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राहत पैकेज में किसानों को और कर्जदार बनाने की नीतियां

राहत पैकेज में किसानों को और कर्जदार बनाने की नीतियां

15 May, 2020

कर्जमाफी, सब्सिडी, बकाया भुगतान और नुकसान की भरपाई के मुद्दे गायब

कोरोना लॉकडाउन में देश की अर्थव्यवस्था को हुए नुकसान की भरपाई के लिए केंद्र सरकार ने 20 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज की घोषणा की है। इस आर्थिक पैकेज में किसानों का विशेष ध्यान रखने का दावा केंद्र सरकार ने किया है और किसानों के लिए 30 हजार करोड़ रुपए का पैकेज जारी किया है। पैकेज जारी होने के बाद किसान संगठनों और किसानों ने इसे बोगस करार दिया है। किसानों ने कहा कि इस पैकेज से किसानों को और कर्जदार बनाने की नीतियां ही सामने आई हैं। किसानों की फसलों के नुकसान की भरपाई, कर्जमाफी, खाद एवं बीज पर सब्सिडी और गन्ना के बकाया भुगतान जैसे जरूरी मुद्दों पर चर्चा तक नहीं हुई। अगर सरकार इन मुद्दों पर ध्यान देती तो किसान ज्यादा मजबूती के साथ कोरोना संकट काल में सरकार के साथ खड़ा रहता। अब किसानों का कहना है कि उन्हें एकजुट होकर सरकार तक अपनी बात पहुंचानी होगी ताकि उनकी इन मांगों पर जल्द से जल्द सुनवाई हो।

 

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किसान संगठनों ने कहा-पूरा राहत पैकेज ही बोगस

कोरोना राहत पैकेज में किसानों व मजदूरों को 30 हजार करोड़ रुपए से राहत पहुंचाने का दावा किया गया है। लेकिन जमीन से जुड़े किसानों का कहना है कि कोरोना संकट काल में देश के किसानों की वजह से ही देशवासियों को खाने-पीने की वस्तुओं की कोई कमी नहीं हुई। अगर देश का किसान आर्थिक रूप से मजबूत होगा तो देश आगे बढ़ेगा। सरकार के आर्थिक पैकेज से किसानों के हिस्से में सिर्फ वादे ही आए हैं। किसान संगठनों के अनुसार किसानों के लिए केवल नाम का राहत पैकेज जारी किया गया है। किसानों के लिए सबसे ज्यादा जरूरी कर्जमाफी जैसे बिंदुओं पर चर्चा तक नहीं हुई। इसके अलावा लॉकडाउन के दौरान फल व सब्जी किसानों को भारी नुकसान पहुंचा है। इसकी भरपाई कैसे होगी यह भी नहीं बताया गया है। खाद एवं बीज पर सब्सिडी कम करके सरकार राहत दे सकती थी लेकिन सरकार इस इस ओर ध्यान ही नहीं गया। गन्ने के बकाया भुगतान को लेकर भी घोषणा नहीं की गई।

 

किसानों ने बताई जमीनी हकीकत

राजस्थान के मालाखेड़ा, अलवर जिले के किसानों ने सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत बताई।

  • किसान को उसकी उपज का मूल्य लागत के अनुसार नहीं मिल रहा है। लागत लगातार बढ़ रही है लेकिन उपज का मूल्य उस अनुपात में नहीं बढ़ रहा है।
  • समर्थन मूल्य पर कृषि जिंसों की खरीद में भारी अनियमितताएं हैं।
  • बैंक किसानों को आसानी से ऋण नहीं देती है। जमीन तक गिरवी रखनी पड़ती है।
  • केंद्र सरकार ने सहकारिता से जूड़े किसानों के लिए ऋण सीमा बढ़ाने की बात कही थी लेकिन कोई धनराशि राज्य सरकार को उपलब्ध नहीं कराई गई।
  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत किसानों को पूर्ण लाभ बीमा कंपनी प्रदान नहीं कर रही है। इससे किसानों को भारी नुकसान हुआ है।
  • कृषि कार्य में काम आने वाले उर्वरक बीज के अलावा जुताई-बुवाई सहित अन्य सभी कार्य 10 से 30 गुना तक महंगे हो गए हैं। जबकि कृषि जिंस का भाव 5 से 10 गुना तक नहीं बढ़ाया गया है।
  • किसान परिवारों को पेंशन योजना की घोषणा पूर्व में की गई थी लेकिन कोई भी सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही है।
  • वर्तमान में कर्जा देकर किसानों को और डूबाया जा रहा है। जब किसान कर्ज नहीं चुका पाता तो बैंक उसकी जमीन कुर्क कर देता है।
  • किसान क्रेडिट कार्ड पर पूर्व में लिया गया ऋण किसान अभी तक नहीं चुका पाया है। अब वह और ऋण लेगा तो चुकाएगा कैसे? सरकार अभी जमीनी हकीकत से कोसों दूर है।
  • किसानों को अगर प्रत्यक्ष रूप से सहायता देनी है तो उनके बिजली के बिल पूरे माफ करने चाहिए।

