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Over 4 crore farmers likely to opt for Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana this year: Radha Mohan Singh

Over 4 crore farmers likely to opt for Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana this year: Radha Mohan Singh

30 August, 2016

The number of farmers opting for the ‘Pradhan Mantri Fasal Bima Yojana’ this year is likely to cross four crore as compared to three crore last year, claimed Union Agriculture Minister Radha Mohan Singh.

"The scheme aims to make agricultural practice risk-free for the farmers, but the leaders in order to serve their own political agenda are not able to comprehend it."

“Earlier, crop insurance schemes profited insurance companies and farmers were not compensated for the losses due to crop damage caused by natural calamities after the harvest. Besides, premium rates differed according to location," he said.

But, this scheme is farmer-friendly. The farmers are required to pay only minimal premium and can claim compensation for losses caused by natural calamities up to 14 days after the harvest, Singh said.

He said around 200 mandis will be covered under the scheme by next month. Around 400 mandis will be available online by March next year and 585 mandis to go online by 2018, he added.

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धान में कंडुआ रोग का प्रकोप, ऐसे करें बचाव

धान में कंडुआ रोग का प्रकोप, ऐसे करें बचाव

जानें, क्या है कंडुआ रोग? और उसके लक्षण व नियंत्रण के उपाय पूर्वी उत्तरप्रदेश व बिहार के कई जिलों में धान की फसल में कंडुआ रोग देखा जा रहा है। हालांकि इस समय अधिकतर धान की फसल कट चुकी है लेकिन कई जिलों में धान की पछेती फसल तैयार होने को है लेकिन उससे पहले ही इस रोग ने फसल पर हमला बोल दिया है जिससे किसानों की मुश्किल बढ़ गई है। जानकारी के अनुसार पूर्वी उत्तर प्रदेश के बलिया, देवरिया, गोरखपुर, बनारस, चंदौली, महाराजगंज और यूपी से सटे बिहार के कैमूर जैसे जिलों में कंडुआ का प्रकोप देखा गया है। इस रोग की खासियत ये है कि जैसे-जैसे धान की फसल बढ़ती जाती है इसका असर भी बढ़ता जाता है। इस रोग से प्रभावित फसल की उत्पादन कम हो जाता है। वहीं अनाज का वजन कम हो जाता है