ड्राइवरलेस मेट्रो : दिल्ली में बिना ड्राइवर के दौड़ेगी ट्रेन, अधिकतम स्पीड ९५ किमी प्रतिघंटा

ड्राइवरलेस मेट्रो : दिल्ली में बिना ड्राइवर के दौड़ेगी ट्रेन, अधिकतम स्पीड ९५ किमी प्रतिघंटा

Posted On - 28 Dec 2020

पीएम मोदी ने दिखाई पहली ड्राइवर लेस मेट्रो ट्रेन को हरी झंडी, जानें, क्या है ट्रेन का रूट और खासियत

अब बिना ड्राइवर के दौड़ेगी ट्रेन! सुनने में बड़ा अजीब एवं अटपटा सा लग रहा है ना, पर ये सही है। सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली मेट्रो की मजेंटा लाइन भारत की पहली ड्राइवर लेस मेट्रो ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। इसके साथ ही दिल्ली में अब बिना ड्राइवर के चलने वाली ट्रेन की शुरुआत हो गई है। इस अवसर पर पीएम मोदी ने कहा कि दिल्ली में मेट्रो की चर्चा बरसों तक चली लेकिन पहली मेट्रो अटल जी के प्रयासों से चली है। इसके अलावा पीएम मोदी ने दिल्ली मेट्रो की एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन पर सफर के लिए नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड सेवा की भी शुरुआत की है। पीएम मोदी के साथ इन कार्यक्रम में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल भी शामिल हुए। सूत्रों के मुताबिक आमजन के लिए यह ट्रेन मंगलवार से शुरू कर दी जाएगी। 

 

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Driverless Metro : ट्रेनों के नटवर्क पर क्या बोले पीएम मोदी

पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, 2014 में सिर्फ 5 शहरों में मेट्रो ट्रेनें थी। लेकिन आज 18 शहरों में मेट्रो रेल की सेवा है। साल 2025 तक हम इसे 25 से ज्यादा शहरों तक विस्तार देने वाले हैं। पीएम मोदी ने कहा कि 2014 में देश में सिर्फ 248 किलोमीटर मेट्रो लाइन्स आपरेशनल थीं। आज ये करीब तीन गुनी यानी सात सौ किलोमीटर से हो गई है। पीएम मोदी ने कहा कि मेट्रो सर्विस के विस्तार के लिए, मेक इन इंडिया अहम है। मेक इन इंडिया से लागत कम होती है, विदेशी मुद्रा बचती है। इतना ही नहीं ज्यादा से ज्यादा लोगों को रोजगार भी मिलता है। रोलिंग स्टॉक के मानकीकरण से अब मेट्रो की हर कोच की लागत 12 करोड़ से घटकर 8 करोड़ हो गई है। पीएम मोदी ने कहा, हम एक ऐसे ब्रेकिंग सिस्टम पर प्रयोग कर रहे हैं, जिसमें ब्रेक लगाने पर 50 फीसदी उर्जा वापस ग्रिड में चली जाती है। आज मेट्रो ट्रेनों में 130 मेगावाट सोलर पावर का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिसे 600 मेगावाट तक बढ़ाने का हमारा इरादा है।

 


किस रूट पर चलेगी यह ट्रेन और आगे कहां तक चलाने की योजना

देश की पहली देश की पहली ड्राइवरलेस ट्रेन दिल्ली मेट्रो के मजेंटा लाइन और पिंक लाइन पर चलाई जा रही है। यह ट्रेन दिल्ली मेट्रो के ड्राइवरलेस ट्रेन योजना के पहले चरण में कुल 37 किलोमीटर की दूरी मजेंटा लाइन पर जनकपुरी पश्चिम से नोएडा के बॉटनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशन के बीच चलेगी। सोमवार को देश में पहली बार मजेंटा लाइन पर बोटनिकल गार्डन से जनकपुरी पश्चिम के बीच बगैर चालक के मेट्रो रफ्तार भरी। दिल्ली मेट्रो ने ड्राइवरलेस ट्रेन को एक बड़ी तकनीकी उपलब्धि बताया जा रहा है।


मेट्रो ट्रेन में लगे हैं 6 कोच, एक बार में 2,280 यात्री कर सकते हैं सफर

आम मेट्रो ट्रेन की तरह ही ड्राइवरलेस मेट्रो ट्रेन में भी 6 कोच लगे हैं। इसमें कई एडवांस तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। ड्राइवरलेस ट्रेन की रफ्तार अधिकतम 95 किलोमीटर प्रति घंटा होगी, वहीं 85 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार के साथ यह अपना सफर शुरू करेगी। ड्राइवरलेस मेट्रो ट्रेन में 2,280 यात्री एक बार में सफर कर सकते हैं। इसमें हर कोच में 380 यात्री सवार हो सकते हैं। पीएम मोदी ने दिल्ली मेट्रो की एयरपोर्ट एक्सप्रेस लाइन पर यात्रा के लिए नेशनल कॉमन मोबिलिटी कार्ड (एनसीएमसी) भी जारी किया है।

 

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ऑटोमैटिक तरीके से होगी ऑपरेट, लगे होंगे अत्याधुनिक कैमरे

डीएमआरसी ऑटोमैटिक ट्रेन सुपरविजन सिस्टम का मेट्रो परिचान में इस्तेमाल करेगी। ड्राइवरलेस ट्रेन कंट्रोल रूम से ऑटोमैटिक तरीके से ऑपरेट की जाएगी। ड्राइवरलेस मेट्रो ट्रेन में केबिन नहीं होगा, कोच की डिजाइन नई होगी। सबसे खास फीचर ट्रेन के अंदर और बाहर लगे अत्याधुनिक कैमरे होंगे। सेंसर आधारित ब्रेक किसी भी हादसे के वक्त तुरंत लग जाएंगे।


दिल्ली मेट्रो का पहली बार सितंबर 2017 में किया गया था ट्रायल

दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन पिछले करीब 3 साल से ड्राइवरलेस मेट्रो ट्रेन का ट्रायल कर रहा था। मेट्रो ने पहली बार सितंबर 2017 को इसका ट्रायल शुरू किया था। इस दौरान दिसंबर, 2017 में दिल्ली मेट्रो की पिंक लाइन पर ट्रायल के लिए चलाई गई स्वचालित मेट्रो बेपटरी हो गई थी।  ट्रायल के दौरान स्वचालित मेट्रो कालिंदी कुंज डिपो में दीवार से जा टकराई। इस दौरान टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि मेट्रो ट्रेन दीवार तोडक़र बाहर निकल गई। इस भीषण टक्कर के बाद घटनास्थल पर अफरातफरी का माहौल पैदा हो गया था। कुछ ही दूरी पर सडक़ मार्ग भी था, ऐसे में अगर मेट्रो ट्रेन थोड़ा और आगे जाती तो बड़ा हादसा हो सकता था। खैर, इससे जानमाल का ज्यादा नुकसान नहीं हुआ था। हालांकि इसके बाद लगातार इसकी खामियों को दूर करने पर काम होता रहा है। अब अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर ड्राइवरलेस मेट्रो ट्रेन की शुरुआत की गई हैं।

 

 

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