 

 

राहत पैकेज में किसानों की और कर्जदार बनाने की स्कीम

किसानों का कहना है कि सरकार के कोरोना वायरस पैकेज की घोषणाओं में सब्जी, फल, डेयरी, मछली और पोल्ट्री सेक्टर के किसानों के नुकसान की भरपाई की बात नहीं हुई, केवल किसानों को और ज्यादा कर्जा देने की घोषणा हुई। फसल के दाम की कोई बात नहीं हुई, बस कर्जा लादने की स्कीम समझाई गई। अभी जमीन पर हालात ऐसे हैं कि बैंक अपना पुराना कर्ज वसूलने में जुटी हुई है और किसानों के न तो बिजली के बिल माफ किए गए ना ही समर्थन मूल्य पर खरीद की सही व्यवस्था है। किसानों का दर्द है कि लॉकडाउन का सबसे अधिक नुकसान किसानों को हुआ है। लाकडाउन के कारण मछुआरों, पशुपालकों की आमदनी समाप्त हो गई थी लेकिन मोदी सरकार के 20 लाख करोड़ के वित्तीय पैकेज में लघु एवं सीमान्त किसानों के हिस्से में केवल क्रेडिट कार्ड मिलने का वायदा ही निकला।

 

गरीब, किसान और मजदूरों के जले पर नमक छिडक़ने का कार्य

देश भर के 250 से ज्यादा किसान संगठनों का प्रतिनिधित्व करने वाले अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति (एआईकेएससीसी) के संयोजक वीएम सिंह के अनुसार राहत पैकेज में किसानों को कुछ नहीं दिया गया है। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री ने राहत पैकेज के नाम पर गरीब, किसान और मजदूरों के जले पर नमक छिडक़ने का कार्य किया है। यह पूरा पैकेज ही बोगस है। हम गरीब किसान एवं मजदूर के लिए सरकार से कर्जमाफी, फसलों को हुए नुकसान की भरपाई के साथ ही गन्ना किसानों के बकाया भुगतान की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन ऐसा कुछ नहीं किया गया।

 

आखिर अन्नदाता के साथ ही बार-बार धोखा

स्वराज इंडिया के अध्यक्ष योगेंद्र यादव की मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एक बार और सिर्फ कर्ज का वादा तथा एक बार फिर किसान खाली हाथ। उन्होंने कहा कि न तो लॉकडाउन में किसानों को हुए फल, सब्जी और दूध के नुकसान की भरपाई की कोई घोषणा की गई, और न ही किसानों को फसल के गिरे दाम दिलवाने की योजना की घोषणा की गई। उन्होंने कहा कि किसानों के लिए न बीज और खाद के लिए कोई सब्सिडी देने की बात और न ही डीजल के दाम से राहत देने की घोषणा की गई। उन्होंने कहा कि आखिर अन्नदाता के साथ ही बार-बार यह धोखा क्यों? राष्ट्रीय लोकदल के उपाध्यक्ष जयंत चौधरी के अनुसार उत्तर प्रदेश के गन्ना किसानों का 16,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का बकाया है। लेकिन राहत पैकेज में सरकार की किसान के लिए कोई योजना नहीं दिखी। 

 

 

किसान को खैरात नहीं मेहनत का फल चाहिए

भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत के अनुसार वित्त मंत्री द्वारा किसानों के लिए घोषित आर्थिक पैकेज में कृषि ऋण को तीन माह आगे बढ़ाने एवं किसान के्रडिट कार्ड से लोन दिए जाने के अलावा कोई नई घोषणा नहीं की। उन्होंने कहा कि सरकार की घोषणाओं से किसान आत्मनिर्भरता की नहीं आत्महत्या की तरफ रुख करेगा। जिस आत्मनिर्भरता की बात सरकार कर रही है, खेती के बिना उसे हासिल करना कठिन ही नहीं, असंभव है। उन्होंने कहा कि किसान पहले ही बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि की मार झेल रहा है, उपर से सरकार ने भी उसे राहत पैकेज के रूप में निराश ही किया है, इसलिए भाकियू जल्दी ही इसके खिलाफ आवाज उठाने के लिए आंदोलन करेगी।
 

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सोयाबीन की खरीद से किसान खुश, समर्थन मूल्य से अधिक बाजार में दाम

