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सीएचसी-फार्म मशीनरी मोबाइल एप : अब किसानों को आसानी से मिलेंगे किराए पर कृषि यंत्र

सीएचसी-फार्म मशीनरी मोबाइल एप : अब किसानों को आसानी से मिलेंगे किराए पर कृषि यंत्र

02 September, 2020

इस एप से किसानों को आसानी से मिलेंगे किराए पर कृषि यंत्र

किसानों को खेती के लिए कृषि यंत्रों की आवश्यकता पड़ती है। आधुनिक कृषि यंत्रों की सहायता से खेती का काम आसान हो जाता है। इसके प्रयोग से न केवल समय बचता है बल्कि श्रम की बचत होती है और उत्पादन भी बढ़ता है। लेकिन ये आधुनिक कृषि यंत्र इतने महंगे होते है कि इसे हर किसान नहीं खरीद सकता है। विकासशील किसान तो इसे खरीद पाने में समर्थ होता है लेकिन छोटे व सीमांत किसान इसे नहीं खरीद पाता है। ऐसे किसान जो कृषि यंत्र नहीं खरीद सकते उनके लिए सरकार ने किराए पर कृषि यंत्र मुहैया कराने की योजना शुरू की है।

 

सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1

 

 इस योजना की सबसे बड़ी बात ये है कि अब किसान को घर बैठे मोबाइल से किराए पर कृषि यंत्र लेने के लिए आर्डर बुक करा सकता है। इसके लिए एक मोबाइल ऐप लांन्च किया गया है जो किसानों की इसमें मदद करेगा। अब किसान सीएचसी मशीनरी मोबाइल एप के माध्यम से ट्रैक्टर सहित अन्य कृषि उपकरणों को किराए पर ले सकेंगे। अभी तक इस एप से करीब 1 लाख 21 हजार किसान जुड़ चुके हैं और इस एप से और भी किसानों के जुडऩे का सिलसिला जारी है। 
 

क्या है सीएचसी-फार्म मशीनरी मोबाइल एप ( CHC-Farm Machinery Mobile App )

केंद्र सरकार ने एक नई सरकारी योजना के तहत सीएचसी फार्म मशीनरी मोबाइल एप लॉन्च किया है जो एक तरह का बहुभाषी ऐप है। यह ऐप सीएचसी / एफएमबी / हाई-टेक मशीनरी हब में उपलब्ध कृषि यंत्रों के इष्टतम उपयोग के साथ-साथ अपने कृषि आय को बढ़ाने के लिए किराये के आधार पर अपने कृषि मशीनरी और उपकरण प्रदान करने के इच्छुक व्यक्तिगत किसानों की मदद करेगा। यह ऐप किसानों को पुरानी कृषि मशीनरी को बेचने और खरीदने के लिए एक मंच प्रदान करेगा।

 


 

सीएचसी - फार्म मशीनरी मोबाइल एप में एक लाख से ज्यादा मशीनें

अब तक इस मोबाइल एप पर 1,20,000 से अधिक कृषि यंत्रों और उपकरणों को किराए पर देने के लिए 40,000 कस्टमर हायरिंग सेंटर पंजीकृत किए गए हैं। इस एप के माध्यम से किसान यह भी जान सकते हैं कि उनके खेतों के आसपास ( इलाके में) कौन-कौन सी मशीनें किराये पर मिल सकती हैं। वे मशीनरी का फोटो देख सकते हैं, कीमत के बारे में मोल भाव कर ऑर्डर दे सकते हैं।


सीएचसी - फार्म मशीनरी मोबाइल एप की खास बातें

ऐप का नाम :  सीएचसी फार्म मशीनरी ऐप
मोबाइल एप साइज : 5 एमबी
भाषा:  यह एप हिंदी, अंग्रेजी, उर्दू समेत 12 भाषाओं को सपोर्ट करती है।
जरूरी एंड्राइड वर्जन – 4.0.3 (KITKAT and Above)

 

सीएचसी-फार्म मशीनरी मोबाइल एप को डाउनलोड कैसे करें

सबसे पहले किसानों को गूगल प्ले स्टोर में जाना होगा। यहां सी सीएचसी फार्म मशीनरी ऐप सर्च करके डाउनलोड करना होगा। इसके बाद मोबाइल में एप्प को खोलना है पर यह ध्यान रखें की यह सीएचसी मोबाइल एप्प एंड्राइड वर्जन 4.0.3 या फिर ऊपर के वर्जन वाले फोन में चलेगी।

 

सीएचसी - फार्म मशीनरी मोबाइल एप से कैसे कराएं पंजीकरण

 

