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जैविक खेती की ओर बढ़ते कदम : गोबर से खाद बनाने की मशीन से अच्छी कमाई

जैविक खेती की ओर बढ़ते कदम : गोबर से खाद बनाने की मशीन से अच्छी कमाई

जानें, कैसे बनता है इस मशीन से गोबर खाद, क्या है इसकी उपयोगिता

सरकार जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए काफी प्रयास कर रही है। इसका प्रमुख कारण है कि लगातार यूरिया सहित अन्य कीटनाशकों के प्रयोग से भूमि की उर्वरक क्षमता कम होती जा रही है और खेत बंजर होते जा रहे हैं जिससे खेती योज्य भूमि का क्षेत्रफल कम होता जा रहा है। इस समस्या को लेकर सरकार ये प्रयास कर रही है कि किसानों की रूचि जैविक खेती की ओर बढ़े जिससे प्राकृतिक तरीके से खेती कर गुणवत्तापूर्ण उत्पादन को बढ़ाया जा सके। जैविक खेती के लिए सरकार से भी मदद मिलती है। 

हाल ही बिजनौर के एक किसान ने अपने स्तर पर जैविक खेती की शुरुआत भी कर दी है। इस किसान ने ऐसी मशीन लगाई है जो कुछ ही समय में गोबर को खाद में बदल देती है। मीडिया में प्रकाशित जानकारी के अनुसार बिजनौर के सिकंदरी गांव के रहने वाले किसान राजीव सिंह ने गोबर से खाद बनाने वाली मशीन लगाई है। इससे किसान गोबर के खाद की जरूरत को तुरंत पूरा कर सकते हैं। किसान राजीव सिंह के अनुसार उन्हें मशीन लगवाने में आत्मा परियोजना प्रभारी योगेंद्रपाल सिंह योगी ने जागरूक किया है।

 

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जैविक खेती : गोबर खाद मशीन

इस मशीन की सहायता से कम समय में गोबर को खाद में तब्दील किया जा सकता है। इसमें खर्चा भी कम आता है और किसानों को जब जरूरत हो वह गोबर यहां लाएं और खाद बनवाकर उसे ले जाए। इससे किसान को एक ओर अतिरिक्त आमदनी भी हो जाती है और दूसरी ओर गांव के किसानों को ताजा खाद उपलब्ध हो रहा है। इससे गांव के किसानों को फायदा मिल रहा है और जैविक खेती को बढ़ावा भी। इस संबंध में आत्मा परियोजना प्रभारी योगेंद्रपाल सिंह योगी का कहना है कि राजीव सिंह की मशीन से जैविक खेती से किसानों को जुडऩे का मौका मिलेगा। किसानों की खेत की सभी पोषक तत्वों की जरूरत को मशीन से पूरा किया जा सकता है। इससे खेती की लागत घटेगी और किसान की आय भी बढ़ेगी।

 


क्या है गोबर खाद की उपयोगिता

गाय के गोबर में 86 प्रतिशत तक द्रव पाया जाता है। गोबर में खनिजों की भी मात्रा कम नहीं होती। इसमें फास्फोरस, नाइट्रोजन, चूना, पोटाश, मैंगनीज़, लोहा, सिलिकन, ऐल्यूमिनियम, गंधक आदि कुछ अधिक मात्रा में विद्यमान रहते हैं तथा आयोडीन, कोबल्ट, मोलिबडिनम आदि भी थोड़ी थोड़ी मात्रा में रहते हैं। अस्तु, गोबर खाद के रूप में, अधिकांश खनिजों के कारण, मिट्टी को उपजाऊ बनाता है। पौधों की मुख्य आवश्यकता नाइट्रोजन, फास्फोरस तथा पोटासियम की होती है। 

वे वस्तुएं गोबर में क्रमश: 0.3- 0.4, 0.1- 0.15 तथा 0.15- 0.2 प्रतिशत तक विद्यमान रहती हैं। मिट्टी के संपर्क में आने से गोबर के विभिन्न तत्व मिट्टी के कणों को आपस में बांधते हैं, किंतु अगर ये कण एक दूसरे के अत्यधिक समीप या जुड़े होते हैं तो वे तत्व उन्हें दूर दूर कर देते हैं, जिससे मिट्टी में हवा का प्रवेश होता है और पौधों की जड़ें सरलता से उसमें सांस ले पाती हैं। गोबर का समुचित लाभ खाद के रूप में ही प्रयोग करके पाया जा सकता है। इस प्रकार दुधारू पशुओं से प्राप्त गोबर उसे पैदावार तो अच्छी होती है साथ ही स्वस्थ उत्पादन प्राप्त होता है। अब तो मशीन से गोबर खाद बनाई जाने लगी है। ऐसी ही मशीन बिजनौर के किसान ने लगाई है जो कुछ ही घंटों में गोबर को खाद बना देती है। इससे किसानों किसानों को जैविक खेती के लिए खेतों में डालने के लिए तुरंत ही ताजा खाद मिल जाएगा।


कैसे तैयार की जाती है इस मशीन से गोबर खाद

गांव सिकंदरी के किसान राजीव सिंह के अनुसार गोबर को गड्ढ़े में डालकर उसमें जीवाणु वाला पानी मिलाया जाता है। फास्फोरस, नाइट्रोजन आदि किसी भी तत्व की पूर्ति के लिए ये जीवाणु मिलाए जाते हैं। अगर खेत में दीमक की समस्या है तो उसे दूर करने के लिए मैटाराइजम मिलाया जाता है। इससे तैयार घोल को मशीन के अंदर ले जाया जाता है। अगर मशीन में दस क्विंटल गोबर डाला जाए तो इससे तीन क्विंटल खाद मिल जाता है। बाकी 70 प्रतिशत जीवामृत/पानी मिलेगा। यह पानी भी पोषक तत्वों से युक्त होता है। इसे भी खेत में डाला जा सकता है।