सोयाबीन की खरीद से किसान खुश, समर्थन मूल्य से अधिक बाजार में दाम

समर्थन मूल्य बेहतर होने से बाजार में भी सोयाबीन के भावों में आई तेजी सोयाबीन किसानों को इस बार बाजार में फसल बेचने से अच्छे दाम मिल रहे हैं। किसानों का कहना है कि यह पांच साल में पहला मौका है जब सोयाबीन के मंडियों में बेहतर दाम मिल रहे हैं। इस समय महाराष्ट्र की मंडियों में सोयाबीन के भाव 4000 रुपए प्रति क्विंटल चल रहा है जबकि सरकार ने सोयाबीन का समर्थन मूल्य 3880 रुपए तय किया हुआ है। सरकारी समर्थन मूल्य की बेहतर होने से हाजिर वायादा भावों में भी तेजी आई है जिसका फायदा किसानों को मिल रहा है। इधर सोमवार को कमोडिटी एक्सचेंज एनसीडीईएक्स पर सोयाबीन का नवंबर वायदा 54 रुपए की तेजी के साथ 4243 रुपए प्रति क्विंटल पर कारोबार कर रहा था। महाराष्ट्र राज्य कृषि मूल्य आयोग के पूर्व चेयरमैन पाशा पटेल का कहना कि पिछले कई वर्षों बाद किसानों को उनकी उपज (सोयाबीन) का बेहतर भाव मिल रहा है। फसलों की कटाई के समय का पिछले 4-5 साल का ट्रेंड देखें तो सोयाबीन के भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से काफी नीचे थे। इससे किसानों को काफी नुकसान हुआ था। कई साल बाद पहला मौका है जब भाव एमएसपी से ऊपर चल रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक देशभर की प्रमुख हाजिर मंडियों में सोयाबीन का भाव 4000 रुपए के आसपास चल रहा है। 19 अक्टूबर को मध्यप्रदेश के कुछ इलाकों में हाजिर में बढिय़ा क्वालिटी वाली सोयाबीन का दाम 4000-4200 रुपए के बीच था। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 मध्यप्रदेश में सोयाबीन के भावों को लेकर किसानों में उत्साह मध्य प्रदेश के किसानों से जुड़ी संस्था समृद्ध किसान के वीरेन्द्र सिंह का कहना है कि इस साल मध्य प्रदेश के किसानों को सोयाबीन का उचित भाव मिल रहा है, जिससे में सोयाबीन बेचने वाले किसानों में उत्साह दिखाई दे रहा है। मध्य प्रदेश के ही उज्जैन जिले के बढऩगर की फॉर्मर्स प्रोड्यूसर्स कंपनी के सुरेन्द्र का कहना है कि मंडियों में अच्छी क्वालिटी के सोयाबीन का दाम 4300 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंच गया है। हाजिर में भाव बढऩे से वायदा में भी तेजी का रुख है। उनका कहना है कि बाजार में जितनी प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी किसानों को उनकी उपज का भाव बाजिव मिलेगा। इस बार भारी बारिश से सोयाबीन की फसल में हुआ नुकसान, दाम बढऩे से हो सकेगी भरपाई इस बार कई जगह भारी बारिश की वजह से सोयाबीन की फसल को नुकसान पहुंचा है। इससे उत्पादन में कमी आई है। बात करें देश में सबसे अधिक