  • एप खोलने के बाद आपसे भाषा का चयन करने के लिए पूछा जाएगा।
  • सीएचसी फार्म मशीनरी ऐप भाषा चयन करने के बाद सीएचसी सर्विस प्रोवाइडर और किसान / उपयोगकर्ता दिखेंगे।
  • जिसके बाद आपको अपने हिसाब से इनमें से किसी एक विकल्प का चयन करना है। 
  • इसके बाद पंजीकरण के लिए कुछ मूल जानकारी देनी होगी। जैसे ही आपका पंजीकरण हो जाएगा, वैसे ही आपके मोबाइल पर यूजर आईडी और पासवर्ड का मैसेज आएगा। 
  • इसके बाद किसान लॉग इन करके किराए पर कृषि यंत्र बुक कर सकते हैं। 

 

 

सीएचसी मोबाइल एप की मुख्य विशेषता व लाभ

  • यह एप 12 भाषाओं में उपलब्ध है। सरकार ने इस कस्टम हायरिंग सेंटर एंड्राइड ऐप को इस तरह से बनाया है की इसको इस्तेमाल करने में किसी भी किसान को परेशानी ना हो।
  • किसानों के लिए महंगे उपकरणों की उपलब्धता बढ़ेगी।
  • किसानों को सभी 50 किलोमीटर दायरे में उपलब्ध उपकरणों की जानकारी मिलेगी। इससे आसपास के कस्टम हायरिंग सेंटर से बिना वहां जाए पहुंच मिलेगी। जिसके लिए अभी तक वहां पर जाना पड़ता था।
  • किसानों की जब खेती करने में लागत कम होगी तो उनकी आय में भी वृद्धि होगी। जिससे वे अपनी आय का इस्तेमाल अपने जरूरी कार्यों के लिए कर सकते हैं
  • किसान अपनी मर्जी से सस्ती दरों पर उपकरणों का चुनाव कर सकेगा।
     

अगर आप अपनी  कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण,  दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।  

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पीएम कुसुम योजना : किसान धोखाधड़ी से बचने के लिए इस नंबर पर करें कॉल

