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आलू से महँगा हुआ आलू का बीज, किसानों के लिए बना मुसीबत

आलू से महँगा हुआ आलू का बीज, किसानों के लिए बना मुसीबत

आलू के बढ़ते दाम आमजन व किसान दोनों पर भारी

आलू के बढ़ते दाम जहां एक ओर आमजन को परेशान किए हुए हैं वहीं दूसरी ओर आलू किसानों के लिए भी मुसीबत बना हुआ है। आलू की कीमतों में बढ़ोतरी के साथ ही इसके बीज के दाम भी बढ़ गए हैं। अब किसानों के लिए आलू उगाना मुनाफे का सौदा नहीं रहा है। जानकारी के अनुसार ऊना जिले में आलू का बीज इस बार दुगने दामों में मिल रहा है। इस बार आलू के बीज का भाव 4500 रुपए प्रति क्विंटल हो जाने से किसान आलू की बिजाई से दूरी बना रहे हैं। इस बार आलू के बीज का भाव पिछले सीजन की तुलना में दोगुना है जो किसानों के लिए भारी पड़ रहा है। वहीं दूसरी ओर आलू बीज के लिए विख्यात लाहौल के किसान को बीज के दुगुने दाम मिल रहे हैं जिसको लेकर वे उत्साहित है। इस तरह कहीं आलू किसानों को रूला रहा है तो कहीं आलू के बढ़े भाव कुछ किसानों को फायदा पहुंचा रहे हैं। 

 

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सात दिनों में बढ़े आलू बीज के दाम

पिछले साल यहां 50 किलो की बोरी का भाव 900 रुपए था। इस बार उसकी बोरी की कीमत 1700 रुपए से भी ज्यादा है। इस तरह आलू बढ़ते दाम करीब दुगुने हो गए है। इधर लाहौल में 978 हेक्टेयर पर इस बार भी किसानों ने बीज के लिए आलू की बिजाई कर दी है। ऊना जिले में बीते एक सप्ताह पहले आलू के बीज 3600 से 3800 रुपए प्रति क्विंटल थे, लेकिन अब सात दिनों में ही दाम 600 से 800 रुपए तक की बढ़ोतरी के साथ 4400 रुपए प्रति क्विंटल हो गए हैं। इससे जिले के करीब 30 फीसदी से अधिक किसानों ने इस बार आलू की बिजाई नहीं करने का फैसला लिया है।

 


इस बार कम क्षेत्र में होगी आलू की बिजाई 

आलू के बीज की बढ़ती कीमतों का असर यह हो रहा है कि इस बार कई छोटे किसान तो आलू की बुवाई बिलकुल नहीं कर रहे हैं। वहीं बड़े किसान भी इससे दूरी बनाकर चल रहे हैं। उन्होंने ने भी इस बार आधे खेत में ही आलू की बुवाई की है। इससे इस बार आलू का उत्पादन प्रभावित होने की आशंका से भी इनकार नहीं किया जा सकता है। ऊना जिले में इस बार बड़े जम्मीदारों ने भी आलू की फसल की 40 से 50 प्रतिशत तक बिजाई कम की है। जिससे जिले में इस बार करीब 622.8 हेक्टेयर पर आलू की बिजाई नहीं होगी। जिला ऊना 27500 मीट्रिक टन उत्पादन के साथ प्रदेश का सबसे बड़ा आलू उत्पादक जिला है। कृषि उप निदेशक डॉ. अतुल डोगरा के अनुसार महंगे बीज के कारण किसानों ने बिजाई 50 प्रतिशत की है। उधर, लाहौल घाटी में इस साल आलू बीज के रिकॉर्ड दाम मिलने से यहां के उत्पादकों में खासा उत्साह है।


आगे भी आलू की कीमतों में हो सकती है बढ़ोतरी

आलू के बढ़ते दामों से आमजन परेशान है। वहीं किसानों के लिए भी इसने मुसीबत बढ़ा दी है। इससे किसान कम क्षेत्र में आलू की बिजाई कर रहे हैं जिससे उत्पादन पर असर पड़ेगा। इससे इस बार आलू का उत्पादन पिछले साल की तुलना में कम होने की आशंका है। इससे बाजार में आलू की कीमतों को लेकर असमंजस की स्थिति देखने को मिल सकती है। जो आलू की नई फसल आने पर दामों में गिरावट की उम्मीद लगाए बैठे हैं फिलहाल ऐसा कुछ नहीं दिख रहा है। बाजार के रूख को देखे तो इस बार 50 किलोग्राम प्रति बोरी आलू को व्यापारी 1600 से 1700 रुपए देकर खरीद रहे हैं। आने वाले दिनों में कुफरी ज्योति और चंद्रमुखी आलू बीज की कीमतों में और उछाल आने के व्यापारी संकेत दे रहे हैं। लाहौल की पट्टन घाटी में आलू बिजाई और बिक्री का कार्य शुरू हो गया है। 