और आगे अंकुरण में भी समस्या आती है। ये रोग उच्च आर्द्रता और जहां 25-35 सेंटीग्रेड तापमान होता है वहां पर ज्यादा फैलता है, ये हवा के साथ एक खेत से दूसरे खेत उडक़र जाता है और फसल को संक्रमित कर देता है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 क्या है कंडुआ रोग ( फाल्स स्मट ) कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार कंडुआ एक प्रमुख फफंूद जनित रोग है, जो कि अस्टीलेजनाइडिया विरेन्स से उत्पन्न होता है। इसका प्राथमिक संक्रमण बीज से होता है, इसलिए धान की खेती में बीज शोधन करना जरूरी है। इसका द्वितीय संक्रमण वायु जनित बीजाणु द्वारा होता है। यह रोग कंडुआ अक्टूबर से नवंबर तक धान की अधिक उपज देने वाली किस्मों में आता है। जिस खेत में यूरिया का प्रयोग अधिक होता है और वातावरण में काफी नमी होती है उस खेत में यह रोग प्रमुखता से आता है। धान की बालियों के निकलने पर इस रोग का लक्षण दिखाईं देने लगता है। इस रोग से धान की फसल को काफी नुकसान होता है। क्या है कंडुआ रोग के लक्षण धान वैज्ञानिकों के अनुसार धान का ये रोग बालियों के निकलने पर दिखाई देता है। इसका असर धान के दानों पर पड़ता है। यह रोग लगने पर प्रभावित दानों के अंदर रोगजनक फफूंद अंडाशय को एक बड़े कटुरुप में बदल देता है। बाद में ये दाने जैतुनी हरे रंग के हो जाते है। इस रोग के प्रकोप से दाने कम बनते है और उपज में दस से 25 प्रतिशत की कमी आ जाती है। धान को कंडुआ रोग से बचाने के उपाय धान को कंडुआ रोग से बचाने के लिए धान की बुवाई से पहले बीजों उपचारित किया जाना बेहद जरूरी है। जिस खेत में इस रोग का प्रकोप हुआ हो उस खेत से लाकर बीज कभी न बोएं। इसके अलावा बीजों को बोने से पहले उपचारित कर करें। इसके लिए सदैव प्रमाणिक बीज का ही इस्तेमाल करें। धान वैज्ञानिक के अनुसार कंडुआ रोग वाले खेतों में नमक के घोल में धान के बीज को उपचारित करना चाहिए। बीज को साफ कर सुखाने के बाद नर्सरी डालने के समय कार्जेन्डाजिम-50 के चूर्ण दो ग्राम या एक ग्राम यीरम किलोग्राम बीज दर से उपचारित कर प्रयोग किया जा सकता है। इसके बाद रोग के लक्षण दिखने पर टाईसाईक्लाजोल-75 डब्ल्यू पी पंद्रह ग्राम प्रति लीटर अथवा क्लोरोयाईनोनील-75 डब्ल्यू पी बीस ग्राम प्रति लीटर अथवा प्रोपिकोनाजोल-25डब्ल्यू पी पंद्रह ग्राम प्रतिलीटर की दर से पानी में मिलाकर प्रति एकड छिडक़ाव करना चाहिए। इस प्रकार इस रोग से धान की फसल को बचाया जा सकता है। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