सोयाबीन उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश की तो यहां इस साल भारी बारिश के कारण 20 फीसदी नुकसान होने का अनुमान लगाया गया है। इसमें मध्यप्रदेश में बारिश की कमी और महाराष्ट्र में अत्यधिक बारिश की वजह से फसल बर्बाद हुई। इससे किसानों को काफी नुकसान हुआ। अब चूंकी बाजार में किसानों को सोयाबीन के अच्छे दाम मिल रहे हैं इससे किसानों के नुकसान की भरपाई हो सकेगी। सोयाबीन का बाजार भाव व एमएसपी में कितना अंतर सोयाबीन का सरकारी एमएसपी- 3880 रुपए प्रति क्विंटल सोयाबीन के निजी मंडियों में भाव- 4000 रुपए प्रति क्विंटल (महाराष्ट्र) सोयाबीन का बाजार भाव- 4243 रुपए प्रति क्विंटल (महाराष्ट्र) भावों का अंतर देखें तो सोयाबीन का बाजार भाव, सरकार द्वारा तय किए गए भाव से काफी ज्यादा हैं। इससे किसानों को निजी मंडियों में सोयाबीन बेचने से फायदा हो रहा है। फिर भी सरकार द्वारा तय किए गए भावों से एक फायदा है कि खरीद शुरू होने पर इससे कम भाव में व्यापारी किसानों से सोयाबीन की खरीद नहीं कर पाएंगे। इसलिए एमएसपी भी किसान के लिए बेहद जरूरी हैं ताकि बाजार में भाव नीचे गिरने लगे तो किसान एमएसपी पर अपनी उपज बेचकर अपनी हानि की भरपाई कर सके। सोयाबीन की बुआई से लेकर कटाई तक आता है इतना खर्चा सोयाबीन फसल की बुआई से लेकर कटाई तक किसानों को प्रति बीघा के हिसाब से करीब ढाई हजार रुपए खर्च करने पड़ते हैं। किसानों के द्वारा बताया जा रहा है कि, प्रति बीघा जमीन की 02 वार की जुताई 750 रुपए, पंजी की हकाई 250 रुपए, सोयाबीन की बुवाई 250 रुपए, 1200 रुपए की बीज, थ्रेसर की कटाई 500 रुपए, दबाई 200 रुपए और मजदूरों से कटाई 1000 यानि कुल 4 हजार से 4200 रुपए का खर्चा करना पड़ता है। इस हिसाब से देखें तो सोयाबीन की फसल बेचने से किसान की लागत ही निकल पाती है। इसलिए किसानों को चाहिए कि सोयाबीन की फसल के साथ अन्य सहायक फसलें भी उगाएं ताकि एक फसल में हानि होने पर दूसरी फसल को बेचकर उसकी भरपाई की जा सके। राजस्थान में एक नवंबर से शुरू हो रही है सोयाबीन की खरीद राजस्थान में सोयाबीन और मूंगफली की समर्थन मूल्य पर खरीद की जाएगी। इसके लिए 20 अक्टूबर से पंजीयन शुरू हो जाएगा। मीडिया में प्रसारित खबरों के अनुसार सहकारिता मंत्री उदयलाल आंजना के मुताबिक सोयाबीन के लिए 79 खरीद केन्द्र चिह्नित किए गए हैं। ई-मित्र और खरीद केन्द्रों पर ऑनलाइन पंजीकरण सुबह 9 बजे से शाम 7 बजे तक हो सकेगा। बिना पंजीकरण के किसानों से खरीद नहीं होगी। इस बार राजस्थान में किसानों से सोयाबीन की 2.92 लाख टन उपज खरीदने का लक्ष्य हैं। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