बीज महँगा होने से बिजाई प्रभावित 

देश और राज्य में इस बार कोरोना महामारी के चलते फसल बिजाई प्रभावित हुई है और उत्पादन में भी कमी दर्ज की गई है। ऐसे में देश के कई राज्यों समेत निजी कंपनियां भी लाहौल आलू उत्पादक संघ ( एलपीएस ) से आलू खरीद के लिए संपर्क साधने लगे हैं। कांगड़ा के किसानों ने भी लाहौल के किसानों से कुफरी ज्योति बीज आलू की खरीदारी को संपर्क करना शुरू कर दिया है। कृषि उपज विपणन समिति कुल्लू एवं लाहौल के सचिव सुशील गुलेरिया ने बताया कि लाहौल में उत्पादित आलू बीज को इस बार बढ़िया दाम मिलेंगे। कृषि मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कहा कि किसान पंजाब की निजी कंपनियों से भी आलू बीज लाते हैं। महँगा बीज देने पर सरकार अपने स्तर पर सख्त कदम उठाएगी।

 

 

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आंवला : कोराना काल में किसानों के लिए लेकर आया खुशियों की सौगात

आंवला : कोराना काल में किसानों के लिए लेकर आया खुशियों की सौगात

मिल रहे हैं तीन गुना दाम, जानें, इस साल क्यूं बढ़ रहे हैं आंवले के दाम, क्या है वजह? कोरोना काल ने जिसने पूरी दुनिया को संकट में डाल दिया है। इसका असर हर क्षेत्र में देखने को मिला। इससे सबसे ज्यादा उद्योगिक क्षेत्र प्रभावित हुआ और परिणाम स्वरूप लोगों के सामने आर्थिक संकट पैदा हो गया। वहीं दूसरी ओर किसानों के लिए कोरोना काल खुशियां लेकर आया है। यह खुशियां उन किसानों के लिए हैं जो आंवला का उत्पादन करते हैं। इन दिनों बाजार में आंवले की मांग काफी तेजी से बढ़ रही है और इसके दाम भी काफी अच्छे मिल रहे हैं। इससे आंवला उत्पादकों की आमदनी इजाफा हो रहा है। इस संबंध में मुहाना मंडी में आंवले के व्यापारी सौरभ बलाला ने मीडिया को बताया कि कोरोना काल में चूंकि शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाली इन औषधियों की डिमांड बढ़ गई है। लिहाजा आंवले की डिमांड में भी बेतहाशा बढ़ोतरी रही है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 बाजार में क्या चल रहा है आंवले का भाव जो आंवला पिछले साल 6 से 7 रुपए किलो तक में बिक रहा था। वहीं आंवला इस बर 17 से 18 रुपए किलो तक में बिक रहा है। अच्छी क्वालिटी का आंवला तो थोक में 25 रुपए किलो तक बिक रहा है। मंडी व्यापारियों का कहना है कि अभी आंवले की आवक शुरू ही हुई है और भावों में इस कदर तेजी देखने को मिल रही है। आंवले की खेती : किसानों को मिल रहा है दो तरफा फायदा आंवले के भावों में इस बढ़ोतरी का फायदा सीधे तौर पर किसानों को दो तरफा मिल रहा है। एक ओर जहां उन्हें अपनी उपज के दाम ज्यादा मिल रहे हैं वहीं दूसरी ओर आयुर्वेदिक औषधियां और प्रोडक्ट बनाने वाली कम्पनियां आंवला खरीदने के लिए सीधे किसानों के खेत का रुख कर रही है। मुहाना मंडी फल-सब्जी व्यापार संघ के अध्यक्ष राहुल तंवर के मुताबिक आंवले की डिमांड इतनी ज्यादा है कि डाबर और पतंजलि जैसी बड़ी कम्पनियां आंवला खरीदने के लिए सीधे किसानों के पास सौदा करने पहुंच