Rage of Agricultural and Farming Equipment in Global Agriculture Industry: Ken Research

Rage of Agricultural and Farming Equipment in Global Agriculture Industry: Ken Research

13 September, 2016

Advancement of technology in the agricultural sector led to mind boggling incursion of agricultural equipment in the global agriculture industry providing stepping stones for remarkable modernization and commercialization of the agricultural sector. Both developed and developing world witnessed this trend of using agricultural equipment in farming and agricultural sector. Traditional farming techniques are now becoming obsolete and global market is flooded with electricity driven agricultural machinery including tractors, threshers, plough, harrow, sprayer, harvester, sprinklers, diggers, harrow, etc. According to UN comptrade data global trade of agricultural equipment was worth whooping USD 58 billion in 2013. 

Further according to the data, sector was growing at the rate of 7.3% in 2004-13. Further, oil seeds and grain farming equipment was prime segment of the global agricultural equipment industry. Considering developing economies of the world, Canada, Australia, Germany, France, United Kingdom, Netherlands are biggest markets for agricultural equipment. Growth of agricultural equipment industry in developing countries like Mexico, Brazil and China is also significant. Major global agricultural equipment companies include AGCO Corporation, MTD PRODUCTS AG, Alamo Group, CLAAS, etc. 

Considering European economy farming machinery market is extremely vigorous and strong. In the west tractors and farm harvesters has maximum share in the industry. Agriculture is proliferating in Germany, France and UK which is significantly contributing to maximum growth in the equipment industry. Further, positive sentiments are associated to growth in agricultural equipment market in central and Eastern Europe. 

Farming equipment industry of North America is witnessing massive growth and development. Demand for harvesters reached new records after 2013. However, demand for tractors has risen meagerly in North American region. However, pessimism is associated to South American market due to low income growth, poor economic stability and low rainfall rates. Mexico and Brazil are performing outstandingly in the South American region. 

Asian agricultural equipment market has witnessed remarkable growth relative to the global industry.  India and China emerged as prime markets for agricultural equipment in Asia. Both the economies are aiming at substantial mechanization and modernization of agriculture which has resulted in massive growth in the sector. However, monsoon failure in India to an extent has constrained the sales of harvesters but tractor sales are still sky high Indian economy. 

African agricultural equipment industry growth is rather weak and dismal attributing to immense poverty and less reliance on agricultural industry. African economy still does not have well developed market for agricultural equipment. 

Considering Australian economy, it is one of the largest market for agricultural equipment in the world. It is one of the leading importer of farming machinery from The US. Commercialization of agriculture, high income and greater mechanization has resulted in superbdemand for agricultural equipment in Australia. Sales of tractors is enormous in the continent.

Thus, global economy is witnessing splendid growth in the agricultural equipment sector. Remarkable sales, new launches, better agricultural income are the prime reasons which are going to generate further sales in the industry. Asian economy is expected to drive greater growth in the sector. 

For more information on the Publication, refer to below Link:
https://www.kenresearch.com/agriculture-and-animal-care/agriculture-equipment/SC-104-19.html

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समर्थन मूल्य पर धान की खरीद : 8.54 लाख किसानों के खातों में पहुंचे 18,539.86 करोड़ रुपए

समर्थन मूल्य पर धान की खरीद : 8.54 लाख किसानों के खातों में पहुंचे 18,539.86 करोड़ रुपए

