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यूरिया के उत्पादन में रिकार्ड स्तर पर वृद्धि, बिक्री का प्रतिशत भी बढ़ा

यूरिया के उत्पादन में रिकार्ड स्तर पर वृद्धि, बिक्री का प्रतिशत भी बढ़ा

इस बार 244.55 लाख टन हुआ है यूरिया का उत्पादन, पिछले वर्ष की तुलना में 4.55 टन ज्यादा

खेती के लिए आवश्यक उर्वरकों में से महत्वपूर्ण उर्वरक यूरिया के उत्पादन में रिकार्ड स्तर पर वृद्धि देखने को मिली है। इस वित्तीय वर्ष देश में यूरिया का उत्पादन अपने रिकार्ड स्तर वित्तीय वर्ष 244.55 लाख टन तक पहुंच गया है। इससे किसानों को इस खरीफ के सीजन में यूरिया खाद की कमी नहीं रहेगी।

सरकारी आकड़ों के अनुसार वर्ष 2019-20 में यूरिया की का उत्पादन पिछले वर्ष की तुलना में ज्यादा है। जहां वर्ष 2018-19 में यूरिया का उत्पादन 240 लाख टन था वो 4.55 टन बढक़र वित्तीय वर्ष 2019-20 में 244.55 लाख टन हो गया है। जबकि वर्ष 2019-20 में जबकि इसकी बिक्री पांच प्रतिशत बढक़र 336.97 लाख टन हो गई है। 

 

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समाचार पत्रों व मीडिया में प्रकाशित खबरों में अपने बयान में रसायन और उर्वरक मंत्रालय ने कहा कि देश भर में उर्वरकों का उत्पादन और उसकी आवाजाही सहज बनी हुई है। वर्ष 2019-20 के दौरान 244.55 लाख टन का रिकॉर्ड यूरिया उत्पादन हुआ जो वर्ष 2018-19 में 240 लाख टन था। बयान में कहा गया है, यूरिया की बिक्री या खपत 336.97 लाख टन हो गई है। जबकि पिछले वर्ष यानी वर्ष 2018-19 में 320.20 लाख टन थी। केंद्रीय रसायन और उर्वरक मंत्री डी वी सदानंद गौड़ा ने कहा कि कोविड-19 महामारी के बावजूद देश भर में उर्वरकों का उत्पादन और उसे किसी स्थान पर पहुंचाने में कोई दिक्कत नहीं है। उन्होंने कहा कि इस साल भी उर्वरकों की कोई कमी नहीं होगी।

 

विक्रेता यूपीआई के जरिये स्वीकार करें भुगतान

सरकार की तरफ से जारी आदेश में कहा गया था कि देशभर के 2.5 लाख से अधिक फर्टिलाइजर खुदरा विक्रेताओं को जल्द ही अपनी दुकान और बिक्री केन्द्रों पर यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) के जरिये भुगतान स्वीकार करना होगा। रसायन और उर्वरक मंत्रालय का यह निर्देश इसलिए काफी मायने रखता है क्योंकि खरीफ फसल की बुआई का सीजन चल रहा है। ऐसे में किसानों को असुविधा न हो और वह आसानी से अपनी जरूरत के मुताबिक फर्टिलाइजर खरीद सकें। 

 

 

यूरिया के स्टॉक और कालाबाजारी पर रखनी होगी नजर

यूरिया का उत्पादन बढऩे से जहां किसानों को पर्याप्त मात्रा में यूरिया की आपूर्ति हो सकेगी। वहीं दूसरी ओर बिक्रताओं द्वारा इसका स्टाक करने व कालाबाजारी होने की संभावना से भी इंनकार नहीं किया जा सकता है। हालांकि इस संबंध में सरकार पहले ही स्पष्ट कर चुकी है कि इसका स्टाक करने वाले दुकानदार विक्रताओं पर सख्त कार्रवाई की जाएगी और यूरिया की कमी आने नहीं दी जाएगी। सरकार का यह फैसला वाकई किसानों के हित में है लेकिन मांग बढऩे के साथ-साथ ही इसकी  कीमतों में बढ़ोतरी की संभावना भी बनी रहती है।

जैसा की बताया जा रहा है कि इसका उत्पादन पिछले साल की तुलना में अधिक है इससे ऐसी आशा की जा सकती है कि किसान को इस खरीफ सीजन में यूरिया आसानी से उचित दामों पर बाजार में उपलब्ध हो सकेगा। 

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