एक बीघा में कितना लगता है गोबर खाद

गोबर के खाद से मुख्य रूप से कार्बन मिलता है। बिना कार्बन के कोई भी खाद असर नहीं करता है। सामान्य तीन से चार महीने पुरानी कूड़ी में कार्बन कम होता है। ऐसा खाद प्रति बीघा जमीन में 50 से 60 क्विंटल डालना होता है। केंचुए से बनने वाला खाद एक बीघा जमीन में केवल छह क्विंटल ही डालना होता है। जबकि मशीन से तैयार खाद केवल 40 किलो प्रति बीघा ही डालना होता है।


मशीन से बनी गोबर खाद दिलाएंगी दीमक की समस्या से मुक्ति

जमीन की उपजाऊ क्षमता बनाएं रखने के लिए किसान खेतों में गोबर की खाद डालते हैं। लेकिन गोबर की खाद भी हर समय किसान के पास उपलब्ध नहीं होती है। गोबर से खाद बनने में तीन से छह महीने का समय लगता है। अगर खाद तैयार न हो तो किसान कच्चा गोबर ही खेत में डाल देते हैं। इससे खाद का पूरा लाभ खेत को नहीं मिलता है। साथ ही कच्चा खाद दीमक की खुराक भी होता है। कच्ची खाद खेत में डालने से खेत में दीमक डेरा डाल देती हैं और फिर फसलों को भी नुकसान पहुंचाती हैं। लेकिन इस मशीन द्वारा तैयार खाद दीमक की समस्या को खतम करने में सहायक है क्योंकि गोबर से खाद बनाते समय इसमें मैटाराइजम मिलाया जाता है जो दीमक के खात्में के लिए काफी असरकारक माना गया है।

 

 

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मूंगफली : सर्दियों मेें मूंगफली खाने से मिलते हैं कई फायदे

