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विश्व मात्स्यिकी दिवस : अब मछुआरों को भी मिलेगी किसानों की तरह सुविधाएं

विश्व मात्स्यिकी दिवस : अब मछुआरों को भी मिलेगी किसानों की तरह सुविधाएं

ब्याज मुक्त ऋण व बिजली दरों में मिलेगी छूट, मछुआरों को चेक व प्रशिस्त पत्र देकर किया सम्मानित

सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए कई योजनाएं संचालित कर रही है। लॉकडाउन के बाद से अब तक सरकार ने किसानों के लिए कई घोषणाएं भी की और कई सुविधाएं भी किसानों को दी गई जैसे ब्याज मुक्त ऋण व बिजली दरों में छूट आदि। अब सरकार मछुआरों को भी किसानों की तरह सुविधाएं प्रदान कर उनकी आय बढ़ाने का प्रयास कर रही है। हाल ही में विश्व मात्स्यिकी दिवस के अवसर पर केंद्र एवं राज्य सरकारों द्वारा विभिन्न योजनाओं के तहत मछुआरों को अनुदान दिए गए। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि राज्य सरकार छत्तीसगढ़ में मछली पालन को खेती का दर्जा देने की पहल करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती-किसानी की तरह मछली पालन के लिए कोऑपरेटिव बैंक से ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराने और किसानों को दी जाने वाली बिजली दरों में छूट की भांति मछली पालन करने वाले निषाद, केंवट और ढीमर समाज के लोगों को भी छूट दी जाएगी। कार्यक्रम के दौरान मछुआरों को मोटरसाइकिल सह आईस बाक्स का वितरण किया गया। 

 

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मछुआरों को मोटरसाइकिल व अनुदान चेक का किया वितरण

विश्व मात्स्यिकी दिवस के मौके पर 21 नवंबर को मुख्यमंत्री निवास कार्यालय में 11 बजे से मछुआ सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 15 मछुआरों को मोटरसाइकिल सह आईस बॉक्स तथा 2 मछुआरों को ऑटो सह आईस बॉक्स का वितरण किया। साथ ही इस मौके पर 10 मछुआ हितग्राहियों को मछुआ आवास योजना के अंतर्गत प्रथम किस्त की अनुदान राशि का चेक भी प्रदान किया गया। 

 


मत्स्य पालन के क्षेत्र के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के लिए किया सम्मानित

मत्स्य पालन क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्य विश्व मात्स्यिकी दिवस के अवसर पर भारत शासन द्वारा ए.पी. सिम्पोजियम हॉल, पूसा कैंपस नई दिल्ली में समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान, मत्स्य पालन क्षेत्र में पहली बार, भारत सरकार ने 2019-20 के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्यों ओडिशा (समुद्री राज्यों के बीच), उत्तर प्रदेश (अंतर्देशीय राज्यों के बीच) और असम (पहाड़ी और पूर्वोत्तर राज्यों के बीच) से सम्मानित किया गया । इसमें छत्तीसगढ़ राज्य के मेसर्स एम.एम.फिश सीड कल्टीवेशन प्राइवेट लिमिटेड, माना, जिला रायपुर को बेस्ट फिशरीज इन्टरप्राइज़ेस के तहत दो लाख रुपए का नकद पुरस्कार तथा प्रशस्ति पत्र एवं मेसर्स एम.आई.के कम्पनी, सिहावा, जिला धमतरी को बेस्ट प्रोप्राईटरी फर्म संवर्ग के तहत एक लाख रुपए का नकद पुरस्कार एवं प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। 


मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य द्वारा किए गए प्रयास

मीडिया में प्रकाशित खबरों के अनुसार कृषि मंत्री श्री रविन्द्र चौबे ने कहा है कि छत्तीसगढ़ राज्य में मछली पालन के क्षेत्र में प्रदेश के मत्स्य कृषक नवीनतम तकनीक को अपनाते हुए सफलता अर्जित कर रहे हैं। मत्स्य बीज उत्पादन के क्षेत्र में प्रदेश आत्मनिर्भर हैं। विगत दो वर्षो में प्रदेश में 13 प्रतिशत की वृद्धि के साथ मत्स्य बीज उत्पादन 251 करोड़ स्टैण्डर्ड फ्राई से 267 करोड़ स्टैण्डर्ड फ्राई का उत्पादन में किया हैं। देश में राज्य का मत्स्य बीज उत्पादन के क्षेत्र में छठवां स्थान हैं। राज्य के मत्स्य कृषक प्रदेश में आवश्यक मत्स्य बीज प्रदाय करने के अतिरिक्त मध्यप्रदेश, उड़ीसा, महाराष्ट्र, आध्रप्रदेश एवं बिहार प्रदेशों को भी निजी क्षेत्र द्वारा मत्स्य बीज की आपूर्ति कर रहे हैं। यह छत्तीसगढ़ के लिए गौरव की बात है।