पीएम कुसुम योजना : किसान धोखाधड़ी से बचने के लिए इस नंबर पर करें कॉल

जानें, फर्जी वेबसाइट्स किस तरह दे रही हैं किसानों को धोखा, क्या रखें सावधानी? पीएम कुसुम योजना के नाम पर किसानों से रुपए ठगने के मामले सामने आने के बाद सरकार ने फिर से एडवाइजरी जारी कर किसानों को ऐसी बेवसाइटों से सावधान रहने को कहा है जो पीएम कुसुम योजना में पंजीकरण कराने के नाम पर किसान से पैसा लेती हैं। इसके लिए सरकार ने किसानों को पुरानी एडवाइजरी एक बार फिर से जारी कर ऐसे लोगों व ऐसी ऑनलाइन चल रही बेवसाइटों से सचेत रहने को कहा है। आजकल देखने में आ रहा है कि सोशल मीडिया पर कई फर्जी बेवसाइट पीएम कुसुम योजना के नाम पर चल रही हैं। इसमें खास बात ये हैं कि ये बेवसाइट अपने को सरकारी होने का दावा करती हैं जिससे हमारे भोले-भाले गांव के किसान इनके झांसे में आ जाते हैं और फिर शुरू होता है इन बेवसाइटों के माध्यम से किसान को ठगने का खेल। ऐसी कई शिकायतें पहुंचने के बाद सरकार ने किसानों को ऐसी बेवसाइटों से सावधान रखने की सलाह देने के साथ ही कुछ एडवाइजरी भी जारी की है जिसे हर किसान को जानना बेहद जरूरी है ताकि संभावित हानि से बचा जा सके। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 फर्जी कंपनियां किसानों को दे रही है धोखा एमएनआरई ने पीएम कुसुम योजना के नाम पर किसानों को धोखा देने वाली इन अवैध वेबसाइटों के झांसों से बचाने के लिए 18 मार्च 2019, 3 जून 2020 और 10 जुलाई 2020 को लाभार्थियों के लिए एडवाइजरी जारी कर सतर्क रहने की सलाह दी। मंत्रालय ने कहा था कि किसान ऐसी किसी भी वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन फीस जमा नहीं करें और ना ही कोई जानकारी साझा करें। एमएनआरई की आधिकारिक वेबसाइट www.mnre.gov.in पर पीएम कुसुम योजना के बारे में पूरी जानकारी दी गई है। इन फर्जी वेबसाइटों से किसान रहें सावधान अक्षय ऊर्जा मंत्रालय ने पीएम कुसुम योजना का लाभ लेने वाले किसानों को ठगी से बचाने के लिए फर्जी वेबसाइटों के बारे में एक बार फिर सतर्क किया है। जांच के दौरान मंत्रालय ने पाया कि फर्जी वेबसाइट www.pmkusumyojana.co.in और www.punjabsolarpumps.com किसानों को ठग रही हैं। इस पोर्टल ने पीएम कुसुम योजना के लिए रजिस्ट्रेशन पोर्टल होने का दावा किया है। केंद्र सरकार ने फिर लोगों को सलाह दी है कि वे इन फर्जी वेबसाइटों को रुपए या जानकारी नहीं दें। कुसुम योजना 2020 : ऐसे शुरू होता है इन फर्जी बेवसाइटों से ठगी का खेल किसान को इन फर्जी वेबसाइटों से बचने के लिए सबसे पहले इन वेबसाइटों की हकीकत जानना जरूरी है। इसके लिए आप सबसे पहले इन वेबसाइटों पर अपनी कोई भी निजी जानकारी नहीं दें। जानकारी साझा करने से पहले अपने सपीप के कृषि विभाग से अवश्य संपर्क करें और इस वेबसाइट के बारे में जानकारी दें ताकि वे आपकों सही सलाह दे सके। ध्यान रहे कई फर्जी वेबसाइट सरकारी होने का दावा करने के साथ ही किसानों को मोटी सब्सिडी का लालच देकर उनसे निजी जाकारियां हासिल कर लेती है और बाद में पंजीकरण के नाम पर और इसके बाद पम्प या सौलर प्लांट लागाने को लेकर मोटी रकम वसूल लेती है। पर इसके बाद भी किसान को सौलर प्लांट स्कीम का लाभ नहीं मिल पाता। इसके अलावा ये वेबसाइटस् किसान