जीरो टिलेज सीड मशीन : गेहूं की बुवाई में करें प्रयोग, प्रति एकड़ 4-5 हजार रुपए की बचत

जीरो टिलेज सीड मशीन : गेहूं की बुवाई में करें प्रयोग, प्रति एकड़ 4-5 हजार रुपए की बचत

जानें, कैसे होती है जीरो टिलेज मशीन से बुवाई और क्या रखें सावधानी यह समय गेहूं की बुवाई का है। इस समय कई जगह पर गेहूं की फसल की बुवाई का कार्य चल रहा है और ये अभी नवंबर माह तक जारी रहेगा। गेहूं की बुवाई के पहले किसानों को कई बार खेत की जुताई कर मिट्टी को भुरभुरा बनाने का कार्य करना पड़ता है। इसमें किसान को ट्रैक्टर से एक से लेकर तीन-चार जुताई करनी पड़ती है। इसमें उसका समय और खर्चा दोनों लगता है। यदि ट्रैक्टर किराये का हो तो ये खर्चा और भी अधिक बैठता है। इस भारी-भरकम खर्च को कैसे कम किया जाए। आज हम इसी विषय पर आपको बताने वाले हैं ताकि आपके श्रम और पैसे दोनों की बचत हो सके और उत्पादन भी अधिक हो। तो आज हम किसान भाइयों को गेहूं की बुवाई में काम आने वाली जीरो टिलेज सीड मशीन के बारे में बताएंगे कि इसका उपयोग करके आप कैसे कम समय और कम खर्च पर अधिक पैदावार प्राप्त कर सकते हैं। तो आइए जानते हैं इस मशीन के बारे में कि ये मशीन किस प्रकार हमारे किसान भाइयों के लिए मददगार साबित हो सकती है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 कैसे होती है जीरो टिलेज सीड मशीन से बुवाई जीरो टिल सीड कम फर्टी ड्रिल से गेहू की बुआई धान की कटाई के तुरंत बाद नमी का उपयोग करके बिना जुते हुए खेत में एक निश्चित गहराई मे मिट्टी के नीचे खाद तथा बीज को लाइन में बनाए गए कूड़ों में रखना इस मशीन का मुख्य कार्य है। इस मशीन में बीज बक्सा, खाद बक्सा, बीज की मात्रा सेट करनें वाला लीवर, बीज का आकार सेट करनें वाला लीवर, धरातल पहिया एवं फार मुख्य भाग होते हैं। जीरो टिलेज सीड मशीन में कम चौड़े हल लगे होते हैं। मशीन के एक भाग में बीज और दूसरे भाग में खाद होती है, जो नीचे हल तक पहुंचते हैं। करीब दो से तीन इंच की चौड़ाई में मशीन जमीन को खोदती है और उसमें बीज बो दिया जाता है। मशीन से बिना जुताई किए बुवाई होती है। जीरो टिलेज सीड मशीन से बुवाई करने से होने वाले लाभ इस मशीन से एक ही गहराई पर बीज बोने से समय पर अच्छा जमाव होता है साथ ही साथ समय की बचत भी होती है। वहीं खेत की जुताई में आने वाला खर्चा बचता है जिससे प्रति एकड़ 4 से 5 हजार रुपए की बचत होगी। लाइन में फसल होनें के कारण सिंचाई, निराई, कटाई आदि आसानी से होती है। इस मशीन की सहायता से धान व जौ की फसलों की बुवाई भी की जा सकती है। जीरो टिलेज तकनीक से बिजाई करने के बाद गेहूं की फसल पीली नहीं पड़ती और न ही गिरती है साथ ही बारिश में पपड़ी नहीं बनती। जीरो टिलेज मशीन में बीज, खाद नापने की आधुनिक तकनीक दी गई है ताकि सीड व खाद बराबर मात्रा खेत में गिरे। जीरो टिलेज सीड मशीन के उपयोग में क्या रखें सावधानियां बीज और खाद पूर्व निर्धारित स्थान पर ही बोए जाने चाहिए तथा नलियों में कोई रूकावट नहीं होनी चाहिए ताकि बीज या खाद गिरने में आसानी रहे। बुआई के समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि मशीन को मोड़ते समय उसकी फालियां ऊपर उठी हो अन्यथा इसमें टूट फूट हो सकती है। खेत में कम नमी होने की दशा में हल्का पाटा लगाएं और फिर बुवाई करें। यदि खेत के शुष्क होने की संभावना हो तो धान की कटाई से पूर्व हल्की सिंचाई कर देना चाहिए। उचित नमी पर बुआई करने पर अच्छा जमाव होता है। बुवाई करते समय बीज की गहराई 3-5 सेमी. रखनी चाहिए। जीरो टिलेज सीड मशीन का प्राप्ति स्थान, कीमत व सब्सिडी यह मशीन कृषि यंत्र विक्रय केन्द्रों पर मिल जाती है। मशीन को किराए पर भी लिया जा सकता है। इसके अलावा राज्य सरकारे भी अनुदान पर इसे किसानों को उपलब्ध कराती है। इस पर सरकार की ओर से 50 प्रतिशत सब्सिडी तक मिलती है। यह सब्सिडी अलग-अलग राज्यों के नियमानुसार अलग-अलग हो सकती है। अब बात करें इसकी कीमत की तो इसकी अनुमानित कीमत 40 हजार रुपए से लेकर 55 हजार रुपए हो सकती है। जीरो टिलेज सीड मशीन की अधिक जानकारी के लिए यहां क्लिक करें अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

