• Home
  • News
  • Agriculture News
  • गेहूं की खेती : इन 9 किस्मों की बेहतरीन उपज, वैज्ञानिकों ने जताई खुशी

गेहूं की खेती : इन 9 किस्मों की बेहतरीन उपज, वैज्ञानिकों ने जताई खुशी

गेहूं की खेती : इन 9 किस्मों की बेहतरीन उपज, वैज्ञानिकों ने जताई खुशी

जानें, गेहूं की इन किस्मों की विशेषताएं और लाभ?

खाद्यान्न में गेहूं का अपना एक महत्वपूर्ण स्थान है। इसे भारत में प्राय: सभी जगह भोजन में शामिल किया जाता है। गेहूं की खेती में उत्पादन को बढ़ाने के लिए कृषि वैज्ञानिक की ओर से अनुसंधान और प्रयोग किए जाते हैं। बेहतर परिणाम मिलने के बाद किसानों को इन किस्मों की खेती करने की सलाह दी जाती है। पिछले दिनों भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान इंदौर के वैज्ञानिकों द्वारा धार जिले के नालछा ब्लॉक के गांव भीलबरखेड़ा, कागदीपुरा और भड़किया में गेहूं की 9 किस्मों के प्रदर्शन प्लाटों का अवलोकन किया। 

 

सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1

 

कृषि वैज्ञानिकों ने गेहूं की इन किस्मों के बेहतर परिणाम पर संतोष जताया

वैज्ञानिक ए.के. सिंह ने मीडिया को बताया कि ग्राम भीलबरखेड़ा, कागदीपुरा और भड़किया में गेहूं की 9 किस्मों के 11 हेक्टेयर क्षेत्रफल में लगाए गए 33 प्रदर्शन प्लाटों का केंद्राध्यक्ष एस.वी.साई प्रसाद एवं वैज्ञानिक डॉ. के. सी.शर्मा, डॉ.टी.एल. प्रकाश, डॉ.डी.के. वर्मा, डॉ. दिव्या अंबाटी ने अवलोकन किया। यहां पूसा तेजस, पूसा मंगल, पूसा अनमोल, नई किस्म पूसा अहिल्या और पूसा वाणी, मालवी गेहूं एच.आई.-8802, कम पानी वाली 8805 के अलावा रोटी वाली पूसा उजाला शामिल है। बता दें कि गेहूं की ये सभी किस्में उत्पादन की दृष्टि से बेहतर उपज प्रदान करने वाली किस्में हैं। कृषि वैज्ञानिकों ने गेहूं की इन किस्मों के बेहतर परिणाम पर संतोष जताया हैं।

 

 

आइए जानते हैं गेहूं की इन किस्मों की विशेषताएं और लाभ

1. पूजा तेजस

  • मध्यप्रदेश के किसानों के लिए गेहूं की पूसा तेजस किस्म किसी वरदान से कम नहीं है। गेहूं की यह किस्म दो साल पहले ही किसानों के बीच आई है। हालांकि इसे इंदौर कृषि अनुसंधान केन्द्र ने 2016 में विकसित किया था। इस किस्म को पूसा तेजस एचआई 8759 के नाम से भी जाना जाता है। गेहूं की यह प्रजाति आयरन, प्रोटीन, विटामिन-ए और जिंक जैसे पोषक तत्वों का अच्छा स्त्रोत मानी जाती है। यह किस्म रोटी के साथ नूडल्स, पास्ता और मैकरॉनी जैसे खाद्य पदार्थ बनाने के लिए उत्तम हैं। वहीं इस किस्म में गेरुआ रोग, करनाल बंट रोग और खिरने की समस्या नहीं आती है। इसकी पत्ती चौड़ी, मध्यमवर्गीय, चिकनी एवं सीधी होती है। गेंहू की यह किस्म 115-125 दिनों में पककर तैयार हो जाती है। इसका दाना कड़ा और चमकदार होता है। एक हजार दानों का भार से 50 से 60 ग्राम होता है। एक हेक्टेयर से इसकी 65 से 75 क्विंटल की पैदावार ली जा सकती है।


2. पूसा मंगल

  • इसे एचआई 8713 के नाम से जाना जाता है। यह एक हरफनमौला किस्म है जो रोग प्रेतिरोधक होती है। हालांकि इसका कुछ दाना हल्का और कुछ रंग का होता है जिस वजह से यह भद्दा दिखता है। लेकिन इसके पोषक तत्वों पर इसका कोई असर नहीं पड़ता है। इसके पौधे की लंबाई 80 से 85 सेंटीमीटर होती है। 120 से 125 दिन में यह किस्म पककर तैयार हो जाती है। प्रति हेक्टेयर इससे 50 से 60 क्विंटल का उत्पादन होता है।

 

यह भी पढ़ें : तेज पत्ता की खेती : तेज पत्ता की खेती से पाएं कम लागत में बड़ा मुनाफा


3. पूसा अनमोल

  • यह भी मालवी कठिया गेहूं की उन्नत प्रजाति है जिसे 2014 में विकसित किया गया है। इसे एचआई 8737 के नाम से भी जाना जाता है। इसका दाना गेहूं की मालव राज किस्म की तरह होता है। जो काफी बड़ा होता है। गेहूं की ये किस्म 130 दिनों में तैयार हो जाती है। इस किस्में में भी गिरने खिरने की समस्या नहीं आती है। इस किस्म से प्रति हेक्टेयर इससे 60-70 क्विंटल का उत्पादन लिया जा सकता है।