रही हैं। मंडियों से भी बड़ी मात्रा में आंवला फैक्ट्रियों में जा रहा है। औषधियों के साथ ही आंवला कैंडी और मुरब्बे जैसे प्रोडक्ट्स के लिए भी आंवले की खपत बढ़ गई है। आंवले की फसल : दाम अभी ओर बढऩे की उम्मीद आने वाले दिनों में आंवले के भावों में और ज्यादा तेजी आने की उम्मीद है। मुहाना मंडी में आंवले के व्यापारी सुधीर कुमार के अनुसार अभी तो आंवले की आवक शुरू ही हुई है और पीक आना अभी बाकी है। अभी कई किसान कच्चे आंवले ही मंडियों में लेकर आ रहे हैं और उनके भी अच्छे दाम मिल रहे हैं। अगले 1-2 महीनों में जब अच्छी क्वालिटी के आंवले की आवक होगी तो भाव पिछले साल के मुकाबले 4 से 5 गुना तक होंगे। क्यों बढ़ रहे हैं आंवला के दाम, यह है इसके पीछे की वजह आंवले के भावों में जिस तरह की तेजी देखने को मिल रही है उसे देखकर कहा जा सकता है कि आंवला आम लोगों की इम्यूनिटी तो बढ़ा ही रहा है किसानों की आर्थिक सेहत भी संवार रहा है। राजस्थान में आंवले का बड़े स्तर पर उत्पादन होता है। लिहाजा भावों में तेजी का फायदा भी किसानों को बड़े स्तर पर मिलेगा। बता दें कि आंवला विटामिन सी के सबसे अच्छे स्रोतों में से एक है और शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। च्यवनप्राश के साथ ही दूसरी आयुर्वेदिक औषधियों में आंवले का बड़े पैमाने पर उपयोग किया जाता है। इसलिए आंवले का उपयोग इस कोरोना काल में सर्वाधिक हो रहा है। आंवले के फायदे (health benefits of amla) आंवले में विटामिन सी पाया जाता है जो हमारे शरीर के इम्यून सिस्टम को मजबूत करता है। जब हमारा इम्यून सिस्टम मजबूत होता है तो कोई रोग ज्यादा प्रभावित नहीं करता और रोग जल्दी ठीक होने लगता है। इसके अलावा आंवला हमारे शरीर में कैंसर सेल्स को बढऩे से रोकता है। यह शरीर में कोलेस्ट्रॅाल के लेवल नियंत्रित करने में सहायक है। आयुर्वेद में अस्थमा के मरीजों के लिए इसे फायदेमंद बताया गया है। यह डायबिटीज के मरीजों के लिए भी अच्छा माना जाता है। आंवले का सेवन करने से बल्ड शुगर लेवल नियंत्रण में रहता है। जिन लोगों को पाचन संबंधी समस्या होती है उनके लिए आंवले का सेवन काफी लाभकारी होता है। इसके सेवन से अपच व पेट संबंधी बीमारियों में राहत मिलती है। यही नहीं आंवले के सेवन से लीवर सुरक्षित रहता है। इसके अलावा आंवला के सेवन से बालों के झडऩे की समस्या कम रहती है और बालों की जड़े मजबूत होती है। इसके अलावा आंवला नेत्र, त्वचा संबंधी अनेक बीमारियों में उपयोग में लिया जाता है। इस प्रकार कहे तो सौ रोगों की एक दवा आंवला है। यही कारण है की आयुर्वेद में इसे अमृत समान माना गया है। नोट : (यहां दिए गए आंवले के फायदे की जानकारी विभिन्न स्त्रोतों से जुटाई गई है। यदि आप किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित है तो आंवले का उपयोग करने से पहले चिकित्सक की सलाह अवश्य लें, क्योंकि आंवले का उपयोग हर किसी को फायदा पहुंचाए, ऐसा दावा हम नहीं करते।) अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