सरकार ने समर्थन मूल्य पर खरीदा 100 लाख टन धान भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) और राज्य की खरीद एजेंसियों ने सोमवार तक 98.19 लाख टन धान की खरीद की है। इससे देश के विभिन्न राज्यों के 8.54 लाख किसानों के खातों में करीब 18,539.86 करोड़ रुपए आए हैं। यह खरीद 18,880 रुपए प्रति टन के एमएसपी की दर से की गई है। मीडिया में प्रकाशित खबरों से मिली जानकारी के अनुसार एक सरकारी बयान में कहा गया है कि खरीफ 2020-21 के लिए धान की खरीद पंजाब, हरियाणा, यूपी, तमिलनाडु, उत्तराखंड, चंडीगढ़, जम्मू-कश्मीर और केरल जैसे खरीद करने वाले राज्यों व केन्द्र शासित प्रदेशों में तेजी से चल रही है। इन राज्यों में 19 अक्टूबर तक 8.54 लाख किसानों से 18,880 रुपए प्रति टन के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की दर से 18,539.86 करोड़ रुपए मूल्य के 98.19 लाख टन से अधिक धान की खरीद की गई है। बता दें कि खरीफ मार्केटिंग सीजन (केएमएस) 2019-20 की इसी अवधि के दौरान 80.20 लाख टन धान की खरीद हुई थी। चालू सत्र में धान खरीद, पिछले सत्र की तुलना में 22.43 प्रतिशत अधिक है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 779 किसानों से की 806.11 टन मूंग और उड़द की खरीद सोमवार तक, सरकार ने अपनी नोडल एजेंसियों के माध्यम से तमिलनाडु, महाराष्ट्र और हरियाणा में 779 किसानों से 5.80 करोड़ रुपए की 806.11 टन मूंग और उड़द की खरीद की है। इसी प्रकार, कर्नाटक और तमिलनाडु में 3,961 किसानों से 52.40 करोड़ रुपये की 5,089 टन नारियल गरी की खरीद की गई है। बयान में कहा गया है कि पंजाब, हरियाणा, राजस्थान में एमएसपी मूल्य पर कपास की खरीद का कार्य सुचारू रूप से चल रहा है। सोमवार तक, 40,196 किसानों से 565.90 करोड़ रुपए मूल्य का 2,00,512 गांठ कपास खरीदा गया। बता दें कि राज्यों से मिले प्रस्ताव के आधार पर, मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के तहत तमिलनाडु, कर्नाटक, महाराष्ट्र, तेलंगाना, गुजरात, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान और आंध्र प्रदेश से खरीफ विपणन सत्र 2020 के लिए 42.46 लाख टन दलहनों और तिलहनों की खरीद के लिए मंजूरी दी गई थी। वहीं आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल राज्यों के लिए 1.23 लाख टन नारियल गरी की खरीद करने के लिए भी मंजूरी दी गई है। खरीफ सीजन 2020-21 के विभिन्न फसलों लिए तय समर्थन मूल्य / खरीफ फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य 2020-21 धान (सामान्य) 1868, धान (ग्रेड ए)-1888, ज्वार (हाईब्रिड)-2620 , ज्वार (मालदंडी)- 2640 , बाजरा- 2150, रागी 3295, मक्का 1850, तूर (अरहर)-6000, मूंग- 7196, उड़द - 6000, मूंगफली- 5275, सूरजमुखी-5885, सोयाबीन (पिला)- 3880, तिल- 6855, नाइजरसीड- 6695, कपास (मध्यम रेशा)- 5515, कपास (लंबा रेशा)- 5825 रुपए सरकार ओर से तय किया हुआ समर्थन मूल्य है। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

अनुबंध कृषि : किसान और व्यापारी के बीच विवादों के समाधान के लिए सरकार ने जारी किए नियम

अनुबंध कृषि : किसान और व्यापारी के बीच विवादों के समाधान के लिए सरकार ने जारी किए नियम