व आम जनता से जुड़ी निजी जानकारियों को अन्य कंपनियों को भी उपलब्ध करती है जिनकी ऐवज में इन्हें काफी रकम अन्य कंपनियों से मिलती है। इस तरह ये वेबसाइट खुद तो ठगी करती ही साथ अन्य कंपनियों को आपकी निजी जानकारियों को शेयर कर देती है जिससे आगे अन्य कंपनियां भी इन आपकी निजी जानकारियों से लाभ लेना शुरू कर देती है। इस तरह इन फर्जी वेबसाइट्स का खेल एक नेटवर्क की तरह कार्य करता है। इसलिए किसान व आम जनता इन वेबसाइटों के झांसे में न आएं और सही जानकारी प्राप्त करके ही योजना के लिए आवेदन करें। तो फिर पीएम कुसुम योजना की सही जानकारी के लिए क्या करें / पीएम कुसुम योजना हेल्पलाइन नंबर कई वेबसाइट फर्जी पंजीकरण पोर्टल के माध्यम से किसानों से रुपए तथा निजी जानकारी एकत्रित कर रही है। आम जनता को किसी भी नुकसान से बचाने के लिए, अक्षय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) ने पहले लाभार्थियों और आम जनता को ऐसी किसी भी वेबसाइटों पर पंजीकरण शुल्क नहीं जमा करने और अपनी जानकारी साझा करने से सतर्क रहने की सलाह दी थी। इस संबंध में एमएनआरई मंत्रालय का कहना है कि सरकार किसी भी वेबसाइट के जरिये पीएम कुसुम योजना के लाभार्थियों का पंजीकरण नहीं कर रही है। लिहाजा, पंजीकरण करने का दावा करने वाली तमाम वेबसाइट्स संदिग्ध और धोखाधड़ी करने वाली हैं। मंत्रालय ने अपील की है कि ऐसे किसी फर्जी वेबसाइट के बारे में जानकारी मिलने पर तुरंत जानकारी सूचना दें। योजना के लाभार्थियों की पात्रता और योजना को लागू करने संबंधी पूरी जानकारी मंत्रालय के वेबसाइट पर दी गई है। इसके अलावा मंत्रालय ने एक टोल फ्री हेल्प लाइन नंबर 1800-180-3333 भी जारी किया है। क्या है पीएम कुसुम योजना और इससे कैसे मिलती है सब्सिडी / कुसुम योजना ऑनलाइन आवेदन देश में किसानों को उर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर करने के लिए तथा अक्षय (सौर) ऊर्जा को बढ़ाने के लिए वर्ष 2018-19 में केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाअभियान (कुसुम) योजना की शुरुआत की थी। इसके तहत किसानों को कृषि पंपों के सौरीकरण के लिए 60 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है। किसानों को सब्सिडी पर सोलर पंप देने के लिए राज्य सरकारों के द्वारा पंजीकरण करवाए जाते हैं जिसमें कुछ राज्य सरकारें अपनी तरफ से भी किसानों को सब्सिडी देती है जिससे कुछ राज्यों में किसानों को 60 प्रतिशत से अधिक सब्सिडी भी मिलती है। पीएम-कुसुम योजना के तहत केंद्र सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) द्वारा प्रधान मंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (प्रधानमंत्री-कुसुम) योजना के तहत कृषि पंपों के सौरीकरण के लिए 60 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है। इस योजना को राज्य सरकार के विभागों द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है जिसमें किसानों को केवल बाकी का 40 प्रतिशत ही विभाग को जमा करवाना होता है। इस योजना की विस्तार से जानकारी के लिए अपने निकटतम कृषि विभाग से संपर्क करें या एमएनआरई की आधिकारिक वेबसाइट www.mnre.gov.in पर जाकर पीएम कुसुम योजना के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