प्रेरणा : खेती और पशुपालन के अनूठे मॉडल से किसान की कमाई 5 करोड़

प्रेरणा : खेती और पशुपालन के अनूठे मॉडल से किसान की कमाई 5 करोड़

जानें, क्या है यह अनोखा कृषि मॉडल और इससे कैसे हो सकती है अच्छी आमदनी बिहार के एक किसान ने खेती और पशुपालन का एक अनोखा मॉडल तैयार किया है। इसे आप खेती और पशुपालन का मिश्रित मॉडल भी कह सकते हैं। हम जानते हैं कि भारत एक कृषि प्रधान देश है और यहां की अधिकांश जनसंख्या गांव में निवास करती है और गांवों के लोगों का मुख्य व्यवसाय खेती और पशुपालन है। लेकिन परंपरागत तरीके से खेती करना वर्तमान समय में महंगा सौदा साबित हो रहा है। इसलिए आज आवश्यकता है कि खेती और पशुपालन का एक मिश्रित मॉडल तैयार कर इस व्यवसाय को लाभदायक बनाया जाए। और यही कर दिखाया है बिहार के एक किसान ने। जी हां, बिहार के बेगूसराय जिला के कोरैय गांव के रहने वाले 30 वर्षीय ब्रजेश कुमार ने एक ऐसा अनोखा कृषि मॉडल तैयार किया है जिससे उसे करोड़ की कमाई हो रही है। इस मॉडल की खासियत यह है कि इसमें खेती के साथ पशुपालन को जोड़ा गया है। इस मॉडल की सफलता को देखते हुए पीएम मोदी भी उनकी प्रशंसा कर चुके हैं। आइए जानते हैं किस प्रकार ब्रजेश इस मॉडल से करोड़ों की कमाई कर रहे हैं। आशा करते हैं ये जानकारी हमारे किसानों के लिए काफी लाभदायक साबित होगी। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 यहां से शुरू हुई युवा किसान ब्रजेश कुमार की सफलता की कहानी बात उन दिनों की है जब ब्रजेश, साल 2010 में इलेक्ट्रॉनिक्स एंड टेली कम्यूनिकेशन में डिप्लोमा करने के बाद सीबीएसई में नौकरी कर रहे थे, लेकिन कुछ अलग करने की चाह में उन्होंने नौकरी छोड़ दी। ब्रजेश के अनुसार सीबीएसई में काम करने के दौरान उन्होंने देखा कि बच्चे सिर्फ परीक्षा पास करने के लिए कृषि कार्यों के बारे में पढ़ रहे हैं, उन्हें इससे कोई लगाव नहीं है और न ही उनके अभिभावकों का अपने बच्चों को किसान बनाने का कोई इरादा है। इससे उन्हें विचार आया कि क्यों न खेती और पशुपालन का एक ऐसा मॉडल विकसित किया जाए जिससे मानव जीवन में इसकी उपयोगिता साबित हो। बस यहां से शुरू हुई युवा किसान ब्रजेश कुमार की सफलता की कहानी। किसान ब्रजेश ने अपने विचार को धरातल पर उतारने की ठान ली और उसके लिए प्रत्यशील हो गए। उन्होंने बिहार सरकार के समग्र विकास योजना का लाभ उठाकर करीब 15 लाख रुपए का लोन लिया और बेगूसराय में चार एकड़ जमीन लीज पर लेने के साथ ही, करीब दो दर्जन फ्रीजियन साहीवाल और जर्सी नस्ल की गायों को खरीदा। धीरे-धीरे ब्रजेश का दायरा बढऩे लगा और उन्होंने पशुओं के लिए पौष्टिक आहार और वर्मी कम्पोस्ट बनाने का काम शुरू कर दिया। ब्रजेश के अनुसार साल 2015 में वे राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड, आणंद (गुजरात) से जुड़े। इसके तहत उन्होंने कई किसानों को प्रशिक्षण दिया। इसके बाद उन्होंने साल 2017 में, पशुपालन के साथ-साथ किसानों को खेती की पैदावार को बढ़ाने के लिए वर्मी कम्पोस्ट बनाने का काम भी शुरू कर दिया। ब्रजेश का मानना है कि अपने कार्यों को बढ़ावा देने के लिए नए नजरिए को अपनाना जरूरी है। 26 किस्म की उन्नत नस्ल की गायों का करते हैं पालन, दूध बेचकर करते हैं कमाई ब्रजेश के पास जर्सी, साहीवाल, बछौड़, गिर आदि जैसी 26 नस्ल उन्नत नस्ल की गायें हैं जिससे प्रतिदिन 200 लीटर दूध का उत्पादन होता है। वह दूध को बरौनी डेयरी को बेचते हैं जिससे उन्हें अच्छी आमदनी हो जाती है। ब्रजेश के अनुसार विदेशी किस्म की गायों को पालने में काफी जोखिम है और देशी गायों से ज्यादा दूध होता नहीं है। इसे देखते हुए उन्होंने मिश्रित किस्म के गायों का पालन बेहतर समझा। गायों को पालने में करते हैं आधुनिक तकनीकों का उपयोग ब्रजेश के अनुसार गायों को पालने के लिए वे आधुनिक तरीकों का उपयोग करते हैं। जैसे कि गायों के लिए शार्टेट शूट सीमेन का इस्तेमाल करना जिससे हमेशा बछिया ही होती है। वहीं गौशाला में आत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल कर सरोगेसी गाय भी पाल रहे हैं, जिससे प्रतिदिन 50 लीटर दूध मिलता है। गौशाला से लेकर गोबर गैस प्लांट तक आज ब्रजेश की चार एकड़ जमीन पर मौसम के अनुसार मक्का, जौ, बाजरा जैसी कई चीजों की खेती की जाती है। जिससे पशुओं के लिए चारा बनाया जाता है। ब्रजेश के