधर कृषि में घट रही आय के चलते भी किसानों को मछली पालन के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है ताकि उनकी आमदनी बढ़ सके। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ सरकार ने 20 जुलाई को मत्स्य पालन को कृषि का दर्जा दे दिया गया है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैविनेट की बैठक में फैसला लिया गया। मत्स्य पालन को कृषि का दर्जा मिलने से किसानों को काफी सुविधा मिलने की उम्मीद है। बता दें कि देश भर में छत्तीसगढ़ राज्य मछली उत्पादन के क्षेत्र में 8 वें स्थान पर है। मत्स्य को कृषि का दर्जा मिलने से राज्य का अनुमान है कि मत्स्य उत्पादन में छत्तीसगढ़ राज्य 6 वें स्थान पर जल्द ही आ जाएगा।

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राज्य के मछली पालकों को मिलेगा बिना ब्याज के लोन

छत्तीसगढ़ में कृषि के साथ अधिकांश किसान मछली पालन का काम भी करते हैं। ऐसे मछली पालक किसानों को राज्य सरकार की ओर से बिना ब्याज के लोन दिया जाएगा। बता दें कि अभी तक किसानों को मत्स्य पालन के लिए 1 लाख रुपए तक का लोन 1 प्रतिशत की ब्याज पर दिया जाता था जबकि 3 लाख रुपए तक का लोन 3 प्रतिशत की ब्याज पर दिया जाता था। चूंकि अब राज्य सरकार की ओर मछली पालन को कृषि का दर्जा प्राप्त हो गया है इससे किसानों को सस्ता लोन मिल सकेगा। इसके तहत छत्तीसगढ़ में मत्स्यपालन करने वाले किसानों को अब सहकारी विभाग से शून्य प्रतिशत ब्याज पर लोन दिया जाएगा। मछली पालन के लिए सस्ता लोन लेने के लिए किसान अब किसी भी बैंक से किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) बना सकते हैं। 

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मछली पालकों को दी जाने वाली अन्य सुविधाएं और लाभ

  • वर्तमान समय में छत्तीसगढ़ में 30 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई बांधों एवं जलाशयों से नहर के माध्यम से जलापूर्ति आवश्यकता पड़ती थी, जिसके लिए मत्स्य कृषकों एवं मछुआरों को प्रति 10 हजार घन फीट पानी के बदले 4 रुपए का शुल्क अदा करना पड़ता था, जो अब फ्री में मिलेगा।
  • मत्स्य पालक कृषकों एवं मछुआरों को प्रति यूनिट 4.40 रुपए की दर से विद्युत शुल्क भी अदा नहीं करना होगा। सरकार के इस फैसले से मत्स्य उत्पादन की लागत में प्रति किलो लगभग 10 रुपए की कमी आएगी। इसका सीधा लाभ मत्स्य पालन व्यवसाय से जुड़े लोगों को मिलेगा।
  • राज्य सरकार मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए अनुदान (सब्सिडी) उपलब्ध कराती है। सरकार इसके लिए सामान्य वर्ग के मत्स्य कृषकों को अधिकतम 4.40 लाख रुपए तथा अनुसूचित जाति जनजाति एवं महिला वर्ग के हितग्राहियों को 6.60 लाख रुपए तक का अनुदान दिया जाता है। 
  • मत्स्य पालकों को 5 लाख रुपए तक का बीमा दिया जाता है। राज्य सरकार मत्स्य पालन क्षेत्र को संवर्धित करने के उद्देश्य से मछुआरों को मछुआ दुर्घटना बीमा का कवरेज भी प्रदान करती है। बीमित मत्स्य कृषिक की मृत्यु पर 5 लाख रुपए की दावा राशि का भुगतान किया जाता है। बीमारी की इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती होने पर 25 हजार रुपए तक के इलाज की सुविधा का प्रावधान है।  
  • मछुआ सहकारी समितियों को मत्स्य पालन के लिए जाल, मत्स्य बीज एवं आहार के लिए 3 सालों में 3 लाख रुपए तक की सहायता दी जाती है।
  • बायोफ्लाक तकनीकी से मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए मत्स्य कृषकों को 7.50 लाख रुपए की इकाई लागत पर 40 प्रतिशत की अनुदान सहायता दिए जाने का प्रावधान है। 


छत्तीसगढ़ में कितना होता है मछली उत्पादन

छत्तीसगढ़ राज्य में वर्तमान में 93 हजार 698 जलाशय और तालाब है, जिनका जल क्षेत्र 1 लाख 92 हजार हेक्टेयर है। इसमें से 81 हजार 616 जलाशयों एवं तालाबों का 1 लाख 81 हजार 200 हैक्टेयर जल क्षेत्र मछली पालन के अंतर्गत हैं, जो कुल उपलब्ध जल क्षेत्र का 94 प्रतिशत है। राज्य में वर्तमान समय में 288 करोड़ मत्स्य बीज फ्राई तथा 5.77 लाख मैट्रिक टन मछली का उत्पादन प्रति वर्ष होता है। राज्य की मत्स्य उत्पादकता प्रति हैक्टेयर 3.682 मीट्रिक टन है जो राष्ट्रीय उत्पादकता 3.250 मीट्रिक टन से लगभग 0.432 मीट्रिक टन अधिक है।

 

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