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आत्मनिर्भर योजना : डेयरी, मांस प्रसंस्करण और पशु आहार संयंत्र पर 90% मिलेगा लोन

आत्मनिर्भर योजना : डेयरी, मांस प्रसंस्करण और पशु आहार संयंत्र पर 90% मिलेगा लोन

03 September, 2020

क्या है आत्मनिर्भर योजना और इससे कैसे मिलेगा लोन, जानें पूरी जानकारी


देश को कृषि के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार की ओर से किसानों व पशुपालकों के लिए बहुत सी योजनाएं चलाई जा रही है जिससे किसानों व पशुपालकों की आय को बढ़ाया जा सके। इसी कड़ी में कोविड-19 के बाद देश में आई रोजगार की कमी को देखते हुए केंद्र सरकार की ओर से आत्मनिर्भर योजना चलाई जा रही है। इस योजना के तहत डेयरी, मांस प्रसंस्करण और पशु आहार संयंत्र स्थापित करने के लिए सरकार से 90 प्रतिशत लोन दिया जाएगा। इसके तहत आप मात्र 10 प्रतिशत नकद राशि लगाकर व्यवसाय शुरू कर सकते हैं।

 

सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1

 

इस योजना के तहत कम ब्याज दर पर ऋण उपलब्ध कराया जाता है ताकि बेरोजगार लोग आसानी से खुद का काम शुरू कर सकें। यह योजना किसान तथा कृषि क्षेत्र से जुड़ी हुई है जो ग्रामणी भारत के अनुकूल भी है। योजना के अंतर्गत मध्य प्रदेश राज्य सरकार ने राज्य के किसानों तथा सूक्ष्म और लघु उद्यमियों को योजना के लाभ प्राप्त देने के लिए आवेदन मांगे हैं। योजना के लिए कम ब्याज पर 50 करोड़ रुपए तक का भी लोन जारी किया जाएगा।
 

 

क्या है आत्मनिर्भर भारत अभियान योजना ( Aatm Nirbhar Bharat Abhiyan Yojana ) 

कोविड-19 के बाद रोजगार के क्षेत्र में आई कमी को देखते हुए भारत सरकार ने आत्मनिर्भर भारत योजना की शुरुआत की है। योजना के अनुसार सभी प्रकार के उत्पाद देश में उत्पादित बनाए जाने पर जोर दिया गया है। जिससे यहां के लोगों को मुनाफा के साथ ही रोजगार उपलब्ध हो सके। इसके अंतर्गत ग्रामीण भारत तथा किसनों से जुड़े रोजगार पर विशेष तौर पर ध्यान दिया जा रहा है। आत्मनिर्भर भारत योजना के लिए केंद्र सरकार ने 20 लाख करोड़ के आर्थिक राहत पैकेज की घोषणा की गई है।


7 750 करोड़ रुपए के क्रेडिट गारंटी फंड की होगी स्थापना

मध्य प्रदेश के पशुपालन विभाग के अपर सचिव जे. एन. कंसोटिया के अनुसार केंद्र शासन द्वारा 750 करोड़ रुपए की क्रेडिट गारंटी फंड की स्थापना की जाएगी, जिनका प्रबंधन नाबार्ड द्वारा किया जाएगा। क्रेडिट गारंटी फंड केवल उन्हीं परियोजनाओं को दिया जाएगा जो व्यवहारिक होंगी। पात्र हितग्राही को ऋण सुविधा का अधिकतम 25 प्रतिशत कवरेज मिलेगा। फंड की कुल राशि 15 हजार करोड़ का वितरण 3 वर्ष की अवधि में अनुसूचित बैंकों द्वारा किया जाएगा।


डेयरी, मांस प्रसंस्करण एवं पशु आहार संयंत्र के लिए पात्रता

आत्मनिर्भर योजना के लिए राज्य किसान उत्पादक संगठन, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उधोग, निजी कम्पनियां और व्यक्तिगत उद्यमी आदि योजना का लाभ उठा सकते हैं। हितग्राही तीन प्रतिशत ब्याज सबवेंशन के लिए अनुसूचित बैंक परियोजना प्रस्ताव केन्द्रीय पशुपालन एवं डेयरी विभाग को ऑनलाइन भेजेंगे। केन्द्र शासन द्वारा गठित प्रोजेक्ट सेंक्शन और प्रोजेक्ट एप्रुवल कमेटी निर्धारित मापदंडों के अनुसार ब्याज सबवेंशन और क्रेडिट गारंटी की स्वीकृति देगी।

 