  • संचालक मछली पालन ने बताया कि आधुनिक तकनीक का उपयोग कर राज्य के मत्स्य कृषक 6-7 मेट्रिक टन तक मत्स्य उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं। विगत दो वर्षो में प्रदेश में 9 प्रतिशत की वृद्धि के साथ मत्स्य उत्पादन 4.89 लाख मिटरिक टन से 5.31 लाख मिटरिक टन का उत्पादन हुआ हैं। देश में राज्य का मत्स्य उत्पादन के क्षेत्र में भी छठवां स्थान हैं।
  • राज्य में विगत दो वर्षो में मत्स्य कृषकों द्वारा स्वयं की भूमि पर 1000 तालाबों का निर्माण कर पंगेशियस प्रजाति का उत्पादन किया जा रहा है। प्रदेश के प्रगतिशील मत्स्य कृषक एवं जिला कांकेर के कृषकों द्वारा समूह में तालाबों का निर्माण कर विशेषकर पंगेशियस मत्स्य प्रजाति का नवीनतम तकनीक के साथ-साथ पूरक आहार का उपयोग कर 60-70 मेट्रिक टन प्रति हेक्टेयर तक मत्स्य उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं जिससे प्रदेश वासियों को स्वस्थ्य प्रोटीन युक्त ताजा आहार उपलब्ध हो रहा हैं।
  • राज्य में मत्स्य उत्पादन एवं उत्पादकता में वृद्धि हेतु तीव्र बढ़वार वाली मत्स्य ‘‘तिलापिया‘ का उत्पादन प्रारंभ हो चुका है। निजी क्षेत्र में एक तिलापिया बीज उत्पादन हेतु हैचरी रायपुर में स्थापित की गई हैं प्रदेश में प्रति दिवस लगभग 20 टन तिलाबिया की मांग है। तिलापिया मत्स्य का निर्यात अन्य राज्यों जैसे केरल, उत्तर प्रदेश, मघ्य प्रदेश को किया जा रहा है। प्रदेश में इस वर्ष 3.00 करोड़ तिलापिया मत्स्य बीज निजी क्षेत्र में उत्पादित किया गया है।
  • राज्य के मध्यम एंव बड़ेे जलाशयों में मत्स्य की शत-प्रतिशत प्राप्ति सुनिश्चित करती है केज कल्चर तकनीक। इस तकनीक में जलाशयों में 6x4x4 मीटर के केज बनाकर तीव्र बढ़वार वाली मत्स्य जैसे कि ‘पंगेशियस‘ एवं ‘तेलापिया‘ का पालन किया जाता है। प्रति केज 3000-5000 किलो मत्स्य उत्पादित की जाती है। अब तक प्रदेश के 11 जिलों में 1400 केज स्थापित हो चुके है।
  • प्रदेश के सबसे बड़े जलाशय हसदेव बांगो, कोरबा में 1000 केज की परियोजना स्वीकृत की गई है। इन्हें स्थापित कर प्रति हितग्राही 05-05 केज की इकाई एक-एक हितग्राही को मत्स्य पालन हेतु आबंटित की जावेगी। उक्त केज स्थानीय अनुजनजाति के मत्स्य पालकों को प्रदाय कर शासन की ओर से 40 से 60 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। इसमें डुबान क्षेत्र में आने वाले व्यक्तियों को प्राथमिकता दी जाएगी।
  • प्रदेशवासी मछलीपालन के क्षेत्र में क्रियान्वित नवीनतम तकनीक जैसे एकीकृत मत्स्य पालन, सघन मत्स्य पालन, पंगास पालन, रिसर्कलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (आर.ए.एस.) तकनीक के माध्यम से कम क्षेत्र एवं कम जलक्षेत्र में पानी को निरन्तर परिशुद्धि कर मत्स्य पालन अपनाकर सफलता अर्जित कर रहे हैं, जिससे प्रदेश का मत्स्य उत्पादन निरंतर बढ़ रहा है। प्रदेश की आर.एस.ए. तकनीक का अन्य प्रदेश से मछलीपालन अधिकारी एवं प्रगतिशील मत्स्य कृषक यहां प्रयोग की नई तकनिकों का अध्ययन एवं परीक्षण कर प्रेरणा प्राप्त कर रहे हैं।
  • प्रदेश में नवीनतम तकनीक से कम क्षेत्र में छोटी-छोटी टंकिया स्थापित कर कम जलक्षेत्र में परिपूरक आहार का उपयोग कर मछली पालन कर अधिक उत्पादन लेने हेतु बायोफ्लॉक तकनीक संचालित किये जाने हेतु शासन द्वारा इस वर्ष से मत्स्य कृषकों को प्रोत्साहन करने हेतु योजना स्वीकृत की गई है। जिसके तहत् प्रदेश वासियों को राशि 7.50 लाख रूपए लागत की इकाई स्थापना पर लागत राशि पर 40 प्रतिशत आर्थिक सहायता दिया जाने का प्रावधान रखा गया है। 


इधर कानपुर में मछलियों के अति दोहन पर जताई चिंता

इधर कानपुर में में विश्व मात्स्यिकी दिवस के अवसर पर विकास भवन परिसर के गांधी सभागार में मुख्य अतिथि मुख्य विकास अधिकारी सौम्या पांडेय की उपस्थिति में आयोजित कार्यक्रम में मछलियों के अतिदोहन पर चिंता जताई गई और मछलियों की कई प्रजातियों के नष्ट होने का खतरा बताया गया। कार्यक्रम के दौरान मुख्य विकास अधिकारी ने कहा कि मछलियों अति दोहन न किया जाय क्योंकि इससे मत्स्य प्रजातियों के नष्ट होने का खतरा है। प्रधानमंत्री मत्स्य सम्पदा योजना एक महत्वाकांक्षी योजना है। इससे पूरे देशभर में 55 लाख लोगों को रोजगार मिला है। मत्स्य पालन लाभदायक व्यवसाय है। कार्यक्रम में मुख्य कार्यकारी अधिकारी मत्स्य पालक विकास अभिकरण अधिकारी डॉ. रणजीत सिंह ने अवगत कराया कि विश्व मात्स्यिकीय दिवस के अवसर पर विभागीय योजनाओं, वैज्ञानिक विधि से मत्स्य पालन, उत्पादन, एवं अन्य तकनीकी जानकारियों से अवगत कराया गया।