अनुसार उन्होंने गौशाला को दो तरीकों से बनाया है- मिल्किंग शेड और मुक्त गौशाला। जहां पशु अपनी पूरी स्वतंत्रता के साथ रह सकते हैं। वहीं इन गायों से जो गोबर प्राप्त होता है उसका उपयोग कर वर्मी कम्पोस्ट और गोबर गैस बनाने के लिए यूनिट को भी स्थापित किया है। वह अपने उत्पादों को राज्य के विभिन्न हिस्सों के किसानों को भी बेचते हैं। किसानों को प्रशिक्षित करने के लिए शुरू किया ट्रेनिंग सेंटर ब्रजेश ने किसानों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए आदर्श किसान संस्थान ट्रेनिंग सेंटर शुरू किया है। इसमें वह बरौली दुज्ध संघ की मदद से एक महीने के 10 दिनों में करीब 400 किसानों को उन्नत पशुपालन की ट्रेनिंग देते हैं। इससे उन्हें लागत को कम करके अधिक आय अर्जित करने में मदद मिलती है। इस ट्रेनिंग सेंटर में प्रशिक्षित किसान आज आधुनिक तौर-तरीके अपना कर खेती और पशुपालन से अच्छी आमदनी कर रहे हैं। उन्नत खेती की तकनीक का करते हैं भरपूर इस्तेमाल युवा किसान ब्रजेश ने चार एकड़ की जमीन पर उन्नत तकनीक का भरपूर इस्तेमाल किया है। उन्होंने यहां शिमला मिर्च, स्ट्रॉबेरी, गन्ना और टमाटर की खेती शुरू की। उन्होंने दो एकड़ जमीन पर शिमला मिर्च, एक एकड़ पर टमाटर और एक एकड़ पर स्ट्रॉबेरी और गन्ना लगा रखा है। वे बताते हैं कि इसके लिए उन्होंने पूरी जमीन पर पहले प्लास्टिक बिछाया और बेडिंग सिस्टम के तहत उसमें छेद कर पौधा लगाया। सिंचाई के लिए उन्होंने ड्रीप इरिगेशन की व्यवस्था की। ब्रजेश के मुताबिक इस सिस्टम से प्रति एकड़ 3-4 लाख रुपए की बचत होगी। इस तरह ब्रजेश का वार्षिक टर्नओवर करीब 5 करोड़ रुपए है और उन्होंने अपने कामों को संभालने के लिए 20 लोग लगा रखें हैं। इससे गांवों के लोगों को रोजगार भी मिल रहा है। आप भी इस मॉडल को अपना का कर सकते हैं अच्छी कमाई यह जरूरी नहीं कि इस मॉडल को बड़े पैमाने पर ही अपनाएं। आप छोटे स्तर पर भी इसे शुरू कर सकते हैं। इस मॉडल में पशुपालन को खेती के साथ करने की तकनीक विकसित की गई है और उनसे प्राप्त उत्पादों का बेहतर प्रबंधन और उपयोग समझाया गया है जिससे आमदनी बढ़ाई जा सकती है। जैसे आप खेती करते है साथ में पशुपालन भी करें। खेती में भी मिश्रित खेती को अपनाएं ताकि यदि एक फसल उत्पादन पर घाटा हो तो उसकी भरपाई दूसरी फसल से की जा सके। जैसा कि ब्रजेश अपने 4 एकड़ खेत में चार-पांच प्रकार की फसलें लेते हैं। वहीं पशुपालन के लिए एक ही किस्म की गायों का चयन नहीं करके अलग-अलग प्रकार की गायों की उन्नत नस्ल का चयन करते हैं। इससे सभी प्रकार की गायों से अच्छा उत्पादन लिया जा सकेगा। इस आप इस उदाहरण से समझ सकते हैं- मान लें, आपने एक ही नस्ल की चार गायें लें ली और चारों गायों में कुछ खामियों की वजह से दूध की गुणवत्ता में खराबी आ गई तो फिर आप क्या करेंगे? किसान ब्रजेश ने पशुपालन में जाखिम को कम करने के लिए विभिन्न प्रकार की गायों को पालने का विचार किया। अब बात आती है गायों से प्राप्त गोबर की। गायों से प्राप्त गोबर से कम्पोस्ट खाद तैयार कर खेत में उपयोग लिया जा सकता है। जैसा कि ब्रजेश ने किया। वहीं गोबर का उपयोग गोबर गैस बनाने में किया जा सकता है। इसके अलावा गाय के मूत्र से भी कमाई की जा सकती है। आजकल तो बाजार में गाय का मूत्र दवाओं की दुकान में बिकता है। बता दें कि गाय के मूत्र में कई रोगों को खत्म करने की क्षमता है। इसलिए आज पथरेड़ा गौशाला व पंतजलि जैसी कई कंपनियां गौमूत्र बेचकर अच्छी खासी कमाई कर रही हैं। खेती और पशुपालन में काफी संभावनाएं, युवाओं को स्वरोजगार का अवसर खेती और पशुपालन में काफी संभावनाएं है। यदि इसे आधुनिक तरीके और एक मिशन के रूप में किया जाए तो इससे न केवल बेहतर उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है बल्कि अच्छी खासी कमाई भी की सकती है। आजकल युवा पढ़लिख कर नौकरी की तलाश करते हैं। इससे बेहतर है कि वे स्वरोजगार की ओर अग्रसर हो और नए विचार के साथ उसमें नई तकनीक को विकसित कर अपनी आमदनी को बढ़ाए। इससे अन्य युवाओं भी प्ररेणा मिलेगी और आत्मनिर्भर भारत का सपना भी साकार हो सकेगा। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक 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यदि आधार में दिया गया मोबाइल नंबर भूल गए है तो घबराये नहीं, ऐसे मिनटों में पता करें?