मूंगफली : सर्दियों मेें मूंगफली खाने से मिलते हैं कई फायदे

जान लें मूंगफली खाने का सही तरीका वरना हो सकता है नुकसान मूंगफली को सर्दी का मेवा भी कहा जाता है। व्रत, उपवास आदि में साथ ही अन्य अवसरों पर रेसिपी बनाने में इसका उपयोग किया जाता है। मूंगफली खाने से कई फायदे मिलते है। यह ब्लड शुगर और वजन घटाने में सहायक है। इसके अलावा इसके सेवन से कई रोगों में फायदा होता है। मूंगफली प्रोटीन का सबसे अच्छा स्रोत है। इसमें विटामिन ई, मैग्नीशियम, फॉलेट, कॉपर और आर्जिनिन होता है। अध्ययनों से पता चलता है कि मूंगफली वजन घटाने के लिए भी उपयोगी हो सकती है और हृदय रोग के जोखिम को कम कर सकती है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 मूंगफली पाए जाने वाले पोषक तत्व 100 ग्राम कच्ची मूंगफली में कैलोरी - 567, प्रोटीन - 25.8 ग्राम, वसा - 49.2 ग्राम (संतृप्त - 6.28 ग्राम, मोनोअनसैचुरेटेड - 24.43 ग्राम, पॉलीअनसेचुरेटेड - 15.56 ग्राम), कार्ब्स-16.1 ग्राम, चीनी - 4.7 ग्राम, फाइबर - 8.5 ग्राम और 7 प्रतिशत पानी पाया जाता है। मूंगफली खाने से मिलने वाले फायदें मूंगफली खाने के कई फायदे हैं। मूंगफली खाने से आश्चर्यजनक लाभ मिलते हैं। बेशर्त है इसका सेवन सही मात्रा व तरीके से किया जाए। बालों को रखे स्वस्थ और मजबूत, गंजेपन के इजाल में भी उपयोगी मूंगफली के सेवन से बालों व त्वचा को फायदा होता है। मूंगफली में ऐसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो बालों को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं। इनमें ओमेगा 3 फैटी एसिड का अधिक स्तर शामिल है जो स्कैल्प को मजबूत और बालों के विकास के लिए बेहद फायदेमंद है। मूंगफली एल आर्जिनाइन का बहुत अच्छा स्त्रोत है, यह एक अमीनो एसिड है जो पुरुषों में गंजेपन के इलाज के लिए बहुत उपयोगी है और बालों को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दिल को करें मजबूत, हार्ट अटैक के खतरे को कम करने में सहायक मूंगफली का सेवन से दिल को मजबूत करने में सहायक है। इससे हार्ट अटैक के खतरा कम हो जाता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, जो लोग नियमित रूप से मूंगफली खाते हैं, उनमें हार्ट स्ट्रोक या बीमारी से मरने की संभावना बहुत कम होती है। मूंगफली और अन्य नट्स खराब कोलेस्ट्रॉल (एलडीएल) के स्तर को भी कम कर सकते हैं। खराब कोलेस्ट्रॉल से रक्त वाहिकाओं पर पट्टिका विकास हो सकता है और मूंगफली इसे रोक सकती है। मूंगफली भी सूजन को कम कर सकती है जो हृदय रोग का कारण बन सकती है। मूंगफली में भी दिल की समस्याओं से लडऩे में मदद करता है। त्वचा को स्वस्थ रखने में मददगार मूंगफली में भरपूर मात्रा में मैग्रीशियम पाया जाता है जो हमारे तंत्रिका तंत्र, मांसपेशियों और रक्त वाहिकाओं को शांत करके त्वचा के लिए बेहतर रक्त प्रवाह प्रदान करता है। इससे आपको एक युवा और स्वस्थ त्वचा मिलती है। मूंगफली में पाया जाने वाला बीटा कैरोटीन एक एंटीऑक्सीडेंट है जो त्वचा के स्वास्थ्य के लिए बहुुत महत्वपूर्ण है। इसके अलावा त्वचा की सूचन कम करने में भी मूंगफली का प्रयोग फायदेमंद है। इससे सोरायसिस और एक्जिमा जैसे त्वचा रोगों का इलाज भी किया जाता है। मंूगफली में मौजूद फैटी एसिड भी सूजन और त्वचा की लालिमा को कम करता है। मूंगफली में मौजूद फाइबर विषाक्त पदार्थों और कचरे को बाहर निकालने के लिए आवश्यक है। शरीर के अंदर विषाक्त पदार्थ त्वचा पर डल्नस और अतिरिक्त तेल के कारण होते हैं। नियमित रूप से मूंगफली सेवन आपको एक स्वस्थ त्वचा देने में मदद करता है। डिफ्रेशन को रखें दूर शरीर में सेरोटोनिन का कम स्तर डिफ्रेशन या अवसाद को उत्पन्न करता है। मूंगफली में मौजूद ट्रिप्टोफेन इस रसायन को निकालने में मदद करता है। खतरनाक बीमारियों को दूर रखने और स्वस्थ रहने के लिए प्रत्येक सप्ताह दो बड़े चम्मच मूंगफली के मक्खन का सेवन करना लाभप्रद रहता है। स्मरण शक्ति बढ़ाए मूंगफली में विटामिन बी 3 या नियासिन तत्व होते हैं जिनके कई स्वास्थ्य लाभों में मस्तिष्क की सामान्य कार्यप्रणाली के साथ-साथ स्मरण शक्ति को भी बढ़ाना शामिल है। इसका उपयोग पढऩे वाले बच्चों के लिए खास कर फायदेमंद साबित हो सकता है। वजन घटाने में सहायक