इसके अलावा यह भी अवगत कराया गया कि 1.00 हेक्टेयर जलक्षेत्र में छह कार्प प्रजातियों के मछली पालन से 50 कुन्तल मछली का उत्पादन प्रतिवर्ष होता है तथा उक्त मत्स्य उत्पाद के विक्रय से छह लाख रुपए का लाभ एक वर्ष में होता है। मुख्य विकास अधिकारी द्वारा मत्स्य पालन में आ रही समस्याओं के समाधान हेतु मत्स्य विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया गया। इस अवसर पर जनपद में मत्स्य पालन के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले अनूप कुमार कटियार एवं प्रमोद कुमार को प्रशस्ति पत्र व शाल देकर सम्मानित किया गया। इसके अलावा विकास खंड राजपुर से तुलाराम, विकास खंड मैथा से महेश कश्यप, श्याम प्रकाश बाथम को शाल देकर सम्मानित किया गया।  

 

 

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देसी गाय की उन्नत नस्लें : भारत में सबसे ज्यादा दूध देने वाली देसी गायों की 10 नस्लें

देसी गाय की उन्नत नस्लें : भारत में सबसे ज्यादा दूध देने वाली देसी गायों की 10 नस्लें

देसी गाय : जानें, कौन-कौनसी है ये नस्ले और कितना दूध देती हैं? दूध और मांस के लिए पशुओं का पालन दुनिया भर में किया जाता रहा है। इसी के साथ भारत में प्राचीन काल से ही पशुपालन व्यवसाय के रूप में प्रचलित रहा है। वर्तमान में भी यह जारी है। भारत में करीब 70 प्रतिशत आबादी गांव में निवास करती है। गांव में रहने वाले लोगों का प्रमुख व्यवसाय खेती और पशुपालन ही है। सरकार की ओर से भी पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए योजनाएं चलाई जा रही है। वहीं पशुओं की चिकित्सा के लिए गांव में पशु चिकित्सालय भी खोले गए हैं। इस सब के बाद भी आज पशुपालन करने वाले किसानों को समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। इनके सामने सबसे बड़ी समस्या देसी गाय के पालन को लेकर है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रैक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 जानें, कैसे होती है देसी गाय की पहचान भारतीय देसी गाय की नस्लों की पहचान सरल है, इनमें कूबड़ पाया जाता है, जिसके कारण ही इन्हें कूबड़ धारी भारतीय नस्लें भी कहा जाता है, अथवा इन्हें देसी नस्ल के नाम से ही पुकारा जाता है। अधिक दूध उत्पादन वाली देसी गायें देसी गाय की कौनसी प्रजाति का चयन किया जाए ताकि अच्छा दूध उत्पादन मिल सके। तो आज हम इसी विषय को लेकर आए है कि आप देसी गाय की कौनसी किस्मों का चयन कर अच्छा दूध उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं। यहां यह बात ध्यान देने वाली है कि उसी स्थान की नस्ल की गाय यदि उसी क्षेत्र में पाला जाए और संतुलित आहार दिया जाए तो बहुत अधिक फायदा पहुंचाती है। आइए जानते हैं क्षेत्रानुसार गाय की अच्छी 10 उन्नत प्रजातियों के बारें में- गिर नस्ल गिर नस्ल की गाय का मूल स्थान गुजरात है। गिर गाय को भारत की सबसे ज्यादा दुधारू गाय माना जाता है। यह गाय एक दिन में 50 से 80 लीटर तक दूध देती है। इस गाय के थन इतने बड़े होते हैं। इस गाय का मूल स्थान काठियावाड़ (गुजरात) के दक्षिण में गिर जंगल है, जिसकी वजह से इनका नाम गिर गाय पड़ गया। भारत के अलावा इस गाय की विदेशों में भी काफी मांग है। इजराइल और ब्राजील में भी मुख्य रुप से इन्हीं गायों का पाला जाता है। साहीवाल नस्ल साहीवाल भारत की सर्वश्रेष्ठ प्रजाति है। इसका मूल स्थान पंजाब और राजस्थान है। यह गाय मुख्य रूप से हरियाणा, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में पाई जाती है। यह गाय सालाना 2000 से 3000 लीटर तक दूध देती हैं जिसकी वजह से ये दुग्ध व्यवसायी इन्हें काफी पसंद करते हैं। यह