कितना मिलेगा लोन और कितनी होगी ब्याज दर

आत्मनिर्भर निधि योजना के अन्तर्गत पात्र हितग्राही को कम ब्याज पर बैंक से ऋण उपलब्ध कराया जाएगा। हितग्राही को 10 से 25 प्रतिशत का मार्जिन मनी रखा गया है। शेष 75 से 90 प्रतिशत तक का ऋण बैंक उपलब्ध कराएगी। हितग्राही के लिए सरकार ने 3 प्रतिशत ब्याज सबवेंशन दिया जाएगा। योजना के अनुसार 50 करोड़ रुपए तक के प्रस्ताव प्रोजेक्ट एप्रुवल कमेटी और 50 करोड़ से अधिक के प्रस्ताव प्रोजेक्ट सेंक्शन कमेटी मंजूर करेगी। योजना के अंतर्गत 90 प्रतिशत तक का लोन दिया जाएगा।

 


लोन लेने के लिए क्या करना होगा

डेयरी, मांस प्रसंस्करण एवं पशु आहार सयंत्र स्थापित करने के इच्छुक हितग्राहियों को बैंक में ऋण के लिए आवेदन देने के पहले आवश्यक भूमि की व्यवस्था करनी होगी। प्रसंस्करण स्थापना के लिए पहले प्रस्ताव बनाकर भेजना होगा। परियोजना प्रस्ताव में दूध, मांस और पशु आहार के लिए गुणवत्ता प्रबंधन इकाई की स्थापना, पैकेजिंग इकाई और उत्पाद के प्रचार का उल्लेख करना जरूरी होगा। आवश्यक होने पर हितग्राही सिडबी (भारतीय लघु उद्योग विकास बैंक) के उद्यमी मित्र पोर्टल पर उपलब्ध एजेंसियों से परामर्श भी ले सकेंगे। हितग्राही सिडबी के उद्यमी मित्र पोर्टल के माध्यम से परियोजना प्रस्ताव प्रस्तुत करेंगे। प्रस्ताव स्वीकृत होने पर लागत के अनुसार 90 प्रतिशत तक लोन स्वीकृत किया जा सकेगा।
 

अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

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ब्याज पर ब्याज माफी योजना : फसल और ट्रैक्टर लोन पर नहीं मिलेगा ब्याज पर ब्याज माफी योजना का लाभ

ब्याज पर ब्याज माफी योजना : फसल और ट्रैक्टर लोन पर नहीं मिलेगा ब्याज पर ब्याज माफी योजना का लाभ