समर्थन मूल्य पर खरीद : राजस्थान में मूंग, उड़द, सोयाबीन एवं मूंगफली के लिए पंजीकरण 20 से

समर्थन मूल्य पर खरीद : राजस्थान में मूंग, उड़द, सोयाबीन एवं मूंगफली के लिए पंजीकरण 20 से

किसान ई-मित्र व खरीद केंद्रों पर करा सकेंगे पंजीकरण, किसानों की सुविधा के लिए बनाए जा रहे हैं 850 से अधिक खरीद केंद्र देश के कई राज्यों में इस समय खरीफ की उपज की खरीद शुरू हो चुकी है। हरियाणा और पंजाब में धान, कपास आदि की खरीद का कार्य जोरशोर से चल रहा है। वहीं राजस्थान में मूंग, उड़द, सोयाबीन एवं मूंगफली की खरीद नवंबर माह में शुरू की जानी है जिसको लेकर यहां तैयारियां चल रही हैं। राजस्थान में किसानों को फसल बेचने से पहले अपना पंजीकरण करना होगा। पंजीकरण के अभाव में किसान यहां समर्थन मूल्य पर फसल नहीं बेच पाएंगे। राजस्थान राज्य में समर्थन मूल्य पर मूंग, उड़द, सोयाबीन एवं मूंगफली की खरीद के लिए ऑनलाइन पंजीकरण 20 अक्टूबर 2020 से शुरू किए जा रहे हैं। इस वर्ष राजस्थान में केंद्र सरकार ने मूंग की 3.57 लाख मीट्रिक टन, उड़द 71.55 हजार, सोयाबीन 2.92 लाख तथा मूंगफली 3.74 लाख मीट्रिक टन की खरीद के लक्ष्य की स्वीकृति दी है। पंजीकरण के अभाव में किसानों से समर्थन मूल्य पर खरीद संभव नहीं होगी। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 किसानों से कब की जाएगी समर्थन मूल्य पर खरीद शुरू राजस्थान में किसान 850 से अधिक खरीदी केंद्र स्थापित किए गए हैं। इन केन्द्रों पर मूंग, उड़द एवं सोयाबीन की उपज 1 नवंबर से तथा 18 नवंबर से मूंगफली की उपज पर समर्थन मूल्य पर बेच सकेगें। मूंग के लिए 365, उड़द के लिए 161, मूंगफली के 266 एवं सोयाबीन के लिए 79 खरीद केंद्र बनाए जा रहे हैं जो कि पिछले वर्ष की तुलना में 500 अधिक हैं। पंजीकृत किसान इन खरीद केन्द्रों पर अपनी उपज को लाकर बेच सकते हैं। कब और कैसे करवाएं पंजीकरण किसानों की सुविधा के लिए यहां ऑनलाइन पंजीकरण की व्यवस्था ई-मित्र केंद्र व केन्द्रों पर सुबह 9 बजे से सायं 7 बजे तक की गई है। इच्छुक किसान ई-मित्र केंद्र पर 20 अक्टूबर से अपनी उपज बेचने के लिए पण पंजीकरण करवा सकते हैं। किसान एक जनआधार कार्ड में अंकित नाम में से जिसके नाम गिरदावरी होगी उसके नाम से एक पंजीयन करवा सकेगें। किसान इस बात का विशेष ध्यान रखे कि जिस तहसील में कृषि भूमि है उसी तहसील के कार्यक्षेत्र वाले खरीद केंद्र पर उपज बेचान हेतु पंजीकरण करावें। दूसरी तहसील में यदि पंजीकरण कराया जाता है तो पंजीकरण मान्य नहीें होगा। पंजीकरण कराते समय इन बातों का रखें ध्यान किसान पंजीयन कराते समय यह सुनिश्चित कर ले कि पंजीकृत मोबाइल नंबर, से जनआधार कार्ड से लिंक हो जिससे समय पर तुलाई दिनांक की सूचना मिल सके। किसान प्रचलित बैंक खाता संख्या सही दे ताकि ऑनलाइन भुगतान के समय किसी प्रकार की परेशानी किसान को नहीं हो। पंजीकरण के लिए आवश्यक दस्तावेज किसान को पंजीकरण केंद्र पर अपने साथ जनआधार कार्ड नंबर, खसरा नंबर, गिरदावरी की प्रति, बैंक पासबुक की प्रति ले जानी होगी। किसानों को यह दस्तावेज पंजीकरण फार्म के साथ अपलोड करने होंगे। जिस किसान द्वारा बिना गिरदावरी के अपना पंजीयन करवाया जाएगा, उसका पंजीयन समर्थन मूल्य पर खरीद के लिए मान्य नहीं होगा। यदि ई-मित्र द्वारा गलत पंजीयन किए जाते हैं या तहसील के बाहर पंजीकरण किए जाते हैं तो ऐसे ई-मित्रों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वर्ष 2020-21 के लिए सरकार द्वारा तय समर्थन मूल्य वर्ष 2020-21 के लिए सरकार की ओर से मूंग, उड़द, सोयाबीन एवं मूंगफली का समर्थन मूल्य तय किए गए हैं। इसमें उड़द का समर्थन मूल्य 6000 रुपए प्रति क्विंटल, मूंग का समर्थन मूल्य 7196 रुपए प्रति क्विंटल, मूंगफली का समर्थन मूल्य 5275 रुपए प्रति क्विंटल और सोयाबीन का समर्थन मूल्य 3880 रुपए प्रति क्विंटल तय किया गया है। पंजीकरण में समस्या होने पर किसान यहां कर सकते हैं संपर्क पंजीकरण कराने में यदि किसानों को कोई समस्या आ रही हो तो वे इसके समाधान हेतु राजफैड स्तर पर ट्रोल फ्री हेल्पलाइन नंबर 1800-180-6001 पर सुबह 9 से 7 बजे तक दर्ज करा सकते हैं। यह टोल फ्री नंबर 20 अक्टूबर से कार्य करना शुरू कर देगा। इसके अलावा किसान अपनी शिकायत/समस्या को लिखित में राजफैड मुख्यालय में स्थापित काल सेंटर पर [email protected] पर मेल भेज सकते हैं। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