गाय एक बार मां बनने पर करीब 10 महीने तक दूध देती है। अच्छी देखभाल करने पर ये कहीं भी रह सकती हैं। राठी नस्ल इस नस्ल का मूल स्थान राजस्थान है। भारतीय राठी गाय की नस्ल ज्यादा दूध देने के लिए जानी जाती है। राठी नस्ल का राठी नाम राठस जनजाति के नाम पर पड़ा। यह गाय राजस्थान के गंगानगर, बीकानेर और जैसलमेर इलाकों में पाई जाती हैं। यह गाय प्रतिदन 6 -8 लीटर दूध देती है। हल्लीकर नस्ल हल्लीका गाय का मूल स्थान कर्नाटक है। हल्लीकर के गोवंश मैसूर (कर्नाटक) में सर्वाधिक पाए जाते हैं। इस नस्ल की गायों की दूध देने की क्षमता काफी अच्छी होती है। हरियाणवी नस्ल इस नस्ल की गाय का मूल पालन स्थान हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान है। इस नस्ल की गाय सफेद रंग की होती है। इनसे दूध उत्पादन भी अच्छा होता है। इस नस्ल के बैल खेती में अच्छा कार्य करते हैं इसलिए हरियाणवी नस्ल की गायें सर्वांगी कहलाती हैं। कांकरेज नस्ल इस नस्ल की गाय का मूल स्थान गुजरात और राजस्थान है। कांकरेज गाय राजस्थान के दक्षिण-पश्चिमी भागों में पाई जाती है, जिनमें बाड़मेर, सिरोही तथा जालौर जिले मुख्य हैं। इस नस्ल की गाय प्रतिदिन 5 से 10 लीटर तक दूध देती है। कांकरेज प्रजाति के गोवंश का मुंह छोटा और चौड़ा होता है। इस नस्ल के बैल भी अच्छे भार वाहक होते हैं। अत: इसी कारण इस नस्ल के गौवंश को द्वि-परियोजनीय नस्ल कहा जाता है। लाल सिंधी नस्ल इस नस्ल की गाय पंजाब, हरियाणा, कर्नाटक, तमिलनाडु में पाई जाती है। लाल रंग की इस गाय को अधिक दुग्ध उत्पादन के लिए जाना जाता है। लाल रंग होने के कारण इनका नाम लाल सिंधी गाय पड़ गया। यह गाय पहले सिर्फ सिंध इलाके में पाई जाती थीं। लेकिन अब यह गाय पंजाब, हरियाणा, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और ओडिशा में भी पाई जाती हैं। इनकी संख्या भारत में काफी कम है। साहिवाल गायों की तरह लाल सिंधी गाय भी सालाना 2000 से 3000 लीटर तक दूध देती हैं। कृष्णा वैली नस्ल इस नस्ल की गाय का मूल स्थान कर्नाटक है। कृष्णा वैली उत्तरी कर्नाटक की देसी नस्ल है। यह सफेद रंग की होती है। इस नस्ल के सींग छोटे, शरीर छोटा, टांगे छोटी और मोटी होती है। यह एक ब्यांत में औसतन 900 किलो दूध देती है। नागोरी नस्ल इस नस्ल की गाय राजस्थान के नागौर जिले में पाई जाती है। इस नस्ल के बैल भारवाहक क्षमता के विशेष गुण के कारण अत्यधिक प्रसिद्ध है। निमरी (मध्य प्रदेश) निमरी का मूल स्थान मध्य प्रदेश है। इसका रंग हल्का लाल, सफेद, लाल, हल्का जामुनी होता है। इसकी चमड़ी हल्की और ढीली, माथा उभरा हुआ, शरीर भारा, सींग तीखे, कान चौड़े और सिर लंबा होता है। एक ब्यांत में यह नस्ल औसतन 600-954 किलो दूध देती है और दूध की वसा 4.9 प्रतिशत होती है। खिल्लारी नस्ल इस नस्ल का मूल स्थान महाराष्ट्र और कर्नाटक के जिले है और यह पश्चिमी महाराष्ट्र में भी पाई जाती है। इस प्रजाति के गोवंश का रंग खाकी, सिर बड़ा, सींग लम्बी और पूंछ छोटी होती है। गलबल काफी बड़ा होता है। खिल्लारी प्रजाति के बैल काफी शक्तिशाली होते हैं। इस नस्ल के नर का औसतन भार 450 किलो और गाय का औसतन भार 360 किलो होता है। इसके दूध की वसा लगभग 4.2 प्रतिशत होती है। यह एक ब्यांत में औसतन 240-515 किलो दूध देती है। देसी गाय की खरीद/देसी गाय की बिक्री अगर आप देसी गाय सहित अन्य दुधारू पशुओं को खरीदना या बेचना चाहते हैं तो ट्रैक्टर जंक्शन पर आपको विश्वसनीय सौदे मिलते हैं। ट्रैक्टर जंक्शन पर किसानों द्वारा किसानों 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पीएम किसान सम्मान निधि योजना : बजट २०२१ में किसानों को मिल सकता है तोहफा