जानें, क्या है यह ब्याज पर ब्याज माफी योजना और इससे किसे मिलेगा फायदा और किसे नहीं? फसल और ट्रैक्टर लोन लेने वाले किसानों को ब्याज पर ब्याज माफी योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा। इसको लेकर हाल ही में वित्त मंत्रालय ने अतिरिक्त एफएक्यू जारी कर इसको स्पष्ट कर दिया है। बता दें कि ब्याज पर ब्याज माफी योजना को लेकर जो संशय बना हुआ था वो वित्त मंत्रालय की ओर से जारी एफएक्यू के बाद खतम हो गया है। वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि कृषि और संबद्ध गतिविधियों से संबधित लोन पर चक्रवृद्धि ब्याज यानी ब्याज-पर- ब्याज माफी योजना का लाभ नहीं मिलेगा। वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को चक्रवृद्धि और साधारण ब्याज के बीच के अंतर के भुगतान से संबंधित अनुग्रह राहत भुगतान योजना पर अतिरिक्त एफएक्यू (बार-बार पूछे जाने वाले सवाल) जारी किया है। मीडिया में प्रकाशित खबरों के आधार पर हम आपको ब्याज पर ब्याज माफी योजना के सभी पहलुओं को समझा रहे हैं ताकि आप इस योजना के सभी तत्थों को समझकर अपने द्वारा लिए गए लोन पर छूट का लाभ उठा सकें। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 क्या है ब्याज पर ब्याज माफी योजना भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने सभी बैंकों और वित्तीय संस्थानों से बीते मंगलवार को कहा था कि वे दो करोड़ रुपए तक के कर्ज के लिए हाल ही में घोषित ब्याज पर ब्याज की माफी योजना को लागू करें। इस योजना के तहत दो करोड़ रुपए तक के कर्ज पर ब्याज के ऊपर लगने वाला ब्याज एक मार्च, 2020 से छह महीने के लिए माफ किया जाएगा। किसानों को फसल और ट्रैक्टर लोन पर इस योजना का लाभ नहीं मिलने का क्या है कारण? वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि इस योजना के तहत कुल आठ क्षेत्र आते हैं। फसल और ट्रैक्टर ऋण कृषि और संबद्ध गतिविधियों के तहत आता है जो इस योजना में शामिल नहीं है। इसलिए फसल और ट्रैक्टर लोन पर इस ब्याज पर ब्याज माफी योजना का लाभ नहीं मिल पाएगा। सिर्फ इन आठ प्रकार के लोन पर ही मिलेगा इस योजना का लाभ वित्त मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि ब्याज पर ब्याज माफी योजना के तहत ऑटो, पर्सनल, क्रेडिट कार्ड, एजुकेशन, होम, कंज्यूमर ड्यूरेबल और एमएसएमई का लोन लेने वाले ग्राहकों को इसका लाभ दिया जाएगा। इन्हीं लोन पर ब्याज पर ब्याज माफी की छूट मिलेगी। 29 फरवरी तक के्रडिट कार्ड पर बकाए के लिए भी मिलेगा लाभ वित्त मंत्रालय ने कहा कि कर्जदारों को 29 फरवरी तक क्रेडिट कार्ड पर बकाये के लिए भी इस योजना का लाभ मिलेगा। एफएक्यू में कहा गया है कि इस राहत के लिए बेंचमार्क दर अनुबंध की दर होगी, जिसका इस्तेमाल क्रेडिट कार्ड जारीकर्ता द्वारा ईएमआई ऋणों के लिए किया जाता है। बैंक तैयार करेंगे ग्राहकों के नाम की लिस्ट ग्राहकों को इस योजना का लाभ देने के लिए सबसे पहले बैंक और वित्तीय संस्थान अपने उन ग्राहकों की लिस्ट तैयार करेंगे, जिन्होंने मोरेटोरियम सुविधा का फायदा नहीं लिया। यानी जिन्हें सरकार के नियमों के अनुसार राहत दी जानी है। इसके बाद में बैंक 1 मार्च से 31 अगस्त के बीच में चुकाए गए कंपाउंट ब्याज और साधारण ब्याज के अंतर को ग्राहक के खाते में डालेंगे। किन लोगों को मिलेगा योजना का लाभ? सरकार की इस स्कीम का फायदा उन ग्राहकों को मिलेगा, जिन्होंने मोरेटोरियम का विकल्प नहीं चुना था। इसके अलावा उन लोगों के पास 2 करोड़ रुपए तक का कर्ज है। यह रकम 5 नवंबर तक ग्राहकों के लोन अकाउंट में डाल देने के लिए कहा गया है। बाद में बैंक और वित्तीय संस्थान इस रकम को सरकार से क्लेम कर सकते हैं। इसी के साथ अगर आपने समय पर ईएमआई चुकाई है तो आपको इस योजना का लाभ मिलेगा। इस योजना के तहत आपको ब्याज पर ब्याज और साधारण ब्याज के बीच का जो अंतर है, वह कैशबैक के तौर पर मिलेगा। एक्स-ग्रेशिया का मतलब यह है कि सरकार अपनी मर्जी से आपको यह रकम दे रही है। इसे आपको लौटाना नहीं है, यह एक तरह से सरकार का गिफ्ट है। ब्याज पर ब्याज के तौर पर जो कैशबैक मिल रहा है, वह आपके लोन पर बैंकों की ओर से वसूली जाने वाली ब्याज दर पर निर्भर करेगा। बता दें कि जिन लोगों ने फरवरी 2020 तक लोन की ईएमआई का भुगतान किया है सिर्फ उन्हीं लोगों को इसका फायदा दिया जाएगा। किन लोगों को नहीं मिलेगा इस योजना लाभ? जिन ग्राहकों के खाते फरवरी अंत तक नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (एनपीए) के तौर पर क्लासिफाई किया जा चुके हैं उन लोगों को इसका लाभ नहीं मिलेगा। इसके अलावा फिक्स्ड डिपॉजिट, शेयर और बॉन्ड पर लिए गए लोन पर भी यह राहत नहीं मिलेगी। ग्राहकों को कितना और कैसे मिलेगा कैश बैक मान लीजिए आपने एक करोड़ रुपए का होम लोन लिया है और आप इस पर 8 प्रतिशत सालाना की दर से ब्याज चुका रहे हैं तो छह महीने में कुल ब्याज बनता है 4 लाख रुपए। ब्याज पर ब्याज बनता है- 16,269 रुपए। इस स्कीम के तहत यह 16,269 रुपए की राशि ही आपको कैशबैक के तौर पर मिलेगी। यह पैसा आपके अकाउंट में 5 नवंबर 2020 तक आ जाएगा। इस छूट के लिए आपको कुछ नहीं करना है। आपने जिससे लोन लिया है, वही आपके अकाउंट में इस राशि को एडजस्ट कर देगा। बैंकों में कॉर्पोरेट सेंटर से सेंट्रलाइज्ड कैल्कुलेशन के बाद सभी खातों में पैसा जमा कर दिया जाएगा। (ये मात्र एक उदाहरण है जिसके द्वारा आपको योजना गणित समझाया गया है, इसे उसी रूप से देखा जाए। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

