सोयाबीन की 40 प्रतिशत ज्यादा बुवाई, बारिश नहीं हुई तो पैदावार पर असर

सोयाबीन की 40 प्रतिशत ज्यादा बुवाई, बारिश नहीं हुई तो पैदावार पर असर

Posted On - 23 Jul 2020

इस साल 38.48 प्रतिशत ज्यादा होगा सोयाबीन का उत्पादन

इस साल देश के अधिकांश राज्यों में सोयाबीन की खेती हो चुकी है और कई जगह पर इसकी बुवाई का कार्य अभी भी जारी है। इस बार देश में किसानों ने करीब 109.95 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन की खेती की है। इसे देखते हुए इस बार सोयाबीन का उत्पादन पिछले साल की तुलना में 38.48 प्रतिशत ज्यादा होने का अनुमान लगाया जा रहा है।

केंद्रीय कृषि मंत्रालय के मुताबिक, 17 जुलाई तक देश में 109.95 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन की खेती हो चुकी है। जो पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले करीब 38.48 प्रतिशत ज्यादा है। पिछले साल 79.40 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन की खेती हुई थी। आमतौर पर देश में 111.49 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन की खेती होती है। 

 

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बुवाई की स्थिति पर सोपा की रिपोर्ट

सोयाबीन के उत्पादन को लेकर सोपा ने जुलाई के दूसरे हफ्ते तक सोयाबीन की बुआई की स्थिति पर अपनी रिपोर्ट जारी की है। इसमें कहा गया है कि मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान में फिलहाल फसल सामान्य स्थिति में है। खास कर मध्य प्रदेश में जुलाई के पहले हफ्ते तक बोई गई करीब 50 फीसदी फसल में फूल भी लग चुके हैं। बाकी फसल में अगले एक से दो हफ्ते में फूल आ जाएंगे। 

 

 

खराब क्वालिटी के बीज की वजह से किसानों को दूसरी बार करनी पड़ी बुवाई

सोयाबीन के दूसरे बड़े राज्य महाराष्ट्र के बारे में सोपा कहा है कि खराब क्वालिटी की बीज की वजह से राज्य में किसानों को करीब 25 प्रतिशत सोयाबीन की दोबारा खेती करनी पड़ी है। अगैती बुआई के बाद सोयाबीन को जमने में देरी से यहां खराब क्वालिटी के बीज के इस्तेमाल का मामला सामने आया था।

हालांकि सोपा का कहना है कि दोबारा बुआई के बाद अब स्थिति बेहतर है, लेकिन अगले एक हफ्ते यानी करीब 5-7 दिनों में खास करके लातूर, उस्मानाबाद और बीड जिलों में बारिश का जरूरत होगी, क्योंकि यहां जमीन में नमी का स्तर कम है।

 

फसल अच्छी स्थिति में, पर एक हफ्ते में पड़ेगी बारिश की जरूरत

सोपा के मुताबिक राजस्थान में भी सोयाबीन की फसल अच्छी स्थिति में है, लेकिन मध्य प्रदेश और महाराट्र की तरह यहां भी अगले एक हफ्ते में बारिश की जरूरत रहेगी। इसके अलावा वैसे तो फसल की स्थिति ठीक है, लेकिन अगले एक हफ्ते में बारिश की जरूरत पड़ सकती है।

इधर निमाड़ इलाके में पीला मोजैक वायरस का भी असर देखने को मिला है। प्रदेश के कुछ हिस्सों में कीटों का मामला सामने आया था। लेकिन कीटनाशकों के इस्तेमाल से अब इस पर काबू पा लिया गया है।
 

 

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