न्यूनतम समर्थन मूल्य : केरल में सब्जियों व फलों का भी एमएसपी घोषित

न्यूनतम समर्थन मूल्य : केरल में सब्जियों व फलों का भी एमएसपी घोषित

राज्य सरकार ने 16 सब्जियों का न्यूनतम समर्थन मूल्य किया तय भारत में पहला एक मात्र राज्य केरल है जिसने केंद्र सरकार की ओर से हर वर्ष जारी किए जाने वाले प्रमुख अनाज व तिलहन फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की तर्ज पर सब्जियों का न्यूनतम आधार मूल्य तय करने की पहल की है। इसके पीछे कारण यह है कि राज्य सरकार चाहती है कि सब्जियों का न्यूनतम आधार मूल्य तय हो ताकि सब्जियों की खेती करने वाले किसान को कम दाम पर अपनी उपज नहीं बेचनी पड़े। यह एक तरीका निकाला गया है किसान की आय बढ़ाने का। केरल राज्य ने इसकी शुरुआत भी कर दी है। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 16 सब्जियों का आधार मूल्य तय जानकारी के अनुसार केरल राज्य सरकार ने 16 सब्जियों का आधार मूल्य तय किया है। इसके अनुसार उत्पादन लागत से 20 प्रतिशत अधिक पर इन सब्जियों का विक्रय होगा ताकि किसान को लागत निकलने के साथ ही मुनाफा हो सके। मीडिया में प्रकाशित जानकारी के मुताबिक केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने बताया कि यह योजना एक नवंबर से प्रभावी होगी। योजना की ऑनलाइन शुरुआत करते हुए, उन्होंने कहा कि यह पहला मौका है जब केरल में उत्पादित 16 किस्मों की सब्जियों के लिए आधार कीमत तय की गई है। उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य द्वारा यह पहली ऐसी पहल है, जो किसानों को राहत और सहायता प्रदान करेगी। एक सरकारी विज्ञप्ति में मुख्यमंत्री के हवाले से कहा गया है कि सब्जियों का आधार मूल्य, उनकी उत्पादन लागत से 20 प्रतिशत अधिक होगा। यहां तक कि अगर बाजार मूल्य इससे नीचे चला जाता है, तो किसानों से उनकी उपज को आधार मूल्य पर खरीदा जाएगा। सब्जियों की गुणवत्ता पर तय होगा आधार मूल्य मुख्यमंत्री ने कहा कि सब्जियों को गुणवत्ता के अनुसार वर्गीकृत किया जाएगा और आधार मूल्य उसी के हिसाब से तय किया जाएगा। उन्होंने कहा कि देश भर के किसान संतुष्ट नहीं हैं, लेकिन पिछले साढ़े चार साल से हमने उनका समर्थन किया है। सरकार ने राज्य में कृषि को विकसित करने के लिए कई लक्षित पहल की हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी दावा किया कि केरल में पिछले साढ़े चार साल में सब्जी उत्पादन दुगुना हो गया है। इस दौरान सब्जियों का उत्पादन सात लाख टन से बढक़र 14.72 लाख टन हो गया है। अभी तक इन सब्जियों व फलों का आधार मूल्य हुआ तय केरल सरकार ने कुल 21 खाने-पीने की चीजों के लिए एमएसपी तय किए हैं। राज्य में तापियोका का एमएसपी 12 रुपए प्रति किग्रा तय किया गया है। वहीं, केला 30 रुपए, अन्नास 15 रुपए प्रति किग्रा और टमाटर का एमएसपी 