मूंगफली वजन कम करने में भी सहायक है। मूंगफली में प्रोटीन और फाइबर होते हैं। ये दोनों पोषक तत्व भूख को कम करते हैं। इसलिए भोजन के बीच में कुछ मूंगफली खाने से आपकी भूख कम हो सकती है जिससे वजन कम करने में मदद मिलेगी। रोजाना मूंगफली का सेवन करने से जल्दी ही वजन कम होने लगता है। पित्ताशय की पथरी को रोकती है मूंगफली का सेवन पित्त पथरी के कम जोखिम से भी जुड़ा हुआ है। एक सप्ताह में मूंगफली को शामिल करने वाले 5 या अधिक नट्स वाले पुरुषों में पित्त पथरी की बीमारी का खतरा कम होता है। इसी तरह जो महिलाएं एक हफ्ते में 5 या उससे अधिक यूनिट नट्स का सेवन करती हैं उनमें कोलेसीस्टेक्टॉमी (पित्ताशय की थैली को हटाने) का जोखिम कम होता है। कैंसर के जोखिम को कम करे मूंगफली में पॉलीफीनॉलिक नामक एंटीऑक्सीडेंट की अधिक मात्रा मौजूद होती है। पी-कौमरिक एसिड में पेट के कैंसर के जोखिम को कम करने की क्षमता होती है। मूंगफली विशेष रूप से महिलाओं में पेट के कैंसर को कम कर सकती है। दो चम्मच मूंगफली के मक्खन का कम से कम सप्ताह में दो बार सेवन करने से महिलाओं व पुरुषों में पेट के कैंसर के खतरे को कम कर सकते हैं। अल्जाइमर रोग में भी फायदेमंद मूंगफली का सेवन अल्जाइमर जैसी बीमारियों में भी लाभदायक है। इसमें रेसवेरट्रोल नामक एक यौगिक होता है जो मृत कोशिकाओं को कम करने, डीएनए की रक्षा करने और अल्जाइमर रोगियों में तंत्रिका संबंधी क्षति को रोकने के लिए फायदेमंद है। उबाली हुई या भुनी हुई मूंगफली ज्यादा लाभकारी होती है, क्यूंकि ये रेसवेरट्रोल के स्तर को बढ़ा देती है। अध्ययनों से पता चला है कि नियासिन में समृद्ध खाद्य पदार्थ जैसे कि मूंगफली, अल्जाइमर रोग के खतरे को 70 प्रतिशत तक कम कर सकती हैं। प्रजनन क्षमता में बढ़ोतरी मूंगफली में अच्छी मात्रा में फोलेट भी होता है। कई अध्ययनों से पता चला है कि जिन महिलाओं ने गर्भावस्था के पहले और दौरान 400 माइक्रोग्राम फोलिक एसिड की दैनिक खपत की थी, उनमें एक गंभीर तंत्रिका ट्यूब दोष के साथ पैदा होने वाले बच्चे के जन्म का खतरा 70 प्रतिशत तक कम हो गया। बाल विकास के लिए अच्छा आहार कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि चूंकि मूंगफली में सभी अमीनो एसिड और प्रोटीन होते हैं, इसलिए वे बालों के विकास के लिए आहार का अच्छा पूरक हो सकते हैं। कैसे खाएं मूंगफली? मूंगफली खाने का तरीका आप मूंगफली या मूंगफली कई तरीकों से खा सकते हैं - कच्चा, तला हुआ या भुना हुआ हो सकता है। इसे दैनिक आधार पर खाने का सबसे अच्छा तरीका सलाद के रूप में है। आप अपने नाश्ते के अनाज को मूंगफली के साथ भी डाल सकते हैं या इसे जमे हुए दही में मिला सकते हैं। मूंगफली का अधिक मात्रा में सेवन हो सकता है खतरनाक मूंगफली की तासीर गर्म होती है। इसलिए इसका सेवन ज्यादातर सर्दियों के मौसम में ही किया जाता है। पर ध्यान रखें कि सीमित रूप से ही इसका सेवन करें। मूंगफली का अधिक मात्रा में सेवन आपके शरीर में अन्य प्रकार की समस्या उत्पन्न कर सकता है। मूंगफली का अधिक मात्रा में सेवन करने से एलर्जी भी हो सकती है, जो कई बार मौत का कारण भी हो सकती है। संवेदनशील त्वचा के लिए मूंगफली बहुत ही घातक होती है। मुंह में खुजली, गले और चेहरे पर सूजन आदि इसके एलर्जी के ही लक्षण होते हैं। कई बार सांस लेने में परेशानी, अस्थमा अटैक भी हो सकता है। इसके अधिक सेवन से पेट में गैस की समस्या हो सकती है। इसलिए किसी भी प्रकार के दुष्परिणाम होने पर डाक्टर से सलाह लें और जब तक ठीक नहीं हो जाते हैं तब तक किसी भी प्रकार के सूखे मेवे का सेवन न करें। नोट- यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य अनुभवों व शोधों में सामने आए परिणामों पर आधारित है। अलग-अलग व्यक्तियों की तासीर के अनुसार इसके फायदे या नुकसान देखने को मिल सकते हैं। इसलिए किसी भी प्रकार के नुकसान के लिए टै्रक्टर जंक्शन उत्तरदायी नहीं होगा। आप स्वविवेक से इसके फायदे और नुकसान को समझे और इसका उपयोग अपनी शारीरिक आवश्यकतानुसार करें। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो 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दिसंबर माह के कृषि कार्य : ये कृषि कार्य करें, होगी अच्छी पैदावार