जानें, क्या है कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग से जुड़े इन नियमों में और इससे किसानों को क्या होगा फायदा अनुबंध कृषि (Contract Farming) से जुड़े विवादों के समाधान के लिए केंद्र सरकार ने नियम ओर प्रक्रिया जारी की है। अधिसूचित नियमों के अनुसार, सब-डिवीजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) दोनों पक्षों से समान प्रतिनिधित्व वाले सुलह बोर्ड का गठन करके विवाद को हल किया जाएगा। मीडिया में प्रकाशित खबरों के अनुसार एक अधिकारी ने बताया कि सुलह बोर्ड की नियुक्ति की तारीख से 30 दिनों के भीतर सुलह की प्रक्रिया पूरी होनी चाहिए। यदि सुलह बोर्ड विवाद को हल करने में विफल रहता है, तो या तो पार्टी उप-विभागीय प्राधिकरण से संपर्क कर सकती है, जिसे उचित सुनवाई के बाद आवेदन दाखिल करने के 30 दिनों के भीतर मामले का फैसला करना होगा। अधिकारी ने कहा कि ऐसे कई उदाहरण हैं जहां किसानों की भूमि एक से अधिक सब डिवीजन में आती है। अधिकारी ने बताया, ऐसे मामलों में, भूमि के सबसे बड़े हिस्से पर अधिकार क्षेत्र मजिस्ट्रेट के पास निर्णय लेने का अधिकार होगा। अधिकारी ने कहा कि कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग में शामिल पक्षों को समीक्षा के लिए उच्च प्राधिकरण के पास जाने का अधिकार होगा। अधिकारी ने कहा- संबंधित जिले के कलेक्टर या कलेक्टर द्वारा नामित अतिरिक्त कलेक्टर अपीलीय प्राधिकारी होंगे। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 किसान 30 दिनों के भीतर कर सकते हैं अपील दायर अनुबंध कृषि (Contract Farming) नियमों को लेकर अधिकारी ने कहा कि इस तरह के आदेश के तीस दिनों के भीतर, किसान खुद जाकर या इलेक्ट्रॉनिक प्रारूप में अपीलीय प्राधिकारी के पास अपील दायर कर सकते हैं। संबंधित पक्षों को सुनवाई का उचित अवसर देने के बाद, प्राधिकरण को ऐसी अपील दायर करने की तारीख से 30 दिनों के भीतर मामले का निपटान करना होगा। अधिकारी ने कहा कि अपीलीय अधिकारी द्वारा पारित आदेश में सिविल कोर्ट के निर्णय का बल होगा। पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में किसान इस कृषि कानून के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य किसानों को उनकी फसल खराब होने पर सुनिश्चित मूल्य की गारंटी देना है। क्या है कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग (Contract Farming) और इसे लेेकर किसान में क्यूं बना हुआ है डर अनुबंध पर खेती का मतलब ये है कि किसान अपनी जमीन पर खेती तो करता है, लेकिन अपने लिए नहीं बल्कि किसी और के लिए। कॉन्ट्रैक्ट खेती में किसान को पैसा नहीं खर्च करना पड़ता। इसमें कोई कंपनी या फिर कोई आदमी किसान के साथ अनुबंध करता है कि किसान द्वारा उगाई गई फसल विशेष को कॉन्ट्रैक्टर एक तय दाम में खरीदेगा। इसमें खाद, बीज से लेकर सिंचाई और मजदूरी सब खर्च कॉन्ट्रैक्टर के होते हैं। कॉन्ट्रैक्टर ही किसान को खेती के तरीके बताता है। फसल की क्वालिटी, मात्रा और उसके डिलीवरी का समय फसल उगाने से पहले ही तय हो जाता है। हालांकि कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग किसानों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है। बता दें कि गुजरात में बड़े पैमाने पर कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग हो रही है। महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के कई राज्यों में अनुबंध पर खेती की जा रही है और इस खेती के अच्छे परिणाम सामने आ रहे हैं। इसके बावजूद देश के कई राज्यों में किसान इसका विरोध कर रहे हैं, किसानों को डर है कि कॉन्ट्रैक्ट फॉर्मिंग कानून किसी भी विवाद के मामले में बड़े कॉर्पोरेट और कंपनियों का पक्ष लेंगे। इस आशंका को खारिज करते हुए, अधिकारी ने कहा कि किसानों के हित में कृषि कानूनों का गठन किया गया है। अधिकारी ने कहा कि एक समझौते में प्रवेश करने के बाद भी, किसानों को अपनी पसंद के अनुसार कॉन्ट्रैक्ट को समाप्त करने का विकल्प होगा। हालांकि, अन्य पक्ष-किसी भी कंपनी या प्रोसेसर-को समझौते के प्रावधानों का पालन करना होगा। वे दायित्वों को पूरा किए बिना कॉन्ट्रैक्ट से बाहर नहीं निकल सकते है। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