पीएम कुसुम योजना : किसान धोखाधड़ी से बचने के लिए इस नंबर पर करें कॉल

पीएम कुसुम योजना : किसान धोखाधड़ी से बचने के लिए इस नंबर पर करें कॉल

जानें, फर्जी वेबसाइट्स किस तरह दे रही हैं किसानों को धोखा, क्या रखें सावधानी? पीएम कुसुम योजना के नाम पर किसानों से रुपए ठगने के मामले सामने आने के बाद सरकार ने फिर से एडवाइजरी जारी कर किसानों को ऐसी बेवसाइटों से सावधान रहने को कहा है जो पीएम कुसुम योजना में पंजीकरण कराने के नाम पर किसान से पैसा लेती हैं। इसके लिए सरकार ने किसानों को पुरानी एडवाइजरी एक बार फिर से जारी कर ऐसे लोगों व ऐसी ऑनलाइन चल रही बेवसाइटों से सचेत रहने को कहा है। आजकल देखने में आ रहा है कि सोशल मीडिया पर कई फर्जी बेवसाइट पीएम कुसुम योजना के नाम पर चल रही हैं। इसमें खास बात ये हैं कि ये बेवसाइट अपने को सरकारी होने का दावा करती हैं जिससे हमारे भोले-भाले गांव के किसान इनके झांसे में आ जाते हैं और फिर शुरू होता है इन बेवसाइटों के माध्यम से किसान को ठगने का खेल। ऐसी कई शिकायतें पहुंचने के बाद सरकार ने किसानों को ऐसी बेवसाइटों से सावधान रखने की सलाह देने के साथ ही कुछ एडवाइजरी भी जारी की है जिसे हर किसान को जानना बेहद जरूरी है ताकि संभावित हानि से बचा जा सके। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 फर्जी कंपनियां किसानों को दे रही है धोखा एमएनआरई ने पीएम कुसुम योजना के नाम पर किसानों को धोखा देने वाली इन अवैध वेबसाइटों के झांसों से बचाने के लिए 18 मार्च 2019, 3 जून 2020 और 10 जुलाई 2020 को लाभार्थियों के लिए एडवाइजरी जारी कर सतर्क रहने की सलाह दी। मंत्रालय ने कहा था कि किसान ऐसी किसी भी वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन फीस जमा नहीं करें और ना ही कोई जानकारी साझा करें। एमएनआरई की आधिकारिक वेबसाइट www.mnre.gov.in पर पीएम कुसुम योजना के बारे में पूरी जानकारी दी गई है। इन फर्जी वेबसाइटों से किसान रहें सावधान अक्षय ऊर्जा मंत्रालय ने पीएम कुसुम योजना का लाभ लेने वाले किसानों को ठगी से बचाने के लिए फर्जी वेबसाइटों के बारे में एक बार फिर सतर्क किया है। जांच के दौरान मंत्रालय ने पाया कि फर्जी वेबसाइट www.pmkusumyojana.co.in और www.punjabsolarpumps.com किसानों को ठग रही हैं। इस पोर्टल ने पीएम कुसुम योजना के लिए रजिस्ट्रेशन पोर्टल होने का दावा किया है। केंद्र सरकार ने फिर लोगों को सलाह दी है कि वे इन फर्जी वेबसाइटों को रुपए या जानकारी नहीं दें। कुसुम योजना 2020 : ऐसे शुरू होता है इन फर्जी बेवसाइटों से ठगी का खेल किसान को इन फर्जी वेबसाइटों से बचने के लिए सबसे पहले इन वेबसाइटों की हकीकत जानना जरूरी है। इसके लिए आप सबसे पहले इन वेबसाइटों पर अपनी कोई भी निजी जानकारी नहीं दें। जानकारी साझा करने से पहले अपने सपीप के कृषि विभाग से अवश्य संपर्क करें और इस वेबसाइट के बारे में जानकारी दें ताकि वे आपकों सही सलाह दे सके। ध्यान रहे कई फर्जी वेबसाइट सरकारी होने का दावा करने के साथ ही किसानों को मोटी सब्सिडी का लालच देकर उनसे निजी जाकारियां हासिल कर लेती है और बाद में पंजीकरण के नाम पर और इसके बाद पम्प या सौलर प्लांट लागाने को लेकर मोटी रकम वसूल लेती है। पर इसके बाद भी किसान को सौलर प्लांट स्कीम का लाभ नहीं मिल पाता। इसके अलावा