सौर ऊर्जा से चलेगा यह कृषि यंत्र : निराई, गुड़ाई और दवा का छिड़काव करना होगा आसान

सौर ऊर्जा से चलेगा यह कृषि यंत्र : निराई, गुड़ाई और दवा का छिड़काव करना होगा आसान

Posted On - 01 Apr 2022

जानें, सौर ऊर्जा से चलने वाले इस यंत्र की विशेषताएं और लाभ

वर्तमान में खेती और बागवानी कार्यों में कृषि यंत्रों की भूमिका अहम हो गई है। आज हर किसान खेती के कार्यों के लिए कृषि यंत्रों का प्रयोग करने लगा है। कृषि यंत्रों की सहायता से खेतीबाड़ी और बागवानी का कार्य पहले की अपेक्षा अब अधिक सरल हो गया है। किसानों की आवश्यकता और जरूरत को ध्यान में रखते हुए कृषि यंत्रों का निर्माण किया जाता है। कुछ कृषि यंत्र बिजली से चलाए जाते हैं तो कुछ डीजल से तो कुछ सीएनजी का प्रयोग करके संचालित किए जाते हैं। इसी कड़ी में अब वैज्ञानिकों ने एक ऐसा कृषि यंत्र तैयार किया है जिसे चलाने के लिए न बिजली की जरूरत है और न ही डीजल की। जी हां, वैज्ञानिकों ने अब सौर ऊर्जा से चलने वाला कृषि यंत्र तैयार किया है जो बहुत ही कम खर्च में संचालित किया जा सकता है। आज हम ट्रैक्टर जंक्शन के माध्यम से आपको सौर ऊर्जा से चलने वाले इस यंत्र के बारे में जानकारी दे रहे हैं। तो आइए जानते हैं इस यंत्र की खासियत और लाभ। 

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कौनसा है ये कृषि यंत्र और किस काम आता है

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, भोपाल ने सौर ऊर्जा से चलने वाला कृषि यंत्र तैयार किया है। इस यंत्र का नाम ई-प्राइम मूवर है। ये सौर ऊर्जा के जरिये चलाया जा सकता है। ये यंत्र बिना ईंधन खर्च किए खेत में निराई-गुड़ाई का काम कर सकता है। इसके अलावा इस यंत्र की सहायता से कीटनाशक का छिडक़ाव भी किया जा सकता है। 

सौर ऊर्जा से चलने वाले यंत्र की खासियत

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का केंद्रीय कृषि अभियांत्रिकी संस्थान, भोपाल की ओर से तैयार किए गए इस सौर ऊर्जा से चलने वाले कृषि यंत्र की सबसे बड़ी खासियत ये हैं कि  इससे कृषि कार्य के अलावा घर में भी रोशनी की जा सकेगी। इससे किसानों को लाभ होगा। 

सौर ऊर्जा चालित ई-प्राइम मूवर कार्य और लाभ

  • सौर ऊर्जा चालित ई-प्राइम मूवर की सहायता से किसान अपने खेत में कीटनाशक दवा का छिडक़ाव कर सकते हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार इस यंत्र द्वारा मात्र एक घंटे में सवा एकड़ जमीन में दवा का छिडक़ाव किया जा सकता है।
  • इस यंत्र की सहायता से जमीन की जुताई और निराई-गुड़ाई का काम भी किया जा सकता है। बताया जा रहा है कि ये यंत्र पांच घंटे के अंदर जमीन की जुताई और निराई-गुड़ाई का कार्य कर सकता है। 
  • इस यंत्र को चलाने में ईंधन खर्च नहीं होगा। इससे किसान के पैसों की बचत होगी।
  • इतना ही नहीं इस यंत्र द्वारा किसान अपने घर में रोशनी भी कर सकता है। यानि बिजली की साधारण जरूरत को भी ये यंत्र पूरा कर सकता है। 
  • सबसे खास बात तो ये हैं कि ये यंत्र सौर ऊर्जा से चलता है जिससे इस यंत्र को संचालित करने का खर्चा न के बराबर आता है।
  • इस यंत्र के प्रयोग से किसानों की खेती की लागत में कमी आएगी। 
  • इस यंत्र के प्रयोग से डीजल और बिजली की खपत कम होगी जिससे किसानों को फायदा होगा। 

एक बार चार्ज होने के बाद तीन घंटे तक चलेगी बैट्री

इस यंत्र की बैट्री एक बार चार्ज होने के बाद तीन घंटे तक चलेगी। सौर ऊर्जा से चार्ज हुई बैटरी से किसान घर की बिजली भी जला सकेंगे। यंत्र का उपयोग अनाज को लाने-ले जाने में भी होगा। यह आसानी से दो क्विंटल तक भार ले जाने मेें सक्षम है। 

क्या है सौर ऊर्जा चालित ई-प्राइम मूवर की कीमत

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सौर ऊर्जा चालित ई-प्राइम मूवर की कीमत तीन लाख रुपए बताई जा रही है। ये शुरुआती कीमत है। कीमत में उतार-चढ़़ाव संभव है। 

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संस्थान के वैज्ञानिकों ने ट्रैक्टर के लिए सीएनजी इंजन भी बनाया

सौर ऊर्जा चालित ई-प्राइम मूवर के अलावा संस्थान के वैज्ञानिकों ने सीएनजी इंजन भी बनाया है जिसे ट्रैक्टर में लगवाने के बाद कम खर्च में खेती के काम किए जा सकते हैं। दरअसल वैज्ञानिकों ने डीजल इंजन को सीएनजी इंजन में बदला है। ये इंजन चार किलोग्राम सीएनजी में करीब एक घंटे तक ट्रैक्टर को चलाने में सक्षम है। इसे 35 हार्स पावर के इंजन में फिट किया गया है। किसान ट्रैक्टर के हार्स पावर के हिसाब से सीएनजी इंजन चुन सकते हैं। इसके उपयोग से प्रदूषण को रोकने तो मदद मिलेगी ही साथ ही किसानों की खेती की लागत में भी कमी आएगी।  

डीजल ट्रैक्टर को सीएनजी में बदलने पर कितना आएगा खर्च

संस्थान के वैज्ञानिकों के अनुसार डीजल इंजन को सीएनजी इंजन में बदला है। इस पर 50 हजार रुपए का खर्च आता है। किसान ट्रैक्टर के हार्स पावर के हिसाब से इसको लगवा सकते हैं। अब बात करें इसके प्रति घंटा खर्च की तो एक घंटे ट्रैक्टर चलाने पर करीब चार से पांच लीटर डीजल जलता है। भोपाल में डीजल का रेट करीब 97.45 रुपए प्रति लीटर है। इस हिसाब से चार लीटर डीजल पर खर्च 389.80 रुपए खर्च आता है। जबकि सीएनजी इंजन में एक घंटे चलाने की खपत भी चार किलोग्राम ही होती है। इसकी कीमत करीब 66 से रुपए प्रति किलोग्राम है, इसके मान से एक घंटे चलने पर 264 रुपए का खर्च आएगा। इस तरह सीएनजी से खेत में काम करने पर ईधन खर्च डीजल की तुलना में काफी कम हो जाएगा।

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