अब किसानों को मिल सकेगी गेहूं, धान सहित कई फसलों के 17 बॉयोफोर्टीफाइड बीजों की वैरायटी

अब किसानों को मिल सकेगी गेहूं, धान सहित कई फसलों के 17 बॉयोफोर्टीफाइड बीजों की वैरायटी

कृषि वैज्ञानिकों ने विकसित की पोष्टिकता से भरपूर बॉयोफोर्टीफाइड नई किस्में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में फूड एंड एग्रीकल्चर ऑरेनाइजेशन एफपीओ की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में कृषि वैज्ञानिकों द्वारा विकसित की गई गेहूं, धान सहित कई फसलों के 17 बीजों की वैरायटी को देश को समर्पित किया है। बताया जा रहा है कि जारी किए गए बीजों की वैरायटी अन्य बीजों के मुकाबले पोष्टिता से भरपूर है और ये किसानों और आम नागरिकों के लिए फायदेमंद साबित होगी। मीडिया में प्रकाशित खबरों के अनुसार पीएम मोदी ने इन 17 बॉयोफोर्टीफाइड बीजों की वैरायटी को देश समर्पित करते हुए कहा कि अब कुपोषण से निपटने के लिए महत्वपूर्ण दिशा में काम हो रहे हैं। अब देश में ऐसी फसलों को बढ़ावा दिया जा रहा है जिसमें पोष्टिक पदार्थ- जैसे प्रोटीन, आयरन, जिंक आदि होते हैं। मोटे अनाज- जैसे रागी, ज्वार, बाजरा, कोडो, झांगोरा, बार्री, कोटकी इन जैसे अनाज की पैदावार बढ़े, लोग अपने भोजन में इन्हें शामिल करें। उन्होंने वर्ष 2023 को अंतरराष्ट्रीय बाजरा दिवस घोषित करने के भारत के प्रस्ताव को पूरा समर्थन दिया है। उन्होंने कुपोषण खत्म करने की दिशा में काम के लिए किसान, कृषि वैज्ञानिकों सहित आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ता को बधाई दी और कहा कि यह इस आंदोलन के आधार हैं। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 यह है कृषि वैज्ञानिकों द्वारा जारी की गई 17 बायोफोर्टीफाइड नई किस्में गेहूं : एचआई-1633, एचडी-3298, डीबीडब्ल्यू-303 और एमएसीएस-4058, चावल- सीआरधान-315, मक्का- एलक्यूएमएच-1, एलक्यूएमएच-3, रागी- सीएफएमवी-1, सीएफएमवी-2, सावा– सीएलएवी-1, सरसों- पीएम-32, मूंगफली : गिरनार-4, गिरनार-5 किस्में. रतालू- डीए-340 एवं श्रीनीलिमा नई किस्में जारी की गई हैं। क्या होती है बॉयोफोर्टिफाइड किस्में बायोफोर्टिफिकेशन, पादप प्रजनन द्वारा फसलों की पोषक गुणवत्ता बढ़ाने की तकनीक है। बायोफोर्टिफिकेशन साधारण फोर्टिफिकेशन से अलग है, क्योंकि इसमें फसलों को अधिक पौष्टिक बनाया जाता है। बायोफोर्टिफाइड तकनीक द्वारा फसलों की पोषकता में बढ़ोतरी होती है। वैज्ञानिक इन फसलों के विकास के दौरान उनके बीज में पोषक तत्व और विटामिन, जड़ द्वारा अवशोषित कर बायोफोर्टिफाइड कर रहे हैं। फसलों पर ऐसे किया जाता है बायोफोर्टिफिकेशन बायोफोर्टिफिकेशन तकनीक में परंपरागत पादप प्रजजन तकनीक से उच्च सूक्ष्म तत्व वाली किस्म का पता लगाया जाता है। इन किस्मों को उच्च उत्पादन देने वाली किस्म से संकरण करवाया जाता है। इससे इन किस्मों में उच्च उत्पादक गुणों के साथ-साथ उच्च मात्रा में सूक्ष्म पोषक तत्व और जरूरी विटामिन उपलब्ध हो सके, जो कि किसानों के लिए फायदेमंद हो सके। ऐसे होता है बायोफोर्टिफिकेशन हाल ही में जारी की गई बॉयोफोर्टीफाइड बीज की किस्मों से पहले भी कई किस्में जारी की गई हैं। हम यहां उदाहरण के तौर पर कृषि वैज्ञानिकों द्वारा इन नई किस्मों से पहले जारी की गई बीजों की किस्मों के द्वारा बायोफोर्टिफिकेशन की प्रक्रिया को इस तरह से समझ सकते हैं- धान : विटामिन ए, फोलिक एसिड, अधिक आयरन गोल्डन राइस पहली बायोफोर्टिफाइड फसल है। संकरण तकनीक से धान में बीटा केरोटीन जीन डाला गया है। यदि रोजाना 40 ग्राम सुनहरा चावला पकाकर खाए जो अंधापन नहीं होगा। मक्का : विटामिन, आयरन, प्रो-विटामिन, विटामिन ई पोषक जरूरतों को पूरा करने के लिए क्यूपीएम मक्का अच्छा विकल्प है। क्योंकि इसमें 3.3 से 4 ग्राम प्रति 100 ग्राम लाइसिन प्रोटीन पाया जाता है, जो साधारण मक्का से दोगुना है। बॉयोफोर्टीफाइड किस्मों की विशेषताएं / लाभ गेहूं और धान सहित अनेक फसलों के 17 नए बीजों की वैरायटी, देश के किसानों को उपलब्ध कराई जा रही हैं। हमारे यहां अक्सर हम देखते हैं कि कुछ फसलों की सामान्य वैरायटी में किसी न किसी पौष्टिक पदार्थ या माइक्रो-न्यूट्रिएंट की कमी रहती है। इन फसलों की अच्छी वैरायटी, बॉयोफोर्टीफाइड वैरायटी, इन कमियों को दूर कर देती है, अनाज की पौष्टिकता बढ़ाती है। बीते वर्षों में देश में ऐसी वैरायटीज, ऐसे बीजों की रिसर्च और डवलपमेंट में काम हुआ है। आज अलग-अलग फसलों की 70 बॉयोफोर्टीफाइड किस्में किसानों को उपलब्ध हैं। इन वैरायटियों के इस्तेमाल से जहां किसानों को बेहतर उत्पादन मिलता है वहीं लोगों को पोष्टिकता से भरपूर भोजन। इस तरह ये नई किस्में किसानों व आम लोगों दोनों के लिए काफी फायदेमंद साबित होंगी। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

अक्टूबर माह के कृषि कार्य : प्याज, लहसुन, फूलगोभी, मटर, टमाटर, पपीता, इसबगोल में होगा फायदा

अक्टूबर माह के कृषि कार्य : प्याज, लहसुन, फूलगोभी, मटर, टमाटर, पपीता, इसबगोल में होगा फायदा