ये वेबसाइटस् किसान व आम जनता से जुड़ी निजी जानकारियों को अन्य कंपनियों को भी उपलब्ध करती है जिनकी ऐवज में इन्हें काफी रकम अन्य कंपनियों से मिलती है। इस तरह ये वेबसाइट खुद तो ठगी करती ही साथ अन्य कंपनियों को आपकी निजी जानकारियों को शेयर कर देती है जिससे आगे अन्य कंपनियां भी इन आपकी निजी जानकारियों से लाभ लेना शुरू कर देती है। इस तरह इन फर्जी वेबसाइट्स का खेल एक नेटवर्क की तरह कार्य करता है। इसलिए किसान व आम जनता इन वेबसाइटों के झांसे में न आएं और सही जानकारी प्राप्त करके ही योजना के लिए आवेदन करें। तो फिर पीएम कुसुम योजना की सही जानकारी के लिए क्या करें / पीएम कुसुम योजना हेल्पलाइन नंबर कई वेबसाइट फर्जी पंजीकरण पोर्टल के माध्यम से किसानों से रुपए तथा निजी जानकारी एकत्रित कर रही है। आम जनता को किसी भी नुकसान से बचाने के लिए, अक्षय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) ने पहले लाभार्थियों और आम जनता को ऐसी किसी भी वेबसाइटों पर पंजीकरण शुल्क नहीं जमा करने और अपनी जानकारी साझा करने से सतर्क रहने की सलाह दी थी। इस संबंध में एमएनआरई मंत्रालय का कहना है कि सरकार किसी भी वेबसाइट के जरिये पीएम कुसुम योजना के लाभार्थियों का पंजीकरण नहीं कर रही है। लिहाजा, पंजीकरण करने का दावा करने वाली तमाम वेबसाइट्स संदिग्ध और धोखाधड़ी करने वाली हैं। मंत्रालय ने अपील की है कि ऐसे किसी फर्जी वेबसाइट के बारे में जानकारी मिलने पर तुरंत जानकारी सूचना दें। योजना के लाभार्थियों की पात्रता और योजना को लागू करने संबंधी पूरी जानकारी मंत्रालय के वेबसाइट पर दी गई है। इसके अलावा मंत्रालय ने एक टोल फ्री हेल्प लाइन नंबर 1800-180-3333 भी जारी किया है। क्या है पीएम कुसुम योजना और इससे कैसे मिलती है सब्सिडी / कुसुम योजना ऑनलाइन आवेदन देश में किसानों को उर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर करने के लिए तथा अक्षय (सौर) ऊर्जा को बढ़ाने के लिए वर्ष 2018-19 में केंद्र सरकार ने प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाअभियान (कुसुम) योजना की शुरुआत की थी। इसके तहत किसानों को कृषि पंपों के सौरीकरण के लिए 60 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है। किसानों को सब्सिडी पर सोलर पंप देने के लिए राज्य सरकारों के द्वारा पंजीकरण करवाए जाते हैं जिसमें कुछ राज्य सरकारें अपनी तरफ से भी किसानों को सब्सिडी देती है जिससे कुछ राज्यों में किसानों को 60 प्रतिशत से अधिक सब्सिडी भी मिलती है। पीएम-कुसुम योजना के तहत केंद्र सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) द्वारा प्रधान मंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (प्रधानमंत्री-कुसुम) योजना के तहत कृषि पंपों के सौरीकरण के लिए 60 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है। इस योजना को राज्य सरकार के विभागों द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है जिसमें किसानों को केवल बाकी का 40 प्रतिशत ही विभाग को जमा करवाना होता है। इस योजना की विस्तार से जानकारी के लिए अपने निकटतम कृषि विभाग से संपर्क करें या एमएनआरई की आधिकारिक वेबसाइट www.mnre.gov.in पर जाकर पीएम कुसुम योजना के बारे में पूरी जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

