सोयाबीन भावों ने बनाया ऊंचाई का नया रिकॉर्ड

सोयाबीन भावों ने बनाया ऊंचाई का नया रिकॉर्ड

Posted On - 18 Dec 2019

सोयाबीन के दाम 17 दिसंबर को अपने चार साल के दामों में सबसे अधिक रहे। इस दौरान सोयाबीन का कारोबार करीब 4300 रुपए प्रति क्विंटल के हिसाब से किया गया।  4300 रुपए प्रति क्विंटल के वर्तमान भावों ने बनाया ऊंचाई का नया रिकॉर्ड.


ट्रैक्टर जंक्शन से जुड़े किसान साथियों आज हम बात करते हैं सोयाबीन की। विगत एक दशक के दौरान देशभर में सोयाबीन के उत्पादों की खपत विशेष रूप से बढ़ी है। स्वास्थ्य के प्रति जागरूक युवा पीढ़ी सोयाबीन को खानपान में प्रमुखता देने लगी है। सोयाबीन प्रोटीन के श्रेष्ठ और सबसे सस्ते स्त्रोतों में शामिल है। सोयाबीन की फसल से किसानों को अच्छे भाव मिल रहे हैं।

 

सोयाबीन भाव : 5 हजार रुपए प्रति क्विंटल की उम्मीद

सोयाबीन की नई फसल मार्च माह में आएगी। पिछले दिनों हुई बारिश के चलते उत्पादन कम होने के अनुमान से सोयाबीन की कीमतों में लगातार तेजी बनी हुई है। मांग में तेजी के कारण कीमतों में लगातार मजबूती बनी हुई है। चालू फसल सीजन में सोयाबीन उत्पादक राज्यों में बेमौसम बारिश और बाढ़ के कारण सोयाबीन की फसल को नुकसान होने से उत्पादन प्रभावित हुआ है। पिछले तीन महीनों से सोयाबीन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। हाजिर और वायदा बाजार में सोयाबीन के दाम करीब चार साल के उच्चतम स्तर पर कारोबार कर रहे हैं। वायदा और हाजिर बाजार में सोयाबीन के दाम 4,300 रुपये प्रति क्विंटल को पार कर गए हैं। दिसंबर महीने की शुरुआत में सोयाबीन 4,000 रुपये और नवंबर की शुरुआत में 3,800 रुपये प्रति क्विंटल थी। सितंबर में सोयाबीन के भाव 3,500 रुपये प्रति क्विंटल के नीचे चल रहे थे। सोयाबीन के मौजूदा दाम अप्रैल 2016 के स्तर पर पहुंच गए हैं। बाजार के विशेषज्ञों का मानना है कि कीमतों में तेजी के मद्देनजर सोयाबीन 5,000 रुपये प्रति क्विंटल पहुंच सकती है। आंकड़ों के मुताबिक जुलाई 2012 में सोयाबीन के दाम 4,910 रुपये प्रति क्विंटल का रिकॉर्ड बनाया था जो इस बार टूट सकता है।

 

सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SOPA) रिपोर्ट

सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) की रिपोर्ट के मुताबिक देश में सोयाबीन का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य मध्य प्रदेश में वर्ष 2019 में सोयाबीन का कुल उत्पादन 40.107 लाख टन होने का अनुमान है जो पिछले साल की तुलना में 31.1 फीसदी कम है। महाराष्ट्र और राजस्थान में भी उत्पादन कम होने के आसार हैं। महाराष्ट्र में सोयाबीन का उत्पादन घटकर 36.295 लाख टन होने का अनुमान है जो पिछले साल के मुकाबले 5.70 फीसदी कम है। राजस्थान में इस बार सोयाबीन उत्पादन महज 6.560 लाख टन रहने के आसार हैं जो पिछले साल की अपेक्षा 26.7 फीसदी कम है।

सोपा के मुताबिक चालू फसल सत्र 2019-20 में सोयाबीन का उत्पादन घटकर 89.84 लाख टन रह सकता है जबकि पिछले साल 109.33 लाख टन था। नई फसल की आवक के समय उत्पादक राज्यों में 1.70 लाख टन सोयाबीन का बकाया स्टॉक बचा हुआ था। इस तरह चालू सीजन में सोयाबीन की कुल उपलब्धता 91.54 लाख टन रहने का अनुमान है। देश में उत्पादन कम होने के कारण सोयाबीन का आयात पिछले साल के 1.80 लाख टन से बढक़र चालू फसल सीजन में 3 टन तक पहुंच सकता है।

 

विश्व और भारत में सोयाबीन

सोयाबीन जापान, कोरिया, यूएस, चीन, भारत और ताइवाल में लोकप्रिय है। विश्व के चुनिंदा देशों में ही इसे उगाया जाता है। इन देशों में संयुक्त राज्य अमेरिका, ब्राजीन, चीन, अर्जेंटीना, भारत व कुछ अन्य देश शामिल है। विश्व में सोयाबीन के उत्पादन में भारत पांचवें स्थान पर है।  सोयाबीन भारतवर्ष में महत्वपूर्ण फसल है। यह दलहन के बजाय तिलहन की फसल मानी जाती है। सोयाबीन की खेती लगभग भारत के सभी राज्यों में की जाती है। मुख्यत: मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात, उतरप्रदेश, तमिलनाडु में सोयाबीन की खेती की जाती है।
 

आधिकारिक अनुमान से कम उत्पादन की उम्मीद

भारत के कुल सोयाबीन उत्पादन में मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी 50 फीसदी से अधिक होती है। पिछले साल 2018-19 (जुलाई से जून) में सोयाबीन का सालाना उत्पादन 137 लाख टन रहा था। कारोबारियों ने कहा कि अधिक कीमतों से घरेलू मुर्गी पालन (पॉल्ट्री) और मछली के चारे के रूप में इस्तेमाल होने वाली मांग में कमी आ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि तेल-तिलहन उद्योग को उम्मीद है कि इस साल सोयाबीन का उत्पादन 80-85 लाख टन रहने का अनुमान है। यह 1 करोड़ 35 लाख टन के आधिकारिक अनुमान से काफी कम होगा और भावों में नया रिकॉर्ड बनेगा।

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