पीएम किसान सम्मान निधि योजना : बजट २०२१ में किसानों को मिल सकता है तोहफा

खातें में आ सकते हैं 6000 रुपए से ज्यादा, जानें, किन किसानों को मिलेगा इस योजना का लाभ? बजट 2021 में सरकार किसानों को तोहफा दे सकती है। ऐसी उम्मीद की जा रही है कि इस बजट में सरकार किसानों को खुश करने के लिए पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत दी जाने वाली राशि में बढ़ोतरी कर सकती है। बता दें कि अभी तक पीएम किसान सम्मान निधि योजना के तहत सरकार की ओर से किसानों को एक वर्ष में 2,000-2,000 रुपए की तीन समान किस्तों में कुल 6000 रुपए की राशि दी जाती है। यानि इस योजना के तहत सरकार किसानों को 500 रुपए महीने की सहायता हर माह प्रदान कर रही है। योजना के तहत दी जा रही सहायता राशि को लेकर किसानों का कहना है कि बढ़ती महंगाई के दौर में हर माह सिर्फ 500 रुपए की राशि की सहायता बहुत कम है। वहीं कई कृषि जानकारों का भी कहना है कि इस राशि का बढ़ाया जाना चाहिए। किसानों को उम्मीद है कि इस बार बजट में इस योजना की राशि को बढ़ाया जा सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कहा जा रहा है कि मोदी सरकार किसानों को दी जाने वाली सम्मान राशि में इजाफा कर सकती है। इस इजाफे की घोषणा बजट 2021 में होने की संभावना जताई रही है। हालांकि अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हुई है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 किसानों को खुश करने के लिए सरकार कर सकती है कुछ खास ऐलान तीन नए कृषि कानून के विरोध में जारी किसानों के विरोध-प्रदर्शन के बीच वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आगामी 1 फरवरी को वित्त वर्ष 2021-22 के लिए केंद्रीय बजट पेश करेंगी। जानकारी के मुताबिक इस बार के बजट में खेती-किसानी को लेकर केंद्र सरकार के कुछ खास ऐलान किए जाने की भी संभावना है। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि इस बार के बजट में सरकार प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि स्कीम के तहत मिलने वाले 6,000 रुपए सालाना को बढ़ाने का ऐलान कर सकती है। इस बार के बजट में किसानों ने मोदी सरकार से इस रकम को बढ़ाने की भी मांग की है। उनका कहना है कि 6,000 रुपए सालाना की रकम पर्याप्त नहीं है। एक एकड़ में फसल बोने पर कितना आता है खर्चा किसानों के अनुसार एक एकड़ जमीन में धान की फसल में 3-3.5 हजार रुपए लगते हैं। वहीं, अगर गेहूं की खेती की जाए तो इसमें 2-2.5 हजार रुपए की लागत आती हैं। ऐसी स्थिति में थोड़ी ज्यादा जमीन रखने वाले किसानों को इस स्कीम से लाभ नहीं मिल रहा है। सरकार को यह रकम बढ़ानी चाहिए ताकि किसानों को कुछ और राहत मिल सके। यह भी पढ़ें : ग्रामीण ऋण मुक्ति विधेयक : अब किसानों का ब्याज सहित कर्जा होगा माफ कृषि क्षेत्र के लिए आवंटन बढ़ाने के उपाय करें सरकार- कृषि विशेषज्ञ वित्त वर्ष 2021-22 के बजट में सरकार को कृषि क्षेत्र के लिए आवंटन बढ़ाने के साथ ही प्रोत्साहन के उपाय करने चाहिए। कृषि क्षेत्र के जानकारों ने यह बात कही है। उनका मानना है कि सरकार को कृषि क्षेत्र के समग्र विकास पर जोर देना चाहिए। इसके लिए स्वदेशी कृषि अनुसंधान, तिलहन उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए बजट में अतिरिक्त धनराशि प्रदान करनी चाहिए। जानकारों का यह भी कहना है कि प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के दायरे में ज्यादा से ज्यादा किसानों को लाने की जरूरत है। डीसीएम श्रीराम के अध्यक्ष और वरिष्ठ एमडी अजय श्रीराम ने कहा, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग ने किसान के लिए बेहतर मूल्य प्राप्ति और बिचौलियों की लागत को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। बजट में खाद्य प्रसंस्करण को ब्याज प्रोत्साहन, कम कर, प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल और इसके प्रोत्साहन के उपाय करने चाहिए। पिछले वित्त वर्ष भी कृषि के लिए बजट में की गई थी वृद्धि वित्त वर्ष 2019-20 में कृषि क्षेत्र के लिए आवंटन का अनुमान करीब 1.51 लाख करोड़ रुपए रहा था, जो कि अगले साल यानी वित्त वर्ष 2020-21 में मामूली बढ़त के साथ 1.54 लाख करोड़ रुपए पर पहुंच गया। इसके अलावा भी ग्रामीण विकास के लिए वित्त वर्ष 2020-21 में 1.44 लाख करोड़ रुपए का आवंटन हुआ था। इसके पहले वित्त वर्ष (2019-20) में यह 1.40 लाख करोड़ रुपए था। प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना के तहत आवंटन की राशि को 2019-20 के 9,682 करोड़ रुपए से बढ़ाकर 2020-21 में 11,217 करोड़ रुपए कर दिया था। छोटे किसानों को मिलता है इस स्कीम से फायदा पीएम-किसान सम्मान निधि योजना केंद्र सरकार द्वारा 100 फीसदी फंड पाने वाली स्कीम है। केंद्र सरकार ने दिसंबर 2018 से इस योजना को शुरू किया था, जिसके तहत छोटे एवं सीमांत किसानों को सालाना 6,000 रुपए उनके बैंक अकाउंट में ट्रांसफर किए जाते हैं। इस स्कीम का लाभ वही किसान उठा सकते हैं, जिनके पास कुल 2 हेक्टेयर से ज्यादा की जमीन नहीं है। राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश इस स्कीम के तहत योग्य किसानों की पहचान करते हैं। 25 दिसंबर 2020 को ही पीएम मोदी ने करीब 9 करोड़ किसानों के खाते में करीब 18,000 करोड़ रुपए ट्रांसफर किया है। यह भी पढ़ें : ऋण समाधान योजना : 31 जनवरी से पहले ऋण जमा कराएं, 90 प्रतिशत तक छूट पाएं पीएम किसान सम्मान निधि में अब तक किसानों को मिली सात किस्तें केंद्र सरकार पीएम किसान सम्मान निधि के तहत अब तक 7 किस्तों में पैसे जारी कर चुकी है। अब तक इस स्कीम के तहत 10.60 करोड़ किसानों को 95,000 करोड़ रुपए की रकम जारी की जा चुकी है। इस योजना के तहत अप्रैल-जुलाई, अगस्त-नवंबर और दिसंबर-मार्च की अवधि में अकाउंट में पैसे ट्रांसफर किए जाते हैं। पीएम-किसान सम्मान निधि की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक इस योजना के 11.47 करोड़ किसानों को लाभ मिल चुका है। दिसंबर 2018 में इस योजना की शुरुआत की गई थी। इन किसानों को नहीं मिलेगा इस योजना का लाभ ऐसे किसान जो भूतपूर्व या वर्तमान में संवैधानिक पद धारक हैं, वर्तमान या पूर्व मंत्री हैं, मेयर या जिला पंचायत अध्यक्ष हैं, विधायक, एमएलसी, लोकसभा और राज्यसभा सांसद हैं तो वे इस स्कीम से बाहर माने जाएंगे। भले ही वो किसानी भी करते हों। केंद्र या राज्य सरकार में अधिकारी एवं 10 हजार से अधिक पेंशन पाने वाले किसानों को लाभ नहीं. बाकी पात्र होंगे। पेशेवर, डॉक्टर, इंजीनियर, सीए, वकील, आर्किटेक्ट, जो कहीं खेती भी करता हो उसे लाभ नहीं मिलेगा। केंद्र और राज्य सरकार के मल्टी टास्किंग स्टाफ/चतुर्थ श्रेणी/समूह डी कर्मचारियों लाभ मिलेगा। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2021-22 राजस्थान : जानें कितनी बढ़ी गेहूं की कीमत

गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2021-22 राजस्थान : जानें कितनी बढ़ी गेहूं की कीमत

राजस्थान में गेहूं का एमएसपी तय, अब इस कीमत पर होगी खरीद राजस्थान में आगामी रबी विपणन वर्ष 2021-22 के लिए गेहूं का समर्थन मूल्य (एमएसपी) तय कर दिया गया है। अब किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य 1975 रुपए प्रति क्विंटल की दर से गेहूं की खरीद की जाएगी। बता दें कि रबी विपणन वर्ष 2020-21 में रबी सीजन में उत्पादित गेहूं के लिए केंद्र सरकार ने 1925 रुपए प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य यानि एमएसपी तय किया था। अब राजस्थान सरकार की ओर से तय किया गया एमएसपी रबी विपणन वर्ष 2020-21 से 50 रुपए अधिक है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 प्रदेश में 108 लाख मैट्रिक टन गेहूं की पैदावार का अनुमान कृषि विभाग के अनुसार इस बार प्रदेश में 108 लाख मैट्रिक टन गेहूं की पैदावार होने का अनुमान जताया गया है। मीडिया में प्रकाशित खबरों के हवाले से खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के शासन सचिव ने बताया कि कृषि विभाग की ओर से जारी कृषि उत्पादन कार्यक्रम के तहत प्रदेश में लगभग 108 लाख मैट्रिक टन गेहूं की पैदावार होने की संभावना जताई गई है। खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के शासन सचिव नवीन जैन ने बुधवार को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर गेहूं की खरीद की तैयारियों के संबंध में आयोजित बैठक में यह बात कही। उन्होंने बताया कि वर्ष 2020-21 के दौरान ई-प्रोक्योरमेन्ट के तहत कोई कार्य नहीं हुआ। लेकिन, इस रबी विपणन वर्ष 2021-22 में ई-प्रोक्योमेन्ट के तहत समस्त कार्यवाही निर्धारित समयावधि में पूर्ण करने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए जा चुके हैं। शासन सचिव ने बताया कि समस्त खरीद प्रक्रिया के प्रभावी रूप से नियंत्रण एवं पर्यवेक्षण के लिए जिला कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति की बैठक के लिए दिशा-निर्देश जारी करने का निर्णय लिया गया है। परिवहन दरों व मंडी लेबर चार्जेज के निर्धारण के लिए विशेषज्ञ उप समिति का गठन उन्होंने बताया कि भारत सरकार के निर्देशानुसार परिवहन दरों के निर्धारण एवं मंडी लेबर चार्जेज के निर्धारण के लिए राज्य स्तरीय समिति की बैठक आयोजित की गई, जिसमें इन दरों के निर्धारण के लिए एक विशेषज्ञ उप समिति का गठन कर लिया गया है। उप समिति आगामी 2 फरवरी को राज्य स्तरीय समिति को रिपोर्ट देगी, जिसके आधार पर आगामी रबी विपणन वर्ष 2021-22 में दरों का निर्धारण किया जाएगा। गेहूं की खरीद से जुड़े हुए विभिन्न बिन्दुओं सहित खरीद कीमतों पर बैठक में विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। बैठक में अतिरिक्त खाद्य आयुक्त अनिल कुमार अग्रवाल, राजफैड की प्रबन्ध निदेशक सुषमा अरोड़ा, एफसीआई के महाप्रबन्धक संजीव भास्कर सहित संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित थे। यह भी पढ़ें : ग्रामीण ऋण मुक्ति विधेयक : अब किसानों का ब्याज सहित कर्जा होगा माफ इधर यूपी में धान की खरीद में गड़बड़ी, छह क्रय प्रभारियों पर कार्रवाई उत्तप्रदेश के सिद्धार्थनगर में धान खरीद में ऑनलाइन पंजीकरण में गड़बड़ी पाए जाने पर यहां के पीसीएफ के चार क्रय केन्द्र प्रभारियों समेत तीन तहसील कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की गई हैं। इसके तहत इन सभी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है। इसके अलावा कुशीनगर के दो क्रय केन्द्र प्रभारी व तहसील के कम्प्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई। खाद्य आयुक्त मनीष चौहान ने मीडिया को यह जानकारी दी है। मीडिया में प्रकाशित खबरों के अनुसार उन्होंने बताया कि धान खरीद में किसानों को बेचने के लिए खाद्य तथा रसद विभाग की वेबसाइट पर पंजीकरण कराए जाने की व्यवस्था की गई है। सिद्धार्थनगर में सात किसानों ने अपने पंजीकरण में कई हेक्टेयर भूमि पर धान की पैदावार दिखाई थी। इसका सत्यापन तहसील से भी करा लिया। पीसीएफ के चार क्रय केन्दों पर इन तथाकथित किसानों ने हजारों क्विंटल धान भी बेचा। ऑनलाइन आंकड़ों की समीक्षा होने पर यह गड़बड़ी पकड़ में आई तो सातों किसान, चारों क्रय केन्द्र प्रभारी व तीन तहसील कर्मियों के खिलाफ एफआईआर करवाई गई। इसी तरह कुशीनगर में एक किसान ने अपने पंजीकरण में 421 हेक्टयर भूमि दर्ज की और इस पर 22472.98 क्विंटल धान की मात्रा भी सत्यापित करवा दी जबकि जमीन अन्य किसानों के नाम पर थीं। यूपीपीसीयू के दो धान क्रय केन्द्र प्रभारियों द्वारा बिना किसान के प्रपत्र, खतौनी आदि देखे हुए 1064 क्विंटल धान की खरीद भी कर ली गर्ईं। इस पर कार्रवाई करते हुए किसान, दोनों क्रय केन्द्र प्रभारी व तहसील के कम्प्यूटर आपरेटर के खिलाफ एफआईआर की गई है। धान खरीद वर्ष 2020-21 के तहत प्रदेश में अब तक 59.15 लाख मीट्रिक धान की खरीद कर ली गई है। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