दिसंबर माह के कृषि कार्य : ये कृषि कार्य करें, होगी अच्छी पैदावार

गेहूं, मटर, चना, मसूर और आलू की फसल को होगा फायदा फसलों की बेहतर पैदावार के लिए उनकी समय-समय पर देखभाल करना बेहद जरूरी होता है। इसके लिए जरूरी है कि फसलों को उनकी आवश्यकतानुसार सिंचाई, निराई-गुड़ाई व रोगों से सुरक्षित किया जाना जरूरी है। इसके लिए किसानों को हम हर माह किए जाने वाले कृषि कार्यों की जानकारी देते हैं ताकि किसान भाइयों को अपनी बोई हुई फसलों का बेहतर उत्पादन मिलने में मदद मिल सके। इसी क्रम में आज हम दिसंबर माह में किए जाने वाले कृषि कार्यों को बताएंगे जिससे आपको लाभ होगा। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 जौ जौ में पहली सिंचाई बोआई के 30-35 दिन बाद कल्ले बनते समय करें। उसके बाद आवश्यकतानुसार सिंचाई करते रहना चाहिए। मसूर मसूर की बुवाई के 45 दिन बाद पहली हल्की सिंचाई करनी चाहिए। लेकिन इस बात का ध्यान रखें की खेत में पानी जमा न हो पाए। इसके लिए खेत में जल निकास की उचित व्यवस्था होना बेहद जरूरी है। मटर मटर में बुवाई के 35-40 दिन पर पहली सिंचाई करें। इसके बाद आवश्यकतानुसार सिंचाई की जा सकती है। इस दौरान खेत की गुड़ाई करना फायदेमंद रहता है। गेहूं गेहूं की शेष रही बुवाई इस माह पूरी कर लें, क्योंकि जितनी ज्यादा देरी से बुवाई की जाती है उतना ही कम उत्पादन प्राप्त होता है। देरी से बुवाई करने पर गेहूं की बढ़वार कम होती है और कल्ले कम निकलते हैं। देरी से बुवाई करने पर बीज की मात्रा को बढ़ा देना चाहिए। इसलिए प्रति हेक्टेयर बीज दर बढ़ाकर 125 किग्रा कर लें। वहीं अगर यूपी- 2425 प्रजाति ले रहे हैं, तो बीज की दर 150 किग्रा प्रति हेक्टेयर के हिसाब से लें। गेहूं की बुवाई कतारों में हल के पीछे कूड़ों या फर्टीसीड ड्रिल से करें। गेहूं की फसल में गेहुंसा एवं जंगली जई के नियंत्रण हेतु सल्फोसल्फ्यूरान 75 प्रति डब्लूपी की 13.5 ग्राम या सल्फोसल्फ्यूरान 75 प्रति मेट सल्फ्यूरान मिथाइल पांच प्रति 20 ग्राम प्रति एकड़ की दर से 200 से 250 लीटर पानी में घोल बनाकर पहली सिंचाई के बाद छिडक़ाव करना चाहिए। गेहूं में चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार की समस्या अधिक रहती है। यदि ऐसा है तो चौड़ी पत्ती के खरपतवार के नियंत्रण के लिए दो, चार, डी. सोडियम साल्ट 80 प्रति डब्लू पी की 625 ग्राम प्रति हेक्टेयर मात्रा का लगभग 500-600 लीटर पानी में घोलकर बुवाई के 20-25 दिन बाद फ्लैट फैन नाजिल से छिडक़ाव करना चाहिए। चना बुवाई के 45 से 60 दिन के बीच पहली सिंचाई कर दें। इसके बाद आवश्यकतानुसार सिंचाई की जा सकती है। वहीं खरपतवार को समय- समय पर खुरपी की सहायता से निकालकर खेत से बाहर फेंक दें या भूमि में दबा दें। यदि चने में झुलसा रोग का प्रकोप हो रहा हो तो इसकी रोकथाम के लिए प्रति हेक्टेयर 2.0 किग्रा 500-600 लीटर (मैंकोजेव 75 प्रतिशत 50 डब्यूपी.) को पानी में घोलकर 10 दिन के अंतर पर दो बार छिडक़ाव करें। राई-सरसों राई सरसों की बुवाई के 55-65 दिन बाद या फूल निकलने के पहले ही दूसरी सिंचाई कर देनी चाहिए। इससे अच्छा उत्पादन मिलता है। शीतकालीन मक्का मक्का की बुवाई के 20-25 दिन बाद पहली निराई-गुड़ाई करके सिंचाई कर देनी चाहिए। ध्यान रहे खेत में नमी होना बेहद जरूरी है इसलिए समय-समय पर हल्की सिंचाई करते रहे। शरदकालीन गन्ना गन्ने की फसल को सूखने से बचाने के लिए आवश्यकतानुसार सिंचाई करते रहना चाहिए। बरसीम बरसीम की 45 दिन बाद पहली कटाई करें। फिर हर 20-25 दिन पर कटाई करते रहें। प्रत्येक कटाई के बाद सिंचाई करते रहना चाहिए जिससे बेहतर उत्पादन मिलता है। जई जई की 20-25 दिन पर सिंचाई करते रहना चाहिए, क्योंकि खेत में नमी रखने के लिए सिंचाई करते रहना जरूरी होता है। सब्जियां आलू आलू की फसल की 10-15 दिन के अंतर पर सिंचाई करते रहना चाहिए। पाले से बचाने के लिए खेत में धुआं कर दें। आलू में झुलसा एवं माहू रोग का प्रकोप दिखाई दें तो इसके नियंत्रण के लिए मैकोजेब 2 ग्राम तथा फास्फेमिडान 0.6 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी में मिलाकर 10-12 दिन के अंतर पर 2-3 छिडक़ाव करें। मिर्च मिर्च में खरपतवार नियंत्रण हेतु डोरा कोल्पा चलाएं। मल्चिंग का प्रयोग करें। मिर्च में वायरस वाहक कीटों थ्रिप्स एफिड माइट्स सफेद मक्खी का समय पर नियंत्रण करें। इसके लिए कीट की सतत निगरानी कर तथा संख्या के आधार पर डाईमिथएट की 2 मि.ली. मात्रा 1 पानी मिलकर छिडक़ाव करें। अधिक प्रकोप की स्थिति में थायमेथाइसम 25 डब्लू जी की 5 ग्राम मात्रा 15 ली. पानी में मिलकर छिडक़ाव करें। टमाटर की तरह ही मिर्च में भी झुलसा रोग का प्रकोप रहता है। इससे बचाव के लिए मैकोजेब 0.2 प्रतिशत (2 ग्राम दवा प्रति लीटर पानी) का छिडक़ाव करें। मटर सब्जी मटर में फूल आने के पहले एक हल्की सिंचाई करें। दूसरी सिंचाई फलियां बनते समय करें। टमाटर इस समय टमाटर की गर्मी के मौसम की फसल लेने के लिए नर्सरी तैयार कर बीजों की बुवाई करें। टमाटर की फसल में झुलसा रोग का प्रकोप दिखाई दे तो इसके लिए मैकोजेब 0.2 प्रतिशत या 2 ग्राम दवा प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिडक़ाव करें। प्याज यह समय प्याज की रोपाई का भी है। इसके लिए प्याज की 7-8 सप्ताह पुरानी पौध का प्रयोग करें। रोपाई के बाद हल्की सिंचाई करें। आम और लीची में मिलीबग की रोकथाम ऐसे करें आम, अमरूद व लीची में मिलीबग कीट का प्रकोप अधिक होता है। इसके बचाव के लिए इन तरीको अपनाया जा सकता है। तने के आधारीय भाग पर पॉलीथिन बांधकर लगाना। मिट्टी से 30 सेंटीमीटर उपर एक फुट ऊंचाई व 400 गेज मोटी पॉलीथिन का एक पट्टा तने के चारों ओर लपेटकर उपर और नीचे कसकर बांध दिया जाता है। पॉलीथिन बंध लगाना उत्तम तरीका है। तने के आधारीय भाग पर कीटनाशक चूर्ण का बुरकाव। इस विधि में फलों के तनों पर मिट्टी से ढाई फुट उपर तक किसी महीन सूती कपड़े में पोटली बनाकर क्लोरपारीफॉस डस्ट नामक कीट नाशी 200 से 250 ग्राम मात्रा को तनों के चारों और धीरे-धीरे पटककर बुरकाव करते हैं। जो किसान पॉलीथिन बंध न लगा पाएं, उनके लिए यह विधि उत्तम रहेगी। बागों में कीटनाशकों का छिडक़ाव। यह अंत में किए जाने वाला तरीका है। जिसमें उपयुक्त दोनों विधियों का किसान प्रयोग नहीं कर पाए हों। यदि मिलीबग कीट उपर तक चढ़ गए हों तो उन्हें नियंत्रण करने का यही कारगर उपाय है। इसक लिए डाईमेथोयट 30 ईसी नामक कीटनाशी की दो मिली मात्रा को एक लीटर पानी की दर से घोलकर प्रभावित फल वृक्षों पर बाग वाले स्प्रेयर से छिडक़ाव करके अच्छे से नहला देते हैं। इसके परिणाम स्वरूप सभी कीड़े मरकर पेड से नीचे गिर जाते हैं और बाग इनके प्रकोप से बच जाता है। सुगंधित पुष्प ग्लैडियोलस में सिंचाई करें, मेंथा के लिए भूमि तैयार करें सुगंधित पुष्प ग्लैडियोलस में आवश्यकतानुसार सिंचाई एवं निराई-गुड़ाई का कार्य करें। इस दौरान इसकी मुरझाई टहनियों को निकालते रहें और बीज न बनने दें। मेंथा के लिए भूमि की तैयारी के समय अंतिम जुताई पर प्रति हेक्टेयर 100 क्विंटल गोबर की खाद, 40-50 किग्रा नाइट्रोजन, 50-60 किग्रा फास्फेट एवं 40-45 किग्रा. पोटाश भूमि में मिला दें। इसके बाद इसकी बुवाई का कार्य प्रारंभ करें। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने 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आधार कार्ड और पैन कार्ड से ठगी : किसान रहे सचेत, ऐसे हो सकते हैं ठगी के शिकार