अक्टूबर माह में की जाने वाली वानिकी क्रियाएं, किसान करें ये काम किसानों अपने खेत में दाल व अनाज के साथ अलावा सब्जियां व फलों का उत्पादन भी करते हैं। कई किसान तो ऐसे हैं कि वे सिर्फ सब्जी और फल उत्पादन से ही अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं। इसके पीछे कारण यह है कि वे समय-समय पर सब्जियों व फलों के उत्पादन को बढ़ाने के लिए प्रयासरत रहते हैं। इस प्रयासों में प्रमुख है, सब्जियों व फलों को समयानुसार बोना व उनके उत्पादन काल के दौरान उनकी अच्छे से देखभाल करना ताकि स्वस्थ व गुणवत्तापूर्ण उत्पाद प्राप्त हो सके। आज हम आपको इसी विषय पर जानकारी देंगे कि सब्जियों व फलों के उत्पादन काल में इनका किस प्रकार ध्यान रखना चाहिए और कौन-कौनसी वानकी क्रियाएं करनी चाहिए, जिससे गुणवत्तापूर्ण उत्पादन में बढ़ोतरी हो और किसानों भाइयों को अपने उत्पाद का बाजार में बेहतर दाम मिल सके। आज हम अक्टूबर माह में की जाने वाली वानकी क्रियाओं के बारें में आपको बता रहे हैं। आशा करते हैं ये जानकारी हमारे किसान भाइयों के लिए फायदेमंद साबित होगी। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 प्याज की नर्सरी लगाएं इस माह प्याज की नर्सरी ऊंची उठी शैय्या पर लगाएं। प्याज की उन्नत किस्मों में अलों ग्रनों, पूसा रेड, पूसा रतनार, पूसा व्हाईट पलैट, पूसा व्हाइट राऊड व पूसा माधवी है। इससे पहले नर्सरी में कम्पोस्ट खाद मिलाकर शैया तैयार करें। इसके बाद 5 किलोग्राम बीज को नर्सरी में लगाएं। यह कार्य 17 अक्टूबर से लेकर 17 नबंवर माह तक किया जा सकता है। गाजर व मूली की बुवाई करें जापानी व्हाईट मूली तथा पूसा केसर व पूसा मघाली गाजर अक्टूबर में बोई जा सकती है। सितंबर में बोई फसल में आधा बोरा यूरिया डाल दें तथा 10 दिन के अंतर पर सिंचाई करें। कीट-नियंत्रण के लिए 0.2 प्रतिशत मैलाथियान छिडक़ाब करना चाहिए। मटर की बीजाई करें मटर अर्कल 17 अक्टूबर से 7 नवंबर तक तथा वोर्नवीला एवं लिकंन अक्टूबर के अंत से 17 नवंबर तक बोया जा सकता है। बीजाई से पहले खेत में आधा बोरी यूरिया, 8 टन कम्पोस्ट, 3 बोरे सिंगल सुपर फासफेट, 1 बोरा म्युरेट आफ पोटाश डालना चाहिए। फिर 30 किलोग्राम बीज रातभर भिगोकर 1-1.5 फुट दूर लाइनों में एक इंच पौधों में दूरी रखकर बुवाई करनी चाहिए। बीजाई के बाद हल्की सिंचाई करनी चाहिए। खरपतवार नियंत्रण के लिए 600 ग्राम स्टोम्प को 370 लीटर पानी में घोलकर बिजाई के 1-2 दिन के अंतर पर खेत में छिडक़ाव करें। इसके बाद पहली सिंचाई 27-30 दिन बाद करें। कीट-नियंत्रण के लिए 0.1 प्रतिशत इंडोसल्फान या मैलाथियान का छिडक़ाव करना चाहिए। टमाटर की विशेष फसल के लिए अभी करें बीजाई / टमाटर की बुवाई टमाटर की विशेष फसल के लिए अक्टूबर के शुरू में बीजाई करके मध्य नवंबर तक रोपाई कर कर सकते हैं। बोने से पहले, 170 ग्राम बीज को 0.7 ग्राम थीरम से उपचारित कर लें तथा हर 17 दिन बाद शाम के समय 2 ग्राम थीरम प्रति लीटर पानी में घोलकर का छिडक़ाव करें। सफेट मक्खी की रोकथाम के लिए नर्सरी में 0.1 प्रतिशत मैलाथियान 17 दिन के अंतर पर छिडक़ाव किया जा सकता है। पुरानी टमाटर की फसल से रोगग्रस्त पौधे उखाडक़र जला दें। दवाइयां छिडक़ने से पहले फल तोड़ लेना चाहिए ताकि दवा का दुष्प्रभाव फलों पर न हो। फूलगोभी की नर्सरी तैयार करें फूलगोभी की पूसा स्नोवाल-1 व पूसा स्नोवाल के-1 किस्में 17 अक्टूबर तक नर्सरी में बोई जा सकती है। इसके चार सप्ताह बाद खेत में रोपाई करें। पुरानी