मत्स्य प्रशिक्षण और विस्तार योजना : मछलीपालन करने वाले किसानों की आय बढ़ाने में हैं मददगार

मत्स्य प्रशिक्षण और विस्तार योजना : मछलीपालन करने वाले किसानों की आय बढ़ाने में हैं मददगार

मत्स्य पालन विभाग छत्तीसगढ़ द्वारा मछलीपालन की उन्नत तकनीक का दिया जाता है प्रशिक्षण, मिलते हैं कई फायदें मत्स्य पालन विभाग की ओर से मछली पालन करने वाले किसानों के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही है। इनमें से मत्स्य पालन का प्रशिक्षण देने के साथ ही इसके विस्तार के प्रयास किए जा रहे हैं सरकार की ओर से किए जा रहे हैं। इन योजनाओं को चलाने के पीछे सरकार का उद्देश्य यह है कि किसानों को खेती के साथ-साथ मछलीपालन भी करें ताकि उनकी आय में बढ़ोतरी हो सके। इसके लिए किसानों को मछलीपालन का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। वहीं समुद्र किनारे रहने वाले मछुआरे भी मत्स्य पालन विभाग की योजनाओं से लाभान्वित हो रहे हैं। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से मत्स्य पालन विभाग के माध्यम से कई योजनाओं का संचालन किया जा रहा है जो मछलीपालन करने वाले किसानों के लिए बेहद लाभकारी है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 मत्स्य प्रशिक्षण और विस्तार योजना छत्तीसगढ़ : शिक्षण-प्रशिक्षण ( मछुआरों का 10 दिवसीय प्रशिक्षण ) योजना मत्स्य पालन विभाग छत्तीसगढ़ की ओर से मछुआरों का 10 दिवसीय प्रशिक्षण आयोजित किया जाता है। इसके तहत सभी श्रेणी के मछुआरों को मछली पालन की तकनीक एवं मछली पकडऩे, जाल बुनने, सुधारने एवं नाव चलाने का प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है। इस 10 दिवसीय सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक प्रशिक्षण कार्यक्रम अंतर्गत प्रति प्रशिक्षणार्थी प्रशिक्षण व्यय रू. 1250/- स्वीकृत है, जिसके अन्तर्गत रुपए 75/- प्रतिदन प्रति प्रशिक्षणार्थी के मान से शिष्यावृत्ति, रुपए 400/- की लागत मूल्य का नायलोन धागा तथा रुपए 100/- विविध व्यय शामिल है। शिक्षण-प्रशिक्षण ( मछुआरों का अध्ययन भ्रमण ) योजना प्रगतिशील मछुआरों को उन्नत मछली पालन का प्रत्यक्ष अनुभव कराने के उद्देश्य से मत्स्य पालन विभाग की ओर से इस प्रशिक्षण का आयोजन किया जाता है। इसके तहत प्रगतिशील मछुआरों राज्य के बाहर अध्ययन भ्रमण पर भेजा जाता है। इस योजना का उद्देश्य सामान्य/अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति वर्ग के प्रगतिशील मछुआरों को उन्नत मछली पालन का प्रत्यक्ष अनुभव कराने हेतु देश के अन्य राज्यों में अपनाई जा रही मछली पालन तकनीकी से परिचित कराना है। इस योजना के तहत प्रति मछुआरा रुपए 2500/- की लागत पर 10 दिवसीय अध्ययन भ्रमण प्रशिक्षण पर व्यय किया जाता है। स्वीकृत योजनानुसार प्रति प्रशिक्षणार्थी रुपए 1000/- शिष्यावृत्ति, रुपए 1250/- आवागमन व्यय तथा रुपए 250/- विविध व्यय का प्रावधान है। शिक्षण-प्रशिक्षण ( रीफ्रेशर कोर्स ) योजना मत्स्य विभाग छत्तीसगढ़ की ओर से संचालित शिक्षण प्रशिक्षण (रीफ्रेशर कार्स) योजना का उद्देश्य पूर्व से प्रिशिक्षित मछुआरो को पुन: अद्यतन करना है। इसके तहत सभी वर्ग के पूर्व से प्रिशिक्षित मछुआरों को पुन: उन्नत मछली पालन का प्रिशिक्षण देने हेतु एवं मछली पालन तकनीकी से परिचित कराने के उद्देश्य से प्रति मछुआरा रुपए 1000/- की लागत पर 03 दिवसीय रीफ्रेशर कोर्स प्रशिक्षण दिया जाता है। इसके