आधार कार्ड और पैन कार्ड से ठगी : किसान रहे सचेत, ऐसे हो सकते हैं ठगी के शिकार

आधार कार्ड से जाली बैंक खाता खुलवा कर ठगी करता था ये गिरोह, पुलिस ने पकड़ा, जानें, क्या है पूरा मामला यदि आप अपना आधार कार्ड और पैन कार्ड सुरक्षित नहीं रखते हैं तो आपके साथ रुपए पैसों को लेकर ठगी हो सकती है। कोई आपके आधार कार्ड से फर्जी खाता खुलवाकर फायदा उठा सकता है जिसका आपको पता भी नहीं चल पाएगा। ऐसा ही एक मामला लुधियाना में सामने आया है। जानकारी के अनुसार बीते दिनों में पंजाब की लुधियाना पुलिस ने एक ऐसे गिरोह को पकड़ा है जो गांव के अनपढ़ व कम पढ़े लिखे लोगों का आधार कार्ड हासिल कर जाली बैंक खाते खुलवा कर ठगी करता था। पकड़ा गया गिरोह उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, पुणे और पंजाब आदि राज्यों में सक्रिय बताया गया है। इस गिरोह ने कई लोगों से करीब 30 लाख रुपए की ठगी की है। हम यह घटना आपको डराने के लिए नहीं बता रहे हैं बल्कि आपको सावधान और सचेत करने के लिए बता रहे है ताकि कहीं आप ठगी के शिकार न हो जाएं। यदि आप अब तक अपना आधार व पैन कार्ड संभाल कर नहीं रखते हैं तो इस घटना को पढऩे के बाद आप इसे संभाल कर रखेंगे ऐसी हम आपसे उम्मीद करते हैं। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 आधार कार्ड व पेन कार्ड से करते थे ठगी, भोले-भाले गांव के लोगों को बनाते थे शिकार लुधियाना पुलिस द्वारा पकड़ा गया गिरोह ज्यादातर अनपढ़ और भोले-भाले गांव के लोगों को अपना शिकार बनाता था। गिरोह के शातिर, किसी तरह व्यक्ति का आधार कार्ड और पैन कार्ड हासिल करते थे, इसके बाद बैंक में खाता खुलवाते थे। कुछ बैंक ने ऑनलाइन बैंक खाता खुलवाने की सुविधा दे रखी है। गिरोह का सरगना विजय कुमार पहले एक मोबाइल कंपनी में सिम कार्ड प्रमोशन का काम करता था, इसलिए उसे सिम कार्ड जारी करवाने के सभी तरीके पता थे। आरोपी रामनारायण एक कोरियर कंपनी में काम करता है। वह जाली तरीके से खुलवाए जाने वाले बैंक खातों के एटीएम और चेकबुक को लुधियाना के पते पर मंगवाने का काम करता था। आरोपी जाली खाते खुलवाकर इन्हें आगे यूपी और पश्चिम बंगाल के कुछ गैंग को महज 15 सौ से तीन हजार रुपये में बेच रहे थे। ये शातिर इन खातों का इस्तेमाल ओएलएक्स पर वाहन या अन्य सामान बेचने के लिए करते थे। जैसे ही कोई व्यक्ति पैसा खाते में भेजता, आरोपी तुरंत निकलवा लेते थे। पुलिस कमिश्नर ने बताया जांच के दौरान पता चला है कि गिरोह के शातिर हैदराबाद, दिल्ली व पुणे में ओला चालकों को जाली राइड बुक करते थे। उनके पास ओला कैब चालक का नंबर आ जाता था। इसके बाद दूसरे नंबर से कंपनी का अधिकारी बनकर आधार कार्ड और पैन कार्ड की मांग करते थे। इसके बाद उनके नाम पर विभिन्न बैंक में खाता खुलवा ऑनलाइन नकदी इधर से उधर करने के साथ लोन भी हासिल कर लेते थे। आरोपी कई बार धनी एप व रेड कारपेट से लोन भी हासिल कर चुके है। इन दोनों एप के माध्यम से अब तक करीब तीस लाख रुपये ठग चुके हैं। पुलिस ने ठगी के इस मामले में सात आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, पुणे और पंजाब समेत कई प्रदेशों में ठगी की वारदात को अंजाम दे रहा था। पुलिस ने आरोपियों के पास से 5.45 लाख रुपए नगद, 11 मोबाइल फोन, तीन क्रेडिट कार्ड, 17 सिम, दो लैपटाप, एक कलर प्रिंटर, 45 आधार कार्ड और 11 एटीएम कार्ड बरामद किए हैं। पुलिस आरोपियों से गिरोह के बारे में अन्य जानकारी जुटा रही है। यूपी में भी पकड़ा गया था ऐसा ही एक मामला एक माह पहले भी इसी तरह का मामला उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में पकड़ में आया था। मामले के अनुसार उत्तर प्रदेश के मेरठ में साइबर सैल ने दो ऐसे आरोपियों को गिरफ्तार किया है जो लोगों के आधारकार्ड व पैनकार्ड को स्कैन कराकर फर्जी आधारकार्ड व पैनकार्ड तैयार कर विभिन्न बैंकों में फर्जी नाम से खाता खुलवाने वाले का काम करते