मूंगफली की सरकारी खरीद : नेफैड ने किया इनकार, पंजीयन स्थगित

मूंगफली की सरकारी खरीद : नेफैड ने किया इनकार, पंजीयन स्थगित

किसानों को समर्थन मूल्य पर मूंगफली बेचने के लिए अभी करना होगा और इंतजार भारत सरकार की नोडल एजेंसी नेफैड की ओर से समर्थन मूल्य पर मूंगफली की खरीद करने में असमर्थता व्यक्त करने के कारण आगामी आदेशों तक मूंगफली के पंजीयन स्थगित कर दिए गए हैं। सरकार की ओर से मूंगफली की खरीद के लिए अगली व्यवस्था करने तक किसानों को इंतजार करना होगा। बता दें कि राजस्थान में समर्थन मूल्य पर मूंगफली खरीद के लिए 20 अक्टूबर से पंजीयन की प्रक्रिया शुरू की जानी थी लेकिन सरकारी नोडल ऐजेंसी नेफैड ने हाथ खड़े कर दिए। इससे फिलहाल राजस्थान में मूंगफली की समर्थन मूल्य पर खरीद नहीं हो पाएगी। बता दें कि इस वर्ष केंद्र सरकार द्वारा मूंगफली का न्यूनतम समर्थन मूल्य 5275 रुपए तय किया गया है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 मूंगफली की सरकारी खरीद नहीं होने से किसानों में मायूसी राजस्थान में मूंगफली की खरीद शुरू होने को लेकर किसान काफी उत्साहित थे। लेकिन समर्थन मूल्य पर मूंगफली की खरीद के लिए पंजीयन प्रक्रिया स्थगित होने से मूंगफली उत्पादक किसानों के चहरे पर मायूसी छा गई है। बता दें कि राजस्थान में पांच लाख हैक्टेयर में मूंगफली की खेती होती है। इस वर्ष राजस्थान में केंद्र सरकार ने 3.74 लाख मीट्रिक टन मूंगफली की खरीद के लक्ष्य की स्वीकृति प्रदान की है। बता दें कि गुजरात के साथ ही राजस्थान भी मूंगफली उत्पादन में प्रमुख स्थान रखता है। अब चूंकी मूंगफली की सरकारी खरीद को स्थगित कर दिया गया जिससे किसान निजी मंडियोंं की तरफ रूख करेंगे और मजबूरन उन्हें कम कीमत पर अपनी मूंगफली की फसल बेचनी पड़ेगी। जिससे किसानों को हानि उठानी पड़ेगी। मूंगफली की खरीद नहीं करने को लेकर नेफैड ने दी सफाई समर्थन मूल्य पर किसानों से उपज खरीदने वाली सरकारी संस्था नेफैड मूंगफली की खरीद नहीं करने के कारणों को लेकर सफाई दी है। मीडिया में प्रकाशित खबरों के अनुसार नेफैड अधिकारियों का कहना है कि अभी उसके गोदाम बाजरे से भरे पड़े हैं, ऐसे में जब तक रखने की जगह नहीं मिलती तब तक मूंगफली की फसल की खरीद हो ही नहीं पाएगी। राजस्थान सरकार को मंडियों में 18 नवंबर से मूंगफली खरीदनी थी और इसके लिए प्रदेश में 266 खरीद केंद्र चिह्नित भी किए गए थे, लेकिन किसान अब परेशान है क्योंकि उनकी मूंगफली की फसल सरकार नहीं खरीद रही है। राजस्थान में मूंगफली की खरीद में लगातार हो रही है देरी