मत्स्य प्रशिक्षण और विस्तार योजना : मछलीपालन करने वाले किसानों की आय बढ़ाने में हैं मददगार

मत्स्य प्रशिक्षण और विस्तार योजना : मछलीपालन करने वाले किसानों की आय बढ़ाने में हैं मददगार

मत्स्य पालन विभाग छत्तीसगढ़ द्वारा मछलीपालन की उन्नत तकनीक का दिया जाता है प्रशिक्षण, मिलते हैं कई फायदें मत्स्य पालन विभाग की ओर से मछली पालन करने वाले किसानों के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही है। इनमें से मत्स्य पालन का प्रशिक्षण देने के साथ ही इसके विस्तार के प्रयास किए जा रहे हैं सरकार की ओर से किए जा रहे हैं। इन योजनाओं को चलाने के पीछे सरकार का उद्देश्य यह है कि किसानों को खेती के साथ-साथ मछलीपालन भी करें ताकि उनकी आय में बढ़ोतरी हो सके। इसके लिए किसानों को मछलीपालन का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। वहीं समुद्र किनारे रहने वाले मछुआरे भी मत्स्य पालन विभाग की योजनाओं से लाभान्वित हो रहे हैं। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से मत्स्य पालन विभाग के माध्यम से कई योजनाओं का संचालन किया जा रहा है जो मछलीपालन करने वाले किसानों के लिए बेहद लाभकारी है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 मत्स्य प्रशिक्षण और विस्तार योजना छत्तीसगढ़ : शिक्षण-प्रशिक्षण ( मछुआरों का 10 दिवसीय प्रशिक्षण ) योजना मत्स्य पालन विभाग छत्तीसगढ़ की ओर से मछुआरों का 10 दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया जाता है। इसके तहत सभी श्रेणी के मछुआरों को मछली पालन की तकनीक एवं मछली पकडऩे, जाल बुनने, सुधारने एवं नाव चलाने का प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। इस 10 दिवसीय सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक प्रशिक्षण कार्यक्रम अंतर्गत प्रति प्रशिक्षणार्थी प्रशिक्षण व्यय रू. 1250/- स्वीकृत है, जिसके अन्तर्गत रुपए 75/- प्रतिदन प्रति प्रशिक्षणार्थी के मान से शिष्यावृत्ति, रुपए 400/- की लागत मूल्य का नायलोन धागा तथा रुपए 100/- विविध व्यय शामिल है। शिक्षण-प्रशिक्षण ( मछुआरों का अध्ययन भ्रमण ) योजना प्रगतिशील मछुआरों को उन्नत मछली पालन का प्रत्यक्ष अनुभव कराने के उद्देश्य से मत्स्य पालन विभाग की ओर से इस प्रशिक्षण का आयोजन किया जाता है। इसके तहत प्रगतिशील मछुआरों राज्य के बाहर अध्ययन भ्रमण पर भेजा जाता है। इस योजना का उद्देश्य सामान्य/अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति वर्ग के प्रगतिशील मछुआरों को उन्नत मछली पालन का प्रत्यक्ष अनुभव कराने हेतु देश के अन्य राज्यों में अपनाई जा रही मछली पालन तकनीकी से परिचित कराना है। इस योजना के तहत प्रति मछुआरा रुपए 2500/- की लागत पर 10 दिवसीय अध्ययन भ्रमण प्रशिक्षण पर व्यय किया जाता है। स्वीकृत योजनानुसार प्रति प्रशिक्षणार्थी रुपए 1000/- शिष्यावृत्ति, रुपए 1250/- आवागमन व्यय तथा रुपए 250/- विविध व्यय का प्रावधान है। शिक्षण-प्रशिक्षण ( रीफ्रेशर कोर्स ) योजना मत्स्य विभाग छत्तीसगढ़ की ओर से संचालित शिक्षण प्रशिक्षण (रीफ्रेशर कार्स) योजना का उद्देश्य पूर्व से प्रिशिक्षित मछुआरो को पुन: अद्यतन करना है। इसके तहत सभी वर्ग के पूर्व से प्रिशिक्षित मछुआरों को पुन: उन्नत मछली पालन का प्रिशिक्षण देने हेतु एवं मछली पालन तकनीकी से परिचित कराने के उद्देश्य से प्रति मछुआरा रुपए 1000/- की लागत पर 03 दिवसीय रीफ्रेशर कोर्स प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके अलावा मत्स्य विभाग छत्तीसगढ़ की ओर मत्स्य पालन प्रसार के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही है जिनका मछली पालक किसान लाभ लेकर अपनी आय बढ़ सकते हैं। झींगा पालन योजना मछली पालकों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से मस्य पालन विभाग छत्तीसगढ़ की ओर से झींगा पालन योजना चलाई जा रही है। इस योजना के तहत अनुसूचित जाति/जन जाति के मत्स्य पालकों को मीठे जल में पॉलीकल्चर झींगा पालन तथा आलंकारिक मत्स्योद्योग विकास की प्रसार योजनान्तर्गत नई योजना क्रियान्वित होगी जिसके तहत हितग्राहियों को वस्तु विषय के रूप में क्रमश: रुपए 15000/- एवं 12000/- का तीन वर्षो में आर्थिक सहायता (अनुदान) देना प्रावधानित है। मौसमी तालाबों में मत्स्य बीज संवर्धन योजना मत्स्य विभाग छत्तीसगढ़ की इस योजना का उद्देश्य छोटे मौसमी तालाबों, पोखरों को उपयोगी बनाकर मत्स्य बीज संवर्धन कर आय में वृद्धि करना है। इस योजना के तहत मत्स्य बीज संवर्धन कर मत्स्य बीज विक्रय से स्वरोजगार उपलब्ध कराने में सहायता की जाती है। इसके तहत 0.5 हेक्टर के तालाब में प्रति हितग्राहियों को मत्स्य बीज संवर्धन, तालाब सुधार एवं इनपुट्स मत्स्य बीज आदि हेतु रुपए 30000/- की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है । नाव जाल या जाल क्रय सुविधा मत्स्य प्रसार के अंतर्गत नाव जाल या जाल क्रय करने की सुविधा दी जाती है। इस योजना का उद्देश्य सभी श्रेणी के मछुआरों को मत्स्याखेट हेतु सहायता प्रदान करना है। इस योजना में तालाबों, जलाशयों अथवा नदियों में मत्स्याखेट करने वाले अनुसूचित जाति के सक्रिय मछुआरों को नाव, जाल उपकरण खरीदने करने हेतु प्रति मछुआरा रुपए 10000/- की सहायता उपलब्ध कराई जाती है। यह सहायता वस्तु विशेष के रूप में दी जाती है। फिंगरलिंग क्रय कर संचयन पर सहायता मत्स्य पालन प्रसार योजना के तह फिंगरलिंग क्रय कर संचयन पर सहायता दी जाती है। इसका उद्देश्य तालाबों में फिंगरलिंग क्रय कर संवर्धन कर मत्स्य उत्पादन में वृद्धि करना और अधिक मत्स्य उत्पादन से अधिक आय अर्जित करना है। इस योजना के तहत मछलीपालक किसानों द्वारा वर्तमान में संचित मत्स्य बीज अर्थात् 10000 फ्राई प्रति हेक्टर के स्पान पर क्रय कर 5000 फिंगरलिंग प्रति हैक्टर डालकर मत्स्य उत्पादन में वृद्धि होगी। साथ ही आहार आय अधिक होगी। ऐसी स्थिति में मत्स्य कृषक को पांच वर्षो तक रुपए 2000/- प्रति वर्ष कुल रुपए 1000/-की सहायता प्रदान की जाती है। पंजीकृत मत्स्य सहकारी समितियों को ऋण/अनुदान योजना इस योजना के तहत सभी वर्ग की पंजीकृत मछुआ सहकारी समितियों को मछली पालन हेतु उपकरण एवं अन्य प्रयोजनों यथा तालाब पट्टा, मत्स्य बीज, नाव-जाल आदि हेतु पात्रतानुसार अनुदान उपलब्ध करवाया जाता है। यह योजना मछुआरों की पंजीकृत समितियों को मछली पालन हेतु मध्य प्रदेश मछुआ सहकारी समितियों (ऋण/अनुदान) नियम-1972 के अंतर्गत प्रदेश में सभी वर्ग की पंजीकृत मछुआ सहकारी समितियों को मछली पालन हेतु उपकरण एवं अन्य प्रयोजनों तथा तालाब पट्टा, मत्स्य बीज, नाव जाल क्रय इत्यादि हेतु विद्यमान नियमों के तहत पात्रतानुसार ऋण/अनुदान के लिए आर्थिक सहायता / सहायक अनुदान मद से प्रावधानित राशि व्यय की जाती है। योजनान्तर्गत लगातार 3 वर्षो में अधिकतम रुपए 3 लाख की सहायता राशि प्रति सहकारी समिति आइटमवार सीमा के अधीन दिए जाने का प्रावधान है। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