थे। पुलिस ने आरोपियों के पास से मोबाइल फोन, आधार कार्ड और नकदी बरामद किए थे। पुलिस के अनुसार जिले के थाना नौचंडी में प्रभारी साइबर सैल के नेतृत्व में टीम गठित की। इस टीम ने लोगों के आधार कार्ड व पैनकार्ड का दुरुपयोग कर फर्जी आधारकार्ड व पैनकार्ड तैयार कर विभिन्न बैंकों में खाता खुलवाने वाले दो शातिर बदमाशों को गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार मुज्जमिल पुत्र ईश्त्याक अली निवासी शास्त्रीनगर मेरठ द्वारा पुलिस अधीक्षक अपराध के समक्ष उपस्थित होकर एक प्रार्थना पत्र दिया गया था। जिसमें उसने किसी अज्ञात व्यक्ति द्वारा उसके आधार कार्ड व पैनकार्ड का दुरुपयोग कर उसके नाम से विभिन्न बैंकों में फर्जी खाते खुलवाने की शिकायत की थी। उसका कहना था कि इसकी जानकारी उसे बैंक द्वारा पैनकार्ड सर्च कराने पर हुई। उसके प्रार्थना पत्र को जांच कर वैधानिक कार्यवाही के लिए पुलिस अधीक्षक अपराध ने साईबर सैल मेरठ को प्रेषित किया। जिस पर तुरन्त कार्यवाही करते हुए साइबर सैल मेरठ द्वारा दो अभियुक्त शहजाद व रिजवान को गिरफ्तार किया गया। अभियुक्तों ने पूछताछ करने पर बताया था कि हम विभिन्न बैंकों से लोन दिलाने का कार्य करते हैं। लोन कराने के लिये लोगों से उनका आधार कार्ड, पैनकार्ड, प्रॉपर्टी के कागजात आदि ले लेते हैं तथा कागजातों को फोटोशॉप साफ्टवेयर के जरिए कम्प्यूटर द्वारा स्कैन कर उस पर अपना फोटो लगाकर फर्जी दूसरा पैनकार्ड तथा आधारकार्ड बना लेते हैं। बनाये गये फर्जी आधार कार्ड व पैनकार्ड का प्रयोग कर खाता खुलवाने व फर्जी सिम लेने के लिए करते थे। आप क्या रखें सावधानी ताकि न हो ठगी के शिकार अपना आधार एवं पैन कार्ड किसी भी अनजान व्यक्ति को न दें और न ही इसकी स्वयं के हस्ताक्षरयुक्त फोटो कॉपी। अपना आधार और पैन कार्ड किसी भी अपरिचित को वाट्अप पर शेयर नहीं करें। हमेशा अपने आधार और पैन कार्ड को सुरक्षित रखें ताकि वे अवांछनीय लोगों की पहुंच से दूर रहे। किसी भी कंपनी या लोन देने वाली कोई नई संस्था खुली हो तो उसकी वित्तीय स्थिति और इसका रजिस्ट्रेशन आदि के संबंध में पूर्ण जानकारी प्राप्त करें। इसके बाद ही उस संस्था या कंपनी की किसी योजना में निवेश करें। आजकल सब्सिडी पर सोलर सिस्टम देने की कई फर्जी बेवसाइट चल रही है जो भोले-भाले किसानों से भारी छूट दिलाने के नाम पर ठगी करती है अत: किसान भाई कोई भी सरकारी योजना का लाभ लेने से पहले अपने क्षेत्र के निकटतम कृषि विभाग से उस योजना के संबंध में जानकारी लें। उसके बाद ही योजना के लिए आवेदन करें। इस संबंध में कृषि विभाग भी किसानों को सूचनाओं के माध्यम से आगाह कर चुका है। इसलिए सावधानी बरतनी बेहद जरूरी है। और यदि आपके क्षेत्र या उसके आसपास ऐसी कोई फर्जी संस्था संचालित है तो चुप न रहें। उसकी शिकायत संबंधित विभाग या पुलिस से अवश्य करें ताकि भोले-भाले लोग ऐसी फर्जी संस्थाओं या कंपनी के जाल में फंसने से बच सकें। आजकल सभी बैंकों में खातों को आधार से लिंक करना जरूरी होता है। यदि आपने इसे अभी तक लिंक नहीं कराया है तो कराएं, लेकिन इस मामले में भी सावधानी बरते, हमेशा एनएसडीएल पैन सेवा केंद्र और यूटीआईटीएसएल जैसे ऑफलाइन सेवाओं के जरिये या फिर ऑनलाइन या एसएमएस के जरिये ही लिंक करवाएं। किसी भी एजेंट या अनजान व्यक्ति से इसकी लिकिंग न करवाएं क्योंकि आधार और पैन आपके महत्वपूर्ण दस्तावेज है। अगर यह किसी गलत व्यक्ति के हाथों में लग गए तो आप ठगी के शिकार हो सकते हैं। यदि कोई आपको बैंक अधिकारी बनकर फोन करता है और आपसे आधार या पैन की मांग करता है तो तुरंत अपने बैंक जाकर पता करें, क्योंकि बैंक अधिकारी कभी भी आपसे फोन करके आधार या पैन की मांग नहीं करते हैं बल्कि सूचना देकर आधार या पैन कार्ड के लिए आपको बैंक बुलाते हैं। अत: बैंक जाकर ही अपना आधार और पैन कार्ड खाते से लिंक कराएं। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