अलावा मत्स्य विभाग छत्तीसगढ़ की ओर मत्स्य पालन प्रसार के लिए कई योजनाएं चलाई जा रही है जिनका मछली पालक किसान लाभ लेकर अपनी आय बढ़ सकते हैं। झींगा पालन योजना मछली पालकों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से मस्य पालन विभाग छत्तीसगढ़ की ओर से झींगा पालन योजना चलाई जा रही है। इस योजना के तहत अनुसूचित जाति/जन जाति के मत्स्य पालकों को मीठे जल में पॉलीकल्चर झींगा पालन तथा आलंकारिक मत्स्योद्योग विकास की प्रसार योजनान्तर्गत नई योजना क्रियान्वित होगी जिसके तहत हितग्राहियों को वस्तु विषय के रूप में क्रमश: रुपए 15000/- एवं 12000/- का तीन वर्षो में आर्थिक सहायता (अनुदान) देना प्रावधानित है। मौसमी तालाबों में मत्स्य बीज संवर्धन योजना मत्स्य विभाग छत्तीसगढ़ की इस योजना का उद्देश्य छोटे मौसमी तालाबों, पोखरों को उपयोगी बनाकर मत्स्य बीज संवर्धन कर आय में वृद्धि करना है। इस योजना के तहत मत्स्य बीज संवर्धन कर मत्स्य बीज विक्रय से स्वरोजगार उपलब्ध कराने में सहायता की जाती है। इसके तहत 0.5 हेक्टर के तालाब में प्रति हितग्राहियों को मत्स्य बीज संवर्धन, तालाब सुधार एवं इनपुट्स मत्स्य बीज आदि हेतु रुपए 30000/- की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाती है । नाव जाल या जाल क्रय सुविधा मत्स्य प्रसार के अंतर्गत नाव जाल या जाल क्रय करने की सुविधा दी जाती है। इस योजना का उद्देश्य सभी श्रेणी के मछुआरों को मत्स्याखेट हेतु सहायता प्रदान करना है। इस योजना में तालाबों, जलाशयों अथवा नदियों में मत्स्याखेट करने वाले अनुसूचित जाति के सक्रिय मछुआरों को नाव, जाल उपकरण खरीदने करने हेतु प्रति मछुआरा रुपए 10000/- की सहायता उपलब्ध कराई जाती है। यह सहायता वस्तु विशेष के रूप में दी जाती है। फिंगरलिंग क्रय कर संचयन पर सहायता मत्स्य पालन प्रसार योजना के तह फिंगरलिंग क्रय कर संचयन पर सहायता दी जाती है। इसका उद्देश्य तालाबों में फिंगरलिंग क्रय कर संवर्धन कर मत्स्य उत्पादन में वृद्धि करना और अधिक मत्स्य उत्पादन से अधिक आय अर्जित करना है। इस योजना के तहत मछलीपालक किसानों द्वारा वर्तमान में संचित मत्स्य बीज अर्थात् 10000 फ्राई प्रति हेक्टर के स्पान पर क्रय कर 5000 फिंगरलिंग प्रति हैक्टर डालकर मत्स्य उत्पादन में वृद्धि होगी। साथ ही आहार आय अधिक होगी। ऐसी स्थिति में मत्स्य कृषक को पांच वर्षो तक रुपए 2000/- प्रति वर्ष कुल रुपए 1000/-की सहायता प्रदान की जाती है। पंजीकृत मत्स्य सहकारी समितियों को ऋण/अनुदान योजना इस योजना के तहत सभी वर्ग की पंजीकृत मछुआ सहकारी समितियों को मछली पालन हेतु उपकरण एवं अन्य प्रयोजनों यथा तालाब पट्टा, मत्स्य बीज, नाव-जाल आदि हेतु पात्रतानुसार अनुदान उपलब्ध करवाया जाता है। यह योजना मछुआरों की पंजीकृत समितियों को मछली पालन हेतु मध्य प्रदेश मछुआ सहकारी समितियों (ऋण/अनुदान) नियम-1972 के अंतर्गत प्रदेश में सभी वर्ग की पंजीकृत मछुआ सहकारी समितियों को मछली पालन हेतु उपकरण एवं अन्य प्रयोजनों तथा तालाब पट्टा, मत्स्य बीज, नाव जाल क्रय इत्यादि हेतु विद्यमान नियमों के तहत पात्रतानुसार ऋण/अनुदान के लिए आर्थिक सहायता / सहायक अनुदान मद से प्रावधानित राशि व्यय की जाती है। योजनान्तर्गत लगातार 3 वर्षो में अधिकतम रुपए 3 लाख की सहायता राशि प्रति सहकारी समिति आइटमवार सीमा के अधीन दिए जाने का प्रावधान है। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