4. पूसा अहिल्या (एच.आई .1634)

  • इस प्रजाति को मध्य भारत के प्रमुख उत्पादक क्षेत्र म.प्र., छ.ग., गुजरात ,झांसी एवं उदयपुर डिवीजन के लिए देर से बुवाई सिंचित अवस्था में अधिक उत्पादन प्राप्त करने के लिए चिन्हित किया गया है। पूसा अहिल्या की औसत उत्पादन क्षमता 51.6 क्विंटल /हेक्टेयर और अधिकतम उत्पादन क्षमता 70.6 क्विंटल /हेक्टेयर है। यह प्रजाति काले /भूरे रतुआ रोग अवरोधी होने के साथ ही इसमें करनाल बंट रोग की प्रतिरोधक क्षमता भी है। इसका दाना बड़ा, कठोर , चमकदार और प्रोटीनयुक्त है। चपाती बनाने के लिए भी गुणवत्ता से परिपूर्ण है।


5. पूसा वानी (एच.आई .1633 )

  • इसे प्रायद्वीपी क्षेत्र (महाराष्ट्र और कर्नाटक) में देर से बुवाई और सिंचित अवस्था में उत्पादन हेतु चिन्हित किया गया है। पूसा वानी की औसत उत्पादन क्षमता 41.7 क्विंटल /हेक्टेयर और अधिकतम उत्पादन क्षमता 65 .8 क्विंटल /हेक्टेयर है। यह किस्म प्रचलित एच.डी. 2992 से 6 .4 प्रतिशत अधिक उपज देती है। यह प्रजाति काले और भूरे रतुआ रोग से पूर्ण अवरोधी और है और इसमें कीटों का प्रकोप भी न के बराबर होता है। इसकी चपाती की गुणवत्ता इसलिए उत्तम है, क्योंकि इसमें प्रोटीन 12.4 प्रतिशत, लौह तत्व 41 .6 पीपीएम और जिंक तत्व 41.1 पीपीएम होकर पोषक तत्वों से भरपूर है। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि दोनों प्रजातियां अपनी गुणवत्ता और उच्च उत्पादन क्षमता के कारण किसानों के लिए वरदान साबित होगी और एक अच्छा विकल्प बनेगी।


6. पूसा उजाला

  • भारतीय अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) के इंदौर स्थित क्षेत्रीय केंद्र ने गेहूं की इस नई प्रजाति पूसा उजाला की पहचान ऐसे प्रायद्वीपीय क्षेत्रों के लिए की गई है जहां सिंचाई की सीमित सुविधाएं उपलब्ध होती हैं। इस प्रजाति से एक-दो सिंचाई में 30 से 44 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की पैदावार होती है। इसमें प्रोटीन, आयरन और जिंक की अच्छी मात्रा होती है।

 

यह भी पढ़ें : किसानों को 50 प्रतिशत तक सब्सिडी पर दिए जाएंगे कंबाइन हार्वेस्टर


7-8-9. एचआई-8802 और 8805

  • यह दोनों ही प्रजातियां मालवी ड्यूरम गेहूं की हैं जो मध्यप्रदेश के लिए ही अनुशंसित की गई हैं। बताया जाता है कि मालवी गेहूं की प्रजातियां 60-65 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादकता की हैं जो सामान्य तौर पर चार-पांच पानी में पैदा होने वाली हैं। इसके अलावा प्रदर्शन में एक गेहूं की अन्य नई किस्म को भी शामिल किया गया है जिसके बेहतर परिणाम आने की उम्मीद है।

 

 

अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

Top Agriculture News

न्यूनतम समर्थन मूल्य : 11 लाख किसानों को किया 24 हजार करोड़ का भुगतान

न्यूनतम समर्थन मूल्य : 11 लाख किसानों को किया 24 हजार करोड़ का भुगतान

न्यूनतम समर्थन मूल्य : 11 लाख किसानों को किया 24 हजार करोड़ का भुगतान (Minimum Support Price: 24 thousand crores paid to 11 lakh farmers) पंजाब में पहली बार सीधे किसानों के खातों में पहुंचे 202.69 करोड़ रुपए

पशुपालन : वैज्ञानिकों ने पशुओं के लिए विकसित किए सस्ते टीके

पशुपालन : वैज्ञानिकों ने पशुओं के लिए विकसित किए सस्ते टीके

पशुपालन : वैज्ञानिकों ने पशुओं के लिए विकसित किए सस्ते टीके (Animal Husbandry: Scientists have developed cheap vaccines for animals)

गेंदे की खेती : गेंदे से बढ़ाएं खेतों की रौनक, होगा भरपूर मुनाफा

गेंदे की खेती : गेंदे से बढ़ाएं खेतों की रौनक, होगा भरपूर मुनाफा

गेंदे की खेती : गेंदे से बढ़ाएं खेतों की रौनक, होगा भरपूर मुनाफा (Marigold farming : Increase acreage with marigold, will be profitable)

मौसम को लेकर कृषि वैज्ञानिकों की किसानों को सलाह, एक-दो दिन नहीं करें ये काम

मौसम को लेकर कृषि वैज्ञानिकों की किसानों को सलाह, एक-दो दिन नहीं करें ये काम

मौसम को लेकर कृषि वैज्ञानिकों की किसानों को सलाह, एक-दो दिन नहीं करें ये काम (Agricultural scientists advise farmers about weather, do not do this work for a day or two)

close Icon

Find Your Right Tractor and Implements

New Tractors

Used Tractors

Implements

Certified Dealer Buy Used Tractor