गेहूं की फसल में अधिक सिंचाई से हो सकता है नुकसान

गेहूं की फसल में अधिक सिंचाई से हो सकता है नुकसान

खेती-बाड़ी सलाह : अच्छे उत्पादन के लिए गेहूं की फसल में रखें ये सावधानियां भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान, क्षेत्रीय केंद्र इंदौर द्वारा गेहूं उत्पादक किसानों को गेहूं के अच्छे उत्पादन के लिए उपयोगी सलाह दी है। इसमें गेहूं की आवश्यकता से अधिक सिंचाई करने पर उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने को लेकर आगाह किया गया है। संस्थान द्वारा दी गई सलाह के अनुसार जरूरत से ज्यादा सिंचाई न करें, अन्यथा फसल गिर सकती है, साथ ही दानों में दूधिया धब्बे आ जाते हैं और उपज कम हो जाती है। किसान, बालियां आने पर फव्वारा विधि से सिंचाई न करें, अन्यथा फूल खिरने, दानों का मुंह काला पड़ने, करनाल बंट या कंडुआ रोग के प्रकोप का डर रहता है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रैक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 गेहूं की फसल में कब-कब करें सिंचाई संस्थान द्वारा दी गई सलाह के अनुसार गेहूं की अगेती खेती में (मध्य क्षेत्र की काली मिट्टी तथा 3 सिंचाई की खेती में) पहली सिंचाई बुवाई के तुरंत बाद, दूसरी 35-40 दिन और तीसरी सिंचाई 70-80 दिन की अवस्था में करना पर्याप्त है। पूर्ण सिंचित समय से बुवाई में 20-20 दिन के अंतराल पर 4 सिंचाई करें। अधिक सर्दी वाले दिनों में फसलों में स्प्रिंकलर से हल्की सिंचाई करें। 500 ग्राम थायो यूरिया 1000 लीटर पानी में घोल बनाकर छिडक़ाव करें या 8-10 किलोग्राम सल्फर पाउडर/एकड़ का भुरकाव करें अथवा घुलनशील सल्फर 3 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिडक़ाव करें। गेहूं में खाद व उर्वरक की मात्रा का रखें ध्यान गेहूं के लिए सामान्यतः नत्रजन, स्फुर और पोटाश 4:2:1 के अनुपात में देना चाहिए। असिंचित खेती में 40:20:10, सीमित सिंचाई में 60:30:15 या 80:40:20, सिंचित खेती में 120:60:30 तथा देर से बुवाई में 100:50:25 किलोग्राम/ हेक्टेयर के अनुपात में उर्वरक देना चाहिए। सिंचित खेती की मालवी किस्मों को नत्रजन, स्फुर और पोटाश 140:70:35 कि.ग्रा./हेक्टेयर की दर से देना चाहिए। पूर्ण सिंचित खेती में नत्रजन की आधी मात्रा तथा स्फुर व पोटाश की पूरी मात्रा बुवाई से पहले मिट्टी में ओरना (3-4 इंच गहरा) चाहिए। शेष नत्रजन पहली सिंचाई के साथ देना चाहिए। वर्षा आधारित या सीमित सिंचाई की खेती में सभी उर्वरक बुवाई से पहले मिट्टी में एक साथ देने चाहिए। किसानों को सलाह है कि खेत के उतने हिस्से में ही यूरिया भुरकाव करें जितने में उसी दिन सिंचाई दे सकें। यूरिया को बराबर से फैलाएं। यह भी पढ़ें : कोरोना वैक्सीन : देशभर में टीकाकरण की शुरुआत 16 जनवरी से गेहूं में खरपतवार नियंत्रण के लिए ये करें उपाय गेहूं फसल में मुख्यत: दो प्रकार के खरपतवार होते हैं। चौड़ी पत्ती वाले बथुआ, सेंजी, दूधी ,कासनी, जंगली पालक, जंगली मटर, कृष्ण नील, हिरनखुरी तथा संकरी पत्ती वाले मोथा, जंगली जई और कांस। जो किसान खरपतवारनाशक का उपयोग नहीं करना चाहते हैं वे डोरा, कुल्पा या हाथ से निंदाई-गुड़ाई कर 40 दिन से पहले दो बार करके खरपतवार निकाल सकते हैं। मजदूर नहीं मिलने पर चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार के लिए 2 ,4 डी की 0.65 किग्रा. या मैटसल्फ्यूरॉन मिथाइल की 4 ग्राम मात्रा/हे. की दर से बुवाई के 30-35 दिन बाद, जब खरपतवार दो-चार पत्ती वाले हों, छिडक़ाव