यदि आधार में दिया गया मोबाइल नंबर भूल गए है तो घबराये नहीं, ऐसे मिनटों में पता करें?

जानें, कैसे करें आधार में मोबाइल नंबर अपडेट और इससे क्या होगा फायदा आजकल हर सरकारी योजना में आधार कार्ड अनिवार्य हो गया है। यदि आप किसी भी सरकारी योजना का लाभ उठाना चाहते हैं तो आपके पास आधार होना चाहिए और इस आधार नंबर से आपका खाता लिंक होना चाहिए। तभी आपको सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं में दिया जाने वाला लाभ मिल सकेगा। इसे देखते हुए सभी बैंकों ने अपने ग्राहकों के लिए खाते को आधार से लिंक करना अनिवार्य कर दिया है। वहीं भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकारण (यूआइडीएआई) के डेटाबेस में आपके आधार के साथ मोबाइल नंबर का लिंक होना जरूरी है, क्योंकि इसी मोबाइल नंबर पर आपको ओटीपी भेजा जाता है जिसका इस्तेमाल वेरिफिकेशन के लिए किया जाता है। इसलिए आधार में दिया गया मोबाइल जिसे आपने रजिस्टर्ड करवाया है उसे याद रखना चाहिए। क्योंकि आपको उसी पर ही ओटीपी प्राप्त होगा और यदि आप इसे भूल गए है और अब दूसरे मोबाइल नंबर का उपयोग करते हैं तो आपको ओटीपी नहीं मिल पाएगा जिसके अभाव में वेरिफिकेशन नहीं हो पाएगा। इसके परिणाम स्वरूप आपको परेशानी हो सकती है। ऐसा उन लोगों के साथ होता है जो बहुत से मोबाइल फोन का इस्तेमाल करते हैं या हर बार अपना मोबाइल नंबर चेंज करते रहते है। इससे उन्हें ये याद नहीं रहता कि उन्होंने अपने आधार में कौनसा मोबाइल नंबर दिया है। अब प्रश्न उठाता है कि ऐसी स्थिति में क्या करें? पर घबराने की कोई बात नहीं है। आप बहुत ही आसानी तरीके से ये जान सकते हैं कि आपने आधार में अपना कौनसा नंबर दिया है। इसके लिए आपको इन स्टेप्स् को फोलो करना होगा। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 आधार में मोबाइल नंबर के बारे में ऐसे जानेें स्टेप 1 - पहले www.uidai.gov.in पर जाएं। स्टेप 2- माई आधार टैब में वेरिफाई ईमेल/मोबाइल नंबर सेलेक्ट करें। स्टेप 3- आपके सिस्टम पर एक नया टैब खुलेगा। यहां अपना आधार नंबर दर्ज करें और या तो मोबाइल नंबर या फिर ईमेल आईडी डालें, जिससे भी आप वेरिफाई करना चाहते हैं। स्टेप 4- कैप्चा कोड दर्ज करके सेंड ओटीपी पर क्लिक करें। अगर दर्ज किया गया मोबाइल नंबर यूआईडीएआई के रिकॉर्ड से मेल खाता है तो स्क्रीन पर मैसेज आएगा कि आपका दर्ज किया गया मोबाइल पहले से ही उसके रिकॉर्ड में वेरिफाइड है। ऐसा नहीं होने पर यानी दर्ज किया गया मोबाइल नंबर यूआईडीएआई के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाता है तो बताया जाएगा कि दर्ज किया गया मोबाइल नंबर रिकॉर्ड के साथ मैच नहीं करता है। आधार कार्ड में लेटेस्ट मोबाइल नंबर अपडेट करवाने के लिए क्या करें? भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकारण (यूआइडीएआई) ने इस बारे में ऑफिशियल ट्वीटर हैंडिल पर ट्वीट करके जानकारी दी है। इस ट्वीट के मुताबिक, अगर आपने अभी तक अपने लेटेस्ट मोबाइल नंबर को आधार में अपडेट नहीं किया है तो आप बिना किसी डॉक्यूमेंट के इसे अपडेट कर सकते हैं। आपको सिर्फ अपना आधार कार्ड लेकर किसी भी नजदीकी आधार सेवा केंद्र में जाएं और मोबाइल नंबर अपडेट करने के रिक्वेस्ट दे सकते हैं। यहां आपको मोबाइल नंबर अपडेट कराने के लिए 50 रुपए देने होंगे। मोबाइल नंबर आधार से लिंक कराने पर ये मिलते हैं फायदे अगर आपका मोबाइल नंबर आधार के साथ लिंक है तो आप आधार बेस्ड ओटीपी के जरिये बड़ी आसानी से अपने इनकम टैक्स रिटर्न (आईटीआर) को वेरिफाई कर सकते हैं। आधार आधारित केवाईसी के मामले में आपके मोबाइल नंबर का रजिस्टर्ड होना जरूरी है। तभी आधार आधारित ओटीपी के जरिये केवाईसी की प्रक्रिया पूरी होगी। आधार से जुड़ी तमाम तरह की अलग-अलग सेवाएं ऑनलाइन पाने के लिए भी आपके आधार नंबर के साथ मोबाइल नंबर का लिंक होना जरूरी है। आधार को मोबाइल से अपडेट नहीं कराने पर क्या हो सकता है नुकसान यदि आपका पुराना नंबर यदि चालू नहीं है जिसे आपने आधार कार्ड में दिया है तो आपको काफी परेशानी हो सकती है। इससे यह होगा कि अगर आप आधार नंबर का इस्तेमाल किसी वेरिफिकेशन प्रक्रिया के लिए करेंगे तो आपके नंबर पर एक ओटीपी आएगा। यह ओटीपी आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर या ईमेल आईडी पर आएगा। ऐसे में अगर आपका गलत या पुराना नंबर आधार पर पड़ा होगा तो आपको ओटीपी नहीं मिल पाएगा, जिसके कारण आप अपने प्रोसेस को पूरा नहीं कर पाएंगे। इसके साथ ही आप अपने आधार को किसी दस्तावेज से लिंक भी नहीं करा सकेंगे। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