8 रुपए प्रति किग्रा तय किया गया है। किसानों की लागत खर्च से 20 फीसदी ऊपर दर पर एमएसपी तय की गई है। इसी प्रकार अन्य सब्जियों व फलों के एमएसपी तय किए जा रहे हैं। सब्जियों के यह एमएसपी 1 नवंबर से राज्य में लागू होंगे। इस योजना के तहत केरल सरकार 1000 स्टोर भी खोलेगी। सब्जियों व फलों का एमएसपी तय होने पर किसानों को होगा ये लाभ केरल के मुख्यमंत्री पी. विजयन द्वारा मीडिया को बताए गए अनुसार यह योजना किसानों को आर्थिक तौर पर और ज्यादा मजबूत बनाएगी। सब्जियों का आधार मूल्य उनकी उत्पादन लागत से 20 फीसदी अधिक रखा जाएगा। यदि बाजार मूल्य इससे नीचे चला भी जाता है, तो चिंता की बता नहीं है। किसानों से उनकी उपज को आधार मूल्य पर ही खरीदा जाएगा। हालांकि सब्जियों को क्वालिटी के अनुसार बांटा जाएगा और आधार मूल्य उसी हिसाब से लगाया जाएगा। वहीं केरल के कृषि विशेषज्ञ जी. जनार्दन कहते हैं कि न्यूनतम मूल्य तय होने से किसान फल-सब्जियां उगाने के लिए प्रेरित होंगे। उन्हें यह भरोसा मिलेगा कि वे अपनी उपज का एक निश्चित मूल्य हासिल करेंगे। उनकी आमदनी बढ़ेगी जिससे वे इनके भंडारण पर भी ज्यादा रकम खर्चा कर पाएंगे। झारखंड राज्य भी लागू करेगा यही सिस्टम केरल राज्य की देखादेखी अब झारखंड भी नाराज किसानों के हित में यही सिस्टम अपने लागू करने जा रहा है। इसको लेकर सरकार में मंथन किया जा रहा है। मीडिया में प्रकाशित जानकारी के मुताबिक, किसानों को उनकी फसल का उचित मूल्य दिलाने और उन्हें बिचौलियों से मुक्त कराने के लिए झारखंड सरकार भी सब्जियों का न्यूनतम समर्थन मूल्य तय करने जा रही है। इसके लिए केरल, कर्नाटक समेत अन्य राज्यों के ड्राफ्ट का अध्ययन कर रिपोर्ट मंगवाई गई है। इस रिपोर्ट के आधार पर ही सब्जियों की एमएसपी तय की जाएगी। झारखंड के कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग के सचिव अबु बकर सिद्दीक के मुताबिक, झारखंड सरकार सब्जियों की एमएसपी तय करने को लेकर गंभीर है, ताकि किसानों को औने-पौने दामों में अपनी फसल को न बेचना पड़े। उन्होंने माना कि सब्जियों के लिए एमएसपी सिस्टम लागू करने से पहले उन्हें बहुत तैयारी करनी होगी और सब्जियों के रखरखाव के लिए बड़े पैमाने पर कोल्ड स्टोरेज की भी व्यवस्था करनी होगी। ये राज्य भी कर रहे है इस योजना को लागू करने पर विचार कर्नाटक सरकार भी ऐसी मांग पर विचार कर रही है। वहीं, पंजाब में किसान ऐसी मांग कर रहे है। महाराष्ट्र में अंगूर, टमाटर, प्याज जैसी फसलों के किसान भी एमएसपी की मांग कर रहे हैं। पंजाब के किसान संगठनों ने हाल में राज्य सरकार से सब्जियों और फलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करने की मांग की है। इन सबसे ऊपर केरल राज्य सब्जियों के लिए न्यूनतम मूल्य तय करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