जानकारी के अनुसार नेफैड की ओर से मूंगफली की खरीद नहीं करने के बाद अब राजस्थान सरकार ने केंद्र सरकार को पत्र लिखकर किसानों के हित में मूंगफली की खरीद करवाने का फिर से आग्रह किया है। बहरहाल केंद्र और राज्य के अधिकारियों के बीच बेहतर तालमेल नहीं होने के चलते ही मूंगफली की खरीद पर संकट आने की बात कही जा रही है। वैसे राजस्थान में इन दिनों रबी की फसल की बुवाई शुरू हो चुकी है और ऐसे में मूंगफली की फसल की सरकारी खरीद नहीं होने से परेशान किसानों के मंडियों में आने के बावजूद भी वे अब घाटे में बिचौलिये के जरिये बेहद ही कम दामों पर मूंगफली बेचने को मजबूर है। आगे कब होगी मूंगफली की खरीद मुख्य सचिव की अध्यक्षता में 29 सितंबर को हुई बैठक में नेफैड को दलहन/तिलहन की खरीद व्यवस्था के संबंध में अवगत करवा दिया गया था। भारत सरकार द्वारा भी 12 अक्टूबर को मूंग, उड़द एवं सोयाबीन के साथ-साथ मूंगफली के खरीद लक्ष्य भी स्वीकृत कर दिए गए थे, परन्तु नेफैड द्वारा समर्थन मूल्य पर मूंगफली की खरीद में असमर्थता व्यक्त करने के कारण विरोधाभासी स्थिति उत्पन्न हो गई है। इसी के साथ आगामी आदेशों तक मूंगफली के पंजीयन स्थगित किए गए हैं। राजस्थान राज्य सरकार द्वारा किसानों के हित में कृषि मंत्रालय, भारत सरकार को नेफैड के माध्यम से मूंगफली की खरीद करवाने के लिए अनुरोध किया गया है। भारत सरकार द्वारा नेफैड अथवा अन्य नोडल एजेंसी नियुक्त करने के बाद मूंगफली खरीद हेतु पंजीयन की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी जाएगी। समर्थन मूल्य पर मूंग, उड़द एवं सोयाबीन बेचने के लिए किसान करा सकते हैं पंजीकरण राज्य में मूंग, उड़द एवं सोयाबीन की उपज हेतु ऑनलाइन पंजीकरण प्रारंभ कर दिए गए हैं। किसान ई-मित्र केंद्र एवं खरीद केन्द्रों पर प्रात: 9 बजे से सायं 7 बजे तक की गई है। किसान एक जनआधार कार्ड में अंकित नाम में से जिसके नाम गिरदावरी होगी उसके नाम से एक पंजीयन करवा सकेगें। किसान इस बात का विशेष ध्यान रखे कि जिस तहसील में कृषि भूमि है उसी तहसील के कार्यक्षेत्र वाले खरीद केन्द्र पर उपज बेचान हेतु पंजीकरण कराएं। दूसरी तहसील में यदि पंजीकरण कराया जाता है तो पंजीकरण मान्य नही होगा । किसान पंजीयन कराते समय यह सुनिश्चित कर ले कि पंजीकृत मोबाईल नंबर, से जनआधार कार्ड से लिंक हो जिससे समय पर तुलाई दिनांक की सूचना मिल सके। किसान प्रचलित बैंक खाता संख्या सही दे ताकि ऑनलाइन भुगतान के समय किसी प्रकार की परेशानी किसान को नहीं हो। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