समग्र गव्य विकास योजना : डेयरी उद्योग के लिए 75 प्रतिशत तक सब्सिडी

समग्र गव्य विकास योजना : डेयरी उद्योग के लिए 75 प्रतिशत तक सब्सिडी

दूध के लिए गाय-भैंस पालो, 75 प्रतिशत पैसा सरकार देगी अगर आप लोगों को शुद्ध दूध उपलब्ध कराने के साथ-साथ अच्छी आमदनी कमाना चाहते हैं तो डेयरी उद्योग में आपके लिए अपार संभावनाएं हैं। डेयरी उद्योग से देश के किसानों, युवाओं व बेरोजगारों के जीवन को संवारने के लिए केंद्र व विभिन्न राज्य सरकारें अपने-अपने स्तर पर कई योजनाएं संचालित कर रहे हैं, जिनका फायदा आप उठा सकते हैं। ट्रैक्टर जंक्शन की इस पोस्ट में आपको समग्र गव्य विकास योजना के बादे में जानकारी दी जा रही है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 सरकार दस दुधारू पशुओं के लिए देगी 8.96 लाख रुपए, आवेदन की अंतिम तिथि 25 अक्टूबर इस योजना के तहत सरकार दस दुधारू पशुओं की डेयरी खोलने के लिए 8 लाख 96 हजार रुपए की सहायता उपलब्ध करा रही है। इस योजना में 75 फीसदी तक सब्सिडी भी मिल रही है। बिहार सरकार की समग्र गव्य विकास योजना इन दिनों बहुत लोकप्रिय हो रही है। समग्र गव्य विकास योजना बिहार 2020-21 में आवेदन कोरोना काल में कृषि सेक्टर को छोडक़र सभी सेक्टरों में मंदी का आलम रहा। देश के नीति विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि और उससे जुड़े क्षेत्र ही बहुत बड़े स्तर पर रोजगार के अवसर उत्पन्न कर सकते हैं। अगर आधुनिक तरीके से पशुपालन किया जाए तो अच्छी खासी आमदनी प्राप्त की जा सकती है। केंद्र व राज्य सरकार समय-समय पर विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सब्सिडी उपलब्ध कराती है। बिहार सरकार की ओर से युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से डेयरी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए समग्र ग्रव्य विकास योजना के तहत 50 से 75 फीसदी तक की सब्सिडी उपलब्ध कराई जा रही है। इसके लिए आवेदन 25 अक्टूबर तक स्वीकार किए जाएंगे। इस योजना में 2, 4, 6 और 10 दुधारू पशुओं के लिए अलग-अलग श्रेमियों में सब्सिडी उपलब्ध कराई जा रही है। बिहार में इस योजना का संचालन पशु एवं मत्स्य संसाधन विभाग की ओर से किया जा रहा है। समग्र गव्य विकास योजना की पात्रता इस योजना का लाभ सभी वर्गों के भूमिहीन, किसानों, लघु किसानों, सीमांत सिकानों, गरीबी रेखा से नीचे आने वाले किसानों, शिक्षित बेरोजगार युवक-युवतियों को मिलेगा। समग्र गव्य विकास योजना का क्रियान्वयन बिहार राज्य के सभी जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में ही किया जाएगा। जिल गव्य विकास पदाधिकारी / संबंद्ध जिला के जिला गव्य अधिकारी नोडल अधिकारी बनाए गए हैं। जो भी व्यक्ति इस योजना का लाभ उठाना चाहते हैं वो अपना आवेदन जिला गव्य विकास कार्यालय/संबंधित जिला के जिला पशुपालन कार्यालय (गव्य प्रकोष्ठ) में जमा करा सकते हैं। समग्र गव्य विकास योजना में सब्सिडी इस योजना का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में सभी वर्गो के भूमिहीन किसानों, दुग्ध उत्पादकों व शिक्षित बेरोजगारों को स्वरोजगार के अवसर सृजित कर उन्हें विकास की मुख्यधारा में शामिल करना है। ताकि वे इस ऋण की राशि से अपनी डेयरी इकाई खड़ी कर सके और दूध उत्पादन में बढ़ोत्तरी कर सके। समग्र गव्य विकास योजना के तहत गाय पालन पर सामान्य किसानों को 50 प्रतिशत तथा आरक्षित वर्ग के किसानों को 75 प्रतिशत तक सब्सिडी का प्रावधान है। दो दुधारू मवेशी की योजना की लागत 1 लाख 60 हजार, 4 दुधारू मवेशी के लिए 3 लाख 38 हजार 400, 6 दुधारू मवेशी के लिए 5 लाख 32 हजार 600 और 10 दुधारू मवेशी के लिए 8 लाख 96 हजार रुपये निर्धारित है। इसी राशि पर संबंधित जाति के श्रेणी के आधार पर 50 और 75 प्रतिशत तक सब्सिडी देने की योजना है। यह पिछले कई सालों से यह योजना चल रही है। बिहार में फिलहाल कोरोना संकट के कारण इस साल योजना देर से शुरू की गई है। आवेदनों पर ‘पहले आओ पहले पाओ’ के तर्ज पर विचार किया जाएगा। समग्र गव्य विकास योजना में आवेदन के लिए जरुरी दस्तावेज आवेदन पत्र की दो मूल प्रति आधार कार्ड / फोटो पहचान पत्र / आवासीय प्रमाण पत्र की स्वहस्ताक्षरित दो छाया प्रति। जमीन संबंधी रसीद की छाया प्रति। परियोजना प्रतिवेदन की प्रति। बैंक का डिफॉल्टर नहीं होने के संबंध में शपथ पत्र। स्वलागत योजना हेतु बैंक/ डाकघर में पूर्ण राशि उपलब्धता के संबंध में पासबुक की छाया प्रति । शराब बंदी से प्रभावित होने के संबंध में प्रमाण, डेयरी से संबंधित प्रशिक्षण प्राप्त करने, दुग्ध समिति की सदस्यता का प्रमाण पत्र की छाया प्रति। समग्र गव्य विकास योजना में चयन प्रकिया इस योजना में पात्र लोगों के चयन में बहुत सतर्कता बरती जाती है। जिला गव्य विकास पदाधिकारी के पास जमा हुए आवेदन पत्रों की स्क्रीनिंग होती है। स्क्रीनिंग जिला अग्रणी बैंक पदाधिकारी के अध्यक्षता में गठित स्क्रीनिंग समिति द्वारा किया जाता है। इस समिति में जिला गव्य विकास पदाधिकारी, सदस्य सचिव शामिल होते हैं। इसके अलावा जिला पशुपालन पदाधिकारी, उद्योग विभाग के जिला स्तरीय पदाधिकारी एवं संबंधितजिला परिषद् के प्रतिनिधि सदस्य के रूप में शामिल होते हैं। स्क्रीनिंग समिति की बैठक आवेदन पत्रों की प्राप्तियों की अंतिम तिथि के उपरांत आयोजित की जाएगी, जिसमें प्राप्त आवेदनों की समीक्षा/जांच आवेदक की उपस्थिति में किया जायेगा। आवेदक के साक्षात्कार के पश्चात ऋण स्वीकृति के संबंध में गठित समिति द्वारा निर्णय लिया जायेगा एवं योग्य ऋण आवेदन पत्रों को अनुशंसा के साथ संबंधित बैंक को ऋण स्वीकृति के लिए भेज दिया जाएगा। ऋण स्वीकृत करने वाले संबंधित बैंक का यह दायित्व है कि अनुशंसित आवेदनों पर एक माह के अंदर निर्णय लेते हुए आवेदक एवं संबंधित जिला के अग्रणी बैंक, जिला गव्य विकास कार्यालय एवं जिला परिषद् को सूची के साथ सूचना उपलब्ध कराएं। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और 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