प्याज, आलू के भाव उपभोक्ताओं पर भारी

प्याज, आलू के भाव उपभोक्ताओं पर भारी

जानें, आखिर क्यूं बढ़ रहे हैं भाव, कब तक मिलेगी राहत? किसान आंदोलन के बीच देश में आलू-प्याज के दाम आम जनता पर भारी पड़ रहे हैं। जहां एक ओर किसान आंदोलन ने सरकार की नींद उठाकर रख दी है, वहीं दूसरी ओर प्याज ने आम आदमी की। कभी गरीब आदमी प्याज से रोटी खाकर अपना समय निकाल लेता था लेकिन आज प्याज से रोटी खाना महंगा होता जा रहा है। हाल ही में इंदौर से 180 टन प्याज किसान रेल से गुवाहाटी पहुंचाया गया। इसी तरह से कई जगह पर बाहर से आपूर्ति की जा रही है। करीब दो माह के अंदर प्याज के भावों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। कारोबारियों का कहना है कि कुछ समय में प्याज की कीमतें 100 रुपए प्रति किलोग्राम के स्तर को पार कर सकती हैं। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 आलू के दाम / प्याज के दाम ट्रेडर्स का कहना है कि फिलहाल मंडियों में टमाटर 50-60 रुपए प्रति किलोग्राम और आलू 45 रुपए के प्रति किलो के आस-पास बिक रहा है। प्याज की खपत बढऩे से इसके भावों में बढ़ोतरी देखी जा सकती है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय का डेटा दिखाता है कि पिछले एक साल में, थोक बाजार में आलू के दाम 108 प्रतिशत बढ़े हैं। साल भर पहले थोक में आलू 1,739 रुपए क्विंटल बिकता था, वहीं अब 3,633 रुपए क्विंटल हो गया है। पिछले महीने प्याज के दाम 5,645 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गए थे जो कि सालभर पहले 1,739 हुआ करते थे। यानी प्याज के रेट सालभर में 47 प्रतिशत बढ़ तक की बढ़ोतरी हुई है। इसी प्रकार आलू की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिली है। पिछले पांच साल में आलू की खुदरा कीमतों का एक तुलनात्मक अध्ययन दिखाता है कि दाम 16.7 रुपए/किलो से बढक़र 43 रुपए किलो तक पहुंच गए हैं। सब्जियों के बढ़ते दाम ने बिगाड़ा घर का बजट प्याज के साथ ही आलू व टमाटर के भावों में तेजी देखी गई है। प्याज के बाद यदि कोई सब्जी महंगी है तो उसमें आलू का दूसरा नंबर है। वहीं टमाटर तीसरे नंबर पर है। इतना ही नहीं प्याज, आलू, टमाटर ही नहीं अन्य सब्जियों के भावों में तेजी देखने को मिल रही है। अन्य सब्जियों के भाव भी सामान्य दिनों की तुलना में कई अधिक हो गए हैं जिससे लोगों के घर का बजट गड़बड़ाया हुआ है। हमने इस संबंध में आम उपभोक्ता से बात की तो उनका दर्द भी झलक आया। इस संबंध में गृहिणी गीता का कहना है कि उसे प्याज व आलू के पराठे खाना बेहद पसंद है। पर क्या करें इन दोनों ही चीजों के भाव आसमान को छू रहे हैं। पहले जहां तीन से पांच किलो प्याज व आलू ले जाती थी। वहीं अब एक व दो किलो से काम चलाना पड़ रहा है। इसी प्रकार शालिनी कहती हैं कि सब्जियों के बढ़ते भावों ने घर का बजट बिगाड़ दिया है। अब सब्जी पर पहले की अपेक्षा दुगुना पैसा खर्च हो रहा है जिससे घर का बजट गड़बड़ा गया है। यह दर्द शालिनी और गीता का नहीं कामोबेश सभी निम्न आय व मध्यम आयवर्गीय उपभोक्ताओं का है जिन्हें सीमित इनकम में अपना घर खर्च चलाना पड़ता है। प्याज के भाव / आलू के भाव : तेजी का क्या है कारण आलू उत्पादक राज्यों में इस बार अति बारिश व बाढ़ से आलू की फसल को काफी नुकसान हुआ है। इस कारण आलू की फसल इस साल काफी कम रही है। उत्तर प्रदेश जो कि आलू का सबसे बड़ा उत्पादक है, वहां पिछले साल के 15.5 मिलियन टन के मुकाबले इस साल 12.4 मिलियन टन आलू ही हुआ। दूसरे नंबर पर पश्चिम बंगाल में भी पिछले साल 11 मिलियन टन के मुकाबले इस बार केवल 8.5-9 मिलियन टन आलू की पैदावार रही है। इससे आलू के उत्पादन के मुकाबले खपत अधिक होने से आलू के भावों में तेजी आई है जिसमें अभी फिलहाल राहत की उम्मीद कम ही है। कब कम होंगे सब्जियों के भाव, क्या है सरकारी प्रयास रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति के अनुसार कई महीनों से महंगाई सहनशीलता के स्तर से ज्यादा रही है लेकिन समिति का मानना है कि जरूरी सप्लाई को लगे झटके धीरे-धीरे अर्थव्यवस्था खुलने के साथ-साथ आने वाले महीनों में गायब हो जाएंगे, सप्लाई चैन्स बहाल हो जाएंगी और गतिविधियां सामान्य हो जाएंगी। केंद्रीय बैंक के अनुसार, टमाटर, प्याज और आलू जैसी मुख्य सब्जियों के दाम भी तीसरी तिमाही तक खरीफ की फसलें आने के साथ कम हो जाने चाहिए। आरबीआई के अनुसार, दालों और खाद्य तेल के दाम आयात शुल्क में बढ़त की वजह से इसी तरह बने रहेंगे। वहीं सरकारी सूत्रों के अनुसार, सरकार के पास आलू के स्टॉक पर लिमिट तय करने का विकल्प है। लेकिन फिलहाल कीमतें बढऩे पर वह सभी संभव विकल्प उठाएगी जैसे आलू का आयात करना, ताकि कीमतों पर लगाम लग सके। इधर उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने हाल ही में प्याज के स्टॉक की लिमिट तय कर दी थी। एक अधिकारी के अनुसार, आलू और प्याज में एक अंतर है। पर्याप्त संकेत थे कि प्याज की उपलब्धता ज्यादा थी और कीमतें जान-बूझकर बढ़ाई जा रही थीं। लेकिन आलू के केस में फसल कम हुई है और लॉकडाउन के दौरान स्टॉक और इस्तेमाल बढ़ गया। सरकार हालात से निपटने के लिए कई विकल्पों पर विचार करेगी। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

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