किसान संगठित होकर बनाएं एफपीओ, सरकार से मिलेगी 15 लाख की मदद

किसान संगठित होकर बनाएं एफपीओ, सरकार से मिलेगी 15 लाख की मदद

जानें, क्या है एफपीओ और उसकी शर्तें और नियम केंद्र सरकार के निर्देशानुसार प्रत्येक राज्य में एफपीओ यानि किसान उत्पादक संगठन बनाए जा रहे हैं। मोदी सरकार की मंशा के अनुसार साल 2024 तक देश में करीब 10 हजार एफपीओ जाने प्रस्तावित हैं। बता दें कि केंद्र सरकार ने अच्छे रेटिंग वाले प्रत्येक एफपीओ को तीन साल में 15-15 लाख रुपए की मदद देने का ऐलान किया हुआ है। इस दिशा में हरियाणा सरकार ने केंद्र सरकार द्वारा दिया गया टारगेट पूरा करते हुए राज्य में 500 एफपीओ बनाए हैं। इस संबंध में प्रदेश के कृषि मंत्री जेपी दलाल ने मीडिया को बताया कि एफपीओ एक ऐसी व्यवस्था है जो किसानों से फल, सब्जी, फूल, मछली व बागवानी से संबंधित फसलों को खरीदकर सीधे कंपनियों को बेचा जाता है। इसमें किसान जुड़े होते हैं और उन्हें अधिक आय प्राप्त होती है। इन एफपीओ से अब तक प्रदेश के लगभग 80,000 किसान जुडक़र लाभ प्राप्त कर रहे हैं। राज्य सरकार द्वारा एफपीओ का ग्रेडेशन करने का कार्य भी शुरू कर दिया गया है। अब शानदार कार्य करने वाले एफपीओ को स्टार रेटिंग भी दी जाएगी। प्रदेश के 90 एफपीओ ऐसे हैं जिन्होंने अपने कार्यालय भी स्थापित कर लिए हैं। सबसे पहले सरकार की सभी योजनाओ की जानकारी के लिए डाउनलोड करे, ट्रेक्टर जंक्शन मोबाइल ऍप - http://bit.ly/TJN50K1 क्या है एफपीओ / किसान उत्पादक समूह ? किसान उत्पादक संगठन, असल में यह किसानों का एक समूह होता है, जो वास्तव में कृषि उत्पादन कार्य में लगा हो और कृषि व्यावसायिक गतिविधियां चलाने में एक जैसी धारणा रखते हो, एक गांव या फिर कई गांवों के किसान मिलकर भी यह समूह बना सकते हैं। यह समूह बनाकर संगत कंपनी अधिनियम के तहत एक किसान उत्पादक कंपनी के तौर पर पंजीकरण के लिए आवेदन कर सकते हैं। किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) के माध्यम से जहां किसान को अपनी पैदावार के सही दाम मिलते हैं, वहीं खरीदार को भी उचित कीमत पर वस्तु मिलती है। वहीं यदि अकेला उत्पादक अपनी पैदावार बेचने जाता है, तो उसका मुनाफा बिचौलियों को मिलता है। एफपीओ सिस्टम में किसान को उसके उत्पाद के भाव अच्छे मिलते हैं, उत्पाद की बर्बादी कम होती है, अलग-अलग लोगों के अनुभवों का फायदा मिलता है। यह शर्तें पूरी करने पर मिलेगी 15 लाख रुपए की सहायता मीडिया में प्रकाशित खबरों के अनुसार राष्ट्रीय किसान महासंघ के संस्थापक सदस्य विनोद आनंद ने बताया कि सबसे पहले अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने एफपीओ बनाने के लिए जाने माने अर्थशास्त्री डॉ. वाईके अलघ के नेतृत्व में एक कमेटी बनाई थी। इसके तहत कम से 11 किसान संगठित होकर अपनी एग्रीकल्चर कंपनी या संगठन बना सकते हैं। अगर संगठन मैदानी क्षेत्र में काम कर रहा है तो कम से कम 300 किसान उससे जुड़े होने चाहिए। यानी एक बोर्ड मेंबर पर कम से कम 30 लोग सामान्य सदस्य होना जरूरी है। पहले यह संख्या 1000 थी। वहीं पहाड़ी क्षेत्र में एक कंपनी के साथ 100 किसानों का जुडऩा जरूरी है। उन्हें कंपनी का फायदा मिल रहा हो। नाबार्ड कंस्ल्टेंसी सर्विसेज आपकी कंपनी का काम