समग्र गव्य विकास योजना : डेयरी उद्योग के लिए 75 प्रतिशत तक सब्सिडी

समग्र गव्य विकास योजना : डेयरी उद्योग के लिए 75 प्रतिशत तक सब्सिडी

दूध के लिए गाय-भैंस पालो, 75 प्रतिशत पैसा सरकार देगी अगर आप लोगों को शुद्ध दूध उपलब्ध कराने के साथ-साथ अच्छी आमदनी कमाना चाहते हैं तो डेयरी उद्योग में आपके लिए अपार संभावनाएं हैं। डेयरी उद्योग से देश के किसानों, युवाओं व बेरोजगारों के जीवन को संवारने के लिए केंद्र व विभिन्न राज्य सरकारें अपने-अपने स्तर पर कई योजनाएं संचालित कर रहे हैं, जिनका फायदा आप उठा सकते हैं। ट्रैक्टर जंक्शन की इस पोस्ट में आपको समग्र गव्य विकास योजना के बादे में जानकारी दी जा रही है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 सरकार दस दुधारू पशुओं के लिए देगी 8.96 लाख रुपए, आवेदन की अंतिम तिथि 25 अक्टूबर इस योजना के तहत सरकार दस दुधारू पशुओं की डेयरी खोलने के लिए 8 लाख 96 हजार रुपए की सहायता उपलब्ध करा रही है। इस योजना में 75 फीसदी तक सब्सिडी भी मिल रही है। बिहार सरकार की समग्र गव्य विकास योजना इन दिनों बहुत लोकप्रिय हो रही है। समग्र गव्य विकास योजना बिहार 2020-21 में आवेदन कोरोना काल में कृषि सेक्टर को छोडक़र सभी सेक्टरों में मंदी का आलम रहा। देश के नीति विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि और उससे जुड़े क्षेत्र ही बहुत बड़े स्तर पर रोजगार के अवसर उत्पन्न कर सकते हैं। अगर आधुनिक तरीके से पशुपालन किया जाए तो अच्छी खासी आमदनी प्राप्त की जा सकती है। केंद्र व राज्य सरकार समय-समय पर विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सब्सिडी उपलब्ध कराती है। बिहार सरकार की ओर से युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से डेयरी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए समग्र ग्रव्य विकास योजना के तहत 50 से 75 फीसदी तक की सब्सिडी उपलब्ध कराई जा रही है। इसके लिए आवेदन 25 अक्टूबर तक स्वीकार किए जाएंगे। इस योजना में 2, 4, 6 और 10 दुधारू पशुओं के लिए अलग-अलग श्रेमियों में सब्सिडी उपलब्ध कराई जा रही है। बिहार में इस योजना का संचालन पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग की ओर से किया जा रहा है। समग्र गव्य विकास योजना की पात्रता इस योजना का लाभ सभी वर्गों के भूमिहीन, किसानों, लघु किसानों, सीमांत सिकानों, गरीबी रेखा से नीचे आने वाले किसानों, शिक्षित बेरोजगार युवक-युवतियों को मिलेगा। समग्र गव्य विकास योजना का क्रियान्वयन बिहार राज्य के सभी जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में ही किया जाएगा। जिल गव्य विकास पदाधिकारी / संबंद्ध जिला के जिला गव्य अधिकारी नोडल अधिकारी बनाए गए हैं। जो भी व्यक्ति इस योजना का लाभ उठाना चाहते हैं वो अपना आवेदन जिला गव्य विकास कार्यालय/संबंधित जिला के जिला पशुपालन कार्यालय (गव्य प्रकोष्ठ) में जमा करा सकते हैं। समग्र गव्य विकास योजना में सब्सिडी इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में सभी वर्गो के भूमिहीन किसानों, दुग्ध उत्पादकों व शिक्षित बेरोजगारों को स्वरोजगार के अवसर सृजित कर उन्हें विकास की मुख्यधारा में शामिल करना है। ताकि वे इस ऋण की राशि से अपनी डेयरी इकाई खड़ी कर सके और दूध उत्पादन में बढ़ोत्तरी कर सके। समग्र गव्य विकास योजना के तहत गाय पालन पर सामान्य किसानों को 50 प्रतिशत तथा आरक्षित वर्ग के किसानों को 75 प्रतिशत तक सब्सिडी का प्रावधान है। दो दुधारू मवेशी की योजना की लागत 1 लाख 60 हजार, 4 दुधारू मवेशी के लिए 3 लाख 38 हजार 400, 6 दुधारू मवेशी के लिए 5 लाख 32 हजार 600 और 10 दुधारू मवेशी के लिए 8 लाख 96 हजार रुपये निर्धारित है। इसी राशि पर संबंधित जाति के श्रेणी के आधार पर 50 और 75 प्रतिशत तक सब्सिडी देने की योजना है। यह पिछले कई सालों से यह योजना चल रही है। बिहार में फिलहाल कोरोना संकट के कारण इस साल योजना देर से शुरू की गई है। आवेदनों पर ‘पहले आओ पहले पाओ’ के तर्ज पर विचार किया जाएगा। समग्र गव्य विकास योजना में आवेदन के लिए जरुरी दस्तावेज आवेदन पत्र की दो मूल प्रति आधार कार्ड / फोटो पहचान पत्र / आवासीय प्रमाण पत्र की स्वहस्ताक्षरित दो छाया प्रति। जमीन संबंधी रसीद की छाया प्रति। परियोजना प्रतिवेदन की प्रति। बैंक का डिफॉल्टर नहीं होने के संबंध में शपथ पत्र। स्वलागत योजना हेतु बैंक/ डाकघर में पूर्ण राशि उपलब्धता के संबंध में पासबुक की छाया प्रति । शराब बंदी से प्रभावित होने के संबंध में प्रमाण, डेयरी से संबंधित प्रशिक्षण प्राप्त करने, दुग्ध समिति की सदस्यता का प्रमाण पत्र की छाया प्रति। समग्र गव्य विकास योजना में चयन प्रकिया इस योजना में पात्र लोगों के चयन में बहुत सतर्कता बरती जाती है। जिला गव्य विकास पदाधिकारी के पास जमा हुए आवेदन पत्रों की स्क्रीनिंग होती है। स्क्रीनिंग जिला अग्रणी बैंक पदाधिकारी के अध्यक्षता में गठित स्क्रीनिंग समिति द्वारा किया जाता है। इस समिति में जिला गव्य विकास पदाधिकारी, सदस्य सचिव शामिल होते हैं। इसके अलावा जिला पशुपालन पदाधिकारी, उद्योग विभाग के जिला स्तरीय पदाधिकारी एवं संबंधितजिला परिषद् के प्रतिनिधि सदस्य के रूप में शामिल होते हैं। स्क्रीनिंग समिति की बैठक आवेदन पत्रों की प्राप्तियों की अंतिम तिथि के उपरांत आयोजित की जाएगी, जिसमें प्राप्त आवेदनों की समीक्षा/जांच आवेदक की उपस्थिति में किया जायेगा। आवेदक के साक्षात्कार के पश्चात ऋण स्वीकृति के संबंध में गठित समिति द्वारा निर्णय लिया जायेगा एवं योग्य ऋण आवेदन पत्रों को अनुशंसा के साथ संबंधित बैंक को ऋण स्वीकृति के लिए भेज दिया जाएगा। ऋण स्वीकृत करने वाले संबंधित बैंक का यह दायित्व है कि अनुशंसित आवेदनों पर एक माह के अंदर निर्णय लेते हुए आवेदक एवं संबंधित जिला के अग्रणी बैंक, जिला गव्य विकास कार्यालय एवं जिला परिषद् को सूची के साथ सूचना उपलब्ध कराएं। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और 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पीएम किसान सम्मान निधि योजना : अब फर्जी तरीके से लाभ लेना पड़ सकता है भारी