मूंगफली : सर्दियों मेें मूंगफली खाने से मिलते हैं कई फायदे

मूंगफली : सर्दियों मेें मूंगफली खाने से मिलते हैं कई फायदे

जान लें मूंगफली खाने का सही तरीका वरना हो सकता है नुकसान मूंगफली को सर्दी का मेवा भी कहा जाता है। व्रत, उपवास आदि में साथ ही अन्य अवसरों पर रेसिपी बनाने में इसका उपयोग किया जाता है। मूंगफली खाने से कई फायदे मिलते है। यह ब्लड शुगर और वजन घटाने में सहायक है। इसके अलावा इसके सेवन से कई रोगों में फायदा होता है। मूंगफली प्रोटीन का सबसे अच्छा स्रोत है। इसमें विटामिन ई, मैग्नीशियम, फॉलेट, कॉपर और आर्जिनिन होता है। अध्ययनों से पता चलता है कि मूंगफली वजन घटाने के लिए भी उपयोगी हो सकती है और हृदय रोग के जोखिम को कम कर सकती है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 मूंगफली पाए जाने वाले पोषक तत्व 100 ग्राम कच्ची मूंगफली में कैलोरी - 567, प्रोटीन - 25.8 ग्राम, वसा - 49.2 ग्राम (संतृप्त - 6.28 ग्राम, मोनोअनसैचुरेटेड - 24.43 ग्राम, पॉलीअनसेचुरेटेड - 15.56 ग्राम), कार्ब्स-16.1 ग्राम, चीनी - 4.7 ग्राम, फाइबर - 8.5 ग्राम और 7 प्रतिशत पानी पाया जाता है। मूंगफली खाने से मिलने वाले फायदें मूंगफली खाने के कई फायदे हैं। मूंगफली खाने से आश्चर्यजनक लाभ मिलते हैं। बेशर्त है इसका सेवन सही मात्रा व तरीके से किया जाए। बालों को रखे स्वस्थ और मजबूत, गंजेपन के इजाल में भी उपयोगी मूंगफली के सेवन से बालों व त्वचा को फायदा होता है। मूंगफली में ऐसे पोषक तत्व पाए जाते हैं जो बालों को स्वस्थ बनाए रखने में मदद करते हैं। इनमें ओमेगा 3 फैटी एसिड का अधिक स्तर शामिल है जो स्कैल्प को मजबूत और बालों के विकास के लिए बेहद फायदेमंद है। मूंगफली एल आर्जिनाइन का बहुत अच्छा स्त्रोत है, यह एक अमीनो एसिड है जो पुरुषों में गंजेपन के इलाज के लिए बहुत उपयोगी है और बालों को विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। दिल को करें मजबूत, हार्ट अटैक के खतरे को कम करने में सहायक मूंगफली का सेवन से दिल को मजबूत करने में सहायक है। इससे हार्ट अटैक के खतरा कम हो जाता है। शोधकर्ताओं के अनुसार, जो लोग नियमित रूप से मूंगफली खाते हैं, उनमें हार्ट स्ट्रोक या बीमारी से मरने की संभावना बहुत कम होती है। मूंगफली और अन्य नट्स खराब कोलेस्ट्रॉल (एलडीएल) के स्तर को भी कम कर सकते हैं। खराब कोलेस्ट्रॉल से रक्त वाहिकाओं पर पट्टिका विकास हो सकता है और मूंगफली इसे रोक सकती है। मूंगफली भी सूजन को कम कर सकती है जो हृदय रोग का कारण बन सकती है। मूंगफली में भी दिल की समस्याओं से लडऩे में मदद करता है। त्वचा को स्वस्थ रखने में मददगार मूंगफली में भरपूर मात्रा में मैग्रीशियम पाया जाता है जो हमारे तंत्रिका तंत्र, मांसपेशियों और रक्त वाहिकाओं को शांत करके त्वचा के लिए बेहतर रक्त प्रवाह प्रदान करता है। इससे आपको एक युवा और स्वस्थ त्वचा मिलती है। मूंगफली में पाया जाने वाला बीटा कैरोटीन एक एंटीऑक्सीडेंट है जो त्वचा के स्वास्थ्य के लिए बहुुत महत्वपूर्ण है। इसके अलावा त्वचा की सूचन कम करने में भी मूंगफली का प्रयोग फायदेमंद है। इससे सोरायसिस और एक्जिमा जैसे त्वचा रोगों का इलाज भी किया जाता है। मंूगफली में मौजूद फैटी एसिड भी सूजन और त्वचा की लालिमा को कम करता है। मूंगफली में मौजूद फाइबर विषाक्त पदार्थों और कचरे को बाहर निकालने के लिए आवश्यक है। शरीर के अंदर विषाक्त पदार्थ त्वचा पर डल्नस और अतिरिक्त तेल के कारण होते हैं। नियमित रूप से मूंगफली सेवन आपको एक स्वस्थ त्वचा देने में मदद करता है। डिफ्रेशन को रखें दूर शरीर में सेरोटोनिन का कम स्तर डिफ्रेशन या अवसाद को उत्पन्न करता है। मूंगफली में मौजूद ट्रिप्टोफेन इस रसायन को निकालने में मदद करता है। खतरनाक बीमारियों को दूर रखने और स्वस्थ रहने के लिए प्रत्येक सप्ताह दो बड़े चम्मच मूंगफली के मक्खन का सेवन करना लाभप्रद रहता है। स्मरण शक्ति बढ़ाए मूंगफली में विटामिन बी 3 या नियासिन तत्व होते हैं जिनके कई स्वास्थ्य लाभों में मस्तिष्क की सामान्य कार्यप्रणाली के साथ-साथ स्मरण शक्ति को भी बढ़ाना शामिल है। इसका उपयोग पढऩे वाले बच्चों के लिए खास कर फायदेमंद