करें। संकरी पत्ती वाले खरपतवार के लिए क्लौडीनेफॉप प्रौपरजिल 60 ग्राम/हे. की दर से 25-35 दिन की फसल में छिडक़ाव करने से दोनों तरह के खरपतवारों पर नियंत्रण किया जा सकता है। मोहू कीट के प्रकोप से ऐसे करें बचाव इन दिनों फसल पर जड़ माहू कीटों का प्रकोप देखा जा सकता है। यह कीट गेहूं के पौधे को जड़ से काट देते हैं। इस कीट के नियंत्रण के उपाय करना जरूरी है। इसके लिए क्लोरोपाइरीफॉस 20 ईसी दवाई 5 लीटर/हेक्टेयर बालू रेत में मिलाकर खेत में नमी होने पर बुरकाव करें या बुरकने के बाद सिंचाई कर दें अथवा इमिडाक्लोप्रिड 17.8 एसएल 250 मिली लीटर या थाई मैथोक्सेम की 200 ग्राम/हे. की दर से 300-400 लीटर पानी में घोल बनाकर छिडक़ाव करें। यदि माहू का प्रकोप गेहूं फसल में ऊपरी भाग (तनों या पत्तों) पर होने की दशा में इमिडाक्लोप्रिड 250 मिलीग्राम /हे. की दर से पानी में घोल बनाकर छिडक़ाव करें। देरी से बुवाई की अनुशंसित किस्में देरी से बुवाई वाली किस्मों में एचडी 2932 (पूसा 111), एचआई 1634 (पूसा अहिल्या), जेडब्ल्यू 1202-1203,एमपी 3336, राज 4238 आदि प्रमुख उपयोगी किस्में हैं। इसमें एनपीके खाद 100:50:25 की दर से दें। खेत में गेहूं के पौधे सूखने या पीले पड़ने पर तुरंत विशेषज्ञ की सलाह लेकर शीघ्र उपचार करें। यह भी पढ़ें : ऋण समाधान योजना : 31 जनवरी से पहले ऋण जमा कराएं, 90 प्रतिशत तक छूट पाएं इस साल रबी फसल का उत्पादन अच्छा होने की उम्मीद, गेहूं का रकबा बढ़ा देश में रबी फसलों का रकबा गत वर्ष अब तक हुई बोनी को पार कर गया है। देश में अब तक गेहूं का रकबा 313.24 लाख हेक्टेयर हो गया है तथा कुल बोनी 597.92 लाख हेक्टेयर में हो गई है। जबकि गत वर्ष इस अवधि में 573.23 लाख हेक्टेयर में बोनी की गई थी। अर्थात अब तक 24.69 लाख हेक्टेयर अधिक क्षेत्र में बोनी हुई है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि चालू रबी सीजन में बुवाई बेहतर होगी तथा उत्पादन भी अच्छा होने की उम्मीद है। कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के मुताबिक देश में गेहूं की बुआई रकबा 313.24 लाख हेक्टेयर हो गया है। जबकि गत वर्ष अब तक 297.39 हेक्टेयर में गेहूं बोया गया था। रबी में गेहूं का सामान्य रकबा 303.28 लाख हेक्टेयर है। जानकारी के मुताबिक देश में सबसे अधिक म.प्र. में 102.76 लाख हेक्टेयर लक्ष्य के विरुद्ध अब तक 82 लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में गेहूं की बोनी हुई है। इसी प्रकार अब तक उत्तर प्रदेश में 89.23 लाख हेक्टेयर में, पंजाब में 34.70, राजस्थान में 28.57, हरियाणा में 24.87 एवं बिहार में 17 लाख हेक्टेयर में गेहूं बोया गया है। गेहूं की तरह दूसरी फसलों की भी बुआई पिछले साल की अपेक्षा बेहतर दिखाई दे रही है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक चालू रबी सीजन में अभी तक धान का रकबा 12.49 लाख हेक्टेयर पहुंच चुका है। दलहनी फसलों की भी बुआई 149.29 लाख हेक्टेयर में हो गई है। जबकि गत वर्ष इस अवधि में 141.64 लाख हेक्टेयर में बोनी हुई थी। इसी प्रकार मोटे अनाजों का रकबा 43.44 लाख हेक्टेयर पहुंच चुका है। जो गत वर्ष 46.55 लाख हेक्टेयर था। तिलहनी फसलों की बुआई 79.47 लाख हेक्टेयर में हुई है। जो गत वर्ष अब तक 74.19 लाख हेक्टेयर में हो गई थी। कुल रबी फसलों की बुआई का रकबा इस साल 597.92 लाख हेक्टेयर पहुंच चुका है। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

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