पीएम किसान सम्मान निधि योजना : अब फर्जी तरीके से लाभ लेना पड़ सकता है भारी

पात्रता सूची से नाम हटाने के साथ ही होगी पाई-पाई की वसूली पीएम सम्मान निधि योजना को लेकर तमिलनाडू, यूपी और राजस्थान में उजागर हुए फर्जीवाड़े के बाद केंद्र सरकार ने सख्त रूख अपना लिया है ताकि वास्तविक पात्र छोटे व सीमांत किसानों को इस योजना का लाभ मिल सके। अब सरकार अवैध तरीके से पीएम सम्मान निधि का पैसा लेने वालों त्वरित कार्रवाई करेगी। इसके तहत लाभार्थी सूची में शामिल ऐसे लोगों का वेरिफिकेशन किया जाएगा जो पीएम सम्मान निधि का लाभ ले रहे हैं और जिनके दस्तावेजों और उपलब्ध कराई गई जानकारियां मेल नहीं खा रही है। यानि अब इस योजना के तहत आपके दस्तावेजों का आपके द्वारा दी गई जानकारी से मिलान कराया जाएगा। यदि जरा सी भी गड़बड़ी मिली तो आपको इस योजना के लाभ से वंचित किया जा सकता है। ऐसा इसलिए किया जा रहा है कि यदि कोई गलत तरीके से इस योजना का लाभ ले रहा है तो उसे इस योजना से बाहर कर पात्र व्यक्ति तक ये सहायता पहुंचाई जा सके। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 पीएम किसान सम्मान निधि योजना लाभार्थियों की पात्रता का पता लगाने के लिए भौतिक सत्यापन है जरूरी केंद्र सरकार ने पीएम सम्मान निधि योजना में लाभार्थियों की पात्रता का पता लगाने के लिए 5 फीसदी किसानों का भौतिक सत्यापन कराने का फैसला लिया है और यह भौतिक सत्यापन जिला कलेक्टर के नेतृत्व में किया जाना है। बताया जा रहा है कि वेरिफिकेशन प्रक्रिया में सख्ती होगी। भौतिक सत्यापन में गलत जानकारी सामने आने पर आप पर कार्रवाई होगी और आपके अकाउंट से पैसा वापस ले लिया जाएगा। वहीं पात्रता सूची से नाम हटाया दिया जाएगा। आवश्यकता पडऩे पर इस काम में बाहरी एजेंसी भी मदद ली जाएगी। बता दें कि इसमें केवल उन्हीं लोगों का सत्यापन किया जाएगा जो इस योजना का लाभ प्राप्त कर चुके हैं। इसलिए योजना में आवेदन करने से पहले इस योजना के नियम व शर्तों को ध्यान जरूरी पढ़े और उसी के अनुसार पात्र होने पर ही योजना के लिए आवेदन करें। यह आपके हित में होगा। फर्जी किसानों से कैसे वापस लिया जाएगा पैसा अगर अपात्र लोगों को लाभ मिलने की सूचना मिलती है तो उनका पैसा बैंक द्वारा डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) से वापस लिया जाएगा। बैंक इस पैसे को अलग अकाउंट में डालेंगे और राज्य सरकार को वापस करेंगे। राज्य सरकारें अपात्रों से पैसे वापस लेकर https://bharatkosh.gov.in/ में जमा कराएंगी। अगली किश्त जारी होने से पहले ऐसे लोगों का नाम लाभार्थियों की सूची से हटा दिया जाएगा। बता दें कि 2019 में दिसंबर तक सरकार आठ राज्यों के 1,19,743 लाभार्थियों के खातों से इस स्कीम का पैसा वापस ले चुकी है। क्योंकि लाभ लेने वालों के नाम एवं उनके दिए गए कागजात मेल नहीं खा रहे थे। इसलिए स्कीम के तहत पैसा लेन-देन (ट्रांजेक्शन) की प्रक्रिया को संशोधित करके अब और कठिन बनाया दिया गया है। कैसे होगा किसानों का वैरिफिकेशन पीएम सम्मान निधि योजना में और पादर्शिता लाने के लिए केंद्र सरकार ने इसके लाभार्थियों का वैरिफिकेशन अनिवार्य कर दिया है। इसके तहत लाभार्थियों के उपलब्ध कराए गए डेटा के आधार वेरिफिकेशन किया जाएगा। अगर संबंधित एजेंसी को प्राप्त डिटेल्स में आधार से समानता नहीं मिलती है तो संबंधित राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों को उन लाभार्थियों की जानकारी में सुधार या बदलाव करना होगा। इसमें फर्जी पाए जाने पर सूची से नाम हटाने और बैंकों द्वारा लाभार्थियों से पैसों की वसूली की कार्रवाई की जाएगी। पीएम सम्मान निधि योजना में इन लोगों को नहीं मिलेगा लाभ अगर कोई किसान खेती करता है लेकिन वह खेत उसके नाम न होकर उसके पिता या दादा के नाम हो तो उसे 6000 रुपए सालाना का लाभ नहीं मिलेगा। वह जमीन किसान के नाम होनी चाहिए। अगर कोई किसान किसी दूसरे किसान से जमीन लेकर किराए पर खेती करता है, तो भी उसे योजना का लाभ नहीं मिलेगा। पीएम किसान में लैंड की ओनरशिप जरूरी है। सभी संस्थागत भूमि धारक भी इस योजना के दायरे में नहीं आएंगे। अगर कोई किसान या परिवार में कोई संवैधानिक पद पर है तो उसे लाभ नहीं मिलेगा। राज्य/केंद्र सरकार के साथ-साथ पीएसयू और सरकारी स्वायत्त निकायों के सेवारत या सेवानिवृत्त अधिकारी और कर्मचारी होने पर भी योजना के लाभ के दायरे में नहीं आएंगे। डॉक्टर, इंजीनियर, सीए, आर्किटेक्ट्स और वकील जैसे प्रोफेशनल्स को भी योजना का लाभ नहीं मिलेगा, भले ही वह किसानी भी करते हों। 10,000 रुपये से अधिक की मासिक पेंशन पाने वाले सेवानिवृत्त पेंशनभोगियों को इसका लाभ नहीं मिलेगा। अंतिम मूल्यांकन वर्ष में इनकम टैक्स का भुगतान करने वाले पेशेवरों को भी योजना के दायरे से बाहर रखा गया है। किसान परिवार में कोई म्यूनिसिपल कॉरपोरेशंस, जिला पंचायत में हो तो भी इसके दायरे से बाहर होगा। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

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