मुख्यमंत्री खेत सुरक्षा योजना : मध्यप्रदेश में जल्द लागू होगी, किसानों को मिलेगा लाभ

मुख्यमंत्री खेत सुरक्षा योजना : मध्यप्रदेश में जल्द लागू होगी, किसानों को मिलेगा लाभ

Posted On - 25 Jun 2021

जानें, क्या है खेत सुरक्षा योजना और इसमें किसान को कैसे मिलेगी मदद

किसानों को खेती मेें कई प्रकार से नुकसान का सामना करना पड़ता है। कभी अति बारिश, ओलावृष्टि और तूफान, बाढ़ आदि से फसल नष्ट हो जाती है तो कभी जंगली जानवर किसान की खेती को उजाड़ कर नष्ट कर देते हैं। प्राकृतिक आपदा से नुकसान की भरपाई के लिए किसान फसलों का बीमा करावा करके अपने नुकसान की काफी हद तक भरपाई कर सकते हैं। वहीं राज्य सरकारें भी नुकसान का मुआवजा देती है। लेकिन जंगली जानवरों से फसलों को होने वाले नुकसान की भरपाई न तो बीमा कंपनी करती है और न ही सरकार से इसके लिए कोई मुआवजा मिलता है। ऐसे किसानों को सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से मध्यप्रदेश सरकार राज्य में जल्द ही मुख्यमंत्री खेत सुरक्षा योजना लागू करने जा रही है। इस योजना से उन किसानों को फायदा होगा जिनकी फसल नील गाय, जंगली सुअर और बंदरों के कारण फसलों नष्ट हो जाती है। इस योजना के तहत उद्यानिकी विभाग खेतों में चेन फेंसिंग के लिए अनुदान देगा। कैबिनेट में मंजूरी मिलने के बाद यह योजना सबसे पहले उद्यानिकी विभाग में लागू की जाएगी। बता दें कि मध्य प्रदेश में हजारों किसान नीलगाय, जंगली सुअर और बंदरों से परेशान हैं। ये जानवर फसलों को बहुत नुकसान पहुंचाते हैं।  इस मामले में किसान कई बार सरकार से गुहार लगा चुके हैं। इसके लिए अब मुख्यमंत्री खेत सुरक्षा योजना बनाई गई है। 

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क्या है मध्यप्रदेश की मुख्यमंत्री खेत सुरक्षा योजना

प्रदेश के उद्यानिकी मंत्री श्री भारत सिंह कुशवाह के अनुसार मुख्यमंत्री खेत सुरक्षा योजना के तहत आवारा जानवरों से फसल को बचाने के लिए खेत पर चेन फेंसिंग के लिए किसानों को सब्सिडी दी जाएगी। कैबिनेट में मंजूरी मिलने के बाद यह योजना लागू की जाएगी। इस योजना का लाभ सबसे पहले उद्यानिकी फसलों की खेती करने वाले किसानों को मिलेगा। 


खेत सुरक्षा योजना में कितनी मिलेगी सब्सिडी

किसानों को चेन फेंसिंग योजना का लाभ देने के लिए उद्यानिकी विभाग ने अनुदान की चार श्रेणियों का प्रस्ताव रखा है। जिसमें 1 -2 हेक्टेयर पर 70 प्रतिशत, 2 -3  हेक्टेयर पर 60 प्रतिशत, 3 -5 हेक्टेयर पर 50 प्रतिशत और 5 हेक्टेयर से अधिक पर  किसानों को 40 प्रतिशत सब्सिडी दी जाएगी।  


राज्य में इन क्षेत्रों में जंगली जानवरों से फसल को होता है अधिक नुकसान

मध्यप्रदेश राज्य के मालवा -निमाड़, बुंदेलखंड और ग्वालियर -चंबल क्षेत्र से संबद्ध छतरपुर, पन्ना, नीमच, रतलाम, रायसेन, विदिशा, नरसिंहपुर, छिंदवाड़ा और बैतूल जिलों में यह जंगली जानवर फसलों को बहुत नुकसान पहुंचाते हैं।  इन्हें रोकने के लिए किसान मेड़ पर साड़ी बांधने, पटाखे फोडऩे,  लाऊड स्पीकर बजाने और आवाज वाले पंखे चलाने जैसे कई जतन करते हैं, फिर भी फसलों को नुकसान हो ही जाता है।  

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धार जिले के किसान ने प्रधानमंत्री को बताई थी पीड़ा

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी से 25 दिसंबर 2020 को की गई चर्चा में धार जिले के ग्राम चिकलिया के किसान श्री मनोज पाटीदार ने नए कृषि कानून से होने वाले लाभ एवं 5 बार किसान सम्मान निधि की राशि मिलने की जानकारी देते हुए प्रधानमंत्री को बताया था कि उनके खेतों में जंगली जानवर नीलगाय द्वारा काफी नुकसान पहुंचाया जाता है। इस पर प्रधानमंत्री ने कहा कि यह बात सत्य है। किसानों की फसलों को जंगली जानवर नुकसान पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा कि जब मैं गुजरात में मुख्यमंत्री था। तब भी मेरे सामने समस्या आती थी। तभी से मध्यप्रदेश का उद्यानिकी विभाग इस समस्या के समाधान के लिए मंथन कर रहा था।

 

राजस्थान में पहले से संचालित है ऐसी ही योजना

राजस्थान में ऐसी ही एक योजना जिसे तारबंदी योजना के नाम से जाना जाता है संचालित है। इसके तहत राज्य के जो किसान अपनी खेत में तारबंदी (बाड़ बनाना ) करना चाहते है तो उन्हें राजस्थान सरकार द्वारा बाड़ बनाना के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जाती है। इस योजना में आने वाले कुल खर्चे में से सरकार किसान को 50 प्रतिशत खर्चा देती है। शेष 50 प्रतिशत खर्चा किसान को खुद करना होता है।  इस योजना का लाभ राज्य के छोटे कर सीमांत किसानों को प्रदान किया जाता है। इस योजना के तहत अधिकतम 400 मीटर तक की तारबंदी के लिए ही सब्सिडी दी जाती है। इसके तहत 3 लाख 96 हजार रुपए तक की राशि उपलब्ध करवाई जाती है। इस योजना के तहत राज्य के किसानों को 8 करोड़ रुपए की वित्तीय सहायता प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया है। 

 

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