देखकर रेटिंग करेगी, उसके आधार पर ही ग्रांट मिलेगी। इसके अलावा बिजनेस प्लान देखा जाएगा कि कंपनी किस किसानों को फायदा दे पा रही है। वो किसानों के उत्पाद का मार्केट उपलब्ध करवा पा रही है या नहीं। कंपनी का गवर्नेंस कैसा है। बोर्ड ऑफ डायरेक्टर कागजी हैं या वो काम कर रहे हैं। वो किसानों की बाजार में पहुंच आसान बनाने के लिए काम कर रहा है या नहीं। अगर कोई कंपनी अपने से जुड़े किसानों की जरूरत की चीजें जैसे बीज, खाद और दवाइयों आदि की कलेक्टिव खरीद कर रही है तो उसकी रेटिंग अच्छी हो सकती है। क्योंकि ऐसा करने पर किसान को सस्ता सामान मिलेगा। एफपीओ से किसानों को क्या होगा लाभ यह एक सशक्तिशील संगठन होने के कारण एफपीओ के सदस्य के रूप में किसानों को बेहतर सौदेबाजी करने की शक्ति देगी जिसे उन्हें जिंसों को प्रतिस्पर्धा मूल्यों पर खरीदने या बेचने का उचित लाभ मिल सकेगा। बेहतर विपणन सुअवसरों के लिए कृषि उत्पादों का एकत्रीकरण। बहुलता में व्यापार करने से प्रसंस्करण, भंडारण, परिवहन इत्यादि मदों में होने वाले संयुक्तखर्चों से किसानों को बचत होगी। एफपीओ मूल्य संवर्धन के लिए छंटाई/ग्रेडिंग, पैकिंग, प्राथमिक प्रसंस्करण इत्यादि जैसे गतिविधियां शुरू कर सकता है जिससे किसानों के उत्पादन को उच्चतर मूल्य मिल सकता है। एफपीओ के गठन से ग्रीन हाउस, कृषि मशीनीकरण, शीत भंडारण, कृषि प्रसंस्करण इत्यादि जैसे कटाई पूर्व और कटाई बाद संसाधनों के उपयोग में सुविधा रहेगी। एफपीओ आदान भंडारों, कस्टम केन्द्रों इत्यादि को शुरू कर अपनी व्यवसायिक गतिविधियों को विस्तारित कर सकते हैं। जिससे इसके सदस्य किसान आदानों और सेवाओं का उपयोग रियायती दरों पर ले सकते हैं। एफपीओ किसान उत्पादक संगठन के गठन के लिए कहां से मिलेगी मदद एफपीओ का गठन और बढ़ावा देने के लिए आप तीन संस्थाओं से मदद ले सकते हैं। इनमें लघु कृषक कृषि व्यापार संघ, राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक व राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम शामिल हैं। एफपीओ गठित करने के इच्छुक किसानों को विस्तृत जानकारी के लिए संबंधित विभाग/ लघु कृषक कृषि व्यवसाय संगठन के निदेशक ( ई- मेल: [email protected]) से संपर्क कर सकते हैं। एफपीओ के लिए कैसे करा सकते हैं ऑनलाइन पंजीकरण / किसान उत्पादक संगठन पंजीकरण पंजीकरण के लिए सबसे पहले http://www.upagriculture.com पर जाएं और पंजीकरण लिंक पर क्लिक करें। एक नया पेज खुलेगा जिसमें आपको ऑनलाइन पंजीकरण लिंक पर क्लिक करें। अब आपके सामने एक फार्म खुलेगा, जिसमें मांगी गई सभी जानकारी भरें। सभी जानकारी पूरी तरह भरने के बाद सबमिट बटन पर क्लिक कर दें। इस प्रकार आपका पंजीकरण हो जाएगा। यदि आप अपनी रिपोर्ट देखना चाहते है तो पंजीकरण रिपोर्ट लिंक पर क्लिक कर देख सकते है। अगर आप अपनी कृषि भूमि, अन्य संपत्ति, पुराने ट्रैक्टर, कृषि उपकरण, दुधारू मवेशी व पशुधन बेचने के इच्छुक हैं और चाहते हैं कि ज्यादा से ज्यादा खरीददार आपसे संपर्क करें और आपको अपनी वस्तु का अधिकतम मूल्य मिले तो अपनी बिकाऊ वस्तु की पोस्ट ट्रैक्टर जंक्शन पर नि:शुल्क करें और ट्रैक्टर जंक्शन के खास ऑफर का जमकर फायदा उठाएं।

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