उत्तरप्रदेश में मक्का की सरकारी खरीद शुरू, खरीद केंद्र स्थापित किए

उत्तरप्रदेश में मक्का की सरकारी खरीद शुरू, खरीद केंद्र स्थापित किए

किसान फसल बेचने के लिए यहां कराएं ऑनलाइन पंजीकरण उत्तरप्रदेश सरकार ने सरकारी मंडियों में मक्का की खरीद शुरू कर दी है। मक्का खरीद के लिए सरकारी स्तर पर मंडियों में तैयारी की गई है। इस वर्ष केंद्र सरकार ने मक्के का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1850 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। इसी मूल्य पर किसानों से मक्का की खरीद की जाएगी। इसको लेकर उत्तरप्रदेश सरकार ने कुछ जिले जहां मक्का उत्पादन अधिक होता है वहां न्यूनतम समर्थन मूल्य पर मक्का खरीदने का फैसला लिया है। उत्तरप्रदेश मंत्रीपरिषद् ने खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में मूल्य समर्थन योजना के तहत मक्का क्रय नीति को स्वीकृति प्रदान कर दी है। उत्तरप्रदेश में समर्थन मूल्य पर 17 अक्टूबर 2020 से शुरू की गई मक्का की खरीद 15 जनवरी 2021 तक जारी रहेगी। मक्का क्रय करने का जिम्मा खाद्य एवं रसद विभाग की विपणन शाखा को सौंपा गया है। खरीद केंद्रों का निर्धारण और चयन जिलाधिकारियों द्वारा किया जाएगा। केवल उन क्षेत्रों में मक्का खरीद केंद्र स्थापित होंगे, जहां मक्का उत्पादन अधिक हो और पर्याप्त खरीद की संभावना हो। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 इन जिलों में होगी मक्का की खरीद प्रथम चरण में मक्का खरीद के लिए अलीगढ़, फीरोजाबाद, कन्नौज, एटा, मैनपुरी, कासगंज, बदायूं, बहराइच, फर्रुखाबाद, इटावा, हरदोई, कानपुर नगर, जौनपुर, कानपुर देहात, उन्नाव, गोंडा, बलिया, बुलंदशहर, ललितपुर, श्रावस्ती, देवरिया, सोनभद्र व हापुड़ में सरकारी खरीद शुरू की गई हैं। अन्य जिलों में आवक को देखकर खाद्य आयुक्त द्वारा मक्का खरीद का निर्णय लिया जाएगा। उत्तरप्रदेश में समर्थन मूल्य व निजी मंडी में मक्का के भावों में अंतर प्रदेश में 20 अक्टूबर 2020 को मक्का के सबसे कम भाव सिकंदराराहु मंडी में 1010-1135 रुपए प्रति क्विंटल और सबसे अधिक दाम कानपुर मंडी में 1200 से 1350 रुपए रहे। वहीं सरकार की ओर से मक्के का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1850 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। इन भावों का अवलोकन करें तो सरकार द्वारा तय समर्थन, मूल्य निजी मंडी के भावों से अधिक हैं। इससे यहां के किसान समर्थन मूल्य पर अपनी मक्का की उपज बेचने के इच्छुक हैं। इसी को देखते हुए राज्य की योगी सरकार ने किसानों को राहत देते हुए मक्का की सरकारी खरीद शुरू की है। मक्का खरीद केंद्रों क्या है व्यवस्था खरीद केंद्र स्थापित इस बात का ध्यान रखा जाएगा कि किसानों को मक्का बेचने के लिए अधिक दूरी न तय करनी पड़े। इसके लिए खरीद केंद्र ऐसे स्थान पर बनाएं जा रहे हैं जहां किसान आसानी से आ सके। इसके अलावा खरीद केंद्रों पर पर मक्का की खरीद के लिए आनलॉइन पंजीयन करना आवश्यक है। पंजीकरण कराने के बाद ही किसान से मक्का की खरीद की जाएगी। इसके अभाव में किसानों के लिए मक्का का विक्रय करना संभव नहीं होगा। वहीं मक्का क्रय केंद्र हेतु हैंडलिंग एवं परिवहन ठेकेदारों की नियुक्ति नियमानुसार ई-टेंडरिंग के माध्यम से की जाएगी। मक्का के मूल्य का भुगतान आर.टी.जी.एस/पी.एफ.एम.एस के माध्यम से मक्का क्रय के 72 घंटे के अन्दर किया जाएगा। चेक के माध्यम से भुगतान को मान्यता नहीं दी जाएगी। किसान कहां और कैसे कराएं पंजीकरण किसानों को मक्का समर्थन मूल्य पर बेचने के लिए ऑनलाइन पंजीकरण करवाना आवश्यक है। किसान ऑनलाइन पंजीकरण खाद्य एवं रसद विभाग की वेबसाइट https://fcs.up.gov.in/ से कर सकते हैं। पंजीकरण कराने के लिए किसान को जेातबही खाता नंबर अंकित कम्प्यूटराइजड खतौनी, आधार कार्ड, बैंक पासबुक के प्रथम पृष्ठ (जिसमें खाता धारक का विवरण अंकित हो) की छाया प्रति तथा एक अद्यतन पासपोर्ट साइज फोटो अपलोड करनी होगी। पंजीकरण होने के बाद किसान अपनी मक्का की उपज सरकारी मंडी में बेच सकेंगे। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

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