साबित हो सकता है। वजन घटाने में सहायक मूंगफली वजन कम करने में भी सहायक है। मूंगफली में प्रोटीन और फाइबर होते हैं। ये दोनों पोषक तत्व भूख को कम करते हैं। इसलिए भोजन के बीच में कुछ मूंगफली खाने से आपकी भूख कम हो सकती है जिससे वजन कम करने में मदद मिलेगी। रोजाना मूंगफली का सेवन करने से जल्दी ही वजन कम होने लगता है। पित्ताशय की पथरी को रोकती है मूंगफली का सेवन पित्त पथरी के कम जोखिम से भी जुड़ा हुआ है। एक सप्ताह में मूंगफली को शामिल करने वाले 5 या अधिक नट्स वाले पुरुषों में पित्त पथरी की बीमारी का खतरा कम होता है। इसी तरह जो महिलाएं एक हफ्ते में 5 या उससे अधिक यूनिट नट्स का सेवन करती हैं उनमें कोलेसीस्टेक्टॉमी (पित्ताशय की थैली को हटाने) का जोखिम कम होता है। कैंसर के जोखिम को कम करे मूंगफली में पॉलीफीनॉलिक नामक एंटीऑक्सीडेंट की अधिक मात्रा मौजूद होती है। पी-कौमरिक एसिड में पेट के कैंसर के जोखिम को कम करने की क्षमता होती है। मूंगफली विशेष रूप से महिलाओं में पेट के कैंसर को कम कर सकती है। दो चम्मच मूंगफली के मक्खन का कम से कम सप्ताह में दो बार सेवन करने से महिलाओं व पुरुषों में पेट के कैंसर के खतरे को कम कर सकते हैं। अल्जाइमर रोग में भी फायदेमंद मूंगफली का सेवन अल्जाइमर जैसी बीमारियों में भी लाभदायक है। इसमें रेसवेरट्रोल नामक एक यौगिक होता है जो मृत कोशिकाओं को कम करने, डीएनए की रक्षा करने और अल्जाइमर रोगियों में तंत्रिका संबंधी क्षति को रोकने के लिए फायदेमंद है। उबाली हुई या भुनी हुई मूंगफली ज्यादा लाभकारी होती है, क्यूंकि ये रेसवेरट्रोल के स्तर को बढ़ा देती है। अध्ययनों से पता चला है कि नियासिन में समृद्ध खाद्य पदार्थ जैसे कि मूंगफली, अल्जाइमर रोग के खतरे को 70 प्रतिशत तक कम कर सकती हैं। प्रजनन क्षमता में बढ़ोतरी मूंगफली में अच्छी मात्रा में फोलेट भी होता है। कई अध्ययनों से पता चला है कि जिन महिलाओं ने गर्भावस्था के पहले और दौरान 400 माइक्रोग्राम फोलिक एसिड की दैनिक खपत की थी, उनमें एक गंभीर तंत्रिका ट्यूब दोष के साथ पैदा होने वाले बच्चे के जन्म का खतरा 70 प्रतिशत तक कम हो गया। बाल विकास के लिए अच्छा आहार कुछ शोधकर्ताओं का मानना है कि चूंकि मूंगफली में सभी अमीनो एसिड और प्रोटीन होते हैं, इसलिए वे बालों के विकास के लिए आहार का अच्छा पूरक हो सकते हैं। कैसे खाएं मूंगफली? मूंगफली खाने का तरीका आप मूंगफली या मूंगफली कई तरीकों से खा सकते हैं - कच्चा, तला हुआ या भुना हुआ हो सकता है। इसे दैनिक आधार पर खाने का सबसे अच्छा तरीका सलाद के रूप में है। आप अपने नाश्ते के अनाज को मूंगफली के साथ भी डाल सकते हैं या इसे जमे हुए दही में मिला सकते हैं। मूंगफली का अधिक मात्रा में सेवन हो सकता है खतरनाक मूंगफली की तासीर गर्म होती है। इसलिए इसका सेवन ज्यादातर सर्दियों के मौसम में ही किया जाता है। पर ध्यान रखें कि सीमित रूप से ही इसका सेवन करें। मूंगफली का अधिक मात्रा में सेवन आपके शरीर में अन्य प्रकार की समस्या उत्पन्न कर सकता है। मूंगफली का अधिक मात्रा में सेवन करने से एलर्जी भी हो सकती है, जो कई बार मौत का कारण भी हो सकती है। संवेदनशील त्वचा के लिए मूंगफली बहुत ही घातक होती है। मुंह में खुजली, गले और चेहरे पर सूजन आदि इसके एलर्जी के ही लक्षण होते हैं। कई बार सांस लेने में परेशानी, अस्थमा अटैक भी हो सकता है। इसके अधिक सेवन से पेट में गैस की समस्या हो सकती है। इसलिए किसी भी प्रकार के दुष्परिणाम होने पर डाक्टर से सलाह लें और जब तक ठीक नहीं हो जाते हैं तब तक किसी भी प्रकार के सूखे मेवे का सेवन न करें। नोट- यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य अनुभवों व शोधों में सामने आए परिणामों पर आधारित है। अलग-अलग व्यक्तियों की तासीर के अनुसार इसके फायदे या नुकसान देखने को मिल सकते हैं। इसलिए किसी भी प्रकार के नुकसान के लिए टै्रक्टर जंक्शन उत्तरदायी नहीं होगा। आप स्वविवेक से इसके फायदे और नुकसान को समझे और इसका उपयोग अपनी शारीरिक आवश्यकतानुसार करें। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो 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