फसल में 10 दिन के अंतर पर सिंचाई करते रहें। खरपतवार नियंत्रण के लिए एक गुडाई करें तथा यूरिया की दूसरी किस्त एक बोरा, पहली किस्त के 30-40 दिन बाद दें। कीड़ों से बचाव के लिए फूलगोभी पर 0.2 प्रतिशत मैलाथियान का छिडक़ाव करते रहना चाहिए। इस माह भी लगा सकते हैं पालक व मैथी पालक व मैथी को अक्टूबर माह में भी लगाया जा सकते है। सितंबर में बोई फसल को 30 दिन बाद काट सकते है। ध्यान रहें तथा हर कटाई के बाद आधा बोरा यूरिया अवश्य डाल दें। सिंचाई हर सप्ताह करें। कीट के नियंत्रण के लिए 0.2 प्रतिशत मैलाथियान का छिडक़ाव किया जाना चाहिए। अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में लगाएं बरसीम बरसीम को अक्टूबर के आखिरी सप्ताह तक लगा सकते है। सितंबर में लगी फसल में 10 दिन के अंतर पर सिंचाई करते रहें। रिजका (लूसर्न) भी चारे की अच्छी फसल है इसे गहरी अच्छे निकास वाली दोमट भूमि में 17 अक्टूबर से लगा सकते हैं। रिजका की उन्नत किस्म लुसर्न-9, एल एल कम्पोजिट-7 तथा लुसर्न-टी है। इसे 7 कि.ग्रा. बीज को राइजावियम जैव खाद लगाकर एक फुट दूर लाइनों में 1-2 इंच गहरा बोया जाना चाहिए। बीजाई के समय आधा बोरा यूरिया तथा 4 बोरे सिंगल सुपरफासफेट को 8 इंच गहरा ड्रिल करें। जई की इन किस्मों को बोएं जई बोने का उत्तम समय 17 से 30 अक्टूबर तक का रहता है। इसलिए इसकी बुवाई अभी कर सकते हैं। इसके लिए उन्नत किस्मों में ओ.एल-9, कैन्ट व हरियाणा जई है जो कई कटाइयां देती है। जई का 27 कि.ग्रा. बीज 27 ग्राम वीटावैक्स से उपचारित करके 7 इंच दूर लाइनों में लगाएं। इसमें बीजाई पूर्व सिंचाई बहुत लाभदायक रहती है। बीजाई के समय पौना बोरा यूरिया व एक बोरा सिंगल सुपर फासफेट खेत में डालना चाहिए। इससे बेहतर उत्पादन मिलता है। कम पानी वाले क्षेत्रों में लगाएं इसबगोल इसबगोल एक औषधीय फसल है जिसे अच्छे जल निकाल वाली मिट्टी तथा कम पानी वाले क्षेत्रों में 17 अक्टूबर से 7 नवंबर के बीच लगा लगाया जा सकता है। बीजों को बोने से पहले इनको उपचारित करें। करीब 3 कि.ग्रा. बीज को 9 ग्राम थिरम से उपचारित करके 9 इंच दूर लाइनों में एक इंच से कम गहरा बोयें। बीजाई के पहले आधा बोरा यूरिया व आधा बोरा सिंगल सुपर फासफेट दें। पहली सिंचाई एक माह बाद करें तथा बाद में आधा बोरा यूरिया दो लाइनों के बीच दें। दूसरी व तीसरी सिंचाई एक माह के अंतर की जा सकती है। देसी किस्म की लहसुन की करें बुवाई लहसुन की देसी किस्म की साफ 200-300 किलोग्राम फांके 6&4 इंच दूरी पर अक्टूबर माह में लगाएं। खेत तैयार करते समय 20 टन कम्पोस्ट, आधा बोरा यूरिया, 1 बोरा सिंगल सुपर फास्फेट तथा 1 बोरा म्युरेट आफ पोटाश दें। शेष आधा बोरा यूरिया नवंबर माह में लहसुन की लाइनों के बीच डालें। पपीते को तना गलन रोग से बचाएं पपीते को तन्ना गलन रोग से बचाने के लिए खेत में पानी जमा नहीं रहने दें। रोग फैलने पर 2 ग्राम केप्टाळून प्रति लीटर पानी में घोल कर 17 दिन बाद छिडक़ाव करें। नींबू में रोगग्रस्त टहनियां काट दें फिर 0.3 प्रतिशत कॉपर-आक्सीक्लोराईड स्प्रे करें। डहलिया लगाएं, गुलाब की देखभाल करें- इस माह डहलिया को गमलों में लगाया जा सकता है। इस मौसम में इसे लगाने पर इसकी बढ़वार अच्छी होती है। गुलदाऊदी पर जल्दी आई कलियों को तोड़ देना चाहिए। इससे फूल बड़े आकार के आते हैं। गुलाब के पौधे की कांट-छांट व गुड़ाई करें। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर 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